परमाणु बम बहुत ही घातक होता है। यह विश्व का सबसे खतरनाख अस्त्र है। वर्तमान में इतने परमाणु बम है की पृथ्वी को कई बार नस्ट किया जा सकता है। यह हथियार कुछ ही देशो के पास है। सबसे अधिक अमेरिका के पास यह अस्त्र है।
परमाणु बम क्या है
परमाणु बम एक अत्यंत शक्तिशाली विस्फोटक हथियार है, जिसकी ऊर्जा परमाणु नाभिक में होने वाली नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न होती है। इसमें बहुत कम मात्रा में पदार्थ से अत्यधिक ऊर्जा निकलती है, जिसके कारण इसका विस्फोट सामान्य पारंपरिक बमों की तुलना में बहुत अधिक विनाशकारी होता है।
परमाणु बम मुख्य रूप से नाभिकीय विखंडन के सिद्धांत पर आधारित होता है। इसमें भारी परमाणु नाभिक, जैसे यूरेनियम या प्लूटोनियम के कुछ समस्थानिक, विभाजित होते हैं। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा तथा न्यूट्रॉन निकलते हैं। ये न्यूट्रॉन अन्य नाभिकों को विभाजित करते हैं और एक श्रृंखलाबद्ध अभिक्रिया शुरू हो जाती है। बहुत कम समय में अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होने से शक्तिशाली विस्फोट होता है।
परमाणु बम के विस्फोट से केवल तेज धमाका ही नहीं होता, बल्कि अत्यधिक ताप, प्रकाश, दबाव और विकिरण उत्पन्न होते हैं। इसके कारण बड़े क्षेत्र में इमारतें नष्ट हो सकती हैं और जीव-जंतुओं तथा पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विस्फोट के बाद बचा हुआ रेडियोधर्मी पदार्थ लंबे समय तक पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान परमाणु बम का पहली बार युद्ध में प्रयोग किया गया। वर्ष 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए गए। इन घटनाओं में भारी जनहानि हुई और परमाणु हथियारों के विनाशकारी प्रभाव पूरी दुनिया के सामने आए।
आज परमाणु हथियारों को विश्व के सबसे विनाशकारी हथियारों में माना जाता है। इनके प्रसार को रोकने और इनके उपयोग से होने वाली मानवीय तथा पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रयास किए जाते हैं। परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग बिजली उत्पादन और वैज्ञानिक अनुसंधान में भी किया जाता है, लेकिन परमाणु हथियारों का उपयोग मानवता के लिए अत्यंत गंभीर खतरा माना जाता है।
परमाणु बम का आविष्कार किसने किया
परमाणु बम का आविष्कार किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया था, बल्कि यह कई वैज्ञानिकों के लंबे शोध और सामूहिक प्रयास का परिणाम था। परमाणु बम के विकास का श्रेय मुख्य रूप से मैनहट्टन परियोजना को दिया जाता है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने शुरू किया था।
इस परियोजना के वैज्ञानिक निदेशक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर थे। उन्हें अक्सर परमाणु बम के जनक के रूप में जाना जाता है। उनके नेतृत्व में अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने परमाणु विखंडन पर आधारित हथियार विकसित किया।
परमाणु बम के वैज्ञानिक आधार में ओटो हान, लिसे माइटनर, फ्रिट्ज स्ट्रासमैन, एनरिको फर्मी और लियो स्ज़ीलार्ड जैसे वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान था। 1938 में परमाणु विखंडन की खोज ने परमाणु हथियार के विकास का वैज्ञानिक आधार तैयार किया।
मैनहट्टन परियोजना के अंतर्गत पहला परमाणु परीक्षण 16 जुलाई 1945 को अमेरिका के न्यू मैक्सिको में किया गया। इस परीक्षण को ट्रिनिटी टेस्ट कहा गया। इसके बाद अगस्त 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए।
इस प्रकार, परमाणु बम को किसी एक वैज्ञानिक का आविष्कार कहना सही नहीं होगा। यह अनेक वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास का परिणाम था, जिसमें ओपेनहाइमर का नेतृत्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।
परमाणु बम रखने वाले देश
दुनिया में कुछ देशों के पास परमाणु हथियार हैं। परमाणु हथियारों को किसी देश की सैन्य शक्ति और रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वर्तमान में आमतौर पर नौ देशों को परमाणु हथियार रखने वाला माना जाता है। इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल शामिल हैं।
रूस और अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडार हैं। दोनों देशों के पास बड़ी संख्या में परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने में सक्षम मिसाइल तथा अन्य प्रणालियाँ हैं। ब्रिटेन और फ्रांस भी लंबे समय से परमाणु हथियार रखने वाले देश हैं और इन्हें आधिकारिक परमाणु-हथियार संपन्न देशों में गिना जाता है।
चीन ने भी पिछले कुछ वर्षों में अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार किया है। भारत और पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण किए और इसके बाद दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के रूप में स्थापित हुए। भारत अपनी परमाणु नीति में न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता और जिम्मेदार परमाणु व्यवहार पर जोर देता है।
उत्तर कोरिया ने कई परमाणु परीक्षण किए हैं और स्वयं को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित किया है। वहीं इज़राइल ने आधिकारिक रूप से अपने परमाणु हथियारों की पुष्टि या खंडन नहीं किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और शोध संस्थान उसे परमाणु हथियार रखने वाला देश मानते हैं।
परमाणु हथियार रखने वाले देशों को सामान्यतः दो समूहों में देखा जाता है। परमाणु अप्रसार संधि के तहत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को आधिकारिक परमाणु-हथियार संपन्न राज्य माना जाता है। भारत, पाकिस्तान और इज़राइल ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि उत्तर कोरिया ने बाद में NPT से बाहर निकलने की घोषणा की थी।
परमाणु हथियारों की अत्यधिक विनाशकारी क्षमता को देखते हुए इनके प्रसार को रोकना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियार नियंत्रण तथा निरस्त्रीकरण के प्रयास करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
परमाणु बम का इतिहास
1915 के आसपास, वैज्ञानिको को यह विचार आया कि विशेष परमाणुओं को तोड़ने से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकल सकती है और इसका उपयोग बम बनाने के लिए किया जा सकता है।
1939 में, भौतिक वैज्ञानिको ने परमाणु विखंडन हथियार बनाने के कार्य में लग गए। लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली थी। जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ। जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य परमाणु हथियार बनाना चाहते थे। जर्मनी ने पहली सफलता प्राप्त किया। क्योंकि इस समय तक नाजी शासन शुरू होने के बाद भौतिकी का अध्ययन करने वाले कई सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक जर्मनी आ गए।
यूनाइटेड किंगडम ने 1939 में परमाणु हथियार पर कार्य शुरू किया। इसमें बहुत अधिक पैसा लग गया। फिर उन्होंने 1942 में इस पर रोक लगा दिया।
कुछ साल बाद अमेरिका ने परमाणु हथियार बनाने के लिए एक बहुत बड़े कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम को "मैनहट्टन प्रोजेक्ट" कहा गया। अगस्त 1945 तक, मैनहट्टन परियोजना ने तीन परमाणु विखंडन हथियार बनाए।
दो बमों का इस्तेमाल अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर हमला करने के लिए किया था। इसके परिणाम स्वरुप लगभग 105,000 लोग मारे गए थे और 94,000 लोग आहत हुए थे। जापान ने हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम विस्फोटों के बाद अपने आत्म समर्पण की घोषणा की।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, सोवियत संघ ने भी परमाणु हथियार बनाने के लिए काम करना शुरू कर दिया।
परमाणु बम भारत में किसने बनाया?
भारत में परमाणु बम बनाने की क्षमता विकसित करने का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि देश के अनेक वैज्ञानिकों और संस्थानों के सामूहिक प्रयास को दिया जाता है। भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखने वाले प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा थे। उन्होंने भारत में परमाणु ऊर्जा अनुसंधान को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च तथा परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में योगदान दिया।
भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम को मुख्य रूप से शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उद्देश्य से विकसित किया, लेकिन बाद में देश ने परमाणु हथियार बनाने की क्षमता भी हासिल की। भारत का पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में किया गया था। इसे स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया था। इस परियोजना में कई वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने योगदान दिया।
भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों में डॉ. राजा रामन्ना का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण की वैज्ञानिक टीम के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसके बाद भारत ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में कई परमाणु परीक्षण किए, जिन्हें पोखरण-II के नाम से जाना जाता है। इन परीक्षणों के दौरान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और डॉ. आर. चिदंबरम सहित अनेक वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस प्रकार, यह कहना अधिक सही है कि भारत ने परमाणु बम किसी एक वैज्ञानिक ने नहीं बनाया था, बल्कि यह कई दशकों तक चले वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम था। भारत का परमाणु कार्यक्रम आज भी देश की रणनीतिक और ऊर्जा संबंधी क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
