General knowledge




Saturday, November 23, 2019

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दोस्त आपका स्वागत है मैं ये जानकारी आपके लिए इसलिए लिख रहा हु की आप किसी भी के पास धोखा ना खाये और पैसे बर्बाद ना करे क्योंकि आप जो मेहनत करते है आपको ही पता होता है की कितनी मेहनत के बाद ही पैसे आते है।

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नकली मोबाइल की पहचान कैसे करें

दोस्तों मैं एक बार खुद ऐसे लोगों के झासे में आ गया था और मैं भी धोखा से उस मोबईल को ले लिया था। उस मोबाइल को मेरे को samsung j7 prime है करके बताया गया था और मेरे द्वारा भी चेक करने पर उसमें J7 prime लिखा था और दोस्तों उस मोबाइल का बिल भी मुझे पेस किया गया था दोस्त उस समय मुझे ये मालूम नहीं था की मोबाइल का भी कोई लोग डुब्लीकेट व्यपार करते हैं जब मैंने उन लोगों से पूछा तो उन्होंने ने भी बताया की इसमे 4G चलेगा करके लेकिन दोस्त उस समय इतना भी दिमाग में नहीं आया की इसको अच्छे से चेक किया जाये। क्योकि जब अगर आपके पास सबूत के तौर पर पूरी रसीद हो तो आप तो उसे सहीं ही समझेंगे ना ! उन लोगो ने मुझे धोखा दिया और मैं चाहता हु की आप भी किसी से मेरी तरह धोखे में ना फसे क्योकि आज के समय में लोगो को पैसे कमाने के लिए यहीं आसान तरीका लगता है लेकिन दोस्त याद रखना जो लोग धोखे देते हैं वो कभी भी सुखी नहीं होते है क्योकि आप किसी को धोखा दोगे तो आपको भी एक ना एक दिन कोई धोखा जरूर देगा।

दोस्त लोग तो यहीं कहेंगे की आपको इसकी समझ नहीं थी तो हमसे पूछ लेते लेकिन मैं बस इतना कहूँगा की अगर आप भी उस मोबाइल को देखेंगे तो आप भी कहेंगे की ये samsung का J7 prime ही है क्योकि इसको अगर आप ऊपर से और अंदर से देखते हैं तो आपको ये पता ही नही चलेगा ये हुबहु उससे मिलता जुलता model है। आपको रसीद को देख कर ही विश्वास हो जायेगा की ये मोबाइल सहीं है या नहीं आप तो जानते ही है की प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत क्या। लेकिन दोस्त बात यहीं पर खत्म नहीं होती कि लोग आपको यहीं कहकर छोड़ देते है लोग आपको पूर्ण रूप से आस्वस्त करने की कोसिश जरूर करते है। लेकिन आपको इन सब चिजों पर ध्यान नहीं देना बस आपको इतना याद रखना है की आपको कोई ठग ना सके।

तो चलिए मैं आपको बताता हूँ की कैसे लो ठग जाते है-
1. तुरन्त भरोसा कर लेते हैं उनकी मीठी मीठी बातों पर ये सबसे बड़ी गलती है।
2. रसीद दखाते ही सच मान लेते हैं।
3. अब मोबाइल को देख कर उत्साहित हो जाते हैं।
4. आपको लगता है आपको इससे अच्छा कम दर पर और कहीं मोबाईल नहीं मिलेगा।
5. आपको लेने से पहले नेट में चेक करके भी वो बताते है और आप सच मान लेते हैं लेकिन सच तो ये है की आपको वो गलत सामान बेच रहे है और नेट पर आपको सहीं समान दिखा रहें है।
6. वो आपको फूल प्रूफ बताते है और की ये माडल सहीं में SAMSUNG का है करके इसलिए लोग उनकी बातों में आ जाते हैं।
7. सस्ते में देने की बात करते है और ज्यादा दिन लिए नहीं हुआ है करके बताते हैं इसलिए आपको वे भरोसे करने लायक लगते हैं।

तो चलिए अब बाते करते हैं की कैसे उस मोबाइल का पर्दा फास करना है-
1. सबसे पहले आप मोबाइल का स्विच ऑन करते है आपको उस मोबाइल का माडल और कम्पनी का नाम बताता है। लेकिन क्या ये सहीं में इस कम्पनी का हो सकता है। इससे ये साबित नही होता की वो मोबाइल सहीं में उस कंपनी है क्योकि इसको चेंज किया जा सकता है। अब आप को लगता होगा कैसे अरे यार मोबाइल को रूट करके या उसमें अन्य किसी प्रकार का साफ्टवेयर डालकर तो ठीक है इससे आपको प्रूफ नहीं मिलता की वो मोबाइल आप जो सोच रहे हो उसी कम्पनी का है।

2. इसे चेक करने के लिए आपको सबसे पहले मोबाइल के सेटिंग में जाना होगा फिर आपको उसका अबॉउट फोन वाले ऑप्सन में जाना है। अब यहां आपको चेक करना है की ये किस मोडल का है किस कम्पनी का है। याद रखें दोस्तों आपको यहां पर उस मॉडल का नाम तो मिल जाता है जो आप सोच रहे हो लेकिन क्या आपको इससे प्रूफ होता है की सच में उसी मोडल का है। नहीं इससे ये फ्रूफ नहीं होता है। क्योकि ये भी चेंज किया जा सकता है। या वहीं मॉडल नाम डाला जा सकता है जिसे आप ढुंढ रहें हैं।

3. अब आपको चेक करने के लिए क्या बचता है एंडरॉयड वर्जन ना लेकिन ये तो अपडेट भी किया जा सकता है। या आपको जिस वाले वर्ज़न की तलास हो या आप उस मॉडल में जिस वर्जन को जानते है उसी को डाला जा सकता है।

4. सबसे पहले तो आप कंपनी का लोगो चेक करें और समझे की सहीं मायने में ये कम्पनी का ही लोगो तो है ना आपको नकली मोबाइल में कुछ ना कुछ फर्क जरूर दिखेगा। लेकिन इससे भी आपको दोखा हो सकता है। क्योकि आज कल ऐसे ऐसे मशीन आ गए है जो सेम टु सेम आपको वैसा ही लोगो बना कर दिखा देता है।
बस हम लोग यहीं तक चेक करते है और मान लेते हैं की सच में ये उसी मॉडल का मोबाइल है जिसे मेरे पास वह आदमी बेच रहा है उसी ने लिया है और क्योकि रसीद में भी उसी का नाम होता है। इस कारण धोखा हो जाता है।
तो चलिए मैं आपको बताता हूँ की कैसे ये कन्फर्म होगा ही ये उसी मॉडल का उसी कम्पनी का मोबाइल है। जिसे आप लेना चाहते है और वह आदमी आपको उसी मॉडल है करके बेच रहा है।

1. आप मोबाइल के अबाउट फोन में जाये और Build number को चेक करें अगर सहीं मोबाइल होगा तो आपको Build number में आपका मोबाइल का मॉडल नम्बर होगा। इसके साथ और कुछ नंबर हो सकते हैं। लेकिन ये कन्फर्म है की मॉडल नम्बर जरूर होगा। आप इस नम्बर को मॉडल नम्बर से मैच करें।  यहां मिस्टेक पकड़ा जायेगा।

2. आपको और चेक करना है तो आप उसी अबाउट फोन की सेटिंग में जाकर सबसे लास्ट में build number ही होता है अगर उसमें Custom build version हो  तो उसमें भी आप देख सकते हैं उसमें आपके जिस मोबाइल कम्पनी ने उसे बनाया है उसका नाम उसमे होता ये चेंज नहीं हो सकता। आप जैसे की सेमसंग का मोबाइल देख रहें है तो उसमें सेमसंग का नाम होगा उसके बाद नंबर होगा। यदि नहीं है तो वो हेनसेट नहीं है जिसे आप लेना चाहते हैं।

3. आप इसके बाद ये प्रूफ करें की इसका IMEI number सहीं है या नहीं इसे अपने रसीद से मिलान करके चेक कर सकते हैं। अगर नहीं मिला तो जान ले की ये वो मॉडल नहीं है या ये मोबाइल तो उसी मॉडल या कम्पनी का है लेकिन इसके फीचर सेम नहीं होंगे इस तरह आप यहा धोखा खाने से बच सकते हैं। क्योकि आज कल IMEI number को भी चेंज किया जा सकता है। और जाहिर सि बात है जिसको कम्पनी से लेना नहीं पड़ता है बल्कि कम्पनी के मोबाइल खराब होने पर उसे अन्य मोबाइल पर ट्रांसफर किया जा सकता है।
यहीं तरीका बेस्ट तरीका है आपके मोबाइल के सहीं पहचान का अगर कुछ खराबी के कारण ये बदलना पड़ा कहे तो आप उसे ना मानें। हालांकि आपको उसी मॉडल का IMEI number होता है लेकिन रसीद से अगर गलत हुआ तो है।

4. अब आपको एक और आसान सा तरीका बताता हूँ आप मोबाइल का मेंनु में जा के कैमरे में एक फोटो लें और उसका डिटेल चेक करें इसमें आपको मॉडल और मेकर मिलेगा जिसमें आपके मेकर में कम्पनी का नाम होता है और मॉडल में कम्पनी के नाम के साथ मॉडल नम्बर होता है। अगर सिर्फ मॉडल नम्बर है तो फ्रॉड है। कम्पनी का नाम जिस कम्पनी का आप मोबाइल लेना चाहते हैं उसे ही यहा चेक करें और मॉडल नम्बर के साथ कम्पनी का नाम अवश्य जुड़ा होता है। अगर नहीं है तो बिल्कुल फ्रॉड है।

5. आपको एक और बात बताता हूँ आप यदि नए मोबाइल किसी नॉन रिटेलर के पास से ले रहे हो तो आपको ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए और एक बात अगर सम्भव हो तो उस मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एक एप्प जरूर इंस्टॉल करें जो प्ले स्टोर में CPU-Z के नाम से है।
  इस एप्प के माध्यम से भी आप चेक कर सकते हैं की यह मोबाइल किस कम्पनी का है और इसमें कौन से प्रोशेशर, CPU का प्रयोग हुआ है आदि इसमें बहुत सारे जानकारी होते हैं।

www.Rexgin.in


तो दोस्तों ये तो थी मेरे हिसाब से मोबाइल के फ्रॉड होने या कम्पनी के फ्रॉड होने की पहचान करने की बात अगर आपको इससे सम्बंधित और भी जानकारी हो तो मुझसे कमेन्ट के माद्यम से शेयर कर सकते है जिससे बहुत सारे लोग इस प्रकार के ठगी से बच सकते हैं।
दोस्तों इसे शेयर जरूर करें जिससे ये जानकारी दूसरों तक भी पहुंच सके ।

Friday, November 22, 2019

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साथीयों आपका फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने बात किया कटिंग औजार चीजल के बारे में और और उसी क्रम में अब में आपको कटिंग टूल्स के दूसरे प्रकार के बारे में बताने जा रहा हूँ जो की इस प्रकार है-
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कटिंग टूल्स रेती क्या है ?

धातु के बने किसी प्रकार के जॉब को आवश्यकता के अनुसार आकार ( चौकोर , गोल या कोणीय ) देने के लिए इस औजार का प्रयोग किया जाता है। इसे फाइल कहा जाता है।  यह एक प्रकार का ऐसा औजार है जिसमें की कई कटिंग पॉइंट होते हैं।  और इसके द्वारा धातु को कई छोटे-छोटे कोण में काटा जाता है या फिर यूं कहें की घिसा जाता है। इस औजार की खास बात ये है की इस औजार द्वारा किसी जॉब को काटने के लिए जॉब को घिसा जाता है ना कि उस पर जोर जोर से प्रहार किया जाता है। इस औजार के निम्न मुख्य भाग होते हैं जो की इसे किसी धातु को काटने में मदद करता है-





(1.) हैंडल ( Handle ) , (2.) Tang , (3.) Ferrale , (4.) Shoulder, (5.) Heel , (6.) Edge , (7.) Side , (8.) Tip or Point.
रेती के जिस भाग पर लकड़ी का हैंडल लगाया जाता है उस भाग को ही Tang कहा जाता है। इसके साईड ( Side ) तथा Edge पर तिरछी लाईन में झुके हुए कटिन बने होते हैं और साइड के जिस भाग पर कटिन नहीं बने होते हैं उसे हील ( Heel ) कहा जाता है। File का जो मोटा किनारा होता है उसे Edge कहा जाता है। रेती के आगे का सिरा Tip or point कहलाता है।

साथियों इस प्रकार से इसका परिचय यहां पर समाप्त होता है अब मैं आप को ले चलता हूँ उसके वर्गीकरण की ओर जो की इस प्रकार से किया गया है-
( Classification of file ) : -   साथियों जैसे की हम सबको पता है की हमें मौसम के आधार पर जिस प्रकार परिवर्तन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हमें किसी भी अन्य प्रकार या अलग अलग प्रकार के जॉब को काटने के लिए अलग अलग प्रकार के रेती ( file ) की आवश्यकता होती है। इसलिए इनका वर्गीकरण पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है जिसके हिसाब से इसका वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है -

(1.) लंबाई के आधार पर
(2.) आकार के आधार पर
(3.) ग्रेड के आधार पर
(4.) कट के आधार पर

         साथियों अब मैं आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहां हूँ-

(1.) लम्बाई के आधार पर रेती का वर्गीकरण इस प्रकार है -

    किसी भी प्रकार के रेती की माप उसकी लम्बाई से जानी जाती है और फाइल की हील से टीप तक की लम्बाई उसकी माप होती है फिटर आदि विभीन्न व्यवसायों के लिए 100 MM से 450 MM की लम्बाई तक के रेती का प्रयोग किया जाता है।

(2.) आकार के आधार पर फाइल का वर्गीकरण -

        आपको ये तो पता ही होगा की किसी कपड़े को सिलने के लिए तलवार का प्रयोग नहीं किया जा सकता बल्कि उसके लिए सुई का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार अनेक प्रकार के जॉब के लिए उसकी बनावट के हिसाब से ही रेती का प्रयोग किया जाता है। इसके प्रकार निम्न प्रकार से हैं-

(i.) फ्लैट फाइल ( Flait File ) - इस फाइल का आगे का आकार क्रॉस सैक्शन में होता है। इस प्रकार के फाइल को उसके चौड़ाई तथा मोटाई पर कुछ टेपर बनाया जाता है। इसके हील का 2/3 भाग समांतर होता है। और शेष 1/3 भाग टेपर में रहता है। आगे डबल कट दांते और पीछे सिंगल कट दांते कटे होते हैं। इसका प्रयोग समतल पृष्ठ भूमी को घिसकर कम करने तथा फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(ii.) राउण्ड फाइल (Round file) -  इसके नाम के हिसाब से ही इसका आकार गोल होता है और क्रॉस सेक्शन में कता होता है। यह फ्लैट फाइल के समान ही 2/3 भाग समानांतर तथा शेष आगे का 1/3 भाग टेपर में ही रहता है। इसका प्रयोग किसी छोटे भाग के खांचे और छोटे छेद को घसने ( फिनिशिंग) के लिए किया जाता है।
(iii.) हाफ राउण्ड फाइल ( Half round file ) -   इस प्रकार के फाइल की एक भाग चपटी और दूसरी भाग वृत्ताकार होती है इसके नाम से ही पता चलता है। इसका 1/3 हिस्सा ही वृत्ताकार होता है। और इस पर भी डबल कट दांते कटी होती है और आगे का 1/3 भाग टेपर में रहता है।

  इस फाइल के एक भाग का प्रयोग गोलिय जगहों या शुराखों को ठीक करने के लिए किया जाता है और दूसरे भाग का प्रयोग फ्लैट फाइल के समान ही किसी समतल जगह पर फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(iv.) ट्राईएंगुलर फाइल ( Triangular File ) -    इस प्रकार के फाइल का आकार तिकोना होता है और इस फाइल का 2/3 भाग समानांतर तथा 1/3 भाग टेपर लिए होता है और इस फाइल के तीनो कोने 60° पर बने होते है इसकी सहायता से चौकोर 90° और 60° वाले जगहों को भी घिसा जा सकता है। इस फाइल के माध्यम से V आकार के खांचे भी बनाये जाते है। ज्यादातर इस प्रकार के फाइल का प्रयोग लकड़ी काटने वाले आरे के धार को तेज करने के लिए भी किया जाता है।





(V.) स्क्वायर फाइल ( Square file ) -    इस फाइल का आकार इसके नाम के समान ही चौकोन होता है और इस फाइल के द्वारा चौकोने जगहों की फिनिशिंग के लिए किया जाता है। इसका भी आकार अन्य फाईलों के समान होता है और इस फाइल की लम्बाई को इसके वर्ग से नापा जाता है। इसका प्रयोग वर्गाकार,आयताकार,ग्रुव, स्लॉट तथा की वे की फाइलिंग के लिए किया जाता है।

(Vi.) हैण्ड फाइल ( Hand file ) -   इस प्रकार की फाइल का लगभग फ्लैट फाइल के समान ही होता है लेकिन इस फाइल का आगे का एज भाग टेपर लिए हुए होता है। और चौड़ाई में टेपर नहीं होता है। इसके अलावा इसकी एक या दोनों एज पर दांते नहीं कटे होते हैं। इसका प्रयोग कम कोण वाली जगहों फाइलिंग के लिए किया जाता है। जब जॉब की एक साइड बनी रहती है तब जॉब को इससे कोई हानी नही पहुंची है। इसलिए इस फाइल को सेफ एज फाइल के नाम से भी जाना जाता है।

(Vii.) नाईफ एज फाइल ( Knife-adge file ) -   इसके नाम के ही समान इस फाइल का आकार चाकू के समान होता है और इस फाइल का पतला एज लगभग 10° के कोण पर बना होता है इस फाइल का प्रयोग किसी चाबी की खांच तथा छोटे छोटे स्लॉट आदि बनाने के लिए किया जाता है। इससे 60° से कम कोण वाले खांचे की फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(3.) ग्रेड के आधार पर फाइल का वर्गीकरण ( Classification According to Grade )
(4.) कट के आधार पर फाइल का वर्गीकरण  ( Classification According to Cut )
            
इसके लिए अन्य पेज में आपको जाना पड़ेगा तो देर किस बात की चलिए चलते हैं। जाने के लिए लिंक का प्रयोग करें और इसके चौथे और तीसरे प्रकार को क्लिक करें आप वहां पहुंच जाएंगे। 

Wednesday, November 20, 2019

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क्या आप Meghalaya के बारे में जानते है अगर नहीं जानते तो आप के लिए यह ब्लॉग मेघालय के बारे में जानने में मदद करेगा अगर अप पहले से जानते है तो इस ब्लॉग में ऐसी भी बाते हो सकती है जिसे आप नहीं जानते तो चलिए मेघालय के बारे में जानते है

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मेघालय की राजधानी  

मेघालय की स्थापना 21 जनवरी 1972 में हुआ था इसकी राजधानी का नाम शिलांग हैं और सबसे बडा शहर भी शिलांग है यह टोटल 11  जिले है, मेघालय उच्च न्यायालय यहां की सबसे बड़ी न्यायालय है, इसकी क्षेत्रफल • कुल 22429 कि.मी. है क्षेत्रफल के हिसाब से यह इंडिया का 23 राज्य है जनसंख्या घनत्व 140 किमी है। यहां की साक्षरता 75.84% है आधिकारिक भाषा गारो एवं खासी ये 2 भाषाएं है। वेबसाइट meghalaya.gov.in

राज्य के दक्षिणी में बांग्लादेश के भाग से लगता है,  तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर  असम राज्य से घिरा हुआ है। meghalaya की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश काल के समय तत्कालीन ब्रिटिश  अधिकारियों द्वारा इसे " स्काटलैण्ड" का नाम दीया गया था।

मेघालय का विभाजन 

 मेघालय पहले असम राज्य का ही भाग था, 21 जनवरी 1972 को असम के खासी, गारो एवं जैन्तिया पर्वतीय जिलों को काटकर नया राज्य मेघालय बनाया गया।

मेघालय में बोले जाने वाली भाषा 

 इस राज्य की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा यह पर अन्य प्रमुख बोली बोले जाने वाली भाषाओं में खासी, गारो, प्नार, बियाट, हजोंग एवं बांग्ला आदी हैं। इनके अलावा यहां हिन्दी भी कुछ कुछ जगहों पर बोली व समझी जाती है हिन्दी बोलने वाले ज्यादातर शिलांग में मिलते हैं। 

भारत के इस राज्य में सबसे अलग यहां पर मातृवंशीय परंपरा चलती है, जिसमे सबसे छोटी बेटी अपने माता पिता की देखभाल करती है तथा उसे ही उनकी सारी सम्पत्ति मिलती है।

मेघालय की भौगोलीक स्थिति 

यह राज्य भारत का अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है, जहां वार्षित औसत वर्षा 470 इंच दर्ज हुई है। meghalaya का 70% से अधिक क्षेत्र वनो से आच्छादित है। मेघालय में उपोष्णकटिबंधीय वन अधिक पाया जाता है, यहां के पर्वतीय वन अन्य निचले क्षेत्रों के उष्णकटिबन्धीय वनों से पृथक होते हैं। ये वन स्तनधारीपशुओ, पक्षियों तथा वृक्षों की जैव विविधता
को काफी प्रभावित होते हैं।

मेघालय में मुख्य रूप से कृषी की जाती है यहां की प्रमुख फ़सल है, चावल, मक्का, केला, पपीता एवं दालचीनी एवं बहुत से मसाले, आदि हैं। मेघालय राज्य भूगर्भ सम्पदाओं की दृष्टि से   अधिक सम्पन्न है लेकिन अभी तक यहां पर कोई उल्लेखनीय उद्योग चालू नहीं हुए हैं। यह  लगभग 1,170 कि॰मी॰ लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं। यह बांग्लादेश के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख राज्य है 
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WhatsApp fingerprint lock for Android smartphones now rolling out with update Hindi.

Android Phone के लिए WhatsApp Lock अब नये Update के साथ Roll Out हो गया है।
WhatsApp Update के साथ Android Phone पर Security के लिए Finger Print Lock विकल्प को Roll-out कर रहा है। Feature iPhones पर TouchID और FaceID Lock के समान काम करता है।

Finger Print Lock Option On WhatsApp


Highlights
  1. Android Smart Phone पर WhatsApp Users अब App Lock करने के लिए Finger Print Lock का उपयोग कर सकते हैं।
  2. Whats-App के अंदर से अलग-अलग Lock Setting दे रहा है।
  3. FingerPrint Lock Feature नवीनतम Update के साथ उपलब्ध है।





WhatsApp Update Hindi

हम लंबे समय से और Beta Test के महीनों के बाद से इसके लिए WhatsApp New Version पूछ रहे हैं, यह अंत में यहां है। Android पर WhatsApp अब उपयोगकर्ताओं को App के लिए एक Fingerprint Unlock Authentication सेट करने की अनुमति देता है। इसका मतलब है कि अब आप अपने WhatsApp Chat को Biometric Security की एक अतिरिक्त Afresh के साथ Secure कर सकते हैं। और इसका मतलब यह भी है कि आप उन सभी Third Party App Lock को अलविदा कह सकते हैं या इस Feature की खातिर iPhone पर Switch करने की सोच सकते हैं।

अपने Current Blog Post में, WhatsApp ने घोषणा की है कि सभी Android User के लिए FingerPrint Lock प्रमाणीकरण। यह New Feature मूल रूप से Users को हर बार जब कोई व्यक्ति Phone पर App खोलता है, तो अपने FingerPrinting Data के साथ अपने WhatsApp को सुरक्षित करने की अनुमति देगा। Feature को पहले iPhones में रोल आउट किया गया था जहां WhatsApp ने अपने Users को Touch ID या Face ID Authentication के साथ App को Lock करने की अनुमति दी थी। Android Devise के लिए, WhatsApp ने अभी के लिए केवल FingerPrint प्रमाणीकरण का समर्थन किया है।

How To Enable FingerPrint Lock on WhatsApp

यदि आप अपने WhatsApp Chat के लिए Security की एक Advance Option चालू करना चाहते हैं, तो आपको Google Play Store से App को Update करना होगा। एक बार Update हो जाने के बाद, Users को Setting पर जाना होगा और Feature को Access करने के लिए Account Section के तहत Privacy Setting में जाना होगा। आपको Fingerprint Lock On करने का Option दिखाई देगा। उसे On कर देना है।

WhatsApp New Fingerprint Unlock Feature के संबंध में अधिक विकल्प दे रहा है। जैसे ही कोई App Close करता है या कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित कर सकता है, उपयोगकर्ता WhatsApp को FingerPrint Authentication के लिए पूछना चुन सकते हैं। इसके अतिरिक्त, App सुरक्षा बढ़ाने के लिए सूचनाओं में संदेशों की सामग्री को छिपाने का विकल्प भी दिया गया है।

क्या होगा जब इसे चालु करेंगे ?

एक बार यह सुरक्षित (Save) हो जाने के बाद, जैसे ही कोई व्यक्ति इसे Open करेगा, WhatsApp Fingerprint डेटा मांगेगा। एक बार सत्यापन हो जाने के बाद, ऐप खुल जाएगा और उपयोगकर्ता सभी चैट और संदेशों का उपयोग कर सकता है। फीचर में आधुनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ पारंपरिक Capasitive FingerPrint Sensor वाले फोन पर काम करना चाहिए। अफसोस की बात है, अगर आपके फोन में फेस अनलॉक सिस्टम हैं, तो आप व्हाट्सएप को सुरक्षित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

i Phone पर, WhatsApp उपयोगकर्ताओं को व्हाट्सएप Chat को सुरक्षित करने के लिए Touch ID के साथ-साथ Face ID पर भरोसा करने की अनुमति देता है। Face ID आधुनिक आईफोन मॉडल पर एकमात्र बायोमेट्रिक विकल्प है और इसलिए, IOS पर अभी के लिए समर्थन मौजूद है।


Conclusion 
यह Whatsapp का बहुत ही अच्छा Feature है जिसका उपयोग आप अपने डाटा के सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। यह आपके एंड्राइड मोबाइल के लिए लॉन्च किया गया उपडेट है यह अपडेट 28 October 2019 को किया गया।

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Ganga nadi bharat ke logo ke liye nadi matra nahi hai ganga hamari maa hai India me log ganga ko maa ke saman pujte hai. Hallo dosto aaj main gana gandi ke bare me kuch rochak jankari sare kar raha hu achha lage to comment jarur kare

ganga_nadi_ka_udgam_sthan
Ganga Nadi

GANGA NADI KAHA SE BAHTI HAI

ganga nadi himalaya ke gangotri himnad se nikalti hai. ye utrkhand me hai ganga nadi himalay se nikalkar Rishiksh, Kanpur, Allahabad, Varanasi, Patna, Calcutta uske bad mahasgar me jakar mil jati hai .ganaga nadi ke kinare dharmik nagar base huye hai jaha par log jana apna saubhagya samajhte hai. 




PAURANIK DHARNA 

Mana jata hai ki bhagirath ne ganaga ko dharti par lane ke liye bhagwan bramha ka hajaro sal tak tap kiye, jisse ki apne 60 hajar purwajo ka uddhar kar sake. sagar ke 60 hajar purtro ko rishi drawara bhasm kiya gya tha jisse ki unki atma bhatak rahi thi. ushi ke uddhar ke liye bhagirath ne ganga ko bramha ke kamandal se dharti par laya.

ganga nadi ka udgam


BHAUGOLIK RACHNA

Ganga nadi ki lambayi 2,525 km, uchai 3892 miter hai. ganga nadi  me milne wali nadi ke name - yamuna, kaakshee , raamaganga, taaptee, karanaalee (ghaaghara), gandak, kosee, chambal, son, betava, ken aur dakshinee tos hai. yamuna nadi ganga ki sabse badi sahayak nadi hai.

GANGA NADI PAR BANAYE GAYE BAND

Ganga nadi par banaye gaye band india ke logo aur economy ke liye bahut aham hai. pharakka baandh pashchim bangaal me banaya gya hai. ganga par nirmit doosara pramukh tiharee baandh, uttaraakhand ke tiharee jile mein bana hai. yah baandh ganga nadee kee pramukh sahayogee nadee bhaageerathee par banaaya gaya hai. teesara pramukh bheemagoda baandh haridvaar mein sthit hai.
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Hello Readers आज मैं बात करने वाला हूं भारत के भूगोल (Geography) के बारे में जिसमें मैं बात करूंगा भारत के भूगोल के बारे में क्या-क्या विशेषताएं हैं और यहां अन्य देशों से किस प्रकार भिन्न हैं।

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Geography in Hindi

भूगोल(Geography) दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें पहला शब्द भू और दूसरा शब्द गोल है यहां पर भू का अर्थ होता है पृथ्वी और गोल का अर्थ होता है प्राकृतिक स्वरूप का अध्ययन। इस प्रकार भूगोल में पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण और उसकी विभिन्नता का अध्ययन किया जाता है।

Geography India in Hindi

अब भारत की जियोग्राफी की बात करें तो यहां पर भारत का जो भूगोल है वहां क्षेत्र विशेष के कारण अलग-अलग प्रकार का पाया जाता है और यहां अनेक प्रकार के जीव जंतु भी पाए जाते हैं। इस प्रकार यहां पर अनेक प्रकार की जलवायु क्षेत्र होने के कारण भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव जंतुओं का होना स्वाभाविक है।

Geography of India Hindi

भारत के जियोग्राफी की विशेषता की बात करें तो यहां पर भारत के भूगोल की अनेक विशेषताएं हैं जो कि अन्य देशों के कंपैरिजन में बहुत ही भिन्न है।
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भारत की भौगोलिक विशेषताएं 

  1. भारत में 6 प्रकार की ऋतुएं पाई जाती हैं।
  2. इन सभी ऋतु का अलग-अलग प्रभाव होता है।
  3. सभी ऋतुओं का एक निश्चित समय होता है।
  4. छह प्रकार की ऋतु है इस प्रकार हैं बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, हेमंत ऋतु, शरद ऋतु, शिशिर ऋतु।
इस प्रकार इन छह ऋतु में सबसे ज्यादा पसंद बसंत रितु को किया जाता है। और जैसे कि इनका नाम है उसी प्रकार इनका प्रभाव भी होता है जैसे यहां पर बसंत ऋतु की बात करें तो यहां पर इस मौसम में मौसम बहुत ही सुहावने होते हैं और ना ज्यादा ठंड होती है और ना ही ज्यादा गर्मी पड़ती है। इसी प्रकार ग्रीष्म ऋतु की बात करें तो इस ऋतु में गर्मी का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है और सूरज तेज होता है। और इसी प्रकार के अन्य रितु जैसे शरद ऋतु की बात करें तो इस ऋतु में सर्दियों का मौसम चलता है जिस कारण से से शरद ऋतु कहा जाता है।

भारत का भूगोल की विभिन्नता 

  1. भारत का भूगोल अन्य देशों की तुलना में अधिक भिन्न है क्योंकि जहां अन्य देशों में सिर्फ एक से दो ऋतु में ही पाए जाते हैं वही भारत में छह प्रकार की ऋतु में पाए जाते हैं जो कि अपना अलग-अलग स्थान रखते हैं।
  2. अन्य देशों में एक ऋतु जैसे कि शरद ऋतु पाई जाती है तो वहां सिर्फ सर्दी ही पड़ती रहती है साल भर लेकिन भारत की बात करें तो यहां 1 साल में छह ऋतु है।
  3. अन्य देशों में मौसम एक ही बना रहता है लेकिन भारत में 1 साल में मौसम छह प्रकार से परिवर्तित होता है।
  4. भारत में सभी प्रकार की विभिन्नता आएं इस मौसम परिवर्तन के कारण देखने को मिलता है लेकिन अन्य देशों में इस प्रकार की विभिन्नता देखने को नहीं मिलता है।
  5. यहां अलग-अलग मौसम होने के कारण सभी प्रकार के कृषि कार्य या कहें मौसमी फसलों का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है।
  6. भारत कृषि प्रधान देश अपने भूगोल के कारण ही कल आप आए हैं क्योंकि अगर इसका भूगोल वैसा नहीं होता तो इस प्रकार के विभिन्न प्रकार के फसलों का उत्पादन संभव नहीं हो पाता।
  7. अन्य देशों की तुलना में यहां खाद्य पदार्थों का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है जो कि भूगोल के कारण ही संभव हो सका है।

Conclusion

इस प्रकार भारत की भूगोल को देखें तो यह अन्य देशों से पूर्णता भिन्न है।


इन्हें भी पढ़ें

Sunday, November 10, 2019

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Questions - Ans Bhakti Kal

HELLO Welcome my Friends मेरा नाम है खिलावन और आप देख रहे हैं हमारा ब्लॉग Rexgin.in जिस पर हम आपसे हर रोज बात करते हैं। इन्हीं ज्ञानवर्धक जानकारी से जुड़े विषयों के बारे में। आज जो टॉपिक हम आपके लिए लेकर आये हैं, वह हिंदी साहित्य के इतिहास से जो की इतिहास का दुसरा चरण है और इस चरण को भक्ति काल के नाम से जाना जाता है।




इससे पहले हमने एक पोस्ट लिखा था जिसमें मैंने आपको बताया था। आदिकाल के बारे में अगर आप पढ़ना चाहते हैं तो निचे दिए लिंक पर क्लिक करें और पढ़ें आदिकाल और आदिकाल से पूछे गए प्रश्न के बारे में।

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भक्तिकाल की कवयित्री मीराबाई 


आदिकाल से महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
 


    चलिए शुरू करते हैं आज का विषय जिसमें हम आपसे चर्चा करेंगे भक्ति काल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों के बारे में आज हमारे कॉलेज में टेस्ट हुआ जिसमें इस प्रकार के सवाल पूछे गए थे उसी को मैंने आपके सामने रखा है हो सकता है की ये आपके फाइनल एक्साम में भी आ जाए तो इसे अंत तक पढ़े और जाने भक्ति काल के बारे में।
    सहीं विकल्प वाले प्रश्न इस प्रकार से थे यहाँ मैं सिर्फ उत्तर को ही लिखने वाला हूँ उसके विकल्प को नहीं तो चलिए देखें।

    प्रश्न १. अवधि भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का क्या नाम है ?
    उत्तर - रामचरित मानस

    प्रश्न २. हिंदी साहित्य का धर्मध्वज कवि किसे कहते हैं ?
    उत्तर - तुलसीदास।

    प्रश्न ३. फना का शाब्दिक अर्थ क्या होता है ?
    उत्तर -

    प्रश्न ४. सबसे प्राचीन वेद का नाम बताइये ?
    उत्तर - ऋग्वेद।

    प्रश्न -५. मुललादाऊ की प्रसिद्ध कृति का नाम बताइये।
    उत्तर - चंदायन।

    प्रश्न ६. मीराबाई कहाँ की कवियित्री थीं ?
    उत्तर - राजस्थान।

    प्रश्न ७. सूरदास जी के गुरु का नाम लिखिए।
    उत्तर - वल्ल्भाचार्य।

    प्रश्न ८. कबीरदास जी का जन्म कहाँ हुआ था ?
    उत्तर - मगहर, कांशी नामक स्थान पर इनका जन्म हुआ था।

    प्रश्न ९. संत सुन्दरदास के गुरु का नाम लिखिए।
    उत्तर - दादूदयाल उनके गुरु का नाम था।

    प्रश्न १०. मधुमालती के रचयिता कौन थे ?
    उत्तर - मंझन नामक कवि ने इसकी रचना की थी।

    प्रश्न ११. पद्मावत क्या है ?
    उत्तर - पद्मावत एक महाकाव्य है।

    प्रश्न १२. राघव, चेतन और पंडित किस कहानी के पात्र हैं ?
    उत्तर - ये सभी पात्र पद्मावती के हैं।

    प्रश्न १३. आखिरीकलाम और चित्ररेखा किसकी रचना है ?
    उत्तर - मलिकमुहमम्द जायसी की रचना है।

    प्रश्न १४. वैराग्य संदीपनी एवं कृष्ण गीतावली किसकी रचना है ?
    उत्तर - तुलसी दास ने इसकी रचना की थी।

    प्रश्न १५. कवित्त रत्नाकर किसकी रचना है ?
    उत्तर - यह सेनापती की रचना है।

    दीर्घ उत्तरीय प्रश्न जिसको की पांच नंबर के लिए पूछा गया था। इसके उत्तर आप अपने तरिके से भी लिख सकते हैं।




    प्रश्न १. भक्तिकाल के समाजिक परिस्थितियों को समझाइये।

    उत्तर - इस काल में हिन्दू समाज की स्थिति अत्यंत शोचनीय थी। यह असहाय, दरिद्रता और अत्याचार की भट्टी में झुलस रहा था। स्वार्थवश या बलात्कार के कारण हिन्दू मुस्लिम धर्म स्वीकार कर रहे थे। हिन्दू कन्याओं का यवनों से बलात विवाह का क्रम चल रहा था। दास प्रथा भी प्रचलित थी। सम्पन्न मुसलमान हिन्दू कन्याओं को क्रय रहे थे। कुलीन नारियों का अपहरण कराके अमीर लोग अपना मनोरंजन किया करते थे। परिणाम स्वरूप हिन्दू जनता ने इस सामाजिक आक्रमण से बचने के लिए अनेक उपाय किये। बाल विवाह और पर्दा प्रथा इस आक्रमण से बचने का ही उपाय था। वर्णाश्रम (जाति-प्रथा) व्यवस्था सुदृढ़ हो गई थी। रोजी-रोटी के साधन छीन जाने से वह गरीब होता गया और जीविकोपार्जन के लिए मुसलमानों के सम्मुख आत्मसमर्पण करता रहा।

    इस प्रकार भक्तिकाल राजनितिक दृष्टि से युद्ध, संघर्ष और अशांति का काल था। हिन्दू-समाज पर होने वाले सामाजिक और आर्थिक अत्याचारों का समय था।

    टीप :- ध्यान रखें यह प्रश्न आपको पांच नंबर के लिए पूछा गया है तो इसे आपको उसके हिसाब से लिखना है।

    प्रश्न २. भक्तिकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिये।

    उत्तर - भक्तिकाल का समय संवत १३५० (1350) से सम्वत १७०० (1700) तक माना गया है। यह दौर युद्ध, संघर्ष और अशांति का समय था। मुहम्मद बिन तुगलक से लेकर शाहजहां तक का शासन काल इस समय में आता है।  इस अवधि में तीन प्रमुख मुस्लिम वंशों-पठान, लोदी और मुगल का साम्राज्य रहा। छोटे-छोटे राज्यों को हड़पने और साम्राज्य विस्तार की अभिलाषा ने युद्धों को जन्म दिया। इस राज्य संघर्ष परम्परा का आरम्भ सुलतान मुहम्मद बिन तुगलक से आरम्भ हुआ। तुगलक के बाद सुलतान मुहम्मद शाह गद्दी पर बैठा। सन 1412 में उसकी मृत्यु के साथ तुगलक वंश समाप्त हुआ। इसके बाद लोदी वंश के बादशाहों ने साम्राज्यवाद को बढ़ावा दिया। अंतिम बादशाह इब्राहिम लोदी था, जिसका अंत सन 1526 में हुआ। इसके बाद मुगल वंश का शासन आरम्भ हुआ। जिसमें क्रमशः बाबर, हुमायूं, अकबर, जहाँगीर तथा शाहजहाँ ने राज्य किया।

    मुगलवंशीय बादशाह यद्द्पी काव्य और कला प्रेमी थे, किन्तु निरंतर युद्धों, अव्यवस्थित शासन-व्यवस्था और पारिवारिक कलहों से देश में अशांति ही रही। मुगलवंशीय शासकों में अकबर का राज्य सभी दृष्टियों  से सर्वोपरि और व्यवस्थित रहा। इसका प्रभाव उसके उत्तराधिकारी शासकों पर भी रहा।

    प्रश्न ३. ज्ञानमार्गी निर्गुण काव्य की प्रमुख विशेषताओं को समझाइये।

    उत्तर - इस ज्ञानमार्गी निर्गुण काव्यधार की विशेषता इस प्रकार है -

    1. गुणातीत की ओर संकेत - निर्गुण शब्द का अर्थ गुण रहित होता है। जब इस पंथ के संतों के संदर्भ में इसे देखते हैं तो यह गुणातीत की ओर संकेत करता है।

    2. परब्रम्ह को महत्व - यह किसी निषेधात्मक सत्ता का वाचक न होकर उस परब्रम्ह के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो सत्व, रजस और तमस तीनों गुणों से अतीत है।

    3. स्वरूप वर्णन में असमर्थ - वाणी उसके स्वरूप का वर्णन करने में असमर्थ है। जो रूप, रंग, रेखा से परे है। यह निर्गुण ब्रम्ह घट-घट वासी है फिर भी इन्द्रियों से परे है। वह अवर्ण होकर भी सभी वर्णों में है। अरूप होकर भी सभी रूपों में मौजूद है।

    4. समानता का संदेश - वह अवर्ण होकर भी सभी वर्णों में है। अरूप होकर भी सभी रूपों में मौजूद है। वह देशकाल से परे है, आदि- अंत से रहित है , फिर भी पिंड और ब्रम्हांड सभी में व्याप्त है। निर्गुण भक्ति ने  समानता का संदेश दिया। निर्गुण भक्त संतों का सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहां किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं है।

    5. हिन्दू मुस्लिम दोनों प्रभावित - मध्य काल में हिन्दू जाति वर्णाश्रम धर्म की जटिलताओं से युक्त थी , तो इस्लाम भी धार्मिक कटटरता की भावना से ग्रस्त था। उधर उत्तर भारत में सिद्धों, नाथों के कर्मकांड के कारण सच्ची धर्म भावना का हास हो रहा था। व्यवस्था के इस दुष्चक्र में सामान्य जन लगातार पीस रहा था। दक्षिण से आनेवाली भक्ति की लहर ने हिन्दू-मुसलमान दोनों को प्रभावित किया। दक्षिण भारत में भक्ति के प्रणेता रामानंद थे और इसे उत्तर में कबीर ने प्रसारित किया।

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    Saturday, November 9, 2019

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    भक्ति काल संवत 1350 से 1700 तक


    Hello and welcome guys आज हम बात करने वाले हैं, भक्ति काल के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में और उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के बारे में।

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    हिंदी साहित्य भक्तिकाल का इतिहास 

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 

    अगर हम बात करें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की तो भक्ति काल का समय सम्वत 1350 से 1700 तक माना गया है। यह दौर युद्ध संघर्ष और अशांति का समय था। मोहम्मद बिन तुगलक से लेकर शाहजहां तक का शासन काल इस समय में आता है।




    भक्ति काल का इतिहास - हिंदी साहित्य
    इस अवधि में तीन प्रमुख मुस्लिम वंशों-पठान, लोदी और मुगल का साम्राज्य रहा। छोटे-छोटे राज्यों को हड़पने और साम्राज्य विस्तार की अभिलाषा ने युद्धों को जन्म दिया। अर्थात जो बड़े राजा थे वह छोटे राज्यों को हड़पने की कोशिश किया करते थे जिससे कि उनका साम्राज्य बढ़ सके और इस कारण से वहां युद्ध होने लगे तो इस राज्य संघर्ष परंपरा का आरंभ मोहम्मद बिन तुगलक से हुआ था और तुगलक के बाद सुल्तान मोहम्मद साहब गद्दी पर बैठा था। सन 1412 में उनकी मृत्यु हुई जिसके साथ ही तुगलक वंश समाप्त हो गया। इसके बाद लोदी वंश के बादशाहों ने साम्राज्यवाद को बढ़ावा दिया और अंतिम बादशाह इब्राहिम लोदी था। जिसका अंत 1526 में हुआ इसके बाद मुगल वंश का शासन प्रारंभ होता है मुगल वंश के शासन में जैसे कि हम सभी जानते हैं अकबर के बारे में और आगरा के ताजमहल को किसने बनवाया था शाहजहां ने तो उसी के शासनकाल में बना था। यानी कि भक्ति काल के दौरान ही यह बना था। जिसमें मुगल वंश के शासक थे बाबर, हुमायूं, अकबर, जहांगीर तथा शाहजहां तो इन सभी ने भक्ति काल के दौरान राज्य किए।


    मुगल वंश के बादशाह काव्य और कला के प्रेमी थे जिसमें से ताजमहल एक बहुत ही सुंदर उदाहरण है। लेकिन उस समय जो निरंतर युद्ध चल रहे थे और जो बड़े राजा थे वह छोटे राज्यो को हड़पने में लगे हुए थे। इस कारण अव्यवस्थित शासन व्यवस्था और परिवारों में भी कलह थी। तो इस कारण से परिवारिक कलहों से देश में अशांति ही रही मुगल वंश के शासकों में अकबर का राज्य सभी दृश्यों से सर्वोपरि और व्यवस्थित रहा मुगल वंश के सभी शासकों में से मुगल के शासक मुगल वंश के शासक अकबर का जो राज्य था सभी दृष्टि से अन्य शासकों की तुलना में इसका प्रभाव उनके उत्तराधिकारी शासकों पर भी रहा। साथ ही सुब्यवस्थित शासन व्यवस्था थी। तो यह तो थी भक्ति काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।

    सामाजिक परिस्थितियां

    भक्ति काल में हिंदू समाज की स्थिति अत्यंत ही सोचने लायक थी और उस समय यह हिंदू समाज असहाय दरिद्रता और अत्याचार की भट्टी में झुलस रहे थे और स्वार्थ वश वहां पर बलात्कार के कारण हिंदू धर्म स्वीकार कर रहे थे। उनकी मजबूरी हो गई थी हिंदू धर्म को अपनाने की हिंदू कन्याओं का यवनों से बलात विवाह का क्रम चल रहा था। यानी की बाल्यकाल में ही विवाह का क्रम जारी था। दास प्रथा भी प्रचलित थी और संपन्न मुसलमान हिंदू कन्याओं को, क्रय कर रहे थे यानी कि उनको खरीद रहे थे। कुलीन नारियों का अपहरण करा के वहां जो अमीर मुसलमान जो थे वे लोग अपना मनोरंजन किया करते थे।

    परिणाम स्वरूप हिंदू जनता ने इस सामाजिक आक्रमण से बचने के लिए अनेक उपाय किए बाल विवाह और पर्दा प्रथा इस पर आक्रमण से बचने का उपाय था। जो बाल विवाह उस समय कराए जाते हैं और जो पर्दा प्रथा चल रही थी उससे बचने के लिए ही वहां पर यह सभी किए जाते थे। वर्णाश्रम यानी की जाति प्रथा व्यवस्था वहां पर सुदृढ़ हो गई थी और रोजी रोटी के साधन छिन जाने से वहां गरीब होता गया और जीवन गुजारने के लिए मुसलमानों के सम्मुख आत्मसमर्पण वे करते रहे।

    अर्थात इस काल में हिंदू समाज जो था वह अत्यंत ही दुखदाई स्थिति में था।

    अब इस प्रकार हम देखे तो भक्ति काल राजनीतिक दृष्टि से युद्ध संघर्ष और अशांति का काल रहा था और हिंदू समाज पर होने वाले सामाजिक और आर्थिक अत्याचारों का समय भी इसे हम कह सकते हैं।
    अगर आपके कोई सुझाव हो तो कमेंट में बताएं अगर कोई जानकारी में त्रुटि हो तो हमें कमेंट करके अवश्य ही अवगत कराएं धन्यवाद।

    सारांश

    इस प्रकार देखा जाए तो भक्ति काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उतनी सुदृण या सुरक्षित नहीं थी काव्य रचना (पद्ध), गद्य रचना कला के क्षेत्र में देखें तो। क्योंकि उस समय युद्ध और अशांति फैली हुई थी बड़े राजाओं द्वारा छोटे छोटे राज्यों को हड़पने के लिए और अपने साम्राज्य के विस्तार के अभिलाषा के कारण तो इस कारण से वहां काव्य और कला के क्षेत्र में कोई उन्नति देखने को हमें नहीं मिलती है और उस समय देश में अशांति व्याप्त रही। जिसके कारण भक्ति काल में वहां के कवि लोगों को भक्ति की ओर ले जाने का प्रयास करते रहे।

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