उत्तर कोरिया पूर्वी एशिया का एक देश है। यह कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी क्षेत्र पर स्थित है। इसकी सीमा उत्तर में चीन और रूस से और दक्षिण में दक्षिण कोरिया से लगती है। इसके पश्चिम में पीला सागर और पूर्व में जापान सागर स्थित है।
उत्तर कोरिया की राजधानी क्या है
उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग है। प्योंगयांग देश का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण शहर है। यह शहर उत्तर कोरिया के पश्चिमी भाग में ताएदोंग नदी के किनारे स्थित है। प्योंगयांग न केवल प्रशासनिक केंद्र है, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र भी है।
प्योंगयांग का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि यह कोरियाई सभ्यता के प्राचीन केंद्रों में से एक था। आधुनिक प्योंगयांग का विकास विशेष रूप से 1950–53 के कोरियाई युद्ध के बाद हुआ, जब शहर का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था। युद्ध के बाद इसे योजनाबद्ध तरीके से दोबारा बनाया गया।
उत्तर कोरिया का क्षेत्रफल
उत्तर कोरिया का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,20,540 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह दुनिया के मध्यम आकार के देशों में गिना जाता है। उत्तर कोरिया का अधिकांश भाग पहाड़ी और ऊँचा है, जिससे यहाँ की भौगोलिक बनावट काफी विविध और प्राकृतिक रूप से सुंदर मानी जाती है।
उत्तर कोरिया का लगभग 80 प्रतिशत भाग पहाड़ों और ऊँची भूमि से ढका हुआ है। यहाँ की प्रमुख नदियों में यालू और टूमेन शामिल हैं, जो प्राकृतिक सीमाएँ भी बनाती हैं। राजधानी प्योंगयांग देश का सबसे बड़ा शहर है।
कुल मिलाकर, 1,20,540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला उत्तर कोरिया भौगोलिक रूप से विविध, पहाड़ी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देश है।
उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति
किम जोंग उन अभी उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री और सबसे बड़े नेता हैं। किम जोंग उन का जन्म 8 जनवरी 1983 को हुआ था और वे पूर्व नेता किम जोंग इल के सबसे छोटे बेटे हैं। उनके दादा किम इल सुंग उत्तर कोरिया के फाउंडर लीडर थे। 2011 में अपने पिता की मौत के बाद किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की सत्ता संभाली।
उनके नेतृत्व के तहत उत्तर कोरिया ने मिलिट्री ताकत और खास तौर पर न्यूक्लियर प्रोग्राम पर ज़ोर दिया है, जिससे यह देश इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में एक अहम और विवादित रोल निभा रहा है। किम जोंग उन ने सत्ता में रहते हुए देश की नीतियां, इकोनॉमिक दिशा और विदेश नीति पर कंट्रोल बनाया है।
हालांकि उत्तर कोरिया की संविधान और औपचारिक पद सूची में राष्ट्रपति शब्द नहीं पारंपरिक रूप से प्रयोग होता, किम जोंग उन को अक्सर देश के सर्वोच्च नेता या सरकार और पार्टी दोनों का प्रमुख माना जाता है, क्योंकि वे देश की नीतियों के अंतिम निर्णयकर्ता हैं।
उत्तर कोरिया की जनसंख्या
उत्तर कोरिया की कुल जनसंख्या लगभग 2.6 करोड़ के आसपास मानी जाती है। यह आंकड़ा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुमान पर आधारित है, क्योंकि देश में नियमित और पारदर्शी जनगणना की जानकारी सीमित रूप से उपलब्ध होती है। उत्तर कोरिया की जनसंख्या वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम है और यहाँ की आबादी मुख्य रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित रूप से बंटी हुई है।
राजधानी प्योंगयांग देश का सबसे बड़ा शहर है, जहाँ लगभग 30 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं। उत्तर कोरिया की अधिकांश जनसंख्या कोरियाई जातीय समूह से संबंधित है, जिससे यह दुनिया के सबसे अधिक जातीय रूप से एकरूप देशों में गिना जाता है।
देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कार्यशील आयु वर्ग में आता है। शिक्षा दर काफी ऊँची बताई जाती है, क्योंकि सरकार शिक्षा को अनिवार्य मानती है।
उत्तर कोरिया की मुद्रा
उत्तर कोरिया की आधिकारिक मुद्रा उत्तर कोरियाई वॉन है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर KPW कोड से जाना जाता है। इस मुद्रा का प्रतीक ₩ होता है।
उत्तर कोरियाई वॉन को 100 चोन में विभाजित किया जाता है। यह मुद्रा मुख्य रूप से देश के भीतर ही उपयोग की जाती है, क्योंकि उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक बंद है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सीमित है।
उत्तर कोरिया में विदेशी नागरिकों और पर्यटकों के लिए पहले अलग प्रकार की मुद्रा या विदेशी मुद्रा के उपयोग की व्यवस्था थी, लेकिन वर्तमान में अधिकांश लेन-देन सरकार के सख्त नियंत्रण में होता है।
मुद्रा का प्रबंधन देश का केंद्रीय बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ द डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया, करता है। नोटों पर आमतौर पर देश के संस्थापक नेता किम इल-सुंग की तस्वीर छपी होती है।
उत्तर कोरियाई वॉन का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वतंत्र रूप से निर्धारित नहीं होता, क्योंकि यह वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार में खुलकर व्यापार नहीं की जाती। कुल मिलाकर, यह मुद्रा पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में संचालित होती है।
उत्तर कोरिया की जीडीपी
उत्तर कोरिया की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के बारे में सटीक और आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध नहीं होते, क्योंकि देश अपनी आर्थिक जानकारी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं करता। इसलिए अधिकांश आंकड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और दक्षिण कोरिया के अनुमानों पर आधारित होते हैं।
अनुमान के अनुसार, उत्तर कोरिया की जीडीपी लगभग 18 से 30 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच मानी जाती है। प्रति व्यक्ति आय लगभग 600 से 1,300 अमेरिकी डॉलर के बीच आंकी जाती है। यह एशिया के अपेक्षाकृत कम आय वाले देशों में शामिल है।
उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, खनन, भारी उद्योग और सरकारी नियंत्रित उत्पादन पर आधारित है। देश में कोयला, लोहा और अन्य खनिज संसाधनों का भंडार है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण इसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है, विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम के कारण लगाए गए प्रतिबंधों से व्यापार सीमित हुआ है।
चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और उसकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुल मिलाकर, उत्तर कोरिया की जीडीपी सीमित और सरकार-नियंत्रित आर्थिक ढांचे पर आधारित है, जिससे इसकी वैश्विक आर्थिक भागीदारी कम रहती है।
उत्तर कोरिया का इतिहास
कोरियाई प्रायद्वीप में प्राचीन काल से लोग रहते आए हैं। सदियों से, इस पर गोरियो और जोसियन जैसे राजवंशों का शासन रहा है। कोरिया पर जापान ने 1910 में कब्ज़ा कर लिया और 1945 तक यह क्षेत्र जापानी शासन के अधीन रहा।
जापान की हार के बाद कोरिया को दो हिस्सों में बाँट दिया गया। उत्तर भाग पर सोवियत संघ का प्रभाव रहा और दक्षिण भाग पर संयुक्त राज्य अमेरिका का। 1948 में दो अलग देश बने - उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया।
1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण पर हमला किया, जिससे कोरियाई युद्ध शुरू हुआ। 1953 में युद्धविराम हुआ, लेकिन शांति समझौता नहीं हुआ। इसी कारण दोनों देश आज भी औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति में माने जाते हैं।
युद्ध के बाद उत्तर कोरिया ने कम्युनिस्ट देशों की मदद से अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की। उसके पहले नेता किम इल सुंग ने 'जुचे' विचारधारा दी, जिसका अर्थ है आत्मनिर्भरता यानी देश अपने संसाधनों और ताकत पर ही निर्भर रहे।
1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद उत्तर कोरिया और अधिक अलग-थलग हो गया। 1990 के दशक में वहाँ भीषण अकाल पड़ा, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए। समय के साथ उत्तर और दक्षिण के संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे। 2024 में उत्तर कोरिया ने आधिकारिक रूप से दक्षिण कोरिया के साथ दोबारा एक होने की नीति को छोड़ने की घोषणा की, जिससे दोनों देशों के बीच दूरी और बढ़ गई।
