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Friday, September 20, 2019

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Hello and welcome friends मैं आज मैं बात करने वाला हूं. surgical strike के बारे में इस पोस्ट में हम जानेंगे कि-
Surgical strike kya hai

क्या होता है? Surgical Strike

Surgical Strike एक प्रकार की सैन्य कार्यवाही होती है जिसे सेना के द्वारा अंजाम दिया जाता है।
Surgical strike की विशेषता


  1. Surgical strike सर्जिकल स्ट्राइक में किसी भी प्रकार की जानकारी को किसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है और यह पूर्ण रूप से गोपनीय होता है।
  2. Surgical strike में मात्र दो या चार हेड्स को स्ट्राइक की जानकारी होती है कि कहां पर सर्जिकल स्ट्राइक करना है।
  3. Surgical strike 2016 भारत में 21 सितंबर 2016 को पाकिस्तान के खिलाफ एलओसी में सर्जिकल स्ट्राइक किया गया था जिसे आप उसके उदाहरण के तौर पर ले सकते हैं।
  4. Surgical strike में किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं छोड़ा जाता है तथा जिस स्थान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया जाता है उस स्थान में जो भी सामग्री होती है उसे नष्ट कर दिया जाता है।
  5. Surgical strike को इस प्रकार अंजाम दिया जाता है कि इससे किसी भी प्रकार की समान्य लोगों को हानि ना पहुंचे यह पूर्ण रूप से सुरक्षित होता है।
  6. इस प्रकार की सैन्य कार्यवाही में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाती है और सर्जिकल स्ट्राइक में किसी बड़े कार्य को अंजाम दिया जाता है।
  7. Surgical strike को देर रात या ऐसे समय में अंजाम दिया जाता है जिस समय सर्जिकल स्ट्राइक जहां पर होना है वहां के आसपास के लोगों का आवागमन कम हो।
  8. भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर अधिकृत के सीमा पर लांच पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक 21 सितंबर 2016 को किया था।
  9. Surgical strike में ज्यादातर वायु सेना का उपयोग किया जाता है।


Conclusion


Surgical strike सेनाओं द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का मिशन होता है जिसे वहां जी जान लगाकर पूर्ण करते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

Sunday, December 23, 2018

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क्या आप Meghalaya के बारे में जानते है अगर नहीं जानते तो आप के लिए यह ब्लॉग मेघालय के बारे में जानने में मदद करेगा अगर अप पहले से जानते है तो इस ब्लॉग में ऐसी भी बाते हो सकती है जिसे आप नहीं जानते तो चलिए मेघालय के बारे में जानते है...

मेघालय की राजधानी  

मेघालय की स्थापना 21 जनवरी 1972 में हुआ था इसकी राजधानी का नाम शिलांग हैं और सबसे बडा शहर भी शिलांग है यह टोटल 11  जिले है, मेघालय उच्च न्यायालय यहां की सबसे बड़ी न्यायालय है, इसकी क्षेत्रफल • कुल 22429 कि.मी. है क्षेत्रफल के हिसाब से यह इंडिया का 23 राज्य है जनसंख्या घनत्व 140 किमी है। यहां की साक्षरता 75.84% है आधिकारिक भाषा गारो एवं खासी ये 2 भाषाएं है। वेबसाइट meghalaya.gov.in

राज्य के दक्षिणी में बांग्लादेश के भाग से लगता है,  तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर  असम राज्य से घिरा हुआ है। meghalaya की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश काल के समय तत्कालीन ब्रिटिश  अधिकारियों द्वारा इसे " स्काटलैण्ड" का नाम दीया गया था।


मेघालय का विभाजन 

 मेघालय पहले असम राज्य का ही भाग था, 21 जनवरी 1972 को असम के खासी, गारो एवं जैन्तिया पर्वतीय जिलों को काटकर नया राज्य मेघालय बनाया गया।

मेघालय में बोले जाने वाली भाषा 

 इस राज्य की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा यह पर अन्य प्रमुख बोली बोले जाने वाली भाषाओं में खासी, गारो, प्नार, बियाट, हजोंग एवं बांग्ला आदी हैं। इनके अलावा यहां हिन्दी भी कुछ कुछ जगहों पर बोली व समझी जाती है हिन्दी बोलने वाले ज्यादातर शिलांग में मिलते हैं। 

भारत के इस राज्य में सबसे अलग यहां पर मातृवंशीय परंपरा चलती है, जिसमे सबसे छोटी बेटी अपने माता पिता की देखभाल करती है तथा उसे ही उनकी सारी सम्पत्ति मिलती है।

मेघालय की भौगोलीक स्थिति 

यह राज्य भारत का अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है, जहां वार्षित औसत वर्षा 470 इंच दर्ज हुई है। meghalaya का 70% से अधिक क्षेत्र वनो से आच्छादित है। मेघालय में उपोष्णकटिबंधीय वन अधिक पाया जाता है, यहां के पर्वतीय वन अन्य निचले क्षेत्रों के उष्णकटिबन्धीय वनों से पृथक होते हैं। ये वन स्तनधारीपशुओ, पक्षियों तथा वृक्षों की जैव विविधता
को काफी प्रभावित होते हैं।

मेघालय में मुख्य रूप से कृषी की जाती है यहां की प्रमुख फ़सल है, चावल, मक्का, केला, पपीता एवं दालचीनी एवं बहुत से मसाले, आदि हैं। मेघालय राज्य भूगर्भ सम्पदाओं की दृष्टि से   अधिक सम्पन्न है लेकिन अभी तक यहां पर कोई उल्लेखनीय उद्योग चालू नहीं हुए हैं। यह  लगभग 1,170 कि॰मी॰ लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं। यह बांग्लादेश के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख राज्य है 

Sunday, December 2, 2018

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General Knowledge in Hindi Aaj ka topic hai top Indian minister kaun kaoun hai jske pass kya kya shaktiya hai aur koun se fild ke minister hai chaliye aage adte hai

Top 10 Indian minister 2018

India ek vishal Desh hai yaha 1.50 crore kanshankhya rahti hai ish karan yaha ke ministers ko bhi strong hona chahiye hamare pm narendra modi ko to sabhi jante hai yah world ke top 10 prabhav shali insan ke shreni me aate hai. 

1. Narendra Modi - Prime Minister

prime minister of india in 2014



2. Shri Rajnath Singh - Minister of Home Affairs

minister of home afaire


3. Sushma Swaraj - Minister of External Affairs

minister of external affairs


4. Arun Jaitley - Minister of Finance



5. Nirmala Sitharaman - Minister of Defence

minister of finence in india


6. Narendra Singh Tomar - Ministry of Rural Development

minister of rural development in india


7. Nitin Gadkari - Minister of Road Transport and Highways

Minister of Road Transport and Highways



8. Shri Suresh Prabhu - Minister of Commerce and Industry

Minister of Commerce and Industry

9. Shri Piyush Goyal - Ministry of Coal, Ministry of Railways

Ministry of Coal, Ministry of Railways


10. shri Uma Bharati - Ministry of Drinking Water & Sanitation

Ministry of Drinking Water & Sanitation

Thursday, November 8, 2018

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साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज हम बात करने वाले हैं विश्व युद्ध के बारे में इससे पहले मैंने आपको टेलीफोन के इतिहास के बारे में बताया था ।


 युद्ध के लिए तैनात सिपाही

विश्व युद्ध

आज का टॉपिक बेहद महत्वपूर्ण है क्योकि इस युद्ध के कारण ही आज के जन जन वाकिफ है की हिरोशिमा और नागासाकी में लोग किस कदर घायल हुए थे और आज भी वहां पर कुपोषित बच्चे पैदा हो रहें है। साथियों इन युद्धों के कारण हजारों नहीं करोड़ों लोगों की जान गयी थी। चलिए अब बात करते है उन युद्ध के बारे में जो अभी तक हुए हैं-



प्रथम विश्वयुद्ध

  • प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत 28 जुलाई , 1914 ई. को हुई तथा इसकी समाप्ति 11 नवम्बर, 1918 ई. को हुई। 
  • प्रथम विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण आर्कड़यूक फ्रांसिस फर्डिंण्ड (आस्ट्रिया का राजकुमार) की साराजेवो (बोस्निया की राजधानी) में हत्या। 
  • जो प्रथम विश्व युद्ध हुआ था वो मित्र और धुरी राष्ट्रों के मध्य हुआ था । 
  • जिसमें धुरी राष्ट्र के सदस्य थे- जर्मनी, आस्ट्रिया, हंगरी और इटली । इनका नेतृत्व जर्मनी ने किया। 
  • मित्र राष्ट्र के सदस्य थे- इंग्लैण्ड, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस एवं फ्रांस। 
  • जर्मनी ने 1 अगस्त (1914) को रूस तथा 3 अगस्त (1914) को फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 
  • 18 जून, 1919 ई. को पेरिस शांति सम्मेलन हुआ ।
  • युद्ध के बाद मुख्य सन्धि जर्मनी के साथ 28 जून, 1919 को हुई , जिसे ' वर्साय की सन्धि ' कहते हैं।

द्वितीय विश्वयु

  • द्वितीय विश्वयुद्ध का आरम्भ 1 सितम्बर , 1939 ई. को हुआ तथा 2 सितम्बर , 1945 ई. को इसकी समाप्ति हुई ।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण पोलैंड पर जर्मनी का आक्रमण ( 1 सितम्बर, 1939 ) था। 
  • 3 सितम्बर , 1939 को ब्रिटेन एवं फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 
  • युद्ध की घोषणा के बावजूद सितम्बर , 1939 से अप्रैल , 1940 तक कोई भी वास्तविक लड़ाई नहीं हुई अतः इसे ' नकली युद्ध ' (फोनी वार) कहा जाता है। 
  • 22 जून , 1941 ई. को अनाक्रमण सन्धि ( 23 अगस्त, 1939) के बावजूद जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला कर दिया ।
  • 8 दिसम्बर , 1941 को अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की ।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इंग्लैण्ड का प्रधानमन्त्री विंस्टन चर्चित तथा अमेरिका का राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट था। 
  • 2 मई , 1945 को सोवियत सेनाओं ने बर्लिन में प्रवेश किया , उसी दिन हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी ।
  • 7 मई , 1945 को जर्मनी ने बिना शर्त समर्पण कर दिया। 
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1945 में जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी नगर पर क्रमशः 6 अगस्त एवं 9 अगस्त को परमाणु बम गिराए ।
  • 2 सितम्बर , 1945 को जापान ने समर्पण कर दिया। जापान , मित्र राष्ट्रों द्वारा पराजित होने वाला अंतिम देश था। 


* छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेज।

* न्यूटन के गति के नियम

* हिमालय पर्वत का महत्व

* भारतीय अंतरिक्ष केंद्र

thanks so much for supporting me

Sunday, November 4, 2018

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        साथियों आप सभी का फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ दीपावली के त्योहार से जुड़े कुछ मेरे personal experience को लेकर इससे पहले मैंने आपको बताया था कम्प्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में अगर आपको वो जानकारी पढ़ना है तो यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

Diwali ke bare rochak jankari

आज मेरे मन में ये पोस्ट लिखने का विचार तब आया जब हमारे सर ने हम सब से पूछा की दीपावली क्यों मनाया जाता है । साथियों सभी ने कहा की दीपावली का त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योकि इसी दिन भगवान राम , माता सीता के साथ और भ्राता लक्षण के साथ लंका को विजयी होकर यानी की जीत कर वापस लौटे थे। और इसी की खुशी में अयोध्या वाशीयों के द्वारा दीपक जला कर यह त्योहार मनाया गया । इसी दीन से चूंकि श्रीराम भारत के राजा थे इस कारण से पूरे भारत में यह त्योहार मनाया जाता था और यही परम्परा आज तक चली आ रही है।
Dipawali,diwali
Dipawali


दीपावली का त्योहार दीपों का त्योहार है और इस त्योहार की कल्पना बिना दीपों के सम्भव नहीं है ।

साथियों अब मैं अपना सोच आपके साथ शेयर करता हूँ की

आखिर दीपावली का त्योहार ही क्यों मनाया गया इसकी जगह पर और भी कई अनेक त्योहार हो सकते थे।

मेरे विचार कहते हैं दीपक जो होता है, वो अन्धकार मिटाता है यानी की अंधकार को दूर करता है, आपको ये तो पता ही होगा । सोचो उस समय की बात है , जब राम और लक्ष्मण माता सीता को ढूंढते हुए जब वन में भटक रहे थे तो उनके जीवन में भी मानों अंधकार भर गया था या कहें उनका जीवन भी अंधकार मय हो गया था। और जब माता सीता की तलास पूरी हो गयी और उन्हें पता चल गया तो उनके जीवन में उम्मिद की किरण जाग उठी और उन्होंने उस उम्मीद के किरण को पाने के लिए अपना सारा ताकत लगा दिया । तब जाकर उन्हें सफलता मिली ये सफलता को पाना भी इतना आसान नहीं था , बिना किसी के सहारा के साथीयों, रावण तो तीनों वेद के ज्ञाता थे मगर क्यों उनके जीवन में अंधकार भरा पड़ा था। क्योकि उन्होंने अपने और अपने घर वालों से इस प्रकार का रीस्ता बना लिया था की वे जिससे भी बात करते थे वो उससे डरता था कोई उससे हिल मिलकर नहीं रहता था। इसलिए उनके जीवन में अंधकार था। श्रीराम के जीवन में उजाला आया जब उनको उनके साथियों का सहारा मिला।

DIPAWALI YA DIWALI KYO MNAYA JATA HAI

इसलिए मैं आपसे यहीं कहूँगा की साथियों का साथ कभी ना छोड़े ना जाने कब और किस वक्त उनको या हमको उनकी जरूरत पड़ जाये।

साथियों आखिर दीपावली का त्योहार ही मानाया गया क्योंकि श्रीराम के जाने उनके नगर वासियों और पूरे भारत वाशियों के जीवन में अंधकार छा गया था। और जब राम वापस आये तो उनके जीवन में खुशी आ गयी। आपने एक कहावत तो सुना ही होगा खुशी के मारे घी के दिए जलाना।

साथियों दीपावली मनाने के और भी अनेक कारण थे जिनको मैंने आपके सामने इस प्रकार प्रस्तुत किया है-


1. खुशी में दिए जलाये गए और इस कारण से इस त्योहार का नाम दीपावली पड़ा।

2. इस त्योहार में बहुत से फंक्शन होते हैं जिसमें लक्ष्मी पूजा भी सामिल है और इस कारण भी यह त्योहार मनाया जाता है ।

3. दीपावली का त्योहार लोगों के जीवन को अंधकार से दूर ले जाने की एक सिख देता है।

4, दीपावली का त्योहार लोगों के जीवन में यानी की अयोध्या वाशियों के जीवन में खुशी लेकर आया था, इस कारण लोगों को भी लगता है और उन्हें खुशी भी मिलती है इस कारण से भी ये त्योहार मनाया जाता है।

5. दीपावली के त्योहार में जलाये दिए से निकलने वाले धुए से प्रकृति का वातावरण साफ होता है। इससे मन को शांति और शुकुन मिलता है।

6. आपने ये तो महशुस किया होगा की हम प्रकाश में कितना पॉजिटिव फिल करते हैं और जब ये त्योहार मनाया गया उस समय लोगों के यहां ना तो बिजली थी और ना ही किसी प्रकार के और अन्य साधन इस कारण से ही लोगों ने श्रीराम के आने की खुशी अपने पॉजिटिविटी को व्यक्त करने के लिए इस प्रकार से दिए जलाकर उनका स्वागत किया।

7. माता लक्ष्मी को प्रकाश में रखना चाहिए क्योकि अंधकार में उनको रहना पसन्द नहीं है अर्थात मेरे हिसाब से आप जो भी पैसे और धन कमाते है सहीं रास्ते से ही कमाते हैं तो वो आपके पास टिकता है ।

8. गणेश जी की पूजा ऋद्धि सिद्धि लाता लेकर आता है और ये तब आता है जब कोई शुभ कार्य किसी लाभ की इच्छा को ना रखते हुए किया जाये।

9. दीपावली मनाने के लिए किसी विशेष दिन की जरूरत थी जिसमें ये सभी फैक्ट सामिल थे शायद इसी कारण इस दिन यहीं त्योहार मनाने का करण बना।

* साथियों दशवाँ कारण मैं यहां पर नहीं लिख रहा हूँ, क्योकि आप मुझे कमेंट करके बताएंगे की आखिर इसे मनाने और क्या क्या करण हो सकते थे ।

ये तो थे , मेरे पर्शनल एक्सपीरियेन्स ।

साथियों इसके साथ ही आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । 
 

thanks so much for supporting me

Saturday, October 27, 2018

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भारत के पड़ोसी देशों के नाम -

भारत एशिया का एक देश है जिसमें विशिष्ट संस्कृति का विकास हुआ है भारत की स्थल सीमा को स्पर्श करने वाले 7 देश है उत्तर में अफगानिस्तान, उत्तर पश्चिम में पाकिस्तान व उत्तर पूर्व में तिब्बत , चीन, नेपाल तथा भूटानबांग्लादेश तथा म्यानमार! भारत एवं चीन के मध्य सीमा रेखा को मैक मोहन रेखा कहते हैं! समुद्र पार हमारा निकटतम पड़ोसी देश श्रीलंका है! तमिलनाडु तट से इसकी दूरी मात्र 32 किलोमीटर है!


China,amerika,bangladesh,pakistan,afganistan.etc
Bharat ke padosi desh

 अंडमान निकोबार दीप समूह के दक्षिण में निकटतम पड़ोसी देश इंडोनेशिया है! दूरस्थ पड़ोसी देशों में बंगाल की खाड़ी के पास मलेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया वियतनाम तथा लाओस है! पश्चिम की ओर समुद्र साथ साथ पश्चिम एशिया के ईरान, इराक, सऊदी अरब, ओमान और यमन है! भारतीय उपमहाद्वीप में शामिल देश भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश है!

1. भारत के दक्षिण में हिंद महासागर है जहां से अनेक समुद्री मार्ग तट से होकर गुजरते हैं जिसमें भारत का अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ गया है!
2. स्वेज नहर बनने से भारत तथा यूरोप के मध्य 4800 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है!
3. समुद्री मार्गों के अतिरिक्त भारत अंतरराष्ट्रीय वायु मार्गों का भी केंद्र है!


Friday, October 26, 2018

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सागर माला परियोजना 

के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता
सागर्माला परियोजना के तहत 3 नवम्बर 2017 को केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय को ₹ 2302 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है। शिपिंग मंत्रालय को यह राशि प्रदान करने की स्वीकृति नीति आयोग के व्यय विभाग ने दि है , जिसने परियोजना की निर्माण अवधि को 31 मार्च ,2020 तक के लिए बढ़ा दिया है।

सगर माला परियोजना के ' कोस्टल बर्थ स्कीम '  के तहत देश के 8 राज्यों-महाराष्ट्र , आंध्रप्रदेश ,गोवा ,कर्नाटक , केरल ,तमिलनाडु,गुजरात तथा पश्चिमबंगाल को शामिल किया गया है।
स्वीकृत 47 परियोजनाओं में से 23 परियोजनाओं के लिए ₹ 1075.61 करोड़ की राशि का भुक्तान किया जा चुका है।

कोस्टल बर्थ स्कीम के तहत राज्य सरकारों को कार्गों एवं परिवहन परिचालन के लिए वित्तीय सुविधा प्रदान की जाती है , जिसमें सागरीय जल मार्ग तथा राष्ट्रीय जलमार्ग को स्थान दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा इस स्कीम के लिए 50% की राशि दी जाती है।

सागर माला परियोजना के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता प्रदान की गयी।
नागालैंड ,अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह,दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव उदय योजना में शामिल किया गया।

सोलर पार्क प्रोजेक्ट के लिए भारत और विश्व बैंक के बीच समझौता पर हस्ताक्षर किये गए
11 नवम्बर 2017 को जैविक कृषि विस्व कुम्भ 2017 का आयोजन किया गया।
केंद्रीय महिला एवं बालविकास मंत्रालय द्वारा हौसला 2017 का आयोजन 16 से 20 नवम्बर के बीच किया गया।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दि गयी यह बैठक 10 नवम्बर 2017 को सम्पन्न हुई।

भारत नेट के दूसरे चरण की सुरवात 13 नवम्बर 2017 को की गयी।
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम पुनर्संरचना को स्वीकृति 10 नवम्बर 2017 को दी गयी।
केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 'राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी' की स्थापना को 10 नवम्बर 2017 को स्वीकृति मिली।
द्वीप विकास एजेंशि की दूसरी बैठक 8 नवम्बर 2017 को आयोजित की गयी।
कामकाजी महिलाओं के लिए ' शी-बॉक्स ऑनलाइन शिकायत प्रबन्धन प्रणाली ' की शुरुआत 7 नवम्बर 2017 को नई दिल्ली में की गई।

कोल इंडिया द्वारा ग्राहक सड़क कोयला वितरण एप्प को 7 नवम्बर 2017 को लॉन्च किया गया।
OHEPEE परियोजना हेतु भारत तथा विस्व बैंक के बीच 7 नवम्बर 2017 को ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।

अक्टूबर में क्या क्या हुआ

I - भातर 2017 कॉन्फ्रेंस का आयोजन 26 अक्टूबर को किया गया।
ड्रोन के नाग्रीक उपयोग हेतु नागरिक उड्डयन नियम ड्राफ्ट अधिनियम लागू किया गया यह नियम 2 नवम्बर को लागू किया गया।
26 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा पूवोत्तर राज्यों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए ₹ 14124 करोड़ की स्वीकृति दि गयी।
24 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा साथी अभियान की शुरुआत की गयी। 
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जानकारी काबीले तारीफ है... गौर किजीये !

*I N D I A N   R  U  L E  R  S*

*गुलाम वंश*

1=1193 मुहम्मद  घोरी
2=1206 कुतुबुद्दीन ऐबक
3=1210 आराम शाह
4=1211 इल्तुतमिश
5=1236 रुकनुद्दीन फिरोज शाह
6=1236 रज़िया सुल्तान
7=1240 मुईज़ुद्दीन बहराम शाह
8=1242 अल्लाउदीन मसूद शाह
9=1246 नासिरुद्दीन महमूद
10=1266 गियासुदीन बल्बन
11=1286 कै खुशरो
12=1287 मुइज़ुदिन कैकुबाद
13=1290 शमुद्दीन कैमुर्स
1290 गुलाम वंश समाप्त्
(शासन काल-97 वर्ष लगभग )

*खिलजी वंश*

1=1290 जलालुदद्दीन फ़िरोज़ खिलजी
2=1296
अल्लाउदीन खिलजी
4=1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5=1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6=1320 नासिरुदीन खुसरो  शाह
7=1320 खिलजी वंश स्माप्त
(शासन काल-30 वर्ष लगभग )
*तुगलक  वंश*
1=1320 गयासुद्दीन तुगलक  प्रथम
2=1325 मुहम्मद बिन तुगलक दूसरा
3=1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक
4=1388 गयासुद्दीन तुगलक  दूसरा
5=1389 अबु बकर शाह
6=1389 मुहम्मद  तुगलक  तीसरा
7=1394 सिकंदर शाह पहला
8=1394 नासिरुदीन शाह दुसरा
9=1395 नसरत शाह
10=1399 नासिरुदीन महमद शाह दूसरा दुबारा सता पर
11=1413 दोलतशाह
1414 तुगलक  वंश समाप्त
(शासन काल-94वर्ष लगभग )

*सैय्यद  वंश*

1=1414 खिज्र खान
2=1421 मुइज़ुदिन मुबारक शाह दूसरा
3=1434 मुहमद शाह चौथा
4=1445 अल्लाउदीन आलम शाह
1451 सईद वंश समाप्त
(शासन काल-37वर्ष लगभग )
*लोदी वंश*
1=1451 बहलोल लोदी
2=1489 सिकंदर लोदी दूसरा
3=1517 इब्राहिम लोदी
1526 लोदी वंश समाप्त
(शासन काल-75 वर्ष लगभग )

*मुगल वंश*

1=1526 ज़ाहिरुदीन बाबर
2=1530 हुमायूं
1539 मुगल वंश मध्यांतर

*सूरी वंश*

1=1539 शेर शाह सूरी
2=1545 इस्लाम शाह सूरी
3=1552 महमूद  शाह सूरी
4=1553 इब्राहिम सूरी
5=1554 फिरहुज़् शाह सूरी
6=1554 मुबारक खान सूरी
7=1555 सिकंदर सूरी
सूरी वंश समाप्त,(शासन काल-16 वर्ष लगभग )

*मुगल वंश पुनःप्रारंभ*

1=1555 हुमायू दुबारा गाद्दी पर
2=1556 जलालुदीन अकबर
3=1605 जहांगीर सलीम
4=1628 शाहजहाँ
5=1659 औरंगज़ेब
6=1707 शाह आलम पहला
7=1712 जहादर शाह
8=1713 फारूखशियर
9=1719 रईफुदु राजत
10=1719 रईफुद दौला
11=1719 नेकुशीयार
12=1719 महमूद शाह
13=1748 अहमद शाह
14=1754 आलमगीर
15=1759 शाह आलम
16=1806 अकबर शाह
17=1837 बहादुर शाह जफर
1857 मुगल वंश समाप्त
(शासन काल-315 वर्ष लगभग )

*ब्रिटिश राज (वाइसरॉय)*

1=1858 लॉर्ड केनिंग
2=1862 लॉर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3=1864 लॉर्ड जहॉन लोरेन्श
4=1869 लॉर्ड रिचार्ड मेयो
5=1872 लॉर्ड नोर्थबुक
6=1876 लॉर्ड एडवर्ड लुटेनलॉर्ड
7=1880 लॉर्ड ज्योर्ज रिपन
8=1884 लॉर्ड डफरिन
9=1888 लॉर्ड हन्नी लैंसडोन
10=1894 लॉर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11=1899 लॉर्ड ज्योर्ज कर्झन
12=1905 लॉर्ड गिल्बर्ट मिन्टो
13=1910 लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंज
14=1916 लॉर्ड फ्रेडरिक सेल्मसफोर्ड
15=1921 लॉर्ड रुक्स आईजेक रिडींग
16=1926 लॉर्ड एडवर्ड इरविन
17=1931 लॉर्ड फ्रिमेन वेलिंग्दन
18=1936 लॉर्ड एलेक्जंद लिन्लिथगो
19=1943 लॉर्ड आर्किबाल्ड वेवेल
20=1947 लॉर्ड माउन्टबेटन
ब्रिटिस राज समाप्त शासन काल 90 वर्ष लगभग

*आजाद भारत,प्राइम मिनिस्टर*

1=1947 जवाहरलाल नेहरू
2=1964 गुलजारीलाल नंदा
3=1964 लालबहादुर शास्त्री
4=1966 गुलजारीलाल नंदा
5=1966 इन्दिरा गांधी
6=1977 मोरारजी देसाई
7=1979 चरणसिंह
8=1980 इन्दिरा गांधी
9=1984 राजीव गांधी
10=1989 विश्वनाथ प्रतापसिंह
11=1990 चंद्रशेखर
12=1991 पी.वी.नरसिंह राव
13=अटल बिहारी वाजपेयी
14=1996 ऐच.डी.देवगौड़ा
15=1997 आई.के.गुजराल
16=1998 अटल बिहारी वाजपेयी
17=2004 डॉ.मनमोहनसिंह
*18=2014 से  नरेन्द्र मोदी*
764 सालों  बाद मुस्लिमों तथा अंग्रेज़ों के ग़ुलामी से आज़ादी मिली है। ये हिन्दुओं का देश है। यहाँ बहुसंख्यक होते हुए भी हिन्दू अपने ही देश ग़ुलाम बन के रहे और आज लोग कह रहे है। हिन्दू साम्प्रदायिक हो गए ,,,,,,,,.....
सदियों बाद हिन्दू की सरकार आयी है। सभी भारतियों को इन पर गर्व करना चाहिए।
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भारत के राज्यमंत्री ( स्वतन्त्र प्रभार )

राव इंद्रजीत सिंह    -    योजना ( स्वतन्त्र प्रभार ); रसायन व उर्वरक
सन्तोष कुमार गंगवार      -      श्रम एवं रोजगार
श्री पद येसो नायक           -       आयुर्वेद योगा एवं प्राकृतिक चिकित्सा;यूनानी,सिद्धा,होम्योपैथिक (आयुष)
डॉ. जितेंद्र सिन्हा              -        पूवोत्तर क्षेत्र विकास ( स्वतन्त्र प्रभार ); प्रधानमन्त्री कार्यालय; कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन
डॉ महेश शर्मा                  -         संस्कृति (स्वतन्त्र प्रभार); पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन
गिरिराज सिंह                  -          सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्धम
मनोज सिन्हा                    -          संचार ( स्वतन्त्र प्रभार ) ; रेल
राज्यवर्धन सिंह राठौर      -          युवा कार्य एवं खेल (स्वतन्त्र प्रभार) ; सूचना एवं प्रसारण
राजकुमार सिंह                 -           बिजली ; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा
हरदीप सिंह पूरी               -           आवास एवं शहरी कार्य
अल्फोन्स कनन्नथानम     -           पर्यटन (स्वतन्त्र प्रभार ) ; इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी

राज्य मंत्रियों के नाम एवं उनके पद (विभाग)

विजय गोयल     -      संसदीय कार्य ; सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन
राधाकृष्णन पी   -       वित्त ; जहाजरानी
एसएस अहलूवालिया     -     पेयजल एवं स्वच्छता
रमेश चंदप्पा जिगाजिनाजी     -      पेयजल एवं स्वच्छता
रामदास अठावले     -      सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
विष्णु देव साई           -      इस्पात
राम कृपाल यादव      -      ग्रामीण विकास
हंसराज गंगाधर अहीर      -        गृह
हरिभाई पार्थीभाई चौधरी   -        खनन; कोयला
राजेन गोहेन    -       रेल
वीके सिंह         -       विदेश
परशोत्तम रुपाला    -       कृषि एवं किसान कल्याण ; पंचायती राज
कृष्णपाल     -      सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
जसवंत सिंह सुमन भाई भाभोर  -     जनजातीय कार्य
शिव प्रताप शुक्ला     -       वित्त
अश्विनी कुमार चौबे   -        स्वास्थ्य व परिवार कल्याण
सुदर्शन भगत             -       जनजातीय कार्य
उपेन्द्र कुशवाहा          -        मानव संसाधन विकास
किरेन रिजिजु             -        गृह
डॉ वीरेंद्र कुमार           -        महिला व बालविकास; अल्पसंख्य्क कार्य
अनन्त कुमार हेगड़े     -        कौसल विकास एवं उद्धमिता
एमजे अकबर              -        विदेश
साध्वी निरंजन ज्योति  -       खाद्य प्रसंस्करण उद्द्योग
वाईएस चौधरी             -       विज्ञान एवं प्रौद्योगीकी; भु-विज्ञान
जियन्त सिन्हा              -        नागरिक विमानन
बाबुल सुप्रियो              -        भारी उद्दोग एवं सार्वजनिक उद्धम
विजय सांपला              -        सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
अर्जुन राम मेगघवाल    -       संसदीय कार्य; जल संसाधन; नदी विकास एवं गंगा संरक्षण
अजय टम्टा                  -       कपड़ा
कृष्णा राज                      -       कृषि एवं किसान कल्याण
मनसुख एल. माण्डविया  -      सड़क परिवहन एवं राजमार्ग; जहाजरानी; रसायन एवं उर्वरक
अनुप्रिया पटेल                -      स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
सीआर चौधरी                 -     उपभोक्ता मामले; खाद्य व सार्वजनिक वितरण; वाणिज्य एवं उद्दोग
पीपी चौधरी                    -      कानून व न्याय; कॉर्पोरेट कार्य
डॉ. सुभाष रामराव भामरे  -    रक्षा
गजेन्द्र सिंह शेखावत         -    कृषि एवं किसान कल्याण
सत्यपाल सिंह                   -     मानव संसाधन विकास; जल संसाधन; नदी विकास व गना संरक्षण
                      यह जानकारी किसी पुस्तक से देखकर लिखी गयी है इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर ब्लॉगर जिम्मेदार नही है अगर जानकारी गलत हो तो प्रूफ के साथ मुझे Gमेल करें। 
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क्या आप जानते हैं की भारत के विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के बारे में नही तो आओ जानें-

राज्य          -                राज्यपाल 

आंध्रप्रदेश   -               ईएसएल नरसिम्हन

अरुणाचल प्रदेश      -     बीही मिश्रा

असम          -               जगदीश मुखी

गोवा            -               मृदुला सिन्हा

गुजरात        -              ओपी कोहली

जम्मू-कश्मीर    -          एनएन वोहरा

कर्नाटक           -           वजुभाई आर. वाला

केरल               -           पी.सदशिवम

महाराष्ट्र          -            सी विद्धासागर राव

मणिपुर            -            नजमा हेपतुल्ला

मेघालय          -            गंगा प्रसाद

मिजोरम          -             निर्भय शर्मा

नागालैण्ड        -            पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य

ओडिशा          -            एससी जमीर

सिक्किम          -            श्रीनिवास पाटिल

तमिलनाडु       -            बनवारी लाल पुरोहित

त्रिपुरा              -            तथागत राय

उत्तराखण्ड      -            केके पॉल

पश्चिम बंगाल  -            केसरीनाथ त्रिपाठी

राजस्थान         -           कल्याण सिंह

उत्तर प्रदेश        -           राम नाईक

बिहार               -            सत्यपाल मलिक

पंजाब               -           वीपी सिंह बदनोर

हिमाचल प्रदेश  -           आचार्य देव व्रत

हरियाणा           -           केएस सोलंकी

मध्यप्रदेश         -           ओपी कोहली ( अतिरिक्त प्रभार )

छत्तीसगढ़         -           बलरामजी टण्डन (पूर्व)

तेलंगाना           -           ईएसएल नरसिम्हन

झारखण्ड          -           द्रोपदी मुर्मू

ये जानकारी मेरे द्वारा सामान्य ज्ञान की पुस्तक को देखकर लिखा गया है किसी भी गलती के लिए मैं जिम्मेदार नही हूँ अच्छा लगे तो टीप जरूर करें।  
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भारत के राज्यों के नाम और उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के नाम यहां पर बताया जा रहा है। 

राज्य                -      मुख्यमंत्री 

आंध्र प्रदेश         -      चन्द्र बाबू नायडू
अरुणाचल प्रदेश  -    पेमा खाण्डू
असम                   -     सर्वानन्द सोनोवाल
गोवा                     -     मनोहर पर्रिकर
गुजरात                -     विजय रुपाणी
जम्मू-कश्मीर        -     महबूबा मुफ्ती
कर्नाटक                -     के. सिद्धरमैया
केरल                     -     पी विजयन
महाराष्ट्र                -     देवेन्द्र फडणवीस
मणिपुर                  -     एन. बिरेन सिंह
मेघालय                 -     मुकुल संगमा
मिजोरम                 -     लालथनहवला
नागालैण्ड              -      टीआर जेलियांग
ओडिशा                 -      नवीन पटनायक
सिक्किम                -      पवन कुमार चामलिंग
तमिलनाडु              -      ईके पनालीसामी
त्रिपुरा                    -      माणिक सरकार
उत्तराखण्ड             -      त्रिवेन्द्र सिंह रावत
पश्चिम बंगाल        -       ममता बनर्जी
राजस्थान               -       वसुंधरा राजे
उत्तर प्रदेश             -        आदित्यनाथ योगी
बिहार                     -        नीतीश कुमार
पंजाब                     -        अमरिंदर सिंह
हिमाचल प्रदेश        -       वीरभद्र सिंह
हरियाणा                 -        मनोहर लाल खट्टर
मध्य प्रदेश              -        शिवराज सिंह चौहान
छत्तीसगढ़               -         रमन सिंह
तेलंगाना                 -         के. चन्द्रशेखर राव
झारखण्ड                -         रघबर दास 
            ये जानकारी आपको कैसे लगी कृपया टीप करें। 
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संघीय प्रदेश           मुख्यमंत्री
चण्डीगढ़ -   वीपी सिंह बदनोर (प्रकाशक) (अतिरिक्त प्रभार)
अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह   -     डी के जोशी (उप-राज्यपाल)
पुदुचेरी - वींआरायणासामी - किरणबेदी (उप-राज्यपाल)
दमन एवं दीव - प्रफुल्ल पटेल (प्रशासक)
दादरा एवं नगर हवेली - प्रफुल्ल पटेल (प्रशासक)
लक्ष्यद्वीप -     फारुख खान (प्रशासक)
दिल्ली     -  अरविंद केजरि वाल  -   अनिल बैजल (उप-राज्यपाल)
          कृपया गलती होने पर टिप जरूर करें।
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यहाँ पर भारत के सभी गुप्तचर विभाग के प्रमुख के नाम और उस विभाग के नाम जीसके वे प्रमुख हैं उनके बारे में बताया गया है। 

पद                       व्यक्तित्व

केंद्रीय जांच ब्यूरो           -              आलोक कुमार वर्मा
निदेशक,गुप्तचर ब्यूरो   -               राजीव जैन
निदेशक,रिसर्च एंड एनालिटिक विंग   -        अनिल धस्माना
निदेशक,नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन   -           आलोक जोशी
अध्यक्ष,राष्ट्रीय जांच एजेंसी          -           वाईसी मोदी
         आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कृपया शेयर जरूर करें।
        THANKS FOR READING.
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हेलो दोस्तों आज मैं इंडिया के political Gk in Hindi  question answer लेकर आया हु जो आपके लिए काफी जानकारी प्रदान करने वाला है  

India cabinet ministers

राम नाथ कोविंद     -      राष्ट्रपति

एम वेंकैया नायडू     -      उप-राष्ट्रपति

नरेन्द्र मोदी              -       प्रधानमंत्री,

भारत के कैबिनेट मंत्री 

मंत्री                                  मंत्रालय 

राजनाथ सिंह           -                   गृह

सुषमा स्वराज           -                  विदेश

निर्मला सीतारमण     -                 रक्षा मंत्री

अरुण जेटली            -                 वित्त; कॉर्पोरेट कार्य

नितिन गटकरी          -                सड़क परिवहन एवं राजमार्ग; 

सुरेश प्रभु                  -                वाणिज्य एवं उद्दोग

डीवी सदानन्द गौड़ा   -               सांख्यिकी एवं कार्यक्रम
                                           
उमा भारती                -               पेयजल एवं स्वच्छता

रामविलास पासवान   -               उपभोक्ता कार्य; खाद्य एवं

मेनका संजय गांधी     -               महिला एवं बाल विकास

अनन्त कुमार              -               रसायन एवं उर्वरक;

रविशंकर प्रसाद          -               कानून एवं न्याय; इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना -प्रौधोगिकी

जगत प्रकाश नडडा    -                स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

अशोक गजपति राजू  -                 नागरिक विमानन

अनन्त गीते                 -                 भारी उद्दोग एवं सार्वजनिक उद्धम

हरसिमरत कौर बादल     -             खाद्ध प्रसंस्करण उद्दोग

नरेंद्र सिंह तोमर                -            ग्रामीण विकास; पंचायती राज ; 

चौधरी बीरेंद्र सिंह              -           इस्पात

जुएल आराम                   -           जनजातीय कार्य

राधा मोहन सिंह               -          कृषि एवं कल्याण

थावर चन्द गहलोत          -           सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

स्मृति जुबिन ईरानी          -           कपड़ा; सूचना एवं प्रसारण

डॉ. हर्षवर्धन                    -           विज्ञान एवं प्रौधोगिकी;भु-विज्ञान

प्रकाश जावड़ेकर              -           मानव संसाधन विकास

धर्मेन्द्र प्रधान                     -           पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस;कौसल विकास 

पीयूष गोयल                      -           रेल ; कोयला

मुख्तार अब्बास नकवी       -           अल्पसंख्य्क कार्य

न्यायिक प्रमुख भारत के

पद                                                       व्यक्तिगत 

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश   -                दीपक मिश्रा

अटॉर्नी जनरल सॉलिसिटर जनरल     -                  केके वेणुगोपाल                      

अध्यक्ष,राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण     -                न्यायमूर्ति स्वतन्त्र कुमार

अध्यक्ष,बौद्धिक सम्पदा अपीलीय न्यायाधिकरण-   न्यायमूर्ति(से.)केएन बाशा

अध्यक्ष,सशस्त्र बल न्यायाधिकरण       -                  वीरेंद्र सिंह

निर्वाचन आयोग के प्रमुख व्यक्तित्व 

पद                                                           व्यक्तित्व

मुख्य चुनाव आयुक्त  -                                           अचल कुमार ज्योति

चुनाव आयुक्त           -                                            ओमप्रकाश रावत

चुनाव आयुक्त           -                                            सुनील अरोरा

उच्च न्यायालय     -      मुख्य न्यायधीश

त्रिपुरा                  -                 टी. वाईफेई

मेघालय              -                  दिनेश माहेश्वरी

मणिपुर                -                 राकेश रंजन प्रसाद

छत्तीसगढ़            -                 टीबी राधाकृष्णन

झारखण्ड            -                  डीएन पटेल(कार्यकारी)

सिक्किम              -                 सतीश कुमार अग्निहोत्री

राजस्थान            -                 प्रदीप नन्दराजोग

पंजाब और हरियाणा   -         एसजे वजीफदार

पटना                   -                राजेन्द्र मेनन

उत्तराखण्ड          -                केएम जोसेफ

उड़ीसा                 -               विनीत सरन

मद्रास                   -               कुमारी इंद्रा बनर्जी

मध्य प्रदेश           -                हेमन्त गुप्ता

केरल                   -               नवनीत पसाद सिंह

कर्नाटक               -              शुभ्रा कमल मुखर्जी

जम्मू-कश्मीर        -              बीडी अहमद

हिमाचल प्रदेश      -              मन्सूर अहमद मीर

गुजरात                -               आर.सुभाष रेड्डी

गुवाहाटी               -               अजीत सिंह

दिल्ली                   -               गीता मित्तल

कलकत्ता               -              एनएन महात्रे(कार्यकारी)

बम्बई                    -               मंजुला चेल्लूर

इलाहाबाद             -              दिलीप बाबासाहेब भोसले

तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश  -     रमेश रंगनाथन

संसद द्वारा कम्पनी ( संशोधन ) बिल पारित

संसद ने कम्पनी विधेयक 2017 पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य कम्पनी अधिनियम 2013 में महत्वपूर्ण परिवर्तन करना है। जुलाई, 2017 में लोकसभा ने इस संशोधन विधेयक को पारित कर दिया था जो 19 दिसम्बर, 2017 को राज्यसभा से पारित हुआ।

कम्पनी ( संशोधन ) विधेयक 2017 के आधार पर कॉर्पोरेट-गवर्नेंस को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसकी सहायता से डिफाल्टर कम्पनियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद ' इज ऑफ डूइंग बिजनेस ' को बढ़ावा देना आसान होगा।

संसोधन के महत्वपूर्ण बिंदु

* कम्पनियों को ऋण प्रदान करने की प्रक्रिया को सरलीकृत बनाना।
* शेयर होल्डर्स को अधिक सशक्त बनाने की प्रक्रिया तैयार करना।
* कम्पनियों की संरचना, सूचनाओं के खुलासे तथा नियमों के अनुपालन को अधिक व्यवहारिक बनाया जाना।
* निवेशकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेबी के नियमों को सख्ती से लागू करना।

          
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क्या आप जानते हैं की सशस्त्र सेना के प्रमुख कौन कौन हैं आओ जाने

पद    -        व्यक्तित्व 

थल सेनाध्यक्ष     -        जनरल बिपिन रावत
नौसेनाअध्यक्ष      -        एडमिरल सुनील लाम्बा
वायुसेनाअध्यक्ष    -        एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ
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क्या आप जानते हैं

 19 वीं सदी में बहुत सारे समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन हुए जिनका जिक्र आज मैं अपने ब्लॉग में करने जा रहा हूँ तो चलिए कुछ पुरानी यादें ताजा हो जाये-

भारतीय समाज तथा धर्म में सुधार की प्रक्रिया 19वीं शताब्दी में एक नए आंदोलन के रूप में उभरा जिसे भारतीय शिक्षित मध्य वर्ग ने अपना समर्थन प्रदान किया। विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के सहयोग से जनजागरण की चेतना ने अखिल भारतीय ग्रहण किया।

अंग्रेजी शासन की कुछ खामियों के कारण ये धर्म सुधार आवश्यक हो गया था।

समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन के क्या कारण हैं आओ जाने
1. पश्चिमी सभ्यता से सम्पर्क।
2. अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव।
3. मध्यम वर्ग का उदय।
4. ईसाई मिसनरीयों के कार्य।
5. समाचार पत्रों एवं आवागमन के साधनों का विकास।
6. राष्ट्रीयता की भावना का विकास।
समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन से जुड़ी कुछ संस्थाये निम्न हैं-
1. ब्रम्ह समाज- संस्थापक राममोहन राय स्थापना वर्ष-20 AUG 1826 कलकत्ता।
2. आर्य समाज- दयानन्द सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बम्बई में की गयी।
3. रामकृष्ण मिशन- स्वामी विवेकानन्द द्वारा 1896-97 में कलकत्ता के समीप बराह नगर में की गयी।
4. प्रार्थना समाज- आत्माराम पाण्डुरंग ने वर्ष 1867 में बम्बई में केशवचन्द्र सेन की सहायता से किया। पण्डिता रामाबाई ने इसे प्रसिद्धि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5. थियोसॉफिकल सोसायटी- मैडम ब्लावत्सकी एवं कर्नल हेनरी अल्काट द्वारा न्यूयार्क में जनवरी 1882 में की गयी। जनवरी 1882 मे भारत (मद्रास) आये और मुख्यालय स्थापित किया।
  तो दोस्तों आज के ब्लॉग में बस यही तक आगे हम जानेंगे प्रमुख समाज सुधारक के बारें में आगे इस टॉपिक में पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉग को सब्सक्राईब करें और GMAIL के माद्यम से पढ़ें।
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दोस्तों मैंने आपने पिछले ब्लॉग पोस्ट में भारत में सामाजिक सुधार के बारे में बताया था अब मैं आपको कुछ सुधार के बारे में बताने जा रहा हूँ-
सती प्रथा 
आप तो जानते ही हैं भारत में बहुत सारी प्रथाएं हुआ करती थी उन्ही में से एक प्रथा सति प्रथा था तो आओ जाने सती प्रथा होता क्या था इस प्रथा में लोगों की ये भावना थी की पति की मृत्यु के पश्चात पत्नी को जीने का कोई अधिकार नहीं। इस कारण पत्नी को पति की मृत्यु के पश्चात,उसके साथ ही चिता में बैठा कर जला दिया जाता था।
सती प्रथा का समापन एक पुर्तगाली वायसराय अल्बुकर्क ने सर्व प्रथम वर्ष 1510 में गोवा मे इस प्रथा को बन्द करवाया था। राजा राममोहन राय के प्रयासों से लॉर्ड विलियम बैंण्टिक ने 4 दिसम्बर ,1829 को 17वें नियम के तहत बंगाल में सती प्रथा पर रोक लगा दी। साथ ही 1830 में मुम्बई एवं मद्रास सहित अन्य क्षेत्रों में भी सती प्रथा पर रोक लगा दी गई। इस प्रकार सती प्रथा का समापन हुआ।
बाल विवाह
आप जानते ही होंगे की बाल विवाह क्या होता है अगर नहीं जानते तो चलिए मैं आपको बताता हूँ बाल विवाह में होता क्या था बाल विवाह में बच्चों की शादियां कर दि जाती थीं और उसे बचपन से ही विवाहित मान लिया जाता था। जिसके कारण अगर दुर्घटना वश उसके पति की मृत्यु भी हो जाती तो वह बचपन में ही विधवा हो जाती और अन्य के साथ विवाह नहीं कर पाती और उम्र भर उसे विधवा बनकर रहना पड़ता था कई सारी मुस्किलो का सामना करना पड़ता था।
तो आइये जानते हैं की बाल विवाह का अंत कैसे हुआ। बाल विवाह के विरुद्ध सर्व प्रथम आवाज राजा राममोहन राय ने उठाई थी,परन्तु  केशवचन्द्र सेन व बीएम मालाबारी के प्रयासों से सर्व प्रथम वर्ष 1872 में देसी बाल विवाह अधिनियम पारित हुआ था। इस अधिनियम मे 14 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं तथा 18 वर्ष से कम आयु के बालकों के विवाह को प्रतिबंधित किया गया।
            एसएस बंगाली के प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 1891 में ब्रिटिश सरकार ने एज ऑफ़ कन्सेंट एक्ट पारित किया,जिसमें 12 वर्ष से कम आयु की कन्याओं के विवाह पर रोक लगा दी गई। वर्ष 1930 में बाल विवाह को रोकने के लिए शारदा अधिनियम पारित किया गया , जिसमें विवाह की आयु बालिकाओं के लिए 14 वर्ष तथा बालकों के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई।
विधवा
उनको कहा जाता है जिनकी पति मर गए होते हैं। पहले विधवाओं को फिर से विवाह करने का अधिकार नहीं हुआ करता था जिसके कारण महिलाओं को उम्र भर अकेले ही गुजारना पड़ता था। तथा अनेक कठनाइयों का सामना करना पड़ता था। तो फिर इस प्रथा का अंत कैसे हुआ आओ जानते हैं इस प्रथा के अंत को एक नाम दिया गया विधवा पुनर्विवाह का।
विधवा पुनर्विवाह 
के क्षेत्र में सर्वाधिक योगदान कलकत्ता के एक संस्कृत कॉलेज के आचार्य ईश्वरचन्द्र विधासागर ने दिया। उन्होंने एक हजार हस्ताक्षरों से युक्त-पत्र,डलहौजी को भेजकर विधवा विवाह को कानूनी रूप देने का अनुरोध किया था। ईश्वरचन्द्र विधासागर के प्रयासों के फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार (लॉर्ड कैनिग के समय) ने वर्ष 1856 में हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 15 पारित किया,जिसमें विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दी गयी। डी के  कर्वे एवं वीरेसलिंगम पुनतालु ने भी विधवा पुनर्विवाह के लिए कार्य किया।
बाल-हत्या प्रथा 
यह प्रथा बंगाल के राजपूतों में अधिक प्रचलित थी। इनमें बालिका शिशुओं को बेरहमी से मार दिया जाता था। वर्ष 1975 में बंगाल नियम-21 और वर्ष 1804 में नियम-3 के तहत इस कुप्रथा को रोकने के प्रयास किए गए।       
दास प्रथा 
वर्ष 1789 में दासों के निर्यात को बन्द कर दिया गया। वर्ष 1833 के चार्टर ऐक्ट द्वारा ब्रिटिश सरकार ने दासता पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था तथा प्रतिबन्ध को वर्ष 1843 में सम्पूर्ण भारत पर लागू किया गया। वर्ष 1860 में दासता को भारतीय दण्ड सहिंता के द्वारा अपराध घोषित कर दिया गया।
           इस प्रकार यदि देखा जाये तो भारत के सामाजिक सुधार में भारतीयों के साथ-साथ अंग्रेजी शासन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसकी वजह से ही भारत आज इतनी दूर निकल आया है लेकिन आभी भी भारत में कुछ ऐसी प्रथाए जिनका निवारण करना बाँकी है।
जैसे-जाती वाद अभी भी कहीं न कहीं देखने को मिलता।
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,सब हैं भारत में लेकिन एकता थोड़ी कम हो रही हैं इसलिए एकता बनाकर चले तभी जीने का मजा है।  

Saturday, October 20, 2018

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आपने ओडिशा के बारे में बहुँत कुछ सुना या पढ़ा होगा लेकिन शायद आपके ज्ञान को और बढ़ाने के उद्देश्य से पोस्ट लिखा गया है। तो चलिए जानते हैं ओडिशा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और समान्य  ज्ञान के बारे में समान्य ज्ञान होता क्या है समान्य ज्ञान किसी भी क्षेत्र का मुख्य बिंदु होता है जो हमें उसके मुख्य बातों के बारे में बताता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

1. ओडिशा का राजकीय पशु सांवर हिरण है।
2. इस प्रदेश का राजकीय पक्षी ' इण्डियन रोलर ' है।
3. इस राज्य का राजकीय पुष्प अशोक है।
4. इस प्रदेश का राजकीय वृक्ष पीपल है।
5. राज्य का राजकीय सरीसृप खारे पानी का मगरमच्छ है।
6. राजकीय मुहर कोणार्क सन टैण्डर का प्रतिनिधित्व करता है।
7. ओडीशा का सर्वाधिक सुखा ग्रस्त जिला कालाहाडी है।
8. ओडीशा के कालाहाडी को भारत का इरीट्रिया कहा जाता है।
9. गाहिरमाथा कछुआ के प्रजनन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है।
10. पाराद्वीप बन्दरगाह से तालचेर का कोयला निर्यात किया जाता है।
11. ओडिशा के बालेश्वर के पूर्वी तट पर चाँदीपुर प्रक्षेपण केंद्र स्थित है।
12. मचकुण्ड जलाशय सिलेरु नदी पर बना जलाशय है।
13. सिमलीपाल जैव मण्डलीय क्षेत्र की स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी।
14. व्हीलर द्वीप केन्द्रपाड़ा जिले में स्थित हैं।
15. ओडिशा में महानदी पर बना ' हीराकुण्ड ' जलाशय विश्व का सबसे लम्बा जलाशय है।
16. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को मन्दिरों के कारण ' The cathedral city of india ' के नाम से जाना जाता है।
17. भुवनेश्वर में विश्व का एकमात्र सफेद बाघ सफारी अभ्यारण्य स्थापित किया गया है।

ओडिशा एक झलक में 

यह अक्षांश में 17°4' उत्तर से 22°3' उत्तर पर स्थित है।
इसके देशान्तर की बारे में यह 82°2' पूर्व से 87°2' पूर्व में स्थित है।
इस राज्य कि स्थापना वर्ष 5 अगस्त , 1947 है।
इस राज्य का क्षेत्रफल 155707 वर्ग किमी है।
इस राज्य की जनसंख्या 41974218 है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर है।
ओडिशा का उच्च न्यायालय कटक में स्थित है।
ओडिशा राज्य की भाषा ओड़िया ही है।
लिंगानुपात 978 है। 2011 के अनुसार।
साक्षरता दर 72.8 % है 2011 के अनुसार।
ओडिशा के कुल जिले की संख्या 30 है वर्ष 2011 के अनुसार।
यहां के मुख्यमंत्री श्री मान नवीन पटनायक हैं।
ओडिशा के राज्यपाल एससी जमीर हैं।
उच्च न्यायालय का  नाम क्या है ओडिशा उच्च न्यायालय।
अब अगर पर्यटन स्थल की बात करें तो यहाँ पर पर्यटन स्थल का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है।
सूर्य मंदिर जो की कोणार्क में स्थित है बहुत हि प्रसिद्ध स्थान है। लिंगाराज मन्दिर भुवनेश्वर में स्थित है। इसके अलावा और भी बहुत सारे पर्यटन स्थल हैं जो की अपनी मनोरम झांकी प्रस्तुत करते हैं।
जैसे -  सुन्दरपुरी तट, गाहिरमाथा, उदयगिरी, खण्डगीरी प्राचीन गुफा , हीराकुण्ड बॉंध, पुरी का जगन्नाथ मन्दिर , दुदुमा जल प्रपात , तप्तापानी , भीमकुण्ड, कपिलाश, धौली बौद्ध मन्दिर प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के नाम हैं।
अब इसके अभ्यारण की बात करें तो यहां पर निम्न अभ्यारण्य आपको देखने को मिलेंगे।
नंदनकानन जहां पर सफेद बाघ पाया जाता है। सिमलीपाल जो टाइगर रिजर्व अभ्यारण्य है। भितरकनिका में मगरमच्छ पाया जाता है। इसके अलावा और अनेक अभ्यारण्य हैं जो की निम्न नामो से जाने जाते हैं- कपिलेश वन्य जीव, सतकोसिया जॉर्ज प्राणी, चिल्का, कार्लपट वन्य जीव, उषाकोठी वन्यजीव आदि प्रमुख अभ्यारण्य हैं।
 

दोस्त आपको ये जानकारी कैसे लगी अन्य जानकारियों के लिए बने रहे मेरे साथ।
धन्यवाद।  thanks so much for supporting me

Wednesday, October 17, 2018

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आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर, आज कल बहुत सारे ऐसे टॉपिक हैं जिस पर निबन्ध का   आयोजन विभिन्न संस्थाओ द्वारा किया जाता है। आज मैंने जो टॉपिक चुना है वो राष्ट्रीय पोषण मिशन पर आधारित है तो चलिए आपको मैं ले चलता हूँ इस टॉपिक के ऊपर लिखे निबन्ध की तरफ  ----

परिचय -

             राष्ट्रीय पोषण मिशन भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा एक कार्यक्रम है जिसमें पोषण से सम्बंधित विभीन्न समस्याओं पर कार्य किया जाता है और उसका निवारण किया जाता है। ये मिशन भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है।

क्या है कुपोषण -

           
कुपोषण वह स्थिति होता है , जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय के लिए नहीं मिल पाते हैं, और इसके कारण शरीर पर विभिन्न प्रकार के कमजोरियां हो जाती है इसी कारण इसे कुपोषण कहा जाता है। इस प्रकार कुपोषण के कारण महिलाओं में घेंघा रोग और बच्चों में सुखा तथा रतौंधी आदि रोग इसके ही कारण होता है। ये किसी एक कारण से नहीं होता है ये अनेक कारण से हो सकता है। ये किसी भी अमीर या गरीब देश की समस्या नहीं है बल्कि ये पूरे विश्व में फैली एक ज्वलंत समस्या है।
       इसका कारण क्या है इस पर चर्चा करें तो इसके मुख्य कारण गरीबी व अज्ञानता है। संयुक्त राज्य के अनुसार भारत में हर वर्ष कुपोषण के कारण मरने वाले बच्चों में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 10 लाख से भी अधिक है। दक्षिण एशिया देशों में जनसंख्या के आधार पर देखा जाये तो भारत में कुपोषण की दर सबसे अधिक है।
भारत में 5 वर्ष से कम उम्र वाले कुपोषित बच्चों की संख्या 21% है।

राष्ट्रीय पोषण मिशन की आवश्यकता --

            राष्ट्रीय पोषण मिशन, इसकी  आवश्यकता इसलिए है क्योकि इस कार्यक्रम या मिशन के साथ जुड़कर आप भारत में व्याप्त विभिन्न प्रकार की कुपोषन सम्बंधित समस्याओं को दूर किया जा सके। इस पोषण मिशन को लगभग 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसी मिशन से हमें पता चला की लगभग आधे बच्चे भारत के कुपोषित हैं।
इस समस्या के निदान के लिए भारत सरकार  के पास एक ही विकल्प था - बाल विकास एकीकृत योजना (Integreted Child devlopment Services Scheme ICDS) इस समस्या को दूर करने के लिये भारत में आंगनबाड़ी कार्यकत्रीयों को भी जोड़ा गया लेकिन इससे भी किसी प्राकर का ज्यादा बदलाव नजर नहीं आया है। इस मिशन को पूरा करने के लिए सरकार ने आदेश दिया है की कोई भी योजना बनाकर इस कार्य को पूर्ण किया जाय क्योकि बच्चों की विकलांगता के कारण और भी बहुत सारी परेशानी होते हैं।
एक अनुमान के आधार पर बच्चे के जन्म के बाद 2 वर्ष के अंतर्गत भी कुपोषण हो सकता है।  

भारत में कुपोषण की स्थिति -

             भारत में कुपोषण की स्थिति ज्ञात करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अतिरिक्त कुछ अन्य संगठनों ने भी अपनी रिपोर्ट दी है, जो निम्नलिखित है---

ग्लोबल हंगर रिपोर्ट-

           अंतराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसन्धान संस्थान ( आईएफपीआरटी  ) द्वारा हाल ही में एक ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार,119 देशों के आंकड़ों में भारत 100वें पायदान पर है तथा उत्तर कोरिया एवं बंगाल से भी पीछे हैं। पिछले वर्ष भारत 97 वें स्थान पर था।

विश्व बैंक की रिपोर्ट -

        विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत कुपोषण के मामले में सबसे अग्रणी हैं। यहाँ पर कम वजन वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है और जो उप सहारा अफ्रीकन की तुलना में लगभग दोगुनी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -

         यह एक प्रकार का स्वास्थ्य सर्वेक्षण है , जिसमें भारत के स्वास्थ्य स्थिति के विषय में जानकारी प्रदान की गयी है इस सर्वेक्षण के अनुसार , भारत के महिलाओं और बच्चों के समग्र पोषण स्तर में गिरावट आई है।
हालांकि समान विकास दर वाली दूसरे देशों की तुलना में भारत यह अपेक्षाकृत कम है। इस सर्वेक्षण में कुपोषण के साथ साथ अन्य क्षेत्रों में भी सुधार हुए हैं। किन्तु इसकी जो गति है वह उतनी खास नही रही है। इस समस्या से निपटने के लिए इसे विकास के एजेंडे के केंद्र में लाने के लिए ही नीति आयोग ने राष्ट्रीय पोषण नीति तैयार की है।

राष्ट्रीय पोषण मिशन के लक्ष्य -

* यह मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण सम्बन्धी हस्तक्षेपों की निगरानी पर्यवेक्षक तथा उनके लक्ष्य का निर्धारण का कार्य करेगा।
* इस मिशन का लक्ष्य कुपोषण के शिकार बच्चों के रक्ताल्पता को कम करना और ठिगनापन को कम कर उनके कम वजन में भी कमी लाना है। यह लक्ष्य 2% से 3% तक रखा गया है।
* कुपोषण जैसे भीषण समस्या के कार्यक्रम बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
* मजबूत अभीसरण तन्त्र प्रारम्भ करना।
* मिशन को प्राप्त करने के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करना है।
* IT BASED उपकरणों के प्रयोग के लिए आँगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रोत्साहित करना।
* आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के कद मापन की प्रक्रिया को लगातार जारी रखना।
               राष्ट्रीय कुपोषण मिशन का लक्ष्य कुपोषण और जन्म के समय बच्चों का वजन कम होने की समस्याओं को हर वर्ष 2% तक कम करना है। इसके अतिरिक्त इसका मुख्य लक्ष्य -महिलाओं शिशुओं ,महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया को 2% तक प्रतिवर्ष कम करना है।
इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1 दिसम्बर ,2017 को कुपोषण , जन्म के समय बच्चों का वजन कम होने आदि की समस्याओं से निपटने के लिए तीन वर्ष की अवधि तक लिए 9046 करोड़ के बजट के साथ राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत को मंजूरी दे दी है।

कुपोषण मुक्त भारत 2022 -

            महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण को समाप्त करने का लक्ष्य ' अल्प पोषण से निपटने के लिए मोड़ ' कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारीत किया है। जिसके लिए पूरक पोषण की गुणवत्ता में सुधार लाकर वितरण व्यवस्था को कार्यकुशल बनाया जा रहा है।
इसके लिए महिलाओं हेतु 1000 कैलोरी तथा बच्चों को 600 कैलोरी तक का पोषण उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए भोजन की पोषकता आहार विविधिकरण , मिशन इंद्रधनुष तथा स्तनपान के माध्यम से स्थायी समाधान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार में निगरानी को उच्चस्तरीय बनाना आदि उपायों पर जोर दिया जायेगा।

निष्कर्ष --

     किसी भी को विकसित बनाने का सपना तभी पूरा होगा जब वहां के नागरिक स्वस्थ होंगे। इसके लिए आवश्यक है की बच्चों के कुपोषण सम्बंधित समस्याओं को दूर किया जाये। इसके लिए खाद्य और पोषण आयोग की स्थापना के साथ-साथ पोषण के स्तर को बढ़ाए जाने की जरूरत पर भी ध्यान देने की जरूरत पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। फूड फोरतीफिकेशन को सुनिश्चित कर इसके लिए कानून बनाना भी अच्छा कदम है।
      आपको ये निबन्ध कैसे लगा Comment  जरूर करें। कृपया अन्य जानकारियों के लिए बने रहें मेरे साथ धन्यवाद !                      
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