अरल सागर कहां है - Where is the Aral Sea

अराल सागर का इतिहास हज़ारों साल पुराना है। इसके किनारों पर प्राचीन सभ्यताएँ बसी थीं। बीसवीं सदी की शुरुआत तक, अराल सागर दुनिया के सबसे बड़े जल-निकायों में से एक बन गया था, जो लगभग 68,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था।

अरल सागर कहां है

अरल सागर मध्य एशिया में स्थित एक झील है, जो उत्तर में कजाकिस्तान और दक्षिण में उज्बेकिस्तान के बीच स्थित है। अरल सागर में मुख्य रूप से दो बड़ी नदियों - अमू दरिया और सिर दरिया से पानी आता था।

इतिहास में, अरल सागर लगभग 68,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ था और यहाँ मछली पकड़ने का एक बड़ा उद्योग था। हालाँकि, 1960 के दशक में, पूर्व सोवियत संघ द्वारा शुरू की गई बड़े पैमाने की सिंचाई परियोजनाओं के कारण उन नदियों का पानी दूसरी तरफ मोड़ दिया गया जो इस सागर में गिरती थीं।

जिसके कारण अरल सागर तेज़ी से सिकुड़ने लगा। आने वाले दशकों में, इसके जल स्तर में भारी गिरावट आई और झील कई छोटे-छोटे जल-क्षेत्रों में बंट गई। 21वीं सदी की शुरुआत तक, अरल सागर का ज़्यादातर हिस्सा गायब हो चुका था और पीछे सूखी, खारी ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा रह गया, जिसे अरलकुम रेगिस्तान के नाम से जाना जाता है।

अरल सागर कहां है - Where is the Aral Sea

अरल सागर किस देश में है

अरल सागर मध्य एशिया में कज़ाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान देशों के बीच स्थित है। इस सागर का उत्तरी हिस्सा कज़ाकिस्तान में है, जबकि दक्षिणी हिस्सा उज़्बेकिस्तान में है। क्योंकि यह इन दो देशों के बीच बंटा हुआ है, इसलिए अरल सागर को एक 'ट्रांसबाउंड्री' जल निकाय माना जाता है।

ऐतिहासिक रूप से, अरल सागर दुनिया की सबसे बड़ी अंतर्देशीय झीलों में से एक था। इसने मध्य एशिया के रेगिस्तानी इलाके में एक बहुत बड़ा क्षेत्र घेरा हुआ था और आसपास के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

आज, यह सागर कई छोटे जल निकायों में बंट गया है, जिसका उत्तरी हिस्सा मुख्य रूप से कज़ाकिस्तान में है और दक्षिणी क्षेत्र उज़्बेकिस्तान में हैं। कज़ाकिस्तान में सागर के कुछ हिस्सों को बहाल करने के प्रयास किए गए हैं। 

अरल सागर का क्षेत्रफल

कभी अरल सागर का क्षेत्रफल लगभग 68,000 वर्ग किलोमीटर था, जिससे यह 1960 के दशक में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी झील बन गई थी।

अमू दरिया और सिर दरिया नदियों का पानी दूसरी तरफ मोड़े जाने के कारण, 2000 के दशक की शुरुआत तक, इसने अपने मूल सतह क्षेत्र का लगभग 90% हिस्सा खो दिया है।

मौजूदा क्षेत्रफल लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर से कम है। अरल सागर का क्षेत्रफल मौसम के आधार पर बदलता रहता हैं।

अरल सागर क्यों सूख गया

अरल सागर का सूखना आधुनिक इतिहास की सबसे गंभीर पर्यावरणीय आपदाओं में से एक है। कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच स्थित अरल सागर कभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी झील हुआ करती थी। इसके सूखने का मुख्य कारण प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन नहीं, बल्कि इंसानी गतिविधियाँ है।

अरल सागर को पानी मुख्य रूप से दो नदियों - अमू दरिया और सिर दरिया से मिलता था। 1960 के दशक में, तत्कालीन सोवियत संघ की सरकार ने मध्य एशिया के सूखे इलाकों में कपास और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े सिंचाई शुरू किए। इन नदियों का पानी खेतों तक पहुँचाने के लिए बड़ी-बड़ी नहरें और सिंचाई प्रणालियाँ बनाई गईं।

जैसे-जैसे सिंचाई के लिए नदियों का पानी ज़्यादा इस्तेमाल होने लगा, अरल सागर तक पहुँचने वाला पानी कम होता गया। समय के साथ, सागर में आने वाले पानी की मात्रा बहुत कम हो गई। नतीजतन, सागर तेज़ी से सिकुड़ने लगा। जल स्तर गिर गया और क्षेत्रफल भी  बहुत कम हो गया। 21वीं सदी की शुरुआत तक, सागर का ज़्यादातर हिस्सा गायब हो चुका था और पीछे एक विशाल रेगिस्तान रह गया, जिसे अरलकुम रेगिस्तान के नाम से जाना जाता है।

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