तुर्कमेनिस्तान की राजधानी क्या है - Capital of Turkmenistan

तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एक लैंडलॉक्ड देश है। इसके उत्तर में कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान, दक्षिण-पूर्व में अफगानिस्तान, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में ईरान और पश्चिम में कैस्पियन सागर है।

तुर्कमेनिस्तान की राजधानी क्या है 

अश्गाबात इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। देश की आबादी 70 लाख से ज़्यादा है, जिससे यह एशिया के सबसे कम आबादी वाले और सबसे कम घनी आबादी वाले देशों में से एक है।

तुर्कमेनिस्तान का इतिहास बहुत लंबा और समृद्ध है। सदियों तक, यह साम्राज्यों और संस्कृतियों के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता था। प्राचीन शहर मर्व मध्य एशिया के सबसे पुराने नखलिस्तान शहरों में से एक है और कभी दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक था। 

यह इस्लामी संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र भी था और सिल्क रोड पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। 1881 में, तुर्कमेनिस्तान पर रूसी साम्राज्य का कब्ज़ा हो गया और बाद में 1925 में यह सोवियत संघ का हिस्सा बन गया। सोवियत संघ के टूटने के बाद 1991 में देश को आज़ादी मिली।

आज़ादी के बाद से, तुर्कमेनिस्तान पर सत्तावादी सरकारों का शासन रहा है। देश में मानवाधिकारों की स्थिति खराब है, जिसमें बोलने, प्रेस और धर्म की आज़ादी सीमित है। सत्ता उसी नेतृत्व के पास रही है, जिसमें मौजूदा राष्ट्रपति अपने पिता के साथ सत्ता साझा करते हैं।

तुर्कमेनिस्तान में प्राकृतिक संसाधन भरपूर हैं, खासकर प्राकृतिक गैस, जिसके दुनिया में पाँचवें सबसे बड़े भंडार हैं। देश का ज़्यादातर हिस्सा काराकुम रेगिस्तान से ढका हुआ है। कई सालों तक, सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बिजली, पानी और प्राकृतिक गैस दी। तुर्कमेनिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है और तुर्की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय संगठनों में भी भाग लेता है।

तुर्कमेनिस्तान का क्षेत्रफल

तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया में स्थित एक विशाल देश है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 491,210 वर्ग किलोमीटर है। ज़मीन के क्षेत्रफल के हिसाब से तुर्कमेनिस्तान दुनिया के बड़े देशों में गिना जाता है और मध्य एशिया का एक अहम देश है। इसके ज़्यादातर इलाके में रेगिस्तान और सूखी ज़मीन है।

काराकुम रेगिस्तान तुर्कमेनिस्तान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा घेरे हुए है। यह रेगिस्तान देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में फैला हुआ है और देश की भौगोलिक पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाता है। 

देश की पश्चिमी सीमा कैस्पियन सागर से लगती है, जबकि उत्तर में कजाकिस्तान, उत्तर और पूर्व में उज्बेकिस्तान, दक्षिण में अफगानिस्तान और दक्षिण-पश्चिम में ईरान स्थित है।

तुर्कमेनिस्तान का क्षेत्रफल तो बड़ा है, लेकिन आबादी अपेक्षाकृत कम है। इसका मुख्य कारण कठोर जलवायु, पानी की सीमित उपलब्धता और विशाल रेगिस्तानी इलाका है। ज़्यादातर आबादी शहरों, नदियों और सिंचाई वाले कृषि क्षेत्रों के पास रहती है।

तुर्कमेनिस्तान का विशाल इलाका प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कि प्राकृतिक गैस और तेल, के मामले में भी बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर, देश के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। 

इस तरह, लगभग 491,000 वर्ग किलोमीटर में फैला तुर्कमेनिस्तान भूगोल और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध, मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है।

तुर्कमेनिस्तान का इतिहास

तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है, जिसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही मध्य एशिया, ईरान और पश्चिमी एशिया के बीच व्यापारिक मार्गों का प्रमुख केंद्र रहा है। प्राचीन समय में यहाँ विभिन्न ईरानी और तुर्की समुदायों का निवास था। 

प्राचीन काल

तुर्कमेनिस्तान का क्षेत्र प्राचीन रेशम मार्ग का हिस्सा था। मर्व और निसा जैसे नगर व्यापार, संस्कृति और शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र बने। निसा पार्थियन साम्राज्य की प्रमुख राजधानियों में से एक था। बाद के समय में यह क्षेत्र फारसी साम्राज्यों और विभिन्न मध्य एशियाई शक्तियों के अधीन रहा।

इस्लामी और मध्यकालीन काल

7वीं–8वीं शताब्दी में अरबों के आगमन के साथ इस क्षेत्र में इस्लाम का प्रसार हुआ। इसके बाद सामानी, गजनवी, सेल्जुक और ख्वारिज्मशाह जैसे विभिन्न राजवंशों का प्रभाव रहा। 13वीं शताब्दी में मंगोल आक्रमण ने क्षेत्र के कई शहरों और व्यापारिक केंद्रों को भारी नुकसान पहुँचाया।

रूसी साम्राज्य और सोवियत काल

19वीं शताब्दी में रूसी साम्राज्य ने मध्य एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया। 1881 में गेओक-तेपे के युद्ध के बाद वर्तमान तुर्कमेनिस्तान का अधिकांश क्षेत्र रूसी नियंत्रण में आ गया। 1924 में तुर्कमेन सोवियत समाजवादी गणराज्य का गठन हुआ और यह सोवियत संघ का हिस्सा बन गया।

स्वतंत्र तुर्कमेनिस्तान

सोवियत संघ के विघटन के बाद 27 अक्टूबर 1991 को तुर्कमेनिस्तान ने स्वतंत्रता प्राप्त की। इसके बाद सपरमुरात नियाज़ोव देश के पहले राष्ट्रपति बने। उनके शासन के बाद 2006 में गुरबांगुली बर्दीमुहामेदोव राष्ट्रपति बने। 2022 में उनके पुत्र सर्दार बर्दीमुहामेदोव राष्ट्रपति बने।

आज तुर्कमेनिस्तान अपनी विशाल प्राकृतिक गैस संपदा, काराकुम मरुस्थल और ऐतिहासिक नगरों के लिए जाना जाता है। इसकी राजधानी अश्गाबात है।

तुर्कमेनिस्तान कहाँ है

तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया में स्थित एक देश है। यह एशिया महाद्वीप के पश्चिमी भाग में स्थित है और इसका क्षेत्र मुख्य रूप से विशाल काराकुम मरुस्थल से घिरा हुआ है। तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात है, जो देश के दक्षिणी भाग में ईरान की सीमा के पास स्थित है।

तुर्कमेनिस्तान की सीमाएँ कई देशों से मिलती हैं। इसके उत्तर-पश्चिम में कजाकिस्तान, उत्तर और उत्तर-पूर्व में उज्बेकिस्तान, दक्षिण में ईरान तथा दक्षिण-पूर्व में अफगानिस्तान स्थित है। 

देश के पश्चिम में कैस्पियन सागर है। कैस्पियन सागर के कारण तुर्कमेनिस्तान का संपर्क पश्चिमी एशिया और यूरोप के कुछ क्षेत्रों से भी समुद्री मार्ग द्वारा होता है।

तुर्कमेनिस्तान का अधिकांश भू-भाग शुष्क और रेगिस्तानी है। देश के लगभग बड़े हिस्से में काराकुम मरुस्थल फैला हुआ है। यहाँ की जलवायु मुख्यतः शुष्क महाद्वीपीय है, जिसमें गर्मियाँ बहुत गर्म और सर्दियाँ अपेक्षाकृत ठंडी होती हैं।

भौगोलिक दृष्टि से तुर्कमेनिस्तान का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यूरोप और एशिया के बीच प्राचीन व्यापारिक मार्गों के आसपास स्थित रहा है। प्राचीन रेशम मार्ग की कई शाखाएँ इस क्षेत्र से होकर गुजरती थीं। इसके अलावा, देश प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार के लिए भी प्रसिद्ध है।

इस प्रकार, तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है, जिसकी भौगोलिक स्थिति, विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र, कैस्पियन सागर का तट और प्राकृतिक संसाधन इसे विशेष महत्व प्रदान करते हैं।

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