चीन सागर कहा है - chin sagar kahan hai

चीन सागर, प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से में स्थित पानी का एक बड़ा क्षेत्र है। इसे मुख्यतः दो हिस्सों में बांटा गया है - दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर

दक्षिण चीन सागर, चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के बीच स्थित है। यह कई जलडमरूमध्यों के ज़रिए प्रशांत महासागर से जुड़ता है और लगभग 47 लाख वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है। यह सागर दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट में से एक है और यहाँ मछली, तेल और प्राकृतिक गैस भरपूर मात्रा में पाई जाती है।

पूर्वी चीन सागर, पूर्वी चीन, ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच स्थित है। यह उत्तर में पीला सागर और पूर्व में प्रशांत महासागर से जुड़ा हुआ है। यह व्यापार, मछली पकड़ने और परिवहन में भी अहम भूमिका निभाता है।

चीन सागर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मदद करता है, समुद्री संसाधन उपलब्ध कराता है। कई देश मछली पकड़ने, शिपिंग और आर्थिक गतिविधियों के लिए इस पर निर्भर हैं। हालाँकि, चीन सागर के कुछ हिस्सों को लेकर पड़ोसी देशों के बीच क्षेत्रीय विवाद हैं, क्योंकि वे द्वीपों और पानी के नीचे मौजूद संसाधनों पर अपना-अपना दावा करते हैं।

चीन सागर कहा है

चीन सागर का क्षेत्रफल 

चीन सागर मुख्य रूप से दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर से मिलकर बना है। इनमें से दक्षिण चीन सागर का क्षेत्रफल लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि पूर्वी चीन सागर का क्षेत्रफल लगभग 12.5 लाख वर्ग किलोमीटर है। इस प्रकार दोनों का संयुक्त क्षेत्रफल लगभग 47 लाख वर्ग किलोमीटर माना जाता है। 

यह विशाल समुद्री क्षेत्र एशिया के कई देशों, जैसे चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है तथा मत्स्य पालन, तेल, प्राकृतिक गैस और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

दक्षिण चीन सागर किस महासागर का सीमांत सागर है

दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर का एक प्रमुख सीमांत सागर है। यह एशिया के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है और विश्व के सबसे बड़े सीमांत सागरों में से एक माना जाता है। यह सागर चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया और ताइवान जैसे देशों से घिरा हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 47 लाख वर्ग किलोमीटर है।

दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर से कई जलडमरूमध्यों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। पूर्व में यह फिलीपींस के पास स्थित लूज़ोन जलडमरूमध्य द्वारा प्रशांत महासागर से मिलता है, जबकि दक्षिण में मलक्का जलडमरूमध्य और अन्य समुद्री मार्गों के माध्यम से हिंद महासागर से भी इसका संपर्क स्थापित होता है।

यह सागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्व के समुद्री व्यापार का एक बड़ा भाग इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसके अतिरिक्त यहाँ मछलियों के समृद्ध भंडार, तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार पाए जाते हैं, जिससे इसका आर्थिक महत्व और बढ़ जाता है।

दक्षिण चीन सागर सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अनेक द्वीपों और समुद्री क्षेत्रों पर चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई तथा ताइवान अपने-अपने दावे करते हैं। इसी कारण यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समुद्री विवादों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

दक्षिण चीन सागर विवाद

दक्षिण चीन सागर का विवाद कई देशों के बीच वहां मौजूद द्वीपों, रीफ़ और आस-पास के समुद्री इलाकों के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। इसमें चीन, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। 

हर देश समुद्र के अलग-अलग हिस्सों पर अपना हक जताता है क्योंकि यह इलाका मछली, तेल, प्राकृतिक गैस और ज़रूरी शिपिंग रूट के मामले में बहुत समृद्ध है।

चीन अपनी नाइन-डैश लाइन के ज़रिए दक्षिण चीन सागर के ज़्यादातर हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि दूसरे देशों का तर्क है कि ये दावे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके अपने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन के साथ टकराते हैं। 2016 में, एक अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के तहत चीन के व्यापक दावों का कोई कानूनी आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया और अपने दावों पर कायम है।

इस विवाद की वजह से अलग-अलग देशों ने कृत्रिम द्वीप और सैन्य ठिकाने बनाए हैं और वे अक्सर वहां गश्त भी करते हैं। इन गतिविधियों से तनाव बढ़ा है और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं।

दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से हर साल वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अपनी आर्थिक और रणनीतिक अहमियत के कारण, अमेरिका समेत कई देश इस इलाके में नेविगेशन की आज़ादी का समर्थन करते हैं।

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