भूकंप कितने प्रकार के होते है - bhukamp ke prakar

भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक घटना है, जिस पर मानव का कोई वश नहीं है। अनेक क्षेत्रों में विकास की ऊंची उड़ान भरने वाला मानव आज भी भूकंप ज्वालामुखी की घटना को भगवान भरोसे ही मानता रहा है। फिर भी भूकंप आने की घटनाओं और भूकंपतरंगों का अध्ययन किया जा रहा है। जिससे की भूकंप क्या है, इसके प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है, इसकी जानकारी प्राप्त हो सके।

भूकंप किसे कहते हैं

सामान्य भाषा में भूंकप पृथ्वी पर अचानक आने वाले हलचल को कहा जाता है। ये पृथ्वी के केंद्र से धरातल की और बढ़ते है। इसके कारण हर साल जान माल का नुकसान होता है। भूकंप को उसके तरंगो के माध्यम से नापा जाता है। भूकंप आने के कई कारण हो सकते है। जिसमे प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण शामिल है। ये मानव के लिए विनाश लेकर आते है।

भूकंप कितने प्रकार के होते है

भूकंप पृथ्वी की सतह पर अचानक कंपन या हिलने की घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी की भू-प्लेटों में तनाव जमा हो जाता है और वह अचानक मुक्त हो जाता है। भूकंप के कारण जमीन में कंपन, भूस्खलन और कभी-कभी ज्वालामुखी विस्फोट भी हो सकते हैं।

भूकंप कितने प्रकार के होते है - bhukamp ke prakar

भूकंप मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते है - 

1. ज्वालामुखी भूकंप

ज्वालामुखी से उत्पन्न भूकंप को वुल्केनिक भूकंप भी कहा जाता है, यह तब होता है जब ज्वालामुखी के भीतर मैग्मा का दबाव बढ़ता है और पृथ्वी की सतह पर तनाव पैदा करता है। जब मैग्मा अपनी गति के कारण चट्टानों में दरारें पैदा करता है, तो छोटे-छोटे भूकंप उत्पन्न होते हैं। ये भूकंप आमतौर पर सतही और कम तीव्रता वाले होते हैं, लेकिन कभी-कभी ज्वालामुखी विस्फोट से पहले आ सकते हैं।

वुल्केनिक भूकंप अक्सर ज्वालामुखी गतिविधि का संकेत होते हैं। वैज्ञानिक इन भूकंपों की तीव्रता और आवृत्ति का अध्ययन करके ज्वालामुखी विस्फोट की संभावना का अनुमान लगाते हैं। इन भूकंपों के दौरान जमीन में हलचल, दरारें और कभी-कभी गैसों का उत्सर्जन देखा जा सकता है।

विश्व के प्रमुख ज्वालामुखियों के पास जैसे जापान, इंडोनेशिया और इटली में यह भूकंप आम हैं। यह भूकंप भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने और आपदा प्रबंधन की योजना बनाने में मदद करते हैं।

2. विवर्तनिक भूकंप

विवर्तनिक भूकंप ऐसे भूकंप होते हैं जो पृथ्वी की सतह की प्लेटों के एक-दूसरे के पास से सरकने की वजह से आते हैं। इसमें प्लेटें ऊपर-नीचे नहीं बल्कि एक-दूसरे के क्षैतिज दिशा में चलती हैं। जब ये प्लेटें अचानक फिसलती हैं, तो जमीन में झटके पैदा होते हैं और यह भूकंप के रूप में महसूस होता है। 

विवर्तनिक भूकंप पृथ्वी की प्लेटों की क्षैतिज गति का परिणाम हैं। वैज्ञानिक इन भूकंपों को मापकर यह पता लगाते हैं कि प्लेटें कैसे चल रही हैं और भविष्य में कहा भूकंप आ सकता है।

इस प्रकार के भूकंप अक्सर सतह के पास होते हैं और जोर से झटके देते हैं। यह इमारतों और सड़क-मार्गों को अधिक नुकसान पहुंचाता हैं। असम का 15 अगस्त, 1950 का भूकंप ज्वालामुखी गतिविधियों से उत्पन्न होने वाला भूकंप था। पेरू में क्वीचेस 1946, जापान में सगामी की खाड़ी और अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में 1986 में आए भूकंप भी इसी तरह के थे।

3. धंसाव भूकंप

धंसाव भूकंप, जिसे सबसिडेंस भूकंप भी कहते हैं, वह भूकंप है जो जमीन के अचानक धंसने या ढहने के कारण उत्पन्न होता है। यह भूकंप आमतौर पर प्राकृतिक या मानव निर्मित गतिविधियों के कारण होता है। जैसे किसी गुफा का अचानक ढह जाना, खनन कार्य, या जमीन के भीतर पानी का अधिक मात्रा में जमा होना इस तरह के भूकंप का कारण होता है।

धंसाव भूकंप आमतौर पर छोटे क्षेत्र में सीमित प्रभाव डालते हैं। जमीन में हल्का कंपन महसूस होता है, लेकिन कुछ मामलों में सड़कें और इमारतें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। कई बार ये भूकंप अचानक आते हैं, इसलिए इन्हें रोकना मुश्किल होता है।

सुरक्षा के लिए जरूरी है कि जो इलाके भूमिगत गुफाओं, खानों या कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों में हैं, वहां निर्माण कार्य करते समय विशेष सावधानी बरती जाए। भवनों का मजबूत आधार और भू-स्थिरता जांचना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, धंसाव भूकंप से बचाव के लिए आपातकालीन योजना की जरूरत होती है।

4. मानव निर्मित भूकंप

इस तरह के भूकंप को कृत्रिम भूकंप भी कहते हैं। ऐसे भूकंप हल्के प्रभाव वाले होते हैं। भवनों के समीप स्थित रेल की पटरी से गुज़र रही एक्सप्रेस से जो तंरगे उत्पन्न होती है वे भी एक प्रकार का भूकंप होता है। कुओं या चट्टान खोदते समय भारी विस्फोट का उपयोग करने पर निकटवर्ती भाग में कुछ क्षणों के लिए हल्का कंपन महसूस होता है। यह भी एक प्रकार से भूकंप है।

वर्तमान में आणविक विस्फोट भी भूकंप के अंतर्गत आते है। यह मानव द्वारा बनाया गया घातक हथियार है। जिसे साधारण भाषा में परमाणु बंम कहा जाता है।

प्रशांत महासागर तट के आस-पास व द्वीपों के निकट प्रतिदिन 150 से 200 भूकंप के झटके महसूस किये जाते हैं। अकेले जापान में ही 10 से 12 भूकंप प्रतिदिन अंकित किये जाते हैं। कई विद्वानों का विश्वास है कि महासागरों के विशेष भागों में जो दरारें एवं गहरे गर्त पाई जाती हैं। असन्तुलन के कारण वह भूकंप का कारण बनते हैं।

भूकंप के कारण लहरें अधिक ऊपर उठती है। ऐसी घातक लहरों को जापान में सुनामी कहा जाता है। टोकियो में सन् 1925 के भूकंप से 25 हजार व्यक्ति मारे गये।

भूकंपमापी यंत्र

भूकंप से सम्बन्धित सभी तथ्यों का अध्ययन जिस यन्त्र द्वारा किया जाता है, उसे भूकंपमापी यंत्र कहते हैं। इस यन्त्र में लगे हल्के तारों वाले लटकते पदार्थों पर जो क्रिया होती है वह विशेष रोशनी की सहायता से ग्राफ पर अंकित होती जाती है। वहाँ बने कंपन की रेखाओं से भूकंप की दिशा और प्रभावित क्षेत्र का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। सभी बड़े नगरों में इस यंत्र को स्थापित किये जाते हैं।

भूकंप तरंगों का अध्ययन भी इसी यन्त्र से किया जाता है। आजकल अधिक विकसित यन्त्र में फोटो फिल्म की विशेष उच्च स्तर की व्यवस्था होती है। इससे आस-पास के हल्के झटकों का भी आसानी से अध्ययन किया जा सकता है।

भूकंपमापी यंत्र

भूकंप केंद्र

धरती के अंदर जिस स्थान से चट्टानों में होने वाली परिवर्तन से हलचल की शुरूआत होती है। उसे भूकंप केन्द्र कहते हैं। उत्पत्ति केन्द्र से सभी दिशाओं में जो तरंगें फैलती हैं वही अभिकेन्द्र के चारों ओर वृताकार घेरा बनाती है। इनसे भूकंप से होन वाली हानि का ज्ञान होता है।

भूकंप का मूल केन्द्र से हमेशा समान गहराई पर नहीं होता। यह कुछ किलोमीटर से लेकर 100 से अधिक किलोमीटर की गहराई पर हो सकता है। वैसे अधिकांश भूकंप के उत्पत्ति केन्द्र की गहराई पृथ्वी से 5 से 8 किलोमीटर के मध्य रहती है।

भारत में भूकंप क्षेत्र को चार भागो में बंटा गया है जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 इसमें जोन- 5 सबसे खतरनाक क्षेत्र है जहां पर अधिक तीव्र गति की भूकंप आता है। जिसमे उत्तर-पूर्व भारत के हिस्से आते है। जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल और असम आते है। दिल्ली और उत्तरप्रदेश के ज्यादातर क्षेत्र जोन-4 में आते है। मध्य भारत जॉन-3 में आता है तथा दक्षिण भारत जोन-2 में आता है।

भूकंप तरंग

भूकंप केन्द्र के चारों ओर चलने वाली लहरों या कंपन को भूकंप तरंग कहते हैं। इनकी गति समान नहीं रहती। यह रुक-रुककर आगे बढ़ती रहती है। अतः भूकंप तरंगें कई प्रकार से प्रभावी होती हैं।

1. प्राथमिक या P तरंगें - ये तरंगें सबसे अधिक तेज गति से चलती हैं। इनकी गति 8 से 14 किलोमीटर प्रति सेकण्ड तक रहती है। ये तरंगें ठोस एवं तरल पदार्थों में समान रूप से गतिशील होती हैं। इसे संक्षेप में P तरंगें भी कहा जाता है।

2. द्वितीयक या S तरंगें - इन लहरों की गति जल में उठने वाली लहरों जैसी होती है। इनकी गति 5 से 7 किलोमीटर प्रति सेकण्ड रहती। तेज भूकंप के झटकों से इन लहरों के कारण पृथ्वी पर दरारें पड़ जाती हैं।

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