Saturday, September 21, 2019

पर्यावरण पर निबंध




Environment (पर्यावरण) के बारे में आप सभी तो जानते ही होंगे लेकिन मैं आज पर्यावरण पर निबंध फिर से लिख रहा हूं क्योंकि आज पर्यावरण के प्रति जागरूकता बहुत ही आवश्यक है।


Paryavaran par nibandh वाले इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा पर्यावरण क्या है?, पर्यावरण किस से मिलकर बना है पर्यावरण के कौन-कौन से भाग हैं और पर्यावरण से हमें किस प्रकार लाभ की प्राप्ति होती है तथा पर्यावरण से हमें किस प्रकार से हानि है और पर्यावरण का सारांश मैंने इस पोस्ट में आपके समक्ष रखने का प्रयास किया है।

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पर्यावरण क्या है ?

यदि हम पर्यावरण शब्द का संधि विच्छेद करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है परी और आवरण से यहां पर परी का अर्थ हमारे आस पास के वातावरण से है और आवरण का अर्थ हमें घेरे हुए चारों ओर की प्राकृतिक वस्तुओं जीव जंतुओं पेड़ पौधों के द्वारा बने आवरण से है।
इस प्रकार पर्यावरण हमारे आस पास के वातावरण को ही कहा जाता है।

पर्यावरण  किन-किन चीजों से मिलकर बना है ?

जैसे कि मैंने आपको बताया कि पर्यावरण परी और आवरण अर्थात हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें उपस्थित जीव जंतु से मिलकर बना है। पर्यावरण में मनुष्य के अलावा और भी बहुत सारे जीव जंतु पाए जाते हैं जो कि अपना जीवन यापन इस पृथ्वी पर करते हैं जिनका अपना इस पृथ्वी पर अलग अलग ही प्रभाव है।
पर्यावरण में पाए जाने वाले जीव जंतु और पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है। पर्यावरण में कई प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं और इन जंतुओं के द्वारा कभी-कभी कई ऐसे चीजों का निर्माण होता है जो कि पर्यावरण को एक नई दिशा की ओर ले जाता है और पर्यावरण में अमूल चूल परिवर्तन करता है।
इस प्रकार पर्यावरण के मिलकर बनने के बात करें तो यह दोनों प्रकार के सजीव और निर्जीव से मिलकर बना हुआ है। जिनके बिना यह आपस में अधूरे हैं सजीव के बिना निर्जीव अधूरा है और निर्जीव की बिना सजीव अधूरा है।

पर्यावरण  के प्रकार

पर्यावरण के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार का होता है एक मानव निर्मित पर्यावरण और दूसरा प्रकृति या पर्यावरण द्वारा निर्मित पर्यावरण।
मानव निर्मित पर्यावरण इस प्रकार के पर्यावरण होते हैं जो कि मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए गए वातावरण से निर्मित होते हैं जैसे कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाने वाला वातावरण मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आता है और उसी क्रम में कोसा उद्योग के लिए तैयार किए गए वन आदि मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

अब प्राकृतिक पर्यावरण की बात करें तो प्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति द्वारा चुने गए ही जीव और निर्जीव जीवित रह पाते हैं। जैसे कि कई हजारों साल पहले डायनासोर पाए जाते थे लेकिन अब नहीं पाए जाते हैं क्योंकि प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इनका विनाश हो गया और यहां लुप्त हो गए। प्राकृतिक पर्यावरण पर्यावरण के हित को देखते हुए इसका निर्माण प्रकृति खुद करती है। जैसे कि हम खाद्य श्रृंखला की बात करें तो यहां प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत ही आएगा क्योंकि प्रकृति कभी भी पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ने देती है और वहां पर्यावरण के बिगड़ने के कगार पर स्वयं परिवर्तित होकर पर्यावरण के अनुकूल प्रकृति स्वयं निर्मित करती है। इस प्रकार इसे हम प्राकृतिक पर्यावरण कर सकते हैं।

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पर्यावरण के लाभ

पर्यावरण से होने वाले लाभ की बात करें तो यहां असीमित है और अविश्वसनीय है क्योंकि पर्यावरण ही हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।
पर्यावरण के कारण हमें खाद्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं।
पर्यावरण से हम बहुत से उपयोगी वस्तुएं अपने दैनिक जीवन के लिए प्राप्त कर सकते हैं।
पर्यावरण से कई मूल्यवान चीजें हमें प्राप्त होते हैं।
पर्यावरण से ही हमें विभिन्न प्रकार के इंधन  की प्राप्ति होती है।
हीरा जैसे मूल्यवान वस्तु हमें पर्यावरण में पाए जाने वाले मृदा से प्राप्त होती हैं।
जीवन रूपी जल पर्यावरण के कारण ही हमें सुलभ हो पाया है।

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पर्यावरण या environment से होने वाली हानियां

पर्यावरण से होने वाली हानियों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और इसके अलावा मनुष्य द्वारा निर्मित प्रदूषण के कारण भी प्राकृतिक आपदा व प्रकृति द्वारा होने वाली हानियां कर सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और सुनामी प्रकृति में परिवर्तन के कारण आते हैं।
अम्लीय वर्षा पर्यावरण में परिवर्तन के कारण देखने को मिलते हैं।
भूकंप का आना प्राकृतिक आपदा है जो कि पर्यावरण के कारण उत्पन्न होती है।
अत्यधिक मात्रा में गर्मी का बढ़ना पर्यावरण से होने वाली बहुत बड़ी समस्या है या हानि है।
कई मामलों में पर्यावरण में जहां पर जीवन देने योग्य है वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर यह मृत्यु का कारण भी बनती है।

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Conclusion (उपसंहार)
पर्यावरण पर निबंध (essay writing of environment) लिखना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है इस प्रकार पर्यावरण के सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त रूप से वर्णन करना ही पर्यावरण पर निबंध लिखने जैसा है। क्योंकि बहुत बड़ाा हो जाएगा।

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