हम सब रोज़ हवा में सांस लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह हवा आखिर आती कहाँ से है? हवा का एक बड़ा सा प्रोटेक्टिव लेयर होता है जिसे हम वायुमंडल कहते हैं। यह लेयर हर ग्रह, चांद, तारे या स्पेस ऑब्जेक्ट को चारो तरफ से कवर करती है ताकि वो स्पेस के खतरों से सुरक्षित रहें।
आइए, आज इस ब्लॉग में हम वायुमंडल क्या हैं, कैसे बनते हैं, किससे मिलकर बने हैं, और क्यों ज़रूरी है सब कुछ बहुत आसान भाषा में समझते हैं।
वायुमंडल क्या है
वायुमंडल गैसों की एक प्रोटेक्ट करने वाली लेयर होती है जो किसी ग्रह या स्पेस ऑब्जेक्ट के आस-पास बनी रहती है। यह लेयर ग्रैविटी की वजह से प्लैनेट के साथ चिपकी रहती है - ग्रैविटी गैसों को नीचे खींच लेती है और उन्हें स्पेस में जाने नहीं देती है।
वायुमंडल शब्द ग्रीक शब्दों से बना है:
- Atmos - भाप
- Sphaira - गोलाकार
वायुमंडल कैसे बनता है
प्लैनेट अपना एटमॉस्फियर दो तरीकों से पाती है:
1. स्पेस से गैस और डस्ट इकट्ठाहोने से - जब प्लैनेट का निर्माण होता है, तो आस-पास की गैस और धूल उसके चारों ओर जमने लगती है। जिससे वायुमंडल का निर्माण होता हैं।
2. ग्रह के अंदर से गैसों के निकलने से - ज्वालामुखी, दरारें और केमिकल रिएक्शन से धरती से गैसें बाहर आती हैं और एटमॉस्फियर बनाती हैं।
समय के साथ एटमॉस्फियर बदलता रहता है, सूरज की रोशनी के मॉलिक्यूल्स को तोड़ सकती है और सतह की गैसों के साथ रिएक्ट करती है।
वायुमंडल को क्या-क्या असर डालती है?
1. ग्रैविटी
ज़्यादा ग्रैविटी वाले ग्रह अपनी गैसों को ज़्यादा अच्छे से पकड़ कर लेते हैं।
2. टेम्परेचर
ठंडे ग्रह गैसों को ज़्यादा देर तक रोक कर रखते हैं।
3. सोलर विंड
सूरज से निकले चार्ज पार्टिकल्स एटमॉस्फियर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लेकिन पृथ्वी जैसे ग्रह जिनके पास मैग्नेटिक फील्ड होती है, वे सेफ होते हैं।
4. सूरज से दूरी
दूर वाले ग्रह अपना एटमॉस्फियर धीरे-धीरे खोते हैं क्योंकि उन तक सोलर विंड कम पहुंचती है।
हमारे सोलर सिस्टम में कौन-कौन ग्रह में वायुमंडल पाया जाता है?
चट्टानी ग्रह
पृथ्वी, शुक्र और मंगल – इनका वायुमंडल भारी गैसों से मिलकर बना होता है:
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- कार्बन डाइऑक्साइड
गैसीय ग्रह
ज्यूपिटर, सैटर्न, यूरेनस, नेपच्यून – इनका एटमॉस्फियर बहुत बड़ा होता है जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम से बनता है।
वायुमंडल इतना ज़रूरी क्यों है?
- एटमॉस्फियर के बिना ज़िंदगी नामुमकिन होती है।
- सूरज की नुकसानदायक UV किरणों से बचाव करता हैं।
- ओजोन लेयर हमें खतरनाक रेडिएशन से बचाती है।
- टेम्परेचर कंट्रोल करता है
- ग्रह को बहुत ज़्यादा गर्म या बहुत ज़्यादा ठंडा होने से रोकता है।
- बादल, बारिश, तूफ़ान, हवाएँ - ये सब वायुमंडल की वजह से होते हैं।
- यह इंसान, जानवर, पौधे सबको ज़िंदा रहने में मदद करता है।
सिर्फ़ प्लैनेट ही नहीं - दूसरी जगह भी होता है एटमॉस्फियर
तारे - स्टार्स की बाहरी लेयर्स को स्टेलर एटमॉस्फियर कहा जाता है।
ब्राउन ड्वार्फ्स - प्लैनेट और स्टार के बीच की चीज़ें – इनका भी एटमॉस्फियर होता है।
कॉमेट्स - सूरज के पास आने पर इनकी बर्फ पिघलती है जो एक टेम्पररी एटमॉस्फियर बनाती है।
एक्सोप्लैनेट्स - साइंटिस्ट्स ने बाहर के प्लैनेट जैसे
- HD 209458 b
- केप्लर-7b
में भी एटमॉस्फियर डिटेक्ट किया है।
ये खोजें बताती हैं कि यूनिवर्स में और भी जगह लाइफ पॉसिबल हो सकती है।
वायुमंडल एक सिंपल गैस लेयर लगाता है, लेकिन यह हमारे ग्रह को सुरक्षित, स्थिर और जीवन-योग्य बनाने में बहुत बड़ा रोल प्ले करता है। यह हमारे मौसम को कंट्रोल करता है, हमें रेडिएशन से बचाता हैं, और सांस लेने के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है।
इसलिए वायुमंडल का प्रोटेक्शन जैसे प्रदूषण कंट्रोल करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।