Monday, October 28, 2019

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साकेत आलोचना खंड

maithalisharan gupt




राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को चिरगांव, जिला झांसी में हुआ। इनके पिता का नाम रामचरण और मां का सरयूदेवी था। सेठ रामचरण जी कविता के बड़े प्रेमी थे और 'कनकलता' नाम से छंद-रचना करते थे। सेठ जी के पाँच पुत्र हुए- महरामदास, रामकिशोर, मैथिलीशरण, सियारामशरण और चारुशिलाशरण। इनमें मैथिलीशरण और सियारामशरण ने साहित्य रचना के क्षेत्र में अपना योगदान दिया। काव्य के संस्कार तो गुप्त जी में जन्मजात थे, पर सृजन के लिए विशेष प्रेरणा आचार्य महावीर प्रसाद दुवेदी से मिली। सन 1906 से ही इनकी रचनाएँ 'सरस्वती' में प्रकाशित होने लगी थी। 'रंग में भंग' इनका प्रथम काव्य-ग्रंथ है, जो सन 1909 में प्रकाशित हुआ। प्रारंभ में मुंशी अजमेरी से, जिन्हें ये अपने भाई के समान मानते थे, इन्हें बहुत प्रोत्साहन मिला। द्वेदी जी को तो गुप्त जी ने अपना काव्य-गुरु ही स्वीकार किया है, अजमेरी जी के प्रति भी अपनी कृतज्ञता 'साकेत' के 'निवेदन' में व्यक्त की है। उनकी मृत्यु पर 'समाधि' शीर्षक से एक कविता भी इन्होंने लिखी, जो 'उच्छ्वास' नामक काव्य-संग्रह में संकलित है।

मैथिलीशरण ह्रदय से भक्त थे और स्वभाव से उदार, विनम्र और मिलनसार। साहित्य-साधना के पवित्र कर्म में वे निरंतर संलग्न रहे। अपने जीवन के आदर्श मूल्य उन्होंने राम, बुद्ध और गांधी से ग्रहण किए थे। 12 दिसंबर 1964 को हृदय की गति बंद हो जाने से इनकी मृत्यु हो गयी।

 गुप्त जी के मौलिक एवं अनुदित काव्य-ग्रंथ नाटक इस प्रकार हैं-

  साकेत, जयभारत, यशोधरा, कुणालगीत, द्वापर, सिद्धराज, रत्नावली, विष्णुप्रिया, जयद्रथ वध, पंचवटी, नहुष, वन वैभव, वक संहार, सैरंध्री, मंगलघट, झंकार, उच्छ्वास, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, अंजलि और अर्ध्य, भारत भारती, स्वदेश संगीत, वैतलिक शक्ति गुरुकुल, हिंदू, रंग में भंग, विकट भट, पद्द प्रबंध, पत्रावली, शकुंतला, हिडिंबा, विश्ववेदना, किसान, पृथ्वीपुत्र, राजा प्रजा, अजीत, तिलोत्तमा, चंद्रहास, अनध, लीला, भूमि भाग, युद्ध। स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिमा, अभिषेक, अविमारक, मेघनाद वध, पलासी का युद्ध, वृत्रसंहार, वीरांगना, विरहिणी ब्रजजङ्ग्ना और रूबाइयत उमरखैयाम।

गुप्त जी की प्रमुख रचनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि आप राम के अनन्य भक्त और कट्टर हिंदू हैं। 'साकेत' में तो राम का स्तवन है ही, पर जो ग्रंथ कृष्ण के चरित्र या महाभारत की घटनाओं से संबंधित है, वहां भी मंगलाचरण में राम ही की वंदना है जैसे वक संहार में, परंतु मैथिलीशरण गुप्त जी की यह खासियत है कि उन जैसा उदार और विशाल हृदय व्यक्ति चिराग लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेगा। जिस लेखनी ने पंचवटी, और 'साकेत' का निर्माण किया, उसी ने बौद्धों की करुणा का उद्घोष करने के लिए 'अनघ', 'यशोधरा' और 'कुणाल गीत' की रचना की, उसी ने मुसलमानों के चरित्र की महानता और सहन-शीलता को अंकित करने के लिए हृदय को हिलाने वाली 'कर्बला' की कहानी हमें सुनायी। दरअसल वे मानवता के गायक थे। धर्म निरपेक्षता और सहिष्णुता का मूल्य उनकी रग रग में समाहित था। 'विश्व वेदना' की रचना उन्होंने धर्म और राष्ट्रीय-भावना से ऊपर उठकर विश्व-बंधुत्व का गीत गाने के लिए की।

गुप्त जी हमारे देश और युग के प्रतिनिधि कवि हैं। हमारा देश अखंड है और उसे अखंडता की भावना मैथिलीशरण गुप्त ने दी। उनके राजनीतिक विचार अनेक ग्रंथों-विशेष रूप से 'भारत-भारती' और स्वदेश संगीत में बिखरे पड़े हैं। राजनीति में मैथलीशरण गुप्त ने महात्मा गांधी के सिद्धांतों का प्रचार किया है। सन 1921 से 1947 तक महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस जिस मार्ग पर चली है, उन समस्त आंदोलनों की ध्वनि उनके काव्य में पाई जाती है।




मैंथलीशरण गुप्त ने बीस से ऊपर सफल प्रबंध काव्य रचें हैं। उनके 'जयभारत' और 'साकेत' दोनों हिंदी महाकाव्यों की परंपरा में बहुत ऊंचा स्थान रखते हैं। 'यशोधरा' भी उनकी बड़ी ही लोकप्रिय रचना है। ऐसी ही मार्मिक कृतियां 'विष्णुप्रिया' और रत्नावली हैं। उनके खंड काव्यो में 'जयद्रथ वध', 'पंचवटी' और 'नहुष' की गणना निश्चित ही सफल कृतियों में होगी।  इन सभी काव्य-ग्रंथों में कुल मिलाकर कई ऐसे मार्मिक स्थल हैं जहां पाठकों का ह्रदय बार-बार अभिभूत होता है।

यही पर इस साकेत का आलोचना खंड समाप्त होता है, आपको जानकारी कैसे लेगी मेरे साथ जरूर शेयर करें। किस प्रकार की जानकारी अगले पोस्ट में आपको चाहिए जरूर लिखें।

हिंदी से जुड़ें कुछ और लेख 



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सभी पाठकों को गोवर्धन पूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं आज का दिन आपके लिए हसी और खुशियों भरा हो।
आज मैं यह पोस्ट भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रभावित होकर मेरे मन में कुछ प्रभाव उतपन्न हुए हैं इन्हें मैं आपके साथ शेयर करता हूँ।
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गोवर्धन पूजा क्यों ?

भगवान श्री कृष्ण की लीला को आज तक कोई समझ नहीं पाया है और शायद ही कोई इसे समझ सकें क्योकि भगवान ने यहां पृथ्वी पर आकर ऐसी ऐसी कृतियाँ की है की उन्हें समझ पाना बहुत ही कठिन है लेकिन इसे समझने का प्रयास चलिए यहां करते हैं इसी को समझने के लिए ये पोस्ट लिखा गया है।

भगवान के चरित्र को देखें तो वे अत्यंत ही करुण प्रकृति के थे, एक बार क्या होता है भगवान श्री कृष्ण को कोई एक आदमी होता है जो उसे गाली देता है लेकिन भगवान उसे सौ मौके देता है और कहते  है की जिस दिन तेरे पाप का घड़ा भर जाएगा उस दिन मैं तेरे को इस जीवन से मुक्त कर दुँगां दुर्भायवश मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा है। सौ बार गालियाँ देने के बाद भगवान ने उसके सर को सुदर्शन चक्र से काट दिया।

इससे हमें सिख मिलती है की कोई कितना भी गलती करे उसे हमें एक निश्चित समय तक सुधरने का मौक़ा अवश्य देना चाहिए अगर फिर भी ना सुधरे तो हमें आगे कदम उठाना चाहिए।

गोवर्धन पूजा के पीछे भगवान श्री कृष्ण का प्रकृति प्रेम मुझे साफ़ दिखाई देता है! आइये जाने कैसे
यह घटना उस समय की है जब भगवान श्री कृष्ण गोकुल में निवास किया करते थे उस समय लोगों की मानसिकता भगवान के प्रति बहुत ही घनिष्ठ थी और लोग प्रॉपर उनकी बातो को माना करते थे। किसान उस समय भगवान इंद्र की पूजा किया करते थे जिन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है। एक बार क्या होता है सभी ग्वाले भगवान इंद्र की उपासना के लिए कहीं जा रहें होते हैं तब भगवान इंद्र देव के घमंड को तोड़ने के लिए उनकी पूजा करने से उन्हें जो चढ़ाते हैं उन्हें न चढ़ाने की बात करते हैं क्योकि उस समय इंद्र देव अपनी घमंड की अग्नी में जल रहे होते हैं और भगवान उनके इसी घमंड को तोड़ने के लिए यह लीला रचते हैं इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ग्वालों और गोपियों को समझाते हैं की आप हमारी माता समान प्रकृति जो हमें बहुत कुछ देती है जैसे नदी जो जल देते हैं और पहाड़ जिनसे औषधि प्राप्त होती है। उनकी पूजा छोड़ कर हम भला इंद्र की पूजा क्यों करें। ऐसा कहकर भगवान सभी ग्वालों और गोपियों को मना कर देते हैं। सभी उस समय प्रकृति की पूजा करने के लिए चले जाते हैं फिर क्या होता है ?

भगवान इंद्र क्रोध में इतना आग-बबूला हो जाता है की वह इतनी तेज बारिस करता है की वहां पूरा गाँव और पशु-पक्षी त्राहि त्राहि करने लगते हैं। फिर सभी श्री कृष्ण के शरण में आते हैं और श्री कृष्ण से कहते हैं हे कृष्ण हमारी रक्षा करें हमने आपको पहले भी कहा था की इंद्र क्रोधित हो जाएंगे लेकिन आपने नहीं माना फिर क्या होता है ?

भगवान तो इंद्र के क्रोध रूपी घमंड को तोड़ना चाहते थे और उन्होंने इसको तोड़ने के लिए एक जगह का सहारा लिया, भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपने छोटी उंगली में धारण कर लिया और भगवान के साथी सभी गोप ग्वाले वहां पर्वत के निचे खड़े हो गए जिससे वर्षा का तनिक भी प्रभाव उन पर नहीं पड़ा फिर क्या होता है ?
इस प्रकार इंद्र का क्रोध और बढ़ता जाता है और वह निचे आकर भगवान से युद्ध करने को आतुर हो जाता है और फिर युद्ध के दौरान भगवान के असली रूप का पता उन्हें चलता है फिर जो होता है वह इस प्रकार है -
भगवान की असलियत को जानकर वे  भगवान से क्षमा याचना करते हैं। माफ़ी मांगते हैं और इस प्रकार उनका (इंद्र का) घमण्ड टूट जाता है।

गोवर्धन पर्वत के कारण और भगवान श्री कृष्ण के कारण लोगों की जान बच जाती है और साथ ही लोगों को प्रकृति के प्रति भगवान आकृष्ट करते हैं।

भगवान के इस प्रकार उनके घमंड को तोड़ने के प्रति उनका प्रकृति के प्रति प्रेम साफ़ झलक रहा है इसलिए मैं भी आपसे कहता हूँ प्रकृति के प्रति सजग रहें क्या पता कल प्रकृति के प्रकोप से हम खुद को भी न बचा सकें।
इस प्रकार उस समय से गोवर्धन पूजा चली आ रही है। और चलती रहेगी युगों युगों तक।

हमारे यहाँ गोवर्धन भगवान की पूजा बड़े धूम-धाम से की जाती है मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ गाँव में रहता हूँ तो यहां पर मैंने देखा है की यादव समाज द्वारा सबसे ज्यादा इस त्यौहार को प्राथमिकता दी जाती है जो की दीपावली के बाद मनाया जाता है। हमारे यहां पशुओं को खाना खिलाते हैं और उनकी पूजा करते हैं इस दिन।  आपके यहां कैसे और किस प्रकार गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है कमेंट करके अवश्य बताएं।

इस पोस्ट के पीछे क्या इंटेंसिव रहा है मेरा 

इस पोस्ट को लिखने के पीछे मेरे लिए एक कारण सिर्फ प्रकृति के प्रति लोगों को जागरूक करना है और पशु पक्षियों के प्रति लोगों का ध्यान आकृष्ट करना है।

इस पोस्ट में बस इतना ही मिलते है कुछ नई जानकारियों के साथ। 

Sunday, October 27, 2019

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डीजल मैकेनिक पाठ्यक्रम के लिए गेज माप उपकरण

गेज एक प्रकार का डीजल मैकेनिक द्धारा प्रयोग में लाया जाने वाला नापने वाला औजार है जिसका उपयोग मैकेनिक के द्धारा किसी ऐसे खांचे को नापने के लिए किया जाता है जिसको वर्नियर कैलिपर्स या अन्य कैलिपर्स के माध्यम से नहीं नापा जा सकता है। तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण औजार है जिसका उपयोग हम डीजल मैकेनिक कोर्स के अंतर्गत करते हैं। 

What are mechanical gauges?(मैकेनिकल गेज क्या हैं?)

जैसे की आपको पता है की किसी भी मैकेनिकल वर्क करने के लिए हमारे पास उचित औजार का होना आवश्यक होता है और इन्ही औजारों के माध्यम से ही हम अपने कार्य को पूरा कर पाते है जैसे की मैंने इस पोस्ट से पहले और भी कई सारे औजार के बारे में जानकारी दी है जो की इस कोर्स में हमारे द्वारा पढ़े जाते हैं अगर आप डीजल मैकेनिक बनना चाहते हैं तो आपको पुरे औजार के बारे में बेसिक जानकारी होना आवश्यक है नहीं तो आप अपना काम करने में असफल हो जाते हैं। 
डीजल इंजन में मरम्मत व निर्माण का काम करते समय विभिन्न प्रकार के गेजों का प्रयोग किया जाता है। यह ऐसे मापक उपकरण होते हैं। जिनसे किसी पार्ट की तुलनात्मक जांच करते हैं। इसके अतिरिक्त अधिक उत्पादन के साथ परिशुद्धता की गुण प्राप्त करने पर समय की बचत होती है। ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में प्रायः निम्नलिखित गेजों का प्रयोग किया जाता है। 

  1. स्क्रू पिच गेज 
  2. वायर गेज रेडियस गेज 
  3. रेडियस गेज 
  4. फिलर गेज 
  5. सिलेंडर गेज 
  6. लिमिट गेज 
1. स्क्रू पिच गेज :- इंजन व गाड़ियों के सभी भाग नट तथा बोल्टो के द्धारा आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इन भागों में पकड़ के अनुसार उनके बाहर या अंदर कटी चूड़ियों का चयन किया जाता है इस प्रकार सभी जगह एक जैसी चूड़ियों के नट तथा बोल्ट प्रयोग नहीं किये जाते हैं। नट या बोल्ट में एक इंच में कितनी चुडिया कटी है यह ज्ञात करने के लिए गेज का प्रयोग किया जाता है। यह छोटी चाकू जैसी होती है। जिसमें कई ब्लेड लगे रहते हैं। जिनमें अलग-अलग नाप व संख्या के खांचे कटे होते हैं। स्क्रू पेंच गेज के द्धारा ही नट या बोल्ट की चूड़ियां की लेंथ पर या लम्बाई पर इंच ज्ञात की जाती है। इसी के अनुसार हमें पता लगता है की इसमें किस प्रकार चूड़ियां कटी हुई हैं। 

2. वायर गेज(Wire Gauge):- वायर गेज का प्रयोग सभी प्रकार के तारों तथा चददरों की मोटाई ज्ञात करने के लिए किया जाता है। वायर गेज गोल या आयताकार स्टील प्लेट का बना होता है। इसमें अलग-अलग नाप की झर्रियां कटी होती हैं। और उनके सिरों पर छेड़ बना होता है। इन झिर्री तथा छेदों पर उसकी नाप नंबर के रूप में अंकित रहती है। ये नंबर S.W.G.C स्टैंडर्ड वायर गेज कहलाते हैं। 

3. रेडियस गेज (REDIUS GAUGES):- इसके द्धारा किसी जॉब के छोर पर बनी कॉनकीव या कॉन्बॉक्स आकृति को मापा जाता है। इसे फिलेट गेज के नाम से भी जाना जाता है। रेडियस गेज के एक सेट में एक ही रेंज के पत्तिया लगी रहती हैं। अगर बात करें मीट्रिक रेडियस गेज की तो यह निम्न रेज में होती है :-

1 से 7 MM-0.5 MM स्टेपो में 
7.5 से 15.MM - 0.5MM स्टेपों में 
15.5 से 25MM-0.5MM स्टेपो में। 

4. फिलर गेज :- छोटे गेप या क्लियरेंस नापने के लिए इस प्रकार के गेज का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के गेज का सबसे ज्यादा प्रयोग इसी क्षेत्र में होता है यानी की ऑटोमोबाइल में होता है। इसके बनावट की बात करें तो यह चाकू के समान होता है और इसमें कई पत्तियाँ लगी होती हैं। जैसे मैंने पहले भी कहा है इन पत्तियों की मोटाई अलग अलग होती है जिससे विभिन्न नाप की या मोटाई के गेज का प्रयोग वभिन्न जगहों पर किया जा सकता है। 
Filler Gauge

5. सिलेंडर गेज :- जैसे की इसका नाम है उसी के समान इसका काम भी है इस प्रकार के गेज का प्रयोग गाडियोंमें लगे सिलेंडर के के घिसावट का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके आकार की बाती करें तो यह एक छोटी घड़ी के आकार का होता है और इसके साथ एक छड़ तथा दबने वाला पिन लगा होता है। इसे डायल टैस्ट इंडिकेटर भी कहते हैं।

6. लिमिट गेज :- जहां अधिक उत्पादन होता है। वहां बनने वाले पार्ट्स का विनिमय शीलता को निर्धारित सीमाओं में बनाकर इन गेजों के द्वारा उन पार्ट्स की लिमिट गेज द्धारा जांच की जाती हैं।

इस प्रकार यहाँ हमने जाना 

गेज के प्रकारों के बारे में और उनकी बनावट के बारे में साथ की कुछ कुछ गेजों के उपयोगित के बारे में भी हमने इस पोस्ट में पढ़ा आपको कैसे लगी मेरे साथ जरूर शेयर करें।  

Friday, October 25, 2019

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आज हम हमारे ब्लॉग में बात करने वाले हैं वर्नियर कैलिपर्स के बारे में इस पोस्ट नापने वाला औजार वर्नियर कैलिपर्स फॉर डीजल मैकेनिक के माध्यम से आज हम जानेंग की वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था। साथ ही इसके मुख्य भांगों के बारे में इस पोस्ट में बताया गया है।
vernier_calipers

Napne Wala Aujar Vernier Caliper For Diesel Mechanic

वर्नियर कैलिपर्स क्या है ?

यह एक प्रकार का मिक्रोमीटर है जिसका उपयोग हम ऐसे जगहों पर करते हैं जहां पर किसी बड़े नापने वाले औजार का प्रयोग नहीं किया जा सकता इस कारण इसे माइक्रोमीटर के नाम से भी जाना जाता है और यह इसी श्रेणी में भी आता है। जैसे की हमें किसी ऐसे चीज की माप लेनी है जिसके घिसने की मात्रा बहुत ही कम है लगभग मिमी में तो हम इस प्रकार के माइक्रोमीटर का प्रयोग करते हैं।  

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था ?

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार एक फ्रांस के वैज्ञानिक पेरी वर्नियर्स ने किया था और इन्ही के नाम पर इसका नाम वर्नियर कैलिपर्स रखा गया था। 

बाजार में किस प्रकार के वर्नियर कैलिपर्स हमें मिलेंगे ?

वर्नियर कैलिपर्स के बाजार में मांग तो वैसे ज्यादा नहीं होती है क्योकि इसका सबसे ज्यादा उपयोग मैकेनिक लोग किया करते हैं और यह आम लोगों के लिये उतना ज्यादा काम का नहीं होता है तो बाजार में यह विभिन्न परिशुद्धता के साथ हमारे लिए उपलब्ध होता है। जो की। 0.01 mm .005 mm 0.05 mm 0.02 mm मीट्रिक प्रणाली में तथा 0.001'' ब्रिटिश प्रणाली में उपलब्ध होते हैं।
बाजार में वर्नियर कैलिपर्स के मांग की बात करें तो यह 6 इंच से 7 इंच 1 फूट तथा 2 फूट तक की लम्बाई में बाजार में उपलब्ध हैं।

वर्नियर कैलिपर्स किस पदार्थ का बना होता है ?
यह सधारणतः निकिल क्रोमियम स्टील या वेनेडियम स्टील के बने होते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के द्धारा किन-किन जगहों की माप लिए जा सकते हैं ?
इसकी मदद से हम बाहरी , गहरी तथा आंतरिक माप ले सकते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के भाग !

वर्नियर कैलिपर्स में मेन स्केल के एक भाग का मान 1mm  होता है। तथा वर्नियर स्केल का एक भाग का मान 0.90 mm होता है इस प्रकार दोनों की अंतर 0.01 mm इस वर्नियर स्केल का अल्पतमांक होता है।

वर्नियर कैलिपर्स का प्रकार 

  1. फ़्लैट ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  2. नाईप ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  3. डेफ्थ वर्नियर कैलिपर्स 
  4. गियर टूथ वतवरणीयर कैलिपर्स। 
डीजल मैकेनिक से जुड़े कई टॉपिक:-

Thursday, October 24, 2019

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आपका बहुत - बहुत स्वागत है मेरे ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने आपसे बात किया था कैलिपर्स के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं माइक्रोमीटर के बारे में जिसमें हम जानेंगें की माइक्रोमीटर क्या है और यह कितने प्रकार का होता है तथा इसके साथ ही हम जानेंगें  माइक्रोमीटर के अल्पतमांक के बारे में तो चलिए जानते हैं -
screw gadge

माइक्रोमीटर क्या है ?

कार्यशाला में इंजिन की मरम्मत करते समय अथवा नया जॉब बनाते समय कई बार बहुत सूक्ष्म माप की आवश्यकता पड़ती है। जिन्हें स्टील फूट रूल या कैलीपर्स के द्वारा नहीं मापा जा सकता है।  इसलिए किसी पार्ट का सूक्ष्म नाप लेने के लिए माइक्रोमीटर का प्रयोग किया जाता है।  यह नट बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है आउट साइड माइक्रोमीटर ब्रिटिश व मीट्रिक प्रणाली में आते हैं। ब्रिटीश प्रणाली में कम से कम 0.001 इंच तक माप ले सकते हैं तथा मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तक कम से माप ले सकते हैं। बाजार में यह विभिन्न रेटों में उपलब्ध है जैसे 50-70 , 75 -100 मिली मीटर में कार्य के अनुसार से दो प्रकार के होते हैं।
  1. आउट साइड माइक्रोमीटर 
  2. इनसाइड माक्रोमीटर  
1. आउट साइड माइक्रोमीटर :- आउट साइड माइक्रोमीटर का प्रयोग किसी जॉब के बाहरी सतह की माप लेने के लिए किया जाता है इसके आकार की बात करे तो यह U के तरह होता है और कार्य विशेष के लिए इसका आकार जो है अलग अलग होता है। या डिजाइन भी कह सकते हैं। आउट साइड माइक्रोमीटर के भाग इस प्रकार से बटे होते हैं-
  1. स्पिंडल 
  2. फ्रेम 
  3. लॉकिंग रिंग 
  4. स्लिप या बैरल 
  5. ट्रिंबल 
  6. रैचिट  
इसके द्वारा माप लेते समय रैचीट को घुमाकर एनविल तथा स्पिंडल के मध्य जॉब को स्पर्श करता हुआ रखा जाता है लॉकिंग रिंग को कस कर स्लीव तथा सिंबल पर अंशांकन को पढ़ा जाता है ये माइक्रोमीटर एक इंच की नाप में या 25 मिमी की नाप में होते हैं। 
इसलिए ब्रिटिश माइक्रोमीटर 0 से 1 इंच 1 से 2 इंच तथा 2 से 3 इंच तक एक - एक इंच के अंदर में आते हैं। 

2. इन साइड माइक्रोमीटर :- किसी बेलनाकार खोखली वस्तु की अंदर की माप लेने के लिए इस प्रकार के मैपिंग टूल का प्रयोग किया जाता है।  इस माइक्रोमीटर में एक पतली छड़ लगाकर इसे जॉब के भीतर डाला जा सकता है।  जिसे हैंडिल कहते हैं।  इनसाइड माइक्रोमीटर द्वारा एक बार में 12 मिमी की सीमा में माप लिया जा सकता है। इससे  बड़ी माप लेने के लिए एक्सटेंसन रॉड का प्रयोग किया जा सकता है। यह एक्सटेंसन रॉड 50-75, 75-100 अर्थात 25 मिमी की अंतर् से होती है। 

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सबसे पहले मेरे सभी पाठको को धनतेरस की ढेर सारी शुभकामनाएं। इस पोस्ट के माध्यम से आज हम आपको बताने वाले है की धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और कैसे मनाया जाता है साथ ही हम इस त्यौहार को मनाने पर होने वाले लाभ के ऊपर पर भी चर्चा करेंगे तो चलिए जानते हैं धनतेरस के बारे में :-
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Dhanteras Kyo Manaya Jata Hai (धनतेरस क्यों मनाया जाता है ?)

जैसे की आपको पता है की भारत एक सर्व धर्म समभाव वाला देश है जो की हर धर्म को समान भाव से देखता है और सभी धर्मों का आदर करता है साथ ही यहां पर हिन्दुओं की संख्या बहुत ज्यादा है जिसकी संख्या को प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो यहां हिन्दुओं की संख्या 70 % से 80% के लगभग है जिसके कारण यहां पर इन्हीं लोगों का सबसे ज्यादा त्यौहार और पर्व होते हैं साथ ही यहां पर अन्य धर्म वाले भी इस धर्म का आदर करते हैं।
धनतेरस के पर्व को लेकर हिन्दू समाज में मान्यता है इस त्यौहार को भगवान धन्वन्तरी के लिए उनको प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। कहा जाता है की भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य के देवता हैं और वे उस समय देवताओं के वैध हुआ करते थे। भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन के द्वारा हुआ था और साथ ही हिन्दुओ में यह भी मान्यता है की माँ लक्ष्मी का उद्भव उस समय समुद्र मंथन से हुआ था जिसको भगवान विष्णु ने धारण किया था।  और माता लक्ष्मी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
इस दिन यह भी मान्यता है की यदि इस दिन कोई माता लक्ष्मी से संबंधित कोई सामान लेते हैं जिसमें माँ लक्ष्मी का वास हो तो वह हमारे लिए अत्यंत ही लाभकारी होता है। जैसे की इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता है तो कई धर्म वेत्ताओं का मान्यता है की इस दिन यदि माता लक्ष्मी के रूप में कोई सम्पती हम खरीदते हैं तो उसमें तेरह गुना की वृद्धी होती है। तथा घर में सूख शांति आती है।
इस दिन भगवान श्री गणेश की भी पूजा की जाती है जो रिद्धि और सिद्धि के स्वामीं कहे जाते हैं और लोगों का यह भी मनना है की रिद्धी और सिद्धी के आ जाने से सभी दुःख और विकार हमसे दूर हो जाते हैं तो इस कारण भी धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है इसे मनाने के पीछे और भी अनेकों कारण हैं लेकिन समय के अभाव के कारण मैं यहां पर नहीं लिख सकता हूँ।

शासकीय रूप में मान्यता !

इस दिन चूँकि भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना की जाती है जो की आयुर्वेद के ज्ञाता थे और स्वास्थ्य के देवता कहे जाते थे। तो इन्हीं को लेकर हमारी सरकार भारत सरकार ने भी इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है जिसे हर वर्ष इसी दिन मनाया जाता है।

धनतेरस कब मनाया जाता है ?

देखिये धनतेरस को मनाने के पीछे कोई एक दिन या दिवस निर्धारित नहीं किया गया है इसे मनाने के लिए हमें दिवाली का इन्तजार करना पड़ता है और इसे दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है तथा इसके एक दिन बाद दिवाली मनाया जाता है दिवाली को मनाने के पीछे भी कारण है जिसको मैंने एक पोस्ट के माध्यम से बताया भी है इसे आप पढ़ सकते है पढ़ने के लिए लिंक है।
दीपावली या दिवाली दोनों एक हैं !

धनतेरस का त्यौहार कैसे मनाया जाता है ?

इस धनतेरस के त्यौहार को मनाने के पीछे कोई एक तरीका नहीं है इसे कई तरिके से लोग मना सकते हैं कोई पाबंदी नहीं है फिर भी इस दिन ज्यादातर लोग सोने एवं चांदी की खरीददारी करते हैं क्योकि सोने में माता लक्ष्मी को विराजमान है ऐसा माना जाता है और चांदी में श्री गणेश को विराजमान माना जाता है कई लोग इस दिन किताबें खरीद कर भी इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं क्योकि किताबों में माता सरस्वती का वास होता है ऐसा लोगों का मानना है और लोग बहुत इस दिन चूँकि इन तीनो देवताओं को भी पूजते हैं इस कारण भी यह चींजें ली जाती हैं और घर में अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए इस दिन को मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि आपकी मनोकामना पूरी करें।

धनतेरस को मनाने के पीछे क्या लाभ है ?


लाभ-वाभ के बारे में मुझे तो पता नहीं लेकिन लोगों की आस्था इससे जुडी हुई है और लोगों की मान्यता है की इस दिन अगर कोई सामान या कोई भी वस्तु जो घर के काम के लिए उपयोगी हो या धारण करने के लिए हो वह बहुत ही लाभकारी होता है। साथ ही यह वर्षो से चला आ रहा है तो इसके पीछे हम लाभ को लेकर चले तो यह नाइंसाफी होगी तो मेरा मानना है की यह भगवान के प्रति आस्था बनाये रखने का एक माध्यम है। संसार में अभी कई ऐसे भी हैं जो इसके लाभ को देखकर इसे मनाते या मानते हैं लेकिन मेरा मानना है यह भगवान राम चंद्र के वन से आगमन के पहले की धूम है जिसे लोग धूम-धाम से मनाते हैं और भगवान राम का स्वागत करते हैं।
चूँकि यह पर्व हजारों वर्षों से मनाते चली आ रही है इस कारण इस पर लोगों की आस्था इतनी प्रगाढ़ हो चली है और होना भी चाहिए विश्व कल्याण के लिए यह आस्था भी जरूरी है मैं नहीं कहता की आप ज्यादा कीमती सामान लें मैं बस यहीं कहूंगा की दिए जलाने के बहाने किसी गरीब के पास से दिए खरीद लेना शायद उसका भी भला हो जाए और थोड़े से पैसे वह इस त्यौहार के बहाने कमा लें और वह भी धूम-धाम से अपने परिवार के साथ दीपावली का त्यौहार मनाएं। अगर आपको ये कॉन्सेप्ट अच्छा लगा मेरे साथ शेयर जरूर करें। कमेंट के माध्यम से !

बिजनेस करने के लिए प्रकार के बारे में पोस्ट

सारांश :-
 मेरे हिसाब से धनतेरस एक पर्व के साथ-साथ अब राष्ट्रीय दिवस बन गया है तो इसे और हर्षों उल्लास के साथ हमें मनाना चाहिए। साथ ही अपने और अपने परिवार वालों का स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें

Monday, October 21, 2019

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 आज हम बात करने वाले है डीजल मैकेनिक कोर्स में प्रयोग होने वाले नापने वाले औजार के बारे में इस पोस्ट को लिखने से पहले मैंने आपके लिए इसी से रिलेटेड और भी दो पोस्ट लिखें हैं जिसमें मैंने आपको बताया है स्टील फुट रूल के बारे में और स्टील मेजरिंग टेप के बारे  में इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला हूँ कैलिपर के बारे में इससे पहले हम इसके बारे में डिटेल से जाने चलिए जानते हैं यह होता क्या है ?

क्या होता है कैलिपर्स?

जैसे की आप जानते ही है की किसी डीजल मशीन में या किसी भी प्रकार के ऐसे मशीन में कई ऐसे पार्ट लगे होते हैं जिसके नाप लेने में साधारण स्टील टेप का उपयोग नहीं किया जा सकता है और यह बहुत ही कठिन कार्य होता है कई जगह तो ऐसे होते हैं जहां पर टेप को भी नहीं घुसाया जा सकता है और ऐसे भी जगह होते हैं जहां पर अगर माप लेने में थोड़ी भी चूक अगर हमरे होती है तो वह पार्ट खराब हो सकता है और साथ ही अगर वह पार्ट मशीन से ही जुड़ा हो तो वह मशीन पूरा खराब हो सकता हैं।  इसी से बचने के लिए इस प्रकार के कैलिपर्स का प्रयोग किया जाता है।

किसीे गोले अथवा खोखले जॉब की साधारण माप लेने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

कैलिपर्स र्थ किस पदार्थ के बनाये जाते हैं ?

इस प्रकार के कैलिपर्स का निर्माण स्टेनलेस स्टील से किया जाता है जिससे यह बहुत ही सख्त होता है और यह स्तेन लेस होता है यानी की तन्यता नहीं होती है।

इस प्रकार के मैपिंग टूल से किस प्रकार नाप लिया जाता है ?

इस प्रकार के टूल से माप लेने के लिए इसमें जो दो टांगें होती हैं उनका प्रयोग किया जाता है और साथ ही जब हम माप लेते हैं तो इन दोनों टांगों का प्रयोग करके ही इसका माप लिया जाता है इनके टांगों को फैलाया जाता है और दोनों टांगों को जॉब से स्पर्श कराया जाता है जिससे उनकी दुरी या गेप का पता हमें चल जाता है।
इस दुरी को स्टील फुट रॉड के ऊपर दर्शाया जाता है या पढ़ा जा सकता हैं।

नाप लेते समय क्या सावधानी बरतना चाहिए ?

इस प्रकार के टूल का प्रयोग इस प्रकार से करना चाहिए की यह जॉब से ज्यादा रगड़ ना खाये और ज्यादा ढीला भी ना रहे और न ही ज्यादा कड़ा न हो इससे जो माप लेते हैं उसे स्टील फुट रूल के द्वारा पढ़ा जाता है।

 यह दो प्रकार का होता है -

  1. आउट साइड कैलिपर्स 
  2. इन साइड कैलिपर्स 
अगले पोस्ट में हम बात करने वाले हैं माइक्रोमीटर के बारे में आज के पोस्ट में बस इतना ही धन्यवाद!

इन्हें भी पढ़ के देखे कैसे लगता है कमेंट करके बताएं 
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Hello and  welcome my dear friend आज मै आपको बताने वाला हूँ डीजल मैकेनिक कोर्स में प्रयोग में लाये जाने वाले खोलने एवं बाँधने वाले औजार के बारे में इससे पहले आप इस पोस्ट के बारे में जाने आपको बता दे की इससे पहले मैंने इसी के सम्बंध और भी पोस्ट लिखे है जिसमें मैंने आपको अलग अलग पोस्ट के माध्यम से इस खोलने एवं बाँधने वाले औजार के बारे में बताया है जैसे मेरे पोस्ट थे। खोलने एवं बाँधने वाले औजार पेचकस, प्लास, स्पैनर के बारे में बताया था और आज हम आपको बताने वाले हैं हैमर जिसे आम बोलचाल की भाषा में हथोड़ा कहा जाता है।

हैमर (हथोड़ा) क्या है?

किसी भी प्रकार के धातु एवं ऐसे चीज जिनको निकालने के लिए ज्यादा बल की आवश्यकता होती है तो उसके लिए इस प्रकार के टूल का उपयोग ज्यादा किया जाता है।  अर्थात किसी वस्तु को ठोकने मोड़ने या सीधा करने के लिए हैमर का प्रयोग किया जाता है।

हैमर को किस धातु से बनाया जाता है?

हथोड़े को कास्ट स्टील या कार्बन स्टील के बने होते हैं

हैमर कैसे दीखता है?

हैमर एक लोहे के टुकड़े होते है या इसे प्लास्टिक से बनाया जाता है कई जगहों पर यह लोहे का हथोड़ा काम नहीं आता है।  हथोड़े में हैंडिल लगा होता है।  जिसे बैच लगाकर टाइट कर देते हैं।  इससे क्या होता है हैंडिल से हथोड़े के हेड का निकलना इतना आसान नहीं होता है। और भय भी नहीं रहता है।
इस प्रकार ये हैमर का आकार और वजन उसके आकार पर निर्भर करता है। तथा इसके बड़े आकार को घन के नाम से भी जाना जाता है जिसका प्रयोग बड़े धातुओं को अन्य आकार में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

हैमर के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं ?

  1. फेस 
  2. पोल 
  3. नैक 
  4. चीक 
  5. वैज 
  6. आई होल 
  7. पीन 
  8. हैण्डल 
अब यह उपयोगिता के अनुसार कई प्रकार के हो सकते हैं तथा इसके अलावा यह 250 ग्राम से 1 किलो या उससे ज्यादा के भी हो सकते हैं।

हैमर या हथौड़ा कितने प्रकार का होता है ?

हैमर को उनके कार्य के आधार पर निम्न प्रकारों में बांटा गया है -

  1. बाल पीन हैमर 
  2. क्रास पीन हैमर 
  3. स्ट्रेट हैमर 
  4. स्लेज हैमर 
  5. सॉफ्ट हैमर आदि इसके अलावा और भी हो सकते हैं। 
1. बाल पीन हैमर - इस प्रकार के हथौड़े का सबसे ज्यादा प्रयोग गैरेजो में या सामान्य काम करने वाले लोगों के द्धारा  किया जाता है. इस प्रकार के हैमर में एक ओर प्लेन होता है तो दूसरी ओर हथोड़े का भाग तीन चौथाई गोल टेपर होता है। या कहें बाल जैसेपिन बना  होता है इस कारण इसे बाल पीन हैमर के नाम से भी जाना जाता है.इसका प्रयोग रिपीट को ठोकने अथवा फैलाने के लिए किया जाता है।  यह बहुत ही उपयोगी औजार है जिसका प्रयोग किसी मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिए किया जाता है।

2. क्रास पीन हैमर - इस प्रकार के क्रास पीन हैमर का उपयोग V आकार के ग्रूव बनाने में किया जाता है क्योकि इसके पीछे का भाग तो फेस होता जिसे प्लेन भी कहते हैं तथा दूसरी ओर क्रॉस के रूप हैंडिल के समकोण पर टेपर हुआ रहता है इसी कारण इसका प्रयोग V आकार के खांचे बनाने के लिए किया जा सकता है। इसका उपयोग चैनल बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

3. स्ट्रेट पीन हैमर - यह हैमर लगभग क्रॉस पीन हैमर के समान होता है लेकिन इसका जो पीन होता है वह हैमर के हैंडिल  सीध में होता है। इसका प्रयोग क्रॉस पीन  हैमर के समान चैनल बनाने V ग्रूव बनाने तथा रिवेट को फैलाने आदि के लिए किया जाता है।

4. स्लेज हैमर - इस प्रकार के हैमर घन भी कहलाते हैं। इनका अधिकतर उपयोग ब्लैक स्मिथी के कार्यों में गोल रॉड स्मरिया एंगल आयरन चैनल या फ़्लैट आयरन को सीधा करने मोड़ने या काटने के लिए किया जाता है। इसका आकार डबल फेस हैमर के समान होता है।

5. सॉफ्ट हैमर - जिन जॉब में  हथोड़ों से चोट मारने पर उस पर निशान आने का भय रहता है। उन जॉबों के लिए नर्म या सॉफ्ट हैमर का प्रयोग किया जाता है।  यह हैमर लकड़ी, बैकलाइट, प्लास्टिक, पीतल , ताँबे , या एल्युमिनियम आदि नर्म धातुओं के बनाये जाते हैं।
Hammer

सारांश - इस पोस्ट में हमने जाना हैमर के बारे में तो यहां पर यह स्पस्ट हो जाता है की यह एक महत्वपूर्ण औजार है जिसका प्रयोग हम मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिये करते हैं. इन प्रकारों के अलावा यह उपयोगकर्ता के अनुसार और भी प्रकार के हो सकते हैं. जैस की चिपिंग हैमर , लॉय हैमर आदि।

इन्हें भी देखें और जाने डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड टॉपिक्स के बारे में -

Friday, October 18, 2019

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आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आज मै आपके लिए लेकर आया हूँ डीजल मैकेनिक में उसे होने वाले खोलने एवं बाँधने वाले औजार को लेकर आज हम बात करेंगे की कैसे हम स्पेनर का उपयोग करके किसी मशीन को खोल सकते एवं बाँध सकते हैं इससे पहले मैंने आपके लिए एक पोस्ट और लिखा था जिसमें मैंने आपको बताया था इसी खोलने एवं बाँधने के लिए उपयोग किया जाने वाला औजार Pechkas और प्लायर के बारे में आपको बताया था आज के इस पोस्ट में चलिए पढ़ते हैं स्पैनर के बारे में

स्पैनर क्या है?

किसी मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिए सबसे अधिक प्रयोग हम हो या कोई और हो इसी स्पैनर का प्रयोग करता है. आम बोलचाल की भाषा में इसे ज्यादातर चाबी के नाम से जाना जाता है.
one_had_spanner


स्पैनर किस पदार्थ के बने होते है?


स्पैनर को ज्यादातर ड्राप फोर्ज स्टील या हाई कार्बन स्टील के बनाया जाता है.

स्पैनर कैसे कैसे आकार का होता है?

स्पैनर के आकार की बात करें तो इसका आकार इसकी उपयोगिता के आधार पर निर्भर करता है. कार्य किस प्रकार के करना है उस हिसाब से इसे अलग अलग बनाया जा सकता है. अब बात करते है इसके प्रकारों की तो यह निम्न प्रकार का होता है-

स्पैनर का प्रकार 
  1. ओपन एण्ड स्पैनर
  2. डबल एण्ड स्पैनर
  3. रिंग  स्पैनर 
  4. सॉकेट स्पैनर 
  5. एडजस्टेबल स्पैनर 
  6. हुक स्पैनर  
  7. एलेन स्पैनर 
1. ओपन एण्ड स्पैनर -
                               इस  प्रकार के स्पैनर में केवल एक और खुला हुआ भाग होता है जिससे नट को फसाया जाता है. और उसे खोला जाता है एवं कसा जाता है. इसे एक और नाम सिंगल एन्ड स्पैनर के नाम से भी जाना जाता है. इसकी माप या साइज को मापने की बात करें तो इसे बीच से नाप कर इसके साईज को नाप कर बताया जाता है।

2. डबल एण्ड स्पैनर -
                            इस प्रकार के स्पैनर भी ओपन एण्ड स्पैनर के समान होता है. फर्क सिर्फ इतना होता है की इसके दोनों और खुला हुआ भाग होता है जो की अलग अलग नाप का होता है और इसे उनके सिरों पर लिखा जाता है. इसके दोनों सिरों में जो ओपन हैड बनाया जाता है वह प्रायः 30 से 150 अंश के कोण पर बनाया जाता है. इस प्रकार के स्पैनर में इस प्रकार की सुविधा होने के कारण इसका प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है. लेकिन इसकी खराबी यह है की यह जल्दी ख़राब होता है और ठीक से नही फसा पाने पर नट के हेड को ख़राब कर देता है.

3. रिंग स्पैनर -
                          इस प्रकार के स्पैनर में दोनों ओर या एक ओर गोल गोल छल्ले बने होते हैं  या कहें रिंग के समान रचनाये होती है जिसमें नट को फंसाया जाता है. और खोला एवं कसा जाता है इसी लिए इसे खोलने एवं बाँधने वाले औजार कहा जाता है. ये छल्ले (रिंग ) बॉडी से विपरीत दिशा में थोड़े से झुके हुए होते हैं.

4. सॉकेट स्पैनर -
                          इस प्रकार के स्पैनर गोल गुटको के रूप में आते है इसके एक सिरे में चौकोर खाचा बना होता है जो की एक ही साइज का होता है. और दूसरे और अलग अलग साईज के गोल ( रिंग ) गुटकों के रूप में आते हैं. यह गोल गुटके अलग अलग माप के बनाये या बने होते है जो की विभीन्न साइज के नट को खोलने एवं कसने के लिए उपयोग किया जाता है. इसमें भी रिंग स्पैनर के समान खाँचे कटे होते हैं।

5. एडजस्टेबल स्पैनर -
                          जैंसे की इसका नाम है एडजस्टेबल स्पैनर उसी प्रकार इसे एडजस्ट किया जा सकता है।  और इसक प्रकार के स्पैनर का प्रयोग वहां किया जाता है जहां पर किसी अन्य प्रकार के स्पैनर फीट नहीं होते हैं।  इस प्रकार के स्पैनर को स्क्रू रिंच के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इसे एक स्क्रू की भाँती कंट्रोल करने के लिए हेड में एक स्क्रू लगा होता है।

6. हुक स्पैनर -
                        इस प्रकार के स्पैनर के आकार के बात करें तो यह C  के आकार का होता है। इसका प्रयोग राउंड नट के लिए किया जाता है। इसके सिरे पर पिन  बना होता है।

7. एलेन की -
                       इस प्रकार स्पैनर का प्रयोग ऐसे नटों को खोलने एवं कसने में किया जाता है जिसके हेड पर छह कोर वाले खांचे बने होते हैं यह छः पहल वाला ठोस पसली रॉड होता है. यह एक ओर से 90 अंश के कोण पर झुका होता है।

सावधानियाँ 

  1. सही माप के स्पैनर का ही प्रयोग करना चाहिए नहीं तो नट या  बोल्ट का हेड ख़राब जो सकता है। 
  2. स्पैनर के दूसरे सिरे का प्रयोग पाइप के साथ नट खोलने या कसने के लिए नहीं करना चाहिए। 
  3. स्पैनर को  हैमर से नहीं ठोकना चाहिए क्योकि इससे इसके टूटने का खतरा रहता है। 
सारांश - जब भी हम किसी स्पैनर का प्रयोग करें सावधानी के साथ करें और उचित स्पैनर का प्रयोग करना चाहिए इसको ठीक से पकड़ना चाहिए। और फिर जोर लगाना चाहिए।


Sunday, October 13, 2019

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Hello and welcome friend आज हम बात करने वाले हैं हम खोलने एवं बांधने वाले औजार प्लास (plier) के बारे में जिसमें मैं आपको बताऊंगा प्लास क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?
दोस्तों इससे पहले जो मैंने पोस्ट किया था मैंने उसमें आपको बताया था पेचकश के बारे में यह भी एक assembling and opening tool है।

प्लास क्या है?

प्लास यह एक बहु उपयोगी औजार है जिसका प्रयोग वस्तुओं को पकड़ने के लिए और छोटे-मोटे तार को काटने व मोड़ने के लिए किया जाता है। यह 6 inch से 10 इंच तक की लंबाई के हो सकते हैं या उससे बड़े भी हो सकते हैं यह उसके उपयोगिता के आधार पर निर्भर करता है।




प्लास के प्रकार


  1. Flat या combination प्लास
  2. Long nose plas
  3. Sleep join plas
  4. Gais plas
  5. Side cutting plas
  6. Vice grip plas
1.Flat or combination plier
इस प्रकार के प्लास का उपयोग लगभग सभी कार्यों के लिए किया जाता है जैसे बिजली की फिटिंग के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है लेकिन इस प्रकार के प्लास में इंसुलेटेड प्लास्टिक के कवर लगे होते हैं। इस प्रकार के प्लास में आगे का भाग चपटा होता है और बीच का भाग गोल दातनुमा होता है। और इसका एक साइड धार वाला होता है जिसका प्रयोग तार को काटने के लिए करते हैं।
plier

2.Long nose plier
long nose plier

इस प्रकार के प्लास के जबड़े लंबाई में टेपर लिए होते हैं और इनमें काटने वाली धार नहीं होती है इनका प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां कंबीनेशन प्लास का उपयोग नहीं किया जा सकता और पर्याप्त स्थान नहीं होता उस जगह पर इसका प्रयोग करते हैं विशेष रुप से इनका प्रयोग गोल्ड स्मिथ रेडियो तथा टीवी के कार्यों में तारों की गुंडी बनाने उन्हें मोड़ने आदि के लिए किया जाता है इनके द्वारा बेरिंग लॉक भी खोले जा सकते हैं।

3.Slip joint plier
Slip joint plier

इस प्रकार इसका जैसा नाम है उसी प्रकार इसे जोड़ पर से खीसका कर इसके जबड़े के साइज को बढ़ाया जा सकता है या कहे इसे कम या ज्यादा खोला जा सकता है। इसका प्रयोग ज्यादातर नट बोल्ट को टाइट करने के लिए क्या जाता है, इसमें तार को काटने के लिए कोई आकार नहीं होता है।

4.Gas plier
gas plier

जैसे कि इसका नाम है गैस प्लास इसका उपयोग गैस पाइप के स्क्रू व बोल्ट को टाइट करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा आयल पाइप पर लगे नटों को खोलने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। इसे सुविधाजनक स्लिप ज्वाइंट प्लास के समान छोटा या बड़ा किया जा सकता है।

5.Side cutting plas
side cutting plier

इस प्रकार के प्लास का उपयोग तारों को काटने के लिए किया जाता है बिजली की तारों को इसके द्वारा वस्तु को पकड़ा या मोड़ा नहीं जा सकता है। अन्य छोटे-मोटे तारों को भी इससे काट सकते हैं।

6.Vice grip plier
vice grip plier

यहां बहु उपयोगी प्लास है इसके जबड़ों को छोटा बड़ा किया जा सकता है इसे रिंच या वॉइस के समान भी प्रयोग कर सकते हैं।




सुरक्षा एवं सावधानियां



  1. साइड कटिंग प्लास से अच्छे स्टील की तार तथा किले आदि नहीं काटने चाहिए।
  2. काम को देखते हुए उसमें कुछ होने वाले प्लास का ही उपयोग करना चाहिए।
  3. प्लास का उपयोग हैमर के समान नहीं करना चाहिए इससे ठोकना नहीं चाहिए।
  4. विद्युत कार्यों के लिए इंसुलेटेड प्लास का उपयोग करना चाहिए।
  5. Long nose plas का नोज खराब हो जाने पर इसे ग्राइंडर से ग्राइंडिंग करके प्रयोग करना चाहिए।
Conclusion

प्लास का उपयोग ज्यादातर लोग समान्य कार्यों के लिए करते है और यह बहु उपयोगी औजार है जो खोलने एवं बांधने के लिए किया जाता है।

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Saturday, October 12, 2019

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Hello and welcome friend आज मैं आपसे बात करने वाला हूं डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड खोलने एवं बांधने वाले औजार के बारे में जिसमें मैं आपसे बात करूंगा पेचकस के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।
standard screwdriver offset screwdriver ratchet screwdriver Phillips screwdriver
Screwdriver

क्या है पेचकस?(pechkas kya hai)


दोस्तों आपने पेचकस को एक और नाम से सुना होगा जिसको हम स्क्रुड्राइवर कहते हैं स्क्रुड्राइवर छोटा बड़ा होता है अपने काम के अनुसार यह हो सकता है। हर सभी को टेस्टर के बारे में मालूम ही होगा जिससे हम बिजली के करंट का पता लगाते हैं तो पेचकस भी उसी प्रकार का होता है लेकिन यह आकार में बड़ा होता है।
तो इससे अब क्लियर हो गया होगा कि पेचकस क्या है?
स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग किसी स्क्रू को खोलने या कसने के लिए प्रयोग किया जाता है।




पेचकस के भाग(pechkas ke bhag)


  • Blade cheap
  • Sank
  • Handle


Blade cheap
पेचकस के आगे का भाग blade cheap कहलाता है।
Sank
पेचकस का मध्य भाग जोकि गोल होता है वहां सैंक कहलाता है।
Handle
पेचकस का ऊपरी भाग जिस को पकड़ कर घुमाया जाता है वहां हैंडल कहलाता है।

पेचकस के प्रकार(pechkas ke prakar)

लंबाई के आधार पर फैसला निम्न प्रकार के होते हैं


  1. साधारण फ्लैट पेचकस
  2. आफसेट पेचकस
  3. रैचिट पेचकस
  4. फिलिप्स पेचकस


1.साधारण फ्लैट पेचकस(simple pechkas)

यह साधारण पेचकस होते हैं और जिस प्रकार सभी पेचकस खोलने एवं कसने के लिए प्रयोग किए जाते हैं यह विभिन्न साइज छोटे बड़े आकार के होते हैं इन पर लकड़ी या प्लास्टिक का हैंडल लगा होता है यह कार्य के अनुसार लाइट ड्यूटी स्क्रुड्राइवर होते हैं इनका बीट यानी आगे का भाग चपटा होता है।

2.ऑफसेट पेचकस(offset pechkas)

इस प्रकार के पेचकस के आगे का भाग भी चपटा होता है और पीछे का भाग भी चपटा होता है लेकिन इसकी दोनों ओर के आखरी छोर 90 अंश के कोण पर मूडे होते हैं। इस प्रकार के पेचकस का प्रयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहां पर साधारण पेचकस का उपयोग नहीं किया जा सकता या वह तिरछा होता है।
इसका मतलब है सकरी जगहों पर इस प्रकार की पेचकस का उपयोग किया जाता है।

3.रैचिट पेचकस (rachit pechkas)

इस प्रकार के रैचिट पेचकस में स्प्रिंग लगे होते हैं और रैचिट हैंडल के अंदर यह फिट होते हैं। और हैंडल के बाहर एक बटन होता है जिसे दबाने पर स्प्रिंग द्वारा रैचिट पेचकस के सैंक को घुमाने लगता है और बटन को छोड़ने पर वह घुमाना बंद कर देता है और पुनः अपनी स्थिति में वापस लौट आता है इस प्रकार के पेचकस का प्रयोग करने से बहुत ही शीघ्रता से पैचो को खोला जा सकता है।

4.फिलिप्स पेचकस (Philips pechkas)

Philips pechkas ऐसे पेचकस होते हैं जिनके आगे का भाग 4 पहल में कटा होता है और इसका प्रयोग ऐसे स्क्रू को खोलने में किया जाता है जिसके ऊपर क्रॉस का या क्रॉस के आकार का ग्रुव बना होता है या खाजा बना होता है। यह विभिन्न नंबर्स के अनुसार माप के आते हैं।




Conclusion

पेचकस एक महत्वपूर्ण औजार है जिसका प्रयोग हम डीजल मैकेनिक कोर्स के अंतर्गत करते हैं। इसके प्रकार को हम अन्य आधारों पर भी बांट सकते हैं।

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Hello and welcome friends आज मैं यहां पर बात करने वाला हूं, new technology के बारे में। इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा फ्यूचर में या वर्तमान में भी चलाया करो जिसके बारे में।सबसे पहले आपको बता दें कि टेक्नोलॉजी क्या है?
wireless charger jetpack aero fax two language earbuds

Technology kya hai

Technology ओ हिंदी में प्रौद्योगिकी के नाम से भी जाना जाता है और इसका बहुत बड़ा हाथ है हमारे दैनिक जीवन में क्योंकि आज बिना प्रौद्योगिकी के आगे बढ़ना संभव नहीं है।
इस प्रकार"प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जो लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए मशीन और उन प्रकार के नए-नए खोज करने हेतु मनुष्य द्वारा औद्योगिक रूप से विकास किया गया है।"
इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला होलोग्राफिक फोन, jetpack, high power wireless charger, aero fax, two language earbuds इन सभी के बारे में।




1. Jetpack

भविष्य में जेट पैक का अविष्कार हो सकता है आपने आयरन मैन मूवी देखी होगी और उसमें जो सूट का इस्तेमाल आयरन मैन करता है वह बिल्कुल जेडपैक के ही समान ही होता है उसमें पैर में हाथ में बूस्टर लगे होते हैं और पीठ के पीछे भी बूस्टर लगे होते हैं। तो जेट पैक के यूज से आदमी अपने आप को हवा में ऊपर उठा सकता है और यहां वहां ट्रेवल कर सकता है।
लेकिन अभी समय से आया है कि इसके लिए हाईकोर्ट अर्जी की आवश्यकता को कहां से पूरा किया जाए तो इसी पर अभी खोज चल रहा है भविष्य में यह हो सकता है।

 2.HI Power wireless charger

Hi power कहने से ही पता चलता है कि हाई पावर चार्जर किस हद तक फोन को चार्ज करेगा अभी के समय में ऐसे चार्जर आ चुके हैं जो कि आपके मोबाइल को तुरंत ही चार्ज कर देते हैं लेकिन वे अभी वायरलेस नहीं है अब वह जो आने वाला समय है वह वायरलेस का होगा और यहां बहुत ही आपके लिए फायदेमंद होगा जिससे कि आप फोन का यूज कहीं भी बैठकर कर सकते हैं और वहां चार्ज होता रहेगा।
जैसे एक कमरे का उदाहरण ले अगर आप कमरे में किसी एक कोने पर बैठे हैं और आपका चार्जर किसी दूसरे कोने पर ऑन हैं तो आपका मोबाइल फोन अपने आप चार्ज होता रहेगा उसे किसी बात से कनेक्ट करने या केबल से कनेक्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी इस वायरलेस चार्जर के आ जाने से।

 3. Airo fax

Airo fax भविष्य में यूज किया जाने वाला एक ऐसा यान होगा जिसको कोई व्यक्ति एक मोटरसाइकिल की भांति ऑपरेट कर सकता है और यह travel को और भी आसान बना देगा। जिसे लोगों के बीच की दूरियां और भी कम हो जाएंगी और लोग जिससे तुरंत ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाएंगे।

 4.Two language earbuds

देखिए दोस्तों अब का जमाना बहुत ही फास्ट है और अभी के समय में किसी के पास किसी भी लैंग्वेज को सीखने के लिए उतना ज्यादा समय नहीं है कि वह उस लैंग्वेज को अच्छे से समझ पाए और सीख पाए तो इसी को आसान बनाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों द्वारा ऐसी खोजे की जा रही है जिससे कि लोगों को किसी दूसरे भाषा को समझने के लिए किस माध्यम की आवश्यकता हो ना कि उसे सीखने की इसी आधार पर भविष्य में two language earbuds का आविष्कार हो सकता है।
यहां पर मैंने आपको कहा है two language earbuds इसका मतलब यह है कि यहां दो भाषाओं के बीच के आपके समझने के लिए बनाया गया ऐसा एयरफोन होगा जो सामने वाले के भाषा को आपके भाषा में ट्रांसलेट करके बताएगा।




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Hello and Well-Come my Dear Friends Aaj mai bat karne Wala hu Diesel Mechanic coarse me use hone Wale kholne ewm bandhne wale aujar ke bare, is post me mai aapko bataunga ki kya hota hai kholne vala aujar aur Bandhne ke liye Use kiye jane wale aujar ke bare me bhi aapko bataunga.
chaliye jante hai.
plier pechkas hammer pana rinch

Kya hota hai Kholne ewm Bandhne wale aujar

Dosto aapko bata de ki jab bhi hame kisi chij ki repairing ki aawshyakta hoti hai to sabse pahle hame inhi to chijo ki aawashyakta padti hai jinhe ham kholne ewm bandhne wale aujar kahte hain.




Kholne Wale ewm Bandhne aujar kya hai

Kholne wale aujar ese aujar hote hai jiska upyog ham kisi bhi prkar ke machine ke upar ke bhag ko ya upar ke parat ko hatane ke liye karte hai.
Ya ise is prakar se bhi samjha ja sakta hai jab hame kis nut ko ya kisi dhakkan ko hatane ki aawshyakta ya kholne ki aavshyakta padti hai to ham kramsha pana ewm penchis (palas) jaise chijo ki aawshykata padti hai is prakar jo chije ham kholne ke liye use karte hai jyadatar vahi chije ham wastuo ke machine ko band karne ke liye bhi karte hai.
is prakar kai chije ese jisme ek hi aujar ya tool ki aawshyakta hoti hai lekin kai jagaha esa nahi hota hai kai jagah par kholne ke liye alag aujar ka use kiya jata hai to kai jagah par ek hi aujar ka use kiya jata hai.
Jyadatar kai Machine me esa hi hota hai.jisme ek hi aujar se kholne aur bandhane ka kary pura kar liya jata hai.

Types of Assembling and Opening Tool

Ese to yaha par bahut sare tools aapko Diesel mechanic coarse me dekhne ko mil jate hai lekin mai yaha par kuch important tool ke bare me hi aapko bataunga jo ki hamesha prayog kiye jate hai to chaliye jante hai un tools ke nam..
  1. Pechkas (Screw Driver)
  2. Plas (Plier)
  3. Spanner
  4. Rinch
  5. Hand Hammer
Is prakar maine yaha par sirf inhi tools ka varnan kiya hai jiska sabse jyada use Diesel Mechanic Course me hota hai. ab in sabhi ka agar visar se padhai kare to yaha isi post me sambhav nahi to iske liye maine in sabhi ka alag alag post likha hai aur ise pura karne ki kosis ki hai ummid hai ki aapko ye post achcha laga ho fir bhi mai in sabhi ka thaoda sa Wivran de deta hu.
  • Pechkas (Screw Driver) :- Ye ese aujar hote hai jiska upyog ham kisi sadharan pryog me aane vali mashino ke liye jayada upyog karte hai tatha is prakar ke tools ka pryog ese screw me kiya jata hai jiske uper koi lakir ya cut ka nishan hota hai. jise + Plus ka simbol bhi kah sakte hai.
  • Plas (plier) :- Plas ko ek prkar se ham cutting tools ki shreni me bhi rakh sakte hai kyoki plas se kai chhote mote taro ki katai ki ja sakti hai aur isse chhila bhi ja sakta hai.yaha do tango vala ho ta hai aur iske aage ke bhag ko ham jabra kah sakte hai.
  • Spanner :- Ise aam bolchal ki bhasa me pana bhi kahate hai aur iska pyog ham sabser jyada is Diesel mechanic course me karte hai yah bhi kai prkar ka hota hai aur iske aage ka bhaag iske karya ke aadhar par hota hai tatha iske nam ki bat kare to yah bhi uske aakar par nirbhar karta hai jaise RING SPANNER ki bat kare to iske aage ka bhag RING ke saman gol hota hai.
  • Rinch :- iska prayog bhi SPANNER ke saman kiya jata hai tatha ya bhi pipe tatha kai prakar ke halke machine ko open karne ke liye us kiya jata hai yah bhi kai prakar ka hota hai jisko aap aage post me padhenge.
  • Hand Hammer :- Ise aam bolchal ki bhasha me hathoda kaha jata hai yah bhi kai parakar ka hota hai iska upyog jayda jor se kisi kil ko thokane aur nikalne ke liye kiya jata hai. iska upyog jam ho gaye kisi part ko nikalne ke liye bhi kiya jata hai. iske prakaro ko ham aage post me paadhenge.
THANKS MILTE HAI AGLE POST KE SATH




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Monday, October 7, 2019

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Hello and welcome friends आज मैं बात करने वाला हूं कटिंग टूल्स रीमर के बारे में जिसमें मैं आपको बताऊंगा की रीमर क्या है?, Reamer किस पदार्थ का बना होता है? reamer के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?,साथ ही रीमर के प्रकार के बारे में भी मैंने यहां पर बताने की कोशिश की है।

Reamer kya hai

Diesel mechanic के कोर्स के लिए हमें कटिंग टूल्स की आवश्यकता होती है और कटिंग टूल्स में एक टूल Reamer भी है।
जब हम drill से किसी जॉब पर होल करते हैं तो उसकी फीनीसिंग के लिए हमें इस टूल रीमर की आवश्यकता पड़ती है।
इसके अलावा किसी सुराख को टेपर करने के लिए किया जाता है। किसी टेढ़े सुराग को सीधा करने के लिए और होल को बड़ा करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
रीमर के प्रयोग करने की क्रिया को रिमिंग कहते हैं।





Reamer किस पदार्थ का बना होता है?

यहां हाई कार्बन स्टील हाई स्पीड स्टील एलॉय स्टील के बने होते हैं।

Main part of reamer 


  1. Chaimfer Angel
  2. Body
  3. Shaik

1.चैम्फर कोण

चैंफर कोण रीमर का वह नुकीला भाग है जिसे सुराख के अंदर डाला जाता है इसकी चौड़ाई की बात करें तो यह ग्रेड के आधार पर होता है और user इसे अपने हिसाब से इसकी चौड़ाई को छोटा या बड़ा रख सकता है। 

2.बॉडी

बॉडी रीमर का वह भाग है जो कि रीमर के हेड के बाद आता है और यहां पर रीमर का वह भाग फिट किया जाता है जिससे कि सुराख की फिनिशिंग की जाती है। 

3.शैंक

शैंक रीमर का मेंन पार्ट है और इस पार्ट की बात करें तो यह पार्ट रीमर के बॉडी से जुड़ा पार्ट है जो कि शंकुआकार होता है। बॉडी में ही ब्लेड को फिट किया जाता है। 

Types of reamer (Reamer के प्रकार)

रिमर का प्रयोग विभिन्न प्रकार के साइज के हिसाब से विभिन्न प्रकार के काम के हिसाब से उसका प्रकार निम्नलिखित प्रकार का होता है-


  1. Hand reamer (हैण्ड रीमर)
  2. Machine reamer (मशीन रीमर)
  3. Adjustable reamer(एडजस्टेबल रीमर)

1.  हैण्डरीमर

हैंड रीमर का प्रयोग हम हाथ से करते हैं और इस प्रकार के रिमर को हाथ से ही चलाया जाता है तथा यह Adjustable रिमर के समान ही होता है इसमें हम अपने हिसाब से blade लगा सकते हैं।

2.मशीन रिमर

मशीन रीमर बिजली से चलने वाली मशीन है जिसका प्रयोग रिमिंग करने के लिए किया जाता है। Machine reamer अभी के समय में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है क्योंकि इससे काम जल्दी हो जाता है और ज्यादा मेहनत की आवश्यकता भी नहीं होती है इसलिए इसका प्रयोग सबसे ज्यादा होता है।

3.Adjustable reamer

इस प्रकार के एडजेस्टेबल रिमर को आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है और इसमें और भी कई उपकरणों के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं।

Conclusion


रिमर का प्रयोग सुराग की सफाई के लिए किया जाता है।औ साथ ही होल को बड़ा करने के लिए किया जाता है।

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Saturday, October 5, 2019

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Hello dosto aapka swagat hai mere blog par aaj mai bahut dino ke bad blog likh raha hu mera motive tha ki mai roj blogging karu lekin kuchh samasyao ke karan mai post nahi likh pa raha tha isse pahle maine aapke liye ek post likha tha Dies Kya Hai ke nam se agar aapne wo post nahi padha hai to post ko padh le kyoki aaj mai aapko isi Die ke dwara chudi katne ki widhi ke bare me btane wala hu..






Die ke dwara chudi kis prakar ke steps aapko karne hote hai wah is prakar hai..
  1. Dekhiye jab ham kisi die ke dwara chudi katate hai to sbase pahle hame kis prakar ki chudi katni hai ise pahle se taiyar kar lete hai aur jis rod par chudi katni hai uske size ko bhi adjust kar lete hai.
  2. Jis rod me chudi katni hoti hai uska upri bhag yani ki jaha se ham chudi katna chahte hai vah sira thoda sa sakra hona chahiye jise ham chamfer hona kahte hai. ese karne se chudi katne me aasani hoti hai.
  3. Chudi katne se pahle us rod ya pipe ko kisi Clamp ya Vise me kas kar jakad dena chahiye taki jhatke ke samay ya chudi katate samay vah hile nahi.
  4. Jab ham kisi pipe ya rod me chudi katate hai to Die Stoke me Die ko sahi sthiti me pakadna chahiye nahi to vah hil jata hai jiske karan chudi achchhe se nahi cut pati hai.
  5. Die ko jab ham ghumate hai to use balance karke ghumana chahiye aur uske handle ko bhi balance karke pakadna chahiye tatha use dabana bhi jaruri hota hai kyoki bina dabaye wah aage nahi badhata hai.
  6. Jab  ham Die ko ghuma rahe hote hai to hame ise bich bich me thoda se uper niche karna chahiye isse kya hota jo lohe ke tukde hote hai wah niche gir jata hai.
  7. Jab ham job ki cutting karte hai to hame lubricant ki aawasykata hoti hai jisse aasani se job ki cutting ho sake to iske liye hame Job ke anusar lubricant ka prayog karna chahiye.
  8. Kisi job par gahari chudi prapt karne ke liye hame job par die ko do se teen bar chalana chahiye jisse ki chudi gahari cut jati hai aur aur ise adjust karke hi chalana chahiye aur iske sahi size ko check karne ke liye grade gun ka use karna chahiye.
  9. aur is prakar ki prakriya puri ho jane ke bad die ke dwara jis job me chudi nikali gaee hai us job ko metal brush ya tar ke bane brush se saf karna chahiye.






conclusion :- 
Job ki cutting karte samay bahut jyada sawdhani baratne ki aawashyakta hoti hai kyoki isse job kharab hone ki sambhwna bahut jyada hoti hai.

Is prkar yah prakriya purna ho jati hai agle post me maine aapko bataya hai cutting tool reamers ke bare me milte hai agle post reamer kya hai ke sath.

Wednesday, October 2, 2019

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HELLO And Wellcome aaj mai is post me charcha krne wala hu Air Pollution ke bare me eis post me mai aapko bataunga ki Air pollution kya hai, aur ise kaise kam kiya ja skta hai, iske kya nukshan hai, Air Pollution se hone wale rog ke bare me bhi maine is post me batane ka pryas kiya hai is post ko pure dhyan se padhe aur bataye ki yah post kaise lga aur agr achchha lge to comment karke mujhe jarur batana aur agr achcha na lage to kya kami rah gayi hai mujhe comment krke bataye..

Air Pollution kya ?

Air pollution aaj kewal hmari samashya nahi hai balki Air Pollution ki ies samashya se pura wishva jujh raha hai.

Aap sabhi jante hai ki hmare aas-pas ke khali jagaho me bahut sare kachare hote hai aur inhi kachro ko pollution kaha jata hai.
 isi prakar air pollution bhi hai jo ki sabse jyada industrial chhetra ke dwara failaya jata hai.aur isse na kewal air pollution hota hai balki iske karn jal pradushan bhi bahut jyada matra me hota hai ise water pollution bhi kaha jata hai.

Toa ise ham is prkar bhi pribhashit kar sakte hai hava ya wayu men paye jane wale ese gais jo ki hame sans lene me badha utpann karte hai dushit wayu ya pollused air kaha jata hai air pollution me hame sirf sans lene me hi taklif nahi hoti hai balki isse bahut jyada matra me aankho me jalan aur durgandh bhi aati hai.

  Air pollution ke karn

wayu ko pradushit karne wale kark bahut sare hai lekin maine yaha par kuchh ko hi bataya hai jo ki is prkar hai


  • Industrial field (audhogik jagat)

Yahi wayu pradushan ka mukhy karn hai kyoki iski jyada matra me nikla gais wayu ko bahut jyada matra me air pollution karta hai aur sath hi jal prdushn bhi iske karn hota hai.
Industrial aria me pradushan is karn jyada badh raha hai kyoki jo uske malik hote hai wah bahut jyada matra me gais ko sidhe hawa me chhod dete hai, agar isi wayu ko filter karke wayu me chhoda jata to isse pollution itna jyada nahi hota. udhyog chahe jis bhi prakar ho isse wayu prdushan hota hi hai aur yaha Co2 ke karan sabse jyada hota hai.
Tatha isi ke karan hame Global Warming jaise samshyayen dekhne ko milti hai.

  • Automobiles(Wahan) 

aaj hmare desh me hi nahi blki pure Wishv me automobiles ki matra itni jyada ho gayi hai ki isse pradushn dar teji se bdhta ja raha hai. isse nikalne vale gaiso me Mathen ki bahut adhik matra hoti hai jo ki Global Warming ko badhawa dene wale karko me se ek hai.
Automobiles ke karn aaj petrol,diesel ke dam me bhi teji wridhdhi hui hai. jiske karn aaj hamare desh ke arthwyawastha par bhi bahut jayada prabhaw pada hai.
automobile me jo sabse jyada purane engine hai waha sabse jyada dhuye dete hai. is prakar automobile bhi mahatwpurn bhumika wayu pradushn me nibhate hai.


  • Farming Chemicals (khet me prayog kiye jane vale rasaynik padarth)

aajkal bahut jayada matra me chemicals ka pryog krishi karya me kiya jata hai jiska badbu itna jyada hota hai ki isse sans bhi lena bahut kathin ho jata hai aur iske karn asthama jaise rogi ki mrityu bhi ho jati hai.
jab bhi kishan kheto me pani me ghulnne vale pdarth jaise rashayanik dwaiyo ka prayog krta hai aur ise jab vah spre ke madhyam se kheto me chhidkaw karta hai to us samay yah Air me mil jata hai.
lekin yah bahut kam matra me pollution ko bdhava deta hai.
isse Water Pollution bhi bahut jayada matra me hota hai.


  • Khet me bache apsista padarth ko jalane se

aaj hariyana aur punjab is prkar ki samsya se nohe wale nukshan se bhali-bhanti wakif hai kyoki yaha ke kisan kheto ki katai karne ke bad waha bache apsist padarth ko jala dete hai jisse wayu me bahut jayada matra me carbon-dioxide wayu me fail jata hai aur jab sitkalin satra aata hai ya sit ritu aata hai tab hame is prkar ki gambhir samashya ka samna karna padta hai, aur bahut adhik matra me dhundh ka samna karna padta hai.

yaha par maine sirf 4 prakar ke bare me bataya hai anya prkaro ke liye blog ko subscribe kare jisse aap hamesha updated rahe!

How to Control Air Pollution hindi me

Wayu pradushan ko kam karne ke liye maine yaha par kuchh udahran diye hai jo ki is prkar se hai-
  1. Industrial area me use kiye jane vale chimniyo ko uncha rakhna chahiye aur filters ka upyog kiya jana chahiye.
  2. Automobiles me use kiye jane vale Engine ka samay samay me Pollution ka janch karana chahiye.
  3. Krisi karya me upyog kiye jane vale chemical ka use is prakar se karna chahiye ki vaha hava me jyada faile na aur jab hame iske bahut jayda jarurat pade tabhi iska upyog karna chahiye.
  4. Automobile ka engine bahut jyada purana ho jaye tab use change kar dena chahiye.


Air pollution se hone wale Nuksan

  1. Air pollution ke karan sit ritu me bahut jyada matra me dhundh ki barish hoti hai.
  2. Air pollution ke karan asthama ke rogi ko sans lene me bahut jayada paresani hoti hai.
  3. wayu pradusan ke karan aankhon me jalan hoti hai.
  4. Wayu me faile dhul mitti ke kan fefde me jakar jam jate hai jiske karn fefde se sambandhit rog aur adhik matra me teji se badhta ja raha hai.
  5. Air pollution ke karan tapman me bahut jyada matra me wridhdhi dekhne ko mili hai.
  6. Global Warming Wayu ke garm hone ke karan se bhi ho raha hai tapman me wridhdhi ke karan garmi ke dino me bahut jyada matra me garmi lagati hai ye to aapne anubhav kiya hi hoga.
Conclusion-
air pollution ke karan ko janne ke sath-sath hame use dur karne ke upay ke bare me bhi puri jankari rakhani chahiye. Sarkar ke dwara Air-pollution ko rokne ke liye chalaye jane vale abhiyan me bhi hame madad karne ki aavsykta hai.

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Monday, September 30, 2019

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Hello and welcome friends आज है world heart day मैं  आज इस पोस्ट में आपको बताने वाला हूं world heart day से जुड़े कुछ रोचक जानकारी जिसमें मैं आपको बताने वाला हूं world heart day क्यों organize Kiya jata है? और heart disease को कैसे कम किया जा सकता है?

World heart day क्या है?

World heart day पूरे विश्व में मनाया जाता है इस वर्ल्ड हार्ट डे की शुरुआत 2000 में हुई थी। और आज से 19 वर्ष हो गए हैं।
इसे world heart federation जोकि जिनेवा में स्थित है,के द्वारा संचालित किया जाता है।


World heart day क्यों मनाया जाता है?

लोगों को जागरूक (awareness)के लिए उन्हें heart disease के बारे में बताने के लिए यह दिन विश्व हृदय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूरे विश्व में मनाया जाता है।

World heart day का थीम क्या है?

इस बार 2019 का थीम है my heart, your heart .

Main reasons..

इस दिवस को मनाने का एक और मुख्य कारण यह है कि इस बीमारी की वजह से विश्व में लगभग 17.9 million लोग हर वर्ष मर जाते हैं इसी को रोकने के लिए यह दिन विश्व हृदय दिवस के (world heart day) के रूप में मनाया जाता है।
World health federation की वेबसाइट पर जाने पर हमें आज की दिन की बहुत सारी जानकारी मिल सकती है।
इस दिन को क्यों मनाया जा रहा है और इस दिन क्या स्पेशल है इसकी पूरी जानकारी आप वर्ल्ड हेल्प फेडरेशन की वेबसाइट पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं।


Interesting fact

इसकी शुरुआत 2000 में हुई थी।
कार्डियोवैस्कुलर डिजीज अभी के समय में मृत्यु का एक मुख्य कारण है इसे रोकने के लिए ही यह कार्यक्रम चालू किया गया था।
World heart day के अवसर पर पूरे विश्व में 1000 से भी ज्यादा activities के रूप में कार्यक्रम किया जाता है।
स्मोकिंग की वजह से लगभग 6 मिलियन लोग हर वर्ष मर जाते हैं जिसमें 10% CVD के कारण होता है।

Conclusion

Heart attack की जानकारी सभी को होनी चाहिए। क्योंकि यहां एक वैश्विक बीमारी है जो कि पूरे विश्व में फैला हुआ है जिसका कारण हमारे दैनिक जीवन का व्यवहार है।

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Friday, September 27, 2019

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Hello and welcome guys आज है NSS DAY तो आप सभी को एनएसएस डे की हार्दिक शुभकामनाएं और मैं अपने ब्लॉग में इवेंट ब्लॉगिंग की तरफ ध्यान दे रहा हूं तो आज मैंने एनएसएस डे के बारे में कुछ जानकारी आपके साथ शेयर की है जानकारी अच्छा लगे तो कमेंट करके जरूर बताना।

NSS Day

NSS क्या है?

NSS जिसको हम राष्ट्रीय सेवा योजना के नाम से भी जानते हैं इस योजना का संचालन युवा कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किया जाता है। NSS भारत सरकार द्वारा चलाए जाने वाला एक ऐसा कार्यक्रम है जोकि युवा छात्र छात्राओं को समाज से जोड़ने के लिए काम करता है।इस योजना से जुड़ने के लिए आपको 10वीं 12वीं से ही अवसर प्राप्त होने लगते हैं इस योजना में जुड़ने वाले लगभग 40000 से 3.8 million छात्र तथा छात्रा हो गए हैं। मार्च 2018 तक।

The NSS Badge

सभी युवा स्वयंसेवक जो NSS में कार्य करते हैं उनके समर्पण के स्वरूप NSS Badge को गर्व और जरूरतमंदों के मदद के भावना से दिया जाता है।

NSS मैं काम करने वालों को जो बेच दिया जाता है वहां बैच में जो 8 लकीर होता है वह कोणार्क मंदिर में उपस्थित पहिए से लिया गया है।जो कि 24 घंटे को दर्शाता है इसका तात्पर्य है कि जो एनएसएस से जुड़े होते हैं वहां 24 घंटे सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।

बैच का लाल रंग एनएसएस में कार्य करने वाले पर ऊर्जा को दर्शाता है।

एनएसएस बैच का नीला रंग उस ब्रह्मांड को दर्शाता है जिसमें मानव कल्याण के लिए कार्य करने वाले एनएसएस के कार्यकर्ताओं को ब्रह्मांड का हिस्सा बताता है।

एनएसएस का मोटो क्या है?

एनएसएस का मोटो है मैं नहीं पर तुम!

NSS में जुड़ने ने वालों को इससे तीन फायदे हैं-

वे एक सफल लीडर बन जाते हैं।
एक ऐसे व्यक्ति बन जाते हैं जो लोगों के नेचर को आसानी से समझ सकने का गुण आ जाता है।
कुशल प्रशासक बन जाते हैं।

मुख्य क्रियाकलाप

NSS के तहत 7 दिनों के कैम्प लगाया जाता है जिसमें लगभग 200 वालेंटियर भाग ले सकते हैं। सामाजिक कार्य को करने के लिए अलग अलग जगह और देश में कैम्प लगाया जाता है।

आज के पोस्ट में बस इतना ही।

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hello and welcome my dear friends आज विश्व पर्यटन दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं आज मैं इसी विषय पर आपसे बात करने वाला हूँ। इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा की विश्व पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है? और इसके Themes के बारे में मैं इस पोस्ट में आपको बताऊंगा।

क्या है विश्व पर्यटन दिवस (What is World Tourism Day)

हर वर्ष आज के ही दिन विश्व पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व पर्यटन दिवस को मनाने का ध्येय पर्यवरण के प्रति लोगों को जागरूक करना और पर्यवरण के पर्यटको को जागरूक करना है। इसका मुख्य कारण यहीं है की लोग जागरूक हों और देश के ही नहीं बल्कि विश्व को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।


विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत कब हुई?

इस प्रकार के विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत 1980 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन के द्वारा।
आज ही के दिन पर्यावरण दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है?

आज के ही दिन The let igneshiyas amduva atigbee नामक एक नाइजीरिया के राष्ट्र ने सबसे पहले यह कहा था की हर वर्ष 27 सितम्बर को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। और उनके द्वारा इस प्रकार के अनुरोध को सहर्ष स्वीकार किया गया उनके योगदान को देखते हुए।
27 सितम्बर 1970 को UNWTO ने इस प्रकार के कानून को स्वीकारा था। इसी कारण इसी दिन से इसे मानाया जाता है।

इस विश्व पर्यटन दिवस को मनाने के लिए हर साल अलग-अलग देश को सहयोगी देश के रूप में चुना जाता है। इसका फैसला इस्तांबुल ( टर्की ) में हुए बारहवीं UNWTO 1997 के महासभा में लिया गया की एक देश को सहयोगी देश के रूप में हर साल चुना जाएगा। कुछ सहयोगी देश जिसे चुने जा चुके है उनके नाम और जिस वर्ष वे चुने गए थे उनका वर्ष मैने यहां पर लिखा है-


वर्ष.      देश
2006 यूरोप
2007 साउथ एशिया
2008 अमेरिका
2009 अफ्रीका 
2011 में मध्य पूर्व क्षेत्र

इसके कुछ थीम जो विश्व पर्यटन दिवस पर हर साल रखे जाते हैं इस प्रकार है-

  • 1980 सांस्कृतिक विरासत और शांति और आपसी समझ के संरक्षण के लिए पर्यटन का योगदान  
  • 1981  पर्यटन और जीवन की गुणवत्ता
  •  1982  अच्छे मेहमान और अच्छे मेजबान
  • 1984 अंतरराष्ट्रीय समझ, शांति और सहयोग के लिए पर्यटन
  • 1985 युवा पर्यटन: शांति और दोस्ती के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत
  • 1986 पर्यटन: विश्व शांति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति1987 विकास के लिए पर्यटन
  • 1988 पर्यटन: सभी के लिए शिक्षा
  • 1989 पर्यटकों का मुक्त आवागमन एक दुनिया बनाता है
  • 1990 पर्यटन: एक अपरिचित उद्योग, एक मुक्त सेवा
  • 1991 संचार, सूचना और शिक्षा: पर्यटन विकास की शक्ति कारक
  • 1992 पर्यटन: एक बढ़ती सामाजिक और आर्थिक एकजुटता का कारक है और लोगों के बीच मुलाकात का
  • 1993 पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण: एक स्थायी सद्भाव की ओर
  • 1994 गुणवत्ता वाले कर्मचारी, गुणवत्ता पर्यटन
  • 1995 विश्व व्यापार संगठन: बीस साल से विश्व पर्यटन में सेवारत 
  • 1996 पर्यटन: सहिष्णुता और शांति का एक कारक
  • 1997 पर्यटन: इक्कीसवीं सदी की रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अग्रणी गतिविधि
  • 1998 सार्वजनिक-निजी क्षेत्र भागीदारी: पर्यटन विकास और संवर्धन की कुंजी
  • 1999 पर्यटन: विश्व धरोहर का नयी शताब्दी के लिये संरक्षण
  • 2000 प्रौद्योगिकी और प्रकृति: इक्कीसवीं सदी के प्रारंभ में पर्यटन के लिए दो चुनौतियॉं
  • 2001 पर्यटन: सभ्यताओं के बीच शांति और संवाद के लिए एक उपकरण
  • 2002 पर्यावरण पर्यटन सतत विकास के लिए कुंजी
  • 2003 पर्यटन: गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और सामाजिक सद्भाव के लिए एक प्रेरणा शक्ति
  • 2004 खेल और पर्यटन: आपसी समझ वालो के लिये दो जीवित बल, संस्कृति और समाज का विकास
  • 2005 यात्रा और परिवहन: जूल्स वर्ने की काल्पनिकता से 21 वीं सदी की वास्तविकता तक 
  • 2006 पर्यटन को समृद्ध बनाना
  • 2007 पर्यटन महिलाओं के लिए दरवाजे खोलता है
  • 2008 जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती का जवाब पर्यटन
  • 2009 पर्यटन - विविधता का उत्सव
  • 2010 पर्यटन और जैव विविधता2011 पर्यटन संस्कृति को जोड़ता है।
  • 2012 पर्यटन और ऊर्जावान स्थिरता
  • 2013 पर्यटन और जल: हमारे साझे भविष्य की रक्षा
  • 2014 पर्यटन और सामुदायिक विकास
  • 2015 लाखों पर्यटक, लाखों अवसर
  •  2016  सभी के लिए पर्यटन - विश्वव्यापी पहुंच को बढ़ावा देना
  • 2017 सतत पर्यटन - विकास का एक उपकरण
  • 2018 पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण
  • 2019 पर्यटन और रोजगार: सभी के लिए एक बेहतर भविष्य

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