Tuesday, September 24, 2019

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Hindi blogs kya hai


Hay welcome friends आज मैं बात करने वाला हूं हिंदी ब्लॉग्स के बारे में क्या होते हैं हिंदी ब्लॉग्स और हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास के बारे में मैं इस पोस्ट में चर्चा करने वाला हूं।
हिंदी ब्लॉग्स ऐसे ब्लॉग्स होते हैं जिनमें हिंदी शब्द हिंदी भाषा का उपयोग किया जाता है इसमें संपूर्ण जानकारी हिंदी में लिखने की कोशिश की जाती है।
हिंदी ब्लॉग्स में हिंदी को सपोर्ट करने वाले टूल्स का उपयोग किया जाता है जिसकी मदद से ब्लॉक को लिखा जाता है।


Hindi blogs ka itihaas

हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास की बात करें तो यह बहुत पुराना नहीं है क्योंकि हिंदी भाषा को कंप्यूटर और इंटरनेट में आए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। हिंदी ब्लॉग की शुरुआत सबसे पहले एक भारतीय इंजीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया था जिनका नाम आलोक कुमार है।
आलोक कुमार ने ही सबसे पहले हिंदी ब्लॉगर के रूप में एक ब्लॉग किस शुरुआत की जिनका ब्लॉग blogspot.com पर hosted था। जिनके ब्लॉग का नाम 9211.Blogspot.com था। फिर बाद में उन्होंने इस ब्लॉक का नाम चेंज करके http://www.devanaagarii.net/ पर divert कर दिया था। जो कि अभी वर्तमान में सक्रिय है। लेकिन 9211.blogspot.com भी सक्रिय है।




hindi blog kya hai


हिंदी भाषा के विकास के लिए इंटरनेट में बहुत से ग्रुप और समूह का निर्माण किया गया जिसे की हिंदी का विकास हो सके और हिंदी ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
इसी कड़ी में अक्षर ग्राम नेटवर्क नाम के एक संस्था का विकास हुआ जो कि कंप्यूटर में इंटरनेट में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए चालू किया गया था और अभी यह सक्रिय नहीं हैं।
हिंदी ब्लॉग्स के प्रचार के लिए विभिन्न में समूह जैसे नारद, सर्वज्ञ, परिचर्चा की शुरुआत की गई थी जो कि हिंदी ब्लॉगर्स के लिए एक अत्यंत ही सुविधाजनक स्थान था जहां से वे हिंदी ब्लॉग के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकते थे और आपस में चर्चा कर सकते थे इनमें से कई सेवाएं जो कि गूगल पर बनाएंगे थे वे अभी भी सक्रिय हैं और कई बंद हो चुके हैं।
हिंदी ब्लॉगर्स की संख्या को बढ़ाने के लिए गूगल में ग्रुप बनाया गया था और ब्लॉग प्रहरी डॉट कॉम के नाम से भी एक समुदाय बना था जो कि अभिषेक लिए नहीं आएगा पेचकस डाक सूची ए नाम से गूगल में समूह भी बनाया गया है और फिकर में हिंदी ब्लॉगर्स का ग्रुप को ही बनाया गया है और यूट्यूब में बनाया गया जो ग्रुप था वहां भी सक्रिय नहीं हैं तो इस प्रकार हिंदी का विकास इंटरनेट पर बहुत ही तीव्र गति से तब हुआ जब 2007 में कैसे सॉफ्टवेयर का विकास हुआ जो कि हिंदी सपोर्ट करते थे और 2008 में सबसे ज्यादा हिंदी ब्लॉग्स के विकास को बल मिला।





भारत में Hindi blogger की संख्या अभी काफी बढ़ चुकी है और लोग अब हिंदी में ज्यादा ब्लॉगिंग करने लगे हैं जो अंग्रेजी ब्लॉगर थे वह भी आप हिंदी में ब्लॉगिंग करने लगे हैं जिससे और लोग को फायदा हो रहा है।
साउथ मिलावट एक अंग्रेजी ब्लागर हैं जिसमें इंग्लिश में पोस्ट को पब्लिश किया जाता है लेकिन Sout me loud ने हिंदी में भी ब्लॉक चालू किया है जिसका नाम उन्होंने sout me hindi रखा है। हर्ष अग्रवाल इनके ओनर हैं।


Conclusion

हिंदी भाषा में सबसे पहला पोस्ट 21 अप्रैल 2003 को किया गया था और यहां पहला पोस्ट था जो हिंदी में था। इस पोस्ट को आलोक कुमार ने लिखा था।इस प्रकार हिंदी भाषा में ब्लॉग्स की शुरुआत काफी लेट से हुआ है तो अभी हिंदी में काफी उम्मीदें हैं।
फिलहाल इस पोस्ट में इतना ही मिलते हैं अगले पोस्ट में।

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Monday, September 23, 2019

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Hello Rexgins how are you today? आशा करता हूं कि आप सभी अच्छे होंगे आज मैं international day of sign language in Hindi के बारे में पोस्ट लिखा है जिसमें मैंने आपको बताया है sign language क्या है?, इस sign languages का विकास भारत में कैस हुआ।

SIGN LANGUAGE (सांकेतिक भाषा) क्या है?

International Day of Sign Languages इससे पूरे विश्व में 23 सितंबर को मनाया जाता है यह दिन उन लोगों या व्यक्तियों के लिए समर्पित है जो की बोल व सुन नहीं सकते हैं। तथा शारीरिक रूप से अपंग है उन लोगों के लिए इस दिन को समर्पित किया गया है।




यहां पर मैं भारत में प्रयोग किए जाने वाले सांकेतिक भाषा के बारे में थोड़ी सी जानकारी आपको दे दूं-
  1. भारत में सांकेतिक भाषा को सिखाने के लिए 2001 तक कोई औपचारिक कक्षाएं प्रारंभ नहीं की गई थी।
  2. 2003 में की गई गणना के अनुसार लगभग 100 हजार गूंगे और बहरे लोगों के द्वारा संकेतिक भाषा का उपयोग किया  जाता था।
  3. भारत की जो सांकेतिक भाषा है वह पाकिस्तान के सांकेतिक भाषा के समान ही है अर्थात दोनों indo-pak sign language के नाम से जाने जाते हैं।
  4. जिस प्रकार ब्रिटिश साइन लैंग्वेज ISL में हाथों का उपयोग किया जाता है उसी प्रकार भारतीय सांकेतिक भाषा में भी हाथों का ही प्रयोग किया जाता है।
  5. Bhartiya sign language का संबंध नेपाली भाषा से है।
  6. भारतीय भाषा को NCERT ने सन 2006 में शामिल किया और यह भाषा अन्यत्र की भाषा के तरह ही संचार का एक और माध्यम हैं। NCERT ने इसे तृतीय व वर्ग पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया था।
  7. 2008 में भारतीय सांकेतिक भाषा के उपयोगकर्ता लगभग 1.5 million थे।
  8. Ali Yavar Jung National Institute of Speech & Hearing Disabilities (Divyangjan), Mumbai के द्वारा ISL की स्थापना की गई और यहां इसके लिए एक डिप्लोमा कोर्स भी चालू किया गया।
Theme of international day of sign language in 2018
"With sign language everyone is included"



In 2019 theme is
"Sign language rights for all!"

इस बार 2019 में ISDL ने पूरे 1 हफ्ते को international day of sign language के रूप में मनाने का फैसला किया है जिसके सभी दिनों के अलग अलग theme हैं जो कि इस प्रकार हैं Hindi me -
सोमवार, 23 सितंबर - "सभी के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार!"
मंगलवार, 24 सितंबर - "सभी बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार"
बुधवार, 25 सितंबर - "वरिष्ठ नागरिकों के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार"
गुरुवार, 26 सितंबर - "सांकेतिक भाषा अधिकार बधिर लोगों और बधिरों विकलांग लोगों के लिए।"
शुक्रवार, 27 सितंबर - "बधिर महिलाओं के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार"
शनिवार, 28 सितंबर - "बहरे LGBTIQA + के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार"
रविवार, 29 सितंबर - "बधिर शरणार्थियों के लिए सांकेतिक भाषा अधिकार"

7. Interesting fact sign languages in Hindi


  1. Sign language और body language में ज्यादा अंतर नहीं होता है।
  2. 23 सितम्बर को ही इसे मनाने का कारण WFD है क्योंकि इसी दिन इसकी स्थापना की गयी थी। 
  3. अभी भी यहां स्पष्ट नहीं हो सका है कि सांकेतिक भाषा दुनिया भर में कितने प्रकार के हैं।
प्रत्येक जगह की या देश की अपनी मूल सांकेतिक भाषा होती है जो कि अलग-अलग प्रकार के होते हैं।
  1. सांकेतिक भाषा उतने अधिक प्रचलित नहीं हैं लेकिन फिर भी कई ऐसे संकेतिक भाषाएं हैं जिन्होंने मान्यता प्राप्त कर ली है।
  2. 19वीं शताब्दी में ऐतिहासिक संकेतिक भाषा का विकास अल्फाबेटिक भाषा को देखकर किया गया था।
  3. Pendro poas D. Leon (1520-1584) ने पहले सांकेतिक भाषा की manual वर्णमाला विकसित की थी।
Read also
Conclusion

आज 23 सितंबर 2019 को आप सभी को विश्व संकेतिक भाषा दिवस हार्दिक शुभकामनाएं।
इस भाषा का उपयोग सामान्य लोग भी करते हैं अन्य मुख बधिर गुंगे लोगों से बात करने के लिए तो इसे और ज्यादा फैलाए अपने दोस्तों के साथ साइन ऑफ लव थैंक यू।

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Hello friends आप सभी का स्वागत है आज मैं बात करने वाला हूं भूगोल के बारे में इस पोस्ट में मैं आपको भूगोल के बारे में about geography in Hindi इस पोस्ट में मैं आपके साथ शेयर करने वाला हूं भूगोल के बारे में 13 interesting fact चलिए शुरू कर दो पढ़ना

13 interesting fact about geography in Hindi




भूगोल के बारे में हिंदी में (About Geography in Hindi)
  1. भूगोल में भू का अर्थ पृथ्वी से है और उसके आकार को गोल बताता है।
  2. भूगोल शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग इरेटोस्थनीज ने तीसरे शताब्दी ईसा पूर्व किया था।
  3. भूगोल सबसे प्राचीनतम विज्ञान है जो कि यूनानी वैज्ञानिकों के कार्यों में हमें देखने को मिलता है इसको सर्वप्रथम विशिष्ट विज्ञान के रूप में मान्यता प्राचीन यूनानी विद्वान इरेटोस्थनीज ने दी थी।
  4. भूगोल के संबंध में सबसे ज्यादा वैज्ञानिक हमें देने का श्रेया यूनान को जाता है जिन्होंने हमें होमर, डेरेटोड्स, थेल्स, अरस्तू, और इरेटोस्थनीज जैसी वैज्ञानिकों को हमें दिया।
  5. भूगोल को 3 विभाग में बांटा गया है जो कि है गणितीय भूगोल, भौतिक भूगोल, मानव भूगोल।
  6. पृथ्वी को 8 महाद्वीप में बांटा गया है जोकि हैं एशिया, यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया अंटार्कटिका।
  7. भूगोल में पांच महासागर में बांटा गया है जोकि हैं अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, दक्षिण महासागर।
  8. भूगोल का संबंध में प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दोनों से है।
  9. इस प्रकार भूगोल के संबंध सभी विज्ञानों से है चाहे वह विज्ञान शुद्ध प्राकृतिक विज्ञान हो अथवा मानवीय सामाजिक विज्ञान हो।
  10. गणितीय भूगोल के कारण ही में पृथ्वी के पृष्ठ पर उपस्थित बिंदुओं का त्रिविम स्थिति का निर्धारण संभव हो सका है।
  11. भौतिक भूगोल धरातल पर अलग-अलग जगह घटनाओं के वितरण की व्याख्या व अध्ययन कराता है जैसे भूविज्ञान, मौसम विज्ञान, जंतु विज्ञान, रसायन शास्त्र, से जुडा है। 
  12. मानव भूगोल मानव के क्रियाकलापों या मानव समाज के क्रियाकलापों के कारण बने भूगोल को मानव भूगोल कहा जाता है।
  13. पृथ्वी के आकार आकृति गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पृष्ठभूमि या वो पृष्ठ बहुत बड़ी क्षेत्रों का निर्धारण भूगोल के द्वारा ही किया जाता है।

Conclusion (उपसंहार)

किस प्रकार देखा जाए तो भूगोल ही सभी वैज्ञानिक संबंधी विषयों का उद्गम स्रोत है। और सभी विज्ञान का आरंभ इस भूगोल से हुए हैं।

इन्हें भी पढ़ें
Environment aise in Hindi
Gobar gas kya hai
Water saving in Hindi
Sapnon ka matlab Hindi mein

Saturday, September 21, 2019

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Environment (पर्यावरण) के बारे में आप सभी तो जानते ही होंगे लेकिन मैं आज पर्यावरण पर निबंध फिर से लिख रहा हूं क्योंकि आज पर्यावरण के प्रति जागरूकता बहुत ही आवश्यक है।


Paryavaran par nibandh वाले इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा पर्यावरण क्या है?, पर्यावरण किस से मिलकर बना है पर्यावरण के कौन-कौन से भाग हैं और पर्यावरण से हमें किस प्रकार लाभ की प्राप्ति होती है तथा पर्यावरण से हमें किस प्रकार से हानि है और पर्यावरण का सारांश मैंने इस पोस्ट में आपके समक्ष रखने का प्रयास किया है।

इसे भी पढ़े - गोबर गैस क्या है

पर्यावरण क्या है ?

यदि हम पर्यावरण शब्द का संधि विच्छेद करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है परी और आवरण से यहां पर परी का अर्थ हमारे आस पास के वातावरण से है और आवरण का अर्थ हमें घेरे हुए चारों ओर की प्राकृतिक वस्तुओं जीव जंतुओं पेड़ पौधों के द्वारा बने आवरण से है।
इस प्रकार पर्यावरण हमारे आस पास के वातावरण को ही कहा जाता है।

पर्यावरण  किन-किन चीजों से मिलकर बना है ?

जैसे कि मैंने आपको बताया कि पर्यावरण परी और आवरण अर्थात हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें उपस्थित जीव जंतु से मिलकर बना है। पर्यावरण में मनुष्य के अलावा और भी बहुत सारे जीव जंतु पाए जाते हैं जो कि अपना जीवन यापन इस पृथ्वी पर करते हैं जिनका अपना इस पृथ्वी पर अलग अलग ही प्रभाव है।
पर्यावरण में पाए जाने वाले जीव जंतु और पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है। पर्यावरण में कई प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं और इन जंतुओं के द्वारा कभी-कभी कई ऐसे चीजों का निर्माण होता है जो कि पर्यावरण को एक नई दिशा की ओर ले जाता है और पर्यावरण में अमूल चूल परिवर्तन करता है।
इस प्रकार पर्यावरण के मिलकर बनने के बात करें तो यह दोनों प्रकार के सजीव और निर्जीव से मिलकर बना हुआ है। जिनके बिना यह आपस में अधूरे हैं सजीव के बिना निर्जीव अधूरा है और निर्जीव की बिना सजीव अधूरा है।

पर्यावरण  के प्रकार

पर्यावरण के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार का होता है एक मानव निर्मित पर्यावरण और दूसरा प्रकृति या पर्यावरण द्वारा निर्मित पर्यावरण।
मानव निर्मित पर्यावरण इस प्रकार के पर्यावरण होते हैं जो कि मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए गए वातावरण से निर्मित होते हैं जैसे कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाने वाला वातावरण मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आता है और उसी क्रम में कोसा उद्योग के लिए तैयार किए गए वन आदि मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

अब प्राकृतिक पर्यावरण की बात करें तो प्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति द्वारा चुने गए ही जीव और निर्जीव जीवित रह पाते हैं। जैसे कि कई हजारों साल पहले डायनासोर पाए जाते थे लेकिन अब नहीं पाए जाते हैं क्योंकि प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इनका विनाश हो गया और यहां लुप्त हो गए। प्राकृतिक पर्यावरण पर्यावरण के हित को देखते हुए इसका निर्माण प्रकृति खुद करती है। जैसे कि हम खाद्य श्रृंखला की बात करें तो यहां प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत ही आएगा क्योंकि प्रकृति कभी भी पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ने देती है और वहां पर्यावरण के बिगड़ने के कगार पर स्वयं परिवर्तित होकर पर्यावरण के अनुकूल प्रकृति स्वयं निर्मित करती है। इस प्रकार इसे हम प्राकृतिक पर्यावरण कर सकते हैं।

इसे भी पढ़े - Sapnon ka matlab

पर्यावरण के लाभ

पर्यावरण से होने वाले लाभ की बात करें तो यहां असीमित है और अविश्वसनीय है क्योंकि पर्यावरण ही हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।
पर्यावरण के कारण हमें खाद्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं।
पर्यावरण से हम बहुत से उपयोगी वस्तुएं अपने दैनिक जीवन के लिए प्राप्त कर सकते हैं।
पर्यावरण से कई मूल्यवान चीजें हमें प्राप्त होते हैं।
पर्यावरण से ही हमें विभिन्न प्रकार के इंधन  की प्राप्ति होती है।
हीरा जैसे मूल्यवान वस्तु हमें पर्यावरण में पाए जाने वाले मृदा से प्राप्त होती हैं।
जीवन रूपी जल पर्यावरण के कारण ही हमें सुलभ हो पाया है।

इसे भी पढ़े - Geography of India Hindi mein

पर्यावरण या environment से होने वाली हानियां

पर्यावरण से होने वाली हानियों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और इसके अलावा मनुष्य द्वारा निर्मित प्रदूषण के कारण भी प्राकृतिक आपदा व प्रकृति द्वारा होने वाली हानियां कर सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और सुनामी प्रकृति में परिवर्तन के कारण आते हैं।
अम्लीय वर्षा पर्यावरण में परिवर्तन के कारण देखने को मिलते हैं।
भूकंप का आना प्राकृतिक आपदा है जो कि पर्यावरण के कारण उत्पन्न होती है।
अत्यधिक मात्रा में गर्मी का बढ़ना पर्यावरण से होने वाली बहुत बड़ी समस्या है या हानि है।
कई मामलों में पर्यावरण में जहां पर जीवन देने योग्य है वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर यह मृत्यु का कारण भी बनती है।

इसे भी पढ़े - Surgical strike kya hai

Conclusion (उपसंहार)
पर्यावरण पर निबंध (essay writing of environment) लिखना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है इस प्रकार पर्यावरण के सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त रूप से वर्णन करना ही पर्यावरण पर निबंध लिखने जैसा है। क्योंकि बहुत बड़ाा हो जाएगा।

और दूसरे पोस्ट 
  1. Chhattisgarh education for financial samasyaen.
  2. Samas Hindi grammar.
  3. Global warming BHU tapiya vastvik samasyaen
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गोबर गैस(gobar gas) जिसे हम अंग्रेजी में biogas के नाम से जानते हैं तो मैं आज इसी पर चर्चा करने वाला हूं। इस पोस्ट के माध्यम से मैं आप सभी को गोबर गैस क्या है और गोबर गैस का उपयोग कैसे किया जाता है। बिजनेस मॉडल के तौर पर इसका उपयोग हम कैसे कर सकते हैं इन सभी विषयों पर इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला हूं।


Gobar gas(biogas) क्या है  

यहां पर गोबर गैस कहने से इसका अर्थ पूर्ण रूप से अलग हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में गोबर जानवरों द्वारा त्याग किया गया मल को कहा जाता है।
इस प्रकार गोबर गैस का अर्थ जानवरों द्वारा त्याग किए गए मल से निकलने वाले गैस से है।

bio-gas kya hai

जानवरों द्वारा त्यागे गए अपशिष्ट पदार्थ का विघटन या गैस को एक यंत्र के माध्यम से बाहर निकाला जाता है। जिसे गोबर गैस संयंत्र का के नाम से जाना जाता है।
गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से ही गोबर गैस को निकाला जाता है इसमें जानवरों के मल का महत्वपूर्ण योगदान होता है बिना उनके मल के यह संभव नहीं है।


Gobar gas ka upyog kaise kiya jata hai?





गोबर गैस के उपयोग को देखें तो यहां बहुत ही विस्तृत है और इसका उपयोग हम खाने पकाने के लिए और बस या विभिन्न गाड़ियों के इंधन के रूप में इसका उपयोग हम कर सकते हैं गोबर गैस से निकलने वाले गैस मेथेन गैस होता है जोकि ज्वलनशील होता है।

यह एक प्रकार ऐसा एवं है जिसका उपयोग हम विभिन्न प्रकार से कर सकते हैं और यहां हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले सिलेंडर गैस का स्थान ले सकता है मगर इसमें बहुत सी समस्याएं हैं जो कि इस प्रकार हैं।


Gobar gas plantation samasyaen

इसके लिए बहुत सारे गोबर की आवश्यकता होती है।
गोबर गैस में निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ का निस्तारण इतना आसान नहीं होता है।
अगर हम छोटा संयंत्र बनाते हैं तो कम मात्रा में गैस प्राप्त होते हैं और अगर बड़ा बना देते हैं तो बहुत ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है।
बायो गैस के प्लांट से निकलने वाली स्लरी को ले जाने के लिए गाड़ी की आवश्यकता होती है यहां गिली और सुखी दोनों रूप में होती हैं।


Gobar gas sanyantra yah biogas sanyantra se hone wale labh

  1. यहां पर्यावरण के अनुकूल है इससे ज्यादा मात्रा में प्रदूषण नहीं होता है।
  2. और बायोगैस के लिए जो कच्चे माल की आवश्यकता होती है वहां ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध होती है।
  3. लकड़ी का उपयोग करने से स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है लेकिन इसके उपयोग करने से ऐसी कोई समस्याएं नहीं होती है।
  4. गोबर गैस संयंत्र के उपयोग से खेतों में उपयोग किए जाने वाले जैविक खाद या गुणवत्ता युक्त खाद की प्राप्ति होती है।


Gobar gas business plan

  1. गोबर गैस की उपयोगिता को देखते हुए इसका उपयोग बिजनेस के तौर पर भी किया जा सकता है क्योंकि इससे बहुत ही अच्छा इंधन हमें प्राप्त होता है।
  2. अब इसका अगर हम बिजनेस के तौर पर उपयोग करते हैं तो इसके लिए हमें बहुत सारे गोबर और ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है।
  3. मेंटेनेंस करने के लिए पाइप लाइन का उपयोग कर सकते हैं।
  4. Gobar gas business plan के नाम से मैंने एक पोस्ट लिखें उसे पढ़ सकते हैं।

गोबर गैस (बायोगैस) मैं उपलब्ध गैसों का विवरण
  1. गोबर गैस में मेथेन की मात्राओं सबसे ज्यादा 50 से 75% तक होती है।
  2. कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 25 से 50% तक होती है।
  3. नाइट्रोजन की मात्रा शून्य से 10% तक होती है।
  4. और हाइड्रोजन की मात्रा शून्य से 3 प्रतिशत होती है इसी क्रम में हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा शून्य से 3% होती है और ऑक्सीजन की मात्रा इसमें बिल्कुल नहीं होती है।

Conclusion

इस प्रकार भारत में अगर गोबर गैस संयंत्र के उपयोगिता को देखें तो यहां हमारे देश के लिए बहुत ही आसान और सरल है क्योंकि हमारे देश में ग्रामीण क्षेत्रीय गांव की जनसंख्या बहुत ज्यादा है यहां पर बहुत सारे जानवर उपलब्ध हैं इस कारण से बायोगैस संयंत्र के लिए या गोबर गैस संयंत्र के लिए कच्चे माल आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं।
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Hello friends जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आजकल पानी की किल्लत सभी जगह हो रही है तो आज का बेरा टॉपिक water save कैसे करना है उसके बारे में इस पोस्ट में मैं पानी किस प्रकार से उपयोगी है और इसे हमें क्यों बचाना चाहिए इस पर चर्चा करूंगा इसके अलावा इस पोस्ट में आपको बताऊंगा कि पानी को किस प्रकार से संरक्षित रखना है।
Save_Water_Hindi

Kya Hai Water Saving


हमारे द्वारा जल का उपयोग बहुत ज्यादा मात्रा भी किया जाता है। इस प्रकार से हमारे द्वारा जल का बहुत ज्यादा मात्रा में दोहन किया जाता है जिसने गर्म पानी की बर्बादी होती है तो इस प्रकार पानी की बर्बादी को कम करना है water saving या जल संरक्षण कहलाता है।




Water Saving की जरूरत क्यों?

दोस्तों आप सभी को यह तो पता होगा ही कि पृथ्वी का लगभग 75% भूभाग में जल पाया जाता है लेकिन मैं आपको बता दूं कि हमारे पृथ्वी पर जो पीने लायक जल की मात्रा है वह बहुत ही कम है जिसके कारण आज जल संकट का सामना हमें करना पड़ रहा है और भविष्य में यहां और भी गंभीर रूप ले सकता है तो इसी को देखते हुए मैंने इस पोस्ट में कुछ अपने तरफ से पानी को या जल को किस प्रकार से बचाया जा सकता है इस बारे में बताया है।
अभी वर्तमान में हमारे लिए सिर्फ पीने के पानी की समस्या का ही सामना नहीं करना पड़ रहा है बल्कि भूजल का जो जल स्तर है वह लगातार नीचे जा रहा है।
जिसके कारण अब कृष्ण ऋतु में पानी के किल्लत का सामना करना पड़ता है और दिल्ली जैसे शहरों में तो पानी की इतनी ज्यादा समस्या है कि लोग खराब पानी से अपना जीवन यापन करने में मजबूर हो जाते हैं तो इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार भी वर्षा जल संरक्षण और इसके अलावा जल संरक्षण के बहुत सारे कदम वहां आगे बढ़ा रहे हैं।

What is the importance of water




अगर पानी के importance की बात करें तो यहां हमारे जीवन के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे शरीर का भी लगभग 75% भाग में चल पाया जाता है और इसके बिना हमारे शरीर के जो पाचन क्रिया हैं या जो अन्य एक्टिविटी है वह संभव नहीं है।
इस प्रकार जल है तो कल है और जल ही जीवन है जैसे कथन सत्य प्रतीत होते हैं क्योंकि हम भोजन के बिना तो कुछ समय तक रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक पल भी नहीं रहा जा सकता है।
इस प्रकार जल का संरक्षण अत्यंत ही आवश्यक है।

Ideas for Water Saving

दोस्तों मैंने यहां पर वर्षा जल संरक्षण के कुछ टिप्स दिए हैं जो कि आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं-

  1. सबसे पहले तो हमें जल का दोहन कम करना चाहिए।
  2. जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहे हैं उसका हमें लाभ लेना चाहिए।
  3. Save water save life को चरितार्थ करते हुए हमें जो वर्षा का जल है उसे संरक्षित रखना चाहिए, बांध बनाकर।
  4. Water या जल का उपयोग हमें सोच समझ कर करना चाहिए और सीमित मात्रा में करना चाहिए।
  5. गांव में बहने वाले पानी को छोटे-छोटे बांध बनाकर रोकना चाहिए।
  6. इसके अलावा खेतों में भी छोटे से जल संग्रहण के लिए छोटा सा तलाब बनाना चाहिए और इसका उपयोग हम जब पानी की कमी होगी तब कर सकते हैं।
  7. पानी की कमी या जल स्तर के नीचे जाने के कारण आज ग्लोबल वार्मिंग और ज्यादा बढ़ती जा रही है बढ़ती जा रही है जिसके कारण ताप में वृद्धि होने के साथ साथ पृथ्वी में उपस्थित पानी वाष्प बनकर ऊपर उड़ जाती है।
  8. घरों में उपयोग किए जाने वाले सावर को हमें धीमा वाला सावर का उपयोग करना चाहिए ताकि पानी जल्दी ना बहे।
  9. शौचालय में पानी के उपयोग बाल्टी से करना चाहिए क्योंकि नल से ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है।
Advantage of water saving




वैसे तो जल संरक्षण के बहुत सारे लाभ हैं लेकिन मैं यहां पर सभी का जिक्र ना करते हुए एक बात साफ करना चाहूंगा कि- अगर आज हम अगर पानी बचाते हैं तो भविष्य में हमें जब भी किसी भी प्रकार के पानी की आवश्यकता पड़ेगी तो उसके लिए हम निश्चिंत रहेंगे और आने वाले भविष्य में आने वाली पीढ़ी को पानी की कोई कमी नहीं होगी और इससे हमारे पृथ्वी का जो जलस्तर है वह भी ठीक से बना रहेगा जिससे फसलों का उत्पादन हम अच्छे से ले सकते हैं।

Conclusion

जल संरक्षण आज के ही नहीं बल्कि भविष्य के जल संकट से हमें बचा सकता है इसलिए हर संभव हमें जल का उपयोग सोच समझ कर करना चाहिए।

Save water in Hindi के इस पोस्ट में आज के लिए बस इतना ही.
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Friday, September 20, 2019

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Hi friends आप सभी ने सपनों के बारे में तो जरूर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि सपना क्या होता है अगर नहीं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं आज मैं इसी के बारे में चर्चा करने वाला हूं सपना का मतलब क्या होता है और हमें सपने क्यों आते हैं ।
Sapno ka Matlab Hindi me

सपने क्या होते हैं?


सपने इंसानों द्वारा ही नहीं बल्कि अन्य प्राणियों द्वारा भी देखे जाते हैं। सपना एक प्रकार से जब मनुष्य गहरी निद्रा में होता है तब उस समय हमारा दिमाग ऐसी चीजों में खो जाता है जो सिर्फ कल्पना मात्र होता है जो कि वास्तविक नहीं होता है।
और हमें ऐसा अनुभव होता है कि वहां घटना हमारे साथ ही हो रहा है और वहां सही में हो रहा है।
लेकिन ऐसा नहीं होता है वह सिर्फ कल्पना मात्र होता है जो कि काल्पनिक होता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसके अनेक अर्थ होते हैं जब आप सपने में कुछ देखते हैं तो उसके अलग-अलग मतलब होते हैं जैसे कि आप जब कोई वस्तु देखते हैं या किसी को कार्य करते हुए देखते हैं या किसी मरे हुए व्यक्ति को देखते हैं तो इसके अलग-अलग अर्थ निकलते हैं ज्योतिष शास्त्र में इसके बहुत से उदाहरण आपको देखने को मिल जाएंगे।
हमारा जो दिमाग है वह कभी भी शांत नहीं रहता है जब हम सो जाते हैं तब भी हमारे दिमाग में कुछ ना कुछ चलता रहता है जिसके कारण हमें सपना आते हैं और हम उसे रियल में हो रहा है ऐसे सोचते हैं।
आपने कई बार अनुभव किया होगा कि अगर आप सपने में रो रहे होते हैं तो आप रियल में रोने लग जाते हैं और सही में आपके आंसू निकल रहे होते हैं।

Sapno ka matlab Hindi mein


सपनों के मतलब की बात करें तो यहां पर सपनों के मतलब से ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा हुआ है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में जब आप सपने देखते हैं तो उसके अलग-अलग अर्थ वहां पर निकलते हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप कोई सपना देखते हैं या कुछ सपने देखते हैं तो उसके अलग अर्थ निकालकर आपको ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से बताया जाता है और इसी संबंध में लाल किताब जैसे कई पुस्तकें आपको पढ़ने को मिल जाएंगे।

इंटरनेट पर जब आप सर्च मारेंगे कि सपनों का मतलब क्या होता है तो आपको बहुत सारे ऐसे ब्लॉग मिल जाएंगे जिसने आपको सपनों के बारे में बताया गया होगा और ऐसे बहुत से सपने होंगे जो आपने देखे हैं वह उसमें कंटेंट से मिलते जुलते होंगे तो इसके लिए आपने ब्लॉक को पढ़ सकते हैं।

सपने क्यों आते हैं?

अगर हम सपनों के आने की बात करें तो यहां पूर्ण रूप से हमारे दिमाग द्वारा यह हमारे मस्तिष्क के द्वारा एक प्रकार का भ्रम होता है। जो कि किसी कार्य के पूर्णा होने या अधूरे होने पर या जब हम किसी कार्य को सोते वक्त सोच रहे होते हैं तो उसी से संबंधित स्वप्न हमें आते हैं और जो स्वप्न हमें आते हैं वह हमारे दैनिक जीवन में किसी न किसी प्रकार से घटित हो चुके होते हैं या हम जो सपने में देखते हैं उसे हम पहले ही या उस चेहरे को हम पहले ही कहीं ना कहीं देख चुके होते हैं।
सपने में कभी भी हम अपने आप कोई नया चेहरा नहीं बना सकते हैं और यहां जो यहां पर जो चेहरा दिखाई देते हैं वहां पहले हम देख चुके होते हैं या हम पहले सो चुके होते हैं उसी को हम सपने में देखते हैं।

Conclusion

मेरे हिसाब से सपनों का कोई अर्थ नहीं होता है और ना ही इसका कोई मतलब होता है यहां हमारे दिमाग का ही रचाया हुआ एक जाल होता है जो हमें उलझाने की कोशिश करता है।
किसी भी प्रकार के कार्य जिसे हम नहीं कर पाते हैं उसे हम सपने में करने की कोशिश करते हैं।

धन्यवाद।

इन्हें भी पढ़ें




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Hello readers आज मैं बात करने वाला हूं भारत के भूगोल (geography) के बारे में जिसमें मैं बात करूंगा भारत के भूगोल के बारे में क्या-क्या विशेषताएं हैं और यहां अन्य देशों से किस प्रकार भिन्न हैं।
Geography_of_india_hindi

Geography in Hindi


भूगोल(geography) दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें पहला शब्द भू और दूसरा शब्द गोल है यहां पर भू का अर्थ होता है पृथ्वी और गोल का अर्थ होता है प्राकृतिक स्वरूप का अध्ययन।
इस प्रकार भूगोल में पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण और उसकी विभिन्नता का अध्ययन किया जाता है।

Geography India in Hindi

अब भारत की जियोग्राफी की बात करें तो यहां पर भारत का जो भूगोल है वहां क्षेत्र विशेष के कारण अलग-अलग प्रकार का पाया जाता है और यहां अनेक प्रकार के जीव जंतु भी पाए जाते हैं।
इस प्रकार यहां पर अनेक प्रकार की जलवायु क्षेत्र होने के कारण भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव जंतुओं का होना स्वाभाविक है।

Geography of India Hindi

भारत के जियोग्राफी की विशेषता की बात करें तो यहां पर भारत के भूगोल की अनेक विशेषताएं हैं जो कि अन्य देशों के कंपैरिजन में बहुत ही भिन्न है।

विशेषताएं इस प्रकार हैं


  1. भारत में 6 प्रकार की ऋतुएं पाई जाती हैं।
  2. इन सभी ऋतु का अलग-अलग प्रभाव होता है।
  3. सभी ऋतुओं का एक निश्चित समय होता है।
  4. छह प्रकार की ऋतु है इस प्रकार हैं बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, हेमंत ऋतु, शरद ऋतु, शिशिर ऋतु।

इस प्रकार इन छह ऋतु में सबसे ज्यादा पसंद बसंत रितु को किया जाता है।
और जैसे कि इनका नाम है उसी प्रकार इनका प्रभाव भी होता है जैसे यहां पर बसंत ऋतु की बात करें तो यहां पर इस मौसम में मौसम बहुत ही सुहावने होते हैं और ना ज्यादा ठंड होती है और ना ही ज्यादा गर्मी पड़ती है।
इसी प्रकार ग्रीष्म ऋतु की बात करें तो इस ऋतु में गर्मी का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है और सूरज तेज होता है।
और इसी प्रकार के अन्य रितु जैसे शरद ऋतु की बात करें तो इस ऋतु में सर्दियों का मौसम चलता है जिस कारण से से शरद ऋतु कहा जाता है।

भारत का भूगोल अन्य देशों से किस प्रकार भिन्न है इस पर चर्चा करते हैं चलिए,,,


  1. भारत का भूगोल अन्य देशों की तुलना में अधिक भिन्न है क्योंकि जहां अन्य देशों में सिर्फ एक से दो ऋतु में ही पाए जाते हैं वही भारत में छह प्रकार की ऋतु में पाए जाते हैं जो कि अपना अलग-अलग स्थान रखते हैं।
  2. अन्य देशों में एक ऋतु जैसे कि शरद ऋतु पाई जाती है तो वहां सिर्फ सर्दी ही पड़ती रहती है साल भर लेकिन भारत की बात करें तो यहां 1 साल में छह ऋतु है।
  3. अन्य देशों में मौसम एक ही बना रहता है लेकिन भारत में 1 साल में मौसम छह प्रकार से परिवर्तित होता है।
  4. भारत में सभी प्रकार की विभिन्नता आएं इस मौसम परिवर्तन के कारण देखने को मिलता है लेकिन अन्य देशों में इस प्रकार की विभिन्नता देखने को नहीं मिलता है।
  5. यहां अलग-अलग मौसम होने के कारण सभी प्रकार के कृषि कार्य या कहें मौसमी फसलों का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है।
  6. भारत कृषि प्रधान देश अपने भूगोल के कारण ही कल आप आए हैं क्योंकि अगर इसका भूगोल वैसा नहीं होता तो इस प्रकार के विभिन्न प्रकार के फसलों का उत्पादन संभव नहीं हो पाता।
  7. अन्य देशों की तुलना में यहां खाद्य पदार्थों का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होता है जो कि भूगोल के कारण ही संभव हो सका है।


Conclusion

इस प्रकार भारत की भूगोल को देखें तो यह अन्य देशों से पूर्णता भिन्न है।

इन्हें भी पढ़ें




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Hello and welcome friends मैं आज मैं बात करने वाला हूं. surgical strike के बारे में इस पोस्ट में हम जानेंगे कि-
Surgical strike kya hai

क्या होता है? Surgical Strike

Surgical Strike एक प्रकार की सैन्य कार्यवाही होती है जिसे सेना के द्वारा अंजाम दिया जाता है।
Surgical strike की विशेषता


  1. Surgical strike सर्जिकल स्ट्राइक में किसी भी प्रकार की जानकारी को किसी के साथ शेयर नहीं किया जाता है और यह पूर्ण रूप से गोपनीय होता है।
  2. Surgical strike में मात्र दो या चार हेड्स को स्ट्राइक की जानकारी होती है कि कहां पर सर्जिकल स्ट्राइक करना है।
  3. Surgical strike 2016 भारत में 21 सितंबर 2016 को पाकिस्तान के खिलाफ एलओसी में सर्जिकल स्ट्राइक किया गया था जिसे आप उसके उदाहरण के तौर पर ले सकते हैं।
  4. Surgical strike में किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं छोड़ा जाता है तथा जिस स्थान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया जाता है उस स्थान में जो भी सामग्री होती है उसे नष्ट कर दिया जाता है।
  5. Surgical strike को इस प्रकार अंजाम दिया जाता है कि इससे किसी भी प्रकार की समान्य लोगों को हानि ना पहुंचे यह पूर्ण रूप से सुरक्षित होता है।
  6. इस प्रकार की सैन्य कार्यवाही में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाती है और सर्जिकल स्ट्राइक में किसी बड़े कार्य को अंजाम दिया जाता है।
  7. Surgical strike को देर रात या ऐसे समय में अंजाम दिया जाता है जिस समय सर्जिकल स्ट्राइक जहां पर होना है वहां के आसपास के लोगों का आवागमन कम हो।
  8. भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर अधिकृत के सीमा पर लांच पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक 21 सितंबर 2016 को किया था।
  9. Surgical strike में ज्यादातर वायु सेना का उपयोग किया जाता है।


Conclusion


Surgical strike सेनाओं द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का मिशन होता है जिसे वहां जी जान लगाकर पूर्ण करते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

Thursday, September 19, 2019

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Hello Dosto my is Rajesh aaj Mai apko chhattisgarah ke bare me batane Wala hu kuch jaruri baten mera topic financial and education ke upar hoga.

To sabse pahle financial topic par bat karte hai..

Chhattisgarah GDP

Chhattisgarah GDP (Grass Domestic product)

Hamare state ka GDP 3.64 lakh crore (2018-19) hai, jabki madhya Pradesh ki GDP 8.26 lakh crore aur uttar Pradesh ki GDP 15.80 lakh crore hai. India ki bat kare to 2.848 trillion hai isse pata chalta hai ki chhattisgarah ki GDP kitni Kam hai other states ke comparison. Asan language me kahne to kisi desh ki GDP adhik ho to us country ki financial condition achcha hota hai.

Chhattisgarah ki GDP other states ke comparison bahut Kam hai ishka Karan yaha par manufactur and service rate bahut hi Kam hai iske like C.G me naye naye industry and services ki jarurat hai ishse yaha ki GDP rate badegi iske like mere sabhi young brather ko naye skills shikhne ki jarurat hai aur Jo Bhai apna business kar sakte hai uske like ham naye naye business idea share karenge. Youth ko bolna chahunga ki Kam Karne ki lalak honi chahiye yaar job mill hi jayega nahi Mila to apana kuch idea lagaw, naye naye skills shiko yar dekhna 10 years bad aapka life change ho jayega sath me C.G ka bhi.

Chhattisgarah per capita

Iska Matlab ek states ki per people income se hai per capita kisi desh ki Puri income ko sabhi logo me devid kar nikala jata hai. Chhattisgarah ki per capita 2017-18 me 102762 tha jabki sabse jyada Goa ka 375,554 uske bad Delhi ka per capita 329,093 hai. Per capita se state ki people ki lifestyle per effect  padta hai.




Chhattisgarah GDP growth rate

Chhattisgarah GDP growth rate

GDP growth rate desh ki future ko darsata hai agar GDP Growth rate achi hai to vaha country Future me develop country ban jata hai. Abhi 2017-18 ke acordacco cg ki GDP growth rate 11.2% hai. Sath hi sath other states ki bat
Karu to rajisthan ki 24.7% hai aur madhya Pradesh ki 7.7% hai, jish state me opportunity jyada hoti hai vaha GDP growth rate adhik hota hai.

Chhattisgarah education system

Hamare state me pahle se hi education kafi weak raha hai. Cg me school to hai lekin teachers ki kami hai aur village me to education ki quality achhi nhi hai. Student ki achi education nhi mil pati hai chhattisgarah me 2011 ke according 71.04% hai. Vahi bat ki Jaye kerla ki to 93.91% hai jabki India ka education persent 74.04 % hai. Government ko education per focus karna chahiye education hi state ki GDP per capita ko badha sakta hai indarectaly aur state bhi grow karega dekha Jaye to cg me naam matra ka education system hai.

Chhattisgarah University

Chhattisgarah University

Hamare state me 25 University hai lekin ek bhi University top level ki nhi hai yaha government college me sabhi subject according practical saman bhi nhi hota hai. Student Kai college me regular padte to hai lekin only exam ke liye hi college jate hai.




Government college me opportunity ka abhav hota hai yahi Karan hai ki student private college me education Lena pasand karte hai.

This information sorce is weakipeadia

Saturday, September 14, 2019

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समास हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है यहाँ बारहवीं और दसवीं के परीक्षा में अवस्य पूछा जाता है इसलिए हम आपके के लिए आसान भाषा  समझने का प्रयास करेंगे।

 समास किसे कहते है (परिभाषा )

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।
जैसे - नौ ग्रहों का समूह - नवग्रह।

Samas_in_hindi_grammar

◆ समास विग्रह - सामासिक शब्दों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है।
जैसे - राजपुत्र - राजा का पुत्र।

◆ सामासिक शब्द - समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं। समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं।
जैसे - राजपुत्र।

◆ पूर्वपद और उत्तरपद - समास में दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं।
जैसे - गंगाजल। इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद है।

हिंदी व्याकरण - रस, काल, अलंकार, दोहावचन   

 समास के भेद

1. अव्ययी भाव - जिसका पहला पद अव्यय और दूसरा पद प्रायः संज्ञा हो तथा समस्तपद भी अव्यय हो, उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं,
जैसे - विधि के अनुसार - यथाविधि।
          जन्म से लेकर - अजन्म।
          आंखों के सामने - प्रत्यक्ष।
अन्य उदाहरण - यथाशक्ति, प्रतिदिन, समक्ष, सम्मुख, व्यर्थ, निःसन्देह, अकारण, अभूतपूर्व, निडर, अनजाने, दरअसल, बेकार, बेहद, बेकसूर।

एक साथ ही किसी शब्द का दो बार प्रयोग करने से भी अव्ययी भाव समास होता है।
जैसे - दिनों-दिन, धीरे-धीरे, पहले-पहल आदि।

2. तत्पुरुष - इस समास का पहला पद संज्ञा होता है। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो जाता है।
जैसे - चितकबरा, तटस्थ, जलद, गोबरगणेश।

  1. कर्म तत्पुरुष -
            शरण को आया - शरणागत।
            मरण को आसन्न - मरणासन्न।

  2. करण तत्पुरुष -
             सुर द्वारा कृत - सूरकृत।
              हस्त से लिखित - हस्तलिखीत।
      अन्य उदाहरण - मुंहमांगा, दस्तकारी, कष्टसाध्य।

  3.  सम्प्रदान तत्पुरुष -
               विद्या के लिए आलय - विद्यालय।
               हाँथ के लिए कड़ी - हथकड़ी।
        अन्य उदाहरण - देवबलि, राहखर्च।

  4. अपादान तत्पुरुष -
               धर्म से विमुख - धर्मविमुख।
                रोग से मुक्त - रोगमुक्त।
         अन्य उदाहरण - बन्धनमुक्त, पदच्युत, लोकोत्तर, कामचोर, देशनिकाला, जातिभ्रश्ट।

  5. सम्बन्ध तत्पुरुष -
                भारत का वासी - भारतवासी।
                राजा का दूत - राजदूत।
          अन्य उदाहरण - अमचूर, गजराज, वनमानुष, रेलगाड़ी, नरेश, घुड़सवार, कन्यादान।

6. अधिकरण तत्पुरुष -
                आनंद में मग्न - आनंदमग्न।
                 आप पर बीती - आपबीती।
                 लोक में प्रिय - लोकप्रिय।
                आत्म पर विश्वास - आत्मविश्वास।
          अन्य उदाहरण - कार्यकुशल, ग्रामवास।


3. कर्मधारय समास - जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पड़ विशेष्य होता है। उपमेय और उपमान से मिलकर भी कर्मधारय बनता है।

  जैसे - नील + अम्बर - नीलाम्बर (विशेषण+विशेष्य)
           कमल के समान नयन - कमलनयन (उपमान+उपमेय)
  अन्य उदाहरण - महाराज, परमानन्द, पुरुषोत्तम, भलमानस, पुच्छलतारा, कालापानी, चरणकमल।
'प्र' आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास भी इसके अंतर्गत आता है।
जैसे - उपवेन्द्र, प्राचार्य, प्रगति, प्रसंग, प्रमत्त।

4. द्विगु - यह समास समूह का धोत्तक होता है। इस समास में पहला पद संख्यावाची होता है।
    जैसे - दो गायों का समाहार - द्विगु।
            आठ अध्यायों का समाहार - अष्टाध्यायी।
            पांच तन्त्रों का समाहार - पंचतंत्र।
  अन्य उदाहरण - त्रिफला, पंचवटी, त्रिभुवन, चतुर्वण, चहारदीवारी, तिमाही, सतसई, पसेरी, दोपहर, चौराहा।

5. द्वन्द्व - इस समास में दोनों पद समान होते हैं, और दोनों के बीच ' और ' छिपा होता है।
    जैसे - माता और पिता - माता-पिता।
             पाप और पूण्य - पाप-पूण्य।
   अन्य उदाहरण - जीवन-मरण, भला-बुरा, ऊँच-नीच, पन्द्रह-बीस, दस-बारह, आमने-सामने, भला-चंगा।

6. बहुब्रीहि - इस समास में विद्यमान दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद प्रधान होता है। अर्थात समस्त पद किसी अन्य के रूप में प्रयुक्त होता है।
     जैसे - पीत है अम्बर जिसके (विष्णु) - पीताम्बर।
              चार है मुख जिसके (ब्रम्हा) - चतुर्मुख।
अन्य उदाहरण - दशानन (रावण), मुरलीधर (कृष्ण), नीलकण्ठ (शिव), त्रिलोचन (शिव), पंचामृत।

● बहुब्रीहि समास की यह विशेषता है की उसके विग्रह में 'जिसने-वह', 'जिसे-वह', 'जो-वह', आदि शब्दों का प्रयोग होता है।
  जैसे - निर्मल - निर्गत है मल जिससे।
           चन्द्रमौलि - चंद्र है मौली पर जिसके
' सह ' (साथ) के अर्थ में ' स ' शब्द के साथ होने वाले समास को भी बहुब्रीहि समास कहते हैं।
  जैसे - सार्थक - अर्थ के साथ है जो।


Sunday, September 8, 2019

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Hello and welcome साथियों आपने Global Warming के बारे में तो सुना होगा। आज मैं इसी के बारे में बातें करने वाला हूँ क्या होता है? ग्लोबल वार्मिंग? और इससे कैसे निपटना है? क्या कारण है Global Warming का और इससे कैसे नुकसान पहुंच रहा है। इन सभी तमाम बातों पर आज मैं चर्चा करने वाला हूँ तो lets Start baby






ग्लोबल वार्मिंग (Kya hai Global Warming)

Hey Friends आपने अनुभव किया होगा की हर साल हमारे लिए गर्मी का दिन बहुत ही तकलीफ वाला होता जा रहा है जिसके कारण धूप में भी निकलना बहुत कठिन होता जा रहा है। और साथ ही साथ प्रदूषण भी इतना ज्यादा होता जा रहा है की जीना मुश्किल होता जा रहा है आपने कई बार दिल्ली मुम्बई जैसे शहरों के प्रदूषण के बारे में भी सुना होगा की वहां कितना ज्यादा प्रदूषण का स्तर पहुंच चुका है लोगों को गर्मी के दिनों में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तो ग्लोबल वार्मिंग हमारे पृथ्वी पर पड़ने वाला ऐसा रभाव है जिसके कारण न तो प्रदूषण में कमी आ रही है और न ही तापमान में कमी आ रही है।
तो इस प्रकार से ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को परिभाषित किया जा सकता है-
जैसे की हमारे क्षेत्र का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है उसी प्रकार पूरे विश्व का या कहें लगातार पृथ्वी के तापमान में भी लगातार वृध्दि होती जा रही है।
"इस प्रकार साल दर साल पृथ्वी का तापमान का बढ़ना Global Warming कहलाता है।"

क्या कारण है Global Warming का
(What is the Reasion of Global Warming)





दोस्तो आपको बता दें की ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का मुख्य कारण कार्बन-डाइऑक्साइड, मेथेन तथा क्लोरो-फ्लोरो कार्बन की मात्रा में अनावश्यक वृद्धि है। जिसके कारण Global Warming बढ़ते जा रहा है। पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ते जा रहा है। जिसके कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त होता जा रहा है।

कार्बन-डाइऑक्साइड की मात्रा क्यो बढ़ रही है?

दोस्तो जैसे की आप जानते है की अब बढ़ती जनसंख्या तथा अन्य कारणों के कारण पेड़-पौधों की संख्या लगातार कम होती जा रही जिसके कारण कार्बन-डाइऑक्साइड का उपयोग पौधों की संख्या कम होने से उचित मात्रा में नहीं हो पाता है और सन्तुलन बिगड़ता जा रहा है। इसके साथ ही और भी बहुत से कारण है जैसे हमारे द्वारा गन्दगी को बढ़ावा देना और साफ सफाई न रखना।

मेथेन की मात्रा क्यों बढ़ रही है?

हमारे द्वारा समुद्रों से निकाले जाने वाले विभिन्न प्रकार के ईंधनों के द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है और यह वायुमण्डल में तेजी से फैल रहा है जिसके कारण यहां के वातावरण में बहुत ही ज्यादा वृद्धि हो रही है आप जब खाना बनाते है किसी सिलेंडर में भरे गैस से तब आपने उसकी गर्मी जरूर महसूस की होगी की वह कितना गर्म होता है थी उसी प्रकार यही गैस पृथ्वी के तापमान को भी गर्म कर रहा है। इसका उत्पादन जानवरों द्वारा जैसे गाय और बैल के अपशिष्ट के द्वारा भी निकलता है और भी बहुत सारे कारण है जैसे की कारखाने के जल के द्वारा तथा उसके धुंए के कारण भी मेथेन गैस का निष्काशन किया जाता है।

CFC यानी क्लोरो फ्लोरो कार्बन

इस प्रकार के गैस का उत्पादन हमारे ओजोन परत के कम होने के कारण और अधिक बढ़ता जा रहा है। और ओजोन परत को हानि कार्बन डाईऑक्साइड तथा मेथेन से सबसे ज्यादा हो रहा है।

ग्लोबल वॉर्मिंग से बचने के उपाय
Protection For Global Warming


  1. इससे बचने के लिए गन्दगी कम करना होगा। 
  2. औद्योगिक उत्पादन को ज्यादा बढ़ावा न देते हुए मानव निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। 
  3. कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा को कम करने के लिए पौधे लगाए जाने चाहिए। 
  4. मेथेन गैस का उत्पादन सबसे ज्यादा द्रव्य ईंधन द्वारा होता इस कारण इसको कम करने के लिए उचित व्यवस्था करना चाहिए। 

Conclusion :-





  • यह सिर्फ हमारे देश की ही समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है इसको लेकर पूरे विश्व के द्वारा संगठन भी बनाये गए है और कई सारे ऐसे भी देश है जो की इसे अपने लिए बहुत ही ज्वलन्त समस्या बता रहे हैं। 
  • आपको बता दूँ की चीन में वायु प्रदूषण इस हद तक पहुच गया है की अब वहां शुद्ध हवा के लिए कैन का इस्तेमाल होने लगा है। अगर ऐसे ही स्थिति बनी रही तो वो दिन दूर नहीं है जब भारत जैसे देश में भी इसी प्रकार के कैन बिकने लगे।  
  • भारत में ऐसे तो अन्य देशों के हिसाब से बहुत ज्यादा मात्रा में खेती की जाती है जिसके कारण यहाँ अभी यह परेशानी सबसे ज्यादा गर्मियों के मौसम में देखने को मिलता है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज बड़े-बड़े बर्फ से बने ग्लेशियर पिघलने लगे हैं।  







Thursday, September 5, 2019

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शिक्षक दिवस Teachers Day

Wednesday, September 4, 2019

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पत्र एक प्रकार का संदेश (Massage) है जिसको किसी एक व्यक्ति के द्वारा पेन (Pen) से लिखा जाता है। लेकिन आज कल इसे PC या किसी Typewritter के माध्यम से भी लिखा जा सकता है क्या है पुराने जमाने में कम्प्यूटर ना होने के कारण इसे कागज में हाथ से लिखा जाता था। और पुराने जमाने की बात करें तो राजाओं द्वारा भी यही पत्र लिखे जाते थे मयूर पंख के माध्यम से। जो राजनीतिक या किसी निजी काम से लिखे जाते थे।

पत्र लेखन क्या है

Letter_writing_in_hindi

यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचना (Massage) भेजने का माध्यम है। इसके प्रकार की बात करें तो यह मुख्य रूप से दो प्रकार के हो सकते हैं एक औपचारिक पत्र और दूसरा अनौपचारिक पत्र। पत्र लेकिन न केवल एक सूचना भेजने का माध्यम है बल्कि यह एक कला के रूप में विद्यमान है। पुराने जमाने में कई ऐसे लेखक हुए जिन्होंने पत्र के माध्यम से अपने बात कही है जैसे सुभाषचन्द्र को लिखे पत्र में। और गांधी को लिखे पत्र में ऐसे ही कला देखने को मिलते हैं जिससे एक सहज व्यक्तित्व झलकता है।

मानव सभ्यता में पत्र की भूमिका 

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो आज भी भारत, मिस्र, चीन में और सुमेर के समय से रोम, ग्रीस के माध्यम से पत्र आज भी मौजूद हैं। पत्र का उपयोग सत्रहवीं और अठ्ठारहवीं शताब्दी में आत्म शिक्षा के लिए उपयोग किया जाता था। पत्र एक प्रकार से विचारधारा को फैलाने का माध्यम है, इसमें आलोचना पढ़ने, आत्म-अभिव्यंजक लेखन और समान विचारधार के लोगों तक विचार का आदान-प्रदान करने का माध्यम था। कुछ लोग इसे सन्देश भेजने के माध्यम और संचार के तरीके तथा प्रतिक्रिया प्राप्त करने का माध्यम बताते हैं।

 पत्र के माध्यम से ही बाइबल के कई किताबों को बनाया गया है। पत्र कई इतिहासकारों के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं और यह अभिलेखागार में रखे पत्र जो की व्यतिगत हैं और राजनीतिक हैं व्यवसायिक कारण से इतिहास के स्रोत बने हुए हैं। एक निश्चित समय तक लेखन के लिये अकक्षरों को कला के रूप में देखा जाता था। एक शैली के रूप में पत्र लेखन को देखा जाता था। उदाहरण के तौर पर आज भी बीजान्टिन एपिस्टोलोग्राफी को लिया जाता है।

हिंदी व्याकरण निबंध - पर्यावरण, प्रदूषण, जल संरक्षण, महात्मा गाँधी 

अगर पराचीन इतिहास की बात करें तो पत्र के लिए विभिन्न ताम्र पत्रों और शिलालेखों का उपयोग किया जाता था। तथा इसके अलाव धातु, और मोम, कांच, लकड़ी, मिट्टी के बर्तन, जानवरों के खाल का भी उपयोग किया जाता था। इसके अलावा पपीरस सहित विभिन्न वस्तुओं या सामग्रियों पर भी पत्र लिखे जाते थे। Acotius ने अपने पत्र के लिए साइपिप्प के लिए एक सेब का इस्तेमाल किया था। यह हमें  ओविड से पता चलता है। 

आज के समय में बहुत सारी विविधताएं आ गयी हैं संचार प्रणाली में और आज पत्र लेखन बहुत कम हो गया है खासकर डाक या पोस्टआफिस से। उदाहरण के रूप में देखें तो आजकल के संचार माध्यम टेलीफोन, मोबाइल ने विधुत सन्देश ने संचार में लगने वाले समय को बहुत ही कम कर दिया है। क्या है अब धीरे-धीरे बदलाव होने के कारण निकटतम टेलीग्राफ कार्यालय में कम्प्यूटर में लिखे सन्देश को कागज पर लिखित रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। और इसे प्राप्तकर्ता को दे दिया जाता है। अब सन्देश माध्यम में अगला परिवर्तन टेलिक्स के रूप में था जिसने सन्देष भेजने या वितरण करने के आवश्य्कता को ही खत्म कर दिया। इसके बाद फैक्स मशीन का दौर आया जिसमें टेलीफोन नेटवर्क का उपयोग करके भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के मध्य एक माध्यम का काम किया जिसमें प्राप्तकर्ता के द्वारा उसी प्रकार से हूबहू प्रिंटआउट प्राप्त हो जाता था जिसे फैक्स मशीन कहा जाता था। जो की फोटो के समान होता है।

आज विज्ञान ने इतना तरक्की कर लिया है की एक ही समय में कई लोगो को सन्देश भेजा जा सकता है। आज के इस आधुनिक युग ने पत्र को भले ही भुला दिया हो लेकिन उसका स्थान अपने आप में सुरक्षित है। आज के समय में इंटरनेट और Internet से जुड़े विभिन्न साधन जैसे ईमेल के माध्यम से लिखित सन्देश भेजे जा सकते हैं। जो की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं किसी भी प्रकार के Community के द्वारा सन्देश भेजने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। यह केवल अक्षरों या शब्दों के रूप में ही सन्देश नहीं भेजता है बल्कि यह आज वीडियो और ऑडियो तथा चित्रों के रूप में भी सन्देश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजता है।
लेकिन आज पत्र शब्द केवल कागज पर लिखे जाने वाले सन्देश के लिए सुरक्षित है।  

साहित्यिक ऐतिहासिक स्रोत सामग्री के रूप में

पत्र या letter writing hindi इस पोस्ट में साहित्य से इसके स्त्रोत की बात करें तो साहित्य में ऐसे कई साहित्य हैं जिन्हें पत्र से प्रेरित होकर लिखा गया है और इतिहास भी पत्रों (ताम्र पत्र) से और जानकारी प्राप्त करता है इस प्रकार पत्र का जो शिलशिला है वह कई हजारों वर्ष से चला आ रहा है।
पत्र सन्देश भेजने का एक माध्यम ही नहीं है बल्कि इससे कई इतिहासिक घटनाओं की जानकारी भी मिलती है कई सारे इतिहास का पता हमें पत्थरों पर लिखे सन्देशों के माध्यम से मिलते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना की जाए तो वह पत्र लेखन से कई प्रकार से भिन्न है और इसमें वह सभी सुविधाएं नहीं हैं जो की आज के इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे गए सन्देश में भेजे जाते हैं। आज के इस युग में सन्देश भेजने का सबसे आसान तरीका है ई मेल और (Massaging app) सन्देश भेजने वाले Applications जो की Mobile के माध्यम से या Computer के माध्यम से भेजे जाते हैं।
इसमें हम चित्र (photo), वीडियो (Video), और भी कई ग्राफिकल सन्देश अच्छे Designe के साथ भेजे जा सकते हैं।
उस समय क्या होता था जब पत्र लिखें जाते थे तो केवल शब्द और वाक्य ही उसमें शामिल होते थे इस प्रकार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं होने कारण चित्र और वीडियो आदि नहीं भेजे जा सकते थे।
चुकी उस समय न ही कोई यन्त्र थे और न ही किसी प्रकार के बिजली से चलने वाले यन्त्र या मशीन थे इस कारण इस प्रकार के ज्यादा सुविधाएं उस समय के लोगों को नहीं मिल पाती थी लोगो को। अब बात की जाए वितरण की तब।

वितरण की प्रक्रिया

वितरण करने के लिए राजा महाराजा के समय एक अलग से पत्र पहुचाने वाला होता था जो की सन्देश या खबर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता था। तो इस हिसाब से वह समय भी ठीक था क्योकि उस समय बहुत सारे काम करने वाले हमें मिल जाते थे और उस समय इतनी सुविधा ना होना भी एक कारण था की आखिर और कैसे भेजे सन्देश को तो पत्र लेखन ही एक माध्यम था। अपनी बात को दूर किसी के पास भेजने का।
अब क्या होता है अब की जिंदगी या लाइफ बहुत ही ज्यादा फास्ट है लोग एक पल का भी इंतजार नहीं कर सकते है और लोग तुरन्त रिजल्ट चाहते हैं।
पत्र लिखना अभी वर्तमान युग में बहुत ही कम हो गया है और लोग शायद ही पत्र लिखते हैं। क्योकि किसी भी प्रकार के पत्र लिखने का काम आज मोबाइल या कम्प्यूटर के माध्यम से हो जाता है।
आज कल सबसे ज्यादा कम्पनियों के द्वारा सूचनाओं को लोगो तक पत्र के माध्यम से भेजा जाता है और कई बीमा कम्पनियों के द्वारा भी आज कल पत्र के माध्यम से या पोस्ट आफिस से लेटर भेजा जाता है।

पत्रों के प्रकार 

जैसे की मैने आपको पहले ही बताया है की पत्र को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है - औपचारिक पत्र और अनौचारिक पत्र

1 . औपचारिक पत्र -

ऐसे पत्र होते हैं जो की सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए भेजा जाता है और जिसमे ज्यादा कुछ उल्लेख नहीं होता है।
उदाहरण के तौर पर आप किसी company के द्वारा उसके Employee को लिखे जाने वाले पत्र को ले सकते हैं।

2 . अनौपचारिक पत्र-

ऐसे पत्र जिसमें किसी भी प्रकार के कम उल्लेख नहीं होते हैं और बहुत ज्यादा निजी जानकारी शेयर की जाती है।  उसे हम अनौपचारीक पत्र कह सकते हैं। यह कोई Personal काम से किसी को लिखा जाता है और बहुत ही गोपनीय तरीके से इसे किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाया जाता है। अनौपचारिक पत्र ही किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जानकारी शेयर करने के लिए किया जाता है। इसमें अपने मन की बाते किसी को पत्र के माध्यम से भेजा जाता है।

यह बहुत छोटा या बड़ा हो सकता है यह पत्र लिखने वाले के ऊपर निर्भर करता है। की वह किस प्रकार की जानकारी उस दूसरे आदमी जो पत्र को प्राप्त करने वाला है तक शेयर कर रहा है।


Saturday, August 31, 2019

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निबंध लिखने से पूर्व  उसका रूप रेखा(Outline) लिखा जाता है, इससे पाठक को आसानी होती है की निबंध में क्या क्या सामग्री है। इस पद्धति को अपनाने से जरूर आपको हिंदी में अच्छे नंबर मिलेंगे। 

रूप-रेखा - प्रस्तावना, प्रदूषण क्या है , प्रदूषण के कारण , प्रदूषण के प्रकार , प्रदूषण सुधार के उपाय

प्रस्तावना - विज्ञान के इस युग में हमें कई लाभ मिला है वही हानि भी हुआ है , इसके कारन प्रदूषण की समस्या उत्त्पन्न हो गया है, जिससे की हमारे दैनिक जीवन में कई समस्याएं उत्त्पन्न हुआ है, यदि इस पर विचार नहीं किया गया तो आगे जाकर गंभीर समस्यायों का सामना करना होगा।

हिंदी में प्रदूषण पर निबन्ध

प्रदूषण क्या है  

हवा, पानी और जल पर किसी प्रकार से दुसित होना ही प्रदूषण कहलाता है , जिसका जीवो पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभावपड़ता है।

प्रदूषण के कारण 

इसका मुख्या कारण है कारखानों से निकालने वाले धुएं और दुसित पानी जो हवा और पानी को बहुत प्रभावित करते है , इसके आलावा वहां से निकलने वाले धुएं और और कए कतनासक भी प्रदूषण के कारण है। इसके आलावा पेड़ो को काटने से पर्यावण असंतुलित होता है जसके कारन बाढ़ जैसे प्राकृतिक विपदा आती है।

प्रदूषण के प्रकार 

1. वायु प्रदूषण - यह प्रदूषण ज्यादातर निकलने वाले धुएं से अलावा मोटर गाड़ी से है। वायु प्रदूषण हमारे वातावरण के लिए बहुत खतरनाक होता है ये सभी प्रकार के धुएं में कार्बन डाई आक्साइड होता है जो वातावरण को गर्म करता है जिससे की कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होता है इसे रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।

2 . जल प्रदूषण - कहा जाता है जल हि जीवन है लेकिन हम जाने अनजाने में जल को गन्दा कर रहे है कारखाना से निकने वाला पड़उसित पानी हमारे नदी नालो को दुसित कर रहे है और और हम नदी में न जाने कितने कचड़े फैक देते है जिससे की कई बैक्टीरिया जल में पनप जाते है और हमारे सरीर पर बीमारी को जन्म है।

3 . ध्वनि प्रदूषण - आज कल कई प्रकार की कारखाने से निकलने वाले ध्वनि से और बड़े शहरो में वहां की अधिकता से ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। जिससे की मानव सरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके उपाय के लिए कारखानों को शहरो से दूर होना चाहिए और वहां का काम उपयोग करना होगा।

दूसरे निबंध लेख - पर्यावरण, पत्रलेखनजल संरक्षणमहात्मा गाँधी 

प्रदूषण सुधार के उपाय 

प्रदूषण को रोकना हमरी जिम्मेदारी है इसे अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे जाकर और खतरनाक होगा अभी हमारे सामने इसके कारन कई परेशानी उत्पन्न हो रहा है हवा बहुत दुषित होने है , कई प्रकार की नयी बीमारी जन्म ले रही है पर्यावण में कई अनपेक्षित परिवर्तन हो रहे है।

हमें जितना हो सके पेड़ लगाना होगा पेड़ ही है जो कार्बन डाइऑक्साइड को काम कर सकता है और ऑक्सीजन को बड़ा सकता है जिसके कारन पयावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को संतुलित किया जा सकता है।  हमें काम से काम डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे की, हानि करक गैस की काम उत्सर्जन होगा। बैटरी से चलने वाले वाहन का उपयोग इसके लिए उत्तम होगा और साईकल का इतेमाल कारन चाहिए। कारखानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए उपाय ढूढ़ना होगा। कारखानों में एक पैरामीटर के ऊपर प्रदूषण होता है तो उस फ़ैक्टरी को बाद कारन चाहिए या प्रदूषण काम हो ऐसी कारखानों का परिवर्तन करने का आदेश दे सकती है।

Friday, August 30, 2019

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Hello and Welcome My Dear Friends मैं आपका फिर से एक बार स्वागत करता हूँ मेरे ब्लॉग Rexgin.in जिस पर मैं आपसे हर रोज बातें करता हूँ। Eductional Topics पर आज मैं आपके लिए खासकर उन लोगों के लिए निबन्ध लेकर आया हूँ।
जिन्हें तलास होती है महात्मा गाँधी निबन्ध की (Mahatma Gandhi Essay in Hindi) इस Post में मैने उनके ऊपर सटीक निबन्ध लिखने की कोशिश की है तो चलिए शुरू करते हैं-




father of nation

रूपरेखा :-
  1. परिचय 
  2. महात्मा गाँधी का जीवन 
  3. महात्मा गाँधी की विशेषताएं 
  4. महात्मा गाँधी का पूरे देश पर क्या प्रभाव रहा
  5. उपसंहार(Conclusion)
तो friends मैं इस पोस्ट में आपको महात्मा गाँधी के बारे में ज्यादा तो नहीं बता सकता लेकिन निबन्ध को किस प्रकार से लिखना है इसके बारे में ही बताने के लिए मैने ये पोस्ट लिखा है (How to Write mahatma gandhi essay in hindi ) इस पोस्ट में मैं Cover करने वाला हूँ। 

1. परिचय:-

 यहाँ पर आपको जिस Topic के बारे में निबन्ध लिखना है उसका परिचय देना है फिर उसके बाद निबन्ध के आगे का भाग हमें बताना होता है। 
तो यहां पर मैं उनके बारे में ज्यादा तो नहीं बताने वाला हूँ क्योकि वो किसी के परिचय के मोहताज नहीं है लगभग-लगभग उन्हें हर कोई जानता है। 
  • जन्म - 2 अक्टूबर 1869 को हुआ। 
  • जन्म स्थान - पोरबन्दर, काठियावाड़, गुजरात (भारत) में। 
  • मृत्यु - 30 जनवरी 1848 को हुआ।
  • मृत्यु स्थान - नई दिल्ली (भारत)
  • अन्य नाम - राष्ट्रपिता, महात्मा, बापू, गांधी जी। 
  • शिक्षा - यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन।  
जैसे की  आप सभी जानते हैं महात्मा गाँधी का जन्म भारत के गुजरात राज्य के पोरबन्दर नामक स्थान में 2 अक्टूबर सन 1869 को हुआ था। महात्मा गाँधी के माता का नाम पुतलीबाई था और पिता का नाम करमचन्द गांधी था। महात्मा गाँधी की माता वैश्य समुदाय से सम्बन्ध रखती थी और वहीं गाँधी के पिता सनातन धर्म के पनसारी जाती से सम्बन्ध रखते थे। महात्मा गाँधी का नाम पहले मोहन दास था फिर बाद में उनको उनके पिता के नाम के साथ जोड़कर मोहन दास करमचन्द गाँधी के नाम से जाने जाना लगा।  

2. महात्मा गाँधी का जीवन-

my dear friends महात्मागांधी का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है उन्होंने ज्यादा तकलीफ तो नहीं पाई क्योकि उनके पिता अंग्रेजों के जमाने में दीवान हुआ करते थे। तो उनका बचपन भी उतने ज्यादा तकलीफ में नहीं गुजरा था।

उनके बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप Wikipedia में देख सकते है फिर हाल मैं उनके बारे में यहां मेन मेन टॉपिक को छूते हुए चला जा रहा हूँ क्योकि आपके पास भी उतना ज्यादा समय नहीं होगा मेरे पास भी नहीं है।

विवाह -
महात्मा गाँधी का विवाह 13 साल के आयु पूर्ण करते ही कम उम्र में हो गया था और उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था। जिन्हें "बा" कहके भी पुकारा जाता था। उस जमाने में उनका बाल विवाह हुआ था। क्योकि वह उस राज्य में प्रचलित था। अब महात्मा गाँधी और उनकी पत्नी को एक साथ नहीं रखा जाता था उस समय यह प्रथा होती थी विवाह के बाद के पुत्र और पुत्र वधु अपने अपने घर में रहा करते थे इस कारण उन्हें यानी महात्मा गांधी को पढाई के लिए अलग देश भेजा गया उन्हें विदेश भेजने में उनके बड़े भाई का हाथ था।
उन्होंने लन्दन में वकालत की डिग्री हासिल की और फिर वहां से मुम्बई के अदालत में वकालत करने के लिए आ गए लेकिन उनको यह काम जचा नहीं। इस प्रकार वे पेशे से वह वकील थे।

 3. महात्मा गाँधी की विशेषताएं-

महात्मा गांधी की विशेषताएं की बात की करें तो उनके विशेषता में उनका सांत व्यवहार बहुत ही बड़ी विशेषता थी। मेरे हिसाब से मैने महात्मा गाँधी के जीवन के बारे में पढा तो पाया की वाकई में उन्होंने अपने आप पर पूरा विजय प्राप्त कर लिया था।

सत्य प्रेमी -
 सत्यता उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है उन्होंने किसी भी प्रकार के अनर्गल बातों की ओर ध्यान नहीं दिया था। हमेशा सत्य की राह में चलने के लिए लोगों को कहते थे और खुद भी पालन करते थे ऐसा नहीं की वह सिर्फ कहते थे।

सहृदय -
उनके मन में भी कोई कपट की भावना नहीं थी और वह किसी से भी रूखा व्यवहार किया करते थे। सभी से एक जैसे व्यवहार वे करते थे।

स्वक्षता प्रेमी -
महात्मा गांधी के नाम पर आज स्वच्छ भारत का अभियान चलाया जा रहा है क्योकि वह बहुत ही ज्यादा स्वक्षता को ध्यान में रखते थे। और उन्होंने ही हरिजन की सुरुआत की थी।



इस प्रकार से महात्मा गाँधी की अनेक विशेषताए थी जिसमें बहुत सारे का वर्णन मैने यहां पर नहीं किया है।

लेखक -
महात्मागांधी ने कई सारे पत्र पत्रिकाओं का भी लेखन किया और इसके माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहें। उनकी कुछ पुस्तके इस प्रकार हैं -

हिन्द स्वराज - जिस पर उन्होंने स्वराज की ओर इसारा किया है।
दक्षिण आफ्रिका के सत्याग्रह का इतिहास - दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह का कैसा इतिहास रहा है इस पुस्तक में बताया गया है।
सत्य के प्रयोग (आत्मकथा) - जिस पर इन्होंने बताया है सत्य के उनके जीवन पर महत्व के बारे में। इस पुस्तक के माध्यम से वे सत्य के प्रयोग को अपने आंतरिक जीवन में करते हैं और इसके अनुभव को ही उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से बताया है।
गीता माता - इस पुस्तक के माध्यम से महात्मागांधी ने गीता के उनके जीवन पर प्रभाव को बताया है और उसका वर्णन उन्होंने न एक जाती के रूप में बल्कि इसका वर्णन उन्होंने एक जीवन को सफल बनाने वाले ग्रन्थ के रूप में किया है इस पर उन्होंने इसे सभी समस्या का समाधान बताने वाली गीता को गीता माता के नाम से सम्बोधित किया है। गीता में गया का खजाना है। इस पुस्तक में बताया गया है।

4. महात्मा गाँधी का पूरे देश पर क्या प्रभाव रहा-

महात्मा गाँधी को पूरे भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व में जाना जाता है। उनके धन संपत्ति के कारण नहीं बल्कि उनके प्रेम व्यवहार के कारण, सत्य निष्ठा के कारण।
भारत पर महात्मा गाँधी के व्यवहार के कारण वह बापू के  नाम से संबोधित किये गए और आज उन्हें हर कोई राष्ट्र पिता के नाम से जानता है।
जहाँ एक तरफ महात्मागांधी के अच्छे प्रभाव हैं वहीं दूसरी ओर कई आलोचना भी उनके ऊपर देखने को मिलते हैं।

ये आलोचनाएं उनके काम और सिद्धांतों को लेकर है।

जैसे -
जुलु विद्रोह के सम्बंध में कहा जाता है कि उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था।
विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों का साथ देना और उनसे डिल करना कि युद्ध में साथ देने के कारण देश को छोड़ने का फैसला अंग्रेजों द्वारा करना।
खिलाफत आंदोलन जैसे सम्प्रदायिक आनफॉलन को राष्ट्रीय आंदोलन बनाना।
अंग्रेजों के खिलाफ किये जाने वाले हिंसात्मक कार्य जो कि क्रांतिकारियों द्वारा किये जाते थे उनकी निंदा वह किया करते थे।
इस प्रकार बहुत से ऐसे कारण भी हैं जिसके कारण महात्मागांधी की निंदा हुई थी। और भी कारण हैं जिन्हें मैं नहीं लिख रहा हूँ समय के अभाव के कारण आप इसे पढ़ सकते हैं विकिपीडिया से और जान सकते हैं इससे भी और ज्यादा जानकारी पा सकते हैं।
महात्मागांधी जाती प्रथा का समर्थन समझते थे।

5. Conclusion (उपसंहार)-

महात्मागांधी के द्वारा किये गए कार्य को इतने कम शब्दों में बता पाना बहुत ही कठिन कार्य है इसके लिए एक लाईन में कहा जा सकता है की " महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जो अपनी छाप पर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी छोड़ने में कामयाब रहे। "

Mahatma gandhi essay in hindi kaise likhe-

Freinds ये निबन्ध मेरे द्वारा अलग अलग जगह से जानकारी जो मुझे अच्छी लगी उसे लेकर लिखा गया है आप चाहें तो इससे और भी अच्छा निबन्ध लिख सकते हैं।
निबन्ध को लिखने के लिए आपको बस एक बात का ध्यान रखना है की यहाँ पर जो भी कुछ शेयर करें वह ऐसे लगना चाहिए की आपने वाकई में कहीं से इसको पढा है।
निबन्ध को इस प्रकार लिखें माने जीवन्त हो और आप उसके बारे में उसके सामने बता  रहें हों।

धन्यवाद!

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