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पर्यावरण की परिभाषा एवं महत्व लिखिए

पर्यावरण किसे कहते हैं

पर्यावरण दो शब्दो 'परि' और 'आवरण' से मिलकर बना है। परि का अर्थ है सभी ओर तथा आवरण का अर्थ घेरा अर्थात जो हमें चारों और से घेरे हुए है वही पर्यावण है। 

पर्यावरण की परिभाषा लिखिए

परिभाषा #1 - पर्यावरण का अर्थ होता है - आस-पास। मानव, जन्तुओं या पौधों की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने वाली बाह्य दशाएँ पर्यावरण के अंतर्गत आते है। इनमे जंगल, नदी, नाले, पहाड़ और मैदान आते है।

परिभाषा #2 - किसी स्थान विशेष में मनुष्य के आस-पास भौतिक वस्तुओं (स्थल, जल, मृदा, वायु-यह रासायनिक तत्व है) का आवरण, जिसके द्वारा मनुष्य घिरा होता है को पर्यावरण कहा जा सकता है। 

परिभाषा #3 - पार्क के अनुसार, “पर्यावरण का अर्थ उन दशाओं के योग से होता है जो मनुष्य को निश्चित समय में निश्चित स्थान पर आवृत्त करती हैं।

पर्यावरण की परिभाषा एवं महत्व लिखिए

पर्यावरण का मानव जीवन में महत्व

पर्यावरण महत्व हमारे दैनिक जीवन में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। प्राचीन काल में मनुष्य प्रकृति से अधिक कनेक्ट हुआ करता था। जिसके कारण स्वस्थ अधिक बेहतर हुआ करती थी। आज मनुष्य पर्यावण से दूर हो गया है। शहरी कारण के कारण लोगो को साफ हवा का मिलना भू दूभर हो गया है। पर्यावरण एक जीव के लिए घर है। जहा पे उसके जीवन यापन की सारी वस्तुए विध्यमान होती है। 

पर्यावरण से हमें जल भोजन और प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते है। इसके अलावा किसी भी जिव के लिए वातावरण का होना अति आवश्यक होता है। इसके बिना जीवन असवम्भव होता है। पृथ्वी एक मात्र ऐसा गृह है जहा पे अनुकूल वातावरण पाया जाता है। जहां पे जीव आसानी से जीवन यापन कर सकता है। 

पर्यावरण के प्रकारों को समझाइए

पर्यावरण को दो भागो में विभाजित किया जाता है - प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण। हालाँकि पूर्ण रूप से प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण कहीं नहीं पाए जाते। यह विभाजन प्राकृतिक दशाओं में मानव की अधिकता और न्यूनता का कारण है। 

मानव ने अपने जीवन को सुखमय बनाने के लिए पर्यावरण से छेड़छाड़ किया और प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन नष्ट किया है। जिससे प्राकृतिक के अस्तित्व पर ही संकट उत्पन्न हो गया है। इस तरह की समस्याएँ पर्यावरणीय अवनयन कहलाती हैं।

वर्तमान समय में पर्यावरण को समझने और उसे संतुलित करने के लिए मनुष्य को अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। इसी से हमें जीवन की गुणवत्ता प्राप्त हो सकती है। 

पर्यावरणीय समस्याएं

ज्यादातर पर्यावरण की समस्याएँ जनसंख्या वृद्धि और मानव द्वारा संसाधनों के उपभोग से हुयी हैं। पर्यावरण में होने वाले वे परिवर्तन से वातावरण में असंतुलन उत्त्पन हो जाता हैं। और इसके कारण पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरा उत्पन्न होता हैं।

प्रदूषण - जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और अन्य प्राकृतिक आपदाएं होने लगती है। मानव के विकाश ने लगभग सारी पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया हैं। मनुष्य को पर्यावरण से साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए।

पर्यावरण में किसी हानिकारक गैस रसायन या अपषिस्ट पदार्थ का विघटन होना प्रदूषण कहलाता है। यह एक गंभीर समस्या है। खासकर भारत जैसे विकासशील देश के लिए। प्रदूषण कई कारणों से हो सकता है। आता जागरूकता और सरकार की निति इस समस्या का हल हो सकता है। प्रदूषण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है - वायु प्रदूषण जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण। 

जलवायु परिवर्तन - हमारे जीवन मे हमने बहुत सारे परिवर्तन देखे है जल वायु परिवर्तन उन्ही मे से एक है जल वायु परिवर्तन के कारण ही पृथ्वी पर मौसम में परिवर्तन होता है। इसके कारण कई समस्याएं उत्त्पन हो सकती है। फसलों को नुकसान होगा। वर्षा की कमी से भूमि बंजर हो जाएगी। पेड़ पौधे नस्ट हो जायेंगे। तथा वातावरण का तापमान बढ़ने लगेगा। 

जैवविविधता ह्रास - पृथ्वी पर उपस्थित विभिन्न प्रकार के पारितंत्र में उपस्थित जीवों व वनस्पतियों के प्रजातियों के प्रकार में कमी को जैवविविधता हृास कहते हैं।

प्राकृतिक आपदाएँ - इनमें चक्रवात, तेज तूफान, अत्यधिक बारिश, सूखा आदि शामिल है।

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