अटाकामा मरुस्थल विश्व के सबसे सूखे मरुस्थलों में से एक है। यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी भाग में स्थित है और मुख्य रूप से चिली के उत्तरी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी लंबाई लगभग 1000 किमी तक प्रशांत महासागर के तट के साथ-साथ फैली हुई है।
अटाकामा मरुस्थल को पृथ्वी का सबसे शुष्क स्थान माना जाता है, क्योंकि यहाँ कुछ क्षेत्रों में कई वर्षों तक बारिश नहीं होती। अत्यधिक शुष्क जलवायु, खनिज संसाधनों की प्रचुरता और अनोखे भू-दृश्य के कारण यह मरुस्थल वैज्ञानिकों और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
अटाकामा मरुस्थल कहां स्थित है
अटाकामा मरुस्थल दक्षिण अमेरिका में स्थित एक मरुस्थल है, जो कि एंडीज पर्वत के पश्चिम में प्रशांत महासागर के तट पर 1,600 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। अटाकामा मरुस्थल दुनिया के सबसे शुष्क मरुस्थल क्षेत्र में से एक है। यह अन्य रेगिस्तानों की तुलना में कम वर्षा होती है।
अनुमानों के मुताबिक, अटाकामा रेगिस्तान 105,000 किमी पर फैला हुआ है। अधिकांश रेगिस्तान पथरीले इलाके, नमक की झीलों, रेत और फेल्सिक लावा से बना है। जो कि एंडीज की ओर बहता है।
शांत उत्तर की ओर बहने वाले हम्बोल्ट धारा और प्रशांत महासागर की उपस्थिति के कारण रेगिस्तान का तापमान चरम पर होता है। अटाकामा मरुस्थल का सबसे शुष्क क्षेत्र एंडीज और चिली कोस्ट रेंज के बीच स्थित है।
अटाकामा मरुस्थल के अत्यधिक शुष्क होने का कारण क्या है
अटाकामा मरुस्थल को विश्व का सबसे शुष्क मरुस्थल कहा जाता है। यहाँ कई स्थानों पर वर्षों तक बारिश नहीं होती, इसलिए इसे पृथ्वी का सबसे सूखा मरुस्थल माना जाता है।
अटाकामा मरुस्थल के अत्यधिक शुष्क होने के पीछे कई भौगोलिक और जलवायवीय कारण हैं। सबसे पहला कारण है एंडीज पर्वतमाला। यह पर्वतमाला मरुस्थल के पूर्व में स्थित है और यह अमेज़न क्षेत्र से आने वाली नम हवाओं को रोक देती है। परिणामस्वरूप ये हवाएँ अटाकामा तक नहीं पहुँच पातीं और यहाँ वर्षा नहीं हो पाती।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण है प्रशांत महासागर में बहने वाली ठंडी हम्बोल्ट धारा। यह ठंडी समुद्री धारा वायुमंडल को ठंडा कर देती है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया कम हो जाती है। जब बादल ही नहीं बनते, तो वर्षा भी नहीं होती।
तीसरा कारण यहाँ का स्थायी उच्च वायुदाब क्षेत्र है, जो हवा को नीचे की ओर दबाता है। इससे बादल बनने और वर्षा होने की संभावना और भी कम हो जाती है। इन सभी कारणों के कारण अटाकामा मरुस्थल में नमी बहुत कम रहती है और कई जगहों पर तो सैकड़ों वर्षों तक भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है।
इसी अत्यधिक शुष्कता के कारण वैज्ञानिक अटाकामा मरुस्थल को पृथ्वी के सबसे सूखे स्थानों में से एक मानते हैं और यहाँ की परिस्थितियों की तुलना अक्सर मंगल ग्रह से भी की जाती है। इसलिए अटाकामा मरुस्थल को विश्व का सबसे शुष्क मरुस्थल कहा जाता है।
अटाकामा मरुस्थल में जीवन किस प्रकार पाया जाता है
अटाकामा मरुस्थल को पृथ्वी का सबसे शुष्क मरुस्थल माना जाता है, फिर भी यहाँ कुछ विशेष प्रकार के जीवन पाए जाते हैं। अत्यधिक सूखे और कठोर वातावरण के बावजूद यहाँ के जीव-जंतु और पौधे अपने आप को अनुकूलित करके जीवित रहते हैं।
अटाकामा मरुस्थल में मुख्य रूप से सूखा सहने वाले पौधे जैसे कैक्टस और छोटी झाड़ियाँ पाए जाते हैं। ये पौधे अपनी जड़ों को गहराई तक फैलाकर जमीन के भीतर से नमी प्राप्त करते हैं। कई पौधों की पत्तियाँ बहुत छोटी या काँटों के रूप में होती हैं, जिससे पानी की हानि कम होती है।
यहाँ कुछ विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीव भी पाए जाते हैं, जो अत्यधिक शुष्कता और तेज धूप में भी जीवित रह सकते हैं। जानवरों में यहाँ छिपकलियाँ, कीट, कुछ पक्षी और छोटे स्तनधारी जीव पाए जाते हैं। कई जीव रात में सक्रिय होते हैं ताकि दिन की तीव्र गर्मी से बच सकें। कुछ पक्षी तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ प्रशांत महासागर से आने वाली नमी के कारण थोड़ी बहुत वनस्पति मिल जाती है।
कभी-कभी यहाँ डेज़र्ट ब्लूम नामक अद्भुत प्राकृतिक घटना भी होती है। जब असामान्य रूप से थोड़ी वर्षा होती है, तो मरुस्थल में छिपे बीज अचानक अंकुरित होकर रंग-बिरंगे फूलों में बदल जाते हैं। यह दृश्य बहुत आकर्षक होता है। इस प्रकार, अत्यधिक कठोर जलवायु के बावजूद अटाकामा मरुस्थल में जीवन सीमित मात्रा में लेकिन अनोखे जीव पाए जाते है।
अटाकामा मरुस्थल की जलवायु
समुद्र तल से 1,500 मीटर की ऊँचाई में अटाकामा मरुस्थल स्थित है। वर्ष के अधिकांश समय मौसम शुष्क होता हैं। अधिक ऊंचाई के कारण तापमान अधिक होता है और जमीन बंजर है। वर्षा की कमी अटाकामा रेगिस्तान की सबसे प्रमुख विशेषता है।
अटाकामा मरुस्थल पृथ्वी पर सबसे पुराना मरुस्थल है, और कम से कम 3 मिलियन वर्षों तक तापमान बढ़ता रहा है। जिसके करण यह पृथ्वी का सबसे शुष्क क्षेत्र बन गया है। बाष्पीकरणीय के चलते अटाकामा रेगिस्तान के कुछ हिस्सों में बारिश नहीं हुई है। पिछले 200 मिलियन वर्षों से यह क्षेत्र शुष्क बनी हुई है।
अटाकामा मरुस्थल पृथ्वी पर अद्वितीय है। भविष्य के मंगल अभियानों के लिए यहाँ उपकरणों का परीक्षण किया जाता है।
