पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती रहती है। यह घूमना पूर्व दिशा की ओर होता है, जिसे प्रोग्रेड गति कहते हैं। अगर पृथ्वी को उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखा जाए, तो इसका घूमना घड़ी की उलटी दिशा में दिखाई देता है।
पृथ्वी का घूर्णन
घूर्णन वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। यह धुरी एक काल्पनिक रेखा है जो उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक जाती है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है, इसी कारण हमें सूर्य पूर्व में उगता और पश्चिम में अस्त होता दिखाई देता है।
पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 24 घंटे लगते हैं, जिसे एक दिन कहा जाता है। वास्तव में, यदि दूरस्थ तारों के सापेक्ष मापा जाए तो यह समय 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड होता है, जिसे नक्षत्र दिवस कहा जाता है।
समय के साथ पृथ्वी का घूमना धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण चंद्रमा का ज्वारीय प्रभाव है। चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी की घूर्णन ऊर्जा को अपनी कक्षा में ले जाती है, जिससे पृथ्वी की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और दिन की लंबाई बढ़ती जाती है।
आधुनिक परमाणु घड़ियों से पता चलता है कि आज का एक दिन, सौ साल पहले की तुलना में लगभग 1.7 मिलीसेकंड लंबा हो गया है। पुराने खगोलीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व से हर सौ साल में दिन की औसत लंबाई लगभग 2.3 मिलीसेकंड बढ़ रही है।
पृथ्वी के घूर्णन का प्रभाव
पृथ्वी के घूर्णन से कई महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाएँ होती हैं। दिन और रात पृथ्वी का जो भाग सूर्य की ओर होता है, वहाँ दिन होता है, और जो भाग सूर्य से दूर होता है, वहाँ रात होती है। समय क्षेत्र पृथ्वी को 24 समय क्षेत्रों में बाँटा गया है, जिससे अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय होता है।
कोरिओलिस प्रभाव पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाएँ और महासागरीय धाराएँ मुड़ जाती हैं, जिसे कोरिओलिस प्रभाव कहते हैं। यह मौसम प्रणाली को प्रभावित करता है। पृथ्वी का आकार घूर्णन के कारण पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है।
पृथ्वी के घूर्णन गति में परिवर्तनों के कारण
पृथ्वी की घूर्णन गति में परिवर्तन कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं। पृथ्वी के केंद्र (Core) में पिघला हुआ लोहा और अन्य धातुएं मौजूद हैं। जब यह तरल पदार्थ अंदर हिलता है, तो यह पृथ्वी के संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे घूर्णन गति में परिवर्तन होता है।
हवाओं के चलने और समुद्री धाराओं के बहने से पृथ्वी के द्रव्यमान का वितरण बदलता रहता है। जैसे एक स्पिनर पर हल्का सा वजन बढ़ाने से उसकी गति बदल जाती है, वैसे ही वायुमंडल और समुद्र का यह बदलाव पृथ्वी की गति पर असर डालता है।
चाँद और सूरज का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी को अपनी ओर खींचता है। इसकी वजह से समुद्र में ज्वार-भाटा आते हैं, जो पृथ्वी के घूमने की गति को धीरे-धीरे कम करने का काम करते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघल रही है। यह पानी जब समुद्रों में फैलकर भूमध्य रेखा (Equator) की ओर आता है, तो पृथ्वी का बीच का हिस्सा भारी हो जाता है, जिससे इसके घूमने की गति धीमी हो जाती है।
पृथ्वी का परिक्रमण
परिक्रमण वह गति है जिसमें पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक निश्चित पथ पर घूमती है। इस पथ को कक्षा (Orbit) कहते हैं। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगभग 365.25 दिनों में पूरा करती है, जिसे एक वर्ष कहा जाता है। हर चार साल में अतिरिक्त 0.25 दिन जोड़कर एक दिन बढ़ाया जाता है, जिसे लीप वर्ष कहते हैं।
पृथ्वी के परिक्रमण के प्रभाव
पृथ्वी का परिक्रमण कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। ऋतुओं का परिवर्तन पृथ्वी की धुरी 23.5 डिग्री झुकी हुई है। जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है, तो अलग-अलग समय पर अलग-अलग भागों को अधिक या कम सूर्य का प्रकाश मिलता है। इसी कारण ग्रीष्म, शीत, वसंत और शरद ऋतु आती हैं।
दिन और रात की अवधि में बदलाव गर्मियों में दिन लंबे और रातें छोटी होती हैं, जबकि सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। विषुव के दिनों में दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। जबकि अयनांत वर्ष के सबसे रात लंबे और दिन सबसे छोटे होते हैं।
| क्र. | घूर्णन | परिक्रमण |
|---|---|---|
| 1 | पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना। | पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में घूमना। |
| 2 | लगभग 24 घंटे में पूरा होता है। | लगभग 365.25 दिन (1 वर्ष) में पूरा होता है। |
| 3 | इसके कारण दिन और रात होते हैं। | इसके कारण ऋतुओं (Seasons) में परिवर्तन होता है। |
