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Showing posts from October, 2020

उद्धव शतक किसकी रचना है

उद्धव शतक जगन्नाथदास रत्नाकर की रचना है। जगन्नाथदास रत्नाकर का जन्म 1923 मे हुआ था वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ ब्रजभाषा कवि थे। पिता का नाम पुरुषोत्तमदास और पितामह का नाम संगमलाल अग्रवाल था जो काशी के ज…

आश्रम व्यवस्था क्या है | अर्थ | प्रकार | महत्व

प्राचीन भारतीय संस्कृति में सामाजिक व्यवस्थाओं का निर्माण व्यक्ति के जीवन में सर्वांगीण विकास के लिये हुआ। आश्रम की व्यवस्था का भी यही उद्देश्य माना जा सकता है। आर्यजन कर्मण्यतावादी थे और कर्म करते ह…

वर्ण व्यवस्था क्या है | अर्थ | महत्त्व | उत्पत्ति | सिद्धांत

विश्व में भारतीय समाज का महत्व तथा पहचान संस्कृति के कारण ही होती रही है। प्राचीनकाल से ही अनेक सामाजिक संस्थाओं का उदय होता रहा है, जिसके द्वारा व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रही तथा समाज …

विकासशील देशों की विशेषताएं

एक विकासशील अर्थव्यवस्था की विशेषताओं का एक विचार एक अविकसित अर्थव्यवस्था की परिभाषाओं के उपरोक्त विश्लेषण से एकत्र किया गया होगा। विभिन्न विकासशील देश एक दूसरे से काफी भिन्न हैं। कुछ देश जैसे अफ्रीक…

भ्रमरगीत में श्रीकृष्ण को क्या कहा गया है

भ्रमरगीत में श्री कृष्ण को काले भवरे की उपाधि दी है। जब उद्धव गोपियों को समझाने के लिए मथुरा से वृंदावन आता है। और गोपियों को समझाता है, परंतु वह गोपीयो समझने के बजाय, उद्धव को ही प्रेम के बारे में…

भ्रमरगीत से क्या आशय है

भ्रमरगीत भारतीय काव्य की एक पृथक काव्यपरम्परा है। हिन्दी में सूरदास, नंददास, परमानंददास, मैथिलीशरण गुप्त और जगन्नाथदास रत्नाकर ने भ्रमरगीत की रचना की है। भारतीय साहित्य में 'भ्रमर' रस…
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