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Saturday, September 21, 2019

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Environment (पर्यावरण) के बारे में आप सभी तो जानते ही होंगे लेकिन मैं आज पर्यावरण पर निबंध फिर से लिख रहा हूं क्योंकि आज पर्यावरण के प्रति जागरूकता बहुत ही आवश्यक है।


Paryavaran par nibandh वाले इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा पर्यावरण क्या है?, पर्यावरण किस से मिलकर बना है पर्यावरण के कौन-कौन से भाग हैं और पर्यावरण से हमें किस प्रकार लाभ की प्राप्ति होती है तथा पर्यावरण से हमें किस प्रकार से हानि है और पर्यावरण का सारांश मैंने इस पोस्ट में आपके समक्ष रखने का प्रयास किया है।

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पर्यावरण क्या है ?

यदि हम पर्यावरण शब्द का संधि विच्छेद करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है परी और आवरण से यहां पर परी का अर्थ हमारे आस पास के वातावरण से है और आवरण का अर्थ हमें घेरे हुए चारों ओर की प्राकृतिक वस्तुओं जीव जंतुओं पेड़ पौधों के द्वारा बने आवरण से है।
इस प्रकार पर्यावरण हमारे आस पास के वातावरण को ही कहा जाता है।

पर्यावरण  किन-किन चीजों से मिलकर बना है ?

जैसे कि मैंने आपको बताया कि पर्यावरण परी और आवरण अर्थात हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें उपस्थित जीव जंतु से मिलकर बना है। पर्यावरण में मनुष्य के अलावा और भी बहुत सारे जीव जंतु पाए जाते हैं जो कि अपना जीवन यापन इस पृथ्वी पर करते हैं जिनका अपना इस पृथ्वी पर अलग अलग ही प्रभाव है।
पर्यावरण में पाए जाने वाले जीव जंतु और पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है। पर्यावरण में कई प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं और इन जंतुओं के द्वारा कभी-कभी कई ऐसे चीजों का निर्माण होता है जो कि पर्यावरण को एक नई दिशा की ओर ले जाता है और पर्यावरण में अमूल चूल परिवर्तन करता है।
इस प्रकार पर्यावरण के मिलकर बनने के बात करें तो यह दोनों प्रकार के सजीव और निर्जीव से मिलकर बना हुआ है। जिनके बिना यह आपस में अधूरे हैं सजीव के बिना निर्जीव अधूरा है और निर्जीव की बिना सजीव अधूरा है।

पर्यावरण  के प्रकार

पर्यावरण के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार का होता है एक मानव निर्मित पर्यावरण और दूसरा प्रकृति या पर्यावरण द्वारा निर्मित पर्यावरण।
मानव निर्मित पर्यावरण इस प्रकार के पर्यावरण होते हैं जो कि मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए गए वातावरण से निर्मित होते हैं जैसे कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाने वाला वातावरण मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आता है और उसी क्रम में कोसा उद्योग के लिए तैयार किए गए वन आदि मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

अब प्राकृतिक पर्यावरण की बात करें तो प्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति द्वारा चुने गए ही जीव और निर्जीव जीवित रह पाते हैं। जैसे कि कई हजारों साल पहले डायनासोर पाए जाते थे लेकिन अब नहीं पाए जाते हैं क्योंकि प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इनका विनाश हो गया और यहां लुप्त हो गए। प्राकृतिक पर्यावरण पर्यावरण के हित को देखते हुए इसका निर्माण प्रकृति खुद करती है। जैसे कि हम खाद्य श्रृंखला की बात करें तो यहां प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत ही आएगा क्योंकि प्रकृति कभी भी पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ने देती है और वहां पर्यावरण के बिगड़ने के कगार पर स्वयं परिवर्तित होकर पर्यावरण के अनुकूल प्रकृति स्वयं निर्मित करती है। इस प्रकार इसे हम प्राकृतिक पर्यावरण कर सकते हैं।

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पर्यावरण के लाभ

पर्यावरण से होने वाले लाभ की बात करें तो यहां असीमित है और अविश्वसनीय है क्योंकि पर्यावरण ही हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।
पर्यावरण के कारण हमें खाद्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं।
पर्यावरण से हम बहुत से उपयोगी वस्तुएं अपने दैनिक जीवन के लिए प्राप्त कर सकते हैं।
पर्यावरण से कई मूल्यवान चीजें हमें प्राप्त होते हैं।
पर्यावरण से ही हमें विभिन्न प्रकार के इंधन  की प्राप्ति होती है।
हीरा जैसे मूल्यवान वस्तु हमें पर्यावरण में पाए जाने वाले मृदा से प्राप्त होती हैं।
जीवन रूपी जल पर्यावरण के कारण ही हमें सुलभ हो पाया है।

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पर्यावरण या environment से होने वाली हानियां

पर्यावरण से होने वाली हानियों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और इसके अलावा मनुष्य द्वारा निर्मित प्रदूषण के कारण भी प्राकृतिक आपदा व प्रकृति द्वारा होने वाली हानियां कर सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और सुनामी प्रकृति में परिवर्तन के कारण आते हैं।
अम्लीय वर्षा पर्यावरण में परिवर्तन के कारण देखने को मिलते हैं।
भूकंप का आना प्राकृतिक आपदा है जो कि पर्यावरण के कारण उत्पन्न होती है।
अत्यधिक मात्रा में गर्मी का बढ़ना पर्यावरण से होने वाली बहुत बड़ी समस्या है या हानि है।
कई मामलों में पर्यावरण में जहां पर जीवन देने योग्य है वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर यह मृत्यु का कारण भी बनती है।

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Conclusion (उपसंहार)
पर्यावरण पर निबंध (essay writing of environment) लिखना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है इस प्रकार पर्यावरण के सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त रूप से वर्णन करना ही पर्यावरण पर निबंध लिखने जैसा है। क्योंकि बहुत बड़ाा हो जाएगा।

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Hello friends जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आजकल पानी की किल्लत सभी जगह हो रही है तो आज का बेरा टॉपिक water save कैसे करना है उसके बारे में इस पोस्ट में मैं पानी किस प्रकार से उपयोगी है और इसे हमें क्यों बचाना चाहिए इस पर चर्चा करूंगा इसके अलावा इस पोस्ट में आपको बताऊंगा कि पानी को किस प्रकार से संरक्षित रखना है।
Save_Water_Hindi

Kya Hai Water Saving


हमारे द्वारा जल का उपयोग बहुत ज्यादा मात्रा भी किया जाता है। इस प्रकार से हमारे द्वारा जल का बहुत ज्यादा मात्रा में दोहन किया जाता है जिसने गर्म पानी की बर्बादी होती है तो इस प्रकार पानी की बर्बादी को कम करना है water saving या जल संरक्षण कहलाता है।




Water Saving की जरूरत क्यों?

दोस्तों आप सभी को यह तो पता होगा ही कि पृथ्वी का लगभग 75% भूभाग में जल पाया जाता है लेकिन मैं आपको बता दूं कि हमारे पृथ्वी पर जो पीने लायक जल की मात्रा है वह बहुत ही कम है जिसके कारण आज जल संकट का सामना हमें करना पड़ रहा है और भविष्य में यहां और भी गंभीर रूप ले सकता है तो इसी को देखते हुए मैंने इस पोस्ट में कुछ अपने तरफ से पानी को या जल को किस प्रकार से बचाया जा सकता है इस बारे में बताया है।
अभी वर्तमान में हमारे लिए सिर्फ पीने के पानी की समस्या का ही सामना नहीं करना पड़ रहा है बल्कि भूजल का जो जल स्तर है वह लगातार नीचे जा रहा है।
जिसके कारण अब कृष्ण ऋतु में पानी के किल्लत का सामना करना पड़ता है और दिल्ली जैसे शहरों में तो पानी की इतनी ज्यादा समस्या है कि लोग खराब पानी से अपना जीवन यापन करने में मजबूर हो जाते हैं तो इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार भी वर्षा जल संरक्षण और इसके अलावा जल संरक्षण के बहुत सारे कदम वहां आगे बढ़ा रहे हैं।

What is the importance of water




अगर पानी के importance की बात करें तो यहां हमारे जीवन के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे शरीर का भी लगभग 75% भाग में चल पाया जाता है और इसके बिना हमारे शरीर के जो पाचन क्रिया हैं या जो अन्य एक्टिविटी है वह संभव नहीं है।
इस प्रकार जल है तो कल है और जल ही जीवन है जैसे कथन सत्य प्रतीत होते हैं क्योंकि हम भोजन के बिना तो कुछ समय तक रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक पल भी नहीं रहा जा सकता है।
इस प्रकार जल का संरक्षण अत्यंत ही आवश्यक है।

Ideas for Water Saving

दोस्तों मैंने यहां पर वर्षा जल संरक्षण के कुछ टिप्स दिए हैं जो कि आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं-

  1. सबसे पहले तो हमें जल का दोहन कम करना चाहिए।
  2. जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहे हैं उसका हमें लाभ लेना चाहिए।
  3. Save water save life को चरितार्थ करते हुए हमें जो वर्षा का जल है उसे संरक्षित रखना चाहिए, बांध बनाकर।
  4. Water या जल का उपयोग हमें सोच समझ कर करना चाहिए और सीमित मात्रा में करना चाहिए।
  5. गांव में बहने वाले पानी को छोटे-छोटे बांध बनाकर रोकना चाहिए।
  6. इसके अलावा खेतों में भी छोटे से जल संग्रहण के लिए छोटा सा तलाब बनाना चाहिए और इसका उपयोग हम जब पानी की कमी होगी तब कर सकते हैं।
  7. पानी की कमी या जल स्तर के नीचे जाने के कारण आज ग्लोबल वार्मिंग और ज्यादा बढ़ती जा रही है बढ़ती जा रही है जिसके कारण ताप में वृद्धि होने के साथ साथ पृथ्वी में उपस्थित पानी वाष्प बनकर ऊपर उड़ जाती है।
  8. घरों में उपयोग किए जाने वाले सावर को हमें धीमा वाला सावर का उपयोग करना चाहिए ताकि पानी जल्दी ना बहे।
  9. शौचालय में पानी के उपयोग बाल्टी से करना चाहिए क्योंकि नल से ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है।
Advantage of water saving




वैसे तो जल संरक्षण के बहुत सारे लाभ हैं लेकिन मैं यहां पर सभी का जिक्र ना करते हुए एक बात साफ करना चाहूंगा कि- अगर आज हम अगर पानी बचाते हैं तो भविष्य में हमें जब भी किसी भी प्रकार के पानी की आवश्यकता पड़ेगी तो उसके लिए हम निश्चिंत रहेंगे और आने वाले भविष्य में आने वाली पीढ़ी को पानी की कोई कमी नहीं होगी और इससे हमारे पृथ्वी का जो जलस्तर है वह भी ठीक से बना रहेगा जिससे फसलों का उत्पादन हम अच्छे से ले सकते हैं।

Conclusion

जल संरक्षण आज के ही नहीं बल्कि भविष्य के जल संकट से हमें बचा सकता है इसलिए हर संभव हमें जल का उपयोग सोच समझ कर करना चाहिए।

Save water in Hindi के इस पोस्ट में आज के लिए बस इतना ही.
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Saturday, September 14, 2019

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समास हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है यहाँ बारहवीं और दसवीं के परीक्षा में अवस्य पूछा जाता है इसलिए हम आपके के लिए आसान भाषा  समझने का प्रयास करेंगे।

 समास किसे कहते है (परिभाषा )

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।
जैसे - नौ ग्रहों का समूह - नवग्रह।

Samas_in_hindi_grammar

◆ समास विग्रह - सामासिक शब्दों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है।
जैसे - राजपुत्र - राजा का पुत्र।

◆ सामासिक शब्द - समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं। समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं।
जैसे - राजपुत्र।

◆ पूर्वपद और उत्तरपद - समास में दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं।
जैसे - गंगाजल। इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद है।

हिंदी व्याकरण - रस, काल, अलंकार, दोहावचन   

 समास के भेद

1. अव्ययी भाव - जिसका पहला पद अव्यय और दूसरा पद प्रायः संज्ञा हो तथा समस्तपद भी अव्यय हो, उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं,
जैसे - विधि के अनुसार - यथाविधि।
          जन्म से लेकर - अजन्म।
          आंखों के सामने - प्रत्यक्ष।
अन्य उदाहरण - यथाशक्ति, प्रतिदिन, समक्ष, सम्मुख, व्यर्थ, निःसन्देह, अकारण, अभूतपूर्व, निडर, अनजाने, दरअसल, बेकार, बेहद, बेकसूर।

एक साथ ही किसी शब्द का दो बार प्रयोग करने से भी अव्ययी भाव समास होता है।
जैसे - दिनों-दिन, धीरे-धीरे, पहले-पहल आदि।

2. तत्पुरुष - इस समास का पहला पद संज्ञा होता है। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो जाता है।
जैसे - चितकबरा, तटस्थ, जलद, गोबरगणेश।

  1. कर्म तत्पुरुष -
            शरण को आया - शरणागत।
            मरण को आसन्न - मरणासन्न।

  2. करण तत्पुरुष -
             सुर द्वारा कृत - सूरकृत।
              हस्त से लिखित - हस्तलिखीत।
      अन्य उदाहरण - मुंहमांगा, दस्तकारी, कष्टसाध्य।

  3.  सम्प्रदान तत्पुरुष -
               विद्या के लिए आलय - विद्यालय।
               हाँथ के लिए कड़ी - हथकड़ी।
        अन्य उदाहरण - देवबलि, राहखर्च।

  4. अपादान तत्पुरुष -
               धर्म से विमुख - धर्मविमुख।
                रोग से मुक्त - रोगमुक्त।
         अन्य उदाहरण - बन्धनमुक्त, पदच्युत, लोकोत्तर, कामचोर, देशनिकाला, जातिभ्रश्ट।

  5. सम्बन्ध तत्पुरुष -
                भारत का वासी - भारतवासी।
                राजा का दूत - राजदूत।
          अन्य उदाहरण - अमचूर, गजराज, वनमानुष, रेलगाड़ी, नरेश, घुड़सवार, कन्यादान।

6. अधिकरण तत्पुरुष -
                आनंद में मग्न - आनंदमग्न।
                 आप पर बीती - आपबीती।
                 लोक में प्रिय - लोकप्रिय।
                आत्म पर विश्वास - आत्मविश्वास।
          अन्य उदाहरण - कार्यकुशल, ग्रामवास।


3. कर्मधारय समास - जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पड़ विशेष्य होता है। उपमेय और उपमान से मिलकर भी कर्मधारय बनता है।

  जैसे - नील + अम्बर - नीलाम्बर (विशेषण+विशेष्य)
           कमल के समान नयन - कमलनयन (उपमान+उपमेय)
  अन्य उदाहरण - महाराज, परमानन्द, पुरुषोत्तम, भलमानस, पुच्छलतारा, कालापानी, चरणकमल।
'प्र' आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास भी इसके अंतर्गत आता है।
जैसे - उपवेन्द्र, प्राचार्य, प्रगति, प्रसंग, प्रमत्त।

4. द्विगु - यह समास समूह का धोत्तक होता है। इस समास में पहला पद संख्यावाची होता है।
    जैसे - दो गायों का समाहार - द्विगु।
            आठ अध्यायों का समाहार - अष्टाध्यायी।
            पांच तन्त्रों का समाहार - पंचतंत्र।
  अन्य उदाहरण - त्रिफला, पंचवटी, त्रिभुवन, चतुर्वण, चहारदीवारी, तिमाही, सतसई, पसेरी, दोपहर, चौराहा।

5. द्वन्द्व - इस समास में दोनों पद समान होते हैं, और दोनों के बीच ' और ' छिपा होता है।
    जैसे - माता और पिता - माता-पिता।
             पाप और पूण्य - पाप-पूण्य।
   अन्य उदाहरण - जीवन-मरण, भला-बुरा, ऊँच-नीच, पन्द्रह-बीस, दस-बारह, आमने-सामने, भला-चंगा।

6. बहुब्रीहि - इस समास में विद्यमान दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद प्रधान होता है। अर्थात समस्त पद किसी अन्य के रूप में प्रयुक्त होता है।
     जैसे - पीत है अम्बर जिसके (विष्णु) - पीताम्बर।
              चार है मुख जिसके (ब्रम्हा) - चतुर्मुख।
अन्य उदाहरण - दशानन (रावण), मुरलीधर (कृष्ण), नीलकण्ठ (शिव), त्रिलोचन (शिव), पंचामृत।

● बहुब्रीहि समास की यह विशेषता है की उसके विग्रह में 'जिसने-वह', 'जिसे-वह', 'जो-वह', आदि शब्दों का प्रयोग होता है।
  जैसे - निर्मल - निर्गत है मल जिससे।
           चन्द्रमौलि - चंद्र है मौली पर जिसके
' सह ' (साथ) के अर्थ में ' स ' शब्द के साथ होने वाले समास को भी बहुब्रीहि समास कहते हैं।
  जैसे - सार्थक - अर्थ के साथ है जो।


Thursday, September 5, 2019

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शिक्षक दिवस Teachers Day

Wednesday, September 4, 2019

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पत्र एक प्रकार का संदेश (Massage) है जिसको किसी एक व्यक्ति के द्वारा पेन (Pen) से लिखा जाता है। लेकिन आज कल इसे PC या किसी Typewritter के माध्यम से भी लिखा जा सकता है क्या है पुराने जमाने में कम्प्यूटर ना होने के कारण इसे कागज में हाथ से लिखा जाता था। और पुराने जमाने की बात करें तो राजाओं द्वारा भी यही पत्र लिखे जाते थे मयूर पंख के माध्यम से। जो राजनीतिक या किसी निजी काम से लिखे जाते थे।

पत्र लेखन क्या है

Letter_writing_in_hindi

यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचना (Massage) भेजने का माध्यम है। इसके प्रकार की बात करें तो यह मुख्य रूप से दो प्रकार के हो सकते हैं एक औपचारिक पत्र और दूसरा अनौपचारिक पत्र। पत्र लेकिन न केवल एक सूचना भेजने का माध्यम है बल्कि यह एक कला के रूप में विद्यमान है। पुराने जमाने में कई ऐसे लेखक हुए जिन्होंने पत्र के माध्यम से अपने बात कही है जैसे सुभाषचन्द्र को लिखे पत्र में। और गांधी को लिखे पत्र में ऐसे ही कला देखने को मिलते हैं जिससे एक सहज व्यक्तित्व झलकता है।

मानव सभ्यता में पत्र की भूमिका 

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो आज भी भारत, मिस्र, चीन में और सुमेर के समय से रोम, ग्रीस के माध्यम से पत्र आज भी मौजूद हैं। पत्र का उपयोग सत्रहवीं और अठ्ठारहवीं शताब्दी में आत्म शिक्षा के लिए उपयोग किया जाता था। पत्र एक प्रकार से विचारधारा को फैलाने का माध्यम है, इसमें आलोचना पढ़ने, आत्म-अभिव्यंजक लेखन और समान विचारधार के लोगों तक विचार का आदान-प्रदान करने का माध्यम था। कुछ लोग इसे सन्देश भेजने के माध्यम और संचार के तरीके तथा प्रतिक्रिया प्राप्त करने का माध्यम बताते हैं।

 पत्र के माध्यम से ही बाइबल के कई किताबों को बनाया गया है। पत्र कई इतिहासकारों के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं और यह अभिलेखागार में रखे पत्र जो की व्यतिगत हैं और राजनीतिक हैं व्यवसायिक कारण से इतिहास के स्रोत बने हुए हैं। एक निश्चित समय तक लेखन के लिये अकक्षरों को कला के रूप में देखा जाता था। एक शैली के रूप में पत्र लेखन को देखा जाता था। उदाहरण के तौर पर आज भी बीजान्टिन एपिस्टोलोग्राफी को लिया जाता है।

हिंदी व्याकरण निबंध - पर्यावरण, प्रदूषण, जल संरक्षण, महात्मा गाँधी 

अगर पराचीन इतिहास की बात करें तो पत्र के लिए विभिन्न ताम्र पत्रों और शिलालेखों का उपयोग किया जाता था। तथा इसके अलाव धातु, और मोम, कांच, लकड़ी, मिट्टी के बर्तन, जानवरों के खाल का भी उपयोग किया जाता था। इसके अलावा पपीरस सहित विभिन्न वस्तुओं या सामग्रियों पर भी पत्र लिखे जाते थे। Acotius ने अपने पत्र के लिए साइपिप्प के लिए एक सेब का इस्तेमाल किया था। यह हमें  ओविड से पता चलता है। 

आज के समय में बहुत सारी विविधताएं आ गयी हैं संचार प्रणाली में और आज पत्र लेखन बहुत कम हो गया है खासकर डाक या पोस्टआफिस से। उदाहरण के रूप में देखें तो आजकल के संचार माध्यम टेलीफोन, मोबाइल ने विधुत सन्देश ने संचार में लगने वाले समय को बहुत ही कम कर दिया है। क्या है अब धीरे-धीरे बदलाव होने के कारण निकटतम टेलीग्राफ कार्यालय में कम्प्यूटर में लिखे सन्देश को कागज पर लिखित रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। और इसे प्राप्तकर्ता को दे दिया जाता है। अब सन्देश माध्यम में अगला परिवर्तन टेलिक्स के रूप में था जिसने सन्देष भेजने या वितरण करने के आवश्य्कता को ही खत्म कर दिया। इसके बाद फैक्स मशीन का दौर आया जिसमें टेलीफोन नेटवर्क का उपयोग करके भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के मध्य एक माध्यम का काम किया जिसमें प्राप्तकर्ता के द्वारा उसी प्रकार से हूबहू प्रिंटआउट प्राप्त हो जाता था जिसे फैक्स मशीन कहा जाता था। जो की फोटो के समान होता है।

आज विज्ञान ने इतना तरक्की कर लिया है की एक ही समय में कई लोगो को सन्देश भेजा जा सकता है। आज के इस आधुनिक युग ने पत्र को भले ही भुला दिया हो लेकिन उसका स्थान अपने आप में सुरक्षित है। आज के समय में इंटरनेट और Internet से जुड़े विभिन्न साधन जैसे ईमेल के माध्यम से लिखित सन्देश भेजे जा सकते हैं। जो की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं किसी भी प्रकार के Community के द्वारा सन्देश भेजने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। यह केवल अक्षरों या शब्दों के रूप में ही सन्देश नहीं भेजता है बल्कि यह आज वीडियो और ऑडियो तथा चित्रों के रूप में भी सन्देश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजता है।
लेकिन आज पत्र शब्द केवल कागज पर लिखे जाने वाले सन्देश के लिए सुरक्षित है।  

साहित्यिक ऐतिहासिक स्रोत सामग्री के रूप में

पत्र या letter writing hindi इस पोस्ट में साहित्य से इसके स्त्रोत की बात करें तो साहित्य में ऐसे कई साहित्य हैं जिन्हें पत्र से प्रेरित होकर लिखा गया है और इतिहास भी पत्रों (ताम्र पत्र) से और जानकारी प्राप्त करता है इस प्रकार पत्र का जो शिलशिला है वह कई हजारों वर्ष से चला आ रहा है।
पत्र सन्देश भेजने का एक माध्यम ही नहीं है बल्कि इससे कई इतिहासिक घटनाओं की जानकारी भी मिलती है कई सारे इतिहास का पता हमें पत्थरों पर लिखे सन्देशों के माध्यम से मिलते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना की जाए तो वह पत्र लेखन से कई प्रकार से भिन्न है और इसमें वह सभी सुविधाएं नहीं हैं जो की आज के इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे गए सन्देश में भेजे जाते हैं। आज के इस युग में सन्देश भेजने का सबसे आसान तरीका है ई मेल और (Massaging app) सन्देश भेजने वाले Applications जो की Mobile के माध्यम से या Computer के माध्यम से भेजे जाते हैं।
इसमें हम चित्र (photo), वीडियो (Video), और भी कई ग्राफिकल सन्देश अच्छे Designe के साथ भेजे जा सकते हैं।
उस समय क्या होता था जब पत्र लिखें जाते थे तो केवल शब्द और वाक्य ही उसमें शामिल होते थे इस प्रकार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं होने कारण चित्र और वीडियो आदि नहीं भेजे जा सकते थे।
चुकी उस समय न ही कोई यन्त्र थे और न ही किसी प्रकार के बिजली से चलने वाले यन्त्र या मशीन थे इस कारण इस प्रकार के ज्यादा सुविधाएं उस समय के लोगों को नहीं मिल पाती थी लोगो को। अब बात की जाए वितरण की तब।

वितरण की प्रक्रिया

वितरण करने के लिए राजा महाराजा के समय एक अलग से पत्र पहुचाने वाला होता था जो की सन्देश या खबर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता था। तो इस हिसाब से वह समय भी ठीक था क्योकि उस समय बहुत सारे काम करने वाले हमें मिल जाते थे और उस समय इतनी सुविधा ना होना भी एक कारण था की आखिर और कैसे भेजे सन्देश को तो पत्र लेखन ही एक माध्यम था। अपनी बात को दूर किसी के पास भेजने का।
अब क्या होता है अब की जिंदगी या लाइफ बहुत ही ज्यादा फास्ट है लोग एक पल का भी इंतजार नहीं कर सकते है और लोग तुरन्त रिजल्ट चाहते हैं।
पत्र लिखना अभी वर्तमान युग में बहुत ही कम हो गया है और लोग शायद ही पत्र लिखते हैं। क्योकि किसी भी प्रकार के पत्र लिखने का काम आज मोबाइल या कम्प्यूटर के माध्यम से हो जाता है।
आज कल सबसे ज्यादा कम्पनियों के द्वारा सूचनाओं को लोगो तक पत्र के माध्यम से भेजा जाता है और कई बीमा कम्पनियों के द्वारा भी आज कल पत्र के माध्यम से या पोस्ट आफिस से लेटर भेजा जाता है।

पत्रों के प्रकार 

जैसे की मैने आपको पहले ही बताया है की पत्र को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है - औपचारिक पत्र और अनौचारिक पत्र

1 . औपचारिक पत्र -

ऐसे पत्र होते हैं जो की सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए भेजा जाता है और जिसमे ज्यादा कुछ उल्लेख नहीं होता है।
उदाहरण के तौर पर आप किसी company के द्वारा उसके Employee को लिखे जाने वाले पत्र को ले सकते हैं।

2 . अनौपचारिक पत्र-

ऐसे पत्र जिसमें किसी भी प्रकार के कम उल्लेख नहीं होते हैं और बहुत ज्यादा निजी जानकारी शेयर की जाती है।  उसे हम अनौपचारीक पत्र कह सकते हैं। यह कोई Personal काम से किसी को लिखा जाता है और बहुत ही गोपनीय तरीके से इसे किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाया जाता है। अनौपचारिक पत्र ही किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जानकारी शेयर करने के लिए किया जाता है। इसमें अपने मन की बाते किसी को पत्र के माध्यम से भेजा जाता है।

यह बहुत छोटा या बड़ा हो सकता है यह पत्र लिखने वाले के ऊपर निर्भर करता है। की वह किस प्रकार की जानकारी उस दूसरे आदमी जो पत्र को प्राप्त करने वाला है तक शेयर कर रहा है।


Saturday, August 31, 2019

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निबंध लिखने से पूर्व  उसका रूप रेखा(Outline) लिखा जाता है, इससे पाठक को आसानी होती है की निबंध में क्या क्या सामग्री है। इस पद्धति को अपनाने से जरूर आपको हिंदी में अच्छे नंबर मिलेंगे। 

रूप-रेखा - प्रस्तावना, प्रदूषण क्या है , प्रदूषण के कारण , प्रदूषण के प्रकार , प्रदूषण सुधार के उपाय

प्रस्तावना - विज्ञान के इस युग में हमें कई लाभ मिला है वही हानि भी हुआ है , इसके कारन प्रदूषण की समस्या उत्त्पन्न हो गया है, जिससे की हमारे दैनिक जीवन में कई समस्याएं उत्त्पन्न हुआ है, यदि इस पर विचार नहीं किया गया तो आगे जाकर गंभीर समस्यायों का सामना करना होगा।

हिंदी में प्रदूषण पर निबन्ध

प्रदूषण क्या है  

हवा, पानी और जल पर किसी प्रकार से दुसित होना ही प्रदूषण कहलाता है , जिसका जीवो पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभावपड़ता है।

प्रदूषण के कारण 

इसका मुख्या कारण है कारखानों से निकालने वाले धुएं और दुसित पानी जो हवा और पानी को बहुत प्रभावित करते है , इसके आलावा वहां से निकलने वाले धुएं और और कए कतनासक भी प्रदूषण के कारण है। इसके आलावा पेड़ो को काटने से पर्यावण असंतुलित होता है जसके कारन बाढ़ जैसे प्राकृतिक विपदा आती है।

प्रदूषण के प्रकार 

1. वायु प्रदूषण - यह प्रदूषण ज्यादातर निकलने वाले धुएं से अलावा मोटर गाड़ी से है। वायु प्रदूषण हमारे वातावरण के लिए बहुत खतरनाक होता है ये सभी प्रकार के धुएं में कार्बन डाई आक्साइड होता है जो वातावरण को गर्म करता है जिससे की कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होता है इसे रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।

2 . जल प्रदूषण - कहा जाता है जल हि जीवन है लेकिन हम जाने अनजाने में जल को गन्दा कर रहे है कारखाना से निकने वाला पड़उसित पानी हमारे नदी नालो को दुसित कर रहे है और और हम नदी में न जाने कितने कचड़े फैक देते है जिससे की कई बैक्टीरिया जल में पनप जाते है और हमारे सरीर पर बीमारी को जन्म है।

3 . ध्वनि प्रदूषण - आज कल कई प्रकार की कारखाने से निकलने वाले ध्वनि से और बड़े शहरो में वहां की अधिकता से ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। जिससे की मानव सरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके उपाय के लिए कारखानों को शहरो से दूर होना चाहिए और वहां का काम उपयोग करना होगा।

दूसरे निबंध लेख - पर्यावरण, पत्रलेखनजल संरक्षणमहात्मा गाँधी 

प्रदूषण सुधार के उपाय 

प्रदूषण को रोकना हमरी जिम्मेदारी है इसे अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे जाकर और खतरनाक होगा अभी हमारे सामने इसके कारन कई परेशानी उत्पन्न हो रहा है हवा बहुत दुषित होने है , कई प्रकार की नयी बीमारी जन्म ले रही है पर्यावण में कई अनपेक्षित परिवर्तन हो रहे है।

हमें जितना हो सके पेड़ लगाना होगा पेड़ ही है जो कार्बन डाइऑक्साइड को काम कर सकता है और ऑक्सीजन को बड़ा सकता है जिसके कारन पयावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को संतुलित किया जा सकता है।  हमें काम से काम डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे की, हानि करक गैस की काम उत्सर्जन होगा। बैटरी से चलने वाले वाहन का उपयोग इसके लिए उत्तम होगा और साईकल का इतेमाल कारन चाहिए। कारखानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए उपाय ढूढ़ना होगा। कारखानों में एक पैरामीटर के ऊपर प्रदूषण होता है तो उस फ़ैक्टरी को बाद कारन चाहिए या प्रदूषण काम हो ऐसी कारखानों का परिवर्तन करने का आदेश दे सकती है।

Sunday, May 19, 2019

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हिंदी व्याकरण में वचन महत्वपूर्ण विषय है इससे जानना एक स्टूडेंट को अवश्या जानना चाहिए।  वचन किसे कहते है

वचन की परिभाषा

शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या अर्थात एक या अनेक का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।


हिंदी में केवल दो वचन हैं - एकवचन

1) एकवचन - शब्द के जिस रूप में एक वस्तु या एक पदार्थ का ज्ञान होता है, उसे वचन कहते है, यथा - मैं, गाय, गेंद, मेज आदि।

2) बहुवचन - शब्द के जिस रूप से अधिक वस्तुओं या पदार्थों का ज्ञान होता है, उसे बहुवचन कहते हैं, यथा - हम, गायों, गेंदों, मेजों।


vachan in Hindi vyakaran

एकवचन से बहुवचन बनाने के लिए नियम क्या क्या हैं ?

  1. आकारांत पुलिंग शब्दों के आ को ए कर देते हैं। जैसे : लड़का - लड़कें, घोड़ा-घोड़े, बेटा - बेटे.
  2. अकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में अ को एँ  कर देते हैं। जैसे : बात - बातें, आँख - आंखें, पुस्तक - पुस्तकें।
  3. अंत वाले स्त्रीलिंग शब्दों में या को याँ कर देते हैं। जैसे : चूड़ी - चूडियाँ, कुर्सी - कुर्सियाँ।
  4. आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों के आगे एँ लगा देते हैं।
  5. इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में या लगा देते हैं। जैसे : जाति - जातियाँ, नदी - नदियाँ, लड़की - लड़कियाँ।


हिंदी व्याकरणरसकालअलंकारदोहावचन 

स्त्रीलिंग में अंतिम उ, ऊ में ए जोड़कर दीर्घ ऊ का हस्व हो जाता है। जैसे : वस्तु - वस्तुएँ, बहु - बहुएँ।
कुछ शब्दों में गण, जन आदि शब्द लगाकर बहुवचन बनाया जाता है। जैसे : नेता - नेतागण, सुधी - सुधिजन।


नोट - कुछ शब्द दोनों वचनों में एक जैसे रहते हैं। जैसे - क्षमा, जल, प्रेम, गिरि, पिता, चाचा, मित्र, फल, बाजार, फूल, दादा, राजा, विद्यार्थी आदि।

कुछ एकवचन से बहुवचन शब्द इस प्रकार -

  1. बहन - बहनें।
  2. सड़क - सड़के।
  3. गाय - गायें।
  4. बात - बातें।
  5. कौआ - कौए।
  6. गधा - गधे।
  7. केला - केले।
  8. बेटा - बेटे।
  9. कन्या - कन्याएँ।
  10. अध्यापिका - अध्यापिकाएँ।
  11. कला - कलाएँ।
  12. कविता - कविताएँ।
  13. लता - लताएँ।
  14. बुद्धि - बुद्धियाँ।
  15. गति - गतियाँ।
  16. कली - कलियाँ।
  17. नीति - नीतियाँ।
  18. कॉपी - कॉपियाँ।
  19. लड़की - लड़कियाँ।
  20. थाली - थालियाँ।
  21. नारी - नारियाँ।
  22. चिड़िया - चिड़ियाँ।
  23. खटिया - खटियाँ।
  24. बुढ़िया - बुढियाँ।
  25. गैया - गैयाँ।
  26. गौ - गौएँ।
  27. बहू - बहूएँ।
  28. वधू - वधुएँ।
  29. वस्तु - वस्तुएँ।
  30. धातु - धातुएँ।
  31. अध्यापक - अध्यापकवृन्द।
  32. मित्र - मित्रवर्ग।
  33. विद्यार्थी - विद्यार्थीगण।
  34. सेना - सेनादल।
  35. गुरु - गुरुजन।
  36. श्रोता - श्रोताजन।


आपको ये जानकारी किसी पुस्तक से पढ़ के दी गयी है। अतः गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूँ किसी भी विवाद की स्थिति में मुझे सम्पर्क करके पहले बताएं।
धन्यवाद! 

Saturday, February 2, 2019

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हेल्लो दोस्तो आपको फिर से स्वागत है,आप इस ब्लॉग के रेगुलर पड़ने वाले है तो आपको पता होगा कि अभी हिंदी ग्रामर मै रस, दोहा और अलंकार की जानकारी दे दी गई है आज हम छंद के बारे में जानेंगे।


1.छंद का अर्थ

संस्कृत में सामान्यतः लय को बताने के लिये छन्द शब्द का प्रयोग किया जाता है। विशिष्ट गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित, नियमों को छ्न्द कहते हैं।





 जिनसे काव्य में लय और मधुरता आती है। छोटी-बड़ी ध्वनियां, लघु-गुरु उच्चारणों के क्रमों में, मात्रा बताती रहती हैं।जब किसी काव्य रचना में एक साथ सामंजस्य प्राप्त करती हैं, तो उसे एक शास्त्रीय नाम दिया जाता है, और लघु-गुरु मात्राओं के अनुसार वर्णों की यह व्यवस्था छन्द कहलाता है।


छंद के प्रकार और अंग कितने होते है चांद क्या है हिंदी व्याकरण

2.छंद के अंग हैं -

उत्तर_छंद के 5 अंग होते है।

  • गति - पद्य (कविता) पाठ में जो बहाव होता है उसे गति कहते हैं।
  • यति - पद्य पाठ करते समय गति को तोड़कर जो विश्राम ( रुकावट) हते हैं।
  • तुक - समान उच्चारण वाले शब्दों के प्रयोग को तुक कहा जाता है। पद्य प्रायः तुकान्त होते हैं।
  • मात्रा - वर्ण के उच्चारण में जो समय लगता है, उसे मात्रा कहते हैं। मात्रा २ प्रकार की होती है लघु और गुरु ह्रस्व (छोटी मात्रा) उच्चारण वाले वर्णों की मात्रा लघु होती है। तथा दीर्घ उच्चारण वाले वर्णों की मात्रा गुरु होती है। लघु मात्रा का मान 1 होता है और उसे (।) चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। इसी प्रकार गुरु मात्रा का मान मान 2 होता है और उसे (ऽ)चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।
  • गण -इसमे मात्राओं और वर्णों की संख्या क्रम की सुविधा के लिये तीन वर्णों के समूह को एक गण मान लिया जाता है। 

गणों की संख्या 8 है - यगण(ऽऽ), मगण (ऽऽऽ), तगण (ऽऽ।), रगण (ऽ।ऽ), जगण (।ऽ।), भगण (ऽ।।), नगण (।।।) और सगण (।।ऽ) आदि।

3.छंद के प्रकार

उत्तर_छंद के 4 प्रकार होते है।

  • मात्रिक छंद ː जिन छंदों में मात्राओं की संख्या निश्चित होती है उन्हें मात्रिक छंद कहा जाता है।
 जैसे - दोहा, रोला, सोरठा, चौपाई


  • वर्णिक छंद ː वर्णों की गणना पर आधारित छंद वर्णिक छंद कहलाते हैं। जैसे - घनाक्षरी, दण्डक, मंदाक्रांता




  • वर्णवृत ː सम छंद को वृत कहते हैं। इसमें चारों चरण समान होते हैं और प्रत्येक चरण में आने वाले लघु तथा गुरु की मात्राओं का क्रम निश्चित रहता है। जैसे - द्रुतविलंबित, मालिनी।
  • मुक्त छंदː भक्तिकाल तक मुक्त छंद का अस्तित्व नहीं था, लेकिन यह आधुनिक युग की देन है। इसके प्रणेता सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' माने जाते हैं। मुक्त छंद नियमबद्ध नहीं होते, केवल स्वछंद गति और भावपूर्ण यति ही मुक्त छंद की विशेषता हैं।

4.काव्य में छंद के महत्व

  • छंद से हृदय को सौंदर्य का बोध होता है।
  • छंद मानवीय भावनाओं को दर्शाता करते हैं।
  • छंद में स्थायित्व की भावना होता है।
  • छंद सरल होने के कारण मन को भाते हैं।
  • छंद के निश्चित आधार होने के कारण वे सुगमता पूर्वक याद हो जाता हैं।

5.छंद के इतिहास

प्राचीन काल के संस्कृत ग्रंथो में कई प्रकार के छन्द मिलते हैं, जो वैदिक काल के जितने भी प्राचीन वेेद हैं। वे सभी सूक्त छन्दबद्ध हैं। पिंगल द्वारा रचित छन्दशास्त्र इस विषय का मूल ग्रन्थ है। छन्द पर चर्चा सर्वप्रथम ऋग्वेद में हुई है।

अगर अहिन्दी साहित्य के बारे में और जानकारी चहिते तो हिंदी साहित्य एक शब्द में उत्तर दीजिए इसे भी पद सकते है 

Wednesday, January 30, 2019

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नमस्कार दोस्तो आज मै हिंदी साहित्य से संबंधी जानकारी लिख रहा हूं उम्मीद है आपको पसंद आयेगा। इसके अलावा और भी हिंदी grammar में रास,  छंद  और अलंकार के बारे में पहले से मेरे ब्लॉग पर आर्टिकल है अप्प उन्हें भी देख सकते है 

ek shabd me uttar

प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।

कबीर की भाषा को किस नाम से पुकारा जाता है।
उत्तर  सधुक्कड़ी

किस कवि को पीड़ा का कवि कहा जाता है।
उत्तर मालिक मुहम्मद जायसी

विद्यापति के आश्रयदाता राजा  क्या नाम था।
उत्तर राजा शिवसिह।

हिंदी साहित्य। के मध्य काल है।
उत्तर संवत 1375 1900।

रीतिकाल यह नाम किसके द्वारा प्रदत्त है।
उत्तर आचार्य रामचंद्र शुक्ल।

रहीम का पूरा नाम क्या है।
उत्तर अब्दुर्रहीम खानखाना।

जायसी किस विचारधारा से प्रभावित थे।
उत्तर सूफी मत ।

सूरदास ने किस भाषा में रचना की।
उत्तर ब्रजभाषा

किस कवि को लोकनाय कहा जाता हैं ।
उत्तर कबीर।

घनानंद किस धारा के कवि थे।
उत्तर स्वछंद धारा या रीतिकालीन मुक्त।

कबीर की रचनाओं के संग्रह का क्या न है
उत्तर बीजक।

कबीर ने अपना शरीर त्याग कहा किया था।
उत्तर मगहर।

जायसी की प्रमुख भाषा कौन सी है।
उत्तर अवधी भाषा।

जायसी द्वारा लखित महाकव्य  क्या नाम है।
उत्तर पद्मावत


सूरदास का प्रतिनिधि ग्रंथ कौन सा है।
उत्तर सूरसागर।

किर्टिलता किसकी रचना है।
उत्तर विद्यापति ।

साहित्य लहरी के रचयिता का नाम बताइए।
उत्तर सूरदास।

हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग किसीना जाता है।
उत्तर भक्तिकाल।

ज्ञानमार्गी शाखा के प्रमुख कवि कौन है।
उत्तर संत कबीरदास।

तुलसी दास किस शाखा के कवि है
उत्तर रामभक्ति शाखा।

किस कवि ने कव्यरचना का प्रयोग स्वांता: सुखय माना है।
उत्तर तुलसीदास।


Monday, January 28, 2019

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 हेलो दोस्तों यह जनरल हिंदी का दूसरा पाठ है इसमें हम रस के बारे में जानेगे रास क्या होता है और रस कितने प्रकार के होते है सामान्य भाषा  में कहे तो रस, काव्य के पढ़ने  अथवा सुनने  एवं देखने से जो अलौकिक आनन्द मिलता  है, वही  रस कहलाता है।

रस की परिभाषा -श्रव्य काव्य के पठन अथवा श्रवण एवं दृश्य काव्य के दर्शन तथा श्रवण में जो अलौकिक  या संसार से परे आनन्द प्राप्त होता है, वही काव्य में रस (आनन्द) कहलाता है। रस से जिस भाव की अनुभूति (अनुभव) होती है वह रस का स्थायी  (तुरन्त ना मिटने वाला )भाव होता है।



रस का शाब्दिक अर्थ क्या है ?

रस का शाब्दिक अर्थ है - निचोड़ (सार)। काव्य में जो आनन्द आता है वह ही काव्य या कविता का रस है। काव्य में आने वाला आनन्द अर्थात् रस लौकिक या सांसारिक न होकर अलौकिक सँसार से परे होता है। रस काव्य की आत्मा है।

प्र. रस के कितने अंग होते है?

उत्तर. रस के चार अवयव या अंग होते हैं :-




  1. विभाव
  2. अनुभाव
  3. संचारी भाव
  4. स्थायीभाव


इसे भी पढ़े दोहा अर्थ सहित
Doha kya hai, Doha arth sahit

1. विभाव

जब कोई व्यक्ति अन्य व्यक्ति के ह्रदय के भावों को जगाता हैं उन्हें विभाव कहते हैं। इनके कारण से रस प्रकट होता है यह कारण निमित्त कहलाते हैं। विशेष रूप से भावों को प्रकट करने वालों को विभाव रस कहते हैं। इन्हें कारण रूप भी कहते हैं।

2. अनुभाव-

वाणी और अंगों के अभिनय द्वारा जिनसे किसी अर्थ प्रकट होता है उन्हें अनुभाव कहते हैं। अनुभवों की कोई संख्या निश्चित नहीं होती है। 

जो आठ अनुभाव सरल और सात्विक के रूप में आते हैं उन्हें सात्विक भाव कहते हैं। ये अनायास सहज रूप से प्रकट होते हैं |




 इनकी संख्या आठ होती है।

  1. स्तंभ
  2. स्वेद
  3. रोमांच
  4. स्वर – भंग
  5. कम्प
  6. विवर्णता
  7. अश्रु
  8. प्रलय

3. संचारी भाव-

जो स्थानीय भावों के साथ संचरण करते हैं वे संचारी भाव कहलाते हैं। इससे स्थिति भाव की पुष्टि (सत्यापित) होती है। एक संचारी किसी स्थायी भाव के साथ नहीं रहता है इसलिए इसे व्यभिचारी भाव भी कहते हैं। इनकी संख्या 33 मानी जाती है

4. स्थाई भाव 

किसी मनुष्य के हृदय में कोई भी भाव स्थाई रूप से निवास करती है उसे स्थाई भाव कहते है यह चाद भर के लिए न रहकर स्थाई रूप से रहता है।

रस के प्रकार स्थाई भाव ?

रस के 10 प्रकार होते है।

1.शृंगार रस - रती( प्रिम)

2.हास्य रस - हास 

3.शान्त रस - निर्वेद

4.करुण रस - शोक

5.रौद्र रस - क्रोध

6.वीर रस - उत्साह

7.अद्भुत रस - आश्चर्य

8.वीभत्स रस - घृणा

9.भयानक रस - भय

10. वात्सल्य रस - स्नेह





रस के बारे में अधिक जानकारी के लिए हम आगे इसके बारे में और पोस्ट लिखेंगे ।

Sunday, January 27, 2019

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आज मैं आप लोगो को हिंदी जनरल का फोर्थ पार्ट में दोहा के बारे में बताने वाला हूं तो इस ब्लॉग को पूरा पढ़िए अगर आप 10 वी या 12वी में  है तो आप के लिए यह ब्लॉग बहुत फायदे का हो सकता है।

Doha ka arth arth paribhasa hindi me

दोहे का अर्थ एवं परिभाषा

दोहा एक मासिक छंद है जिसके प्रथम और तृतीय चरण में 13,13 मात्राएं होती है।और दूसरे और अंतिम चरण में 11,11 मात्राएं होती है।इसमें 24 ,24 मात्रा की दो पंक्तियां होती है।

दोहा को कैसे पहचाने?

दोहा में 24,24 मात्रा की दो पंक्ति होती है तथा अंतिम में एक गुरु और (s की तरह ) एक लघु (l की तरह) होता है।

इसे भी पढ़े - रस हिन्दी व्याकरण(RASH HINDI GRAMMAR)


दोहा अर्थ सहित

बुरा जो देखन में चला


अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला। जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।

पोथी पड़ी पड़ी जग मुआ




अर्थ: इस दोहा में बताया गया है की बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ ले। वह लोग मृत्यु के द्वार पहुँच जाते है, पर सभी विद्वान नही बन पते। कबीर कहते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर हको अच्छी तरह से समझ जाये तो उससे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं होता, अर्थात प्यार को  वास्तविक रूप में पहचान ले वही सच्चा ज्ञानी होगा।

साईं इतना दीजिए

अर्थ - इस दोहे में कबीर दास जी भगवान से विनती करते हुए कहते हैं.  "हे ईश्वर! मेरे ऊपर इतनी कृपा बनाए रखना कि मेरे परिवार का भरण-पोषण अच्छे से होता रहे. मैं ज्यादा धन की इच्छा नहीं रखता. बस इतनी नजर रखना कि मेरा परिवार और मैं भूखा ना सोए और मेरे दरवाजे पर आने वाला कोई भी जीव भूखा ना जाए."




अर्थ: मनुष्य को समझाते हुए कबीर जी कहते हैं कि मन की इच्छाएं छोड़ दो, उन्हें तुम अपने बाल बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई नहीं खाएगा।



अर्थ: कबीर जी कहते है, की सज्जन की जाती नहीं पूछनी चाहिए उसके ज्ञान को समझना चाहिए। तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का।






अर्थ: पतिव्रता स्त्री यदि तन से मैली भी हो भी अच्छी है. चाहे उसके गले में केवल कांच के मोती की माला ही क्यों न हो. फिर भी वह अपनी सब सखियों के बीच सूर्य के तेज के समान चमकती है !



अर्थ: प्रेम खेत में नहीं उपजता प्रेम बाज़ार में नहीं बिकता चाहे कोई राजा हो या साधारण प्रजा – यदि प्यार पाना चाहते हैं तो वह आत्म बलिदान से ही मिलेगा. त्याग और बलिदान के बिना प्रेम को नहीं पाया जा सकता. प्रेम गहन- सघन भावना है – खरीदी बेचे जाने वाली वस्तु नहीं !

अर्थ: दाह क्रिया में हड्डियां जलती हैं उन्हें जलाने वाली लकड़ी जलती है उनमें आग लगाने वाला भी एक दिन जल जाता है. समय आने पर उस दृश्य को देखने वाला दर्शक भी जल जाता है. जब सब का अंत यही हो तो पनी पुकार किसको दू? किससे  गुहार करूं – विनती या कोई आग्रह करूं? सभी तो एक नियति से बंधे हैं ! सभी का अंत एक है !