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Saturday, September 21, 2019

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Environment (पर्यावरण) के बारे में आप सभी तो जानते ही होंगे लेकिन मैं आज पर्यावरण पर निबंध फिर से लिख रहा हूं क्योंकि आज पर्यावरण के प्रति जागरूकता बहुत ही आवश्यक है।


Paryavaran par nibandh वाले इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा पर्यावरण क्या है?, पर्यावरण किस से मिलकर बना है पर्यावरण के कौन-कौन से भाग हैं और पर्यावरण से हमें किस प्रकार लाभ की प्राप्ति होती है तथा पर्यावरण से हमें किस प्रकार से हानि है और पर्यावरण का सारांश मैंने इस पोस्ट में आपके समक्ष रखने का प्रयास किया है।

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पर्यावरण क्या है ?

यदि हम पर्यावरण शब्द का संधि विच्छेद करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है परी और आवरण से यहां पर परी का अर्थ हमारे आस पास के वातावरण से है और आवरण का अर्थ हमें घेरे हुए चारों ओर की प्राकृतिक वस्तुओं जीव जंतुओं पेड़ पौधों के द्वारा बने आवरण से है।
इस प्रकार पर्यावरण हमारे आस पास के वातावरण को ही कहा जाता है।

पर्यावरण  किन-किन चीजों से मिलकर बना है ?

जैसे कि मैंने आपको बताया कि पर्यावरण परी और आवरण अर्थात हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें उपस्थित जीव जंतु से मिलकर बना है। पर्यावरण में मनुष्य के अलावा और भी बहुत सारे जीव जंतु पाए जाते हैं जो कि अपना जीवन यापन इस पृथ्वी पर करते हैं जिनका अपना इस पृथ्वी पर अलग अलग ही प्रभाव है।
पर्यावरण में पाए जाने वाले जीव जंतु और पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण का निर्माण होता है। पर्यावरण में कई प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं और इन जंतुओं के द्वारा कभी-कभी कई ऐसे चीजों का निर्माण होता है जो कि पर्यावरण को एक नई दिशा की ओर ले जाता है और पर्यावरण में अमूल चूल परिवर्तन करता है।
इस प्रकार पर्यावरण के मिलकर बनने के बात करें तो यह दोनों प्रकार के सजीव और निर्जीव से मिलकर बना हुआ है। जिनके बिना यह आपस में अधूरे हैं सजीव के बिना निर्जीव अधूरा है और निर्जीव की बिना सजीव अधूरा है।

पर्यावरण  के प्रकार

पर्यावरण के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार का होता है एक मानव निर्मित पर्यावरण और दूसरा प्रकृति या पर्यावरण द्वारा निर्मित पर्यावरण।
मानव निर्मित पर्यावरण इस प्रकार के पर्यावरण होते हैं जो कि मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए गए वातावरण से निर्मित होते हैं जैसे कि तालाब में मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाने वाला वातावरण मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आता है और उसी क्रम में कोसा उद्योग के लिए तैयार किए गए वन आदि मानव निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

अब प्राकृतिक पर्यावरण की बात करें तो प्राकृतिक पर्यावरण में प्रकृति द्वारा चुने गए ही जीव और निर्जीव जीवित रह पाते हैं। जैसे कि कई हजारों साल पहले डायनासोर पाए जाते थे लेकिन अब नहीं पाए जाते हैं क्योंकि प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इनका विनाश हो गया और यहां लुप्त हो गए। प्राकृतिक पर्यावरण पर्यावरण के हित को देखते हुए इसका निर्माण प्रकृति खुद करती है। जैसे कि हम खाद्य श्रृंखला की बात करें तो यहां प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण के अंतर्गत ही आएगा क्योंकि प्रकृति कभी भी पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगड़ने देती है और वहां पर्यावरण के बिगड़ने के कगार पर स्वयं परिवर्तित होकर पर्यावरण के अनुकूल प्रकृति स्वयं निर्मित करती है। इस प्रकार इसे हम प्राकृतिक पर्यावरण कर सकते हैं।

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पर्यावरण के लाभ

पर्यावरण से होने वाले लाभ की बात करें तो यहां असीमित है और अविश्वसनीय है क्योंकि पर्यावरण ही हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।
पर्यावरण के कारण हमें खाद्य वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं।
पर्यावरण से हम बहुत से उपयोगी वस्तुएं अपने दैनिक जीवन के लिए प्राप्त कर सकते हैं।
पर्यावरण से कई मूल्यवान चीजें हमें प्राप्त होते हैं।
पर्यावरण से ही हमें विभिन्न प्रकार के इंधन  की प्राप्ति होती है।
हीरा जैसे मूल्यवान वस्तु हमें पर्यावरण में पाए जाने वाले मृदा से प्राप्त होती हैं।
जीवन रूपी जल पर्यावरण के कारण ही हमें सुलभ हो पाया है।

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पर्यावरण या environment से होने वाली हानियां

पर्यावरण से होने वाली हानियों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और इसके अलावा मनुष्य द्वारा निर्मित प्रदूषण के कारण भी प्राकृतिक आपदा व प्रकृति द्वारा होने वाली हानियां कर सकते हैं।
प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और सुनामी प्रकृति में परिवर्तन के कारण आते हैं।
अम्लीय वर्षा पर्यावरण में परिवर्तन के कारण देखने को मिलते हैं।
भूकंप का आना प्राकृतिक आपदा है जो कि पर्यावरण के कारण उत्पन्न होती है।
अत्यधिक मात्रा में गर्मी का बढ़ना पर्यावरण से होने वाली बहुत बड़ी समस्या है या हानि है।
कई मामलों में पर्यावरण में जहां पर जीवन देने योग्य है वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर यह मृत्यु का कारण भी बनती है।

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Conclusion (उपसंहार)
पर्यावरण पर निबंध (essay writing of environment) लिखना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि इसका क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है इस प्रकार पर्यावरण के सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त रूप से वर्णन करना ही पर्यावरण पर निबंध लिखने जैसा है। क्योंकि बहुत बड़ाा हो जाएगा।

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Saturday, September 14, 2019

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समास हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है यहाँ बारहवीं और दसवीं के परीक्षा में अवस्य पूछा जाता है इसलिए हम आपके के लिए आसान भाषा  समझने का प्रयास करेंगे।

 समास किसे कहते है (परिभाषा )

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।
जैसे - नौ ग्रहों का समूह - नवग्रह।

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◆ समास विग्रह - सामासिक शब्दों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है।
जैसे - राजपुत्र - राजा का पुत्र।

◆ सामासिक शब्द - समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं। समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं।
जैसे - राजपुत्र।

◆ पूर्वपद और उत्तरपद - समास में दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं।
जैसे - गंगाजल। इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद है।

हिंदी व्याकरण - रस, काल, अलंकार, दोहावचन   

 समास के भेद

1. अव्ययी भाव - जिसका पहला पद अव्यय और दूसरा पद प्रायः संज्ञा हो तथा समस्तपद भी अव्यय हो, उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं,
जैसे - विधि के अनुसार - यथाविधि।
          जन्म से लेकर - अजन्म।
          आंखों के सामने - प्रत्यक्ष।
अन्य उदाहरण - यथाशक्ति, प्रतिदिन, समक्ष, सम्मुख, व्यर्थ, निःसन्देह, अकारण, अभूतपूर्व, निडर, अनजाने, दरअसल, बेकार, बेहद, बेकसूर।

एक साथ ही किसी शब्द का दो बार प्रयोग करने से भी अव्ययी भाव समास होता है।
जैसे - दिनों-दिन, धीरे-धीरे, पहले-पहल आदि।

2. तत्पुरुष - इस समास का पहला पद संज्ञा होता है। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो जाता है।
जैसे - चितकबरा, तटस्थ, जलद, गोबरगणेश।

  1. कर्म तत्पुरुष -
            शरण को आया - शरणागत।
            मरण को आसन्न - मरणासन्न।

  2. करण तत्पुरुष -
             सुर द्वारा कृत - सूरकृत।
              हस्त से लिखित - हस्तलिखीत।
      अन्य उदाहरण - मुंहमांगा, दस्तकारी, कष्टसाध्य।

  3.  सम्प्रदान तत्पुरुष -
               विद्या के लिए आलय - विद्यालय।
               हाँथ के लिए कड़ी - हथकड़ी।
        अन्य उदाहरण - देवबलि, राहखर्च।

  4. अपादान तत्पुरुष -
               धर्म से विमुख - धर्मविमुख।
                रोग से मुक्त - रोगमुक्त।
         अन्य उदाहरण - बन्धनमुक्त, पदच्युत, लोकोत्तर, कामचोर, देशनिकाला, जातिभ्रश्ट।

  5. सम्बन्ध तत्पुरुष -
                भारत का वासी - भारतवासी।
                राजा का दूत - राजदूत।
          अन्य उदाहरण - अमचूर, गजराज, वनमानुष, रेलगाड़ी, नरेश, घुड़सवार, कन्यादान।

6. अधिकरण तत्पुरुष -
                आनंद में मग्न - आनंदमग्न।
                 आप पर बीती - आपबीती।
                 लोक में प्रिय - लोकप्रिय।
                आत्म पर विश्वास - आत्मविश्वास।
          अन्य उदाहरण - कार्यकुशल, ग्रामवास।


3. कर्मधारय समास - जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पड़ विशेष्य होता है। उपमेय और उपमान से मिलकर भी कर्मधारय बनता है।

  जैसे - नील + अम्बर - नीलाम्बर (विशेषण+विशेष्य)
           कमल के समान नयन - कमलनयन (उपमान+उपमेय)
  अन्य उदाहरण - महाराज, परमानन्द, पुरुषोत्तम, भलमानस, पुच्छलतारा, कालापानी, चरणकमल।
'प्र' आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास भी इसके अंतर्गत आता है।
जैसे - उपवेन्द्र, प्राचार्य, प्रगति, प्रसंग, प्रमत्त।

4. द्विगु - यह समास समूह का धोत्तक होता है। इस समास में पहला पद संख्यावाची होता है।
    जैसे - दो गायों का समाहार - द्विगु।
            आठ अध्यायों का समाहार - अष्टाध्यायी।
            पांच तन्त्रों का समाहार - पंचतंत्र।
  अन्य उदाहरण - त्रिफला, पंचवटी, त्रिभुवन, चतुर्वण, चहारदीवारी, तिमाही, सतसई, पसेरी, दोपहर, चौराहा।

5. द्वन्द्व - इस समास में दोनों पद समान होते हैं, और दोनों के बीच ' और ' छिपा होता है।
    जैसे - माता और पिता - माता-पिता।
             पाप और पूण्य - पाप-पूण्य।
   अन्य उदाहरण - जीवन-मरण, भला-बुरा, ऊँच-नीच, पन्द्रह-बीस, दस-बारह, आमने-सामने, भला-चंगा।

6. बहुब्रीहि - इस समास में विद्यमान दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद प्रधान होता है। अर्थात समस्त पद किसी अन्य के रूप में प्रयुक्त होता है।
     जैसे - पीत है अम्बर जिसके (विष्णु) - पीताम्बर।
              चार है मुख जिसके (ब्रम्हा) - चतुर्मुख।
अन्य उदाहरण - दशानन (रावण), मुरलीधर (कृष्ण), नीलकण्ठ (शिव), त्रिलोचन (शिव), पंचामृत।

● बहुब्रीहि समास की यह विशेषता है की उसके विग्रह में 'जिसने-वह', 'जिसे-वह', 'जो-वह', आदि शब्दों का प्रयोग होता है।
  जैसे - निर्मल - निर्गत है मल जिससे।
           चन्द्रमौलि - चंद्र है मौली पर जिसके
' सह ' (साथ) के अर्थ में ' स ' शब्द के साथ होने वाले समास को भी बहुब्रीहि समास कहते हैं।
  जैसे - सार्थक - अर्थ के साथ है जो।


Wednesday, September 4, 2019

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पत्र एक प्रकार का संदेश (Massage) है जिसको किसी एक व्यक्ति के द्वारा पेन (Pen) से लिखा जाता है। लेकिन आज कल इसे PC या किसी Typewritter के माध्यम से भी लिखा जा सकता है क्या है पुराने जमाने में कम्प्यूटर ना होने के कारण इसे कागज में हाथ से लिखा जाता था। और पुराने जमाने की बात करें तो राजाओं द्वारा भी यही पत्र लिखे जाते थे मयूर पंख के माध्यम से। जो राजनीतिक या किसी निजी काम से लिखे जाते थे।

पत्र लेखन क्या है

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यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचना (Massage) भेजने का माध्यम है। इसके प्रकार की बात करें तो यह मुख्य रूप से दो प्रकार के हो सकते हैं एक औपचारिक पत्र और दूसरा अनौपचारिक पत्र। पत्र लेकिन न केवल एक सूचना भेजने का माध्यम है बल्कि यह एक कला के रूप में विद्यमान है। पुराने जमाने में कई ऐसे लेखक हुए जिन्होंने पत्र के माध्यम से अपने बात कही है जैसे सुभाषचन्द्र को लिखे पत्र में। और गांधी को लिखे पत्र में ऐसे ही कला देखने को मिलते हैं जिससे एक सहज व्यक्तित्व झलकता है।

मानव सभ्यता में पत्र की भूमिका 

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो आज भी भारत, मिस्र, चीन में और सुमेर के समय से रोम, ग्रीस के माध्यम से पत्र आज भी मौजूद हैं। पत्र का उपयोग सत्रहवीं और अठ्ठारहवीं शताब्दी में आत्म शिक्षा के लिए उपयोग किया जाता था। पत्र एक प्रकार से विचारधारा को फैलाने का माध्यम है, इसमें आलोचना पढ़ने, आत्म-अभिव्यंजक लेखन और समान विचारधार के लोगों तक विचार का आदान-प्रदान करने का माध्यम था। कुछ लोग इसे सन्देश भेजने के माध्यम और संचार के तरीके तथा प्रतिक्रिया प्राप्त करने का माध्यम बताते हैं।

 पत्र के माध्यम से ही बाइबल के कई किताबों को बनाया गया है। पत्र कई इतिहासकारों के लिए प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं और यह अभिलेखागार में रखे पत्र जो की व्यतिगत हैं और राजनीतिक हैं व्यवसायिक कारण से इतिहास के स्रोत बने हुए हैं। एक निश्चित समय तक लेखन के लिये अकक्षरों को कला के रूप में देखा जाता था। एक शैली के रूप में पत्र लेखन को देखा जाता था। उदाहरण के तौर पर आज भी बीजान्टिन एपिस्टोलोग्राफी को लिया जाता है।

हिंदी व्याकरण निबंध - पर्यावरण, प्रदूषण, जल संरक्षण, महात्मा गाँधी 

अगर पराचीन इतिहास की बात करें तो पत्र के लिए विभिन्न ताम्र पत्रों और शिलालेखों का उपयोग किया जाता था। तथा इसके अलाव धातु, और मोम, कांच, लकड़ी, मिट्टी के बर्तन, जानवरों के खाल का भी उपयोग किया जाता था। इसके अलावा पपीरस सहित विभिन्न वस्तुओं या सामग्रियों पर भी पत्र लिखे जाते थे। Acotius ने अपने पत्र के लिए साइपिप्प के लिए एक सेब का इस्तेमाल किया था। यह हमें  ओविड से पता चलता है। 

आज के समय में बहुत सारी विविधताएं आ गयी हैं संचार प्रणाली में और आज पत्र लेखन बहुत कम हो गया है खासकर डाक या पोस्टआफिस से। उदाहरण के रूप में देखें तो आजकल के संचार माध्यम टेलीफोन, मोबाइल ने विधुत सन्देश ने संचार में लगने वाले समय को बहुत ही कम कर दिया है। क्या है अब धीरे-धीरे बदलाव होने के कारण निकटतम टेलीग्राफ कार्यालय में कम्प्यूटर में लिखे सन्देश को कागज पर लिखित रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। और इसे प्राप्तकर्ता को दे दिया जाता है। अब सन्देश माध्यम में अगला परिवर्तन टेलिक्स के रूप में था जिसने सन्देष भेजने या वितरण करने के आवश्य्कता को ही खत्म कर दिया। इसके बाद फैक्स मशीन का दौर आया जिसमें टेलीफोन नेटवर्क का उपयोग करके भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के मध्य एक माध्यम का काम किया जिसमें प्राप्तकर्ता के द्वारा उसी प्रकार से हूबहू प्रिंटआउट प्राप्त हो जाता था जिसे फैक्स मशीन कहा जाता था। जो की फोटो के समान होता है।

आज विज्ञान ने इतना तरक्की कर लिया है की एक ही समय में कई लोगो को सन्देश भेजा जा सकता है। आज के इस आधुनिक युग ने पत्र को भले ही भुला दिया हो लेकिन उसका स्थान अपने आप में सुरक्षित है। आज के समय में इंटरनेट और Internet से जुड़े विभिन्न साधन जैसे ईमेल के माध्यम से लिखित सन्देश भेजे जा सकते हैं। जो की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं किसी भी प्रकार के Community के द्वारा सन्देश भेजने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। यह केवल अक्षरों या शब्दों के रूप में ही सन्देश नहीं भेजता है बल्कि यह आज वीडियो और ऑडियो तथा चित्रों के रूप में भी सन्देश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजता है।
लेकिन आज पत्र शब्द केवल कागज पर लिखे जाने वाले सन्देश के लिए सुरक्षित है।  

साहित्यिक ऐतिहासिक स्रोत सामग्री के रूप में

पत्र या letter writing hindi इस पोस्ट में साहित्य से इसके स्त्रोत की बात करें तो साहित्य में ऐसे कई साहित्य हैं जिन्हें पत्र से प्रेरित होकर लिखा गया है और इतिहास भी पत्रों (ताम्र पत्र) से और जानकारी प्राप्त करता है इस प्रकार पत्र का जो शिलशिला है वह कई हजारों वर्ष से चला आ रहा है।
पत्र सन्देश भेजने का एक माध्यम ही नहीं है बल्कि इससे कई इतिहासिक घटनाओं की जानकारी भी मिलती है कई सारे इतिहास का पता हमें पत्थरों पर लिखे सन्देशों के माध्यम से मिलते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना

इलेक्ट्रॉनिक मेल के साथ तुलना की जाए तो वह पत्र लेखन से कई प्रकार से भिन्न है और इसमें वह सभी सुविधाएं नहीं हैं जो की आज के इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे गए सन्देश में भेजे जाते हैं। आज के इस युग में सन्देश भेजने का सबसे आसान तरीका है ई मेल और (Massaging app) सन्देश भेजने वाले Applications जो की Mobile के माध्यम से या Computer के माध्यम से भेजे जाते हैं।
इसमें हम चित्र (photo), वीडियो (Video), और भी कई ग्राफिकल सन्देश अच्छे Designe के साथ भेजे जा सकते हैं।
उस समय क्या होता था जब पत्र लिखें जाते थे तो केवल शब्द और वाक्य ही उसमें शामिल होते थे इस प्रकार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं होने कारण चित्र और वीडियो आदि नहीं भेजे जा सकते थे।
चुकी उस समय न ही कोई यन्त्र थे और न ही किसी प्रकार के बिजली से चलने वाले यन्त्र या मशीन थे इस कारण इस प्रकार के ज्यादा सुविधाएं उस समय के लोगों को नहीं मिल पाती थी लोगो को। अब बात की जाए वितरण की तब।

वितरण की प्रक्रिया

वितरण करने के लिए राजा महाराजा के समय एक अलग से पत्र पहुचाने वाला होता था जो की सन्देश या खबर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाता था। तो इस हिसाब से वह समय भी ठीक था क्योकि उस समय बहुत सारे काम करने वाले हमें मिल जाते थे और उस समय इतनी सुविधा ना होना भी एक कारण था की आखिर और कैसे भेजे सन्देश को तो पत्र लेखन ही एक माध्यम था। अपनी बात को दूर किसी के पास भेजने का।
अब क्या होता है अब की जिंदगी या लाइफ बहुत ही ज्यादा फास्ट है लोग एक पल का भी इंतजार नहीं कर सकते है और लोग तुरन्त रिजल्ट चाहते हैं।
पत्र लिखना अभी वर्तमान युग में बहुत ही कम हो गया है और लोग शायद ही पत्र लिखते हैं। क्योकि किसी भी प्रकार के पत्र लिखने का काम आज मोबाइल या कम्प्यूटर के माध्यम से हो जाता है।
आज कल सबसे ज्यादा कम्पनियों के द्वारा सूचनाओं को लोगो तक पत्र के माध्यम से भेजा जाता है और कई बीमा कम्पनियों के द्वारा भी आज कल पत्र के माध्यम से या पोस्ट आफिस से लेटर भेजा जाता है।

पत्रों के प्रकार 

जैसे की मैने आपको पहले ही बताया है की पत्र को दो प्रकारों में बांटा जा सकता है - औपचारिक पत्र और अनौचारिक पत्र

1 . औपचारिक पत्र -

ऐसे पत्र होते हैं जो की सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए भेजा जाता है और जिसमे ज्यादा कुछ उल्लेख नहीं होता है।
उदाहरण के तौर पर आप किसी company के द्वारा उसके Employee को लिखे जाने वाले पत्र को ले सकते हैं।

2 . अनौपचारिक पत्र-

ऐसे पत्र जिसमें किसी भी प्रकार के कम उल्लेख नहीं होते हैं और बहुत ज्यादा निजी जानकारी शेयर की जाती है।  उसे हम अनौपचारीक पत्र कह सकते हैं। यह कोई Personal काम से किसी को लिखा जाता है और बहुत ही गोपनीय तरीके से इसे किसी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाया जाता है। अनौपचारिक पत्र ही किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जानकारी शेयर करने के लिए किया जाता है। इसमें अपने मन की बाते किसी को पत्र के माध्यम से भेजा जाता है।

यह बहुत छोटा या बड़ा हो सकता है यह पत्र लिखने वाले के ऊपर निर्भर करता है। की वह किस प्रकार की जानकारी उस दूसरे आदमी जो पत्र को प्राप्त करने वाला है तक शेयर कर रहा है।


Saturday, August 31, 2019

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निबंध लिखने से पूर्व  उसका रूप रेखा(Outline) लिखा जाता है, इससे पाठक को आसानी होती है की निबंध में क्या क्या सामग्री है। इस पद्धति को अपनाने से जरूर आपको हिंदी में अच्छे नंबर मिलेंगे। 

रूप-रेखा - प्रस्तावना, प्रदूषण क्या है , प्रदूषण के कारण , प्रदूषण के प्रकार , प्रदूषण सुधार के उपाय

प्रस्तावना - विज्ञान के इस युग में हमें कई लाभ मिला है वही हानि भी हुआ है , इसके कारन प्रदूषण की समस्या उत्त्पन्न हो गया है, जिससे की हमारे दैनिक जीवन में कई समस्याएं उत्त्पन्न हुआ है, यदि इस पर विचार नहीं किया गया तो आगे जाकर गंभीर समस्यायों का सामना करना होगा।

हिंदी में प्रदूषण पर निबन्ध

प्रदूषण क्या है  

हवा, पानी और जल पर किसी प्रकार से दुसित होना ही प्रदूषण कहलाता है , जिसका जीवो पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभावपड़ता है।

प्रदूषण के कारण 

इसका मुख्या कारण है कारखानों से निकालने वाले धुएं और दुसित पानी जो हवा और पानी को बहुत प्रभावित करते है , इसके आलावा वहां से निकलने वाले धुएं और और कए कतनासक भी प्रदूषण के कारण है। इसके आलावा पेड़ो को काटने से पर्यावण असंतुलित होता है जसके कारन बाढ़ जैसे प्राकृतिक विपदा आती है।

प्रदूषण के प्रकार 

1. वायु प्रदूषण - यह प्रदूषण ज्यादातर निकलने वाले धुएं से अलावा मोटर गाड़ी से है। वायु प्रदूषण हमारे वातावरण के लिए बहुत खतरनाक होता है ये सभी प्रकार के धुएं में कार्बन डाई आक्साइड होता है जो वातावरण को गर्म करता है जिससे की कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होता है इसे रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है।

2 . जल प्रदूषण - कहा जाता है जल हि जीवन है लेकिन हम जाने अनजाने में जल को गन्दा कर रहे है कारखाना से निकने वाला पड़उसित पानी हमारे नदी नालो को दुसित कर रहे है और और हम नदी में न जाने कितने कचड़े फैक देते है जिससे की कई बैक्टीरिया जल में पनप जाते है और हमारे सरीर पर बीमारी को जन्म है।

3 . ध्वनि प्रदूषण - आज कल कई प्रकार की कारखाने से निकलने वाले ध्वनि से और बड़े शहरो में वहां की अधिकता से ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। जिससे की मानव सरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके उपाय के लिए कारखानों को शहरो से दूर होना चाहिए और वहां का काम उपयोग करना होगा।

दूसरे निबंध लेख - पर्यावरण, पत्रलेखनजल संरक्षणमहात्मा गाँधी 

प्रदूषण सुधार के उपाय 

प्रदूषण को रोकना हमरी जिम्मेदारी है इसे अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे जाकर और खतरनाक होगा अभी हमारे सामने इसके कारन कई परेशानी उत्पन्न हो रहा है हवा बहुत दुषित होने है , कई प्रकार की नयी बीमारी जन्म ले रही है पर्यावण में कई अनपेक्षित परिवर्तन हो रहे है।

हमें जितना हो सके पेड़ लगाना होगा पेड़ ही है जो कार्बन डाइऑक्साइड को काम कर सकता है और ऑक्सीजन को बड़ा सकता है जिसके कारन पयावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को संतुलित किया जा सकता है।  हमें काम से काम डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे की, हानि करक गैस की काम उत्सर्जन होगा। बैटरी से चलने वाले वाहन का उपयोग इसके लिए उत्तम होगा और साईकल का इतेमाल कारन चाहिए। कारखानों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार को इस पर नियंत्रण के लिए उपाय ढूढ़ना होगा। कारखानों में एक पैरामीटर के ऊपर प्रदूषण होता है तो उस फ़ैक्टरी को बाद कारन चाहिए या प्रदूषण काम हो ऐसी कारखानों का परिवर्तन करने का आदेश दे सकती है।

Sunday, May 19, 2019

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हिंदी व्याकरण में वचन महत्वपूर्ण विषय है इससे जानना एक स्टूडेंट को अवश्या जानना चाहिए।  वचन किसे कहते है

वचन की परिभाषा

शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या अर्थात एक या अनेक का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।


हिंदी में केवल दो वचन हैं - एकवचन

1) एकवचन - शब्द के जिस रूप में एक वस्तु या एक पदार्थ का ज्ञान होता है, उसे वचन कहते है, यथा - मैं, गाय, गेंद, मेज आदि।

2) बहुवचन - शब्द के जिस रूप से अधिक वस्तुओं या पदार्थों का ज्ञान होता है, उसे बहुवचन कहते हैं, यथा - हम, गायों, गेंदों, मेजों।


vachan in Hindi vyakaran

एकवचन से बहुवचन बनाने के लिए नियम क्या क्या हैं ?

  1. आकारांत पुलिंग शब्दों के आ को ए कर देते हैं। जैसे : लड़का - लड़कें, घोड़ा-घोड़े, बेटा - बेटे.
  2. अकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में अ को एँ  कर देते हैं। जैसे : बात - बातें, आँख - आंखें, पुस्तक - पुस्तकें।
  3. अंत वाले स्त्रीलिंग शब्दों में या को याँ कर देते हैं। जैसे : चूड़ी - चूडियाँ, कुर्सी - कुर्सियाँ।
  4. आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों के आगे एँ लगा देते हैं।
  5. इकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में या लगा देते हैं। जैसे : जाति - जातियाँ, नदी - नदियाँ, लड़की - लड़कियाँ।


हिंदी व्याकरणरसकालअलंकारदोहावचन 

स्त्रीलिंग में अंतिम उ, ऊ में ए जोड़कर दीर्घ ऊ का हस्व हो जाता है। जैसे : वस्तु - वस्तुएँ, बहु - बहुएँ।
कुछ शब्दों में गण, जन आदि शब्द लगाकर बहुवचन बनाया जाता है। जैसे : नेता - नेतागण, सुधी - सुधिजन।


नोट - कुछ शब्द दोनों वचनों में एक जैसे रहते हैं। जैसे - क्षमा, जल, प्रेम, गिरि, पिता, चाचा, मित्र, फल, बाजार, फूल, दादा, राजा, विद्यार्थी आदि।

कुछ एकवचन से बहुवचन शब्द इस प्रकार -

  1. बहन - बहनें।
  2. सड़क - सड़के।
  3. गाय - गायें।
  4. बात - बातें।
  5. कौआ - कौए।
  6. गधा - गधे।
  7. केला - केले।
  8. बेटा - बेटे।
  9. कन्या - कन्याएँ।
  10. अध्यापिका - अध्यापिकाएँ।
  11. कला - कलाएँ।
  12. कविता - कविताएँ।
  13. लता - लताएँ।
  14. बुद्धि - बुद्धियाँ।
  15. गति - गतियाँ।
  16. कली - कलियाँ।
  17. नीति - नीतियाँ।
  18. कॉपी - कॉपियाँ।
  19. लड़की - लड़कियाँ।
  20. थाली - थालियाँ।
  21. नारी - नारियाँ।
  22. चिड़िया - चिड़ियाँ।
  23. खटिया - खटियाँ।
  24. बुढ़िया - बुढियाँ।
  25. गैया - गैयाँ।
  26. गौ - गौएँ।
  27. बहू - बहूएँ।
  28. वधू - वधुएँ।
  29. वस्तु - वस्तुएँ।
  30. धातु - धातुएँ।
  31. अध्यापक - अध्यापकवृन्द।
  32. मित्र - मित्रवर्ग।
  33. विद्यार्थी - विद्यार्थीगण।
  34. सेना - सेनादल।
  35. गुरु - गुरुजन।
  36. श्रोता - श्रोताजन।


आपको ये जानकारी किसी पुस्तक से पढ़ के दी गयी है। अतः गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूँ किसी भी विवाद की स्थिति में मुझे सम्पर्क करके पहले बताएं।
धन्यवाद! 

Thursday, February 7, 2019

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काल के बारे में आपने तो सुना ही होगा नहीं सुना है तो यह टॉपिक आपके लिए ही है।इसमें काल या इंग्लिश में इसे टेंस के नाम से जानते है।  काल (tens) क्या होता है। काल सामान्यतः समय को ही कहा जता है।

काल के कितने प्रकार होते है- तीन प्रकार के होते है। 

1. भूतकाल 

इसे इंग्लिश में past tens कहा जाता है - भूत काल मतलब जो बीत गया है उसे भूत काल कहा जाता है। जैसे कि बीत हुआ कल,
Example मै स्कुल जाता था। यह वाक्य भूत काल का है क्योंकि यह बीता हुआ कल है। और बीता हुआ कल भूत काल कहलाता है। इसमें वाक्य के लास्ट में था, थे थी आदि शब्द आते है।


Tense in hindi Hindi grammar

हिंदी व्याकरण - रसकालअलंकारदोहावचन

अन्य उदाहरण -

मै दिल्ली गया था।
रम काल क्रिकेट खेल रहा था।
हम स्कूल जाते थे।
रविवार को हम घूमने गए थे।
मंदिर काल बंद था।


2. वर्तमान काल 

इसमें जो समय अभी  चल रहा है वह वर्तमान कल में आता है। Example :- मै मन्दिर जाता  हूं।
जो कार्य हो रहा है वह वर्तमान कल में आता है। इसमें सामान्य रूप से रहा है, है, हूं।आदि शब्द वाक्य के अंत में आते है।

हम स्कूल जा रहे है।
रम मंदिर जा रहा है।
मै खाना खा रहा हूं।
दीदी कॉलेज जाती है।


3. भविष्य काल  

इसमें आने वाला काल आता है जो होने वाला है।उसे भविष्य काल कहा जता है। भविष्य काल में हमेशा गा,गी गॆ आदि शब्दों। कप्रयोड होता है। जैसे कि मै काल रायपुर जाऊंगा। यह भविष्य कलबका उदाहरण है इसमें कोई व्यक्ति बोल रहा है कि वह काल रायपुर जाएगा।

निबंध लेख - पर्यावरणपत्रलेखनजल संरक्षणमहात्मा गाँधी 


Other example :-

काल मै होमवर्क करूंगा।
राजू लांच में पूजा खाएगा।
हम काल मेला देखने जाएंगे।
काल क्रिकेट मैच होगा।
स्कूल काल बंद रहेगा।

आदि शब्द भविष्य काल का उदाहरण आई होप की आपको मेरा ब्लॉग पसंद आया होगा। और जानकारी के लिए category को क्लिक करे आपको हिंदी व्याकरण के और टॉपिक मिलेंगे उसे भी पढ़िए थैंक यू।



Tuesday, February 5, 2019

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हैलो फ्रेंड्स आज मै सर्वनाम के बारे में जानकारी  दे रहा हूं। सर्वनाम क्या है इसकी परिभाषा And उदाहरण आदि।

hindi grammer

 Pronoun (sarvnam) ke 6 prakar hota hai-
1.     पुरूषवाचकमैं, तू, वह, हम, मैंने
2.     निजवाचकआप
3.     निश्चयवाचक - 'यह, वह
4.     अनिश्चयवाचककोई, कुछ
5.     संबंधवाचकजो, सो
6.     प्रश्नवाचककौन, क्या 

Sarvnam Ke Paribhasha 
  अब हम पहला प्रश्न देखते है कि सर्वनाम क्या है  इसकी परिभाषा क्या हैसर्वनाम English में इसे pronoun कहते है। संज्ञा के स्थान पर उपयोग किया जाने वाला शब्द है। जो कोई भी व्यक्ति या  वस्तु के लिए  use में  किया जाता है। 

Pronoun के निम्नलिखित उदाहरण है 

मैं , मेरा, इसका, उसकी , हम ,हमारा, खुद , वह , उसका और स्वयं शामिल हैं।
उदाहरण के लिए रमेश एक लड़का है। इसे हम सर्वनाम में बनाए तो वह एक लड़का है होगा। रमेश के बदले वह use किया गया है।
सर्वनाम Pronoun के प्रकार इस प्रकार है।
पुरूष वाचक सर्वनाम-
 Pronoun  बोलनेवाले या सुनने  वाले तथा किसी अन्य parson के लिए प्रायोग  होता है, उसे पुरूषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं, तूम, वहयह आदि। 

पुरूषवाचक सर्वनाम pronoun के तीन भेद हैं
(). उत्तम पुरूष- प्रवक्त  या लेखक जो भी word अपने लिए प्रयोग करता है उसे h उत्तम पुरूष कहते हैं। जैसे- मैं लिखता हूँ। हम लिखते हैं। इस सेन्टेंस में मैं और हम  उत्तम पुरूष सर्वनाम pronoun होगा। 

(). मध्यम पुरूष-सुनने वाला के लिए मध्यम पुरूष का प्रयोग किया जाता है। जैसे की- तुम जाओ। आप जाइये। इन सभी वाक्यों में तुम और आप मध्यम पुरूष होता हैं। 

(). अन्य पुरूष- प्रवक्ता    लेखक (writer) द्वारा श्रोता के अतिरिक्त किसी दुसरे  (तीसरे) के लिए अन्य पुरूष का प्रयोग होता है।  जैसे- वह पढ़ता है। वे पढ़ते हैं।  इन वाक्यों में वह और वे शब्द अन्य पुरूष हैं।

निज वाचक सर्वनाम-
जो सर्वनाम तीनों पुरूषों (उत्तम, मध्यम और अन्य) में निजत्व का बोध कराता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं खुद लिख लूँगा। तुम अपने आप चले जाना। वह स्वयं गाडी चला सकती है। उपर्युक्त वाक्यों में खुद, अपने आप और स्वयं शब्द निजवाचक सर्वनाम हैं।

निश्चय वाचक (संकेतवाचक) सर्वनाम-
जो सर्वनाम निकट या दूर की किसी वस्तु की ओर संकेत करे, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह लड़की है। वह पुस्तक है। ये हिरन हैं। वे बाहर गए हैं। इन वाक्यों में यह, वह, ये और वे शब्द निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

·         शशांक मेरा भाई है वह मुम्बई में रहता है.(पुरूष वाचक सर्वनाम )
·         यह किताब मेरी है वह तुम्म्हारी है. (निश्चय )

अनिश्चयवाचक सर्वनाम-
नाम से किसी निश्चित व्यक्ति या पदार्थ का बोध नहीं होता, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- बाहर कोई है। मुझे कुछ नहीं मिला। इन वाक्यों में कोई और कुछ शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं। कोई शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित व्यक्ति के लिए और कुछ शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित पदार्थ के लिए प्रयुक्त होता है।

संबंधवाचक सर्वनाम-
जो सर्वनाम किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध दिखाने के लिए प्रयुक्त हो, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- जो करेगा सो भरेगा। इस वाक्य में जो शब्द संबंधवाचक सर्वनाम है और सो शब्द नित्य संबंधी सर्वनाम है। अधिकतर सो लिए वह सर्वनाम का प्रयोग होता है।

प्रश्नवाचक सर्वनाम
जिस सर्वनाम से किसी प्रश्न का बोध होता है उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तुम कौन हो ? तुम्हें क्या चाहिए ? इन वाक्यों में कौन और क्या शब्द प्रश्रवाचक सर्वनाम हैं। कौन शब्द का प्रयोग प्राणियों के लिए और क्या का प्रयोग जड़ पदार्थों के लिए होता है।