ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप का वर्णन कीजिए - Patterns of Rural Settlements

ग्रामीण बस्तियों के बसावट की विभिन्नता के कारण इसके कई प्रकार के प्रतिरूप दिखाई देते हैं 1. आयताकार अथवा चौक पट्टी प्रतिरूप  - आयताकार गाँवों का विकास दो मार्गों या सड़कों के चौराहों पर चारों ओर होत…

नागरिक अधिकार किसे कहते हैं - what are civil rights

किसी देश के एक व्यक्ति को कानून द्वारा कुछ अधिकार प्रदान किया जाते हैं। उसे नागरिक अधिकार कहा जाता हैं। जैसे स्वतंत्रा का अधिक, धार्मिक मान्यता का अधिकार और वोट देने का अधिकार आदि। इसके अलावा …

चतुर्थ क्रियाकलाप किसे कहते हैं

मानव द्वारा किये जाने वाले उच्च स्तर के कार्य को इसके अंतर्गत रखा जाता है। इस व्यवसाय में निम्न सेवायें मुख्य होती हैं। उच्च शिक्षा  मनोरंजन के साधन औद्योगिक, व्यावसायिक एवं प्रशासनिक प्रबंध  उच्च प्…

संस्कृति किसे कहते हैं - what is culture in hindi

संस्कृति और सभ्यता विकास के लिए अति महत्वपूर्ण होते हैं। इनके माध्यम से हम अपने ज्ञान और परम्परा को अगले पीढ़ी तक पहुंचते है। संस्कृति मानव जीवन को अधिक प्रभावित करता है। संस्कृति लोगों के एक विशेष सम…

सांस्कृतिक विरासत का अर्थ - Meaning of cultural heritage

हम अक्सर सांस्कृतिक विरासत के महत्व के बारे में सुनते हैं। लेकिन  सांस्कृतिक विरासत का अर्थ  क्या है आईये जानते हैं। सबसे पहले शब्दों के अर्थ पर एक नज़र डालिये " विरासत " एक संपत्ति है जो प…

पर्यायवाची शब्द किसे कहते है - paryayvachi shabd in hindi

वे शब्द होते है जिसका अर्थ सामान या एक जैसे होते है। उदहारण : सूर्य के लिए प्रयोग किये जाने वाले शब्द सूर्य, दिनकर, भानु, सूरज आदि है। अर्थात किसी शब्द-विशेष के लिए प्रयुक्त समानार्थक शब्दों क…

वर दे वीणावादिनी वर दे कविता - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

वर दे, वीणावादिनी वर दे। भारत में भर दे! काट अन्ध उर के बन्धन स्तर  बहा जननि, ज्योतिर्मय निरक्षर  कलुष-भेद, तम हर प्रकाश भर  जगमग जग कर दे! प्रिय स्वतन्त्र - रव अमृत मन्त्र नव सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्य…

बहुदलीय व्यवस्था किसे कहते हैं - what is multi party system in hindi

राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रणाली है। जिसमें राजनीतिक चुनावों के दौरान कई राजनीतिक दल राष्ट्रीय चुनावों में भाग लेते हैं। और सभी सरकारी कार्यालयों या गठबंधन में नियंत्रण हा…

हिन्दी के सुमनों के प्रति पत्र कविता - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

मैं जीर्ण-साज बहु छिद्र आज,  मैं हूँ केवल पदतल-आसन,  तुम सहज विराजे महाराज।  ईर्ष्या कुछ नहीं, मुझे, यद्यपि,  मैं ही बसंत का अग्रदूत,  ब्राह्मण समाज में ज्यों अछूत मैं रहा आज यदि पार्श्वच्छवि।  तुम स…

तोड़ती पत्थर कविता की व्याख्या - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

वह तोड़ती पत्थर, देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर। वह तोड़ती पत्थर, कोई न छायादार, पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार, श्याम तन, प्रिय-कर्म-रत मन। गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार, सामने तरु-मलिका अ…
Subscribe Our Newsletter