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Thursday, September 19, 2019

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Hello Dosto my is Rajesh aaj Mai apko chhattisgarah ke bare me batane Wala hu kuch jaruri baten mera topic financial and education ke upar hoga.

To sabse pahle financial topic par bat karte hai..

Chhattisgarah GDP

Chhattisgarah GDP (Grass Domestic product)

Hamare state ka GDP 3.64 lakh crore (2018-19) hai, jabki madhya Pradesh ki GDP 8.26 lakh crore aur uttar Pradesh ki GDP 15.80 lakh crore hai. India ki bat kare to 2.848 trillion hai isse pata chalta hai ki chhattisgarah ki GDP kitni Kam hai other states ke comparison. Asan language me kahne to kisi desh ki GDP adhik ho to us country ki financial condition achcha hota hai.

Chhattisgarah ki GDP other states ke comparison bahut Kam hai ishka Karan yaha par manufactur and service rate bahut hi Kam hai iske like C.G me naye naye industry and services ki jarurat hai ishse yaha ki GDP rate badegi iske like mere sabhi young brather ko naye skills shikhne ki jarurat hai aur Jo Bhai apna business kar sakte hai uske like ham naye naye business idea share karenge. Youth ko bolna chahunga ki Kam Karne ki lalak honi chahiye yaar job mill hi jayega nahi Mila to apana kuch idea lagaw, naye naye skills shiko yar dekhna 10 years bad aapka life change ho jayega sath me C.G ka bhi.

Chhattisgarah per capita

Iska Matlab ek states ki per people income se hai per capita kisi desh ki Puri income ko sabhi logo me devid kar nikala jata hai. Chhattisgarah ki per capita 2017-18 me 102762 tha jabki sabse jyada Goa ka 375,554 uske bad Delhi ka per capita 329,093 hai. Per capita se state ki people ki lifestyle per effect  padta hai.




Chhattisgarah GDP growth rate

Chhattisgarah GDP growth rate

GDP growth rate desh ki future ko darsata hai agar GDP Growth rate achi hai to vaha country Future me develop country ban jata hai. Abhi 2017-18 ke acordacco cg ki GDP growth rate 11.2% hai. Sath hi sath other states ki bat
Karu to rajisthan ki 24.7% hai aur madhya Pradesh ki 7.7% hai, jish state me opportunity jyada hoti hai vaha GDP growth rate adhik hota hai.

Chhattisgarah education system

Hamare state me pahle se hi education kafi weak raha hai. Cg me school to hai lekin teachers ki kami hai aur village me to education ki quality achhi nhi hai. Student ki achi education nhi mil pati hai chhattisgarah me 2011 ke according 71.04% hai. Vahi bat ki Jaye kerla ki to 93.91% hai jabki India ka education persent 74.04 % hai. Government ko education per focus karna chahiye education hi state ki GDP per capita ko badha sakta hai indarectaly aur state bhi grow karega dekha Jaye to cg me naam matra ka education system hai.

Chhattisgarah University

Chhattisgarah University

Hamare state me 25 University hai lekin ek bhi University top level ki nhi hai yaha government college me sabhi subject according practical saman bhi nhi hota hai. Student Kai college me regular padte to hai lekin only exam ke liye hi college jate hai.




Government college me opportunity ka abhav hota hai yahi Karan hai ki student private college me education Lena pasand karte hai.

This information sorce is weakipeadia

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छत्तीसगढ़ में बोली जाने ली बोलियाँ कौन-कौन सी हैं ?

Tuesday, February 26, 2019

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Welcome my dear friends सभी का फिर से एक बार स्वागत (Welcome) करता हूँ , मेरे इस ब्लॉग(blog) पर , कल मैंने आपको बताया था । विश्व युद्ध के बारे में पढना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें
C.G. engineerings college raipur, durg, bhilai,raygarh,etc.

CHHATTISGARH ENGINEERING COLLEGE


साथियों आज मैं आपको छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh ) के इंजीनियरिंग(Engineering) कॉलेज(College) के बारे में बताने या कहें Introduce करने वाला हूँ, इस पोस्ट को पढ़ने पर आपको पता चलेगा की कौन सा College Chhattisgarh के किस जिले में या किस शहर(City) में स्थित है। तो चलिए शुरू करता हूँ-

Top 6 Engineering college of Chhattishgarah


1. रायपुर में दो Engineering College है - Engineering Institute or College, Raipur Institute of  Technology





2. बिलासपुर में तीन कॉलेज हैं -  Engineering College , Institute of technology , guru ghasidas वि.वि. , चौकसे (chowsay)कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ।


3. जगदलपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज है ।



4. रायगढ़ में - किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी।


5.  दुर्ग (durg) में तीन कॉलेज(College) हैं - Bhilai Institute of technology , chhatra pati shiva ji Institute of technology, Roongta college of Engineering.


6. भिलाई में दो कॉलेज है - एम. पी. क्रिश्चियन( crichiyan college of Engineering) , श्री शंकराचार्य ( shankara College of Engineering) कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ।


साथियों मुझे तो बस इतने कॉलेज के बारे में पता है अगर आपको और भी किसी टॉपिक के बारे में जानना है नीचे दिए लिंक के माध्यम से जान सकते हैं।
धन्यवाद!

thanks so much for supporting me

Thursday, January 24, 2019

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मेरे सभी साथियों का एक बार फिर से स्वागत है मेरे ब्लॉग www.rexgin.in पर जिसमें आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ Natraj studio mahasamund से जुड़ी कुछ जानकारियों को लेकर।
मेरा तो मन था की मैं आपके लिए कोई वीडियो बनाऊ करके लेकिन मेरे पास कैमरे की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण मैं सिर्फ आपको लिखकर बता रहा हूँ आप इसे पढ़ के समझे अगर आप कहेंगे तो इस बार आपके लिए उनके साथ विडियो बनाने के लिए भी मैं उनसे Request करूँगा तो चलिए शुरू करते हैं -

Natraj studio mahasamund


www.rexgin.in

परिचय-

Natraj music mahasamund एक Music company है जिसकी अपनी अलग पहचान है और जो की youtube के माध्यम से पूरे छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि वर्ड के किसी भी कोने में पहुंचने की काबिलियत रखता है और यह पूरे छत्तीसगढ़ में फेमस है। आप Natraj studio को Google map में भी सर्च कर सकते हैं।



Natraj music company के Director का नाम क्या है? और कहाँ के रहने वाले हैं?

Natraj music mahasamund के Director का नाम धनुर्जय पटेल है जो कि महासमुंद जिले के ही है और वे यहां 15 साल पहले आये थे। उनका Proper घर झालम बसना ब्लॉक है जिला महासमुंद है। लेकिन उनका स्टूडियो महासमुंद में है जो की बेहद खुशी की बात है। 
 
दोस्तों ये मेरे द्वारा किसी से लिया गया पहला ज्ञान है या कहें पहला इंटरव्यू है।  जिसमें मैं उतना ज्यादा Frank नहीं था। जितना एक interviewer को या सवाल जवाब करने वाले को होना चाहिए। फिर भी मैंने जितना बात किया उसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।

हम दो झने वहाँ पर गए थे मैं खिलावन पटेल और घनश्याम नायक जिनका Youtube पर TV G STATUS के नाम से Youtbe Channel है।

सबसे पहला सवाल मेरा ये था की Natraj music ka purpose kya hai

उनका उद्देश्य उन्ही की जुबानी सुनना चाहेंगे तो मैं आपके लिए वो आवाज भी डालूँगा जो मैंने उनसे बात करते वक्त record किया था। तो सुनना है ? कमेंट करके बताएं!

उनका उद्देश्य है गरीब तबके के कलाकारों को कम फिस पर मंच उपलब्ध कराना है। और वे कहते हैं की यहां पर महासमुंद में ऐसे बहुत से कलाकार हैं और उन कलाकारों में से बहुत से ऐसे कलाकार भी है जिनके पास पैसे की कमी है। और जो रायपुर जाने से डरते हैं। और रायपुर के स्टूडियो में बहुत ज्यादा भीड़ भी रहता है, तो भीड़ का सामना नहीं कर पाते हैं। कई कलाकार ऐसे होते हैं जो की छोटे-छोटे मंच पर कलाकारी करते हैं और बाहर बड़े मंच पर निकलने के लिए उनके मन में घबराहट भी होती है तो जब हमने Natraj studio को start किया तो उन्हें Invite किया हमने उनसे कहा की हम आपको एक मंच दे रहे हैं एक आप आये।
और रायपुर से बहुत कम बजट में बहुत ही कम बजट में हमने यहां पर studio start किया और अभी तक कम बजट में ही काम कर रहे हैं इसमें हमारे फिस में कोई Growth नहीं हुई है। फिस वही है।
तो अब उससे कलाकार आने लगे और उनको यहां पर मंच दिया गया। और बड़े studio में क्या होता है जो पहले बार गा रहे होते है उनको वहां पे मौका नहीं मिल पाता था या भगा दिया जाता था। या फिर कोई बड़े स्टूडियो में चांस नहीं मिलता कोई नए कलाकारों को खास तौर पे। ये आप सभी जानते हैं, वे कहते हैं start तो करो तो ये स्टार्ट करते करते जो नीचे के कलाकार मेरा मतलब जो छोटे कलाकार हैं उन लोग उभरते गए। हम लोगों ने कभी बड़े कलाकार को नहीं बुलाया वे अपने इक्क्षा से यहां आये हैं और जितने हमारे पास कलाकार आये हैं एक गांव से है या महासमुंद जिले से लगभग बाहर से भी आते हैं। आज के Date में MP और भोपाल तक के भी कलाकार यहा आ चुके हैं।
लेकिन यहां जो है सबसे पहले प्राथमिकता जो दी जाती है वो है महासमुंद जिले के कलाकार और जो छत्तीसगढ़ के कलाकार है उनको, जिनको मंच प्रदान नहीं हुआ है अभी तक ये उनके लिए ही है।

Natraj music kis tarah ka video Banata hai

हम हमारे Channel में सांस्कृतिक और परिवार के साथ बैठकर देखे जा सकने वाले वीडियो और ऑडियो डालते हैं जो की छत्तीसगढ़ संस्कृति से जुड़े होते हैं।

Natraj studio को आप कहाँ तक लेकर जाना चाहते हो ?

Natraj music अब कहाँ से कहाँ तक जा सकता है वो तो नटराज, स्टूडियो ही जानता है उनका मतलब है जहाँ तक सम्भव हो उसे लेकर जाएंगे। और उनका कहना है की नटराज में कोई ऐसा कलाकार ना रहे जो की बाद में ये कहे की अरे यार मिस कर दिया करके।

आप जो Youtube में वीडियो डालते हैं उससे क्या फायदा होता है ?


इससे ये हुआ की नटराज का प्रचार हुआ साथ ही साथ आपने देखा होगा की कोई भी कलाकार जब पहले गाना गाता है तो वो अपने आप को अच्छे से रिप्रजेंट नहीं कर पाता है और इसे देखकर लोग motivate होते हैं की अरे यार जब वो इस प्रकार से वहां जाकर गा सकता है तो मैं क्यों नहीं करके उनको Motivation मिलता है। और वे कलाकार यहां पर आने लगे। जो छोटे छोटे कलाकार है उनको इससे ये फायदा हुआ की यहां YOUTUBE के माध्यम से लोग उनको ज्यादा जानने लगे और हमारे द्वारा उनके Video पर उनका नम्बर भी दिया जाता है जिससे वे लोग सीधे किसी कार्यक्रम से जुड़ सकते है। फिर जुड़ने के बाद वे नटराज को धन्यवाद देते हैं तो एक परिवार की तरह माहौल क्रिएट हो गया।

यहां पर गाने वाले किस कलाकार से प्रभावित हुए हैं आप ?

वे कहते हैं की हाँ एक दो ऐसे कलाकार है जो की मौके के तलास में यहां पर आये थे और जिनको बहुत ज्यादा गाने के बारे में वो Knowledge भी नहीं था। और आज उनका नाम चलता है कई सारे कार्यक्रम दे रहे हैं और लोग अवार्ड भी प्राप्त कर रहे हैं।
फिर मैंने कहा एक-कात कलाकार ( गायक या गायिका ) का नाम बता दें जो की यहां से। निकल कर उस मुकाम तक पहुंचे हैं।
गायत्री मोंगरे , प्रभा यादव जैसे कलाकार हैं जिनसे वे प्रभावित हैं।

अपने सबस्क्राइबर बढ़ाना चाहते है या नहीं ?

इस पर वे कहते हैं की आपने देखा होगा की लगभग हर Youtuber यह कहता है की मेरे चैनल को लाइक व सब्सक्राइब जरूर करें या लिखा होता है Subscribe करके।
आपने देखा होगा की हमारे चैनल में आज तक ऐसे किसी भी प्रकार Logo या चिन्ह नहीं मिलेंगे।
वे कहते हैं की आपकी इच्छा है की अगर आपको गाने पसन्द आ रहे हैं तो Definitely आप Subscribe करोगे ही। ये आपके ऊपर है हम अच्छे चीज देंगे , तो आप हमारे पास आएंगे इसलिए हम उसके ऊपर Depend नहीं हैं।

Natraj Music mahasamund सबसे ज्यादा किस प्रकार के वीडियो बनाना पसन्द है?

हम सुआ, ददरिया, कर्मा, पारिवारिक ,पारम्परिक छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ की माटि से सम्बंधित वीडियो बनाना पसन्द करते हैं। ये विषय में काम करने को सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। क्योकि ऐसे विषयों से हमारे छत्तीसगढ़ की संस्कृति झलकती और जुड़ी होती है।

क्या आप बड़े कलाकारों को यहां पर बुलाकर गाना गवाना चाहते है ?

वे कहते है , देखिए जैसे की बड़े कलाकार हैं दुकालू यादव, अलका चन्द्राकर, चम्पा निषाद ऐसे कलाकार को बुलाने के लिए बजट की आवश्यकता होती है अगर कोई इसके लिए फायनेंस करता है तो हम उन्हें बुला सकते है और एक बात जो चम्पा निषाद जी हैं वे यहां पहले भी आकर गाना गा चुकीं हैं। जब वे साधारण गायिका थी। अभी हाल में film में गाना गाने के बाद वे यहां पर नहीं आई हैं।
तो बड़े कलाकारों को हम अभी तक बुलाये नहीं है। हम लोग हमेशा जमीन से जुड़े जो कलाकार हैं उन्हीं से गाना गवाया है।

आप भविष्य में चाहते हैं की बड़े कलाकार जैसे दुकालू यादव यहां आकर गीत गाये या नहीं ?

इस बात पर वे कहते हैं की कौन नहीं चाहता की वे आकर यहां गाना गायें हा हम बिल्कुल उन्हें भविष्य में बुलाना चाहेंगे।
लेकिन होता क्या है अगर उनके लिए कोई फायनेनश करे तो ये सम्भव है क्योकि वे कम पैसे में तो यहां नहीं आएंगे। हमारा मोटिव ये रहता है की यहीं काम हम छोटे कलाकार के लिए करें।
हमारा एक और मोटिव है की महासमुंद जिले के कलाकार और जिले का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में फैलाएं या बताये की यहां पर भी कलाकार हैं।

Youtube में वीडियो डालने का ख्याल कहाँ से आया ?

अब तो आपको पता ही है की वीडियो के लिए CD , DVD के जमाना तो खत्म हो गया है अब उसके बाद हमें हमारे Natraj studio के प्रचार के लिए हमने सोचा की हमारे कलाकार हमसे कैसे जुड़े कैसे हम तक पहुंचे तो हमने देखा की आज कल youtube बहुत ज्यादा चर्चा में है तो इस कारण से हम इस पर पहुचे और वीडियो डालना स्टार्ट किया। और जैसे जैसे लिंक हम शेयर करते गए वैसे वैसे हमारा प्रचार होता गया।

क्या आपका कोई website है ?

इस पर कहते हैं नहीं हमारा कोई Website नहीं है। इस जवाब पर मेरा प्रश्न था की ऐसे क्यों ?
उनका जवाब आया इसकी अभी जरूरत नहीं लोगों को मालूम है की नटराज क्या है ? और लोग आसानी से यहां पर पहुंच जाते हैं।

आपका क्या कोई भविष्य में website बनाने का उद्देश्य है ?

हां हम बना सकते है भविष्य में।
नटराज नाम आपके मन में कहाँ से आया ?
तो वे कहते है की नटराज मुझे बहुत ही पसन्द है। बचपन से यह नाम उनको पसन्द था इसलिए उन्होंने यह नाम रखा।

Natraj music के प्रचार के लिए youtube के अलावा और क्या क्या किया है ?

हमने बस सोशल मीडिया like facebook and whatsapp इसके लिए चुना है और हम इस पर इसके बारे में डालते रहते हैं।

इसके बाद मेरा प्रश्न था क्या मैं इसको अपने facebook पर शेयर कर सकता हूँ ?
तो उनका कहना था बीलकुल आप कर सकते हैं और उसके बाद मेरा प्रश्न था क्या आपका वीडियो मैं अपने ब्लॉग में डॉल सकता हूँ - उनका जवाब था हाँ आप use कर सकते हैं। आप अपने हिसाब से कोई भी वीडियो डाल सकते है।

Youtube में सबसे पहला वीडियो कब डाले थे ?
देखिए youtube को चालू किये हुए तीन साल हो गए हैं। यानी की तीन साल में यह music company आज छत्तीसगढ़ के दूसरे नम्बर पर है।
अगर आप चाहें तो उनका वीडियो यहां पर देख सकते है या उनके youtube channel पर भी जाकर देख सकते हैं।
आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ शेयर करें अगर आपको जानकारी अच्छी लगी तो कमेंट जरूर करें।

ताकि आपके लिए ऐसे ही नई नई जानकारी लाते रहें।

धन्यवाद !

Monday, January 21, 2019

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मित्र आपका स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर एक बार फिर से धन्यवाद मेरे ब्लॉग पर आने के लिए, मेरे लेख को पढ़ने के लिए।



आज मैं बात कर रहा हूँ हमारे current CM माननीय भूपेश बघेल जी के बारे में जो की आज दिनांक 20/01/2019 को महासमुंद जिले में आये हुए थे। उनके आने   के उपलक्ष्य में यहां पर बहुत सारी सुविधाये उपलब्ध कराई गयी थीं। उनके चाहने वालो के लिये यहां पर भोजन की व्यवस्था भी की गयी थी मैं तो पूरे कार्यक्रम में नहीं था लेकिन जिस समय से वहां पर रुका था उसी समय की बात को आपको बता रहा हूँ।

भूपेश बघेल का आगमन महासमुंद में

सबसे पहले आपको उस जगह का नाम बता देता हूँ जहां पर उस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का आयोजन चन्द्रनाहू शिक्षण समिति के प्रांगण में या कहें उसके मैदान में किया गया था जो की बागबाहरा रोड पर है। आप चाहे तो उसे Google map में भी देख सकते हैं। इस जगह पर अभी से नहीं बल्कि अनेक सालों से शिक्षण का कार्यक्रम चनद्रनाहूँ शिक्षण समिति द्वारा चलाया जा रहा है। जो की कक्षा पहली से लेकर बारहवी तक छत्तीसगढ़ स्कूल के नाम से संचालित है और यहॉं पर कॉलेज भी है जो की शांत्रीबाई कला ,वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय के नाम से जाना जाता है जिसकी अलग ही पहचान है। आप चाहें तो इसके बारे में भी जान सकते हैं मैंने इसके बारे में भी लिखा है।


bhupesh Baghel

अब बात करते हैं की यहां पर क्या हुआ जब मैं वहां पर पहुंचा, पूरा मैदान भीड़ से लबा लब भरा था और वहाँ सामने हमारे CM माननीय भूपेश बघेल जी (2018-19) भाषण दे रहे थे।
किसान की कर्ज माफी के बारे में वे कह रहे थे की कांग्रेस सरकार छत्तीसगढ़ मे सबसे ज्यादा मूल्य में धान खरीदने वाली सरकार है।

किसान के कर्ज माफी के विषय में कह रहे थे कांग्रेस सरकार के छत्तीसगढ़ में सत्ता में आते ही उसने किसानों के कर्जे माफ़ करना शुरू कर दिया।

वे चर्चा कर रहे थे किसानों के ऊपर उनका जो बात है मुझे अच्छा लगा क्योकि वे आज की ज्वलन्त समस्या पर बात कर रहे थे आज पशुपालन किसान के लिए ही नहीं बल्कि सभी के लिए दूभर हो गया है आज हर कोई ये नहीं करना चाहता और वह गायों तथा बछड़ों को खुला छोड़ देते हैं जिससे किसान भी परेसान तो होते हैं लेकिन खुद भी इसके जिम्मेदार हैं।

पशुपालन के लिए वे एक योजना पर बोले वह योजना यह थी की आप यदि पशुपालन करना चाहते हैं तो सरकार आपको मदद करेगी वो कैसे आप जब फसल कमा लेते हैं तो उस फसल के अपसिस्ट को आग लगा देते हैं लेकिन अब सरकार ऐसे करने से रोकने के लिए एक योजना बना रही है जिसमें आपको अपने खेत में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थ को पशुओं के चारा के रूप में एक योजना के तहत एकत्रित कराया जाएगा और इसके पैसे सरकार वहन करेगी। तो इससे होगा क्या कई बेरोजगार को रोजगार मिलेगा और यह काम रोजगार गारन्टी के समान ही होगा। जिसमें चारे को एकत्रित किया जायेगा।


इससे क्या होगा अब आपको सड़कों में जानवरों की संख्या में कमी देखने को मिलेगी साथ ही साथ आपको एक दिन ऐसा भी आएगा की आप सड़क पर एक भी जानवर खुले घूमते हुए नहीं देख पाएंगे।
और चरवाहों को सम्मान भी मिलेगा। इस योजना से क्योकि आप हर समय तो पशुओं को बांध कर नहीं रख सकते ना। अब जगह नहीं है चराने के लिए तो वो बात अलग है।

इससे और क्या क्या लाभ होगा ?

1. इसकी लागू करने से सड़कों पर जानवरों का भीड़ कम हो जायेगा जिससे दुर्घटना कम हो जायेगा।2. दूसरी बात लोगों को इससे जैविक खाद भी प्राप्त होगा।
3. ईंधन के रूप में Bio gass मिल जायेगा।
4. रोजगार के रूप में आप दूध को बेच सकते हैं।
5. LPG गैस की आवश्यकता खत्म।
6. यूरिया के जगह जैविक खाद।


इससे और भी अनेक लाभ है।


अब इस योजना के बाद उन्होंने बात की शराब बंदी की उन्होंने ने भी कहा शराब किसी भी इंसान को बर्बाद कर देता है और शराब ही इसका कारण है आज की बर्बादी का इसे बन्द करना बहुत जरुरी है अगर इसे बन्द नहीं किया गया तो काफी देर हो जायेगी। इसलिए इसे बन्द करने के लिए मैं एक समिति गठित करूँगा जिसमें मैं अपने चुने हुए अधिकारियों नेताओं से सर्वे कराऊंगा की शराब को बन्द किया जाये या नहीं तब फिर उसके बाद निर्णय लिया जायेगा। की क्या करना है। मैं चाहूँ तो शराब को आज अभी बंद करा दूँ लेकिन क्या मैं पीने वाले को रोक सकता हूँ नहीं, उन्होंने कहा। इसको रोकने के लिए समाज को भी आगे आना होगा। समाज के पदाधिकारीयों को भी इसे रोकने में मदद करना होगा। शराब तो बंद हो जायेगा लेकिन इससे एक और समस्या उत्पन्न होगी वो है घर-घर में शराब का बनाया जाना और छोटी छोटी शराब की तस्करी करना।

तो इसे रोकने के लिए सरकार को आपके मदद की आवश्यकता है इसे बिना आपके मदद के कोई नहीं रोक सकता आज रोक दिए तो फिर कल चालू हो जायेगा शराब का चोरी छुपके बनना तो इसके लिए समाज में रहकर इससे लड़ना पड़ेगा।
इसके बाद उन्होंने कहा शराब के रोकने के प्रति अगर ज्यादा रिस्पांस आता है तो हम अगले आने वाले साल में पूर्ण रूप से बंद कर देंगे।




शराब बंदी के बाद उन्होंने राहुल गांधी के रायपुर आने की बात कही और कहा आप सभी उस कार्यक्रम में आमन्त्रित हैं। उसी दिन किसानों के कर्ज माफी के प्रमाणपत्र भी वितरित किये जाएंगे।
उन्होंने किसानों द्वारा किसान समितियों द्वारा मुख्यमंत्री सहायता कोश में दान करने वालों का धन्यवाद ज्ञापित किया और फिर अपने सहायता कोश के बारे में उन्होंने कहा इस कोश के पैसे का उपयोग उन जरूरत मन्द विद्यार्थियों के लिए किया जाता है उन जरूरत मंद लोगों के लिए किया जाता है जिनको इसकी आवश्यकता होती है।

एक बार फिर उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित किया और फिर वाणी को विराम दिया।
आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ जरूर शेयर करें अगर आप इसी तरह की और जानकारी चाहते हैं तो कमेंट करके एक बार जरूर बताएं।
आपका मित्र,आपका साथी,आपका दोस्त ।

Tuesday, January 8, 2019

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साथियों आप सभी का फिर से एक मैं स्वागत करता हूँ   आज हम बात करने वाले हैं स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली (जिला महासमुंद) में संचालित विषय के बारे में इससे पहले हमने उसके बारे में संक्षिप्त परिचय दिया था। आप इस महाविद्यलय के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं तो उस पोस्ट को जरूर पढ़े।

शासकीय महाविद्यालय सरायपाली 

अब बात करते हैं यहां संचालित विषय के बारे में -
यह महाविद्यालय पं. रविशंकर शुक्ल वि.वि. रायपुर (छ.ग.) से सम्बद्ध है। अतः वि.वि. के पाठ्यक्रमानुसार यहां निम्नलिखित स्नातक व स्नाकोत्तर स्तर की अध्ययन व्यवस्था है :-

saraipali college

कला संकाय (ART GROUP)

स्नातक कक्षाएं -
बी.ए. - जिसमें आपके first year से लेकर तक final year यहां पर उपलब्ध हैं इन कक्षाओं में उपलब्ध विषय की बात करें तो इस प्रकार है -
अनिवार्य विषय में है - 1. आधार पाठ्यक्रम हिन्दी भाषा , अंग्रेजी भाषा।
first year में अभी पर्यावरण का पेपर अनिवार्य हो गया है इसलिए ये भी सामिल है।
2. पर्यावरण एवं मानवाधिकार।

इसके अलावा आपको तीन विषय वैकल्पिक रूप से लेने होते हैं जिसे आप अपने मन से चुन सकते हैं। जो की इस प्रकार से हैं -
1. राजनीति विज्ञान
2. हिन्दी साहित्य
3. भूगोल
4. अर्थ शास्त्र
5. इतिहास

आप जिस विषय को FIRST YEAR में चुनते हैं वहीं विषय आपके Second और Third Year में भी होता है।
विज्ञान संकाय की बात करें तो यहां पर आपको first year से लेकर final तक इस प्रकार के विषय मिलते हैं-
बी.एस.सी. इसमें भी अनिवार्य विषय होते हैं जो की हिन्दी भाषा और अंग्रेजी भाषा हैं इसके अलावा पर्यावरण first year के लिए complsury है।
विज्ञान संकाय में दो समूह आते है एक गणित और दूसरा जीव विज्ञान समूह।


गणित समूह के विषय -

1. गणित
2. भौतिक शास्त्र
3. रसायन शास्त्र/कम्प्यूटर साइंस
जीव विज्ञान समूह -
1. प्राणी शास्त्र
2. वनस्पति शास्त्र
3. रसायन शास्त्र
इसी प्रकार यहां पर स्नाकोत्तर कक्षाये भी चल रहीं है जो की निम्न प्रकार से विषय यहां संचालित हैं।
स्नातकोत्तर कक्षाएं -   इस महाविद्यालय में कला संकाय के अंतर्गत M.A., राजनीति विज्ञान , भूगोल, हिन्दी तथा वाणिज्य संकाय के अंतर्गत एम.कॉम. की कक्षाएं सेमेस्टर पध्दति से संचालित है।
स्व वित्तीय योजनान्तर्गत संचालित पाठ्यक्रम :-
1) पी.जी.डी.सी.ए.
2) बी.एस.सी. कम्प्यूटर साइंस
3) डी.सी.ए.।
NOT : महाविद्यालय में M. A. हिन्दी , अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान एवम् संस्कृत विषय में स्वाध्यायी छात्र छात्राओं के लिए परीक्षा केन्द्र की व्यवस्था है।
इस प्रकार यहां पर आपके लिए बहुत सारे तो नहीं लेकिन इतने मुख्य विषय हैं जो की यहां पर संचालित होते हैं।

अब बात करते हैं यहां इन विषयों पर आरक्षित सीटों की
विभिन्न कक्षाओं में उपलब्ध स्थान
कला संकाय स्नातक कक्षाएं -
B.A. भाग एक 180 सीट
B.A. भाग दो 180 सीट
B.A. भाग तीन 180 सीट


विज्ञान संकाय -

बी.एस.सी. भाग एक से लेकर तीन तक - 160 बायो समूह 115 , गणित समूह 45 ये तीनों भाग के लिए अलग अलग हर साल के लिए सीट आरक्षित होते हैं।
टीप :-विज्ञान संकाय के अंतर्गत गणित समूह के साथ कम्प्यूटर विज्ञान हेतु 25 सीट निर्धारित है।
स्नातकोत्तर कक्षाएं -
राजनीति विज्ञान - 15 सीट
भूगोल -15 सीट
हिन्दी - 15 सीट
वाणिज्य एम.कॉम. - 25
पी.जी.डी.सी.ए. - 45
डी.सी.ए. - 40 सीट


आपने जो सीट देखें हैं उनमें वि.वि. / शासन के नियमानुसार परिवर्तन सम्भावित है।
इसके अलावा आगामी समय में और कोई परिवर्तन होता है तो आपको सूचना अपडेट कर दिया जायेगा यदि आप इस ब्लॉग को Subscribe करते हैं तो आप अपटूडेट रहते हैं ऐसी ही अन्य जानकारियों से तो बने रहिये मेरे साथ।
ज्यादा जानकारी के लिए इनका वेबसाईट देखें -
सरायपाली कॉलेज वेबसाइट -
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आज हम बात करने वाले स्व. राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली ( जिला-महासमुंद ) के बारे में इससे पहले भी मैंने आपके साथ दो कॉलेज शांत्रीबाई (प्राइवेट) और वल्लभाचार्य ( शासकीय ) महाविद्यालय के बारे में लिखा था। अगर आप उनके बारे में जानना चाहते हैं तो जान सकते है वहां पर उन कॉलेज के वेबसाइट के लिंक भी दिए गए हैं।
आज का हमारा टॉपिक है शासकीय महाविद्यालय सरायपाली तो चलिए शुरू करते हैं-

GOVT COLLEGE SARAIPALI उद्देश्य से -

1) अध्यनरत छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु पर्याप्त अवसर देना इस कॉलेज का पहला उद्देश्य है।
2) चारित्रिक, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास हेतु समुचित अवसर प्रदान करना इसका दूसरा उद्देश्य है।
3) छात्र-छात्राओं में सामाजिक संवेदनशीलता जागृत करना।


4) छात्र-छात्राओं में मानवीय गुणों का विकास करना।
5) समाज के लिए आदर्श नागरिक तैयार करना ये उनके आखरी और पांचवे उद्देश्य में से एक है।
सरायपाली शासकीय महाविद्यालय का संक्षिप्त इतिहास

saraipali govt college

Govt College Saraipali Establishment

स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय , सरायपाली जिला महासमुंद पिन 493558 का संक्षिप्त इस्तीहास कहता है की सरायपाली में उच्च शिक्षा हेतु इसकी स्थापना 1 जुलाई 1972 को बागबाहरा शिक्षा समिति द्वारा इसकी स्थापना की गई। पहले यह फूलझर स्टेट के अंतर्गत आता था इसलिए इसका पहला नाम फूलझर महाविद्यालय सरायपाली रखा गया था। 1 अक्टूबर 1986 को इस निजी महाविद्यालय को शासन द्वारा अधिग्रहित किया गया। और इसका नाम शासकीय फूलझर महाविद्यालय , सरायपाली रखा गया तथा बाद में फिर से छत्तीसगढ़ शासन ने 15-01-2003 के आदेशानुसार इस महाविद्यालय का नाम स्व. राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय , सरायपाली , जिला-महासमुंद रखा गया।

Subject of sraipali govt college 

इस महाविद्यालय में 1972 से 1982 के समय में स्नातक स्तर कला संकाय में हिन्दी, अर्थशास्त्र इतिहास व राजनीति विज्ञान की अध्ययन व्यवस्था थी। और यहीं व्यवस्था आगे चलकर सन 1982 से 1988 तक महाविद्यालय में B.COM व M.A. हिन्दी की कक्षाएं भी संचालित हुई थी। लेकिन शासकीय बनाने के लिए कई बाधाएं आई इसके कारण इन कक्षाओं को बन्द कर दिया गया था।
दिसम्बर 1987 से इस महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर भूगोल विषय तथा एम. ए. राजनीति विज्ञान की कक्षाये प्रारम्भ हुई। इसी तरह दिसम्बर 1992 में विज्ञान संकाय की स्नातक कक्षाये प्रारम्भ की गई, जिसमें बायो और गणित विषय समूह की अध्ययन व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त स्ववित्तीय योजना के अंतर्गत सत्र 2006-2007 से महाविद्यालय में पी.जी.डी.सी.ए., बी.एस.सी. (कम्प्यूटर साइंस) की कक्षाएं प्रारम्भ की गई हैं।
सन 1972 से महाविद्यालय पूर्व शासकीय बी.टी.आई भवन में संचालित है। इस भवन में विज्ञान संकाय की कक्षाएं संचालित है। शासन ने महाविद्यालय को 6.288 हेक्टेयर भूमि आबंटित कर हस्तांतरित किया है। जिसमें कला संकाय हेतु भवन निर्माण हो चुका है।

सत्र 2006-07 में महाविद्यालय भवन के पूर्ण होने के बाद कला संकाय की कक्षाएं संचालित हैं।
साथियों सभी जानकारी एक पोस्ट में लिख पाना बहुत आसान है लेकिन पढ़ने वालों के लिए थोड़ा बोरिंग हो जाता है इसलिए मैंने स्व राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली में संचालित विषय के बारे में एक पोस्ट अलग से लिखा है जिसे आप पढ़ सकते हैं।
आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ शेयर जरूर करें और अपने दोस्तों तक भी पहुचाये।
ज्यादा जानकारी के लिए इनका website देखें -
धन्यवाद! मिलते हैं अगले नए टॉपिक के साथ।

Saturday, December 22, 2018

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साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आज हम बात करने वाले हैं छत्तीसगढ़ी भाषा के वर्गीकरण के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं छत्तीसगढ़ की बोलियों के बारे में इससे पहले मैंने आपको बताया था।

छत्तीसगढ़ी भाषा के उद्भव एवं विकास के बारे में  अगर आपने वह पोस्ट नहीं पढ़ा है तो पढ़ ले और आगे बढ़ें क्योंकि हम अभी लगातार छत्तीसगढ़ी व्याकरण के बारे में टॉपिक पोस्ट कर रहे हैं जिससे आपको कंपटीशन एग्जाम्स में पूछे जाने वाले Question के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी।

छत्तीसगढ़ की बोलियां

छत्तीसगढ़ की बोलियां

छत्तीसगढ़ अपनी एक अलग पहचान रखती है, पूरे भारत में और छत्तीसगढ़ की अपनी एक बोली है जिसे हम छत्तीसगढ़ी के नाम से जानते हैं छत्तीसगढ़ी बोली बहुत ही सुंदर एवं लोकप्रिय होते जा रहा है क्योंकि एक हिंदी पिक्चर दिल्ली 6 में इसे लिया गया था। जिसके बोल कुछ इस प्रकार थे।

सास गारी देवे ,ननद समझा लेवे ,ससुराल गेंदा फूल।  





जो गाना बहुत ही लोकप्रिय हुआ था लेकिन आज हम जो टॉपिक पढ़ रहे हैं वह फिल्म से हटकर है आज हम जो टॉपिक पढ़ रहे हैं वह छत्तीसगढ़ी व्याकरण से जुड़ा हुआ है तो चलिए सबसे पहले मैं आपको इसके बारे में थोड़ा बहुत जानकारी दे दूं फिर उस टॉपिक के अंदर गहराई में चलेंगे कि उसको कितने वर्गों में बांटा गया छत्तीसगढ़ी भाषा को।

  • छत्तीसगढ़ में लगभग 99 बोली को व्यवहारिक रूप से प्रयोग किया जाता है छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा या बोली वह है छत्तीसगढ़ी और हल्दी जो कि ज्यादातर प्रयोग होते हैं।
  • देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में मैदानी इलाकों में मुख्यतः आर्य भाषा समूह का प्रयोग होता है और ज्यादातर जनजातिय द्रविड़ भाषा समूह मुंडा भाषा समूह की बोलियां प्रचलित है।
  • और इस प्रकार से व्याकरण के ज्ञाताओं ने छत्तीसगढ़ की बोलियों को मुख्यतः तीन भाषा परिवारों में बांटा जो कि आपके सामने हैं
chhattisgarhi bhasha ka munda parivar vargikaran

chhattisgarhi bhasha ka dravin parivar

chhattiisgarhi bhasha ka aarya parivar




छत्तीसगढ़ की भाषाओं को विभाजित करने के आधार


  • छत्तीसगढ़ी रायपुरी बिलासपुरी रूपों को पृथक का का मोल आधार जो प्रदान करता है वह शिवनाथ नदी है इन इन दोनों संभाग की सीमा रेखा बनाती है शिवनाथ नदी।
  • छत्तीसगढ़ में भाषा का वर्गीकरण करते समय ग्रियर्सन ने छत्तीसगढ़ी भाषा के वर्गीकरण का स्थान नहीं दिया है बल्कि इसे मराठी से युक्त करते हुए छत्तीसगढ़ी उड़िया तथा मराठी का एक मिश्रित रूप बताया है जो हमारी भाषा जो है वह अन्य भाषाओं से मिलकर बनी है। 
  • खल्हाती और बस्तर बोली का वर्गीकरण प्राकृतिक आधार पर किया गया है। 
  • सरगुजिया और सदरी कोरबा बोलियों का विभाजन का आधार पर पर्वत मालाये है। 
  • बैगानी , बिझवारी, कलंगा, भूलिया बोलियों के वर्गीकरण का आधार जातिगत है। 

''छत्तीसगढ़ राज्य का गठन''





छत्तीसगढ़ी विभाषाओं का वर्गीकरण -

ग्रियर्सन के अनुसार-

  • ग्रियर्सन ने भारत का भाषा सर्वेक्षण में भारतीय भाषाओं का सर्वोत्कृष्ट विश्लेषण किया है। ग्रियर्सन ने हिंदी प्रदेश को पूर्वी हिंदी के अंतर्गत केवल दो बोलियों अवधी और छत्तीसगढ़ी को शामिल किया है। 
  • उन्होंने छत्तीसगढ़ी बोली का वर्गीकरण क्षेत्रीय एवं जातीय आधार पर किया है-
  • क्षेत्रीय आधार पर - छतीसगढ़ी, खल्हाटी, सरगुजिया। 
  • जातीय आधार पर - सादरी, कोरवा, बैगानी, बिंझवारी,कलंगा। 
  • ग्रियर्सन के भाषा सर्वेक्षण के अनुसार समस्त छत्तीसगढ़ी भाषाओं की संख्या 37,55,343 थी। 


डॉक्टर ग्रियर्सन ने छत्तीसगढ़ी भाषा को नौ भागों में बांटा है जो की इस प्रकार है-

  • बिलासपुरी छत्तीसगढ़ी
  • कवर्धा छत्तीसगढ़ी
  • खैरागढ़ी छत्तीसगढ़ी
  • खल्हाटी छत्तीसगढ़ी
  • सदरी कोरवा छत्तीसगढ़ी
  • बैगानी छत्तीसगढ़ी
  • कलंगा छत्तीसगढ़ी
  • बिंझवारी छत्तीसगढ़ी 
  • सरगुजिया छत्तीसगढ़ी

भौगोलिक आधार पर छत्तीसगढ़ी का वर्गीकरण

  • उत्तरी छत्तीसगढ़ी  ( भंडार छत्तीसगढ़ी )
  • पूर्वी छत्तीसगढ़ी   ( उत्ती छत्तीसगढ़ी )
  • दक्षिणी छत्तीसगढ़ी  ( रक्सहु छत्तीसगढ़ी )
  • पश्चिमी छत्तीसगढ़ी  ( बुडती छत्तीसगढ़ी )
  • मध्य छत्तीसगढ़ी  ( केंदरी छत्तीसगढ़ी )

डॉक्टर नरेंद्र वर्मा के अनुसार छत्तीसगढ़ी भाषा का वर्गीकरण इस प्रकार उन्होंने वर्गीकृतग किया है -

  1. छत्तीसगढ़ी 
(अ) रायपुरी
(ब) बिलासपुरी
  1. ख़ल्टाही 
  2. लरिया
  3. सरगुजिया
  4. सदरी कोरवा
  5. बैगानी
  6. बिंझवारी
  7. कलंगा
  8. भूलिया
  9. बस्तरी व हल्बी

1961 ई. में की गयी जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ की मातृभाषाएं इस प्रकार थी-

  • बैगानी 
  • भूलिया
  • बिलासपुरी
  • बिंझवारी
  • छत्तीसगढ़ी
  • देवार
  • धमदी
  • गौरिया
  • गोरी
  • कांकरी
  • लरिया
  • नागवंशी
  • पंडो
  • पनकी
  • सतनामी
  • सरगुजिया
 

Wednesday, December 5, 2018

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साथियों मैं आपका फिर से एक बार स्वागत करता हूँ मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ , महासमुंद के शांत्री बाई कला, वाणिज्य, विज्ञान महाविद्यालय , महासमुंद के बारे में कुछ जानकारियों को लेकर आया हूँ , साथियों सबसे पहले मैं आपको इसका थोड़ा अस्सा परिचय दे  देता हूँ -

शांत्री बाई कला, वाणिज्य , विज्ञान महाविद्यालय , महासमुंद

परिचय -

इस परिचय को मेरे द्वारा इस कॉलेज की विवरण पुस्तिका में बताये अनुसार लिखा जा रहा है, इस महाविद्यालय की स्थापना छत्तीसगढ़ चन्द्रनाहू शिक्षण समिति महासमुंद के द्वारा सितम्बर सन 1993 में की गयी है, चूंकि महासमुंद विकासखण्ड के अंतर्गत केवल एकमात्र शासकीय महाविद्यालय होने के कारण क्षेत्र के छात्र / छात्राओं के प्रवेश की समस्या को ध्यान में रखते हुए इस महाविद्यालय की स्थापना की गई है जो स्थापना से आज तक विकास की ओर निरन्तर बढ़ रहा है। वर्तमान में यहां कला, वाणिज्य एवं विज्ञान में स्तानक एवं कम्प्यूटर एवं स्नाकोत्तर स्तर पर अध्यापन व्यवस्था है ।


Shantri bai college Mahasamund


सत्र 2007-08 से महाविद्यालय में बी.एड. की कक्षा संचालित हो रही है जो राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसन्धान परिषद, भोपाल NCTE तथा उच्च शिक्षा छ.ग. शासन से अनुमोदित एवं पं. रविशंकर वि.वि. से सम्बद्धता प्राप्त है।
यानी की ये महाविद्यालय पूर्ण रूप से मान्यता प्राप्त है अपने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा ये बहुत अच्छी बात है क्योकि आप जो भी कोर्स करते हैं उसका मान्यता प्राप्त होना उतना ही आवश्यक होता है जितना के पेपर में पेन के होने जितना ।

बिना किसी मान्यता के कोई जॉब नहीं देता है, वैसे भी ये पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है ये बहुत खुशी की बात है खुशी की बात इसलिए क्योकि ये हमारे छत्तीसगढ़ के नम्बर वन रैंकिंग वाला कॉलेज है जिसे NAAC द्वारा A सर्टिफिकेट प्राप्त है।

शांत्री बाई महाविद्यालय में कौन-कौन से विषय उपलब्ध हैं-

बी.ए.

स्नातक :-

विषय:- (1) आधार पाठ्यक्रम जो की अनिवार्य है जिसमें हिंदी और इंग्लिश भाषा आता है।




  •  1. अंग्रेजी भाषा 2. हिंदी भाषा 3. पर्यावरण विज्ञान
  • 2. निम्न में से कोई तीन इसका मतलब ये है की आप इन अनिवार्य विषय को छोड़ के तीन सब्जेक्ट और चुन सकते हैं।
  • A भूगोल ( Geography )
  • B हिन्दी साहित्य ( hindi latrature )
  • C अर्थशास्त्र ( Economy )
  • D राजनीतिक शास्त्र / गृह विज्ञान ( political science/ home science )
  • E इतिहास ( Histry )
  • F समाज शास्त्र ( Sociology )
  • G गृह विज्ञान

ये तो थी कला संकाय से जुड़े स्नातक विषय के बारे में जानकारी अब बात करते हैं , विज्ञान संकाय से जुड़े विषय के बारे में -
बी.एस.सी. :-
1. जीव विज्ञान समूह :-

  1. प्राणी शास्त्र
  2. वनस्पति शास्त्र
  3. रसायन शास्त्र
कम्प्यूटर विभाग
बी.सी.ए. :-
न्यूनतम अहर्ता : में 12 वीं ( 10+2 ) उत्तीर्ण ( विज्ञान विषय को प्राथमिकता )
बी.एस.सी. :- ( कम्प्यूटर साइंस )
न्यूनतम अहर्ता : गणित विषय के साथ में 12 वीं ( 10+2 ) उत्तीर्ण

  1. भौतिक शास्त्र
  2. गणित
  3. कम्प्यूटर साइंस
  4. रसायन शास्त्र

कम्प्यूूटर संकाय

पी.जी.डी. सी.ए. :-

इस डिप्लोमा कोर्स हेतु इस पाठ्यक्रम में आयु सीमा का बंधन नहीं रहेगा।
विश्वविद्यालय के आदेशानुसार।
न्यूनतम अहर्ता : स्नातक
अवधि : एक - वर्ष (2 सेमेस्टर)
तो साथियों ये तो हुई इस कॉलेज में उपलब्ध विषय के बारे में जानकारी अब मैं बताने वाला हूँ इस कॉलेज में उपलब्ध सीट के सभी विषय में उपलब्ध सीट के बारे में

विभिन्न कक्षाओं में प्रवेशार्थियों के लिए निर्धारित सीट


  1. बी.ए. - 150
  2. बी.एस. सी. विज्ञान समूह - 120
  3. बी.एस.सी. कम्प्यूटर साइंस - 30
  4. बी.सी.ए. - 30
  5. पी.जी.डी. सी.ए. - 40

साथियों ये तो हुई संकाय के सीट के बारे में संक्षिप्त जानकारियां । अब आपको ले चलते हैं इस कॉलेज की फैसिलिटी की ओर -
यहाँ पर वे सभी फैसिलिटी उपलब्ध हैं , जैसे एक सामान्य कॉलेजों में होती है। यहाँ पर खेल-कूद की बात करें तो वे सभी खेल खेले जाते हैं जो कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाते हैं। यहां पर कबड्डी में ये तीन बार चैंपियन रह चुका है , इसके अलावा कॉलेज में बहुत से ऐसी एक्टिविटी होती रहती है जिससे आपके मानसिक विकास भी होता है।

स्कॉलरशिप का स्किम भी यहाँ पर लागू होता है क्योंकि ये पूर्ण रूप से सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त महाविद्यालय है।

ग्रन्थालय की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
इसके अलावा इस कॉलेज में खेल के लिए बहुत बड़ा मैदान है जिसमें क्रिकेट और फुटबॉल की प्रैक्टिस की जा सकती है।

मुफ्त Wi- Fi की सुविधा भी प्रदान किया गया है ।
इस महाविद्यालय के विवरण पुस्तिका में लिखे आदर्श वाक्य इस प्रकार है-
 विद्या ददाति विनयम विनियादि पात्रत्वाम।पात्रत्वाम धनाद धर्माह ततः सुखम।शैले शैले न मणिक्यम भौतिक्यम न गजै गजै ।साधवो न ही सर्वत्र चन्दनम न वनै-वनै। ।
इन सभी के अलावा और भी जानकारी या अपडेट रहना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें जो आपको उस वेबसाइट में ले जाएगा जिस पर इस कॉलेज के बारे में बहुत सारी जानकारियाँ उपलब्ध होती है ।

Saturday, October 27, 2018

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छत्तीसगढ़ का परिचय -

 छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित है
इस राज्य का अस्तित्व 1 नवंबर सन 2000 को राज्य के रूप में हुआ!

इस राज्य का कुल क्षेत्रफल 135198 वर्ग किलोमीटर है इस राज्य में 27 जिले हैं!



छत्तीसगढ़ की सीमाएं -

 इस राज्य के दक्षिण में आंध्र प्रदेश पूर्व एवं उत्तर पश्चिम में मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश पश्चिम में महाराष्ट्र उत्तर पूर्व में उड़ीसा झारखंड स्थित है!

छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियां - महानदी, खारुन नदी, अर्पा, pairi, हसदो और शिवनाथ है!

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति -

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति हमेशा से संपन्न रही हैं यहां पर विभिन्न अवसरों पर सुआ, करमा, नाचे, पंथी, नृत्य आदि किए जाते हैं!

धार्मिक नृत्य में जवारा, माता सेवा के नृत्य रहे हैं!

छत्तीसगढ़ भाषा -

मध्य काल में छत्तीसगढ़ के अनेक अंचलों में छत्तीसगढ़ी स्थानीय बोली के रूप में प्रचलित था

 वर्तमान में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है

प्रमुख कला केंद्र - छत्तीसगढ़ी कला के अनेक प्रमुख केंद्र है,
जैसे रतनपुर, शिरपुर राजिम, भोरमदेव, मल्हार, बस्तर और जगदलपुर आदि!

छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्यवसाय -

 मुख्य व्यवसाय कृषि यहां के अनेक लोग अपने आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय लघु उद्योग एवं कृषि के माध्यम से करते थे


छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ स्थल -

शिरपुर, आरंग, दंतेवाडा, रतनपुर ,शिवरीनारायण, राजिम, खल्लारी,  डोंगरगढ़ आदि स्थल है!

1. छत्तीसगढ़ देश का धान का कटोरा है

2. छत्तीसगढ़ राज्य का कुल क्षेत्रफल 135191 वर्ग किलोमीटर है!

3. छत्तीसगढ़ के गठन 1 नवंबर 2000 में हुआ!

4. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर है!

5. महानदी छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा के नाम से जानी जाती है!

6. छत्तीसगढ़ उष्णकटिबंधीय जलवायु वाला प्रदेश है!

Friday, October 26, 2018

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छत्तीसगढ़ : सामान्य ज्ञान
                   छत्तीसगढ़ की : मूलभूत जानकारी
1.भारतीय संघ मे राज्य का स्थान
2.स्थापना
3.भौगोलिक स्थिति
4.भौगोलिक सीमा
5.अधिकतम सीमा वाला राज्य
6.न्यूनतम सीमा वाला राज्य
7.जलवायु
8.राज्य की लम्बाई
9.राज्य की चौडाई
10.राजधानी
इन सभी का उत्तर =26 वा
1 नवम्बर,2000

17*46' उत्तरी अक्षांस से 24*5' उत्तरी अक्षांस तक तथा 80*15' पूर्वी देसांतर से 80*20' पूर्वी देशान्तर के मध्य तक ।                                                          6 राज्य (झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश)                                                                     ओडिसा
उत्तर प्रदेश
मुख्यतः उष्णाद्र तथा अर्ध आद्र प्रकार की
पूर्व से पश्चिम की ओर 140 किमी


उत्तर से दक्षिण की और 360 किमी
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प्रस्तावित नई राजधानी - नया रायपुर(कुठेर भाटा राखी गांव के समीप)
राजकीय पशु - वन भैंसा( बैबुलस ब्यूबैलिस )
राजकीय पक्षी - बस्तरिया पहाड़ी मैना ( ग्रेटि पेनिन्सुलेरिस )
राजकीय वृक्ष - साल
राज्य भाषा - हिन्दी तथा क्षेत्रीय भाषाएँ ( प्रमुखतः छत्तीसगढ़ी )
राज्य फसल - धान
राज्य खेल - हॉकी
उच्च न्यायालय - बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय )
क्षेत्रफल - 1,35,194 वर्ग किमी ( भारत के कुल क्षेत्रफल का 4.11% )
संभाग - 5 ( बिलासपुर,रायपुर,दुर्ग,बस्तर एवं सरगुजा )
जिले - 27
ग्राम - 20126
जिला पंचायत - 18
जनपद पंचायत - 146
आदिवासी विकासखंड - 85
ग्राम पंचायत - 9,734
विकास खंड - 146
तहसील --149
नगर - 182
नगर निगम - 10 (रायपुर,बिलासपुर,दुर्ग,भिलाई,कोरबा,राजनान्दगांव,जगदलपुर,राजगढ़,अम्बिकापुर,चिरमिरी)
नगर पालिका - 32
नगर पंचायत - 127
पुलिस रेंज - 4
पुलिस जिले - 20
मेजरो-टोलो-पारों की संख्या - 72 हजार
जनगड़ना नगर - 14
जनसंख्या - 2,55,40,196 (जनसंख्या की दृस्टि से देश का 16 वाँ राज्य ) ( वर्ष 2011 की जनगड़नानुसार )
लिंगानुपात - 991 प्रति हजार पुरुषों पर
जनसंख्या घनत्व - 189 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
अनुसूचित जाती - 24,18,722 (2001)
अनुसूचित जनजाति - 57,17,596 (20001)
सर्वाधिक जिलों वाला सम्भाग - रायपुर (10)
क्षेत्रफल मे सबसे बड़ा संभाग - बस्तर
क्षेत्रफल मे सबसे छोटा संभाग - बिलासपुर
जनसंख्या मे सबसे बड़ा संभाग - रायपुर
जनसंख्या मे सबसे छोटा संभाग - सरगुजा
क्षेत्रफल मे सबसे बाद जिला - राजनांदगाँव
क्षेत्रफल मे सबसे छोटा जिला - दुर्ग
जनसंख्या मे सबसे बड़ा जिला - बिलासपुर
जनसंख्या में सबसे छोटा जिला - सुकमा
प्रति व्यकि आय - ₹34,483 (2008-2009)
विद्युत उत्पादन - 7,8070.22 (मिलियन यूनिट)
विधानसभा क्षेत्र - 90 (सामान्य-54, अनुसूचित जाती-10 एवं अनुसूचित जनजाति-29)
लोकसभा क्षेत्र - 11 (सामान्य-6, अनुसूचित जाती-1, अनुसूचित जनजाति-4 )
राज्यसभा क्षेत्र - 5
वन क्षेत्र - 59,772 वर्ग किमी (44.2%)
देश के कुल वन क्षेत्र का राज्य में स्थित भाग - 12.2% (देश में तीसरे स्थान पर )
सर्वाधिक वन वाला जिला - सरगुजा
न्यूनतम वन वाला जिला - जांजगीर-चांपा
वर्षा - 1,328.88 मिमी
कृषि योग्य भूमि - 51.6%
शुध्द सिंचित क्षेत्र - 28%
शुद्ध बोया गया क्षेत्र - 4696 हजार हेक्टेयर
कुल बोया गया क्षेत्र - 5671 हजार हेक्टेयर
शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल - 1355 हजार हेक्टेयर
कुल सिंचित क्षेत्रफल - 1604 हजार हेक्टेयर
प्रमुख फसल - धान
टमाटर राजधानी - लुड़ेग
बहुउद्देशीय परियोजना - बांगोहसदो नदी
प्रमुख कारखाने - भिलाई स्टील प्लाण्ट,बाल्को,एन.टी.पी.सी.,सीमेन्ट फैक्ट्री
प्रमुख आय-स्रोत - धान,वन सम्पदा एवं खनिज सम्पदा
प्रमुख उध्धोग क्षेत्र - भिलाई ,बैलाडीला, कोरबा
रेलमार्ग - 1,108 किमी
कुल सड़क मार्ग - 33448.75 किमी
राष्ट्रीय मार्ग - 2,226 किमी (11 राष्ट्रीय राजमार्ग)
राज्य उच्च पथ - 5240 किमी
जिला सड़क - 10539.80 किमी
ग्रामीण सड़क-मार्ग - 15442.95 किमी
हवाई अड्डा - रायपुर (माना एयरपोर्ट)
हवाई पट्टी - 9 (भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जगदलपुर, अम्बिकापुर, रायपुर,जशपुर नगर एवं सारंगगढ़)
विश्वविधालय - 10
कृषि विश्वविधालय - 1 (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविधालय,रायपुर)
संगीत विश्वविधालय - 1 (इंदिरा संगीत विश्वविधालय, खैरागढ़)
इंजीनियरिंग महाविद्धालय - 16
पॉलिटेक्निक विद्यालय - 14
मेडिकल कॉलेज - 3
पशु चिकित्सा महाविद्धालय - 1( पशु चिकित्सा महाविद्धालय,अंजोरा,दुर्ग)
उद्धानिकी महाविद्धालय - (दंतेश्वरी उद्धानिकी महाविद्धालय,रायपुर)
जिला अस्पताल - 16
प्रमुख नदियां - महानदी,गोदावरी,नर्मदा,रिहन्द एवं इंद्रावती आदि
राष्ट्रीय उद्धान - 3 (इंद्रावती,कांकेर,घाटी,गुरु घासीदास)
वन्यजीव अभयारण - 11
प्रमुख धर्म - हिन्दू (88.68%)
आदुवासी समूह - 42
सर्वाधिक बड़ा आदिवासी समूह - गोण्ड
सर्वाधिक बड़ा नगर - रायपुर
सर्वाधिक बड़ी नदी - महानदी
सर्वाधिक उचि चोटी - गोरलाटा, सामरीपाट (सरगुजा) (1,225 मी)
सर्वाधिक उचा बांध - मिनीमाता बांगो परियोजना ,हसदो नदी (87 मी)
राज्य का प्रमुख ध्येय वाक्य - "सत्य तथा पारदर्शिता"
राज्य पुलिस वाक्य - "परित्राड़ाय साधुनाम"
राज्य नगर सेना वाक्य - "निष्काम सेवा"
राज्य का स्वास्थ्य नारा - "समृद्ध और स्वस्थ छत्तीसगढ़"
        इस जानकारी को मेरे द्वारा सामान्य ज्ञान को पढ़ कर लिखा गया है कोई भी त्रुटि होने पर मुझे मेल करें ।
मेरा gmail- khilawan9patel@gmail.com
                            धन्यवाद

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राज्य के सम्भाग
सन् 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय राज्य में तीन सम्भाग रायपुर, बिलासपुर तथा बस्तर हैं, जिन्हे अप्रैल 2008 में पुनर्गठन करके राज्य में चार सम्भाग रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, तथा सरगुजा बनाये गए |
                      राज्य के सम्भाग एवं संबंधित जिलें
1. रायपुर = रायपुर,बलौदा ,बाजार, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद
2. बस्तर = बस्तर, कोंडागांव, उत्तरी बस्तर{कांकेर},दक्षिण बस्तर {दंतेवाड़ा}, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर
3. बिलासपुर = बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चाम्पा,रायगढ़
4. सरगुजा = सरगुजा,सूरजपुर,बलरामपुर,कोरिया,जशपुर
5. दुर्ग = दुर्ग, कबीरधाम, राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा
                                              राज्य के जिले
1 नवम्बर, 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय राज्य में 16 जिले सामिल थे |
1 मई, 2007 में नारायणपुर एवं बीजापुर नामक दो नए जिलों का निर्माण किया गया |
1 जनवरी, 2012 में नव नए जिलों के गठन के साथ ही राज्य में कुल जिलों की संख्या 27 हो गई है |
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36गढ़ो के बीच सुरक्षित विकास की अदम्य आकांक्षा को दर्शाता गोलाकार चिन्ह, जिसके मध्य में भारत का प्रतीक चिन्ह अशोक स्तम्भ, आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते, राज्य की प्रमुख  फसल धान की सुनहली बालियों, भरपूर ऊर्जा के प्रतीक के बीच राष्ट्र ध्वज के तीन रंगों के साथ छत्तीसगढ़ की नदियों को रेखांकित करती लहरें हैं |
राजकीय व्रिक्ष = साल |
राजकीय पशु = वन भैंसा |
राजकीय पक्षी = बस्तरिया पहाड़ी मैना |


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1. बालोद =दुर्ग
2.गरियाबंद = रायपुर
3.मुंगेली = बिलासपुर
4.बेमेतरा = दुर्ग
5.सुकमा = दन्तेवाड़ा
6.बलरामपुर-रामानुजगंज = सरगुजा
7.बालौदा बाजार-भाटापारा = रायपुर
8.सूरजपुर = सरगुजा
9.कोंडागांव = बस्तर
               दोस्तों आज मैंने आप सभी को  बताया राज्य के उन नए जिलों के बारे मे जिनका निर्माण सन 2012 को हुआ था |
अब मैं आप सभी को बताने ज रहा हूँ, छत्तीसगढ़ के 27 जिलों के नाम और उनके मुख्यालय के नाम के बारे मे तो चलो जाने,
1. रायपुर = रायपुर
2. बिलासपुर = बिलासपुर
3. दुर्ग = दुर्ग
4. रायगढ़ = रायगढ़
5. बस्तर = जगदलपुर
6. सरगुजा = अम्बिकापुर
7. राजनान्दगांव = राजनांदगांव
8. कांकेर = कांकेर
9. दन्तेवाड़ा = दन्तेवाड़ा
10. कोरिया = बैकुण्ठपुर
11. जशपुर = जशपुर नगर
12. कोरबा = कोरबा
13. जांजगीर-चाम्पा = जांजगीर
14. धमतरी = धमतरी
15. महासमुंद = महासमुंद
16. कबीरधाम = कवर्धा
17. नारायणपुर = नारायणपुर
18. बीजापुर = बीजापुर
19. बालोद = बालोद
20. गरियाबंद = गरियाबंद
21. मुंगेली = मुंगेली
22. बेमेतरा = बेमेतरा
23. सुकमा = सुकमा
24. बलरामपुर-रामानुजगंज = बलरामपुर
25. बालौदा बाजार-भाटापारा = बलौदा बाजार
26. सूरजपुर = सूरजपुर
27. कोंडागांव = कोंडागांव
          क्या आप डेली अपडेट रहना चाहते हैं तो PLEASE WISIT KARTE RAHE
                  THANK"S FOR RIDING.....................
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आप सभी का फिर से ए बार स्वागत है है दोस्तों आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ छत्तीसगढ़ की एक खास पहचान के बारे में जिसे आप लोकोक्ति कहते है दोस्तों आज के इस आधुनिक युग में हर किसी के पास इतना समय नहीं है की वह छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति या गीत को पढ़े तो चलिए शुरुवात करते हैं छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति से -
छितका कुरिया मा बाग गुर्राए  -  इस छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति का अर्थ होता है कोई भी हो वह अपने इलाके में शेर की तरह गुर्राने लगता है |
छिटका पानी बैरी तिर के बास निंदिया तिर के रुखवा एक दिन होए विनास   -    इस पंक्ति का मतलब ये होता है की जिस प्रकार सिर्फ पानी के छीटे सेे तथा नदिया ( नदी ) केे पास लगे वृृृक्ष का एक दिन विनास हो जाता है उसी प्रकार दुुुुश्मन के नजदीक निवास करने वालेे का भी एक दिन विनास हो जाता है अर्थात बर्बाद हो जाता है। 
अब आपके सामने एक छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत है -
मुनगा फूले रे सुहावन , फुले रे लाली परसा अउ फुले तोर मोंगरा  I
चन्दा संग संग तारा हो , राम लखन दोनो प्यारा हो I
चन्दा संग संग तारा हो I
मंदारी आगे गांव मां भलवा ल लेके,
डमरू बजाए खेल देखाए ,
जुरीयाए हावय गांव भर के ,,,
मंदारी आगे गांव मे भलवा ल लेके,
जुरीयाए हावे गांव भर के ।
हरि हरि गोविंद बोल रे मनवा, हरी हरी गोविंद बोल,  मुरली मनोहर किसन कनहियां अपने हृदय का पट खोल रे मनवा I
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1. लौह अयस्क की प्रसि डल्लीरजहरा खदान बालोद जिले मे है I इस खदान से लौह             अयस्क भिलाई के इस्पात कारखाने को भेजा जाता है I
2. कपिलेस्वर मंदिर, सियादेई मंदिर तथा तांदुला जलासय बालोद जिले मे है I
3. हिरा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध खदाने बेहराडिह, पयलिखंद गरियाबंद जिले में है I
4. गरियाबंद जिले की प्रमुख सिचाई परियोजना सिकासार है I
5. घटारानी, गोडेना तथा देवधारा जलप्रपात गरियाबंद जिले में है I
6. वनभैंसा के लिए प्रशिद्ध उदयांति  अभ्यारण गरियाबंद जिले मे है I
7. राजिम कुम्भ के लिए प्रसिद्ध राजिम तथा राजीवलोचन मंदिर, सोमेश्वर मंदिर गरियाबंद जिले में है I
8. विशेस पिछड़ी जनजाति कमार एवं मुरिया जनजाति गरियाबंद जिले में रहती है I
9. खुडिया जलासय मुंगेली जिले मे स्थित है I
10. अचानकमार टाइगर रिजर्व मुंगेली जिले में अवस्थित है I
11. आगर महोत्सव मुंगेली जिले में आयोजित किया जाता है I
12. सेतगंगा प्रसिद्ध तीर्थस्थल मुंगेली जिले में है I
13. प्रसिद्ध ईसाई धर्म स्थल एवं मसीही मेला का आयोजन स्थल मदकू द्वीप मुंगेली जिले में है I
14. दुरमा जल प्रपात मुंगेली जिले में है I
15. भड़िया, बेनगंगा एवं झरिया जल प्रपात बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में है I
16. सेमरसोत, तोमर पिंगला अभ्यारण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले मे है I
17. गर्म पानी का स्रोत तातापानी बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में है I
18. बलरामपुर-रामानुजगंज में प्रसिद्ध प्राकृतिक गुफाएं अर्जुनगढ़ एवं आरा पहाड़ में स्थित हैं I
19. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से कर्क रेखा गुजरती है I
20, बार नवापारा अभ्यारण बालोदा बाजार भाटापारा जिले में स्थित है I
21. चुना पत्थर एवं सीमेंट सीमेंट कारखानों के लिए बलोदा बाजार-भाटापारा जिला प्रसिद्ध है I
22. गुरु घंसिदास का जन्म गिरौदपुरी [ बलौदा बाजार-भाटापारा जिला ] में हुआ था I
23. महर्षि बाल्मीकि का आश्रम स्थल  तुरतुरिया बलोदा बाजार-भाटापारा जिले में। अवस्थित है I
24. रक्सगंडा जलप्रपात सूरजपुर जिले में स्थित है I
25.सूरजपुर जिले से कर्क रेखा गुजरती है I
26. सूरजपुर जिले के भैयाथान स्थल पर ताप विधुत केंद्र का निर्माण किया जा रहा है I
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CHHATTISGARH RAJYON KE KHANIJ WITRAN
                   क्या आपको पता है छत्तीसगढ़ के राज्यों के खनिज वितरण के बारे में नही तो आओ जाने उन राज्यो के नाम और जगहों के बारे मे..,,,,,,,,,,,
छत्तीसगढ़ में कहाँ कहाँ किस प्रकार के खनिज पाये जाते हैं।
Chhattisgarh

खनिज                                                                                                          प्राप्ति स्थल
1. लौह अयस्क = बस्तर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर, बिलासपुर
2. बॉक्साइट = बिलासपुर, सरगुजा, रायगढ़, बस्तर, राजनांदगांव, कोरबा, कवर्धा
3. चुना पत्थर = रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, दुर्ग
4.डोलोमाइट = बिलासपुर,दुर्ग,बस्तर,जांजगीर-चांपा,रायगढ़,रायपुर
5. सोना = बस्तर,सरगुजा,राजनांदगांव
6. अभ्रक = बस्तर , जसपुर
7. एस्बेस्टॉस = बस्तर,दुर्ग
8. बेरील = बस्तर,सरगुजा,रायगढ़,रायपुर
9. कवार्टजाइड = राजनांदगांव,दुर्ग,दंतेवाड़ा,रायगढ़
10. मैंगनीज = बिलासपुर,बस्तर
11. टिन अयस्क = बस्तर,दन्तेवाड़ा
12. सीसा अयस्क = दुर्ग,रायपुर,दन्तेवाड़ा
13. फ्लूओराइद =राजनांदगांव, रायपुर,रायगढ़
14. क्वार्ट्ज = बस्तर,बिलसपुर,राजनांदगांव
15. फेल्सपार = बिलासपुर,रायगढ़
16. कोरण्डम = रायपुर,दंतेवाड़ा
17. हिरा = रायपुर,बस्तर
18. गेरु = बस्तर,रायगढ़,राजनांदगांव
19. टाल्क = बस्तर,दुर्ग,राजनांदगांव,सरगुजा
20. संगमरमर = बस्तर
21. स्फटिक = राजनांदगांव
22. चीनी मिट्टी = राजनांदगांव
23. क्ले = बस्तर,बिलासपुर,रायगढ़
24. यूरेनियम = सरगुजा, बिलासपुर
25. खनिज जल = सरगुजा
26. सिलिमैनाइट = बस्तर,दन्तेवाड़ा
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धान का कटोरा कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ आर्य और अनार्य संस्कृतियों का संगम स्थल रहा है I विभिन्न स्रोतों से ज्ञात होता है की छत्तीसगढ़ का इतिहास मौर्य काल से प्राचीन नही है , लेकिन किवदंतियों तथा महाकाव्यों से जैसे रामायण महाभारत से ज्ञात होता है की छत्तीसगढ़ प्राचीन कल से ही अथवा त्रेता युग से ही भारत की राजनीतिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों से किसी न किसी रूप से संबद्ध है I
                            प्रागैतिहासिक काल 
वह काल जिसके लिए कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है तथा उस समय मानव कम सभ्य था, प्रागेतीहासिक काल कहलाता है I प्रागैतिहासिक मानव इतिहास की उस अवधि के लिए प्रयुक्त होता है , जिसमें लेखन की व्यवस्था। न थी I इस अर्थ मे आदि कालिन समाज के कल को ' पूर्व इतिहास ' कहते हैं I
वैदिक काल 
वैदिक काल की जानकारी देने वाले ग्रन्थ ऋग्वेद मे छत्तीसगढ़ की कोई जानकारी नही मिलती हैं  I
महाकाव्य काल 
वाल्मीकि कृत 'रामायण ' के अनुसार , राम की माता कौशिल्या राजा भानुमंत की पुत्री थी I 'कोशल खण्ड ' नामक एक अप्रकाशित ग्रन्थ से ये जानकारी मिलती है की विंध्य पर्वत के दक्षिण मे नागप्ततन के पास कोशल नामक एक शक्तिसाली राजा था I इसके नाम पर ही इस छेत्र का नाम कोशल पड़ा था I
राजा कोशल के रजवंस मे भानुमंत नामक राजा हुआ, जिसकी पुत्री कौशिल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था I भानुमंत का कोई पुत्र नही था, अतः कोशल [छत्तीसगढ़] का राज्य राजा दशरथ को प्राप्त हुआ I अतः राजा दशरथ के पूर्व ही इस क्षेत्र का नाम 'कोशल ' होना प्राप्त होता है I
माहाजनपद काल 
भारतीय इतिहास मे छटी शताब्दी ई. का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इसी समय से भारत का सुबयवस्थित इतिहास मिलता है I
इसके साथ ही यह बुध्द एवं माहाविर का इतिहास काल है I
इसमें देश अनेक जनपदों एवं महाजनपदों मे विभक्त था I
छत्तीसगढ़ का वर्तमान क्षेत्र भी [ दक्षिण ] कोशल के नाम से एक पृथक प्रशासनिक इकाई था , मौर्यकाल के पूर्व के सिक्कों की प्राप्ति से इस अवधारणा की पुष्ठी होति है I
'अवदान शतक ' नामक ग्रन्थ के अनुसार , महात्मा बुद्ध दक्षिण कोशल आये थे तथा तीन महीनों तक यहां की राजधानी मे परवाश किया था I
ऐसी जानकारी बौद्ध यात्री हैंनसांग के यात्रा वरीत्तान्त से भी मिलता है I
मौर्यकाल 
प्राचीन ध्वंसावसेसों, पुराणों और शिलालेखों से ज्ञात होता है की इस राज्य पर बौद्ध राजाओ का आधिपत्य था I
इस  क्षेत्र का इतिहास स्वावलंबी न होकर बहुत कुछ परावलम्बी है , क्योंकि यहां बहुधा ऐसे लोगों ने सासन किया है I
मौर्य सम्राट अशोक ने दक्षिण कोसल की राजधानी मे स्तूप का निर्माण करवाया था I इस काल के दो अभिलेख सरगुजा जिले मे मिलते हैं I
इससे यह प्रमाणित होता है की दक्षिण कोशल [ छत्तीसगढ़ ] मे मौर्य वंश का शासन रहा , जिसका काल 323 से 184 ई. पु. के बीच रहा है I
उत्तर मौर्य काल
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत के विभिन्न भागों मे चार प्रमुख राजवंसों का उदय हुआ , जो इस प्रकार हैं
मगध राज्य जहां ' शुंगों ' का प्रभाव था I
कलिंग का राज्य, जहां चेदि वंश की सत्ता कायम हुई I
दक्षिण-पथ में सातवाहन का राज्य था I
पश्चिम भाग में यवनों के प्रभाव का। उदय I
सातवाहन वंश 
मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात दक्षिण भारत में सातवाहन राज्य की स्थापना हुइ I दक्षिण कोशल का अधिकांश भाग सातवाहनों के क्षेत्र मे था I
इस वंश के शासक अपने को दक्षिण पथ का श्वामि कहते थे I इस वंश मे अनेक शासक साम्राज्यवादी प्रवित्ति के थे I शातकर्णि प्रथम ने अपने राज्य का विस्तार जबलपुर तक किया I
इस प्रकार त्रिपुरी सातवाहनों के प्रभाव मे आ गया I
सातवाहन कालीन सिक्के बिलासपुर जिले मे पाये गए है I इनके शासन काल में आर्य संस्कृति का विस्तार दक्षिण मे वयापक रूप से हुआ I
यह कल 200  ईसा पूर्व से 60 ईशा पूर्व के मध्य का है I सातवाहन राजा अपीलक की एकमात्र मुद्रा रायगढ़ जिले के ' बालपुर ' नामक स्थल से प्राप्त हुई है I
मेघ वंश
सातवाहनों के पश्चात कोशल में मेघ नामक वंश ने राज्य किया I पुराणों के विवरण से ज्ञात होता है की गुप्तों से उदय के पूर्व कोशल में मेघ वंश ने राज्य किया I सम्भवतः इस वंश ने द्वितीय शताब्दी ई . तक राज्य किया I
वाकाटक काल
सातवाहन के पतन के पश्चात वाकाटकों का अभ्युदय हुआ I वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन द्वितीय के बालाघाट ताम्र पत्र से ज्ञात होता है की उसके पिता नरेंद्र ने कोशल के साथ मालवा और मैकाल मे अपना अधिकार स्थापित कर लिया था I नरेंद्रसेन और प्रिथविसेन द्वितीय का संघर्ष बस्तर कोरापुट क्षेत्र में राज्य करने वाले नल शासकों से होता रहा I नल शासक भवदत्त वर्मा ने नरेंद्र की राजधानी नन्दीवर्धदन [ नागपुर ] पर आक्रमण कर उसे पराजित किया था , किन्तु उसके पुत्र प्रिथविसेन द्वितीय ने इसका बदला लिया और भवदत्त के उत्तराधिकारी अर्थपति को पराजित किया I सम्भवतः इस युद्ध मे अर्थपति की मृत्यु हो गयी थी I कालांतर मे वाकाटकों के वट्सगुल्य शाखा के राजा हरिसेन ने दक्षिन कोसल क्षेत्र मे अपना अधिकार स्थापित किया I
गुप्तकाल 
उत्तर भारत मे शुंग एवं कुषाण सत्ता के पश्चात गुप्त वंश ने राज्य किया तथा दक्षिण भारत में सातवाहन शक्ति के पराभव के पश्चात गुप्त राज्य वंश की स्थापना हुई I चौथी सदि में समुद्रगुप्त गुप्तवंश का एक अत्यंत ही परभावशालि और साम्राज्यवादी शासक हुआ I उसने संपूण आर्यावर्त को जितने के पश्चात दक्षिण पथ की विजय यात्रा की I उसने दक्षिण कोशल के शासकों महेंद्र और व्याघ्रराज {बस्तर शासक } को पराजित कर आगे परथान किया इन शासकों ने गुप्त शासको की आधीनता स्वीकार कर अपने अपने क्षेत्र मे शासन किया I
राजर्षितुल्य वंश
पांचवी सताब्दी के आसपास दक्षिण कोशल में राजर्षितुल्य नामक नागवंश का शासन था I इसके प्रमाण आरनग से प्राप्त ताम्र पत्र गुप्त सम्वत 182 या 282 से मिलता है I उससे राजर्शितुल्य वंश के शासक भीमसेन द्वितीय का पता चलता है I महाराज सर ने इस वंश की वंशावली आरम्भ की I
परवतद्वारक वंश 
महाराज तुष्टिकर के तेरासिंघा ताम्र पत्र से तेल घाटी मे शासन करने वाले राव वंश के विषय मे जानकारी मिलती है I इस लेख से पता चलता है की इस वंश के लोग स्तम्भस्वरी देवी के उपासक थे , जिसका स्थान पर्वतद्वारक मे था , जिसकी समानता कालाहांडी जिले के पर्थला नामक स्थल की जाती है I परवतद्वारक वंश का नाम इसी आधार पर पड़ा था , जिसके अधिकार क्षेत्र मे दक्षिण कोशल का दक्षिणी भाग आता था I
शर्भपुरीया वंश
इस वंश का संस्थापक सर्भ नामक राजा था I सर्भ का उत्तराधिकारी उसका पुत्र नरेंद्र हुआ , जिसके काल का ताम्र पत्र कुरुद से प्राप्त हुआ I प्रसन्नमात्र इस वंश का प्रतापी  राजा था , जिसके समय के सोने के सिक्के छत्तीसगढ़ के कई स्थानों से मिले हैं I इस वंश का अंतिम नरेश प्रवरराज था I
नल नागवंश
बस्तर जिले के अड़ेगा से प्राप्त स्वर्ण मुद्राएं यह प्रमाणित करती हैं कि बस्तर कोरापुट अंचल में नलवनशिय शासकों का शासन था I नल नागवंश की स्थापना शिशुक ने सम्भवतः 290 ई. में की थी I इस वंश का प्रतापी शासन भवदत्त वर्मन था , जिसने इस वंश की सत्ता का विस्तार किया I दसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में कलचुरियों के आक्रमणों से पराजित होने के कारण नल शासक सत्ता विहीन हो गए I
बाल वंश 
बिलासपुर से 12 मिल उत्तर में पाली नामक स्थल के मन्दिर के गर्भ गृह के द्वार में उत्कीर्ण लेख से ज्ञात होत्या हैं की इस मंदिर का निर्माण महामण्डलेश्वर मल्लदेव के पुत्र विकर्मादिय के द्वारा किया गया था I विक्रमादित्य को बाण वंश का राजा माना जाता है , जिसका काल नॉवि शताबदी माना गया है I
सोम वं
सोम वंश के शिवगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी उसका पुत्र महाभवगुप्त प्रथम हुआ
इसने ' कौशलेन्द्र ' और त्रीकलिंगापति की उपाधि धारण की थी I
इसने सुवर्णपुर, मुरसीम, आराम आदि स्थानों मे राजधानी परिवर्तित की थी I
महाशिवगुप्त का उत्तराधिकारी ययाति प्रथम था I
पांडव वं
अमरकंटक के आस पास का क्षेत्र मैकाल के नाम से जाना जाता है I
यह पाण्डुवंशियों की एक शाखा के राज्य करने के विषय में शरतबल के बहमनी ताम्रपत्र से जानकारी मिलती है I
प्रारम्भिक दो राजाओं जयबल तथा वत्सराज के साथ कोई राजकीय उपाधि प्रयुक्त नहीं हुई है I इसके बाद नागबल के लिए महाराज उपाधि का प्रयोग किया गया है I
इसके पुत्र भर्टबल के समय का ऊपर उल्लेखित ताम्रपत्र में इसकी रानी लोकपरकासा का उल्लेख है , जो नरेंद्र की बहन थी I
इस नरेंद्र को शर्भमपुरीय शासक नरेंद्र से समीकृत किया गया है I
बाण वंश 
छत्तीसगढ़ में पाण्डु वंशी सत्ता की समाप्ति में बाणवनशीय शासकों का भी योग था I
कोरबा जिले में पाली नामक स्थल में मंदिर के गर्भगृह के द्वार में उत्कीर्ण लेख से ज्ञात होता है की इस मंदिर का निर्माण महामण्डलेस्वर मल्लदेव के पुत्र विक्रमादित्य द्वारा किया गया था I
विक्रमादित्य को बाण वंश का राजा माना गया है , जिसका काल 870 से 895 ई. माना गया है I
बाणवंशी शासकों ने सम्भवतः दक्षिण कोशल के सोमवंशियों को बिलासपुर क्षेत्र में पराजित किया था I
कालांतर में कलचुरी शासक शंकरगण द्वितीय मुग्धतुन्ग ने इनसे पाली क्षेत्र जीत लिया और अपने भाइयों को इस क्षेत्र में मण्डलेशवर बनाकर भेजा , जिन्होंने दक्षिण कोशल में कलचुरी राजवंश की स्थापना की I
इन सभी के अलावा मुख्य पॉइंट्स निम्न है
चीनी यात्री हैंनशांग ने सिरपुर को ' किया-स-लो ' के नाम से उल्लेखित किया है I
ईशानदेव का का उल्लेख खरोद { बिलासपुर } के लक्षमनेस्वर मंदिर के सिलालेख में मिलता है  I
अजन्ता अभिलेख में नरेंद्र सेन के चचेरे भाई हरिषेण को कोशल , कलिंग और आंध्र का विजेता बताया गया है I
रोम के सोने के सिक्के बिलासपुर और चकरबेढ़ा नामक गांव से प्राप्त हुई है I