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Tuesday, September 24, 2019

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Hindi blogs kya hai


Hay welcome friends आज मैं बात करने वाला हूं हिंदी ब्लॉग्स के बारे में क्या होते हैं हिंदी ब्लॉग्स और हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास के बारे में मैं इस पोस्ट में चर्चा करने वाला हूं।
हिंदी ब्लॉग्स ऐसे ब्लॉग्स होते हैं जिनमें हिंदी शब्द हिंदी भाषा का उपयोग किया जाता है इसमें संपूर्ण जानकारी हिंदी में लिखने की कोशिश की जाती है।
हिंदी ब्लॉग्स में हिंदी को सपोर्ट करने वाले टूल्स का उपयोग किया जाता है जिसकी मदद से ब्लॉक को लिखा जाता है।


Hindi blogs ka itihaas

हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास की बात करें तो यह बहुत पुराना नहीं है क्योंकि हिंदी भाषा को कंप्यूटर और इंटरनेट में आए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। हिंदी ब्लॉग की शुरुआत सबसे पहले एक भारतीय इंजीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया था जिनका नाम आलोक कुमार है।
आलोक कुमार ने ही सबसे पहले हिंदी ब्लॉगर के रूप में एक ब्लॉग किस शुरुआत की जिनका ब्लॉग blogspot.com पर hosted था। जिनके ब्लॉग का नाम 9211.Blogspot.com था। फिर बाद में उन्होंने इस ब्लॉक का नाम चेंज करके http://www.devanaagarii.net/ पर divert कर दिया था। जो कि अभी वर्तमान में सक्रिय है। लेकिन 9211.blogspot.com भी सक्रिय है।




hindi blog kya hai


हिंदी भाषा के विकास के लिए इंटरनेट में बहुत से ग्रुप और समूह का निर्माण किया गया जिसे की हिंदी का विकास हो सके और हिंदी ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
इसी कड़ी में अक्षर ग्राम नेटवर्क नाम के एक संस्था का विकास हुआ जो कि कंप्यूटर में इंटरनेट में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए चालू किया गया था और अभी यह सक्रिय नहीं हैं।
हिंदी ब्लॉग्स के प्रचार के लिए विभिन्न में समूह जैसे नारद, सर्वज्ञ, परिचर्चा की शुरुआत की गई थी जो कि हिंदी ब्लॉगर्स के लिए एक अत्यंत ही सुविधाजनक स्थान था जहां से वे हिंदी ब्लॉग के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकते थे और आपस में चर्चा कर सकते थे इनमें से कई सेवाएं जो कि गूगल पर बनाएंगे थे वे अभी भी सक्रिय हैं और कई बंद हो चुके हैं।
हिंदी ब्लॉगर्स की संख्या को बढ़ाने के लिए गूगल में ग्रुप बनाया गया था और ब्लॉग प्रहरी डॉट कॉम के नाम से भी एक समुदाय बना था जो कि अभिषेक लिए नहीं आएगा पेचकस डाक सूची ए नाम से गूगल में समूह भी बनाया गया है और फिकर में हिंदी ब्लॉगर्स का ग्रुप को ही बनाया गया है और यूट्यूब में बनाया गया जो ग्रुप था वहां भी सक्रिय नहीं हैं तो इस प्रकार हिंदी का विकास इंटरनेट पर बहुत ही तीव्र गति से तब हुआ जब 2007 में कैसे सॉफ्टवेयर का विकास हुआ जो कि हिंदी सपोर्ट करते थे और 2008 में सबसे ज्यादा हिंदी ब्लॉग्स के विकास को बल मिला।





भारत में Hindi blogger की संख्या अभी काफी बढ़ चुकी है और लोग अब हिंदी में ज्यादा ब्लॉगिंग करने लगे हैं जो अंग्रेजी ब्लॉगर थे वह भी आप हिंदी में ब्लॉगिंग करने लगे हैं जिससे और लोग को फायदा हो रहा है।
साउथ मिलावट एक अंग्रेजी ब्लागर हैं जिसमें इंग्लिश में पोस्ट को पब्लिश किया जाता है लेकिन Sout me loud ने हिंदी में भी ब्लॉक चालू किया है जिसका नाम उन्होंने sout me hindi रखा है। हर्ष अग्रवाल इनके ओनर हैं।


Conclusion

हिंदी भाषा में सबसे पहला पोस्ट 21 अप्रैल 2003 को किया गया था और यहां पहला पोस्ट था जो हिंदी में था। इस पोस्ट को आलोक कुमार ने लिखा था।इस प्रकार हिंदी भाषा में ब्लॉग्स की शुरुआत काफी लेट से हुआ है तो अभी हिंदी में काफी उम्मीदें हैं।
फिलहाल इस पोस्ट में इतना ही मिलते हैं अगले पोस्ट में।

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Tuesday, January 8, 2019

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Hi friends how are you today, साथियों आप लोगों का स्वागत है मेरे ब्लॉग पर हमने अपने एक पिछले पोस्ट में GOOGLE CHROME का Review लिखा था और आज मैं उसके Settings के बारे में पोस्ट लिख रहा हूँ तो चलिए जानते है की Google Chrome में क्या-क्या settings होता है ?
पिछले पोस्ट में मैंने इसका Review लिखा था जिसे पढ़कर आप इसके बारे में और भी ज्यादा जान सकते हैं तो चलिए शुरू करते हैं-

GOOGLE CHROME SETTINGS IN HINDI

सबसे पहले जब हम Google Chrome  को Open करते है तो हमें default रूप से गूगल हमे दिखता है। अब हमें सेटिंग करनी है तो हम इसके लेफ्ट साइड में स्थित तीन डॉट वाले Menu Button का उपयोग करते हैं। जिसमें settings के और भी बहुत सारे option होते है जो की आपको नीचे फोटो में दिख रहा है-
इस प्रकार हमें गूगल क्रोम के सेटिंग में जाना है फिर उसमें इस प्रकार का डिस्प्ले होता है -
जब हम गूगल क्रोम के सेटिंग को ओपन करते हैं तो उसके सबसे ऊपर में जो ऑप्शन होता है वह गूगल अकाउंट का होता है ये वहीं गूगल अकाउंट होता है जिसे हम Gmail के नाम से जानते है ये आपके मोबाइल में तब Show होता है जब आपके द्वारा गूगल क्रोम में Login हुआ रहता है। इस Syncing to ऑप्शन में जब अंदर जाते हैं तो हमें singned in to Google as का ऑप्शन मिलता है जहां हम Sign out of chrome का उपयोग करके वहां से साईन आउट भी कर सकते हैं।

इसके अलावा हम Add account का उपयोग किसी अन्य google account को Add करने के लिए करते हैं।

How to control google activity in chrome

इसके Just नीचे आपको Sync का ऑप्शन मिलता है जिस पर आप अपने Bookmark, History, Passwords और other Settings को अपने सभी डिवाइस के On या off कर सकते हैं। जिससे क्या होता है आपके द्वारा सर्च किया गया सभी प्रकार का हिस्ट्री या बुकमार्क या अन्य सेटिंग आपके सभी डिवाइस पर लागू हो जाता है।

How To Set search Engine in google chrome

इसके बाद हमारा Basic Setting होता है जिसके अंदर हमें Search engine को सेट करने का Option है जिसमें पहले से Google सर्च इंजन सेट होता है। और इसके अलावा Difault रूप से अन्य सर्च इंजन के नाम भी वहाँ पर होता है और जो सर्च इंजन होता है उसे वहां सेट भी कर सकते हैं सबसे पहले जब आप सर्च करेंगे तो डिफ़ॉल्ट रूप से सेट Search Engine पर ही हमारा browser search करेगा। इसमें Difault रूप से Google, Yahoo, Bing, Ask, AOL होते हैं जिसमें से आप एक choose कर सकते हैं। 

How to backup passwords in google chrome

कई बार ऐसा होता है की हम किसी वेबसाइट में Login करके उसका पासवर्ड भूल जाते है। और अगर आप यदि Histry Clear नहीं किये होते हैं तब आपको Password देखने के लिए Search engine के नीचे Passwords Option पर क्लिक करते हैं यहां क्लिक करने पर आपको आपके द्वारा लोगिन किये गए वेबसाईट का नाम और उस वेबसाइट के आईडी और पासवर्ड लिखा होता है। यहाँ से आप पासवर्ड रिकवर कर सकते हैं। 
How to set payment methods and remove this
इस option में क्लिक करने पर आपको Add card का Option मिलता है और इस कार्ड को हमेशा के लिए automatic fill करने के लिए on कर सकते हैं और फिर जब चाहे इस Option बंद कर सकते हैं।

How to save or remove addresses and more

साथियों आप सभी ने कई बार ये जरूर देखा होगा की कई बार जब हम कोई form fill करते हैं तब उसमें पहले कई सारे आपको डालने के लिए आते हैं। इसमें phone numbers , email addresses and shipping addresses आदि मिलते हैं। जो की इसमें save होते हैं।
How to set Home page on google chrome
Google chrome पर आप अपने हिसाब से Home page set कर सकते हैं इस Option में एक Button मिलता है। जिसे आप on कर सकते हैं। जब आप गूगल क्रोम ऑन करते हैं तब ये सर्च इंजन द्वारा ऑटोमेटिक ओपेन हो जाता है। जिसे होम Page कहते हैं।

Advanced setting

इस पर बहुत सारे सेटिंग आपको मिलते हैं जैसे की privacy , Accessibility, Site settings, Languages, Data Saver, Downloads, About Chrome इस Option का use करके आप अपने Browsing Experince को बढ़ा सकते हैं। अब आपको इसके बारे में पूरे विस्तार से बताता हूँ-

Privacy

इस Tabe में जाने पर आपको बहुत सारे टिक वाले Option मिलते है जिसे On या Off करने के लिए मात्र टिक करना होता है तो इसमें क्या क्या Options  होते हैं ?

Navigation error suggestions - इस Option को on करने पर आपको किसी Network के खराब होने पर उसके कारण को suggest किया जाता है। ये तभी दिखाई देता है तब जब आप इसे on करते हैं।
search and url suggestions - जब आप इंटरनेट पर या गूगल पर कोई वेबसाईट सर्च करते हैं तब आपको बहुत सारे वेबसाइट के नाम के लिंक आपको सर्च बार के नीचे मिल जाते है इसी की सेटिंग के लिए ये Option दिया होता है इसे ये default रूप से on ही होता है और इसके On होने पर यह बहुत आसान हो जाता है की हमें कौन से वेबसाइट में जाना चाहिए क्योकि ये सिर्फ आपके द्वारा ज्यादा सर्च किये गए Option को दिखाता है और ज्यादा Popular Website को दिखाता है। जिसे आप टच कर उसे सर्च कर सकते है या ब्राउज़ कर सकते हैं।

Help and Improve safe Browsing -  ये Option पहले से Off होता है लेकिन अगर आप चाहे तो इसे On भी कर सकते हैं। ये option आपको इसलिए दिया जाता है ताकि आपके द्वारा दिए गए Information  के हिसाब से इस Browser को Improve किया जाता है। ये आपके system के Information and page content को Google को send करता है क्योकि ये Google का प्रोडक्ट है इसलिए। आपके द्वारा भेजे गए डाटा के हिसाब से ये आपके सर्च एक्सपीरियेन्स को बढ़ाता है।

Safe Browsing - ये Option हमेशा on होता है और ये आपके Device सुरक्षा के लिए  ON होता है। ताकि आप किसी Dangerous site से बच सके आप चाहे तो इसे off भी कर सकते हैं। लेकिन सुरक्षा खो देंगे इसे ऑफ करने के बाद।

Use page Predictions - ये option आपके browsing speed को बढ़ाने के लिए दिया जाता है इस ऑप्शन के ऑन होने पर आपके द्वारा सर्च किये गए Page पहले से Load हो गया होता है और Load होने के बाद ऑफ़लाइन Reading में भी काम आता है।

Access Payment Methods - ये आपके द्वारा save किये गए Payment option को ग्रहण ( Access ) करने देता है किसी वेबसाइट को जिसमें आप पेमेंट करना चाहते हैं। ये आपके payment option को read कर वहां जा सकता हैं। ये on होता है ताकि बार बार आपको पेमेंट के लिए कार्ड नम्बर अप्लाई ना करना पड़े। इसे आप चाहें तो ऑफ भी कर सकते हैं।

Usage and crash reports - जब आप GOOGLE पर कोई साइट सर्च करते हैं और वो Crash हो जाता है या फिर आप जब उसका use करते हैं तो उसकी Report ये Google को भेजता है। जिससे आपका सर्च एक्सपीरियेन्स बढ़ जाता है। ये डिफाल्ट रूप से on होता है इसे आप ऑफ भी कर सकते हैं। लेकिन जब कोई प्रॉब्लम होगी तो ये आपके प्रोब्लेम को solve नहीं करेगा क्योकि आप OFF कर देंगे तो उसके Report गूगल तक नहीं पहुंच पायेगा।

DO NOT TRACK -  इस Option को on करने पर आपको आपके हिसाब से कोई भी विज्ञापन या वेबसाईट सजेस नहीं किया जाता है और इसको ऑन करने पर आपको बेहतर सेवा नही मिल सकता है इसलिए यह ऑप्शन पहले से ऑफ होता है और अगर आप इसे ऑफ करना चाहते हैं तो इसे ऑफ कर सकते हैं इससे वेबसाईट आपको ट्रैक नहीं कर पाएंगे।

Tap to Search - ये इस ब्राउज़र का बहुत अच्छा Feature है क्योकी इस Option का Use करके आप आपके ब्राउज़र द्वारा ओपेन किये गए page से कोई भी वर्ड सलेक्ट करके इससे ब्राउज़ कर सकते हैं और उस वर्ड के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ये हमेशा ऑन होता है लेकिन इसे ऑफ भी किया जा सकता है।

Clear Browsing Data -  इस option का Use हम Browsing history, cookies, Media licenses और site data को delete करने के लिए Use किया जाता है। और इसका उपयोग cached image and File को delete करने के लिए Basic Tabe में Use किया जाता है। इसके नीचे में CLEAR DATA का Option दिया होता है जिसे क्लिक करने पर Data Clear हो जाता है। इसमें आप लास्ट घण्टे से all time तक के सभी Data को Clear कर सकते हैं।

ये तो हुए इसके Basic Feature  वाले Option अब इसके Advance Option को देखे तो इसमें निम्न प्रकार के Options होते हैं- Browsing history, Cookies and Site Data , Media Licenses , Media Licenses, Cached image and Files, save password, Autofill Form data, Site Settings आदि File को Clear कर सकते हैं।

Accessibility -

Text scaling - इस ऑप्शन का Use हम अपने ब्राउजर के Text के साईज को बढ़ाने के लिए Use करते हैं।
Force enable zoom - इस ऑप्शन को चालू करने पर आपको किसी भी बिना zoom वाली वेबसाईट में Zoom करने का ऑप्शन चालू हो जाता है।
Simplified view for web pages- इस ऑप्शन को ऑन करके आप किसी भी वेबसाईट का simplified veiw देख सकते हैं जब उस वेबसाइट में ये ऑप्शन दिया हो तब।

Site settings -

इस ऑप्शन में आपके द्वारा सर्च किये जाने वाले सभी Website के लिए permission होता है जो की Ask first  वाले mode में होता है जिससे हर बार जब कोई डाटा आपको पूछे बगैर सेव या सेंड नही होता है।
इसमें आपके द्वारा Search किये सभी Site के लिस्ट मिल जाते हैं और इसके जस्ट नीचे में Cookies वाला Option होता है जिसके on होने पर आपके सर्च स्पीड बढ़ जाते हैं और Cookies इकठ्ठे होने लगते हैं यह आपके सर्च स्पीड को बढ़ाने के लिए हमेशा Allow mode में होता है।
location आपके application के परमिशन पर निर्भर करता है और जिसके on होने पर आपके लोकेशन को ट्रैक किया जाता है।

Camera जब किसी Site द्वारा Camera का Use किया जाता है तब इसका परमिशन देने के लिए इस ऑप्शन का Use किया जाता है। इसमें हमेशा Ask first का Option on होता है आपके सुरक्षा के लिए।
ऐसे ही Microphone , Notification , Automatic Download, Usb , Clipboard ये सभी ऑप्शन Ask first command पर होते हैं।
 
 इसी प्रकार यहां पर JavaScript , Background Sync , Sound में allowed होता है।
इसके अलावा popup and redirects का option इस ऑप्शन का यूज आपको किसी अन्य वेबसाइट पर रीडायरेक्ट करने के लिए किया जाता है और यह बन्द होता है जिसे आप ऑन भी कर सकते हैं।
Media वाले ऑप्शन का यूज करके हम अपने द्वारा autoplay को control करता है ।  अब यह सेटिंग यहां पर खत्म होता है। content की सुरक्षा के लिए इसमें परमिशन दिया होता है जिसे आप अपने हिसाब से use कर सकते हैं। 

How to set Languages in GOOGLE CHROME
आप अपने हिसाब से अपने मन पसन्द का लैंगुएज गूगल क्रोम में इंस्टॉल कर सकते हैं। और इस पर डिफाल्ट रूप से पहले से लैंगुएज इंस्टॉल होता है। जिसे आप चेंज कर सकते हैं। इसके अंदर जाने पर एक और option मिलता है और वो है ट्रांसलेट का जिसे आप ऑन करके page को ट्रांसलेट कर सकते हैं। 
How to Save Data in Google Chrome ?

Google Chrome के Settings में आपको ये Data Save का Option मिलता है जिसे आप  ON करके Data के खपत को कम कर सकते हैं या Unusual data को save कर सकते हैं और इसके ON होने पर आपके इंटरनेट का स्पीड बढ़ जाता है। यह आपके mobile data का 60% बचाता है।
लेकिन यह आपके Incognito mode मे काम नहीं करता है।

How to set Download location in Google chrome ?
जब आप इस Download option पर क्लिक करते हैं तब ओपेन होने के बाद तीन ऑप्शन आपको दिखाई देते हैं उन ऑप्शन में पहला ऑप्शन आपके डाउनलोड लोकेशन को set करने का होता है।
इसके बाद ask where to save file वाला ऑप्शन होता है जिसे आप on कर सकते हैं। इसे on करने पर हर बार आपको save करने के पहले location को बताना होता है Download File के लिए।
article download करने का OPTION भी इसी में होता है जिसे आप on करके फालतू के data नुकसान को रोक सकते हैं। क्योकि इसे on करने पर यह मात्र wifi से कनेक्ट होने पर ही download होता है। 

ABOUT CHROME -

इस Option में जाने पर हमें Application Version और उस मोबाईल के मोडल का पता चलता है जिसमें वह इंस्टॉल होता है। इसके अलावा Legal information भी यही पर मिलता है। जिसे आप टच करके ऑनलाइन खोल के देख सकते हैं।

आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ शेयर जरूर करें।   

Wednesday, December 12, 2018

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हेलो आप सभी का स्वागत है मेरी इस ब्लॉग पर आज मैं बात करने वाला हूं अपने ब्लॉक के बारे में दोस्तों मैंने यह ब्लॉग 6 दिसंबर सन 2017 को बनाया था यह पता नहीं था की ब्लॉगिंग कैसे करते हैं! दोस्तों आज 28 नवंबर सन 2018 को मेरा ऐडसेंस अप्रूव हुआ आज मुझे लगभग 1 साल हो गए हैं ब्लॉगिंग करते हुए दोस्तों मुझे इतने दिनों के बाद सफलता मिली इसका कारण यह है की मुझे पता नहीं था की डिजिटल मार्केटिंग क्या है और इसे किस प्रकार से बढ़ाया जाए।
लेकिन मैंने अपना हौसला कभी नहीं हारा और मैं ब्लॉगिंग में पैसे के पीछे भाग रहा था लेकिन उसमें मेरा लॉस था क्योंकि मैं अपने ब्लॉगिंग पर ध्यान नहीं दे रहा था सिर्फ ब्लॉगिंग कर रहा था किस टॉपिक पर करूं क्या करूं मुझे कुछ पता नहीं था दोस्तों मुझे ब्लॉगिंग करने का ख्याल मेरे दोस्त जिनका कि एक यूट्यूब चैनल है उनसे मिला मैं ब्लॉगिंग पैसे कमाने के लिए कर रहा था लेकिन बाद में मुझे पता चला कि अगर ब्लॉगिंग को सिर्फ पैसे कमाने के लिए किया जाए तो यह सही नहीं है क्योंकि आप ब्लॉगिंग करते हैं तो उसे विजिटर तब देखते हैं जब आपके पास अच्छे कॉन्टेंट होते हैं अच्छी जानकारी होती है आपके पास अच्छा नॉलेज होता है अभी आपको यह समझ में आ गया होगा कि ब्लॉगिंग इतना आसान नहीं है जितना आप सोच रहे हैं मैं जब रोज ब्लॉगिंग करता था तो मैं सोचता कि मेरा ऐडसेंस कब अप्रूव होगा और इसी हड़बड़ी में मैंने अप्लाई कर दिया पर कैसे अप्रूव होते हैं मेरे तो कॉन्टेंट ही उतने यूनीक नहीं थे और इसी कारण मेरा ऐडसेंस अकाउंट अप्रूव नहीं होता था मैंने आनन-फानन में अपना ऐडसेंस का अकाउंट डिलीट कर दिया और फिर एक नया ऐडसेंस अकाउंट बनाया उसी जीमेल आईडी से फिर मैंने अप्लाई किया ऐडसेंस के लिए लेकिन अप्रूव कैसे होता क्योंकि वो पॉलिसी वॉयलेंस में आ चुका था ऐसे करते करते मुझे पूरे 1 साल होने को थे इसे होने में मात्र एक 2 महीने ही बचे थे तो मुझे ख्याल आया इतना कॉन्टेंट हो गया है जिसमें 500 विजिटर रोज आ रहे हैं तो मैं इसे कैसे ड्रॉप कर दूँ। फिर मैंने क्या किया अपना जो पूरा कॉन्टेंट था उसे मैंने मेरे दोस्त जो कि यूट्यूब पर एक चैनल के मालिक हैं जिनके चैनल का नाम I Paint है उसके नाम कर दिया उन्होंने एक वेबसाइट डिजाइन किया था और खुद के लिए बनाया था वह वेबसाइट जिस पर मोबाइल ऑनलाइन शॉपिंग के प्रोडक्ट रखते थे पर पता नहीं क्या हुआ उन्होंने लगभग लगभग 15 से 20 दिन देखने के बाद अपना जो वेबसाइट था उन्होंने रेक्स जिन डॉट इन के नाम से लिया था उसे बंद करना चाहा मैंने कहा अरे यार रहने दो एक नया पेज बना लेते हैं जिसमें हम ब्लॉक को भी रखेंगे पर उसने मेरी ना सुनी और उस वेबसाइट के डिजाइन जो उसने खुद किया था उसे अपने वेब होस्टिंग से हटा दिया क्योंकि उन्होंने 1 महीने का वेब होस्टिंग लिया था और जो वेबसाइट का नाम है उसे उसने 1 वर्ष के लिए लिया था हमने जो मेरा कांटेक्ट उसके नाम कर दिया अब हम दोनों साथ में ब्लॉगिंग करते हैं पर मुझे अफसोस 500 विजिटर हर रोज मेरे ब्लॉग पर आ रहे थे मेरे ब्लॉग पर किसी दूसरे के नाम पर चेंज करने से पूरा आना बंद हो गया और मुझे फिर से इतना मेहनत करना पड़ा।
गलती से मुझे सीखने को मिला कि आप गलती चाहे जितना कर लो लेकिन अगर आप अंत में उसे सुधार लेते हैं तो आपको सफलता अवश्य मिलती है मैंने जो गलती किया आप ना करें मेरे बहुत से ऐसे दोस्त हैं थे जिन्होंने मुझे ब्लॉगिंग करने के दौरान बहुत मदद की है मैं यहां पर नाम तो नहीं बता सकता क्योंकि अगर नाम बता दिया और किसी का नाम भूल गया तो मेरे कुछ दोस्त मुझसे नाराज हो सकते हैं मैं यहाँ पर किसी का नाम नहीं बता रहा हूं मैं उन सभी दोस्तों का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं उन्होंने मेरा इतना सपोर्ट किया इतना मदद किया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
मेरा यह पोस्ट लिखने का कारण यह है कि लोग कहते हैं कि सफल हो जाने के बाद लोग हमें भूल जाते हैं लेकिन दोस्त मैं कहता हूं मैं जहां भी जाऊं कुछ भी करूं कैसे भी करूं मेरे अपने साथियों और दोस्तों के बिना मैं कुछ भी नहीं कर सकता हूं
आप सभी ने पोस्ट पढ़ा समझा इसके लिए धन्यवाद! आपका दिन शुभ हो! मैं ये पोस्ट इतना कम क्यों लिख रहा हूँ इसका कारण है आपका समय आपके पास या अपने पड़ोसियों के पास भी उतना समय नहीं है कि मेरे बारे में सोच सके ।
आई होप यह पोस्ट आपके लिए इंप्रेशन पैदा कर सकें!

Wednesday, October 17, 2018

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हैलो दोस्तों आज मैं आपका फिर से स्वागत करता हूँ मेरे इस ब्लॉग पर दोस्तों जब इंटरनेट पर मोस्ट पेयिंग अर्निंग की बात आती है तो इसमें सिर्फ दो चिंजो का नाम सबसे पहले उभर कर आता है। वो चीज क्या है आप सोच रहे होंगे कोई वेबसाइट के बारे में नही मैं आपको बता दूँ की गूगल एक बहुत बड़ा सर्च इंजन है जिससे आप पैसे कमा सकते हो जि हां आपको बस मेहनत करने की जरूरत है ब्लॉगींग एक अच्छा फील्ड है यु ट्यूब के मुकाबले वो कैसे इसे मैंने अपने नेक्सट पोस्ट में बताया है। ब्लागींग और यूट्यूब के माध्यम से लोग लाखों रुपये कमा रहें है इस आप यूट्यूब पर भी सर्च करके देख सकते हैं।  आज को मेरा टॉपिक है वो है ब्लॉगिंग को आसान कैसे बनाया जाये इसी के बारे में आज मैं आपको बताने वाला हूँ।
ब्लॉगिंग के बारे में थोड़ा बहुत परिचय -
ब्लॉगिंग एक प्रकार का वर्क है जिसे किसी सोशल मीडिया की तरह भी यूज किया जा सकता है। लेकिन इसकी निजता के हिसाब से ये बहुत ही जोखिम भरा हो सकता है। ब्लागींग के माध्यम से हम अपनी जानकारी को किसी दूसरे तक पहुंच सकते है और ब्लॉगिंग के माध्यम से बहुत सारे पैसे कमा सकते हैं।
एक प्रकार से ब्लॉगिंग से आप किसी की हेल्प करते है और उस हेल्प के जरिये आप पैसे कमा सकते हैं भले ही ब्लॉग को पढ़ने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क किसी सर्चर को नहीं देना पड़ता है। ये एक फ्री सेवा है जिसे गूगल ने लॉन्च किया है।
अब आपको इसके बारे में थोड़ा बहुत समझ तो आ गया होगा। तो चलिए इसे आसान कैसे बनाया जा सकता है इसके बारे में सोचते हैं -
क्या इसके लिए कम्प्यूटर होना जरूरी है -
आपके मन मेरे हिसाब से पहला सवाल यहीं होगा। जि नहीं आपको इसके लिए किसी भी प्रकार की कम्युटर होना जरूरी नहीं है अगर आप के पास है तो बहुत अच्छी बात है आपको और भी सरलता होगी।  तो फिर किसका उपयोग किया जाये ब्लॉगिंग के लिए अगर कम्प्यूटर नहीं है तो आप कम्प्यूटर के अलावा टेबलेट , एंड्रॉइड मोबाइल का भी उपयोग कर सकते हैं।
मोबाइल से ब्लागींग को आसान कैसे बनाया जाये
आज के दौर में हर किसी के पास मोबाइल है और लगभग सभी इंटरनेट चलाना जानते है अब आपको करना क्या है आपने आईडी बना लिया है अपना ब्लॉग बना लिया है तो फिर आप इसके थ्रू लोगिन करके ऑनलाइन ब्लॉग लिख सकते हैं।
या फिर आप प्ले स्टोर से ब्लॉगर एप डाउनलोड कर सकते हैं। जिससे की आपको ऑनलाइन रहकर लिखना कोई जरूरी नहीं है आप इसमें एक बार लोगिन करके छोड़ दे फिर आप ऑफ़लाइन भी लिख सकते है। और लिखने के बाद नेट ऑन करके उसे पोस्ट कर सकते हैं।
अब आपको दिक्कत ये है की मोबाइल से टाइपिंग तो बहुत धीरे धीरे होता है इसे फास्ट कैसे करूँ ?
ब्लॉगिंग में कम्प्यूटर की बोर्ड का इस्तेमाल करके ब्लागींग को आसान बनाये-
जी हां आपने सहीं पढ़ा आपको कम्प्यूटर की बोर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए जो की मिनिमम 200 - 250 रुपये और अधिकतम 1100 रुपये या इससे भी अधिक के आ सकते हैं। आपको उतना ज्यादा महंगा की बोर्ड लेने की जरूरत नहीं है आप बस एक सस्ता वाला की बोर्ड ले लीजिये और टाइपिंग स्टार्ट करिये।
टेबलेट के की बोर्ड का भी इस्तेमाल कर सकते है अगर आपके पास है तो।
अब आपके पास ये समस्या आ जाती है की इसमें यानी की आपके मोबाइल में ये सपोर्ट करता है या नहीं आपको लेने से पहले ये चेक कर लेना है फिर आपको की बोर्ड लेना है।
की बोर्ड सपोर्ट कराये अपने मोबाइल को   -
आपको करना ये है आप सबसे पहले प्ले स्टोर से otg चेकर एप्प डाउनलोड करें और चेक करें अगर आपके मोबाइल में ये सपोर्ट करता है करके बताता है। फिर भी सपोर्ट नहीं कर रहा है तो आप उसे root करके सपोर्ट करा सकते है। होता क्या है सिक्योरिटी रीजन की वजह से कई मोबाइल में ये फीचर ब्लॉक कर दिया गया रहता है। रूट एक ऐसा प्रोसेस है जिससे आपको अपने मोबाइल को पूरी तरह अपने हिसाब से चलाने का लाइसेंस मिल जाता है इसमें कोई भी अगर नुकसान होता है तो उसके जिम्मेवार आप खुद होते है।
इससे बचने के लिए आपको ROOT करने के बाद आपको उस ROOT एप्प को अनइंस्टॉल कर देना है फिर आपका मोबाइल सुरक्षित हो जायेगा और आपका OTG  भी सपोर्ट करने लगेगा।
दोस्तों इस प्रकार आप एंड्रॉइड मोबाइल का इस्तेमाल ब्लॉगिंग के लिए कर सकते हैं और उसे आसान बना सकते हैं। आपको अन्य जानकारियों के लिए www.supportmeindia.com देखना चाहिए जिसमें ब्लॉगिंग के बारे में पूरी जानकारी मिल जायेगी। और भी ऐसी कई साइट हैं जहां आपको इसके बारे में सीखने को मिल जायेगा।
                     आज के लिए बस इतना ही धन्यवाद!
thanks so much for supporting me

Saturday, September 29, 2018

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आपका फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर दोस्तों आज मैं आपको इंटरनेट से जुड़ी कुछ जानकारियों के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसे आप इंटरनेट का परिचय भी कह सकते हैं। आज इंटरनेट का बुखार किसे नहीं है दोस्तों आज के विज्ञान के युग में हर कोई इंटरनेट से जुड़ा हुआ है और हर कोई इसका लाभ उठा रहा आपको इसके बारे में बहुत कुछ पता ही होगा। लेकिन मेरे इसे बताने का मकसद ये है की इसके बारे में हर किसी को पता होना जरूरी है। तो चलिए सुरु करता हूँ इसके परिचय से की ये होता क्या है ?
परिचय -
इंटरनेट एक प्रकार का नेटवर्क है जो की इस समय दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है और ये लगभग सभी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इंटरनेट से सभी नेटवर्क जुड़े हैं जिसके कारण ये एक बृहद जाल का निर्माण करता है। इस तरह ये ' नेटवर्कों ' का भी नेटवर्क है।
इंटरनेट के लिए सहायक उपकरण -
दोस्तों आज हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल करता है, लेकिन जिसकी मदद से ये इंटरनेट का इस्तेमाल करता है उसे ही इसका सहायक उपकरण कहते है जो की इस उपरण के बिना सम्भव नहीं है। आज सबसे ज्यादा इंटरनेट का स्तेमाल मोबाइल फोन में होता है। इसके अलावा और भी बहुत सारे उपकरण है जिसमें इंटरनेट का जरूरत  होता है। इन उपकरणों को ही सहायक उपकरण कहा जाता है। इनमें से मैंने यहां पर वाई-फाई और भविष्य में आने वाले बहुत उपयोगी हो सकने वाले उपकरण वाई-मैक्स का कुछ परिचय या वर्णन किया है।
वाई-फाई -
आप ने कभी कम्प्यूटर सर्विस पर गए होने आपने वहां पर देखा होगा कोई एंटेना के समान एक उपकरण होता है जो की बेतार संचार प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए कम्प्यूटर से कनेक्ट होता है। ये एक छोटा सा उपकरण है। जो की इंटरनेट से सर्विस प्रदान करने के लिए या सर्विस देने के लिए आवश्यक होता है। इस वाई फाई को वायरलैस फिड़लिटी भी कहा जाता है। इस तकनीक का सपोर्ट लगभग सभी ऑपरेटिंग सिस्टम कर सकते हैं। पर्सनल कम्युटर के अलावा आज कल बहुत सारे उपकरण जैसे मोबाइल, MP3 प्लेयर ( पीडीए ), गेम, कोनसोल आदि उपकरण वाई फाई को सपोर्ट करते हैं एवम् जिसको इंटरनेट से कनेक्ट होने में पलभर का ही समय लगता है। इसके माध्यम से राउटर के बिना भी पियर टू पियर कनेक्टिविटी सम्भव हो जाती है। इस तकनीक का प्रयोग कर आप कम्प्यूटर से मोबाइल और मोबाइल से कम्प्यूटर को कनेक्ट कर सकते है और इसके साथ ही साथ आप किसी भी प्रकार के फाइल ट्रान्सफर भी कर सकते हैं। इस प्रकार यह एक बहुत ही उपयोगी उपकरण है। आप तो जानते ही है की हर वो चीज जो हमारी सहायता करती है साथ ही साथ हमारा नुक्सान भी करती है इस उपकरण की खराबी इस प्रकार से है।
वाइ फाई से क्या नुकसान होता है ?
वाइ फाई बहुत ही अच्छा उपकरण है लेकिन इसकी उपयोगिता के साथ साथ इसकी कई खराबियां भी हैं जिसके कारण यह आपके लिए बहुत ही नुकसान दायक हो सकता है।
वाई फाई तकनीक में सबसे बड़ी सबसे बड़ी समस्या यह है की वाई फाई हॉटस्पॉट में कोई भी व्यक्ति इंटरनेट से कनेक्ट हो सकता है एवं इसके इनक्रिप्टेड़ स्टैंडर्ड डब्ल्यूईपी को हैक कर नष्ट भी कर सकता है।
वाई मैक्स क्या है
वाई मैक्स भी वाई फाई की तरह एक नेटवर्क है। वाई मैक्स को वाई फाई का अगला चरण माना जा सकता है जिसके अंतर्गत बना विधुत चुम्बकीय क्षेत्र की किमी की परिधि में होता है। इसके प्रयोग से हॉट स्पॉट की संख्या में कमी आएगी एवं इसके फलस्वरूप इसके गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
वाई मैक्स नेटवर्क की स्थापना किसने की है
'' डिशनेट वायरलैस '' नाम की एक भारतीय है जिसने चेन्नई में वाई-मैक्स नेटवर्क की स्थापना की है।
इंटरनेट सम्बन्धी घटक ( Components Related to internet ) -
इंटरनेट से सम्बंधित घटक निम्न है -
1. वेबसाइट
कोई वेबसाइट किसी नेट सर्वर पर एक ऐसी फाइल होती है, जो वेब के उपयोगकर्ता को उपलब्ध कराई जाती है। आपको ये तो पता ही होगा की प्रत्येक वेबसाइट के लिए अलग अलग पते का इस्तेमाल किया जाता है और ये सभी प्रकार के वेबसाईट के लिए अलग अलग होते हैं और इस पते का उपयोग उस फाइल तक पहुंचने के लिए किया जाता है। URL के बारे में तो आप जानते ही होंगे की ये क्या होता है दोस्तों अगर आप URL के बारे में नहीं जानते हो तो मैं बताता हूँ की इसका क्या अर्थ होता है दोस्तों URL का फूल फार्म Uniform Resource Locator होता है। उदाहरण के लिए अगर मेरे ही ब्लॉग के पता की बात करें तो ये इस प्रकार है- http://www.atozhindime.blogspot.com
2. वेब पेज
किसी वेबसाइट में बहुत सारे सूचनाये होते हैं जिसको विभिन्न प्रकार के खण्डों में बांट कर दिखाया जाता है। इस प्रकार के सभी खण्डों को ही वेब पेज कहते हैं। कोई वेब पेज किसी वेब डिजाइन करने वाली भाषा जैसे एचटीएमल ( HTML ) या जावा ( JAVA ) में तैयार किया गया दस्तावेज होता है। वेबसाइट के पहले या प्रमुख वेब पेज को उसका होम पेज कहा जाता है , किसी इंटरनेट उपभोक्ता के द्वारा जब कोई वेब पता सर्च किया जाता है तो सबसे पहले Home Page को ही प्रदर्शित किया जाता है। 
3. वेब पोर्टल -
वेब पोर्टल इंटरनेट का वह भाग होता है जो की हमें किसी दूसरे वेबसाईट के पते पर रीडायरेक्ट करता है। इस प्रकार पोर्टल किसी वेबसाइट का वह भाग होता है जिस पर विभिन्न लिंक होते है और इन्ही लिंक के माध्यम से दूसरे वेबसाइट को खोला जा सकता है। इस प्रकार मैंने आपको यहां पर कुछ उदाहरण प्रस्तुत किया जो की एक वेब पोर्टल है -
जैसे- www.yahoo.com , www.iindiatimes , www.khoj.com , www.rediff.com आदि।
इंटरनेट पर क्या सेवाएं मिलती हैं -
  इंटरनेट आज बहुत ही रोचक तथ्य बनकर उभरा है और इसके साथ ही इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत ही बड़ गया है। दोस्तों हमें इंटरनेट से मिलने वाली सुवीधाओं के बारे में बात करें तो ये हमें ऐसे कई सारे सेवाएं प्रदान करता है जिसके चलते हमारी ये जिंदगी बहुत ही अधुरी महसूस होती है। आज इंटरनेट का प्रयोग ई-मेल के अलावा ब्लॉग , फोटो पब्लिशिंग और डाटा स्टोरेज के लिए किया जा रहा है। मीडिया के सभी रूपों जैसे की फोटो, वीडियो, ऑडियो और टैक्स्ट का इस्तमाल  इंटरनेट पर आसानी से प्रयोग किया जाने लगा है। ऑनलाइन वीडियो चैटिंग अब एक आम बात बन चुकी है।
आपके सामने इंटरनेट के माध्यम से जो की बिना इंटरनेट के सम्भव नहीं है इसके माध्यम से जो सर्विस हमें प्रदान की जाती है उसका जिक्र मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ जो की इस प्रकार से है-
1. ई-मेल -
जिसका विस्तारित रूप इलेक्ट्रॉनिक मेल होता है और जिसे संक्षेप में ई-मेल कहा जाता है , यह इंटरनेट पर सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली सेवा मानी जाती है।
ई-मेल एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सन्देश होता है , जो किसी नेटवर्क से जुड़े विभिन्न कम्प्यूटरों के बीच भेजा और प्राप्त किया जा सकता है।
   उपयोगिता - ई-मेल का उपयोग किसी सन्देश को भेजने के लिए और प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह इतना पावरफुल होता है की आदमी चाहे किसी दूसरे आदमी से लाखों किलोमीटर दूर हो या फिर मिलों दूर हो ये इंटरनेट के माध्यम से कोई भी सन्देश हो पहुंचाया जा सकता है।
ये एक प्रकार का सर्वर है जो की सन्देश को स्टोर करके रखता है।
2. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग -
दूरस्थ लोगों के बीच आवाज और वीडियो के माध्यम के माध्यम से परस्पर किये जाने वाले संवाद को ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कहा जाता हैं। इसके माध्यम से वर्चुअल मीटिंग सम्भव है।
विडीयो कॉन्फ्रेंसिंग को दो तरीकों से आयोजित किया जा सकता है जो की इस प्रकार है-
( i ) प्वॉइंट टू प्वॉइंट ( Point-to-Point ) यह दो अंतिम ( end ) प्वॉइंट्स के बीच होती है। 
( ii ) मल्टी प्वॉइंट ( Multi-Point ) यह दो या दो से अधिक पॉइंट के बीच होने वाला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है जो की दो से अधिक लोग इससे इंटरेक्ट होते हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए क्या क्या आवश्यक होता है या इंटरनेट की सहायता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कैसे सम्भव है -
( i ) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए मल्टीमीडिया किट युक्त एक कम्प्यूटर की आवश्यकता सबसे पहले होती है।
( ii ) माइक्रोफोन की आवश्यकता आपके आवाज को एक स्थान जहां से आप कनेक्ट हो रहे हो उस स्थान तक पहुंचाने के लिए इस उपकरण की आवश्यकता होती है।
( iii ) एक कैमरे की आवश्यकता जो वीडियो को कैप्चर कर सके और उसे आपके लोकल एंड प्वाइंट से भेजने में सक्षम हो इस प्रकार के कैमरे की आवश्यकता होती है।
( iv ) स्पीकर्स की आवश्यकता आपके दूसरे प्वाइंट से प्राप्त आवाज को प्ले करने के लिए होती है। जिसके बिना आप अवाज नहीं सुन सकते है।
( v ) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए आपको एक हाई स्पीड इंटरनेट की आवश्यकता होती है।
( vi ) वीडियो कॉलिंग के माध्यम से चैट करने के लिए आपको एक प्रकार के सॉफ्टवेयर कि आवश्कता होती है।
3. सर्च इंजन -
सर्च इंजन इंटरनेट का एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो कि आपको इंटरनेट के सर्वर पर किसी फाइल या सूचना को खोने या सर्च करने का ऑप्शन आपको उपलब्ध कराता है। अगर इसको दूसरे शब्दों में कहा जाये तो ये इस प्रकार से होगा ये ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो किसी विषय की सूचनाऍ रखने वाली वेबसाइटों का पता लगाते हैं।
आपको इंटरनेट पर कई सारे सर्च इंजन मिल जाते है जो की आपके सर्च ऑप्शन को बहुत आसान बनाते हैं। इस प्रकार मैंने यहां पर कुछ सर्च इंजन के बारे में बताया है जो की इस प्रकार है -
( i ) गूगल 
            यह सबसे बड़ा और सबसे अधिक लोकप्रिय सर्च इंजन है। इसका यु आर एल http://www.google.com/ है। इसमें आप विभिन्न प्रकार की सामग्री जैसे - वेबसाइट, चित्र,वीडियो आदि को खोज सकते हैं। इसमें आपको उन्नत सर्च के ऑप्शन भी मिलते है। जिसकी मदद से आप अपनी खोज को बहुत सीमा तक नियंत्रित कर सकते हैं।
ii ) याहू ( YAHOO ) - 
          यह भी बहुत लोकप्रिय सर्च इंजन है। यह मुख्यतः ड़ायरेक्टरियो के आधार पर सूचनाएं खोजता है। इसमें वेबसाइटों को अनेक श्रेणियों में सूचीबद्ध किया गया है। आपको किसी भी इशय के बारे में देखने के लिए उस सूची को सलेक्ट करके आपके मनपसन्द विषय को देखना होता है। इस याहू वेब साईट का युआरएल इस प्रकार है http://www.yahoo.com/ आप इस यु आर एल का प्रयोग करके आप इस पर जिस विषय के बारे में जानकारी चाहिए होता है उस विषय को यहां लिखकर भी सर्च कर सकते हैं। यह एक सर्च इंजन होने के साथ साथ एक वेब पोर्टल भी है। 
iii ) लायकोस ( Lycos ) -
                       यह सर्च इंजन बहुत बड़ा है जिसका डाटा बेस बहुत विस्तृत है। इसमें विषयों के आधार पर सूचनाओं को खोजा जाता है। यह डायरेक्ट्री के आधार पर खोज करने वाला सर्च इंजन है। वैसे तो ये कोई वाक्यांस और प्रश्न के माध्यम से भी किसी वेबसाइट को खोज सकता है। इस सर्च इंजन का यूआरएल इस प्रकार है - http://lycos.com/ है।
iv ) वेब दुनिया ( Web duniya )  -
               यह हिन्दी शब्दों के आधार पर पहला वेब पोर्टल है ,जिस पर आप हिंदी में टाइपिंग करेक विभिन्न शब्दों के माध्यम से आप इस पर जानकारियों को ढूंढ सकते हैं। इस वेब दुनिया सर्च इंजन का यू आर एल इस प्रकार है - http://web duniya.com/
( v ) एक्साइट ( Excite ) -
          यह एक सर्च इंजन के साथ-साथ एक प्रमुख वेब पोर्टल भी है। इसमें सभी प्रकार की व्यक्तिगत रुचि के अनुसार सूचनाएं ; जैसे - पर्यटन के बारे में , खेल-कूद के बारे में , ई-मेल सेवा जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इसका यू आर एल http://www.excite.com/ है।
vi ) हॉटबॉट ( Hotbot ) -
         यह एक प्रकार का ऐसा सर्च इंजन है जिसमें आप तीन भिन्न भिन्न तकनीकों के माध्यम से या सर्च इंजनों का उपयोग करके अपनी इच्छित सामग्री को खोज सकते हैं। इसका यू आर एल http://www.Hotbot.com/ है।
vii ) डॉगपाइल ( Dogpile )-
          यह भी एक अच्छा सर्च इंजन है जिसमें कई सर्च इंजनों का समावेश किया गया है। इसका उपयोग करके अपनी इच्छित सामग्री को खोज सकते है। इसका यू आर एल http://www.Dogpile.com/ है।
( viii ) अल्टाविस्ता ( Altavista.com ) -
           यह भी एक प्रमुख सर्च इंजन है। इसका विकास अमेरिका की डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन नामक कम्पनी द्वारा किया गया है। इसका उपयोग करके अपनी इच्छित सामग्री को खोज सकते हैं। इसका यू आर एल http://altavista.com है।
ix ) मम्मा ( Mamma ) -
             इस सर्च इंजन को सभी सर्च इंजनों की माँ कहा जाता है। इसकी खास बात ये है की जब आप इस पर कोई सामग्री खोजते हैं तो ये विभिन्न प्रकार की सर्च इंजनों से कनेक्ट होकर उन जानकारियों की मिलान आपके द्वारा दर्ज किये गए की वर्ड से करता है तो जो जानकारी सबसे ज्यादा जिस वेबसाइट से मिलती है उससे आपको ये जानकारियां उपलब्ध कराता है। मेरा मतलब ये है की ये सभी वेबसाईट से प्राप्त परिणामो को कम्पाइल करके आपको सर्वश्रेष्ट परिणाम प्रदान करता है। इसलिए इसे मेटा-सर्च इंजन ( Meta-search Engine ) भी कहा जाता है। इसका अपना कोई डाटा बेस नहीं होता। इसका यूआरएल http://www.mamma.com/ है।
( x ) वायरस ( Virus ) -
         वायरस का नाम आपने तो सुना ही होगा लेकिन आप जो सोच रहें हैं ये उससे अलग वायरस है और ये वायरस कम्प्यूटर से सम्बंधित वायरस है। इस प्रकार के वायरस अपने आप कम्प्यूटर में आ जाने वाले प्रोग्राम कोड होते हैं, जो की बाहरी स्रोत द्वारा तैयार किया जाता है। ' वायरस ' शब्द का प्रयोग सन् 1972 में सर्वप्रथम डेविड गेरॉल्डस ने अपने उपन्यास ' When HARLIE was one ' में किया था। परन्तु पहला कम्प्यूटर वायरस ' Elk cloner ' था जो ' इन द वाइल्ड ' ने प्रकट किया था।
            यह कम्प्यूटर वायरस एप्पल डॉस 3.3 ऑपरेटिंग सिस्टम में फ्लॉपी डिस्क के माध्यम से फैलता था। वास्तव में ये कम्प्यूटर वायरस आपके कम्प्यूटर में तबाही ला देने वाला प्रोग्राम है। जो बाकी फाइलों और ऑपरेटिंग सिस्टम में उपस्थित सूचनाओं को बिना आपकी जानकारी अथवा चेतावनी के नुकसान पहुंचाता है।
आपको मैं कुछ कम्प्यूटर वायरस का नाम बताना चाहूँगा जो की इस प्रकार है-
Creeper, Elk cloner, The morris Internet worm, Melissa, I Love You, Code Red, Nimada, SQL Slammer, Blastu, Sasser कुछ प्रसिद्ध कम्प्यूटर वायरस हैं।
वर्तमान समय में अनेक एण्टी-वायरस प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनमें सर्वाधिक उपयोग Noton anti-virus प्रोग्राम का किया जाता है।
कुछ नवीनतम कम्प्यूटर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के नाम इस प्रकार है-
( i ) Trend Micro Anti Virus
( ii ) Anti Spyware 2010
( iii ) Panda Security Anti Virus Pro 2010
( iv ) Symantec Notron Anti Virus 2010
( v ) Kaspersky Anti Virus 2010
( vi ) MCAfee Anti virus plus 2010
xi ) हैकर ( Hacker ) - 
       सामान्य प्रयोग में , हैकर एक ऐसा व्यक्ति होता है , जो सामान्यतः प्रशासकीय नियंत्रणों तक अभिगम प्राप्त करके कम्प्यूटर के सुरक्षा घेरे को तोड़ता है।
xii ) सायबर अपराध- 
        यह एक वाक्यांश है जिसका प्रयोग या उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में इंटरनेट आधारित हमलों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिसमें सामिल है कम्प्यूटर वायरस जैसे साधनों के माध्यम से कम्प्यूटर नेटवर्क में जानबूझकर, बड़े पैमाने पर किया गया व्यवधान, विशेष रूप से इंटरनेट से जुड़े निजी कम्प्यूटर में।
सायबर अपराध को किसी भी कम्प्यूटर अपराध के रूप में और अधिक सामान्य तरीके से परिभाषित किया जा सकता है , जो असली दुनिया के बुनियादी ढांचें, सम्पत्ति जीवन को अनिवार्य रूप से क्षति पहुंचाए बिना कम्प्यूटर नेटवर्क को लक्षित करता है।
आज इंटरनेट का इस्तमाल सबसे ज्यादा भारत में सोशल नेटवर्क पर हो रहा है जिसके चलते मैंने यहाँ पर इसके बारे में कुछ जानकारी आपसे शेयर किया है जो की इस प्रकार है -
सोशल नेटवर्किंग साइट्स
* फेसबुक अंतरजाल पर स्थित एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा है , जिसके माध्यम से इसके सदस्य अपने मित्रों , परिवार और परिचितों के साथ सम्पर्क रख सकते हैं।
* ट्विटर एक मुफ़्त सामाजिक सञ्जाल व सूक्ष्म ब्लॉगिंग सेवा है, जो अपने उपयोगकर्ताओं को अपनी अद्धतन जानकारियां , जिन्हें ट्वीट कहते हैं, एक-दूसरे को भेजने और पढ़ने की सुविधा प्रदान करता है।
        दोस्तों आपको ये जानकारी कैसे लगी मुझसे कमेंट के माध्यम से शेयर करें।
धन्यवाद्!
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हैलो दोस्तों आज मैं आपका फिर से स्वागत करता हूँ मेरे इस ब्लॉग पर दोस्तों जब इंटरनेट पर मोस्ट पेयिंग अर्निंग की बात आती है तो इसमें सिर्फ दो चिंजो का नाम सबसे पहले उभर कर आता है। वो चीज क्या है आप सोच रहे होंगे कोई वेबसाइट के बारे में नही मैं आपको बता दूँ की गूगल एक बहुत बड़ा सर्च इंजन है जिससे आप पैसे कमा सकते हो जि हां आपको बस मेहनत करने की जरूरत है ब्लॉगींग एक अच्छा फील्ड है यु ट्यूब के मुकाबले वो कैसे इसे मैंने अपने नेक्सट पोस्ट में बताया है। ब्लागींग और यूट्यूब के माध्यम से लोग लाखों रुपये कमा रहें है इस आप यूट्यूब पर भी सर्च करके देख सकते हैं।  आज को मेरा टॉपिक है वो है ब्लॉगिंग को आसान कैसे बनाया जाये इसी के बारे में आज मैं आपको बताने वाला हूँ।
ब्लॉगिंग के बारे में थोड़ा बहुत परिचय -
ब्लॉगिंग एक प्रकार का वर्क है जिसे किसी सोशल मीडिया की तरह भी यूज किया जा सकता है। लेकिन इसकी निजता के हिसाब से ये बहुत ही जोखिम भरा हो सकता है। ब्लागींग के माध्यम से हम अपनी जानकारी को किसी दूसरे तक पहुंच सकते है और ब्लॉगिंग के माध्यम से बहुत सारे पैसे कमा सकते हैं।
एक प्रकार से ब्लॉगिंग से आप किसी की हेल्प करते है और उस हेल्प के जरिये आप पैसे कमा सकते हैं भले ही ब्लॉग को पढ़ने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क किसी सर्चर को नहीं देना पड़ता है। ये एक फ्री सेवा है जिसे गूगल ने लॉन्च किया है।
अब आपको इसके बारे में थोड़ा बहुत समझ तो आ गया होगा। तो चलिए इसे आसान कैसे बनाया जा सकता है इसके बारे में सोचते हैं -
क्या इसके लिए कम्प्यूटर होना जरूरी है -
आपके मन मेरे हिसाब से पहला सवाल यहीं होगा। जि नहीं आपको इसके लिए किसी भी प्रकार की कम्युटर होना जरूरी नहीं है अगर आप के पास है तो बहुत अच्छी बात है आपको और भी सरलता होगी।  तो फिर किसका उपयोग किया जाये ब्लॉगिंग के लिए अगर कम्प्यूटर नहीं है तो आप कम्प्यूटर के अलावा टेबलेट , एंड्रॉइड मोबाइल का भी उपयोग कर सकते हैं।
मोबाइल से ब्लागींग को आसान कैसे बनाया जाये
आज के दौर में हर किसी के पास मोबाइल है और लगभग सभी इंटरनेट चलाना जानते है अब आपको करना क्या है आपने आईडी बना लिया है अपना ब्लॉग बना लिया है तो फिर आप इसके थ्रू लोगिन करके ऑनलाइन ब्लॉग लिख सकते हैं।
या फिर आप प्ले स्टोर से ब्लॉगर एप डाउनलोड कर सकते हैं। जिससे की आपको ऑनलाइन रहकर लिखना कोई जरूरी नहीं है आप इसमें एक बार लोगिन करके छोड़ दे फिर आप ऑफ़लाइन भी लिख सकते है। और लिखने के बाद नेट ऑन करके उसे पोस्ट कर सकते हैं।
अब आपको दिक्कत ये है की मोबाइल से टाइपिंग तो बहुत धीरे धीरे होता है इसे फास्ट कैसे करूँ ?
ब्लॉगिंग में कम्प्यूटर की बोर्ड का इस्तेमाल करके ब्लागींग को आसान बनाये-
जी हां आपने सहीं पढ़ा आपको कम्प्यूटर की बोर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए जो की मिनिमम 200 - 250 रुपये और अधिकतम 1100 रुपये या इससे भी अधिक के आ सकते हैं। आपको उतना ज्यादा महंगा की बोर्ड लेने की जरूरत नहीं है आप बस एक सस्ता वाला की बोर्ड ले लीजिये और टाइपिंग स्टार्ट करिये।
टेबलेट के की बोर्ड का भी इस्तेमाल कर सकते है अगर आपके पास है तो।
अब आपके पास ये समस्या आ जाती है की इसमें यानी की आपके मोबाइल में ये सपोर्ट करता है या नहीं आपको लेने से पहले ये चेक कर लेना है फिर आपको की बोर्ड लेना है।
की बोर्ड सपोर्ट कराये अपने मोबाइल को   -
आपको करना ये है आप सबसे पहले प्ले स्टोर से otg चेकर एप्प डाउनलोड करें और चेक करें अगर आपके मोबाइल में ये सपोर्ट करता है करके बताता है। फिर भी सपोर्ट नहीं कर रहा है तो आप उसे root करके सपोर्ट करा सकते है। होता क्या है सिक्योरिटी रीजन की वजह से कई मोबाइल में ये फीचर ब्लॉक कर दिया गया रहता है। रूट एक ऐसा प्रोसेस है जिससे आपको अपने मोबाइल को पूरी तरह अपने हिसाब से चलाने का लाइसेंस मिल जाता है इसमें कोई भी अगर नुकसान होता है तो उसके जिम्मेवार आप खुद होते है।
इससे बचने के लिए आपको ROOT करने के बाद आपको उस ROOT एप्प को अनइंस्टॉल कर देना है फिर आपका मोबाइल सुरक्षित हो जायेगा और आपका OTG  भी सपोर्ट करने लगेगा।
दोस्तों इस प्रकार आप एंड्रॉइड मोबाइल का इस्तेमाल ब्लॉगिंग के लिए कर सकते हैं और उसे आसान बना सकते हैं। आपको अन्य जानकारियों के लिए www.supportmeindia.com देखना चाहिए जिसमें ब्लॉगिंग के बारे में पूरी जानकारी मिल जायेगी। और भी ऐसी कई साइट हैं जहां आपको इसके बारे में सीखने को मिल जायेगा।
                     आज के लिए बस इतना ही धन्यवाद!