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Thursday, October 24, 2019

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सबसे पहले मेरे सभी पाठको को धनतेरस की ढेर सारी शुभकामनाएं। इस पोस्ट के माध्यम से आज हम आपको बताने वाले है की धनतेरस का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और कैसे मनाया जाता है साथ ही हम इस त्यौहार को मनाने पर होने वाले लाभ के ऊपर पर भी चर्चा करेंगे तो चलिए जानते हैं धनतेरस के बारे में :-

bhagvan_dhanvantari

Dhanteras Kyo Manaya Jata Hai (धनतेरस क्यों मनाया जाता है ?)

जैसे की आपको पता है की भारत एक सर्व धर्म समभाव वाला देश है जो की हर धर्म को समान भाव से देखता है और सभी धर्मों का आदर करता है साथ ही यहां पर हिन्दुओं की संख्या बहुत ज्यादा है जिसकी संख्या को प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो यहां हिन्दुओं की संख्या 70 % से 80% के लगभग है जिसके कारण यहां पर इन्हीं लोगों का सबसे ज्यादा त्यौहार और पर्व होते हैं साथ ही यहां पर अन्य धर्म वाले भी इस धर्म का आदर करते हैं।
धनतेरस के पर्व को लेकर हिन्दू समाज में मान्यता है इस त्यौहार को भगवान धन्वन्तरी के लिए उनको प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। कहा जाता है की भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य के देवता हैं और वे उस समय देवताओं के वैध हुआ करते थे। भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन के द्वारा हुआ था और साथ ही हिन्दुओ में यह भी मान्यता है की माँ लक्ष्मी का उद्भव उस समय समुद्र मंथन से हुआ था जिसको भगवान विष्णु ने धारण किया था।  और माता लक्ष्मी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
इस दिन यह भी मान्यता है की यदि इस दिन कोई माता लक्ष्मी से संबंधित कोई सामान लेते हैं जिसमें माँ लक्ष्मी का वास हो तो वह हमारे लिए अत्यंत ही लाभकारी होता है। जैसे की इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता है तो कई धर्म वेत्ताओं का मान्यता है की इस दिन यदि माता लक्ष्मी के रूप में कोई सम्पती हम खरीदते हैं तो उसमें तेरह गुना की वृद्धी होती है। तथा घर में सूख शांति आती है।
इस दिन भगवान श्री गणेश की भी पूजा की जाती है जो रिद्धि और सिद्धि के स्वामीं कहे जाते हैं और लोगों का यह भी मनना है की रिद्धी और सिद्धी के आ जाने से सभी दुःख और विकार हमसे दूर हो जाते हैं तो इस कारण भी धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है इसे मनाने के पीछे और भी अनेकों कारण हैं लेकिन समय के अभाव के कारण मैं यहां पर नहीं लिख सकता हूँ।

शासकीय रूप में मान्यता !

इस दिन चूँकि भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना की जाती है जो की आयुर्वेद के ज्ञाता थे और स्वास्थ्य के देवता कहे जाते थे। तो इन्हीं को लेकर हमारी सरकार भारत सरकार ने भी इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है जिसे हर वर्ष इसी दिन मनाया जाता है।

धनतेरस कब मनाया जाता है ?

देखिये धनतेरस को मनाने के पीछे कोई एक दिन या दिवस निर्धारित नहीं किया गया है इसे मनाने के लिए हमें दिवाली का इन्तजार करना पड़ता है और इसे दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है तथा इसके एक दिन बाद दिवाली मनाया जाता है दिवाली को मनाने के पीछे भी कारण है जिसको मैंने एक पोस्ट के माध्यम से बताया भी है इसे आप पढ़ सकते है पढ़ने के लिए लिंक है।
दीपावली या दिवाली दोनों एक हैं !

धनतेरस का त्यौहार कैसे मनाया जाता है ?


इस धनतेरस के त्यौहार को मनाने के पीछे कोई एक तरीका नहीं है इसे कई तरिके से लोग मना सकते हैं कोई पाबंदी नहीं है फिर भी इस दिन ज्यादातर लोग सोने एवं चांदी की खरीददारी करते हैं क्योकि सोने में माता लक्ष्मी को विराजमान है ऐसा माना जाता है और चांदी में श्री गणेश को विराजमान माना जाता है कई लोग इस दिन किताबें खरीद कर भी इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं क्योकि किताबों में माता सरस्वती का वास होता है ऐसा लोगों का मानना है और लोग बहुत इस दिन चूँकि इन तीनो देवताओं को भी पूजते हैं इस कारण भी यह चींजें ली जाती हैं और घर में अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए इस दिन को मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि आपकी मनोकामना पूरी करें।

धनतेरस को मनाने के पीछे क्या लाभ है ?



लाभ-वाभ के बारे में मुझे तो पता नहीं लेकिन लोगों की आस्था इससे जुडी हुई है और लोगों की मान्यता है की इस दिन अगर कोई सामान या कोई भी वस्तु जो घर के काम के लिए उपयोगी हो या धारण करने के लिए हो वह बहुत ही लाभकारी होता है। साथ ही यह वर्षो से चला आ रहा है तो इसके पीछे हम लाभ को लेकर चले तो यह नाइंसाफी होगी तो मेरा मानना है की यह भगवान के प्रति आस्था बनाये रखने का एक माध्यम है। संसार में अभी कई ऐसे भी हैं जो इसके लाभ को देखकर इसे मनाते या मानते हैं लेकिन मेरा मानना है यह भगवान राम चंद्र के वन से आगमन के पहले की धूम है जिसे लोग धूम-धाम से मनाते हैं और भगवान राम का स्वागत करते हैं।
चूँकि यह पर्व हजारों वर्षों से मनाते चली आ रही है इस कारण इस पर लोगों की आस्था इतनी प्रगाढ़ हो चली है और होना भी चाहिए विश्व कल्याण के लिए यह आस्था भी जरूरी है मैं नहीं कहता की आप ज्यादा कीमती सामान लें मैं बस यहीं कहूंगा की दिए जलाने के बहाने किसी गरीब के पास से दिए खरीद लेना शायद उसका भी भला हो जाए और थोड़े से पैसे वह इस त्यौहार के बहाने कमा लें और वह भी धूम-धाम से अपने परिवार के साथ दीपावली का त्यौहार मनाएं। अगर आपको ये कॉन्सेप्ट अच्छा लगा मेरे साथ शेयर जरूर करें। कमेंट के माध्यम से !

बिजनेस करने के लिए प्रकार के बारे में पोस्ट

सारांश :-

 मेरे हिसाब से धनतेरस एक पर्व के साथ-साथ अब राष्ट्रीय दिवस बन गया है तो इसे और हर्षों उल्लास के साथ हमें मनाना चाहिए। साथ ही अपने और अपने परिवार वालों का स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें

Monday, March 4, 2019

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 hello and welcome friends my blog आज मैं बात करने वाला हूं, महाशिवरात्रि पर्व के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं,

 सबसे पहले क्या होता है महाशिवरात्रि का पर्व ? 

इसके बारे में जानते हैं महाशिवरात्रि  पर्व हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है यह भगवान शिव के उपासको के लिए बहुत महत्व रखता है और यह फागुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन को माना जाता है। और भगवान शिव के विशालकाय रूप का उदय इसी दिन को माना जाता है । इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ विवाह क्या था। इंटरनेट से सर्च करके आपके पास आपके लिए लिख रहा हूं ।

महाशिवरात्रि से जुड़े पौराणिक कथाएं





  महाशिवरात्रि को मनाने के पीछे है बहुत से कारण हैं जिसमें आपके साथ एक कारण शेयर कर रहा हूं वह  है " मंथन "
 दोस्तों जब मंथन हुआ था, समुद्र मंथन तब उस समय अमृत की उत्पत्ति के साथ-साथ विश् के उत्पत्ति भी हुई थी तो इसको धारण करने वाले भगवान शिव शंभू ने उस विश को पान किया जिस कारण से उनके कंठ का  रंग नीला पड़ गया और उसी दिन से उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा भगवान नीलकंठ उस समय बहुत पीड़ा से ग्रसित थे और उस पीड़ा से बचने के लिए उस समय देवताओं ने और वहां की प्रजाओं ने मिलकर उनका दुख दूर करने के लिए रात भर जगराता किया और संगीत नृत्य किए जिससे उनको नींद नहीं आए और वे भगवान शिव शंभू को जागते रहे सुबह होते होते विश् सांत हो गए भगवान शिव अपने उन भक्तों की निष्ठा को देखते हुए।  उन्होंने आशीर्वाद दिया इस दिन को इस घटना का उत्सव है तो बहुत सारे लोगों का यही मानना है, कि शिवरात्रि इसी कारण मनाया जाता है ।

भगवान शिव की अन्य पारंपरिक कथाएँ-




भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग जो कि स्वयंभू के नाम से जाने जाते हैं और इन्हें तो इसलिए कहा जाता है।  क्योंकि यह स्वयं से उत्पन्न हुए हैं और मैं इन 12 जगहों के नाम इस पोस्ट में लिख रहा हूं,
यहां पर जिनमें से पहला है सोमनाथ मंदिर जो कि गुजरात में है।
 दूसरा श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास कृष्णा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर मल्लिकार्जुन शिवलिंग के नाम से जाना जाता है ।
 इसी कड़ी में तीसरा है महाकाल उज्जैन अवंती नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग जहां शिव जी ने दैत्यों का नाश किया था और
उसी कड़ी में चौथा है ओम्कारेश्वर मध्य प्रदेश ओंकार नर्मदा नदी के तट पर पर्वतराज की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदान देते हुए यहां प्रकट हुए थे शिवजी जहां ईश्वर ज्योतिर्लिंग साबित हो गए।
पांचवी कड़ी में नागेश्वर गुजरात नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध है।
बैजनाथ बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग जिनको बैजनाथ के नाम से जाना जाता  है।
 भीमाशंकर  Maharashtra
 धूमेश्वर महाराष्ट्र औरंगाबाद केदारनाथ हिमालय हरिद्वार 150 किलोमीटर दूरी पर स्थित हरिद्वार से।
काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है।

भारत में महाशिवरात्रि का पर्व कहां कहां पर मनाया जाता है इसके बारे में थोड़ा सा परिचय

महाशिवरात्रि का पर्व मध्य भारत में
मध्य भारत में सबसे ज्यादा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में भगवान शिव के मंदिर में एक बड़ी मंडली महाशिवरात्रि की पूजा अर्चना के लिए आती है और इसी के नजदीक में जो नारा शिवनी के मठ मंदिर में जबलपुर के तिवाड़ा घाट नामक अन्य स्थानों पर भी यहां त्यौहार बहुत धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Kashmir

कश्मीर में ब्राह्मणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार होता है शिव और पार्वती विवाह के रूप में हर घर में यह मनाया जाता है और महाशिवरात्रि के उत्सव 3 से 4 दिन पहले यहां पर शुरू हो जाता है उसके 2 दिन बाद तक भी जारी रहता है ।

दक्षिण भारत

महाशिवरात्रि आंध्र प्रदेश कर्नाटक केरल, तमिलनाडु ,तेलंगाना में व्यापक रूप से मनायी जाती है ।
बांग्लादेश

बांग्लादेश में भी हिंदुओं के द्वारा यहां महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है वह चिरगांव चंद्र नाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है वहां पर जाते हैं पूजा अर्चना करने के लिए इस दिन उन लोगों की मान्यता है कि इसमें पुरुष को अच्छा को पत्नी , पत्नी को  अच्छा पति  मिलती है ।

नेपाल





 पशुपतिनाथ महाशिवरात्रि नेपाल में विशेष रूप से पशुपतिनाथ मंदिर में व्यापक रूप से मनाया जाता है महाशिवरात्रि के अवसर पर काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर पर भक्तजनों की भीड़ लगती है इस अवसर पर भारत समेत विश्व के अनेक स्थानों से जोगी एवं भक्तजन इस मंदिर में आते हैं , जिस युग (ब्रम्भाण्ड) की शुरुआत मानी जाती है। वहां भगवान शिव को लेकर ही मानी जाती है ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्रकृति इस कारण से बनती है भौतिक अध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है यहां पर शास्त्रीय संगीत और प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रदर्शन भी करते हैं शिवरात्रि को महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।  क्योंकि महिलाएं यहां पर उपवास रखती हैं और सुखी जीवन के लिए अपने पति की सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं । विवाहित महिलाएं भगवान शिव जी ने आदर्श पति के रूप में मनाया जाता है जैसे पति के लिए प्रार्थना करते हैं।
Shiv Shambhu के बारे में आपने टीवी पर भी देखा होगा और कथाओं में भी सुना होगा कि माता पार्वती ने उन्हें प्राप्त करने के लिए क्या-क्या किया था।  तो मेरे हिसाब से महाशिवरात्रि  का यह पर्व उन्हीं शिव जी की विवाह को याद करते हुए मनाया जाता है।  अगर आपको सही पता हो सटीक जानकारी हो तो कमेंट करके बताएं अगर आपके दोस्त जानना चाहते हैं महाशिवरात्रि के बारे में तो उनके साथ शेयर करें

शिव पुराण -

 Shiv Puran शिव के उपासक यह जानते  ही होंगे की Shiv Puran Hota kya hai तो दोस्तों यहां पर मैं आपको बता दूं शिव पुराण में 24000 श्लोक हैं और जो कि 6 खंडों में बांटा हुआ है।
 यह खंड इस प्रकार हैं

  • पहला है विदेश्वर संहिता 
  • वायु संहिता 
  • उमा संहिता 
  • कैलाश संहिता 
  • कोटि रुद्र संहिता और
  •  रूद्र संहिता

 तो भगवान शिव के शिव पुराण को पड़ने पर हमें पता चलता है कि परमात्मा परम परब्रह्म परमेश्वर के रहस्य मयी महिमा के बारे में और उनके उपासना का विस्तृत वर्णन इस शिव पुराण में किया गया  है।

आपको यह जानकारी कैसी लगी मेरे साथ शेयर करें कमेंट बॉक्स में , थैंक्स फॉर वाचिंग थैंक्स ,  थैंक्स फॉर लाइक ओके गुड बाय ।

Sunday, November 4, 2018

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        साथियों आप सभी का फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ दीपावली के त्योहार से जुड़े कुछ मेरे personal experience को लेकर इससे पहले मैंने आपको बताया था कम्प्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में अगर आपको वो जानकारी पढ़ना है तो यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

Diwali ke bare rochak jankari

आज मेरे मन में ये पोस्ट लिखने का विचार तब आया जब हमारे सर ने हम सब से पूछा की दीपावली क्यों मनाया जाता है । साथियों सभी ने कहा की दीपावली का त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योकि इसी दिन भगवान राम , माता सीता के साथ और भ्राता लक्षण के साथ लंका को विजयी होकर यानी की जीत कर वापस लौटे थे। और इसी की खुशी में अयोध्या वाशीयों के द्वारा दीपक जला कर यह त्योहार मनाया गया । इसी दीन से चूंकि श्रीराम भारत के राजा थे इस कारण से पूरे भारत में यह त्योहार मनाया जाता था और यही परम्परा आज तक चली आ रही है।
Dipawali,diwali
Dipawali


दीपावली का त्योहार दीपों का त्योहार है और इस त्योहार की कल्पना बिना दीपों के सम्भव नहीं है ।

साथियों अब मैं अपना सोच आपके साथ शेयर करता हूँ की

आखिर दीपावली का त्योहार ही क्यों मनाया गया इसकी जगह पर और भी कई अनेक त्योहार हो सकते थे।

मेरे विचार कहते हैं दीपक जो होता है, वो अन्धकार मिटाता है यानी की अंधकार को दूर करता है, आपको ये तो पता ही होगा । सोचो उस समय की बात है , जब राम और लक्ष्मण माता सीता को ढूंढते हुए जब वन में भटक रहे थे तो उनके जीवन में भी मानों अंधकार भर गया था या कहें उनका जीवन भी अंधकार मय हो गया था। और जब माता सीता की तलास पूरी हो गयी और उन्हें पता चल गया तो उनके जीवन में उम्मिद की किरण जाग उठी और उन्होंने उस उम्मीद के किरण को पाने के लिए अपना सारा ताकत लगा दिया । तब जाकर उन्हें सफलता मिली ये सफलता को पाना भी इतना आसान नहीं था , बिना किसी के सहारा के साथीयों, रावण तो तीनों वेद के ज्ञाता थे मगर क्यों उनके जीवन में अंधकार भरा पड़ा था। क्योकि उन्होंने अपने और अपने घर वालों से इस प्रकार का रीस्ता बना लिया था की वे जिससे भी बात करते थे वो उससे डरता था कोई उससे हिल मिलकर नहीं रहता था। इसलिए उनके जीवन में अंधकार था। श्रीराम के जीवन में उजाला आया जब उनको उनके साथियों का सहारा मिला।

DIPAWALI YA DIWALI KYO MNAYA JATA HAI

इसलिए मैं आपसे यहीं कहूँगा की साथियों का साथ कभी ना छोड़े ना जाने कब और किस वक्त उनको या हमको उनकी जरूरत पड़ जाये।

साथियों आखिर दीपावली का त्योहार ही मानाया गया क्योंकि श्रीराम के जाने उनके नगर वासियों और पूरे भारत वाशियों के जीवन में अंधकार छा गया था। और जब राम वापस आये तो उनके जीवन में खुशी आ गयी। आपने एक कहावत तो सुना ही होगा खुशी के मारे घी के दिए जलाना।

साथियों दीपावली मनाने के और भी अनेक कारण थे जिनको मैंने आपके सामने इस प्रकार प्रस्तुत किया है-


1. खुशी में दिए जलाये गए और इस कारण से इस त्योहार का नाम दीपावली पड़ा।

2. इस त्योहार में बहुत से फंक्शन होते हैं जिसमें लक्ष्मी पूजा भी सामिल है और इस कारण भी यह त्योहार मनाया जाता है ।

3. दीपावली का त्योहार लोगों के जीवन को अंधकार से दूर ले जाने की एक सिख देता है।

4, दीपावली का त्योहार लोगों के जीवन में यानी की अयोध्या वाशियों के जीवन में खुशी लेकर आया था, इस कारण लोगों को भी लगता है और उन्हें खुशी भी मिलती है इस कारण से भी ये त्योहार मनाया जाता है।

5. दीपावली के त्योहार में जलाये दिए से निकलने वाले धुए से प्रकृति का वातावरण साफ होता है। इससे मन को शांति और शुकुन मिलता है।

6. आपने ये तो महशुस किया होगा की हम प्रकाश में कितना पॉजिटिव फिल करते हैं और जब ये त्योहार मनाया गया उस समय लोगों के यहां ना तो बिजली थी और ना ही किसी प्रकार के और अन्य साधन इस कारण से ही लोगों ने श्रीराम के आने की खुशी अपने पॉजिटिविटी को व्यक्त करने के लिए इस प्रकार से दिए जलाकर उनका स्वागत किया।

7. माता लक्ष्मी को प्रकाश में रखना चाहिए क्योकि अंधकार में उनको रहना पसन्द नहीं है अर्थात मेरे हिसाब से आप जो भी पैसे और धन कमाते है सहीं रास्ते से ही कमाते हैं तो वो आपके पास टिकता है ।

8. गणेश जी की पूजा ऋद्धि सिद्धि लाता लेकर आता है और ये तब आता है जब कोई शुभ कार्य किसी लाभ की इच्छा को ना रखते हुए किया जाये।

9. दीपावली मनाने के लिए किसी विशेष दिन की जरूरत थी जिसमें ये सभी फैक्ट सामिल थे शायद इसी कारण इस दिन यहीं त्योहार मनाने का करण बना।

* साथियों दशवाँ कारण मैं यहां पर नहीं लिख रहा हूँ, क्योकि आप मुझे कमेंट करके बताएंगे की आखिर इसे मनाने और क्या क्या करण हो सकते थे ।

ये तो थे , मेरे पर्शनल एक्सपीरियेन्स ।

साथियों इसके साथ ही आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । 
 

thanks so much for supporting me