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Friday, November 22, 2019

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साथीयों आपका फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने बात किया कटिंग औजार चीजल के बारे में और और उसी क्रम में अब में आपको कटिंग टूल्स के दूसरे प्रकार के बारे में बताने जा रहा हूँ जो की इस प्रकार है-
File_kya_hai_aur_yah_kitne_prkaar_ka_hota_hai-diesel-mechanic

कटिंग टूल्स रेती क्या है ?

धातु के बने किसी प्रकार के जॉब को आवश्यकता के अनुसार आकार ( चौकोर , गोल या कोणीय ) देने के लिए इस औजार का प्रयोग किया जाता है। इसे फाइल कहा जाता है।  यह एक प्रकार का ऐसा औजार है जिसमें की कई कटिंग पॉइंट होते हैं।  और इसके द्वारा धातु को कई छोटे-छोटे कोण में काटा जाता है या फिर यूं कहें की घिसा जाता है। इस औजार की खास बात ये है की इस औजार द्वारा किसी जॉब को काटने के लिए जॉब को घिसा जाता है ना कि उस पर जोर जोर से प्रहार किया जाता है। इस औजार के निम्न मुख्य भाग होते हैं जो की इसे किसी धातु को काटने में मदद करता है-





(1.) हैंडल ( Handle ) , (2.) Tang , (3.) Ferrale , (4.) Shoulder, (5.) Heel , (6.) Edge , (7.) Side , (8.) Tip or Point.
रेती के जिस भाग पर लकड़ी का हैंडल लगाया जाता है उस भाग को ही Tang कहा जाता है। इसके साईड ( Side ) तथा Edge पर तिरछी लाईन में झुके हुए कटिन बने होते हैं और साइड के जिस भाग पर कटिन नहीं बने होते हैं उसे हील ( Heel ) कहा जाता है। File का जो मोटा किनारा होता है उसे Edge कहा जाता है। रेती के आगे का सिरा Tip or point कहलाता है।

साथियों इस प्रकार से इसका परिचय यहां पर समाप्त होता है अब मैं आप को ले चलता हूँ उसके वर्गीकरण की ओर जो की इस प्रकार से किया गया है-
( Classification of file ) : -   साथियों जैसे की हम सबको पता है की हमें मौसम के आधार पर जिस प्रकार परिवर्तन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हमें किसी भी अन्य प्रकार या अलग अलग प्रकार के जॉब को काटने के लिए अलग अलग प्रकार के रेती ( file ) की आवश्यकता होती है। इसलिए इनका वर्गीकरण पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है जिसके हिसाब से इसका वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है -

(1.) लंबाई के आधार पर
(2.) आकार के आधार पर
(3.) ग्रेड के आधार पर
(4.) कट के आधार पर

         साथियों अब मैं आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहां हूँ-

(1.) लम्बाई के आधार पर रेती का वर्गीकरण इस प्रकार है -

    किसी भी प्रकार के रेती की माप उसकी लम्बाई से जानी जाती है और फाइल की हील से टीप तक की लम्बाई उसकी माप होती है फिटर आदि विभीन्न व्यवसायों के लिए 100 MM से 450 MM की लम्बाई तक के रेती का प्रयोग किया जाता है।

(2.) आकार के आधार पर फाइल का वर्गीकरण -

        आपको ये तो पता ही होगा की किसी कपड़े को सिलने के लिए तलवार का प्रयोग नहीं किया जा सकता बल्कि उसके लिए सुई का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार अनेक प्रकार के जॉब के लिए उसकी बनावट के हिसाब से ही रेती का प्रयोग किया जाता है। इसके प्रकार निम्न प्रकार से हैं-

(i.) फ्लैट फाइल ( Flait File ) - इस फाइल का आगे का आकार क्रॉस सैक्शन में होता है। इस प्रकार के फाइल को उसके चौड़ाई तथा मोटाई पर कुछ टेपर बनाया जाता है। इसके हील का 2/3 भाग समांतर होता है। और शेष 1/3 भाग टेपर में रहता है। आगे डबल कट दांते और पीछे सिंगल कट दांते कटे होते हैं। इसका प्रयोग समतल पृष्ठ भूमी को घिसकर कम करने तथा फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(ii.) राउण्ड फाइल (Round file) -  इसके नाम के हिसाब से ही इसका आकार गोल होता है और क्रॉस सेक्शन में कता होता है। यह फ्लैट फाइल के समान ही 2/3 भाग समानांतर तथा शेष आगे का 1/3 भाग टेपर में ही रहता है। इसका प्रयोग किसी छोटे भाग के खांचे और छोटे छेद को घसने ( फिनिशिंग) के लिए किया जाता है।
(iii.) हाफ राउण्ड फाइल ( Half round file ) -   इस प्रकार के फाइल की एक भाग चपटी और दूसरी भाग वृत्ताकार होती है इसके नाम से ही पता चलता है। इसका 1/3 हिस्सा ही वृत्ताकार होता है। और इस पर भी डबल कट दांते कटी होती है और आगे का 1/3 भाग टेपर में रहता है।

  इस फाइल के एक भाग का प्रयोग गोलिय जगहों या शुराखों को ठीक करने के लिए किया जाता है और दूसरे भाग का प्रयोग फ्लैट फाइल के समान ही किसी समतल जगह पर फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(iv.) ट्राईएंगुलर फाइल ( Triangular File ) -    इस प्रकार के फाइल का आकार तिकोना होता है और इस फाइल का 2/3 भाग समानांतर तथा 1/3 भाग टेपर लिए होता है और इस फाइल के तीनो कोने 60° पर बने होते है इसकी सहायता से चौकोर 90° और 60° वाले जगहों को भी घिसा जा सकता है। इस फाइल के माध्यम से V आकार के खांचे भी बनाये जाते है। ज्यादातर इस प्रकार के फाइल का प्रयोग लकड़ी काटने वाले आरे के धार को तेज करने के लिए भी किया जाता है।





(V.) स्क्वायर फाइल ( Square file ) -    इस फाइल का आकार इसके नाम के समान ही चौकोन होता है और इस फाइल के द्वारा चौकोने जगहों की फिनिशिंग के लिए किया जाता है। इसका भी आकार अन्य फाईलों के समान होता है और इस फाइल की लम्बाई को इसके वर्ग से नापा जाता है। इसका प्रयोग वर्गाकार,आयताकार,ग्रुव, स्लॉट तथा की वे की फाइलिंग के लिए किया जाता है।

(Vi.) हैण्ड फाइल ( Hand file ) -   इस प्रकार की फाइल का लगभग फ्लैट फाइल के समान ही होता है लेकिन इस फाइल का आगे का एज भाग टेपर लिए हुए होता है। और चौड़ाई में टेपर नहीं होता है। इसके अलावा इसकी एक या दोनों एज पर दांते नहीं कटे होते हैं। इसका प्रयोग कम कोण वाली जगहों फाइलिंग के लिए किया जाता है। जब जॉब की एक साइड बनी रहती है तब जॉब को इससे कोई हानी नही पहुंची है। इसलिए इस फाइल को सेफ एज फाइल के नाम से भी जाना जाता है।

(Vii.) नाईफ एज फाइल ( Knife-adge file ) -   इसके नाम के ही समान इस फाइल का आकार चाकू के समान होता है और इस फाइल का पतला एज लगभग 10° के कोण पर बना होता है इस फाइल का प्रयोग किसी चाबी की खांच तथा छोटे छोटे स्लॉट आदि बनाने के लिए किया जाता है। इससे 60° से कम कोण वाले खांचे की फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(3.) ग्रेड के आधार पर फाइल का वर्गीकरण ( Classification According to Grade )
(4.) कट के आधार पर फाइल का वर्गीकरण  ( Classification According to Cut )
            
इसके लिए अन्य पेज में आपको जाना पड़ेगा तो देर किस बात की चलिए चलते हैं। जाने के लिए लिंक का प्रयोग करें और इसके चौथे और तीसरे प्रकार को क्लिक करें आप वहां पहुंच जाएंगे। 

Friday, November 1, 2019

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Hello and welcome friends इस पहले हमने बात किया था खोलने एवं बनने वाले औजार और नापने वाले औजारों के बारे में जो कि डीजल मैकेनिक में बहुत ही ज्यादा प्रयोग के लिए उपयोगी हैं।
आज हमें यहां पर बात करनी है नट बोल्ट वॉशर एवं locking युक्तियों के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।
Nut bolt washer and locking method

Nut bolt washer and locking method

Introduction
किसी भी मशीन में छोटे-बड़े अनेक भाग हो सकते हैं।  इन भागों को उनकी कार्य स्थिति के अनुसार आपस में जोड़कर एक मशीन का रूप दिया जाता है।  मशीन के इन भागों को आपस में जोड़ना या बांधना फास्टनर कहलाता है यह तीन प्रकार के होते हैं-

Types of Fasteners

  1.  अस्थाई फास्टनर, 
  2. अर्ध स्थाई  फास्टनर, 
  3. स्थाई फास्टनर 






अस्थाई फास्टनर


अस्थाई फास्टनर अस्थाई में किसी मशीन के भागों को बिना किसी तरह के हानि पहुंचाए पुरी तरह खोला व जोड़ा जा सकता है। इन कार्यों के लिए नट बोल्ट स्क्रू लॉकिंग तथा वासर आदि का प्रयोग किया जाता है तथा इन साधनों को ही फास्टनर या बंधक कहा जाता है।

अर्ध स्थाई फास्टनर 

में बोल्ट आता है जिसको की कसकर फिर से निकाला जा सकता है।
अर्ध स्थाई इस प्रकार के फास्टनर की बात करें तो यहां अस्थाई होता है यानी कि इसे भी अलग किया जा सकता है तथा इससे मशीन को हानि पहुंच सकती है वह यहां निकालते समय बहुत ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत पड़ती है और अर्ध स्थाई फास्टनर में जैसे कि नट है उसका उपयोग नहीं कर सकते नट के जगह पर ऐसी चीजों का उपयोग किया जाता है जैसे रिपीट का प्रयोग किया जा सकता है ठीक है

स्थाई फास्टनर

इस प्रकार के फास्टनर का प्रयोग किसी मशीन को स्थाई रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है और यहां एक प्रकार से वेल्डिंग करते हैं उसी प्रकार से होता है और यहां बहुत मुश्किल से अलग होते हैं अगर इससे किसी पार्ट दो पाठक को जोड़ दिया जाता है तो उसे निकालना मुश्किल हो जाता है या तो उसे तोड़ना पड़ता है या उसे किसी कटिंग टूल से काटने की आवश्यकता हमें पड़ती है




सारांस 

इस प्रकार हमने इस पोस्ट में आज पढा बंधक टूल के बारे में जिसे हम फास्टनर टूल के नाम से भी जानते हैं।  आपको यह जानकारी कैसी लगी मेरे साथ जरुर शेयर करें अगले पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं इसी फास्टनर से जुड़ी अस्थाई फॉरस्टनर के बारे में तो बने रहे मेरे साथ आज के लिए बस इतना ही धन्यवाद।

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Sunday, October 27, 2019

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डीजल मैकेनिक पाठ्यक्रम के लिए गेज माप उपकरण

गेज एक प्रकार का डीजल मैकेनिक द्धारा प्रयोग में लाया जाने वाला नापने वाला औजार है जिसका उपयोग मैकेनिक के द्धारा किसी ऐसे खांचे को नापने के लिए किया जाता है जिसको वर्नियर कैलिपर्स या अन्य कैलिपर्स के माध्यम से नहीं नापा जा सकता है। तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण औजार है जिसका उपयोग हम डीजल मैकेनिक कोर्स के अंतर्गत करते हैं। 

What are mechanical gauges?(मैकेनिकल गेज क्या हैं?)

जैसे की आपको पता है की किसी भी मैकेनिकल वर्क करने के लिए हमारे पास उचित औजार का होना आवश्यक होता है और इन्ही औजारों के माध्यम से ही हम अपने कार्य को पूरा कर पाते है जैसे की मैंने इस पोस्ट से पहले और भी कई सारे औजार के बारे में जानकारी दी है जो की इस कोर्स में हमारे द्वारा पढ़े जाते हैं अगर आप डीजल मैकेनिक बनना चाहते हैं तो आपको पुरे औजार के बारे में बेसिक जानकारी होना आवश्यक है नहीं तो आप अपना काम करने में असफल हो जाते हैं। 
डीजल इंजन में मरम्मत व निर्माण का काम करते समय विभिन्न प्रकार के गेजों का प्रयोग किया जाता है। यह ऐसे मापक उपकरण होते हैं। जिनसे किसी पार्ट की तुलनात्मक जांच करते हैं। इसके अतिरिक्त अधिक उत्पादन के साथ परिशुद्धता की गुण प्राप्त करने पर समय की बचत होती है। ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में प्रायः निम्नलिखित गेजों का प्रयोग किया जाता है। 

  1. स्क्रू पिच गेज 
  2. वायर गेज रेडियस गेज 
  3. रेडियस गेज 
  4. फिलर गेज 
  5. सिलेंडर गेज 
  6. लिमिट गेज 
1. स्क्रू पिच गेज :- इंजन व गाड़ियों के सभी भाग नट तथा बोल्टो के द्धारा आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इन भागों में पकड़ के अनुसार उनके बाहर या अंदर कटी चूड़ियों का चयन किया जाता है इस प्रकार सभी जगह एक जैसी चूड़ियों के नट तथा बोल्ट प्रयोग नहीं किये जाते हैं। नट या बोल्ट में एक इंच में कितनी चुडिया कटी है यह ज्ञात करने के लिए गेज का प्रयोग किया जाता है। यह छोटी चाकू जैसी होती है। जिसमें कई ब्लेड लगे रहते हैं। जिनमें अलग-अलग नाप व संख्या के खांचे कटे होते हैं। स्क्रू पेंच गेज के द्धारा ही नट या बोल्ट की चूड़ियां की लेंथ पर या लम्बाई पर इंच ज्ञात की जाती है। इसी के अनुसार हमें पता लगता है की इसमें किस प्रकार चूड़ियां कटी हुई हैं। 

2. वायर गेज(Wire Gauge):- वायर गेज का प्रयोग सभी प्रकार के तारों तथा चददरों की मोटाई ज्ञात करने के लिए किया जाता है। वायर गेज गोल या आयताकार स्टील प्लेट का बना होता है। इसमें अलग-अलग नाप की झर्रियां कटी होती हैं। और उनके सिरों पर छेड़ बना होता है। इन झिर्री तथा छेदों पर उसकी नाप नंबर के रूप में अंकित रहती है। ये नंबर S.W.G.C स्टैंडर्ड वायर गेज कहलाते हैं। 

3. रेडियस गेज (REDIUS GAUGES):- इसके द्धारा किसी जॉब के छोर पर बनी कॉनकीव या कॉन्बॉक्स आकृति को मापा जाता है। इसे फिलेट गेज के नाम से भी जाना जाता है। रेडियस गेज के एक सेट में एक ही रेंज के पत्तिया लगी रहती हैं। अगर बात करें मीट्रिक रेडियस गेज की तो यह निम्न रेज में होती है :-

1 से 7 MM-0.5 MM स्टेपो में 
7.5 से 15.MM - 0.5MM स्टेपों में 
15.5 से 25MM-0.5MM स्टेपो में। 

4. फिलर गेज :- छोटे गेप या क्लियरेंस नापने के लिए इस प्रकार के गेज का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के गेज का सबसे ज्यादा प्रयोग इसी क्षेत्र में होता है यानी की ऑटोमोबाइल में होता है। इसके बनावट की बात करें तो यह चाकू के समान होता है और इसमें कई पत्तियाँ लगी होती हैं। जैसे मैंने पहले भी कहा है इन पत्तियों की मोटाई अलग अलग होती है जिससे विभिन्न नाप की या मोटाई के गेज का प्रयोग वभिन्न जगहों पर किया जा सकता है। 
Filler Gauge

5. सिलेंडर गेज :- जैसे की इसका नाम है उसी के समान इसका काम भी है इस प्रकार के गेज का प्रयोग गाडियोंमें लगे सिलेंडर के के घिसावट का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके आकार की बाती करें तो यह एक छोटी घड़ी के आकार का होता है और इसके साथ एक छड़ तथा दबने वाला पिन लगा होता है। इसे डायल टैस्ट इंडिकेटर भी कहते हैं।

6. लिमिट गेज :- जहां अधिक उत्पादन होता है। वहां बनने वाले पार्ट्स का विनिमय शीलता को निर्धारित सीमाओं में बनाकर इन गेजों के द्वारा उन पार्ट्स की लिमिट गेज द्धारा जांच की जाती हैं।

इस प्रकार यहाँ हमने जाना 

गेज के प्रकारों के बारे में और उनकी बनावट के बारे में साथ की कुछ कुछ गेजों के उपयोगित के बारे में भी हमने इस पोस्ट में पढ़ा आपको कैसे लगी मेरे साथ जरूर शेयर करें।  

Friday, October 25, 2019

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आज हम हमारे ब्लॉग में बात करने वाले हैं वर्नियर कैलिपर्स के बारे में इस पोस्ट नापने वाला औजार वर्नियर कैलिपर्स फॉर डीजल मैकेनिक के माध्यम से आज हम जानेंग की वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था। साथ ही इसके मुख्य भांगों के बारे में इस पोस्ट में बताया गया है।
vernier_calipers

Napne Wala Aujar Vernier Caliper For Diesel Mechanic

वर्नियर कैलिपर्स क्या है ?

यह एक प्रकार का मिक्रोमीटर है जिसका उपयोग हम ऐसे जगहों पर करते हैं जहां पर किसी बड़े नापने वाले औजार का प्रयोग नहीं किया जा सकता इस कारण इसे माइक्रोमीटर के नाम से भी जाना जाता है और यह इसी श्रेणी में भी आता है। जैसे की हमें किसी ऐसे चीज की माप लेनी है जिसके घिसने की मात्रा बहुत ही कम है लगभग मिमी में तो हम इस प्रकार के माइक्रोमीटर का प्रयोग करते हैं।  

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था ?

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार एक फ्रांस के वैज्ञानिक पेरी वर्नियर्स ने किया था और इन्ही के नाम पर इसका नाम वर्नियर कैलिपर्स रखा गया था। 

बाजार में किस प्रकार के वर्नियर कैलिपर्स हमें मिलेंगे ?

वर्नियर कैलिपर्स के बाजार में मांग तो वैसे ज्यादा नहीं होती है क्योकि इसका सबसे ज्यादा उपयोग मैकेनिक लोग किया करते हैं और यह आम लोगों के लिये उतना ज्यादा काम का नहीं होता है तो बाजार में यह विभिन्न परिशुद्धता के साथ हमारे लिए उपलब्ध होता है। जो की। 0.01 mm .005 mm 0.05 mm 0.02 mm मीट्रिक प्रणाली में तथा 0.001'' ब्रिटिश प्रणाली में उपलब्ध होते हैं।
बाजार में वर्नियर कैलिपर्स के मांग की बात करें तो यह 6 इंच से 7 इंच 1 फूट तथा 2 फूट तक की लम्बाई में बाजार में उपलब्ध हैं।

वर्नियर कैलिपर्स किस पदार्थ का बना होता है ?
यह सधारणतः निकिल क्रोमियम स्टील या वेनेडियम स्टील के बने होते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के द्धारा किन-किन जगहों की माप लिए जा सकते हैं ?
इसकी मदद से हम बाहरी , गहरी तथा आंतरिक माप ले सकते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के भाग !

वर्नियर कैलिपर्स में मेन स्केल के एक भाग का मान 1mm  होता है। तथा वर्नियर स्केल का एक भाग का मान 0.90 mm होता है इस प्रकार दोनों की अंतर 0.01 mm इस वर्नियर स्केल का अल्पतमांक होता है।

वर्नियर कैलिपर्स का प्रकार 

  1. फ़्लैट ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  2. नाईप ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  3. डेफ्थ वर्नियर कैलिपर्स 
  4. गियर टूथ वतवरणीयर कैलिपर्स। 
डीजल मैकेनिक से जुड़े कई टॉपिक:-

Thursday, October 24, 2019

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आपका बहुत - बहुत स्वागत है मेरे ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने आपसे बात किया था कैलिपर्स के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं माइक्रोमीटर के बारे में जिसमें हम जानेंगें की माइक्रोमीटर क्या है और यह कितने प्रकार का होता है तथा इसके साथ ही हम जानेंगें  माइक्रोमीटर के अल्पतमांक के बारे में तो चलिए जानते हैं -
screw gadge

माइक्रोमीटर क्या है ?

कार्यशाला में इंजिन की मरम्मत करते समय अथवा नया जॉब बनाते समय कई बार बहुत सूक्ष्म माप की आवश्यकता पड़ती है। जिन्हें स्टील फूट रूल या कैलीपर्स के द्वारा नहीं मापा जा सकता है।  इसलिए किसी पार्ट का सूक्ष्म नाप लेने के लिए माइक्रोमीटर का प्रयोग किया जाता है।  यह नट बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है आउट साइड माइक्रोमीटर ब्रिटिश व मीट्रिक प्रणाली में आते हैं। ब्रिटीश प्रणाली में कम से कम 0.001 इंच तक माप ले सकते हैं तथा मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तक कम से माप ले सकते हैं। बाजार में यह विभिन्न रेटों में उपलब्ध है जैसे 50-70 , 75 -100 मिली मीटर में कार्य के अनुसार से दो प्रकार के होते हैं।
  1. आउट साइड माइक्रोमीटर 
  2. इनसाइड माक्रोमीटर  
1. आउट साइड माइक्रोमीटर :- आउट साइड माइक्रोमीटर का प्रयोग किसी जॉब के बाहरी सतह की माप लेने के लिए किया जाता है इसके आकार की बात करे तो यह U के तरह होता है और कार्य विशेष के लिए इसका आकार जो है अलग अलग होता है। या डिजाइन भी कह सकते हैं। आउट साइड माइक्रोमीटर के भाग इस प्रकार से बटे होते हैं-
  1. स्पिंडल 
  2. फ्रेम 
  3. लॉकिंग रिंग 
  4. स्लिप या बैरल 
  5. ट्रिंबल 
  6. रैचिट  
इसके द्वारा माप लेते समय रैचीट को घुमाकर एनविल तथा स्पिंडल के मध्य जॉब को स्पर्श करता हुआ रखा जाता है लॉकिंग रिंग को कस कर स्लीव तथा सिंबल पर अंशांकन को पढ़ा जाता है ये माइक्रोमीटर एक इंच की नाप में या 25 मिमी की नाप में होते हैं। 
इसलिए ब्रिटिश माइक्रोमीटर 0 से 1 इंच 1 से 2 इंच तथा 2 से 3 इंच तक एक - एक इंच के अंदर में आते हैं। 

2. इन साइड माइक्रोमीटर :- किसी बेलनाकार खोखली वस्तु की अंदर की माप लेने के लिए इस प्रकार के मैपिंग टूल का प्रयोग किया जाता है।  इस माइक्रोमीटर में एक पतली छड़ लगाकर इसे जॉब के भीतर डाला जा सकता है।  जिसे हैंडिल कहते हैं।  इनसाइड माइक्रोमीटर द्वारा एक बार में 12 मिमी की सीमा में माप लिया जा सकता है। इससे  बड़ी माप लेने के लिए एक्सटेंसन रॉड का प्रयोग किया जा सकता है। यह एक्सटेंसन रॉड 50-75, 75-100 अर्थात 25 मिमी की अंतर् से होती है।