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Friday, November 22, 2019

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साथीयों आपका फिर से स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने बात किया कटिंग औजार चीजल के बारे में और और उसी क्रम में अब में आपको कटिंग टूल्स के दूसरे प्रकार के बारे में बताने जा रहा हूँ जो की इस प्रकार है-
File_kya_hai_aur_yah_kitne_prkaar_ka_hota_hai-diesel-mechanic

कटिंग टूल्स रेती क्या है ?

धातु के बने किसी प्रकार के जॉब को आवश्यकता के अनुसार आकार ( चौकोर , गोल या कोणीय ) देने के लिए इस औजार का प्रयोग किया जाता है। इसे फाइल कहा जाता है।  यह एक प्रकार का ऐसा औजार है जिसमें की कई कटिंग पॉइंट होते हैं।  और इसके द्वारा धातु को कई छोटे-छोटे कोण में काटा जाता है या फिर यूं कहें की घिसा जाता है। इस औजार की खास बात ये है की इस औजार द्वारा किसी जॉब को काटने के लिए जॉब को घिसा जाता है ना कि उस पर जोर जोर से प्रहार किया जाता है। इस औजार के निम्न मुख्य भाग होते हैं जो की इसे किसी धातु को काटने में मदद करता है-





(1.) हैंडल ( Handle ) , (2.) Tang , (3.) Ferrale , (4.) Shoulder, (5.) Heel , (6.) Edge , (7.) Side , (8.) Tip or Point.
रेती के जिस भाग पर लकड़ी का हैंडल लगाया जाता है उस भाग को ही Tang कहा जाता है। इसके साईड ( Side ) तथा Edge पर तिरछी लाईन में झुके हुए कटिन बने होते हैं और साइड के जिस भाग पर कटिन नहीं बने होते हैं उसे हील ( Heel ) कहा जाता है। File का जो मोटा किनारा होता है उसे Edge कहा जाता है। रेती के आगे का सिरा Tip or point कहलाता है।

साथियों इस प्रकार से इसका परिचय यहां पर समाप्त होता है अब मैं आप को ले चलता हूँ उसके वर्गीकरण की ओर जो की इस प्रकार से किया गया है-
( Classification of file ) : -   साथियों जैसे की हम सबको पता है की हमें मौसम के आधार पर जिस प्रकार परिवर्तन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार हमें किसी भी अन्य प्रकार या अलग अलग प्रकार के जॉब को काटने के लिए अलग अलग प्रकार के रेती ( file ) की आवश्यकता होती है। इसलिए इनका वर्गीकरण पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है जिसके हिसाब से इसका वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है -

(1.) लंबाई के आधार पर
(2.) आकार के आधार पर
(3.) ग्रेड के आधार पर
(4.) कट के आधार पर

         साथियों अब मैं आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहां हूँ-

(1.) लम्बाई के आधार पर रेती का वर्गीकरण इस प्रकार है -

    किसी भी प्रकार के रेती की माप उसकी लम्बाई से जानी जाती है और फाइल की हील से टीप तक की लम्बाई उसकी माप होती है फिटर आदि विभीन्न व्यवसायों के लिए 100 MM से 450 MM की लम्बाई तक के रेती का प्रयोग किया जाता है।

(2.) आकार के आधार पर फाइल का वर्गीकरण -

        आपको ये तो पता ही होगा की किसी कपड़े को सिलने के लिए तलवार का प्रयोग नहीं किया जा सकता बल्कि उसके लिए सुई का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार अनेक प्रकार के जॉब के लिए उसकी बनावट के हिसाब से ही रेती का प्रयोग किया जाता है। इसके प्रकार निम्न प्रकार से हैं-

(i.) फ्लैट फाइल ( Flait File ) - इस फाइल का आगे का आकार क्रॉस सैक्शन में होता है। इस प्रकार के फाइल को उसके चौड़ाई तथा मोटाई पर कुछ टेपर बनाया जाता है। इसके हील का 2/3 भाग समांतर होता है। और शेष 1/3 भाग टेपर में रहता है। आगे डबल कट दांते और पीछे सिंगल कट दांते कटे होते हैं। इसका प्रयोग समतल पृष्ठ भूमी को घिसकर कम करने तथा फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(ii.) राउण्ड फाइल (Round file) -  इसके नाम के हिसाब से ही इसका आकार गोल होता है और क्रॉस सेक्शन में कता होता है। यह फ्लैट फाइल के समान ही 2/3 भाग समानांतर तथा शेष आगे का 1/3 भाग टेपर में ही रहता है। इसका प्रयोग किसी छोटे भाग के खांचे और छोटे छेद को घसने ( फिनिशिंग) के लिए किया जाता है।
(iii.) हाफ राउण्ड फाइल ( Half round file ) -   इस प्रकार के फाइल की एक भाग चपटी और दूसरी भाग वृत्ताकार होती है इसके नाम से ही पता चलता है। इसका 1/3 हिस्सा ही वृत्ताकार होता है। और इस पर भी डबल कट दांते कटी होती है और आगे का 1/3 भाग टेपर में रहता है।

  इस फाइल के एक भाग का प्रयोग गोलिय जगहों या शुराखों को ठीक करने के लिए किया जाता है और दूसरे भाग का प्रयोग फ्लैट फाइल के समान ही किसी समतल जगह पर फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(iv.) ट्राईएंगुलर फाइल ( Triangular File ) -    इस प्रकार के फाइल का आकार तिकोना होता है और इस फाइल का 2/3 भाग समानांतर तथा 1/3 भाग टेपर लिए होता है और इस फाइल के तीनो कोने 60° पर बने होते है इसकी सहायता से चौकोर 90° और 60° वाले जगहों को भी घिसा जा सकता है। इस फाइल के माध्यम से V आकार के खांचे भी बनाये जाते है। ज्यादातर इस प्रकार के फाइल का प्रयोग लकड़ी काटने वाले आरे के धार को तेज करने के लिए भी किया जाता है।





(V.) स्क्वायर फाइल ( Square file ) -    इस फाइल का आकार इसके नाम के समान ही चौकोन होता है और इस फाइल के द्वारा चौकोने जगहों की फिनिशिंग के लिए किया जाता है। इसका भी आकार अन्य फाईलों के समान होता है और इस फाइल की लम्बाई को इसके वर्ग से नापा जाता है। इसका प्रयोग वर्गाकार,आयताकार,ग्रुव, स्लॉट तथा की वे की फाइलिंग के लिए किया जाता है।

(Vi.) हैण्ड फाइल ( Hand file ) -   इस प्रकार की फाइल का लगभग फ्लैट फाइल के समान ही होता है लेकिन इस फाइल का आगे का एज भाग टेपर लिए हुए होता है। और चौड़ाई में टेपर नहीं होता है। इसके अलावा इसकी एक या दोनों एज पर दांते नहीं कटे होते हैं। इसका प्रयोग कम कोण वाली जगहों फाइलिंग के लिए किया जाता है। जब जॉब की एक साइड बनी रहती है तब जॉब को इससे कोई हानी नही पहुंची है। इसलिए इस फाइल को सेफ एज फाइल के नाम से भी जाना जाता है।

(Vii.) नाईफ एज फाइल ( Knife-adge file ) -   इसके नाम के ही समान इस फाइल का आकार चाकू के समान होता है और इस फाइल का पतला एज लगभग 10° के कोण पर बना होता है इस फाइल का प्रयोग किसी चाबी की खांच तथा छोटे छोटे स्लॉट आदि बनाने के लिए किया जाता है। इससे 60° से कम कोण वाले खांचे की फिनिशिंग के लिए किया जाता है।

(3.) ग्रेड के आधार पर फाइल का वर्गीकरण ( Classification According to Grade )
(4.) कट के आधार पर फाइल का वर्गीकरण  ( Classification According to Cut )
            
इसके लिए अन्य पेज में आपको जाना पड़ेगा तो देर किस बात की चलिए चलते हैं। जाने के लिए लिंक का प्रयोग करें और इसके चौथे और तीसरे प्रकार को क्लिक करें आप वहां पहुंच जाएंगे। 

Friday, November 1, 2019

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Hello and welcome friends इस पहले हमने बात किया था खोलने एवं बनने वाले औजार और नापने वाले औजारों के बारे में जो कि डीजल मैकेनिक में बहुत ही ज्यादा प्रयोग के लिए उपयोगी हैं।
आज हमें यहां पर बात करनी है नट बोल्ट वॉशर एवं locking युक्तियों के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।
Nut bolt washer and locking method

Nut bolt washer and locking method

Introduction
किसी भी मशीन में छोटे-बड़े अनेक भाग हो सकते हैं।  इन भागों को उनकी कार्य स्थिति के अनुसार आपस में जोड़कर एक मशीन का रूप दिया जाता है।  मशीन के इन भागों को आपस में जोड़ना या बांधना फास्टनर कहलाता है यह तीन प्रकार के होते हैं-

Types of Fasteners

  1.  अस्थाई फास्टनर, 
  2. अर्ध स्थाई  फास्टनर, 
  3. स्थाई फास्टनर 






अस्थाई फास्टनर


अस्थाई फास्टनर अस्थाई में किसी मशीन के भागों को बिना किसी तरह के हानि पहुंचाए पुरी तरह खोला व जोड़ा जा सकता है। इन कार्यों के लिए नट बोल्ट स्क्रू लॉकिंग तथा वासर आदि का प्रयोग किया जाता है तथा इन साधनों को ही फास्टनर या बंधक कहा जाता है।

अर्ध स्थाई फास्टनर 

में बोल्ट आता है जिसको की कसकर फिर से निकाला जा सकता है।
अर्ध स्थाई इस प्रकार के फास्टनर की बात करें तो यहां अस्थाई होता है यानी कि इसे भी अलग किया जा सकता है तथा इससे मशीन को हानि पहुंच सकती है वह यहां निकालते समय बहुत ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत पड़ती है और अर्ध स्थाई फास्टनर में जैसे कि नट है उसका उपयोग नहीं कर सकते नट के जगह पर ऐसी चीजों का उपयोग किया जाता है जैसे रिपीट का प्रयोग किया जा सकता है ठीक है

स्थाई फास्टनर

इस प्रकार के फास्टनर का प्रयोग किसी मशीन को स्थाई रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है और यहां एक प्रकार से वेल्डिंग करते हैं उसी प्रकार से होता है और यहां बहुत मुश्किल से अलग होते हैं अगर इससे किसी पार्ट दो पाठक को जोड़ दिया जाता है तो उसे निकालना मुश्किल हो जाता है या तो उसे तोड़ना पड़ता है या उसे किसी कटिंग टूल से काटने की आवश्यकता हमें पड़ती है




सारांस 

इस प्रकार हमने इस पोस्ट में आज पढा बंधक टूल के बारे में जिसे हम फास्टनर टूल के नाम से भी जानते हैं।  आपको यह जानकारी कैसी लगी मेरे साथ जरुर शेयर करें अगले पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं इसी फास्टनर से जुड़ी अस्थाई फॉरस्टनर के बारे में तो बने रहे मेरे साथ आज के लिए बस इतना ही धन्यवाद।

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Sunday, October 27, 2019

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डीजल मैकेनिक पाठ्यक्रम के लिए गेज माप उपकरण

गेज एक प्रकार का डीजल मैकेनिक द्धारा प्रयोग में लाया जाने वाला नापने वाला औजार है जिसका उपयोग मैकेनिक के द्धारा किसी ऐसे खांचे को नापने के लिए किया जाता है जिसको वर्नियर कैलिपर्स या अन्य कैलिपर्स के माध्यम से नहीं नापा जा सकता है। तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण औजार है जिसका उपयोग हम डीजल मैकेनिक कोर्स के अंतर्गत करते हैं। 

What are mechanical gauges?(मैकेनिकल गेज क्या हैं?)

जैसे की आपको पता है की किसी भी मैकेनिकल वर्क करने के लिए हमारे पास उचित औजार का होना आवश्यक होता है और इन्ही औजारों के माध्यम से ही हम अपने कार्य को पूरा कर पाते है जैसे की मैंने इस पोस्ट से पहले और भी कई सारे औजार के बारे में जानकारी दी है जो की इस कोर्स में हमारे द्वारा पढ़े जाते हैं अगर आप डीजल मैकेनिक बनना चाहते हैं तो आपको पुरे औजार के बारे में बेसिक जानकारी होना आवश्यक है नहीं तो आप अपना काम करने में असफल हो जाते हैं। 
डीजल इंजन में मरम्मत व निर्माण का काम करते समय विभिन्न प्रकार के गेजों का प्रयोग किया जाता है। यह ऐसे मापक उपकरण होते हैं। जिनसे किसी पार्ट की तुलनात्मक जांच करते हैं। इसके अतिरिक्त अधिक उत्पादन के साथ परिशुद्धता की गुण प्राप्त करने पर समय की बचत होती है। ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में प्रायः निम्नलिखित गेजों का प्रयोग किया जाता है। 

  1. स्क्रू पिच गेज 
  2. वायर गेज रेडियस गेज 
  3. रेडियस गेज 
  4. फिलर गेज 
  5. सिलेंडर गेज 
  6. लिमिट गेज 
1. स्क्रू पिच गेज :- इंजन व गाड़ियों के सभी भाग नट तथा बोल्टो के द्धारा आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इन भागों में पकड़ के अनुसार उनके बाहर या अंदर कटी चूड़ियों का चयन किया जाता है इस प्रकार सभी जगह एक जैसी चूड़ियों के नट तथा बोल्ट प्रयोग नहीं किये जाते हैं। नट या बोल्ट में एक इंच में कितनी चुडिया कटी है यह ज्ञात करने के लिए गेज का प्रयोग किया जाता है। यह छोटी चाकू जैसी होती है। जिसमें कई ब्लेड लगे रहते हैं। जिनमें अलग-अलग नाप व संख्या के खांचे कटे होते हैं। स्क्रू पेंच गेज के द्धारा ही नट या बोल्ट की चूड़ियां की लेंथ पर या लम्बाई पर इंच ज्ञात की जाती है। इसी के अनुसार हमें पता लगता है की इसमें किस प्रकार चूड़ियां कटी हुई हैं। 

2. वायर गेज(Wire Gauge):- वायर गेज का प्रयोग सभी प्रकार के तारों तथा चददरों की मोटाई ज्ञात करने के लिए किया जाता है। वायर गेज गोल या आयताकार स्टील प्लेट का बना होता है। इसमें अलग-अलग नाप की झर्रियां कटी होती हैं। और उनके सिरों पर छेड़ बना होता है। इन झिर्री तथा छेदों पर उसकी नाप नंबर के रूप में अंकित रहती है। ये नंबर S.W.G.C स्टैंडर्ड वायर गेज कहलाते हैं। 

3. रेडियस गेज (REDIUS GAUGES):- इसके द्धारा किसी जॉब के छोर पर बनी कॉनकीव या कॉन्बॉक्स आकृति को मापा जाता है। इसे फिलेट गेज के नाम से भी जाना जाता है। रेडियस गेज के एक सेट में एक ही रेंज के पत्तिया लगी रहती हैं। अगर बात करें मीट्रिक रेडियस गेज की तो यह निम्न रेज में होती है :-

1 से 7 MM-0.5 MM स्टेपो में 
7.5 से 15.MM - 0.5MM स्टेपों में 
15.5 से 25MM-0.5MM स्टेपो में। 

4. फिलर गेज :- छोटे गेप या क्लियरेंस नापने के लिए इस प्रकार के गेज का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के गेज का सबसे ज्यादा प्रयोग इसी क्षेत्र में होता है यानी की ऑटोमोबाइल में होता है। इसके बनावट की बात करें तो यह चाकू के समान होता है और इसमें कई पत्तियाँ लगी होती हैं। जैसे मैंने पहले भी कहा है इन पत्तियों की मोटाई अलग अलग होती है जिससे विभिन्न नाप की या मोटाई के गेज का प्रयोग वभिन्न जगहों पर किया जा सकता है। 
Filler Gauge

5. सिलेंडर गेज :- जैसे की इसका नाम है उसी के समान इसका काम भी है इस प्रकार के गेज का प्रयोग गाडियोंमें लगे सिलेंडर के के घिसावट का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके आकार की बाती करें तो यह एक छोटी घड़ी के आकार का होता है और इसके साथ एक छड़ तथा दबने वाला पिन लगा होता है। इसे डायल टैस्ट इंडिकेटर भी कहते हैं।

6. लिमिट गेज :- जहां अधिक उत्पादन होता है। वहां बनने वाले पार्ट्स का विनिमय शीलता को निर्धारित सीमाओं में बनाकर इन गेजों के द्वारा उन पार्ट्स की लिमिट गेज द्धारा जांच की जाती हैं।

इस प्रकार यहाँ हमने जाना 

गेज के प्रकारों के बारे में और उनकी बनावट के बारे में साथ की कुछ कुछ गेजों के उपयोगित के बारे में भी हमने इस पोस्ट में पढ़ा आपको कैसे लगी मेरे साथ जरूर शेयर करें।  

Friday, October 25, 2019

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आज हम हमारे ब्लॉग में बात करने वाले हैं वर्नियर कैलिपर्स के बारे में इस पोस्ट नापने वाला औजार वर्नियर कैलिपर्स फॉर डीजल मैकेनिक के माध्यम से आज हम जानेंग की वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था। साथ ही इसके मुख्य भांगों के बारे में इस पोस्ट में बताया गया है।
vernier_calipers

Napne Wala Aujar Vernier Caliper For Diesel Mechanic

वर्नियर कैलिपर्स क्या है ?

यह एक प्रकार का मिक्रोमीटर है जिसका उपयोग हम ऐसे जगहों पर करते हैं जहां पर किसी बड़े नापने वाले औजार का प्रयोग नहीं किया जा सकता इस कारण इसे माइक्रोमीटर के नाम से भी जाना जाता है और यह इसी श्रेणी में भी आता है। जैसे की हमें किसी ऐसे चीज की माप लेनी है जिसके घिसने की मात्रा बहुत ही कम है लगभग मिमी में तो हम इस प्रकार के माइक्रोमीटर का प्रयोग करते हैं।  

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार किसने किया था ?

वर्नियर कैलिपर्स का आविष्कार एक फ्रांस के वैज्ञानिक पेरी वर्नियर्स ने किया था और इन्ही के नाम पर इसका नाम वर्नियर कैलिपर्स रखा गया था। 

बाजार में किस प्रकार के वर्नियर कैलिपर्स हमें मिलेंगे ?

वर्नियर कैलिपर्स के बाजार में मांग तो वैसे ज्यादा नहीं होती है क्योकि इसका सबसे ज्यादा उपयोग मैकेनिक लोग किया करते हैं और यह आम लोगों के लिये उतना ज्यादा काम का नहीं होता है तो बाजार में यह विभिन्न परिशुद्धता के साथ हमारे लिए उपलब्ध होता है। जो की। 0.01 mm .005 mm 0.05 mm 0.02 mm मीट्रिक प्रणाली में तथा 0.001'' ब्रिटिश प्रणाली में उपलब्ध होते हैं।
बाजार में वर्नियर कैलिपर्स के मांग की बात करें तो यह 6 इंच से 7 इंच 1 फूट तथा 2 फूट तक की लम्बाई में बाजार में उपलब्ध हैं।

वर्नियर कैलिपर्स किस पदार्थ का बना होता है ?
यह सधारणतः निकिल क्रोमियम स्टील या वेनेडियम स्टील के बने होते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के द्धारा किन-किन जगहों की माप लिए जा सकते हैं ?
इसकी मदद से हम बाहरी , गहरी तथा आंतरिक माप ले सकते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के भाग !

वर्नियर कैलिपर्स में मेन स्केल के एक भाग का मान 1mm  होता है। तथा वर्नियर स्केल का एक भाग का मान 0.90 mm होता है इस प्रकार दोनों की अंतर 0.01 mm इस वर्नियर स्केल का अल्पतमांक होता है।

वर्नियर कैलिपर्स का प्रकार 

  1. फ़्लैट ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  2. नाईप ऐज वर्नियर कैलिपर्स 
  3. डेफ्थ वर्नियर कैलिपर्स 
  4. गियर टूथ वतवरणीयर कैलिपर्स। 
डीजल मैकेनिक से जुड़े कई टॉपिक:-

Thursday, October 24, 2019

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आपका बहुत - बहुत स्वागत है मेरे ब्लॉग पर पिछले पोस्ट में मैंने आपसे बात किया था कैलिपर्स के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं माइक्रोमीटर के बारे में जिसमें हम जानेंगें की माइक्रोमीटर क्या है और यह कितने प्रकार का होता है तथा इसके साथ ही हम जानेंगें  माइक्रोमीटर के अल्पतमांक के बारे में तो चलिए जानते हैं -
screw gadge

माइक्रोमीटर क्या है ?

कार्यशाला में इंजिन की मरम्मत करते समय अथवा नया जॉब बनाते समय कई बार बहुत सूक्ष्म माप की आवश्यकता पड़ती है। जिन्हें स्टील फूट रूल या कैलीपर्स के द्वारा नहीं मापा जा सकता है।  इसलिए किसी पार्ट का सूक्ष्म नाप लेने के लिए माइक्रोमीटर का प्रयोग किया जाता है।  यह नट बोल्ट के सिद्धांत पर कार्य करता है आउट साइड माइक्रोमीटर ब्रिटिश व मीट्रिक प्रणाली में आते हैं। ब्रिटीश प्रणाली में कम से कम 0.001 इंच तक माप ले सकते हैं तथा मीट्रिक प्रणाली में 0.01 मिलीमीटर तक कम से माप ले सकते हैं। बाजार में यह विभिन्न रेटों में उपलब्ध है जैसे 50-70 , 75 -100 मिली मीटर में कार्य के अनुसार से दो प्रकार के होते हैं।
  1. आउट साइड माइक्रोमीटर 
  2. इनसाइड माक्रोमीटर  
1. आउट साइड माइक्रोमीटर :- आउट साइड माइक्रोमीटर का प्रयोग किसी जॉब के बाहरी सतह की माप लेने के लिए किया जाता है इसके आकार की बात करे तो यह U के तरह होता है और कार्य विशेष के लिए इसका आकार जो है अलग अलग होता है। या डिजाइन भी कह सकते हैं। आउट साइड माइक्रोमीटर के भाग इस प्रकार से बटे होते हैं-
  1. स्पिंडल 
  2. फ्रेम 
  3. लॉकिंग रिंग 
  4. स्लिप या बैरल 
  5. ट्रिंबल 
  6. रैचिट  
इसके द्वारा माप लेते समय रैचीट को घुमाकर एनविल तथा स्पिंडल के मध्य जॉब को स्पर्श करता हुआ रखा जाता है लॉकिंग रिंग को कस कर स्लीव तथा सिंबल पर अंशांकन को पढ़ा जाता है ये माइक्रोमीटर एक इंच की नाप में या 25 मिमी की नाप में होते हैं। 
इसलिए ब्रिटिश माइक्रोमीटर 0 से 1 इंच 1 से 2 इंच तथा 2 से 3 इंच तक एक - एक इंच के अंदर में आते हैं। 

2. इन साइड माइक्रोमीटर :- किसी बेलनाकार खोखली वस्तु की अंदर की माप लेने के लिए इस प्रकार के मैपिंग टूल का प्रयोग किया जाता है।  इस माइक्रोमीटर में एक पतली छड़ लगाकर इसे जॉब के भीतर डाला जा सकता है।  जिसे हैंडिल कहते हैं।  इनसाइड माइक्रोमीटर द्वारा एक बार में 12 मिमी की सीमा में माप लिया जा सकता है। इससे  बड़ी माप लेने के लिए एक्सटेंसन रॉड का प्रयोग किया जा सकता है। यह एक्सटेंसन रॉड 50-75, 75-100 अर्थात 25 मिमी की अंतर् से होती है। 

Monday, October 21, 2019

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 आज हम बात करने वाले है डीजल मैकेनिक कोर्स में प्रयोग होने वाले नापने वाले औजार के बारे में इस पोस्ट को लिखने से पहले मैंने आपके लिए इसी से रिलेटेड और भी दो पोस्ट लिखें हैं जिसमें मैंने आपको बताया है स्टील फुट रूल के बारे में और स्टील मेजरिंग टेप के बारे  में इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला हूँ कैलिपर के बारे में इससे पहले हम इसके बारे में डिटेल से जाने चलिए जानते हैं यह होता क्या है ?

क्या होता है कैलिपर्स?

जैसे की आप जानते ही है की किसी डीजल मशीन में या किसी भी प्रकार के ऐसे मशीन में कई ऐसे पार्ट लगे होते हैं जिसके नाप लेने में साधारण स्टील टेप का उपयोग नहीं किया जा सकता है और यह बहुत ही कठिन कार्य होता है कई जगह तो ऐसे होते हैं जहां पर टेप को भी नहीं घुसाया जा सकता है और ऐसे भी जगह होते हैं जहां पर अगर माप लेने में थोड़ी भी चूक अगर हमरे होती है तो वह पार्ट खराब हो सकता है और साथ ही अगर वह पार्ट मशीन से ही जुड़ा हो तो वह मशीन पूरा खराब हो सकता हैं।  इसी से बचने के लिए इस प्रकार के कैलिपर्स का प्रयोग किया जाता है।

किसीे गोले अथवा खोखले जॉब की साधारण माप लेने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

कैलिपर्स र्थ किस पदार्थ के बनाये जाते हैं ?

इस प्रकार के कैलिपर्स का निर्माण स्टेनलेस स्टील से किया जाता है जिससे यह बहुत ही सख्त होता है और यह स्तेन लेस होता है यानी की तन्यता नहीं होती है।

इस प्रकार के मैपिंग टूल से किस प्रकार नाप लिया जाता है ?

इस प्रकार के टूल से माप लेने के लिए इसमें जो दो टांगें होती हैं उनका प्रयोग किया जाता है और साथ ही जब हम माप लेते हैं तो इन दोनों टांगों का प्रयोग करके ही इसका माप लिया जाता है इनके टांगों को फैलाया जाता है और दोनों टांगों को जॉब से स्पर्श कराया जाता है जिससे उनकी दुरी या गेप का पता हमें चल जाता है।
इस दुरी को स्टील फुट रॉड के ऊपर दर्शाया जाता है या पढ़ा जा सकता हैं।

नाप लेते समय क्या सावधानी बरतना चाहिए ?

इस प्रकार के टूल का प्रयोग इस प्रकार से करना चाहिए की यह जॉब से ज्यादा रगड़ ना खाये और ज्यादा ढीला भी ना रहे और न ही ज्यादा कड़ा न हो इससे जो माप लेते हैं उसे स्टील फुट रूल के द्वारा पढ़ा जाता है।

 यह दो प्रकार का होता है -

  1. आउट साइड कैलिपर्स 
  2. इन साइड कैलिपर्स 
अगले पोस्ट में हम बात करने वाले हैं माइक्रोमीटर के बारे में आज के पोस्ट में बस इतना ही धन्यवाद!

इन्हें भी पढ़ के देखे कैसे लगता है कमेंट करके बताएं 
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Hello and  welcome my dear friend आज मै आपको बताने वाला हूँ डीजल मैकेनिक कोर्स में प्रयोग में लाये जाने वाले खोलने एवं बाँधने वाले औजार के बारे में इससे पहले आप इस पोस्ट के बारे में जाने आपको बता दे की इससे पहले मैंने इसी के सम्बंध और भी पोस्ट लिखे है जिसमें मैंने आपको अलग अलग पोस्ट के माध्यम से इस खोलने एवं बाँधने वाले औजार के बारे में बताया है जैसे मेरे पोस्ट थे। खोलने एवं बाँधने वाले औजार पेचकस, प्लास, स्पैनर के बारे में बताया था और आज हम आपको बताने वाले हैं हैमर जिसे आम बोलचाल की भाषा में हथोड़ा कहा जाता है।

हैमर (हथोड़ा) क्या है?

किसी भी प्रकार के धातु एवं ऐसे चीज जिनको निकालने के लिए ज्यादा बल की आवश्यकता होती है तो उसके लिए इस प्रकार के टूल का उपयोग ज्यादा किया जाता है।  अर्थात किसी वस्तु को ठोकने मोड़ने या सीधा करने के लिए हैमर का प्रयोग किया जाता है।

हैमर को किस धातु से बनाया जाता है?

हथोड़े को कास्ट स्टील या कार्बन स्टील के बने होते हैं

हैमर कैसे दीखता है?

हैमर एक लोहे के टुकड़े होते है या इसे प्लास्टिक से बनाया जाता है कई जगहों पर यह लोहे का हथोड़ा काम नहीं आता है।  हथोड़े में हैंडिल लगा होता है।  जिसे बैच लगाकर टाइट कर देते हैं।  इससे क्या होता है हैंडिल से हथोड़े के हेड का निकलना इतना आसान नहीं होता है। और भय भी नहीं रहता है।
इस प्रकार ये हैमर का आकार और वजन उसके आकार पर निर्भर करता है। तथा इसके बड़े आकार को घन के नाम से भी जाना जाता है जिसका प्रयोग बड़े धातुओं को अन्य आकार में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

हैमर के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं ?

  1. फेस 
  2. पोल 
  3. नैक 
  4. चीक 
  5. वैज 
  6. आई होल 
  7. पीन 
  8. हैण्डल 
अब यह उपयोगिता के अनुसार कई प्रकार के हो सकते हैं तथा इसके अलावा यह 250 ग्राम से 1 किलो या उससे ज्यादा के भी हो सकते हैं।

हैमर या हथौड़ा कितने प्रकार का होता है ?

हैमर को उनके कार्य के आधार पर निम्न प्रकारों में बांटा गया है -

  1. बाल पीन हैमर 
  2. क्रास पीन हैमर 
  3. स्ट्रेट हैमर 
  4. स्लेज हैमर 
  5. सॉफ्ट हैमर आदि इसके अलावा और भी हो सकते हैं। 
1. बाल पीन हैमर - इस प्रकार के हथौड़े का सबसे ज्यादा प्रयोग गैरेजो में या सामान्य काम करने वाले लोगों के द्धारा  किया जाता है. इस प्रकार के हैमर में एक ओर प्लेन होता है तो दूसरी ओर हथोड़े का भाग तीन चौथाई गोल टेपर होता है। या कहें बाल जैसेपिन बना  होता है इस कारण इसे बाल पीन हैमर के नाम से भी जाना जाता है.इसका प्रयोग रिपीट को ठोकने अथवा फैलाने के लिए किया जाता है।  यह बहुत ही उपयोगी औजार है जिसका प्रयोग किसी मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिए किया जाता है।

2. क्रास पीन हैमर - इस प्रकार के क्रास पीन हैमर का उपयोग V आकार के ग्रूव बनाने में किया जाता है क्योकि इसके पीछे का भाग तो फेस होता जिसे प्लेन भी कहते हैं तथा दूसरी ओर क्रॉस के रूप हैंडिल के समकोण पर टेपर हुआ रहता है इसी कारण इसका प्रयोग V आकार के खांचे बनाने के लिए किया जा सकता है। इसका उपयोग चैनल बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

3. स्ट्रेट पीन हैमर - यह हैमर लगभग क्रॉस पीन हैमर के समान होता है लेकिन इसका जो पीन होता है वह हैमर के हैंडिल  सीध में होता है। इसका प्रयोग क्रॉस पीन  हैमर के समान चैनल बनाने V ग्रूव बनाने तथा रिवेट को फैलाने आदि के लिए किया जाता है।

4. स्लेज हैमर - इस प्रकार के हैमर घन भी कहलाते हैं। इनका अधिकतर उपयोग ब्लैक स्मिथी के कार्यों में गोल रॉड स्मरिया एंगल आयरन चैनल या फ़्लैट आयरन को सीधा करने मोड़ने या काटने के लिए किया जाता है। इसका आकार डबल फेस हैमर के समान होता है।

5. सॉफ्ट हैमर - जिन जॉब में  हथोड़ों से चोट मारने पर उस पर निशान आने का भय रहता है। उन जॉबों के लिए नर्म या सॉफ्ट हैमर का प्रयोग किया जाता है।  यह हैमर लकड़ी, बैकलाइट, प्लास्टिक, पीतल , ताँबे , या एल्युमिनियम आदि नर्म धातुओं के बनाये जाते हैं।
Hammer

सारांश - इस पोस्ट में हमने जाना हैमर के बारे में तो यहां पर यह स्पस्ट हो जाता है की यह एक महत्वपूर्ण औजार है जिसका प्रयोग हम मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिये करते हैं. इन प्रकारों के अलावा यह उपयोगकर्ता के अनुसार और भी प्रकार के हो सकते हैं. जैस की चिपिंग हैमर , लॉय हैमर आदि।

इन्हें भी देखें और जाने डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड टॉपिक्स के बारे में -

Friday, October 18, 2019

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आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आज मै आपके लिए लेकर आया हूँ डीजल मैकेनिक में उसे होने वाले खोलने एवं बाँधने वाले औजार को लेकर आज हम बात करेंगे की कैसे हम स्पेनर का उपयोग करके किसी मशीन को खोल सकते एवं बाँध सकते हैं इससे पहले मैंने आपके लिए एक पोस्ट और लिखा था जिसमें मैंने आपको बताया था इसी खोलने एवं बाँधने के लिए उपयोग किया जाने वाला औजार Pechkas और प्लायर के बारे में आपको बताया था आज के इस पोस्ट में चलिए पढ़ते हैं स्पैनर के बारे में

स्पैनर क्या है?

किसी मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिए सबसे अधिक प्रयोग हम हो या कोई और हो इसी स्पैनर का प्रयोग करता है. आम बोलचाल की भाषा में इसे ज्यादातर चाबी के नाम से जाना जाता है.
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स्पैनर किस पदार्थ के बने होते है?


स्पैनर को ज्यादातर ड्राप फोर्ज स्टील या हाई कार्बन स्टील के बनाया जाता है.

स्पैनर कैसे कैसे आकार का होता है?

स्पैनर के आकार की बात करें तो इसका आकार इसकी उपयोगिता के आधार पर निर्भर करता है. कार्य किस प्रकार के करना है उस हिसाब से इसे अलग अलग बनाया जा सकता है. अब बात करते है इसके प्रकारों की तो यह निम्न प्रकार का होता है-

स्पैनर का प्रकार 
  1. ओपन एण्ड स्पैनर
  2. डबल एण्ड स्पैनर
  3. रिंग  स्पैनर 
  4. सॉकेट स्पैनर 
  5. एडजस्टेबल स्पैनर 
  6. हुक स्पैनर  
  7. एलेन स्पैनर 
1. ओपन एण्ड स्पैनर -
                               इस  प्रकार के स्पैनर में केवल एक और खुला हुआ भाग होता है जिससे नट को फसाया जाता है. और उसे खोला जाता है एवं कसा जाता है. इसे एक और नाम सिंगल एन्ड स्पैनर के नाम से भी जाना जाता है. इसकी माप या साइज को मापने की बात करें तो इसे बीच से नाप कर इसके साईज को नाप कर बताया जाता है।

2. डबल एण्ड स्पैनर -
                            इस प्रकार के स्पैनर भी ओपन एण्ड स्पैनर के समान होता है. फर्क सिर्फ इतना होता है की इसके दोनों और खुला हुआ भाग होता है जो की अलग अलग नाप का होता है और इसे उनके सिरों पर लिखा जाता है. इसके दोनों सिरों में जो ओपन हैड बनाया जाता है वह प्रायः 30 से 150 अंश के कोण पर बनाया जाता है. इस प्रकार के स्पैनर में इस प्रकार की सुविधा होने के कारण इसका प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है. लेकिन इसकी खराबी यह है की यह जल्दी ख़राब होता है और ठीक से नही फसा पाने पर नट के हेड को ख़राब कर देता है.

3. रिंग स्पैनर -
                          इस प्रकार के स्पैनर में दोनों ओर या एक ओर गोल गोल छल्ले बने होते हैं  या कहें रिंग के समान रचनाये होती है जिसमें नट को फंसाया जाता है. और खोला एवं कसा जाता है इसी लिए इसे खोलने एवं बाँधने वाले औजार कहा जाता है. ये छल्ले (रिंग ) बॉडी से विपरीत दिशा में थोड़े से झुके हुए होते हैं.

4. सॉकेट स्पैनर -
                          इस प्रकार के स्पैनर गोल गुटको के रूप में आते है इसके एक सिरे में चौकोर खाचा बना होता है जो की एक ही साइज का होता है. और दूसरे और अलग अलग साईज के गोल ( रिंग ) गुटकों के रूप में आते हैं. यह गोल गुटके अलग अलग माप के बनाये या बने होते है जो की विभीन्न साइज के नट को खोलने एवं कसने के लिए उपयोग किया जाता है. इसमें भी रिंग स्पैनर के समान खाँचे कटे होते हैं।

5. एडजस्टेबल स्पैनर -
                          जैंसे की इसका नाम है एडजस्टेबल स्पैनर उसी प्रकार इसे एडजस्ट किया जा सकता है।  और इसक प्रकार के स्पैनर का प्रयोग वहां किया जाता है जहां पर किसी अन्य प्रकार के स्पैनर फीट नहीं होते हैं।  इस प्रकार के स्पैनर को स्क्रू रिंच के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इसे एक स्क्रू की भाँती कंट्रोल करने के लिए हेड में एक स्क्रू लगा होता है।

6. हुक स्पैनर -
                        इस प्रकार के स्पैनर के आकार के बात करें तो यह C  के आकार का होता है। इसका प्रयोग राउंड नट के लिए किया जाता है। इसके सिरे पर पिन  बना होता है।

7. एलेन की -
                       इस प्रकार स्पैनर का प्रयोग ऐसे नटों को खोलने एवं कसने में किया जाता है जिसके हेड पर छह कोर वाले खांचे बने होते हैं यह छः पहल वाला ठोस पसली रॉड होता है. यह एक ओर से 90 अंश के कोण पर झुका होता है।

सावधानियाँ 

  1. सही माप के स्पैनर का ही प्रयोग करना चाहिए नहीं तो नट या  बोल्ट का हेड ख़राब जो सकता है। 
  2. स्पैनर के दूसरे सिरे का प्रयोग पाइप के साथ नट खोलने या कसने के लिए नहीं करना चाहिए। 
  3. स्पैनर को  हैमर से नहीं ठोकना चाहिए क्योकि इससे इसके टूटने का खतरा रहता है। 
सारांश - जब भी हम किसी स्पैनर का प्रयोग करें सावधानी के साथ करें और उचित स्पैनर का प्रयोग करना चाहिए इसको ठीक से पकड़ना चाहिए। और फिर जोर लगाना चाहिए।


Sunday, October 13, 2019

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Hello and welcome friend आज हम बात करने वाले हैं हम खोलने एवं बांधने वाले औजार प्लास (plier) के बारे में जिसमें मैं आपको बताऊंगा प्लास क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?
दोस्तों इससे पहले जो मैंने पोस्ट किया था मैंने उसमें आपको बताया था पेचकश के बारे में यह भी एक assembling and opening tool है।

प्लास क्या है?

प्लास यह एक बहु उपयोगी औजार है जिसका प्रयोग वस्तुओं को पकड़ने के लिए और छोटे-मोटे तार को काटने व मोड़ने के लिए किया जाता है। यह 6 inch से 10 इंच तक की लंबाई के हो सकते हैं या उससे बड़े भी हो सकते हैं यह उसके उपयोगिता के आधार पर निर्भर करता है।




प्लास के प्रकार


  1. Flat या combination प्लास
  2. Long nose plas
  3. Sleep join plas
  4. Gais plas
  5. Side cutting plas
  6. Vice grip plas
1.Flat or combination plier
इस प्रकार के प्लास का उपयोग लगभग सभी कार्यों के लिए किया जाता है जैसे बिजली की फिटिंग के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है लेकिन इस प्रकार के प्लास में इंसुलेटेड प्लास्टिक के कवर लगे होते हैं। इस प्रकार के प्लास में आगे का भाग चपटा होता है और बीच का भाग गोल दातनुमा होता है। और इसका एक साइड धार वाला होता है जिसका प्रयोग तार को काटने के लिए करते हैं।
plier

2.Long nose plier
long nose plier

इस प्रकार के प्लास के जबड़े लंबाई में टेपर लिए होते हैं और इनमें काटने वाली धार नहीं होती है इनका प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां कंबीनेशन प्लास का उपयोग नहीं किया जा सकता और पर्याप्त स्थान नहीं होता उस जगह पर इसका प्रयोग करते हैं विशेष रुप से इनका प्रयोग गोल्ड स्मिथ रेडियो तथा टीवी के कार्यों में तारों की गुंडी बनाने उन्हें मोड़ने आदि के लिए किया जाता है इनके द्वारा बेरिंग लॉक भी खोले जा सकते हैं।

3.Slip joint plier
Slip joint plier

इस प्रकार इसका जैसा नाम है उसी प्रकार इसे जोड़ पर से खीसका कर इसके जबड़े के साइज को बढ़ाया जा सकता है या कहे इसे कम या ज्यादा खोला जा सकता है। इसका प्रयोग ज्यादातर नट बोल्ट को टाइट करने के लिए क्या जाता है, इसमें तार को काटने के लिए कोई आकार नहीं होता है।

4.Gas plier
gas plier

जैसे कि इसका नाम है गैस प्लास इसका उपयोग गैस पाइप के स्क्रू व बोल्ट को टाइट करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा आयल पाइप पर लगे नटों को खोलने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। इसे सुविधाजनक स्लिप ज्वाइंट प्लास के समान छोटा या बड़ा किया जा सकता है।

5.Side cutting plas
side cutting plier

इस प्रकार के प्लास का उपयोग तारों को काटने के लिए किया जाता है बिजली की तारों को इसके द्वारा वस्तु को पकड़ा या मोड़ा नहीं जा सकता है। अन्य छोटे-मोटे तारों को भी इससे काट सकते हैं।

6.Vice grip plier
vice grip plier

यहां बहु उपयोगी प्लास है इसके जबड़ों को छोटा बड़ा किया जा सकता है इसे रिंच या वॉइस के समान भी प्रयोग कर सकते हैं।




सुरक्षा एवं सावधानियां



  1. साइड कटिंग प्लास से अच्छे स्टील की तार तथा किले आदि नहीं काटने चाहिए।
  2. काम को देखते हुए उसमें कुछ होने वाले प्लास का ही उपयोग करना चाहिए।
  3. प्लास का उपयोग हैमर के समान नहीं करना चाहिए इससे ठोकना नहीं चाहिए।
  4. विद्युत कार्यों के लिए इंसुलेटेड प्लास का उपयोग करना चाहिए।
  5. Long nose plas का नोज खराब हो जाने पर इसे ग्राइंडर से ग्राइंडिंग करके प्रयोग करना चाहिए।
Conclusion

प्लास का उपयोग ज्यादातर लोग समान्य कार्यों के लिए करते है और यह बहु उपयोगी औजार है जो खोलने एवं बांधने के लिए किया जाता है।

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Saturday, October 12, 2019

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Hello and welcome friend आज मैं आपसे बात करने वाला हूं डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड खोलने एवं बांधने वाले औजार के बारे में जिसमें मैं आपसे बात करूंगा पेचकस के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।
standard screwdriver offset screwdriver ratchet screwdriver Phillips screwdriver
Screwdriver

क्या है पेचकस?(pechkas kya hai)


दोस्तों आपने पेचकस को एक और नाम से सुना होगा जिसको हम स्क्रुड्राइवर कहते हैं स्क्रुड्राइवर छोटा बड़ा होता है अपने काम के अनुसार यह हो सकता है। हर सभी को टेस्टर के बारे में मालूम ही होगा जिससे हम बिजली के करंट का पता लगाते हैं तो पेचकस भी उसी प्रकार का होता है लेकिन यह आकार में बड़ा होता है।
तो इससे अब क्लियर हो गया होगा कि पेचकस क्या है?
स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग किसी स्क्रू को खोलने या कसने के लिए प्रयोग किया जाता है।




पेचकस के भाग(pechkas ke bhag)


  • Blade cheap
  • Sank
  • Handle


Blade cheap
पेचकस के आगे का भाग blade cheap कहलाता है।
Sank
पेचकस का मध्य भाग जोकि गोल होता है वहां सैंक कहलाता है।
Handle
पेचकस का ऊपरी भाग जिस को पकड़ कर घुमाया जाता है वहां हैंडल कहलाता है।

पेचकस के प्रकार(pechkas ke prakar)

लंबाई के आधार पर फैसला निम्न प्रकार के होते हैं


  1. साधारण फ्लैट पेचकस
  2. आफसेट पेचकस
  3. रैचिट पेचकस
  4. फिलिप्स पेचकस


1.साधारण फ्लैट पेचकस(simple pechkas)

यह साधारण पेचकस होते हैं और जिस प्रकार सभी पेचकस खोलने एवं कसने के लिए प्रयोग किए जाते हैं यह विभिन्न साइज छोटे बड़े आकार के होते हैं इन पर लकड़ी या प्लास्टिक का हैंडल लगा होता है यह कार्य के अनुसार लाइट ड्यूटी स्क्रुड्राइवर होते हैं इनका बीट यानी आगे का भाग चपटा होता है।

2.ऑफसेट पेचकस(offset pechkas)

इस प्रकार के पेचकस के आगे का भाग भी चपटा होता है और पीछे का भाग भी चपटा होता है लेकिन इसकी दोनों ओर के आखरी छोर 90 अंश के कोण पर मूडे होते हैं। इस प्रकार के पेचकस का प्रयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहां पर साधारण पेचकस का उपयोग नहीं किया जा सकता या वह तिरछा होता है।
इसका मतलब है सकरी जगहों पर इस प्रकार की पेचकस का उपयोग किया जाता है।

3.रैचिट पेचकस (rachit pechkas)

इस प्रकार के रैचिट पेचकस में स्प्रिंग लगे होते हैं और रैचिट हैंडल के अंदर यह फिट होते हैं। और हैंडल के बाहर एक बटन होता है जिसे दबाने पर स्प्रिंग द्वारा रैचिट पेचकस के सैंक को घुमाने लगता है और बटन को छोड़ने पर वह घुमाना बंद कर देता है और पुनः अपनी स्थिति में वापस लौट आता है इस प्रकार के पेचकस का प्रयोग करने से बहुत ही शीघ्रता से पैचो को खोला जा सकता है।

4.फिलिप्स पेचकस (Philips pechkas)

Philips pechkas ऐसे पेचकस होते हैं जिनके आगे का भाग 4 पहल में कटा होता है और इसका प्रयोग ऐसे स्क्रू को खोलने में किया जाता है जिसके ऊपर क्रॉस का या क्रॉस के आकार का ग्रुव बना होता है या खाजा बना होता है। यह विभिन्न नंबर्स के अनुसार माप के आते हैं।




Conclusion

पेचकस एक महत्वपूर्ण औजार है जिसका प्रयोग हम डीजल मैकेनिक कोर्स के अंतर्गत करते हैं। इसके प्रकार को हम अन्य आधारों पर भी बांट सकते हैं।

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Hello and Well-Come my Dear Friends Aaj mai bat karne Wala hu Diesel Mechanic coarse me use hone Wale kholne ewm bandhne wale aujar ke bare, is post me mai aapko bataunga ki kya hota hai kholne vala aujar aur Bandhne ke liye Use kiye jane wale aujar ke bare me bhi aapko bataunga.
chaliye jante hai.
plier pechkas hammer pana rinch

Kya hota hai Kholne ewm Bandhne wale aujar

Dosto aapko bata de ki jab bhi hame kisi chij ki repairing ki aawshyakta hoti hai to sabse pahle hame inhi to chijo ki aawashyakta padti hai jinhe ham kholne ewm bandhne wale aujar kahte hain.




Kholne Wale ewm Bandhne aujar kya hai

Kholne wale aujar ese aujar hote hai jiska upyog ham kisi bhi prkar ke machine ke upar ke bhag ko ya upar ke parat ko hatane ke liye karte hai.
Ya ise is prakar se bhi samjha ja sakta hai jab hame kis nut ko ya kisi dhakkan ko hatane ki aawshyakta ya kholne ki aavshyakta padti hai to ham kramsha pana ewm penchis (palas) jaise chijo ki aawshykata padti hai is prakar jo chije ham kholne ke liye use karte hai jyadatar vahi chije ham wastuo ke machine ko band karne ke liye bhi karte hai.
is prakar kai chije ese jisme ek hi aujar ya tool ki aawshyakta hoti hai lekin kai jagaha esa nahi hota hai kai jagah par kholne ke liye alag aujar ka use kiya jata hai to kai jagah par ek hi aujar ka use kiya jata hai.
Jyadatar kai Machine me esa hi hota hai.jisme ek hi aujar se kholne aur bandhane ka kary pura kar liya jata hai.

Types of Assembling and Opening Tool

Ese to yaha par bahut sare tools aapko Diesel mechanic coarse me dekhne ko mil jate hai lekin mai yaha par kuch important tool ke bare me hi aapko bataunga jo ki hamesha prayog kiye jate hai to chaliye jante hai un tools ke nam..
  1. Pechkas (Screw Driver)
  2. Plas (Plier)
  3. Spanner
  4. Rinch
  5. Hand Hammer
Is prakar maine yaha par sirf inhi tools ka varnan kiya hai jiska sabse jyada use Diesel Mechanic Course me hota hai. ab in sabhi ka agar visar se padhai kare to yaha isi post me sambhav nahi to iske liye maine in sabhi ka alag alag post likha hai aur ise pura karne ki kosis ki hai ummid hai ki aapko ye post achcha laga ho fir bhi mai in sabhi ka thaoda sa Wivran de deta hu.
  • Pechkas (Screw Driver) :- Ye ese aujar hote hai jiska upyog ham kisi sadharan pryog me aane vali mashino ke liye jayada upyog karte hai tatha is prakar ke tools ka pryog ese screw me kiya jata hai jiske uper koi lakir ya cut ka nishan hota hai. jise + Plus ka simbol bhi kah sakte hai.
  • Plas (plier) :- Plas ko ek prkar se ham cutting tools ki shreni me bhi rakh sakte hai kyoki plas se kai chhote mote taro ki katai ki ja sakti hai aur isse chhila bhi ja sakta hai.yaha do tango vala ho ta hai aur iske aage ke bhag ko ham jabra kah sakte hai.
  • Spanner :- Ise aam bolchal ki bhasa me pana bhi kahate hai aur iska pyog ham sabser jyada is Diesel mechanic course me karte hai yah bhi kai prkar ka hota hai aur iske aage ka bhaag iske karya ke aadhar par hota hai tatha iske nam ki bat kare to yah bhi uske aakar par nirbhar karta hai jaise RING SPANNER ki bat kare to iske aage ka bhag RING ke saman gol hota hai.
  • Rinch :- iska prayog bhi SPANNER ke saman kiya jata hai tatha ya bhi pipe tatha kai prakar ke halke machine ko open karne ke liye us kiya jata hai yah bhi kai prakar ka hota hai jisko aap aage post me padhenge.
  • Hand Hammer :- Ise aam bolchal ki bhasha me hathoda kaha jata hai yah bhi kai parakar ka hota hai iska upyog jayda jor se kisi kil ko thokane aur nikalne ke liye kiya jata hai. iska upyog jam ho gaye kisi part ko nikalne ke liye bhi kiya jata hai. iske prakaro ko ham aage post me paadhenge.
THANKS MILTE HAI AGLE POST KE SATH




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Monday, October 7, 2019

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Hello and welcome friends आज मैं बात करने वाला हूं कटिंग टूल्स रीमर के बारे में जिसमें मैं आपको बताऊंगा की रीमर क्या है?, Reamer किस पदार्थ का बना होता है? reamer के मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?,साथ ही रीमर के प्रकार के बारे में भी मैंने यहां पर बताने की कोशिश की है।

Reamer kya hai

Diesel mechanic के कोर्स के लिए हमें कटिंग टूल्स की आवश्यकता होती है और कटिंग टूल्स में एक टूल Reamer भी है।
जब हम drill से किसी जॉब पर होल करते हैं तो उसकी फीनीसिंग के लिए हमें इस टूल रीमर की आवश्यकता पड़ती है।
इसके अलावा किसी सुराख को टेपर करने के लिए किया जाता है। किसी टेढ़े सुराग को सीधा करने के लिए और होल को बड़ा करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
रीमर के प्रयोग करने की क्रिया को रिमिंग कहते हैं।





Reamer किस पदार्थ का बना होता है?

यहां हाई कार्बन स्टील हाई स्पीड स्टील एलॉय स्टील के बने होते हैं।

Main part of reamer 


  1. Chaimfer Angel
  2. Body
  3. Shaik

1.चैम्फर कोण

चैंफर कोण रीमर का वह नुकीला भाग है जिसे सुराख के अंदर डाला जाता है इसकी चौड़ाई की बात करें तो यह ग्रेड के आधार पर होता है और user इसे अपने हिसाब से इसकी चौड़ाई को छोटा या बड़ा रख सकता है। 

2.बॉडी

बॉडी रीमर का वह भाग है जो कि रीमर के हेड के बाद आता है और यहां पर रीमर का वह भाग फिट किया जाता है जिससे कि सुराख की फिनिशिंग की जाती है। 

3.शैंक

शैंक रीमर का मेंन पार्ट है और इस पार्ट की बात करें तो यह पार्ट रीमर के बॉडी से जुड़ा पार्ट है जो कि शंकुआकार होता है। बॉडी में ही ब्लेड को फिट किया जाता है। 

Types of reamer (Reamer के प्रकार)

रिमर का प्रयोग विभिन्न प्रकार के साइज के हिसाब से विभिन्न प्रकार के काम के हिसाब से उसका प्रकार निम्नलिखित प्रकार का होता है-


  1. Hand reamer (हैण्ड रीमर)
  2. Machine reamer (मशीन रीमर)
  3. Adjustable reamer(एडजस्टेबल रीमर)

1.  हैण्डरीमर

हैंड रीमर का प्रयोग हम हाथ से करते हैं और इस प्रकार के रिमर को हाथ से ही चलाया जाता है तथा यह Adjustable रिमर के समान ही होता है इसमें हम अपने हिसाब से blade लगा सकते हैं।

2.मशीन रिमर

मशीन रीमर बिजली से चलने वाली मशीन है जिसका प्रयोग रिमिंग करने के लिए किया जाता है। Machine reamer अभी के समय में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है क्योंकि इससे काम जल्दी हो जाता है और ज्यादा मेहनत की आवश्यकता भी नहीं होती है इसलिए इसका प्रयोग सबसे ज्यादा होता है।

3.Adjustable reamer

इस प्रकार के एडजेस्टेबल रिमर को आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है और इसमें और भी कई उपकरणों के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं।

Conclusion


रिमर का प्रयोग सुराग की सफाई के लिए किया जाता है।औ साथ ही होल को बड़ा करने के लिए किया जाता है।

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Saturday, October 5, 2019

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Hello dosto aapka swagat hai mere blog par aaj mai bahut dino ke bad blog likh raha hu mera motive tha ki mai roj blogging karu lekin kuchh samasyao ke karan mai post nahi likh pa raha tha isse pahle maine aapke liye ek post likha tha Dies Kya Hai ke nam se agar aapne wo post nahi padha hai to post ko padh le kyoki aaj mai aapko isi Die ke dwara chudi katne ki widhi ke bare me btane wala hu..






Die ke dwara chudi kis prakar ke steps aapko karne hote hai wah is prakar hai..
  1. Dekhiye jab ham kisi die ke dwara chudi katate hai to sbase pahle hame kis prakar ki chudi katni hai ise pahle se taiyar kar lete hai aur jis rod par chudi katni hai uske size ko bhi adjust kar lete hai.
  2. Jis rod me chudi katni hoti hai uska upri bhag yani ki jaha se ham chudi katna chahte hai vah sira thoda sa sakra hona chahiye jise ham chamfer hona kahte hai. ese karne se chudi katne me aasani hoti hai.
  3. Chudi katne se pahle us rod ya pipe ko kisi Clamp ya Vise me kas kar jakad dena chahiye taki jhatke ke samay ya chudi katate samay vah hile nahi.
  4. Jab ham kisi pipe ya rod me chudi katate hai to Die Stoke me Die ko sahi sthiti me pakadna chahiye nahi to vah hil jata hai jiske karan chudi achchhe se nahi cut pati hai.
  5. Die ko jab ham ghumate hai to use balance karke ghumana chahiye aur uske handle ko bhi balance karke pakadna chahiye tatha use dabana bhi jaruri hota hai kyoki bina dabaye wah aage nahi badhata hai.
  6. Jab  ham Die ko ghuma rahe hote hai to hame ise bich bich me thoda se uper niche karna chahiye isse kya hota jo lohe ke tukde hote hai wah niche gir jata hai.
  7. Jab ham job ki cutting karte hai to hame lubricant ki aawasykata hoti hai jisse aasani se job ki cutting ho sake to iske liye hame Job ke anusar lubricant ka prayog karna chahiye.
  8. Kisi job par gahari chudi prapt karne ke liye hame job par die ko do se teen bar chalana chahiye jisse ki chudi gahari cut jati hai aur aur ise adjust karke hi chalana chahiye aur iske sahi size ko check karne ke liye grade gun ka use karna chahiye.
  9. aur is prakar ki prakriya puri ho jane ke bad die ke dwara jis job me chudi nikali gaee hai us job ko metal brush ya tar ke bane brush se saf karna chahiye.






conclusion :- 
Job ki cutting karte samay bahut jyada sawdhani baratne ki aawashyakta hoti hai kyoki isse job kharab hone ki sambhwna bahut jyada hoti hai.

Is prkar yah prakriya purna ho jati hai agle post me maine aapko bataya hai cutting tool reamers ke bare me milte hai agle post reamer kya hai ke sath.

Wednesday, April 17, 2019

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कल हमनें बात किया था टेपर के बारे में अगर आपने वो पोस्ट नहीं पढ़ा है तो पढ़ लें आज मैं एक कटिंग टूल डाई के बारे में बात करने जा रहा हूँ तो सबसे पहले चलिये आपको इसके बारे में थोड़ा सा परिचय दे देता हूँ-




डाई (DIES)


जिस प्रकार किसी होल में चूड़ी काटने के लिए टैप(tap) का प्रयोग किया जाता है ठीक उसी प्रकार बेलनाकार रॉड में चूड़ी काटने के लिए डाई का प्रयोग किया जाता है। जैसे- बोल्ट, स्क्रू तथा पाइप आदि में ड्रिल से होल करके उस होल के बीच में डाई का प्रयोग करके विशेष प्रकार की चूड़ियां काट देते हैं इन चूड़ियों को कटिंग एड्ज प्रदान करने के लिए चार फ्रूट भी बना देते हैं। एक ओर की कुछ चूड़ियां टेपर की जाती हैं डाई एज टूल अलॉय स्टील की बनाई जाती है जिससे इन्हें अच्छी कठोरता प्रदान की जाती है चूड़ियों की शुरू में चैम्फर होने से चूड़ी आसानी से रॉड में चढ़ जाती है।

Types Of Dies

जैसे की मैनें पढा है यहां पर डाई को छः (6) प्रकार में बांटा गया है जो की इस प्रकार से हैं-
  1. Solid type die
  2. Sprit type die
  3. Adjustable die
  4. Die nut
  5. Die plate
  6. Die pipe





1. Solid type die-यह डाई ठोस व गोल चक्की के समान होती है इसके बीच में कोई भी स्टेंडर्ड चुडिया हो सकती हैं। इसमें चार कटिंग साइज बनाने के लिए चार कटिंग फ्रूट बने होते हैं यह डाई बहुत ठोस होते हैं इसलिए एक ही बार में पूरी गहराई के साथ चूड़िया इससे काटी जा सकती हैं। इस Solid type die में गहराई को सेट नहीं किया जा सकता है इस करण से इसे Solid type die कहा जाता है।
2. Sprit type die-यह डाई solid die के समान होती है परन्तु इसको एक side से काट दिया जाता है। कटे स्थान पर बैंच लगाकर डाई को खोला जा सकता है जिससे यह पहली बार में ही गहराई से चूड़ियां नहीं काटता है इसको एक डाई स्टॉक में पकड़ कर प्रयोग में लाया जाता है Die stoke में लगे Set scroow के सहायता से इसे समायोजित करके वांछित या अपने अनुसार गहराई की चुडिया काटी जा सकती हैं।
3. Adjustable die-यह डाई दो टुकड़ों में होती है प्रत्येक टुकड़ें के अंदर की ओर चूड़ी कटी होती हैं इन चूड़ियों के बीच में गोल ध्रुव कटे होते हैं। जो कटिंग एड्ज का कार्य करते हैं दोनों टुकड़ों पर एक तथा दो नम्बर लिखा होता है। डाई के बाहर की ओर एडजस्टिंग स्क्रू की सीट बनी होती है दोनों टुकड़ों को थोड़ा टाइट करके पहले हल्की चूड़ी बना ली जाती है तथा इन्हें और टाइट करके घुमाने से इच्छित गहराई की चूड़ियां बनाई जा सकती है इस प्रकार की डाई से बड़ी जॉबों में चूड़ियां काटी जाती हैं।




4. Die nut-डाई नट आकार में वर्गाकार या ष्टभुजाकार नट के समान होती है। वर्गाकार डाई नट में चार फ्रूट तथा हेक्सागोनल डाई नट में छः फ्रूट होते हैं। इस डाई नट को प्रयोग करने के लिए डाई हैण्डिल की आवश्यकता नहीं होती है पर भी इस डाई नट को ओपन स्पैनेर या बॉक्स स्पैनर या रिंच के द्वारा घुमाकर प्रयोग किया जा सकता है। इसका प्रयोग कहीं गहरे चूड़ी काटने या चूड़ी को साफ करने के लिये किया जाता है जहां पर डाई हैण्डिल द्वारा डाई को घुमाने की सम्भावना अधिक होती है।
5. Die plate-डाई प्लेट में बहुत से चूड़ियों की डाइयाँ एक लाइन में बना ली जाती हैं। यह एक हाई कार्बन स्टील की एक प्लेट होती है जिसमें किसी भी साइज की चूड़ी की तीन डाईयाँ रहती हैं। जो क्रम से एक के बाद दूसरी प्रयोग की जाती है। तीसरी डाई पूरी गहराई की चूड़ियां बनाती है इस प्लेट में अधिकतर तीन MM से छोटे साईज की चूड़ियों के लिए डाईयाँ बनी होती हैं।
6. Die pipe-इसका प्रयोग पाईपों में चूड़ियां काटने के लिए किया जाता है। इसके लिए भी डाई ब्लॉक का प्रयोग किया जाता है जिसमें दो या दो चार बिटों में डाई फिट की गई होती हैं। यह एडजस्टेबल डाई के समान होती हैं इसमें भी साईज को कम या ज्यादा करने के लिए एडजस्टिंग स्क्रू होती है।
DIE STOKE-डाई को पकड़ने वाले हैण्डिल या फिक्स्चर को पकड़ने के लिए स्क्रू तथा उसे समायोजित करने के लिए सैट स्क्रू तथा डाई को बलपूर्वक घुमाने के लिए हैण्डिल लगे होते हैं यह दो प्रकार का होता है-
  1. Solid Die Stoke
  2. Adjustable Die Stoke

Conclusion- इस पोस्ट में हमने जाना की डाई क्या है और इसका उपयोग किस लिए किया जाता है तथा इसके प्रकारों के बारे में भी हमने यहां पर जाना और साथ ही इसके विभिन्न प्रकार के डाई के उपयोग के बारे में भी हमने जाना है थोड़ा सा डाई स्टॉक के बारे में भी जाना और उसके प्रकार को भी यहां मैने बताया है।
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tap handle kya haihello friends आज हम बात करने वाले हैं Disel Machanic Cors में उपयोग में लाये जाने वाले tap के handle के बारे में जिसमें मैने उसके handle के बारे में चर्चा किया है। और handle के प्रकार के बारे में भी बताया है

tap handle(टैप हैण्डिल)

job में हैण्ड टैप की सहायता से चूड़ी काटने के लिए टैप हैण्डिल द्वारा टैप को जॉब के सुराख में घुमाया जाता है।

यह टैप हैण्डिल तीन प्रकार के होते हैं

  1. solid tap handle
  2. Adjustable tap handle
  3. T-type tap handle

1.solid tap handle(सॉलिड टैप हैण्डिल

सॉलिड ठोस पदार्थ का बना होता है इसमें दोनों ओर सुविधाजनक पकड़ के लिए हैण्डिल बने होते हैं। बीच में आयताकार भाग में दो अलग-अलग माप के आयताकार खाँचे आर-पार कटे होते हैं। इनसे दो मापों के टैप घुमाएं जा सकते हैं।

2. Adjustable tap handle(एडजस्टेबल टैप हैण्डिल

Adjustable tap handle के बीच के दो भाग में दो टुकड़ों में का ऐसा सैट लगा होता है जिन्हें एडजस्टेबल (Adjustable) स्क्रू की सहायता से विभिन्न मापों के टैप को पकडकर घुमाया जा सकता है।





3.T-type tap handle

यह एक प्रकार का चक होता है जिसमें तीन जॉब फिट रहते हैं। इस चक में विभिन्न प्रकार के छोटे टैपों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। इसके शैक के ऊपर की ओर सुराख करके आर-पार सुविधाजनक लम्बाई का रॉड लगा दिया जाता है जिसकी सहायता से इसमें बंधे टैप को सरलता से घुमाया जा सकता है।
हैण्ड टैपिंग (Hand Taping)
हाँथ द्वारा टैपिंग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
  1. जॉब को वाइस में सीधा व टाइट बांधना चाहिए।
  2. जॉब पर सहीं मार्किंग करके टैप ड्रिल साइज की गणना करके उचित साइज का ड्रिल होल करना चाहिए। ध्यान रहे की होल बिल्कुल सीधा हो।
  3. इसके पश्चात होल के अंदर की सतह को चिकनी व सहीं आकार की बनाने के लिए होल में रीमिंग करनी चाहिए।
  4. अब टेपर टैप को एक उचित टैप रिंच में पकड़कर होल में डालकर नीचे की ओर दबाव देते हुए घुमाना चाहिए।
  5. टैपिंग करते समय उचित लुब्रिकेंट का प्रयोग करना चाहिए जिससे घर्षण कम हो तथा टैप गर्म न हो।
  6. टैपर टैप के पश्चात Intermidiate tap का प्रयोग करना चाहिए।
  7. Intermidiate tap पूरा चलने पर चूड़ियां बन जाती हैं परन्तु बन्द छिद्रों में टैपिंग करने के लिए फिनिशिंग टैप चलाना आवश्यक होता है।

Tuesday, April 16, 2019

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Hello friend how are you I think you are all right.

दोस्तों मुझे बहुत दिनों के बाद ये पोस्ट लिखने का मौका मिला है जिसमें मैं आपको बताने वाला हूँ डीजल मैकेनिक के द्वारा प्रयोग में लाये जाने वाले एक बहुत ही महत्वपूर्ण औजार टैप (Tap) के बारे में तो चलिये दोस्तों शुरू करते हैं-

Tap(टैप) क्या है?

Tap एक प्रकार का कटिंग टूल है जिसके द्वारा cylindrical hols में चूड़ियां निकाली जाती है या खाच बनाई जाती है। इस प्रकार के चूड़ियां काटने को ही टैपिंग कहा जाता है।

Taping (टैपिंग) करने से पहले क्या करें?

Taping करने से पहले एक निश्चित साइज का होल ड्रिल मशीन के द्वारा बनाया जाता है तथा उसे रिमर द्वारा निर्मित किया जाता है तत्पश्चात उसमें टैप को चलाकर चूड़ियां काटी जाती हैं।




कैसे काटी जाती है चूड़ियां या टैपिंग कैसे किया जाता है?

Tap बनाने के लिए हाई कार्बन स्टील या हार्ड स्पीड स्टील को लैथ द्वारा चूड़ी की साईज में टर्न कर दिया जाता है तथा उस पर वांछित प्रकार की चूड़ियां काटी जाती है इसके पश्चात जॉब में कटिंग एज बनाने के लिए इन चूड़ियों को काटते हुए लम्बाई में खांचे बनाते हैं। अब इन्हें हार्ड व टैम्पर किया जाता है।
Tap के मुख्य भाग इस प्रकार से हैं
  1. Design
  2. शैक
  3. बॉडी
  4. खाँचे या फ्लूट
  5. लैण्ड
  6. कटिंग एड्ज
  7. हिल
Point और व्यास के आधार पर टैप के प्रकार
Tap के प्रकार

  1. Hand tap (हैण्ड टैप)
  2. Machine (मशीन टैप)
  • Hand tap क्या है?
हैण्ड टैप को हाँथ द्वारा चलाकर चूड़ियां काटी जाती हैं टैप को हाँथ द्वारा घुमाने के लिए हैंडिल का प्रयोग किया जाता है।
चूड़ियों की संख्या तथा पिच के अनुसार ये निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
B.A.
B.S.F.
B.S.W.
American
Tap प्रायः तीन सैट में आते हैं। जिनमें पहला टैप,
टेपर टैप कहलाता है।
चूड़ियां काटना इसी से प्रारम्भ की जाती हैं।
दूसरा टैप,




मीडियम या इंटरमीडिएट tap कहलाता है।
वास्तव में यहीं टैप चूड़ी काटता है।
तीसरा टैप, प्लग टैप कहलाता है।
यह टैप चूड़ियों को साफ करके सही आकार प्रदान करता है।
चूड़ी काटते समय टैप को आगे पीछे घुमाते रहना चाहिए तथा लुब्रिकेशन का ध्यान रखना चाहिए।
1.) टेपर टैप(Teper tap)
हाँथ द्वारा चूड़ी काटते समय यह सबसे पहला टैप है। अंत में कुछ दांते घिस कर टैपर कर दिया जाता है। इसकी टैपर लिड 4° होती है। इसके अंत के व्यास को पॉइंट व्यास कहते हैं यह उस होल की व्यास छोटा होता है। जिसमें चूड़ियां काटनी हैं आसानी से यह होल में जाकर चूड़ियाँ काट सकता है। चूड़ियाँ काटने के बाद टैप को उल्टा घुमाकर बाहर निकाल लिया जाता है।
इस टैप को चलाने के बाद दूसरे और तीसरे टैप को चलाया जाता है।
2.) इन्टरमीडिएट टैप(INTERMEDIATE TAP)
इसे सेकण्ड टैप भी कहा जाता है इसका प्रयोग टेपर टैप के बाद किया जाता है। इसमें केवल 3 से 5 चूड़ी आगे की ओर टेपर बना होता है। इसकी टेपर लिड 10' होती है। यह टैप सहीं आकार में चूड़ियां बनाता है। परन्तु Blink होल में आगे की चूड़ी की साइज सहीं नहीं बन पाता इसलिए इसके बाद तीसरा टैप (बॉटम टैप ) को चलाया जाता है।
3.) बॉटम टैप (Bottum Tap or Finising Tap)
इसे प्लग टैप भी कहा जाता है बॉटम टैप का भी आगे का एक दो चूड़ी ही टेपर रहता है इसका प्रयोग हम दूसरा टैप (इंटरमीडिएट टैप) को चलाने के बाद करते हैं बॉटम टैप को Blink होल में चलाया जाता है। इसकी टेपर लीड 20' होती है। इस छिद्र की तली पर चूड़ी बना होता है।
  • मशीन टैप (Machine Tap)
मशीन टैप का प्रयोग ड्रिल मशीन द्वारा किये गए होल में चूड़ी काटने के लिए किया जाता है। मशीन टैप का प्रयोग एक विशेष प्रकार के होल्डर में पकड़ कर किया जाता है। ड्रिल मशीन में उल्टी चाल व्यवस्था के कारण मशीन टैप को जॉब से सरलता से बाहर निकाला का सकता है। 
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Monday, March 18, 2019

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Hey friends ये पोस्ट Drilling machine के बारे में बताने के लिए लिखा गया है इस पोस्ट में मैंने आपको Drilling machine के Diesel Mechanic Cors में उपयोग के बारे में बताया है।

ड्रिलिंग मशीन क्या है?
Drilling machine for diesel mechanic

दोस्तों Drilling Machine एक प्रकार का Cutting करने वाला औजार है जिसका प्रयोग हम अपनी आवश्यकता के अनुसार करते हैं , लकड़ी के साथ साथ लोहे को भी काटने का काम करता है।

ड्रिलिंग मशीन के उपयोग -




दोस्तों Drilling Machine के उपयोग हम लकड़ियों (woods) में सुराख करने के लिए करते हैं और लोहे में भी इससे सुराख किया जा सकता है।

Drilling machine के work करने के आधार पर दो प्रकारों में बांटा गया है -

  1. पोर्टेबल ड्रिलिंग मशीन
  2. स्थिर ड्रिलिंग मशीन


1.पोर्टेबल ड्रिलिंग मशीन - 

जैसे की इसके नाम से ही पता चलता है की यह पोर्टेबल है यानी की एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने योग्य है और यह ऐसे चीजों या Objects के लिए Use होता है जिन चीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जाया जा सकता है। दोस्तों इस प्रकार के Drill machine को छोटे छोटे कारीगर रखते हैं। यह आकार में भी उतना बड़ा नहीं होता है और इस प्रकार के Tools का प्रयोग बड़ी आसानी के साथ किया जा सकता है। क्योकि इसका वजन ज्यादा नहीं होता है । 
उदाहरण-
इस प्रकार के औजार में Hand drill ,brest drill तथा Raichit ड्रिल Machine आते हैं।

 2.fixed drill machine -

 इसके नाम से जैसे की पता चलता है स्थिर ड्रिल मशीन अर्थात यह Fixed रहता है और इसका प्रयोग करने के लिए हमें इसके पास जाना पड़ता है तथा इस प्रकार के औजार का प्रयोग किसी बड़े या भारी वस्तु की Drilling के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह सभी प्रकार के धातुओं के लिए सक्षम होती है। 

इस प्रकार के ड्रिल मशीन ये है-

  1. बेंच टाइप ड्रिल मशीन
  2. पिलर टाइप ड्रिल मशीन
  3. रेडीयल टाइप ड्रिल मशीन





1.Bach type drill machine - 

यह हाँथ तथा Electricity से चलाई जा सकती है, इस Machine के Head को किसी भी ऊंचाई में set किया जा सकता है। इस प्रकार के feature होने के कारण इससे हम अधिक ऊंचाई(hight) वाले या लम्बे Jobe की drilling इससे कर सकते हैं।

2.पिलर टाइप ड्रिल मशीन - 

इस प्रकार के पिलर ड्रिल मशीन का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है ड्रिलिंग के लिए इसके अलावा इससे 25 MM तक के सुराख इससे किये जा सकते हैं। इसके Drive spindel, piler fite drive तथा Working table आदि मुख्य भाग होते हैं।

ड्रिलिंग करते समय क्या सावधानी-

  1. Drilling करने से पहले हमें इस प्रकार के ड्रिलिंग औजार (tool) का प्रयोग करना चाहीए जिसका Angle धातु के अनुसार हो और वह धातु में अच्छे से सुराख(Drill) कर सके इस प्रकार का कोण(angle) होना चाहिए जिसे DNS कोण कहते हैं।
  2. मशीन की Speed को drill औजार और धातु(object) को देखकर adjust करना चाहिए।
  3. यदि कोई बड़ा सुराख (Hole) करना हो तो वह सुराख करने से पहले हमें छोटा सुराख करना चाहिए।
  4. Drill को फिट करने से पहले हमे Spindle या Drill slip यानी की बर्मा लगाने के स्थान को साफ कर लेना चाहिए।
  5. Drill करने से पहले आपको job के नीचे लकड़ी का टुकड़ा रखना चाहिए ताकि जब Hole हो जाये तो ड्रिलब्लेड का धार खराब ना हो पाये।
  6. Job को Drill करने से पहले यानी की उसमें Hole करने से पहले ठीक प्रकार से clamp कर लेना चाहिये।
  7. Drill करते time कमजोर पकड़ ना रखें इससे Drill के टूटने  का डर रहता है और Job खराब हो सकता है।

आपको ये जानकारी कैसे लगी कमेंट करें। OK. BYE

Monday, February 18, 2019

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साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं फिर से बहुत दिनों के बाद डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड टॉपिक पर ब्लॉग लिख रहा हूँ आज मैं आपको scraper के बारे में बताने वाला हूँ। इससे पहले मैंने आपको डीजल मैकेनिक कोर्स से रिलेटेड एक और टॉपिक फाइलिंग के बारे में बताया था। तो चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक स्क्रेपर।

Scraper क्या है?





दोस्तों Scraper एक प्रकार का खुरचने के लिए प्रयोग किया जाने वाला औजार है और यह औजार डीजल मैकेनिक कोर्स में कटिंग टूल्स के नाम से जाना जाता है तो दोस्तों इससे पहले मैंने एक और पोस्ट लिखा था जिसमें मैंने आपको कटिंग टूल्स के बारे में बताया था जिसे आप पढ़ सकते हैं।

Scraper का प्रयोग किस समय और किस लिए किया जाता है?

दोस्तों जैसे की मैंने आपको बताया की ये एक प्रकार का कटिंग टूल्स (काटने वाला औजार) है। किसका प्रयोग लोहे के किसी जॉब की फीनिशिनग के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग हम तब करते हैं जब हमारा जॉब बनकर तैयार हो जाता है और बनने के बाद उस पर कोई खुरदुरी सामग्री बच जाती है तब इसे हटाने के लिए ही इसका प्रयोग करते हैं।
अर्थात मशीनिंग के पश्चात जॉब की सतह पर शेष हार्ड स्पॉट को खुरचकर अलग करने के लिए किया जाता है।

Scraper किस पदार्थ का बना होता है और इसकी बनावट कैसे होती है ?

दोस्तों Scraper के बनावट की बात करें तो यह कई प्रकार से डिजाइन किये हुए होते है और डीजल मैकेनिक अपने हिसाब से इसका प्रयोग करते हैं। दोस्तों इस औजार को स्टील या एलॉय स्टील से बनाया जाता है तथा यह इस प्रकार टैपर (धार) किये हुए होता है की इसके द्वारा 0.002" से 0.003" तक की मोटी धातु की जमी परत को खुरच कर निकाला जा सकता है।
इसकी बनावट कई प्रकार की होती है तथा टैग में हैंडिल फिट करके इसका प्रयोग किया जाता है। इनसे चौरस, गोल, तथा तिकोनी सतहों को खुर्चा जा सकता है।




इसका प्रयोग कैसे किया जाता है ?
कुछ स्क्रेपर पुश (धकेल) के प्रयोग किये जाते हैं तथा कुछ का प्रयोग पुल (खिच) करके किया जाता है।
किस प्रकार के Scraper सबसे ज्यादा प्रयोग में लाये जाते हैं?
ऐसे Scraper सबसे ज्यादा प्रयोग किये जाते हैं जिनकी लम्बाई 100mm से 250mm तक की होती है तथा जिंनकी मोटाई 1mm से 3.5mm तक होती है।

इस प्रकार ये निम्न प्रकार के होते हैं इनके बनावट के आधार पर -

Types of scraper full image

1.) फ्लैट स्क्रेपर (Flat Scraper) - Flat Scraper flat file के समान ही होता है लेकिन इसके आगे का भाग थोड़ा सा चौड़ा होता है और फैला होता है। परन्तु इसके आगे का भाग थोड़ा सा गोलाई लिए होता है और इससे लगभग 75°  के कोण पर धार रखी जाती है। इनका प्रयोग धातु की समतल सतह पर रह गए हाई स्पॉट को खुरचने के लिए किया जाता है।

2.) ट्राइएंगुलर स्क्रेपर (Triangular Scraper) - Triangular Scraper आकार में तिकोना होते है। परन्तु इनमें आगे की ओर की आकृति नोक जैसे बनी रहती है। इसका प्रयोग मैकेनिक द्वारा तिकोनों जगहों की फीनिशिंग (सफाई) के लिए किया जाता है।

3.) हुक स्क्रेपर (Hook Scraper) - इस प्रकार के स्क्रेपर बनावट इस प्रकार होती है की इसके आगे का आकार मुड़ा हुआ होता है और यह वहां पर ज्यादा प्रयोग किया जाता है जहां पर फ्लैट स्क्रेपर का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। 

4.) हाफ राउण्ड स्क्रेपर (Half round Scraper) - इसका आकार भी हाफ राउण्ड फाइल के समान होता है और परन्तु इसकी बॉडी की बात करें तो यह बीच से खोखली होती है और इसका प्रयोग टुकड़ों में बने बेयरिंग तथा बसों को साफ करने (खुरचने) के लिए किया जाता है और इसके बॉडी के दोनों ओर कटिंग एज ग्राईंण्ड किया हुआ होता है।
Double handed scraper image

5.) डबल हैंडिल स्क्रेपर (Double Handle Scraper) - इस प्रकार के स्क्रेपर में दोनों तरफ हैंडिल फिट किये हुए होते हैं और इस प्रकार के स्क्रेपर के द्वारा आपको कार्य करना आसान व कार्य शीघ्रता से होता है। इनके द्वारा ड्रा फाइलिंग के समान बड़ी सतहों की स्क्रेपिंग की जाती है। इन स्क्रेपरों द्वारा अन्य स्क्रेपरों की अपेक्षा कार्य शीघ्रता व कम समय में किया जा सकता है।

साथियों जिस प्रकार स्क्रेपिंग किया जाता है उस समय क्या क्या सावधानी चाहिए ये इस प्रकार है -
1. जब भी स्क्रेपर का चयन करते हैं तो उस को देखकर स्क्रेपर का चयन करें।




2. स्क्रेपर पर उचित धार लगी होनी चाहिए, अच्छे धार वाले स्क्रेपर का चयन करना चाहिए।
3. स्क्रेपिंग के पहले हाँथ को अच्छे से साफ कर ले और इस बात का हमेशा ख्याल रखें की हाँथ में किसी प्रकार की चकनाई नहीं हो।
4. स्क्रेपर का प्रयोग बिना हैंडिल के प्रयोग नहीं करना चाहिए। 5. स्क्रेपर की धार वाली सतहों पर हाँथ नहीं फेरना चाहिए इससे हाँथ कट भी सकता है।
6. हाई स्पॉट का पता लगाने के लिए आपको सर्फेस प्लेट का प्रयोग करना चाहिए और विभिन्न जगहों की जांच इससे करनी चाहिए।
7. स्क्रेपिंग करने के बाद सर्फेस प्लेट को साफ करना चाहिए।
8. स्क्रेपर को अन्य औजारों के साथ नहीं रखना चाहिए।
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