पर्वत ज़मीन का एक बहुत ऊँचा और बड़ा हिस्सा होता है जो अपने आस-पास की ज़मीन से ऊपर उठा होता है। पर्वत पृथ्वी की सबसे ज़रूरी प्राकृतिक विशेषताओं में से एक हैं और दुनिया के कई हिस्सों में पाए जाते हैं।
पर्वतों का ऊपरी हिस्सा नुकीला या गोल होता है, जिसे चोटी कहते हैं। कुछ पर्वतों की चोटियाँ सपाट होती हैं, लेकिन ज़्यादातर अपने आस-पास की ज़मीन से तेज़ी से ऊपर उठते हैं। पर्वत के निचले हिस्से को बेस कहा जाता है। जैसे-जैसे हम पर्वत पर ऊपर जाते हैं, हवा ठंडी और पतली होती जाती है।
पर्वत किसे कहते हैं
पर्वत एक बड़ा, प्राकृतिक भू-आकृति है जो अपने आस-पास के इलाके से काफी ऊपर उठा होता है, जिसमें खड़ी ढलान, एक चोटी और काफी ऊंचाई होती है, जिसे आम तौर पर 300 मीटर से ज़्यादा ऊंचा माना जाता है। यह टेक्टोनिक ताकतों या ज्वालामुखी गतिविधि से बनता है।
पर्वत अलग-अलग प्रकार से बनते हैं। कुछ पर्वत तब बनते हैं जब पृथ्वी की प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं। जब ऐसा होता है, तो ज़मीन ऊपर की ओर धकेल दी जाती है, जिससे ऊँचे पर्वत बनते हैं। इन्हें फोल्ड पर्वत कहा जाता है। हिमालय फोल्ड पर्वत का एक उदाहरण है। दूसरे प्रकार की बात करे तो पर्वत ज्वालामुखी की क्रिया से बनते हैं।
जब गर्म पिघली हुई लावा पृथ्वी से बाहर निकलती है और ठंडी होती है, तो यह समय के साथ परतें बनाती है और ज्वालामुखी पर्वत बनाती है। तीसरे प्रकार के पर्वत तब बनते हैं जब हवा और पानी धीरे-धीरे अपने आस-पास की ज़मीन को घिस देते हैं, जिससे एक ऊँचा इलाका रह जाता है।
पर्वत हवाओं को रोक सकते हैं और एक तरफ बारिश करवा सकते हैं जबकि दूसरी तरफ सूखा रख सकते है। कई नदियाँ पर्वतों से शुरू होती हैं क्योंकि बर्फ और ग्लेशियर पिघलकर पानी के रूप में नीचे बहते हैं। यह पानी नीचे रहने वाले लोगों, पौधों और जानवरों के लिए बहुत ज़रूरी है।
पहाड़ी इलाकों में कई तरह के पौधे और जानवर रहते हैं। जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं, पौधों और जानवरों के प्रकार बदलते जाते हैं। निचले लेवल पर, पेड़ और घास वाले जंगल होते हैं। ऊपर, सिर्फ़ छोटे पौधे और झाड़ियाँ पाई जाती है। बहुत ज़्यादा ऊँचाई पर, पूरे साल बर्फ रहती है।
पर्वत के कितने प्रकार होते हैं?
पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली प्रमुख स्थलाकृतियों में पर्वत का महत्वपूर्ण स्थान है। पर्वत सामान्यतः अपने आसपास के क्षेत्र की तुलना में काफी ऊँचे होते हैं और इनकी ढाल तीव्र होती है। पर्वतों का निर्माण अलग-अलग भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण हुआ है। निर्माण की प्रक्रिया, संरचना और आकार के आधार पर पर्वतों को मुख्य रूप से वलित पर्वत, ब्लॉक पर्वत, ज्वालामुखी पर्वत और अवशिष्ट पर्वत में बाँटा जाता है।
1. वलित पर्वत
वलित पर्वत वे पर्वत हैं जो पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों के कारण चट्टानों की परतों के मुड़ने से बनते हैं। जब दो महाद्वीपीय प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, तो उनके बीच मौजूद अवसादी चट्टानों की परतों पर दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण चट्टानें मुड़कर ऊपर की ओर उठती हैं, जिससे पर्वतों का निर्माण होता है।
वलित पर्वतों में आमतौर पर लंबी पर्वत श्रृंखलाएं, ऊंची चोटियां और गहरी घाटियां होती हैं। दुनिया की कई विशाल पर्वत श्रृंखलाएं वलित पर्वतों के उदाहरण हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- हिमालय – भारत, नेपाल, भूटान और तिब्बत क्षेत्र
- आल्प्स – यूरोप
- एंडीज – दक्षिण अमेरिका
- रॉकीज़ – उत्तरी अमेरिका
- एटलस पर्वत – अफ्रीका
हिमालय वलित पर्वतों का एक प्रमुख उदाहरण है।
हिमालय का निर्माण इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराने से हुआ था। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है, जिसके कारण हिमालय क्षेत्र में लगातार भू-वैज्ञानिक गतिविधियां होती रहती हैं।
विशेषताएं:
- बहुत ऊंची चोटियां
- लंबी पर्वत श्रृंखलाएं
- खड़ी ढलानें
- नई भू-आकृतियां
- भूकंप की संभावना
उदाहरण: माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, आदि।
2. ब्लॉक पर्वत
ब्लॉक पर्वत मुख्य रूप से भ्रंशन की प्रक्रिया से बनते हैं। जब तनाव वाली ताकतों के कारण पृथ्वी की चट्टानी परतों में दरारें या भ्रंश बन जाते हैं, तो चट्टान के बड़े हिस्से ऊपर उठ सकते हैं या नीचे धंस सकते हैं। ऊपर उठे हुए भू-भाग को ब्लॉक पर्वत कहा जाता है।
कई मामलों में, दो भ्रंशों के बीच स्थित ज़मीन ऊपर उठकर पर्वत बनाती है। इसके विपरीत, दो ऊंचे भू-भागों के बीच धंसी हुई जगह रिफ्ट वैली बना सकती है।
प्रमुख उदाहरण:
- सिएरा नेवादा – USA
- वोजेस पर्वत – फ्रांस
- ब्लैक फॉरेस्ट – जर्मनी
- साल्ट रेंज – पाकिस्तान के कुछ हिस्से
भारत में ब्लॉक पर्वत
भारत में, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला को भ्रंशन और उत्थान (ऊपर उठने) से बनी पर्वत संरचना का उदाहरण माना जाता है। नर्मदा और ताप्ती जैसी नदियों से जुड़ी रिफ्ट वैलियाँ भी इसी भू-वैज्ञानिक संरचना से जुड़ी हैं।
विशेषताएँ:
- भ्रंशन के कारण बनते हैं
- पर्वत का एक हिस्सा ऊपर उठ सकता है
- आस-पास रिफ्ट वैलियाँ हो सकती हैं
- ढलान काफी खड़ी हो सकती है
3. ज्वालामुखी पर्वत
ज्वालामुखी पर्वतों का निर्माण ज्वालामुखी उद्गार के कारण होता है। जब पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म मैग्मा ज्वालामुखी के माध्यम से सतह पर आता है, तो उसके साथ राख, लावा और अन्य पदार्थ बाहर निकलते हैं। समय के साथ ये पदार्थ ज्वालामुखी के आसपास जमा होते जाते हैं और एक ऊँचा पर्वतीय आकार बना देते हैं।
इन पर्वतों का आकार प्रायः शंकु जैसा होता है। कुछ ज्वालामुखी सक्रिय होते हैं, कुछ सुप्त और कुछ मृत ज्वालामुखी माने जाते हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- माउंट फूजी – जापान
- माउंट किलिमंजारो – तंजानिया
- माउंट एटना – इटली
- माउंट सेंट हेलेंस – अमेरिका
- मौना लोआ – हवाई
माउंट फूजी
जापान का माउंट फूजी ज्वालामुखी पर्वत का प्रसिद्ध उदाहरण है। इसकी लगभग शंक्वाकार आकृति इसे आसानी से पहचानने योग्य बनाती है।
विशेषताएँ:
- ज्वालामुखी गतिविधि से निर्माण
- लावा और राख की परतों से बनना
- कई पर्वत शंकु के आकार के होते हैं
- कुछ सक्रिय ज्वालामुखी आज भी उद्गार करते हैं
4. अवशिष्ट पर्वत
अवशिष्ट पर्वतों को अवशेष पर्वत भी कहा जाता है। इनका निर्माण मुख्य रूप से अपक्षय और अपरदन की लंबी प्रक्रिया से होता है। जब किसी बड़े पर्वतीय या पठारी क्षेत्र पर लाखों वर्षों तक हवा, पानी, तापमान और अन्य प्राकृतिक शक्तियों का प्रभाव पड़ता है, तो कमजोर चट्टानें धीरे-धीरे घिस जाती हैं। कठोर चट्टानों के जो भाग बच जाते हैं, वे अवशिष्ट पर्वत या पहाड़ियों का रूप ले लेते हैं।
इसलिए इन्हें नए पर्वतों की तरह पृथ्वी की सतह के अचानक ऊपर उठने से बनने वाला पर्वत नहीं माना जाता, बल्कि ये पुराने भू-भाग के अपरदित अवशेष होते हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- अरावली पर्वतमाला – भारत
- नीलगिरि पहाड़ियाँ – भारत
- स्कॉटिश हाईलैंड्स – स्कॉटलैंड
- ड्रैकेंसबर्ग – दक्षिण अफ्रीका के क्षेत्र में
अरावली पर्वतमाला
भारत की अरावली पर्वतमाला विश्व की प्राचीन पर्वत प्रणालियों में से एक है। लंबे समय तक हुए अपक्षय और अपरदन के कारण इसकी ऊँचाई काफी कम हो गई है। इसलिए इसे अवशिष्ट/प्राचीन पर्वतीय भू-आकृति के उदाहरण के रूप में पढ़ाया जाता है।
भारत में कुल कितने पर्वत है?
भारत में पर्वतों की कुल संख्या निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है, क्योंकि पर्वतों को अलग-अलग पर्वत, पर्वत-शिखर, पर्वत-श्रेणी और उप-श्रेणी के रूप में गिना जाता है। इसलिए सामान्यतः भारत के पर्वतों का अध्ययन उनकी प्रमुख पर्वत श्रेणियों के आधार पर किया जाता है। भारत में हिमालय से लेकर दक्षिण भारत की पश्चिमी और पूर्वी घाट तक अनेक महत्वपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र हैं।
भारत के प्रमुख पर्वत और पर्वत श्रेणियाँ
भारत की सबसे महत्वपूर्ण पर्वत प्रणाली हिमालय है। हिमालय भारत के उत्तर में पश्चिम से पूर्व तक फैला हुआ है। इसकी प्रमुख श्रेणियों में महान हिमालय, लघु हिमालय और शिवालिक शामिल हैं। भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कंचनजंघा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 8,586 मीटर है। यह सिक्किम और नेपाल की सीमा के पास स्थित है और भारत की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है।
काराकोरम पर्वत श्रेणी भारत के उत्तर में स्थित एक अत्यंत ऊँची पर्वत प्रणाली है। इस क्षेत्र में कई ऊँची चोटियाँ और हिमनद पाए जाते हैं। K2 विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है, हालांकि यह भारत प्रशासित क्षेत्र के बाहर स्थित है।
लद्दाख पर्वत श्रेणी हिमालय और काराकोरम के बीच के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसके आसपास ऊँचे पठार, घाटियाँ और ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र पाए जाते हैं।
जास्कर पर्वत श्रेणी मुख्य रूप से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में फैली हुई है। यह हिमालय की महत्वपूर्ण समानांतर पर्वत श्रेणियों में से एक है।
भारत के पश्चिमी भाग में अरावली पर्वत श्रेणी स्थित है। यह दुनिया की प्राचीन पर्वत प्रणालियों में से एक मानी जाती है। अरावली मुख्य रूप से राजस्थान से होकर गुजरात, हरियाणा और दिल्ली की ओर फैली है। इसकी सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है, जो माउंट आबू, राजस्थान में स्थित है।
दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट एक प्रमुख पर्वत प्रणाली है। यह गुजरात और महाराष्ट्र से लेकर गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तक फैली है। अनामुडी पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी है, जिसकी ऊँचाई लगभग 2,695 मीटर है।
पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तट के समानांतर स्थित हैं। ये पश्चिमी घाट की तुलना में अधिक असतत और कम ऊँचे हैं। पूर्वी घाट के प्रमुख क्षेत्रों में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
इसके अलावा भारत में विंध्य पर्वत, सतपुड़ा पर्वत, नीलगिरि पर्वत, कार्डमम पहाड़ियाँ, गारो-खासी-जैंतिया पहाड़ियाँ और पटकोई पर्वत श्रेणियाँ भी महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख पर्वतों के नाम
- हिमालय
- काराकोरम
- लद्दाख पर्वत श्रेणी
- जास्कर पर्वत श्रेणी
- अरावली पर्वत
- विंध्य पर्वत
- सतपुड़ा पर्वत
- पश्चिमी घाट
- पूर्वी घाट
- नीलगिरि पर्वत
- गारो-खासी-जैंतिया पहाड़ियाँ
- पटकोई पर्वत
- नागा पहाड़ियाँ
- मिजो पहाड़ियाँ
- कार्डमम पहाड़ियाँ
भारत में पर्वतों और पहाड़ियों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए उनकी कोई एक निश्चित कुल संख्या नहीं बताई जाती। भौगोलिक दृष्टि से हिमालय, काराकोरम, अरावली, विंध्य, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट भारत की प्रमुख पर्वत प्रणालियाँ हैं। ये पर्वत भारत की जलवायु, नदियों, वनस्पति, कृषि और जैव-विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पर्वत और पहाड़ में क्या अंतर है
| आधार | पर्वत | पहाड़ |
|---|---|---|
| 1. ऊँचाई | पर्वत सामान्यतः अधिक ऊँचे होते हैं। | पहाड़ पर्वतों की तुलना में कम ऊँचे होते हैं। |
| 2. ढलान | इनकी ढलान प्रायः अधिक तीखी और खड़ी होती है। | इनकी ढलान सामान्यतः कम खड़ी होती है। |
| 3. आकार | पर्वत बड़े और विस्तृत भू-आकार हो सकते हैं। | पहाड़ अपेक्षाकृत छोटे भू-आकार होते हैं। |
| 4. ऊपरी भाग | पर्वतों की चोटियाँ अक्सर ऊँची और स्पष्ट होती हैं। | पहाड़ों की चोटियाँ अपेक्षाकृत नीची और गोलाकार हो सकती हैं। |
| 5. उदाहरण | हिमालय, आल्प्स और एंडीज पर्वत के उदाहरण हैं। | अरावली की कुछ छोटी पहाड़ी श्रेणियाँ और स्थानीय ऊँचे भू-भाग पहाड़ के उदाहरण हैं। |
पर्वत और पठार में क्या अंतर है
| आधार | पर्वत | पठार |
|---|---|---|
| 1. ऊँचाई | पर्वत सामान्यतः आसपास के क्षेत्र से बहुत अधिक ऊँचे होते हैं। | पठार भी ऊँचे होते हैं, लेकिन इनका ऊपरी भाग अपेक्षाकृत समतल होता है। |
| 2. आकार | पर्वतों का आकार ऊँचा और शंकु या चोटीनुमा हो सकता है। | पठार का आकार ऊँचा लेकिन ऊपर से विस्तृत और समतल होता है। |
| 3. ऊपरी सतह | पर्वतों की चोटियाँ सामान्यतः नुकीली या ऊबड़-खाबड़ होती हैं। | पठार की ऊपरी सतह सामान्यतः समतल या हल्की ढलान वाली होती है। |
| 4. ढलान | पर्वतों की ढलान प्रायः बहुत तीखी होती है। | पठार के किनारे खड़े हो सकते हैं, लेकिन इसका ऊपरी भाग अपेक्षाकृत समतल रहता है। |
| 5. उदाहरण | हिमालय, आल्प्स और एंडीज पर्वत के उदाहरण हैं। | दक्कन का पठार, तिब्बत का पठार और छोटानागपुर पठार प्रमुख उदाहरण हैं। |
