छोटा नागपुर का पठार कहां है - Chota Nagpur Plateau

छोटा नागपुर का पठार भारत का एक महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है, जो अपनी खनिज संपदा, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यह पठार मुख्य रूप से पूर्वी भारत में स्थित है और देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

छोटा नागपुर का पठार कहां है

छोटा नागपुर का पठार कहां है

छोटा नागपुर पठार पूर्वी भारत में स्थित एक पठार है, जो झारखंड राज्य के अधिकांश भाग के साथ-साथ छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बिहार के निकटवर्ती भागों को भी आच्छादित करता है। पठार के उत्तर और पूर्व में सिंधु-गंगा का मैदान स्थित है, और दक्षिण में महानदी का बेसिन स्थित है। छोटा नागपुर पठार का कुल क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर है।

यह पठार प्राचीन कठोर चट्टानों से बना है, जिनमें ग्रेनाइट और गनीस प्रमुख हैं। पठार का भू-आकृतिक स्वरूप ऊबड़-खाबड़ है, जिसमें कई छोटी पहाड़ियाँ, घाटियाँ और जलप्रपात पाए जाते हैं। यहाँ की प्रमुख नदियाँ दामोदर, सुवर्णरेखा, कोयल और शंख हैं, जो इस क्षेत्र की जल व्यवस्था को बनाए रखती हैं।

भौतिक संरचना

छोटा नागपुर का पठार एक महाद्वीपीय पठार है। जो सामान्य भूमि के ऊपर फैला हुआ एक विस्तृत भूभाग होता है। यह पठार प्रीकैम्ब्रियन चट्टानों से बना है। यह पठार सेनोज़ोइक काल में विवर्तनिक बलों के कारण महाद्वीपीय उत्थान से बना है।

यह पठार प्राचीन कठोर चट्टानों से बना है, जिनमें ग्रेनाइट और गनीस प्रमुख हैं। पठार का भू-आकृतिक स्वरूप ऊबड़-खाबड़ है, जिसमें कई छोटी पहाड़ियाँ, घाटियाँ और जलप्रपात पाए जाते हैं।

छोटा नागपुर का पठार अत्यंत प्राचीन भू-भाग का हिस्सा है। यहाँ पाई जाने वाली चट्टानें आर्कियन काल की हैं, जो इसकी प्राचीन उत्पत्ति की पुष्टि करती हैं। इस क्षेत्र में गोंडवाना काल के अवसादी निक्षेप भी मिलते हैं, जिनमें कोयला प्रमुख है। यही कारण है कि दामोदर घाटी क्षेत्र को गोंडवाना कोयला क्षेत्र कहा जाता है।

छोटा नागपुर का पठार मानचित्र

छोटा नागपुर का पठार कहां है

छोटा नागपुर पठार का महत्व

छोटा नागपुर पठार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है। इसका विस्तार मुख्यतः झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ भागों में है। यह पठार प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदा, वन संपदा और सांस्कृतिक विविधता के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

1. खनिज संपदा का भंडार

छोटा नागपुर पठार को भारत का खनिज भंडार कहा जाता है। यहाँ कोयला, लोहा, मैंगनीज, बॉक्साइट, तांबा, अभ्रक और चूना पत्थर जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। टाटा स्टील जैसे बड़े उद्योगों की स्थापना इसी क्षेत्र में खनिजों की उपलब्धता के कारण हुई। झारखंड के जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद जैसे औद्योगिक नगर इसी पठार की देन हैं।

2. औद्योगिक विकास का केंद्र

खनिज संसाधनों की प्रचुरता के कारण यह क्षेत्र भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित हुआ है। इस क्षेत्र में लौह-इस्पात, एल्युमिनियम, कोयला आधारित ऊर्जा, सीमेंट और भारी मशीनरी उद्योग स्थापित हैं। यह पठार देश की औद्योगिक प्रगति का आधार स्तंभ माना जाता है।

3. जल संसाधन

छोटा नागपुर पठार से कई महत्वपूर्ण नदियाँ निकलती हैं, जैसे दामोदर, सुवर्णरेखा, कोयल और ब्राह्मणी। दामोदर नदी को “बंगाल का शोक” कहा जाता था, लेकिन अब इस पर बने बाँधों और परियोजनाओं से सिंचाई और बिजली उत्पादन में सहायता मिलती है। यह क्षेत्र जलविद्युत उत्पादन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

4. वन संपदा और जैव विविधता

यह पठार घने वनों से आच्छादित है, जहाँ साल, सागौन, बांस और अन्य मूल्यवान वृक्ष पाए जाते हैं। वन संपदा स्थानीय आदिवासी समुदायों के जीवन का आधार है। यहाँ विविध वन्यजीव भी पाए जाते हैं, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।

5. संस्कृति और सामाजिक महत्व

छोटा नागपुर पठार आदिवासी संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। संथाल, मुंडा, उरांव और हो जनजातियाँ यहाँ की प्रमुख जनजातियाँ हैं। इनकी पारंपरिक जीवन शैली, लोक नृत्य, त्योहार और प्रकृति के साथ सामंजस्य भारत की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाते हैं।

छोटा नागपुर पठार का विस्तार 

छोटा नागपुर पठार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक प्राचीन भू-भाग है, जो अपनी भौगोलिक संरचना, खनिज संपदा और ऊँचाई के कारण विशेष महत्व रखता है। इसका विस्तार मुख्य रूप से झारखंड राज्य में है, लेकिन इसके कुछ भाग ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ तक फैले हुए हैं।

भौगोलिक सीमाएँ

छोटा नागपुर पठार की सीमाएँ विभिन्न प्राकृतिक संरचनाओं से निर्धारित होती हैं - 

  1. उत्तर में: गंगा का मैदानी क्षेत्र
  2. दक्षिण में: महानदी बेसिन और उड़ीसा के पहाड़ी क्षेत्र
  3. पूर्व में: पश्चिम बंगाल का समतल भाग
  4. पश्चिम में: छत्तीसगढ़ का मैदान

क्षेत्रफल और ऊँचाई

इस पठार का क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर माना जाता है। इसकी औसत ऊँचाई 700 से 1,000 मीटर के बीच है, जबकि कुछ स्थानों पर ऊँचाई 1,100 मीटर से भी अधिक हो जाती है। पठार का सबसे ऊँचा भाग राँची और नेतरहाट क्षेत्र में स्थित है, जिन्हें पठार की छत भी कहा जाता है।

प्रमुख उप-पठार और क्षेत्र

छोटा नागपुर पठार कई उप-पठारी भागों में विभाजित है - 

  1. राँची पठार - सबसे ऊँचा और प्रमुख भाग
  2. हजारीबाग पठार - कोयला क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध
  3. कोडरमा पठार - अभ्रक के भंडार के लिए जाना जाता है
  4. पालामू क्षेत्र - वन और खनिज संपदा से समृद्ध

छोटा नागपुर की सबसे ऊंची चोटी

छोटा नागपुर पठार की सबसे ऊँची चोटी पारसनाथ पहाड़ी है, जिसे पारसनाथ पर्वत या शिखरजी के नाम से भी जाना जाता है।

  • ऊँचाई: लगभग 1,365 मीटर
  • स्थान: झारखंड के गिरिडीह जिले में
  • अन्य नाम: शिखरजी 

यह छोटा नागपुर पठार की सर्वोच्च चोटी होने के कारण क्षेत्र की जलवायु और जल प्रवाह को प्रभावित करती है।

Subscribe Our Newsletter