मातृभाषा किसे कहते हैं - Mother tongue

मातृभाषा किसे कहते हैं - Mother tongue

मातृभाषा शब्द का अर्थ व्यक्ति की मूल भाषा है अर्थात, जन्म से सीखी गई भाषा। इसे पहली भाषा, प्रमुख भाषा, घरेलू भाषा और मूल भाषा भी कहा जाता है।

अपने घर में जिस भाषा का प्रयोग होता है, उसे मातृभाषा कहा जाता है। भिन्न-भिन्न प्रान्तों एवं देशों की भाषाएँ अलग-अलग होती हैं। वहाँ पर प्रयुक्त भाषा ही उस देश या प्रान्त की मातृभाषा होती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों में हिन्दी का प्रयोग होता है। अत: वहाँ की मातृभाषा हिन्दी है। महाराष्ट्र में मराठी, बंगाल में बंगाली, गुजरात में गुजराती इन प्रदेशों की मातृभाषा है।

मातृभाषा किसे कहते हैं

इस प्रकार स्पष्ट है कि मातृभाषा - वह भाषा है जिसका प्रयोग वहाँ के रहने वाले लोगो के द्वारा किया जाता हैं। जिस भाषा का प्रयोग स्थानीय सदस्यों द्वारा किया जाता है, उसे ही मातृभाषा कहा जाता है।

मातृभाषा वह भाषा होती है, जिसे हम जन्म से सुनते, समझते और बोलना सीखते हैं। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सोच की जड़ होती है। माँ की लोरी से लेकर जीवन के पहले शब्द तक, मातृभाषा हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है।

मातृभाषा का महत्व

मातृभाषा में सोचने और सीखने से ज्ञान की समझ अधिक गहरी होती है। यह भाषा हमारे विचारों को सहज रूप से व्यक्त करने में सहायता करती है। शोध बताते हैं कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों की बौद्धिक क्षमता और आत्मविश्वास अधिक विकसित होता है।

हर मातृभाषा अपने साथ एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत लेकर आती है। लोककथाएँ, गीत, कहावतें और परंपराएँ मातृभाषा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। भाषा के लुप्त होने का अर्थ केवल शब्दों का खोना नहीं, बल्कि पूरी संस्कृति का मिट जाना होता है।

आधुनिक समय में मातृभाषा

वैश्वीकरण और तकनीक के युग में विदेशी भाषाओं का महत्व बढ़ा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम अपनी मातृभाषा को पीछे छोड़ दें। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से मातृभाषाओं को नया जीवन मिल रहा है।

शिक्षा का आधार मातृभाषा में होना चाहिए, ताकि बच्चे विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें। मातृभाषा में शिक्षा सोचने की क्षमता, रचनात्मकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करती है।

मातृभाषा को जीवित रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है। हमें घर, समाज और शिक्षा में अपनी मातृभाषा का प्रयोग करना चाहिए, बच्चों को इसमें बोलने और लिखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

भारत के राज्यों की मातृभाषाएँ
क्रमांक राज्य मातृभाषा
1उत्तर प्रदेशहिंदी
2महाराष्ट्रमराठी
3पश्चिम बंगालबंगाली
4तमिलनाडुतमिल
5कर्नाटककन्नड़
6आंध्र प्रदेशतेलुगु
7गुजरातगुजराती
8राजस्थानहिंदी / राजस्थानी
9पंजाबपंजाबी
10बिहारहिंदी / मैथिली
11केरलमलयालम
12ओडिशाउड़िया
13असमअसमिया
14झारखंडहिंदी / नागपुरी / कुरुख
15छत्तीसगढ़छत्तीसगढ़ी
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