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Wednesday, November 20, 2019

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WhatsApp fingerprint lock for Android smartphones now rolling out with update Hindi.

Android Phone के लिए WhatsApp Lock अब नये Update के साथ Roll Out हो गया है।
WhatsApp Update के साथ Android Phone पर Security के लिए Finger Print Lock विकल्प को Roll-out कर रहा है। Feature iPhones पर TouchID और FaceID Lock के समान काम करता है।

Finger Print Lock Option On WhatsApp


Highlights
  1. Android Smart Phone पर WhatsApp Users अब App Lock करने के लिए Finger Print Lock का उपयोग कर सकते हैं।
  2. Whats-App के अंदर से अलग-अलग Lock Setting दे रहा है।
  3. FingerPrint Lock Feature नवीनतम Update के साथ उपलब्ध है।





WhatsApp Update Hindi

हम लंबे समय से और Beta Test के महीनों के बाद से इसके लिए WhatsApp New Version पूछ रहे हैं, यह अंत में यहां है। Android पर WhatsApp अब उपयोगकर्ताओं को App के लिए एक Fingerprint Unlock Authentication सेट करने की अनुमति देता है। इसका मतलब है कि अब आप अपने WhatsApp Chat को Biometric Security की एक अतिरिक्त Afresh के साथ Secure कर सकते हैं। और इसका मतलब यह भी है कि आप उन सभी Third Party App Lock को अलविदा कह सकते हैं या इस Feature की खातिर iPhone पर Switch करने की सोच सकते हैं।

अपने Current Blog Post में, WhatsApp ने घोषणा की है कि सभी Android User के लिए FingerPrint Lock प्रमाणीकरण। यह New Feature मूल रूप से Users को हर बार जब कोई व्यक्ति Phone पर App खोलता है, तो अपने FingerPrinting Data के साथ अपने WhatsApp को सुरक्षित करने की अनुमति देगा। Feature को पहले iPhones में रोल आउट किया गया था जहां WhatsApp ने अपने Users को Touch ID या Face ID Authentication के साथ App को Lock करने की अनुमति दी थी। Android Devise के लिए, WhatsApp ने अभी के लिए केवल FingerPrint प्रमाणीकरण का समर्थन किया है।

How To Enable FingerPrint Lock on WhatsApp

यदि आप अपने WhatsApp Chat के लिए Security की एक Advance Option चालू करना चाहते हैं, तो आपको Google Play Store से App को Update करना होगा। एक बार Update हो जाने के बाद, Users को Setting पर जाना होगा और Feature को Access करने के लिए Account Section के तहत Privacy Setting में जाना होगा। आपको Fingerprint Lock On करने का Option दिखाई देगा। उसे On कर देना है।

WhatsApp New Fingerprint Unlock Feature के संबंध में अधिक विकल्प दे रहा है। जैसे ही कोई App Close करता है या कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित कर सकता है, उपयोगकर्ता WhatsApp को FingerPrint Authentication के लिए पूछना चुन सकते हैं। इसके अतिरिक्त, App सुरक्षा बढ़ाने के लिए सूचनाओं में संदेशों की सामग्री को छिपाने का विकल्प भी दिया गया है।

क्या होगा जब इसे चालु करेंगे ?

एक बार यह सुरक्षित (Save) हो जाने के बाद, जैसे ही कोई व्यक्ति इसे Open करेगा, WhatsApp Fingerprint डेटा मांगेगा। एक बार सत्यापन हो जाने के बाद, ऐप खुल जाएगा और उपयोगकर्ता सभी चैट और संदेशों का उपयोग कर सकता है। फीचर में आधुनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ पारंपरिक Capasitive FingerPrint Sensor वाले फोन पर काम करना चाहिए। अफसोस की बात है, अगर आपके फोन में फेस अनलॉक सिस्टम हैं, तो आप व्हाट्सएप को सुरक्षित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

i Phone पर, WhatsApp उपयोगकर्ताओं को व्हाट्सएप Chat को सुरक्षित करने के लिए Touch ID के साथ-साथ Face ID पर भरोसा करने की अनुमति देता है। Face ID आधुनिक आईफोन मॉडल पर एकमात्र बायोमेट्रिक विकल्प है और इसलिए, IOS पर अभी के लिए समर्थन मौजूद है।


Conclusion 
यह Whatsapp का बहुत ही अच्छा Feature है जिसका उपयोग आप अपने डाटा के सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। यह आपके एंड्राइड मोबाइल के लिए लॉन्च किया गया उपडेट है यह अपडेट 28 October 2019 को किया गया।

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Saturday, October 12, 2019

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Hello and welcome friends आज मैं यहां पर बात करने वाला हूं, new technology के बारे में। इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा फ्यूचर में या वर्तमान में भी चलाया करो जिसके बारे में।सबसे पहले आपको बता दें कि टेक्नोलॉजी क्या है?
wireless charger jetpack aero fax two language earbuds
Future of Technology

Technology kya hai

Technology ओ हिंदी में प्रौद्योगिकी के नाम से भी जाना जाता है और इसका बहुत बड़ा हाथ है हमारे दैनिक जीवन में क्योंकि आज बिना प्रौद्योगिकी के आगे बढ़ना संभव नहीं है।
इस प्रकार"प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जो लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए मशीन और उन प्रकार के नए-नए खोज करने हेतु मनुष्य द्वारा औद्योगिक रूप से विकास किया गया है।"
इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला होलोग्राफिक फोन, jetpack, high power wireless charger, aero fax, two language earbuds इन सभी के बारे में।




1. Jetpack


भविष्य में जेट पैक का अविष्कार हो सकता है आपने आयरन मैन मूवी देखी होगी और उसमें जो सूट का इस्तेमाल आयरन मैन करता है वह बिल्कुल जेडपैक के ही समान ही होता है उसमें पैर में हाथ में बूस्टर लगे होते हैं और पीठ के पीछे भी बूस्टर लगे होते हैं। तो जेट पैक के यूज से आदमी अपने आप को हवा में ऊपर उठा सकता है और यहां वहां ट्रेवल कर सकता है।
लेकिन अभी समय से आया है कि इसके लिए हाईकोर्ट अर्जी की आवश्यकता को कहां से पूरा किया जाए तो इसी पर अभी खोज चल रहा है भविष्य में यह हो सकता है।

 2.HI Power wireless charger


Hi power कहने से ही पता चलता है कि हाई पावर चार्जर किस हद तक फोन को चार्ज करेगा अभी के समय में ऐसे चार्जर आ चुके हैं जो कि आपके मोबाइल को तुरंत ही चार्ज कर देते हैं लेकिन वे अभी वायरलेस नहीं है अब वह जो आने वाला समय है वह वायरलेस का होगा और यहां बहुत ही आपके लिए फायदेमंद होगा जिससे कि आप फोन का यूज कहीं भी बैठकर कर सकते हैं और वहां चार्ज होता रहेगा।
जैसे एक कमरे का उदाहरण ले अगर आप कमरे में किसी एक कोने पर बैठे हैं और आपका चार्जर किसी दूसरे कोने पर ऑन हैं तो आपका मोबाइल फोन अपने आप चार्ज होता रहेगा उसे किसी बात से कनेक्ट करने या केबल से कनेक्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी इस वायरलेस चार्जर के आ जाने से।

 3. Airo fax


Airo fax भविष्य में यूज किया जाने वाला एक ऐसा यान होगा जिसको कोई व्यक्ति एक मोटरसाइकिल की भांति ऑपरेट कर सकता है और यह travel को और भी आसान बना देगा। जिसे लोगों के बीच की दूरियां और भी कम हो जाएंगी और लोग जिससे तुरंत ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाएंगे।

 4.Two language earbuds


देखिए दोस्तों अब का जमाना बहुत ही फास्ट है और अभी के समय में किसी के पास किसी भी लैंग्वेज को सीखने के लिए उतना ज्यादा समय नहीं है कि वह उस लैंग्वेज को अच्छे से समझ पाए और सीख पाए तो इसी को आसान बनाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों द्वारा ऐसी खोजे की जा रही है जिससे कि लोगों को किसी दूसरे भाषा को समझने के लिए किस माध्यम की आवश्यकता हो ना कि उसे सीखने की इसी आधार पर भविष्य में two language earbuds का आविष्कार हो सकता है।
यहां पर मैंने आपको कहा है two language earbuds इसका मतलब यह है कि यहां दो भाषाओं के बीच के आपके समझने के लिए बनाया गया ऐसा एयरफोन होगा जो सामने वाले के भाषा को आपके भाषा में ट्रांसलेट करके बताएगा।




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Thursday, November 8, 2018

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History of Telephone

फीड सिग्नल पर जीत की खबर संचारित करने के लिए Pheidippides मैराथन से एथेन्स तक चले गए थे, फिर वास्तव में खराब था; संदेश देने के बाद वह मौके पर मारे गए, Plutarch ने 490BC में कहा ।
Word first phone,graham bell telephone maker
www.rexgin.in

 1876 पहला सफल टेलीफोन ट्रांसमिशन Graham Bell कहता है "श्रीमान वाटसन, यहां आओ, मैं आपको देखना चाहता हूं" और वॉटसन प्रत्येक शब्द को स्पष्ट रूप से समझता है, एक शताब्दी बाद, लोग "फिर से क्या कहेंगे।"

मार्कोनी ने अभ्यास में टेस्ला वायरलेस संचार खोजी रखी, वाणिज्यिक रेडियो विकसित किया, 1895 में।

reginald औब्रे fessenden पहले वायरलेस रेडियो टेलीफोन प्रदर्शित करता है 1906 में।

 1939

 विश्व युद्ध शुरू हो जाएगा, जर्मन बड़े पैमाने पर रेडियो फोन का उपयोग शुरू करते हैं।

Bell प्रयोगशालाएं मोबाइल फोन के लिए Hexagonal cell का प्रस्ताव करती हैं, जिसमें तीन तरफा एंटीना हम जानते हैं। यह चूसा, क्योंकि यह सभी सैद्धांतिक था।

1954

लिनस लाराबी (हम्फ्री बोगर्ट) अपनी कार से एक असली मोबाइल फोन का उपयोग बिली आश्चर्यजनक Sabrina में करता है (ऑड्री हेप यूआरएम द्वारा खेला जाता है।)
पहला पूर्ण स्वचालित मोबाइल फोन (mobiltelefonisystem A या MTA) Ericsson द्वारा स्वीडन में सिस्टम। चित्रित प्रत्येक हैंडसेट 90 पाउंड (40 किलो) 1956 था।

3 अप्रैल, 1973: Motorola  Dr. Martin cooper ने पहली Motorola DynaTAC prototype का उपयोग करते हुए New York City में चलते समय AT&T's Bell Labs, में अनुसंधान के प्रमुख Joel Engel को फोन किया।

1 जी नेटवर्क 1937 की शुरुआत

 नोकिया ने अपना पहला सेल फोन पेश किया, एनालॉग Mobira Senator FCC ने एनालॉग-आधारित उन्नत Mbile फोन सर्विस (AMPS) को मंजूरी दे दी और 834-894 MHz band में आवृत्तियों को आवंटित किया। 1982


13 अक्टूबर, 1983
पहले से ही व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सेल फोन, मोटोरोला डायना TAC के साथ बनाया गया पहला कॉल।

दुनिया में पहला वाणिज्यिक GSM कॉल। नोकिया हार्डवेयर का उपयोग कर किया। 2G और Digital 1991 से शुरू होता है ।

मोटोरोला Star TAC 1996

3 जी प्रकट ( Appear) होता है. 2000

FCC ने एनालॉग नेटवर्क को बंद करने का फैसला किया।

GPRS और EDGE तेजी से (लेकिन बहुत तेज़ नहीं) डेटा ट्रांसफर, लॉन्च के लिए प्रौद्योगिकियां शुरू किया। यह 2.5 जी है। अभी तक उपलब्ध नहीं मतलब सन 2000 के पहले।

2007 में i phone लॉन्च किया, अभी भी 2.5 जी तकनीक पर चलता है, लेकिन डेटा ट्रांसफर के लिए वाई-फाई जोड़ता है। 3 जी सेल फोन सर्वव्यापी बनने लगते हैं।

फरवरी  19, 2008 सेल फोन एनालॉग नेटवर्क शट डाउन हो गया।  2008
【अन्य जानकारियाँ】



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Friday, November 2, 2018

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साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं आपके लिए compyuter software के सभी version के बारे में बताने वाला हूँ इससे पहले मैंने आपको computer के सामान्य परिचय से सम्बंधित एक पोस्ट लिखा था जिसमें मैंने आपको कम्प्यूटर से सम्बंधित कुछ प्रश्न का उत्तर दिया था। आज मैं आपको कम्प्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी वर्जन के बारे में संक्षिप्त में बताने वाला हूँ इसमें मैंने कम्प्यूटर के सभी वर्जन के रिलीज डेट और उसकी खासियत के बारे में बताया है। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगे तो कमेंट जरूर करीयेगा ।

COMPUTER SOFTWARE INTRODUCTION

आपको ये तो पता ही होगा की कम्प्यूटर के सभी operating system में ज्यादा उपयोग microsoft operating system का use किया जाता है तो मैं आपको इसी के बारे में बताने वाला हूँ -
Microsoft operating system

Microsoft operating system's


microsoft का पहला version window 1.0 


लॉन्च -
 सन 1985,

खास बात -
 Basic interface, Gadgets, Calender व Calculator, ms paint first version लॉन्च किया गया था ।

Windows 1.2 


लॉन्च -

सन 1987,

खास -
MS-Word, MS-Exel, इसके साथ ही Minimize and Maximize का बटन जोड़ा गया इसके अलावा विभिन्न System setting व Configuration Options के लिए Control panel बनाया गया था ।

Windows 2.10 


लॉन्च-
सन 1987 ,

खास बात -
यह एक वर्चुअल मशीन के रूप में था ।

Window 3.0


लॉन्च -
सन 1990,

खास बात-
इस वर्जन में सबसे पहले हार्ड डिस्क का उपयोग किया गया था । Virtuale Memory, Improve Graphics व Multitasking जैसे सुविधा प्रदान किया गया था । और यह 256 colors Support करता था ।इसके साथ ही Solitaire game भी लॉन्च किया गया था।

Window 3.0

*कम्प्यूटर से सम्बंधित 15 प्रश्न उत्तर 

लॉन्च -
सन 1992,


खास बात-
इस वर्जन में मल्टीमीडिया क्षमता , नेटवर्क क्षमता व माइक्रोसॉफ्ट मेल भी लॉन्च किया गया था।

Windows 3.11


लॉन्च -
सन 1993,

खास बात-
32 बिट फाइल सिस्टम , 32 बिट नेटवर्किंग प्रदान किया गया ।

Window 95


लॉन्च -
सन 1995,

खास बात-
इसमें सर्वप्रथम start menu व start button का प्रयोग किया गया था । इसके साथ ही plug & play , taskbar , internet explorer की सुविधा प्रदान की गयी थी। यह 32 bit Enviroment पर कार्य कर सकता था ।

Window 98 

लॉन्च-
सन 1998,

खास बात-
Improve Hardware व Hardware Drivers, Internet Explorer, Internet setting, Outlook Express Address Book, Media players, file Extension की सुविधा, IE4.0, Front-page express, Web server आदि सुविधाये इस वर्जन में दि गयी थी।

Window 2000,ME


लॉन्च-
सन 2000,

खास बात-
इंटरनेट की विशेष सुविधा , नेटवर्क बनाने व नियंत्रण की क्षमता , Auto correct , IP Security auto update , System Recovery जैसे सुविधाएं आपको इस वर्जन में दिया गया था ।

Window XP


लॉन्च-
2001,

खास बात-
Advance GUI , Plug & play, security, Reliability, Compatibility divise manager आदि सुविधा दिया गया।

Window vista 


लॉन्च-
2006,

खास बात-
इसके बाद विंडो का नया वर्जन आया window areo के नाम से , न्यू start menu & Icons, Windows Mail , Advance Security , attracive look & feel , Direct X Technology, Media Player 11, Internet Explorer 7, Windows Defender ( Anti Spyware ), Improve Searching , Speech Recognition ये सारी सुविधाये इस वर्जन में दिया गया।

Window 7


लॉन्च -
सन 22 october 2009,

 खास बात-
 Themes, Gadgets, DirectX, Windows Media Center, Biometrics, Windows search , full 64-bit support

Window 8


लॉन्च-
2012,

खास बात-
टच स्क्रीन की सुविधा, IE 11, new look & Screens, Bundled apps Windows store, fast boot & shut Down.

Window 10


लॉन्च-
2015,

खास बात-
Start menu, universal app, New look table mode आदि।

आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ शेयर करें।
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Friday, October 26, 2018

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दोस्तों आज में आपके सामने वो जानकारी रखने जा रहा हूँ जो की भविष्य में आपके हाई स्पीड ट्रेन के सपने को साकार कर सकता है। आज मैं आपके सामने एक ऐसे ट्रेन का जिक्र करने जा रहा हूँ जो की भविष्य में हाइस्पीड ट्रेनों का अगला चरण होगा।

Hyperloop train

विश्व के विकसित राष्ट्र हाइपरलूप ट्रेन को अपनाने की पहल कर रहें हैं। अमेरिका व सऊदी अरब ने इसमें विशेष रूचि दिखाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भविष्य में परिवहन की रूपरेखा बदलने की ओर अग्रसर है।
        ट्रेन द्वारा तीव्र गति से अधिक दूरी तय करने के लिए विश्व के कई देशों द्वारा समय-समय पर नई-नई तकनीक का प्रयोग हो रहा है। कभी मैग्लेव तो कभी बुलेट ट्रेन। इसी सन्दर्भ में अगला चरण या तकनीक हाइपरलूप ट्रेन है। अनुमान है की हाइपरलूप ट्रेन जमीन पर ही 1200 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से सकेगी।
हाइपरलूप ट्रेन चर्चा में क्यों है ?
अमेरिका के नार्थ लॉस वेगास में मई, 2017 में हाइपरलूप-वन ट्रेन का सफल परीक्षण सम्पन्न हुआ। इस परीक्षण में हाइपरलूप-वन ट्रेन 300 मील प्रति घण्टे की रफ़्तार से चली थी। इसके लिए परीक्षण स्थल '' नॉर्थ लॉस वेगास '' के नेवाडा में बनाया गया था। चुम्बकीय तकनीक से लैस पॉड़ ( ट्रैक ) पर हाइपरलूप का दो मील के ट्रैक पर परीक्षण कराया गया था। इस ट्रेन को बनाने में जुटे शोधकर्ताओं ने दावा किया है। कि आने वाले वर्षों में वैक्यूम ( बिना हवा ) ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली कैप्सूल जैसी हाइपरलूप 750 मील ( 1224 किमी ) प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकेगी ,जो एक ध्वनी की चाल माना जाता है। इससे जुड़े विशेषज्ञों का वर्ष 2018 तक पहली हाइपरलूप ट्रेन पटरियों पर दौड़ाने की तैयारी है और वर्ष 2020 तक दुनिया में परिवहन की रूपरेखा बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है हाइपरलूप-वन ?
हाइपरलूप-वन विमानों की गति से चलने वाली एक ट्रेन है, जिसका विकास अमेरिकी कम्पनी हाइपरलूप-वन द्वारा किया जा रहा है। यह हाई स्पीड ट्रेनों ( मैगलेव, हारमोनी बुलेट आदि ) का अगला चरण या विकल्प है। इसकी रफ्तार ध्वनी की चाल यानी लगभग 1236 किमी/घण्टे होगी।
हाइपरलूप वन में प्रयुक्त तकनीक
हाइपरलूप चुम्बकीय शक्ति पर आधारित एक तकनीक है, जिसके तहत खम्भों के ऊपर ( एलीवेटेड ) पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाती है। इस ट्यूब के भीतर हाइपरलूप को उच्च दाब और ताप सहने की क्षमता वाले मिश्र धातु इंकानेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाता है। इस स्की में बेहद सूक्ष्म छिद्रों के जरिये दबाव डालकर हवा भरी जाती है, जिससे की यह एक एयर ( हवा ) कुशन की तरह काम करने लगता है। स्की में लगे चुम्बक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से हाइपरलूप के पॉड ( ट्रैक ) को गति दि जाती है। ट्यूब के भीतर बुलेट जैसी शक्ल की लम्बी सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है।
     चुकी इसमें घर्षण बिल्कुल नहीं होता, इसलिए इसकी रफ़्तार 1100 से 1200 किमी/घण्टे या इससे भी अधिक हो सकती है। इसमें बिजली का खर्च बहुत कम होगा और प्रदूषण भी बिल्कुल नहीं होता है।
हाइपरलूप की संकल्पना
हाइपरलूप का सम्बन्ध अंतरिक्ष तकनीक से भी जोड़ा जा सकता है। वास्तव में लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराने की तैयारी कर रही प्रसिद्ध ' स्पेस एक्स ' कम्पनी के जनक और टेस्ला मोटर्स के सह-संस्थापक और सीईओ ' एलन मस्क ' ने सर्वप्रथम हाइपरलूप तकनीक ' से ट्रेन चलाने के बारे में सोंचा था। मास्क ने वर्ष 2013 में हाइपरलूप का प्रस्ताव दुनिया के सामने रखते हुए एलान किया था कि दिनिया में कोई भी संगठन चाहे तो संशाधन जुटाकर हाइपरलूप प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है। इसी कारण एलन मस्क के साथ ही संकल्पना की दो अन्य कम्पनियां ' हाइपरलूप-वन और हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज ' साकार करने में जुटी हुई है।
कैसे साकार होगी परियोजना
लाइव साइंस के मुताबिक, स्पेस एक्स कम्पनी ने सेंट्रल कैलिफोर्निया इलाके में 8 किमी लम्बे परीक्षण ट्रैक का निर्माण करने के लिए जमीन अधिग्रहित कर ली है। यह संकल्पना अभी शुरुआती दौर में है और स्पेस एक्स इसके लिए इंजीनियरों की टीम गठित कर रही है। इसकी ओर से कहा गया है कि अगले कुछ महीनों में इसके डिजाइन के बारे में टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में विस्तार से चर्चा की जाएगी, साथ ही दुनिया भर की सम्बंधित विशेषज्ञता वाली टीमों की ओर से इसके लिए डिजाइन मंगाए जा रहे हैं। विश्व के विकसित देश इस प्रणाली को अपनाने के लिए आगे आ रहे है। अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब जैसे देशों ने विशेष रूप से रूचि दिखाई है। इन देशों में ' हाइपरलूप-वन ' नामक इस परिकल्पना को वास्तविक बनाने का कार्य चल रहा है।
हाइपरलूप के कार्य सिद्धांत
हाइपरलूप परिवहन मुख्यतः चुम्बकीय शक्ति पर आधारित एक तकनीक है। इस तकनीक में एक तरह के कैप्सूल या पॉन्ड्स का प्रयोग किया जाएगा, जो विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए होंगे। इन कैप्सूल और पॉन्ड्स को एक पारदर्शी ट्यूब पाइप के भीतर उच्च वेग से संचालित किया जाएगा। इस तकनीक में पॉड़स या ट्रैक को जमीन से ऊपर बड़े-बड़े पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुम्बक पर चलाया जाएगा। इस चुम्बकीय प्रभाव से ये पॉड़स ट्रैक से कुछ ऊपर उठ जाएंगे,जिससे घर्षण कम होगा और गति भी तेज हो जाएगी।
हाइपरलूप ट्रेन के परिचालन सम्बन्धी चुनोतियाँ
हाइपरलूप ट्रेन हाईस्पीड परिवहन के क्षेत्र में एक संकल्पना है, जिसे मूर्त रूप देने के लिए कई देश कार्य कर रहे हैं। चूंकि हाइपरलूप-वन विश्व में अब तक की सबसे हाईस्पीड ट्रेन होगी, इसलिए इसके परिचालन में तकनीक, लागत ,सुरक्षा,मानव श्रम, भूमि-अधिग्रहण आदि कई अहम चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है,जिसका विवरण निम्नवत है-
हाइपरलूप के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती या मामला सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सुपरकण्डक्टिंग मैगलेव ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञ और अमेरिकी भौतिक विज्ञानी जेम्स पॉवेल ने इसकी सुरक्षा के सम्बन्ध में हाल हि में चिंता जताई है। पॉवेल ने लाइव साइंस को दिए एक साक्षात्कार में कहा की जिस स्पीड से हाइपरलूप पॉड़स को चलाने की बात हो रही है,ऐसे में उसे मोड़ा या ढलान पर नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। इतना ही नहीं, किसी प्रकार के झटके या उछाल की स्थिति से बचाव के लिए इसके ट्रैक को सीधा और समतल बनाना होगा।
* गुरुत्वाकर्षण बल से भी इसकी स्पीड को समायोजित करना होगा एलीवेशन्स में त्वरित बदलाव की स्थिति में यात्री खुद को पूरी तरह से समायोजित हो पाएंगे या नहीं, ये भी अनिश्चित होता है।
* इस ट्रेन में प्रयुक्त ट्यूब में कम दबाव ( लो प्रेशर ) वैक्यूम को निश्चित तौर पर बरकरार रखना कठिन होगा, अन्यथा पॉड सभी यात्री आपस में टकरा सकते हैं।
* यह प्रोजेक्ट इतना संवेदनशील है की किसी भी जगह किसी भी परिस्थिति में हल्की सि भी क्षति होती है या आतंकियों की ओर से कहीं हल्का सा भी नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसका परिणाम बेहद भयानक हो सकता है।
* हाइपरलूप पूरी तरह से तकनीक पर आधारित प्रोजेक्ट है, जिस पर वृहद पैमाने पर धनराशि व्यय  होगी।
* इस परियोजना को साकार रूप देने में भूमि-अधिग्रहण भी एक प्रमुख चुनौती है। चुकी इस ट्रेन की रफ्तार हवाई जहाज के बराबर है, फिर भी इसका परिचालन जमीन पर ही किया जाएगा। अतः इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण करने की आवश्यकता होगी। इस अधिग्रहण में सरकार और भूमि से सम्बंधित व्यक्ति की मंजूरी भी आवश्यक होगी।
* हाइपरलूप-वन में दुर्घटना के दौरान पूरी तरह बन्द ट्यूब के भीतर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। इसलिए कम्पनियों को विमान की तरह ही पॉड के भीतर ऑक्सीजन मास्क की भरपूर व्यवस्था करनी होगी।
* इस ट्रेन में सफर करने वाला प्रशिक्षित व्यक्ति ही गति ओर हवा का इतना दबाव झेल सकता है।
हाइपरलूप ट्रेन के फायदे या अनुप्रयोग 
हाइपरलूप ट्रेन की संकल्पना मुख्यतः परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाने वाला विचार है। इसे हाइपरलूप नाम इसलिए दिया गया, क्योकि इसमें परिवहन एक लूप के माध्यम से होगा , जिससे इसकी गति अत्यधिक सम्भव हो सकेगी। इस ट्रेन की गति लगभग 1200 किमी/घण्टे होगी, जिससे बड़ी-बड़ी दूरियों को काफी कम समय में तय किया जा सकेगा यह ट्रेन अन्तर्देशीय परिवहन के साथ-साथ अंतरमहाद्वीपीय, परिवहन में सहायक हो सकेगा। इस तकनीक में कम दबाव के स्टील ट्यूब के जरिए पॉडस में सामान और यात्रियों को एक जगह-से दूसरी जगह ले जाना सम्भव हो सकेगा।
वर्तमान समय में प्रचलित हाईस्पीड ट्रेन
वर्तमान समय में विश्व पटल पर कई ऐसी हाईस्पीड ट्रेन प्रचलन में हैं जिसके कारण बड़ी-बड़ी दूरियां   काफी कम समय में तय करने में सहायता मिली है। इन ट्रेनों में प्रमुख हाईस्पीड ट्रेन मैग्लेव, हारमोनी, रेंफी, हायाबूसा,युरोस्टार, बुलेट, सिनकांसेन आदि है।
भारत में हाइपरलूप ट्रेन सम्बन्धी प्रयास और भविष्य
वर्तमान समय में भारत में भले ही भूतल परिवहन की रफ़्तार 100 किमी/घण्टा से ज्यादा नहीं बढ़ पाई है, फिर भी विगत कुछ वर्षों में भारत सरकार ने अपनी रेल के नवीनीकरण और गति में दिलचस्पी दिखाई है और इसी उद्देश्य से सरकार ने कई देशों से इस दिशा में समझौते किए। भारत की सबसे नवीनतम और सेमी हाईस्पीड ट्रेन ' गतिमान एक्सप्रेस है ' जो दिल्ली से आगरा के बीच 160 किमी/घण्टे की स्पीड से चलती है। इस दिशा में और पहल करते हुए भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से समझौता किया।
हाइपरलूप तकनीक से पहले भारत हाईस्पीड ट्रेन के क्षेत्र में बुलेट ट्रेन एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके जल्द परिचालन के लिए भारत सरकार प्रयासरत है। फ़रवरी,2017 में हाइपरलूप-वन कम्पनी ने सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमे लगभग 90 देशों ने भाग लिया।
इन देशों में भारत भी सामिल था। भारत में पांच कम्पनियों ने भारत में हाइपरलूप पर कार्य करने के लिए दिलचस्पी दिखाई। कम्पनियों ने सम्मेलन में दिल्ली-मुम्बई रुट समेत कुल पांच रूटों पर इस ट्रेन को चलाने का प्रस्ताव दिया था। इन रूटों में बेंगलूरु से चेन्नई,बेंगलुरु से तिरुवनन्तपुरम और मुम्बई से चेन्नई शामिल है।
हाइपरलूप कम्पनी को भारत में एक बड़ा बाजार दिख रहा है और खास बात यह है कि यहां की सरकार आधुनिक तकनीक पर ज्यादा जोर दे रही है। 'भारतीय रेलवे ने पिछले वर्ष देश में मैग्लेव ट्रेन जैसी तकनीक लाने के' लिए ग्लोबल टेंडर निकाला था, जिसमें अनेक कम्पनियों ने भाग लिया था , लेकिन इस ग्लोबल टेण्डर में ' मेक इन इंडिया' के लिए हाइपरलूप के अलावा कोई दूसरी बड़ी कम्पनी तैयार नहीं थी।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में हाइपरलूप से सम्बंधित कुछ चुनौतियां
* भारत में हाइपरलूप प्रोजेक्ट के लिए वित्त की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है, क्योकि इसकी लागत अरबों डॉलर में होगी तथा भारतीय परिवहन व्यवस्था में इसे बिना सब्सिडी दिए चला पाना भी सम्भव नही होगा।
* अभी तक इस तकनीक की टेस्टिंग पूरी तरह से सम्पन्न नहीं हो पाई है। अतः इसमें सुरक्षित परिवहन पर अब भी सन्देह है।
* भारत मे यात्रियों की संख्या सर्वाधिक है और हाइपरलूप कुछ ही लोगों को परिवहन की सुविधा दे पाएगा।
* इस प्रोजेक्ट को पूर्ण करने में भूमि अधिग्रहण भी एक प्रमुख समस्या है।
नीति आयोग द्वारा छह अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों को मंजूरी 
नीति आयोग ने भारत में परिवहन व्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए छह अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों को मंजूरी प्रदान की। आयोग से मंजूरी मिलने के बाद परिवहन विभाग ने इस हाइपरलूप, मैट्रीनो और पॉड़ टैक्सी तकनीक से जुड़े सुरक्षा के मानकों के अध्ययन के लिए रेलवे एक पूर्व शीर्ष अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
         दोस्तों इतना पढ़ने के बाद हमें तो यह पता चल ही गया होगा की इस ट्रेन की क्या खास बात है। लेकिन मैं फिर भी आपके सामने इसकी कुछ विशेषताओ को रखने जा रहा हूँ जो की इस प्रकार है-----
हाइपरलूप ट्रेन की विशेषता
** यह ट्रेन ध्वनि की चाल के बराबर चलेगी।
** हाईस्पीड ट्रेन होने के बावजूद यह जमीन पर चलने में सक्षम होगी।
** यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और सौर ऊर्जा से भी संचालित हो सकती है।
** अधिक दुरी को कम समय में तय करने में सक्षम है।
** यह अब तक की सबसे हाईस्पीड ट्रेन होगी।
** मेट्रो ट्रेन की तर्ज पर इस ट्रेन में बड़े-बड़े पिलर ( खम्भे ) पर एक विशेष प्रकार के ट्यूब लगे होते हैं।
           धन्यवाद
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Tuesday, October 23, 2018

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                    परिचय: -

सूक्ष्मदर्शी का मतलब सूक्ष्म वस्तु को देखने के लिए प्रयुक्त उपकरण से है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण का नाम है, जिसका प्रयोग ऐसे सूक्ष्म वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है जिनको सामान्य सूक्ष्मदर्शी से देखना असम्भव होता है तो आओ जाने की ये इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का इतिहास से वर्तमान का सफर -
20 वीं शताब्दी में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का विकास जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप के माद्यम से किसी वस्तु का लाखो गुना आवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है। इसके लिए इलेक्ट्रॉन बिम का उपयोग किया जाता है। इस माइक्रोस्कोप का अविष्कार नॉल एवं रस्का (1931) नामक दो जर्मन वैज्ञानिक द्वारा किया गया। इसका व्यसाय के क्षेत्र में सर्वप्रथम उपयोग सन 1940 में किया गया। 

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत -

इलेक्ट्रॉन बीम में बहुत छोटी तारंगदैधर्य वाले विधुत चुम्बकीय तरंग के गुण होते हैं। इसका तरंगदैधर्य विधुत क्षेत्र उत्पन्न करने वाले वोल्टेज के वर्गमूल का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उदाहरण के रूप में 80 KV विधुत द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉन बीम का तरंगदैधर्य 0.05 A होता है। इलेक्ट्रोन बीम का उत्पादन इलेक्ट्रॉन गन द्वारा होता है। बीम्स को माइक्रोस्कोप के अन्य अंगों की सहायता से संकेंद्रित किया जाता है एवं इसके बाद इन्हें विधुत चुम्बकीय स्तरों के द्वारा फोकस किया जाता है।
                

                  प्रकार -

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप को दो प्रकारों में बांटा गया है -
1. ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( TEM )
2. स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( SEM )

       TEM -

इस माइक्रोस्कोप में इलेक्ट्रॉन का मार्ग , प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश की किरणों के अनुरूप होता है। इलेक्ट्रोन गन से प्रेक्षित इलेक्ट्रॉन बीम विधुत चुम्बकीय लेंसों की श्रेणी से होकर निकलती है।

        SEM -

इस सूक्ष्मदर्शी का विकास बाद में हुआ जिसकी कार्य करने का सिद्धांत TEM से अलग है। इसमें नमूने की सतह को इलेक्ट्रॉन की पतली बीम से विकिरणीकृत किया जाता है। जिससे इलेक्ट्रॉन संकेत उत्पन्न होते हैं। इन विकिरणों के कारण नमूने से कम ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन निकलते हैं,जिन्हें धनावेशित प्लेट या एनोड पर एकत्रित किया जाता है। विधुत संकेतों का उपयोग नमूने के प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

                   क्रिया-विधी

TEM में वस्तु का आवर्धित चित्र देखने के लिए उच्च निर्वात उत्पन्न करना आवश्यक होता है, क्योकि इलेक्ट्रॉन निर्वात में ही गमन करते हैं। इसके लिए लीये गए पदार्थ को पूर्णरूपेण निर्जलीकृता करना आवश्यक होता है। कण्डेन्सर लेंस इलेक्ट्रोन बीम को नमूने पर समानान्तरित करता है और आवर्धन लेंसों द्वारा आवर्धित चित्र प्राप्त होता है। यह प्रतिबिम्ब एक ' फॉस्फोरेसेन्ट स्क्रीन ' के सम्पर्क मे आने पर दृश्य हो जाती है। एक मिलियन KV के त्वरण वोल्टेज वाला अभी-अभी विकसित किया। TEM का इलेक्ट्रॉन बीम 1 माइक्रोमीटर मोटे नमूने का भी प्रतिबिम्ब आसानी से बना सकता है। SEM में विधुत संकेतों का उपयोग नमूने का प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने में किया जाता है। स्कैनिंग जेनरेटर के उपयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन बीम को नमूने में से चित्र रेखा की तरह गमन कराया जाता है। एनोड पर द्वितीयक इलेक्ट्रॉन के टकराने से उत्पन्न संकेतों को टेलीविजन तंत्र की तरह स्कैंन कर कैथोड पर प्रतिबिम्ब उत्पन्न किया जाता है। SEM की फोकस मापने की गहराई कई मिलीमीटर होती है। इसके द्वारा त्रिविमीय चित्र प्राप्त किया जाता है।

             उपयोगिता

1. इसकी अधिक आवर्धन क्षमता के कारण इसका प्रयोग अत्यंत छोटे कोशिकांग के अध्ययन में किया जाता है।
2. सूक्ष्म जीवो , विषाणु ,स्पोर्स आदि के अध्ययन में यह सहायक होता है।
3. इसके सहायता से नमूने की सतह का टोपोग्राफी का अध्ययन भी किया जाता है।
4. कोशिआंगो के अलावा बड़े कोशिकांगो में पाये जाने वाले वृहद जैविक अणुओं की संरचना का अध्ययन भी इसके द्वारा किया जाता है।
    

             सीमाएं

वस्तु के अत्यंत आवर्धित चित्र बनाने की क्षमता के बावजूद इसकी अपनी कुछ कमियां हैं। चूंकि वस्तु का अध्ययन करने के लिए पूर्ण निर्वात की आवश्यकता होती है अतः जीवित वस्तु का अध्ययन करने में कठिनाई होता है।  
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                      सूक्ष्मदर्शी क्या है ?

सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण है जिसका प्रयोग हम सूक्ष्म वस्तुवों को देखने के लिए करते हैं।

                      प्रकार

सूक्ष्मदर्शी को उनके गुणों के आधार पर निम्न प्रकार से बांटा गया है -
1. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी
2. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी।
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा उपकरण है जिसकी संरचना कुछ इस प्रकार होती है की इसे आसानी से पकड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से प्रकाश एवं लेंस का प्रयोग किया जाता फिर भी सूक्ष्मदर्शी निम्न भागों से मिलकर बना होता है -
1. बॉडी ट्यूब
2. नेत्रक
3. नोज पीस
4. अभीदृशयक लेंस
5. मंच ( STAGE )
6. कणड़ेन्सर
7. आइरिस डायफ्राम
8. दर्पण
9. कोर्स एडजस्टमेंट
10. फाइनल एडजस्टमेंट
11. आधार (BASE )
12. भुजा।

                सूक्ष्मदर्शी की संरचना एवं कार्य

1. बॉडी ट्यूब- 

बॉडी ट्यूब सूक्ष्मदर्शी का मेन हिस्सा होता है जो की लम्बा होता और इसके ऊपर अंतर नली तथा नेत्रक एवम् निचले भाग में दो या तीन अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं। यह नली बेलकार होता है। एवम् भुजा के द्वारा जुड़ी होती है, तथा इसके नीचे नोज पीस लगी होती है।

2. नेत्रक(eye piece )

यह बॉडी ट्यूब से लगे अंतर नली के ऊपर होता है। इसी की सहायता से बाएं आँख से किसी वस्तु के आवर्धित रूप को देखा जाता है। यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे ऊपर का भाग होता है।

3. नोज पीस -

यह बॉडी ट्यूब के नीचे का भाग है, जिसमें 2-3 अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं जिसको आसानी से घुमाया जा सकता है। यह गोल तथा प्लेटनुमा होता है जिसकी सहायता से इसे घुमाया जाता है।

4. अभीदृश्यक लेंस -

ये नोज पीस के नीचे स्थित होता है जो 10X , 40X एवं 100 X पावर के होते हैं। इस लेंस को वस्तु के ऊपर फोकस किया जाता है।

5. मंच (stage)-

यह सूक्ष्मदर्शी का मध्य भाग है जो की भुजा से जुड़ा होता है जिसमें एक छिद्र होता है इस छिद्र में स्लाइड को फिट किया जाता है। यह दर्पण के ऊपर होता है जो प्लेट के समान चौड़ा होता है।

6. कण्डेन्सर -

कण्डेन्सर मंच के नीचे का भाग है जो प्रकाश को एकत्रित कर स्लाइड पर फोकस करता है। इसके न होने पर वस्तु का साफ दृश्य नही बनता है।

7. आइरिस डायफ्राम

डायफ्राम कण्डेन्सर के नीचे का भाग है जो की उसके नीचे फिट होता है। इसके द्वारा प्रकाश मार्ग को समायोजित किया जाता है।

8. दर्पण ( mirror )

दर्पण प्रकाश को परावर्तित करने के लिये सूक्ष्मदर्शी में लगाया जाता है जो की आधार से थोड़ा ऊपर होता है और प्रकाश को सीधे स्लाइड की ओर फोकस करता है। इसे रिफ्लेक्टर भी कहा जाता है।

9. कोर्स एडजस्टमेंट -

यह बॉडी ट्यूब को ऊपर नीचे करने के लिए लगाया जाता है , जो भुजा से जुड़ा होता है। इसका प्रयोग लेंस को वस्तु पर समायोजित करने के लिए किया जाता है।

10. फाइनल एडजस्टमेंट -

यदि लेंस को थोड़ा बहुत ऊपर नीचे करना होता है तो इसका प्रयोग किया जाता है। जो की आधार से थोड़ा ऊपर लगा होता है।

11. आधार -

यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे नीचे का भाग होता है जो जमीन के ऊपर होता है सूक्ष्मदर्शी का बेलेंश बनाकर रखता है। यह घोड़े के नाल के आकार का होता है, जो ठोस लोहे का बना होता है।

12. भुजा ( ARM) -

इसके द्वारा सूक्ष्मदर्शी का आधार एवं बॉडी ट्यूब जुड़े होते हैं। यह मुडा हुआ होता है जिकसो पकड़ कर उठाया जा सकता है।
   इस सूक्ष्मदर्शी की सीमाये जिसकी वजह से इसका प्रयोग इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी की भाँति नही किया जा सकता है-
इसके द्वारा अधिकतम 2000-4000 गुना आवर्धन ही सम्भव है। अत्यंत छोटे वस्तु जैसे कोशिकांग का अध्ययन इसकी सहायता से नही किया जा सकता है।
इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी के बारे मे जानने के लिए इसे क्लिक करें।

               उपयोग

इसका प्रयोग विभिन्न लैबों में तथा सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में किया जाता है। इसकी सहायता से ही विभिन्न कार्य सफल हो पाये हैं,और विज्ञान के क्षेत्र में इसका बहुत बड़ा योगदान है। सूक्ष्मदर्शी को एक प्रायोगिक उपकरण के रूप में जीव विज्ञान , रसायन विज्ञान आदि क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है।

Thursday, October 18, 2018

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प्रश्न 1. PH मीटर क्या है ? 
उत्तर = दोस्तों ph मीटर एक प्रकार के उपकरण नाम है।
प्रश्न 2. इसका प्रयोग किस क्षेत्र में किया जाता है ?
उत्तर = इसका प्रयोग विज्ञान के क्षेत्र में किया जाता है।
प्रश्न 3. PH मीटर का प्रयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर = इसका प्रयोग किसी विलयन की अम्लीयता तथा क्षारीयता ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 4. इसकी खोज किसने की और किस सन में की ?
उत्तर = इसकी खोज सोरेन्सन ने की थी। सन 1909 में।
प्रश्न 5. कैसे पता करते हैं की कोई पदार्थ अम्लीय है की क्षारीय ?
उत्तर = जब हम PH मीटर का प्रयोग करते हैं तो उसमे 14 अंक होते हैं। जब PH मान 7 आता है तो वह उदासीन है तथा जब PH मान 7 से अधिक आता है तो उसे क्षारीय और 7 से कम आने पर अम्लीय होते है जैसे जैसे अम्लीयता बढ़ती तथा घटती जाती है PH मान भी बढ़ता घटता रहता है।
pH ( हाइड्रोजन आयन सांद्रण ) पर टिप्पणी इस प्रकार लिखा जा सकता है-
pH किसी विलयन की अम्लीयता क्षारीयता मापने का पैमाना है। इसकी खोज सोरेन्सन नामक वैज्ञानिक ने सन् 1909 में की थी। कोशिकाओं के प्रोतोप्लाजम में H+ एवं OH- आयन्स पाये जाते है। यदि किसी विलयन में H+ आयन अधिक तथा OH- आयन कम हो तो वह विलयन अम्लीय कहलाता है।
thanks so much for supporting me