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Saturday, October 12, 2019

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Hello and welcome friends आज मैं यहां पर बात करने वाला हूं, new technology के बारे में। इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा फ्यूचर में या वर्तमान में भी चलाया करो जिसके बारे में।सबसे पहले आपको बता दें कि टेक्नोलॉजी क्या है?
wireless charger jetpack aero fax two language earbuds

Technology kya hai

Technology ओ हिंदी में प्रौद्योगिकी के नाम से भी जाना जाता है और इसका बहुत बड़ा हाथ है हमारे दैनिक जीवन में क्योंकि आज बिना प्रौद्योगिकी के आगे बढ़ना संभव नहीं है।
इस प्रकार"प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जो लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए मशीन और उन प्रकार के नए-नए खोज करने हेतु मनुष्य द्वारा औद्योगिक रूप से विकास किया गया है।"
इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला होलोग्राफिक फोन, jetpack, high power wireless charger, aero fax, two language earbuds इन सभी के बारे में।




1. Jetpack

भविष्य में जेट पैक का अविष्कार हो सकता है आपने आयरन मैन मूवी देखी होगी और उसमें जो सूट का इस्तेमाल आयरन मैन करता है वह बिल्कुल जेडपैक के ही समान ही होता है उसमें पैर में हाथ में बूस्टर लगे होते हैं और पीठ के पीछे भी बूस्टर लगे होते हैं। तो जेट पैक के यूज से आदमी अपने आप को हवा में ऊपर उठा सकता है और यहां वहां ट्रेवल कर सकता है।
लेकिन अभी समय से आया है कि इसके लिए हाईकोर्ट अर्जी की आवश्यकता को कहां से पूरा किया जाए तो इसी पर अभी खोज चल रहा है भविष्य में यह हो सकता है।

 2.HI Power wireless charger

Hi power कहने से ही पता चलता है कि हाई पावर चार्जर किस हद तक फोन को चार्ज करेगा अभी के समय में ऐसे चार्जर आ चुके हैं जो कि आपके मोबाइल को तुरंत ही चार्ज कर देते हैं लेकिन वे अभी वायरलेस नहीं है अब वह जो आने वाला समय है वह वायरलेस का होगा और यहां बहुत ही आपके लिए फायदेमंद होगा जिससे कि आप फोन का यूज कहीं भी बैठकर कर सकते हैं और वहां चार्ज होता रहेगा।
जैसे एक कमरे का उदाहरण ले अगर आप कमरे में किसी एक कोने पर बैठे हैं और आपका चार्जर किसी दूसरे कोने पर ऑन हैं तो आपका मोबाइल फोन अपने आप चार्ज होता रहेगा उसे किसी बात से कनेक्ट करने या केबल से कनेक्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी इस वायरलेस चार्जर के आ जाने से।

 3. Airo fax

Airo fax भविष्य में यूज किया जाने वाला एक ऐसा यान होगा जिसको कोई व्यक्ति एक मोटरसाइकिल की भांति ऑपरेट कर सकता है और यह travel को और भी आसान बना देगा। जिसे लोगों के बीच की दूरियां और भी कम हो जाएंगी और लोग जिससे तुरंत ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाएंगे।

 4.Two language earbuds

देखिए दोस्तों अब का जमाना बहुत ही फास्ट है और अभी के समय में किसी के पास किसी भी लैंग्वेज को सीखने के लिए उतना ज्यादा समय नहीं है कि वह उस लैंग्वेज को अच्छे से समझ पाए और सीख पाए तो इसी को आसान बनाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों द्वारा ऐसी खोजे की जा रही है जिससे कि लोगों को किसी दूसरे भाषा को समझने के लिए किस माध्यम की आवश्यकता हो ना कि उसे सीखने की इसी आधार पर भविष्य में two language earbuds का आविष्कार हो सकता है।
यहां पर मैंने आपको कहा है two language earbuds इसका मतलब यह है कि यहां दो भाषाओं के बीच के आपके समझने के लिए बनाया गया ऐसा एयरफोन होगा जो सामने वाले के भाषा को आपके भाषा में ट्रांसलेट करके बताएगा।




Read also


  1. क्या है हिंदी ब्लॉग्स
  2. 17 simple business ideas
  3. Selfie related interesting fact
  4. History of telephone
  5. History of Microsoft operating system

Tuesday, September 24, 2019

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Hindi blogs kya hai


Hay welcome friends आज मैं बात करने वाला हूं हिंदी ब्लॉग्स के बारे में क्या होते हैं हिंदी ब्लॉग्स और हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास के बारे में मैं इस पोस्ट में चर्चा करने वाला हूं।
हिंदी ब्लॉग्स ऐसे ब्लॉग्स होते हैं जिनमें हिंदी शब्द हिंदी भाषा का उपयोग किया जाता है इसमें संपूर्ण जानकारी हिंदी में लिखने की कोशिश की जाती है।
हिंदी ब्लॉग्स में हिंदी को सपोर्ट करने वाले टूल्स का उपयोग किया जाता है जिसकी मदद से ब्लॉक को लिखा जाता है।


Hindi blogs ka itihaas

हिंदी ब्लॉग्स के इतिहास की बात करें तो यह बहुत पुराना नहीं है क्योंकि हिंदी भाषा को कंप्यूटर और इंटरनेट में आए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। हिंदी ब्लॉग की शुरुआत सबसे पहले एक भारतीय इंजीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया था जिनका नाम आलोक कुमार है।
आलोक कुमार ने ही सबसे पहले हिंदी ब्लॉगर के रूप में एक ब्लॉग किस शुरुआत की जिनका ब्लॉग blogspot.com पर hosted था। जिनके ब्लॉग का नाम 9211.Blogspot.com था। फिर बाद में उन्होंने इस ब्लॉक का नाम चेंज करके http://www.devanaagarii.net/ पर divert कर दिया था। जो कि अभी वर्तमान में सक्रिय है। लेकिन 9211.blogspot.com भी सक्रिय है।




hindi blog kya hai


हिंदी भाषा के विकास के लिए इंटरनेट में बहुत से ग्रुप और समूह का निर्माण किया गया जिसे की हिंदी का विकास हो सके और हिंदी ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।
इसी कड़ी में अक्षर ग्राम नेटवर्क नाम के एक संस्था का विकास हुआ जो कि कंप्यूटर में इंटरनेट में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए चालू किया गया था और अभी यह सक्रिय नहीं हैं।
हिंदी ब्लॉग्स के प्रचार के लिए विभिन्न में समूह जैसे नारद, सर्वज्ञ, परिचर्चा की शुरुआत की गई थी जो कि हिंदी ब्लॉगर्स के लिए एक अत्यंत ही सुविधाजनक स्थान था जहां से वे हिंदी ब्लॉग के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकते थे और आपस में चर्चा कर सकते थे इनमें से कई सेवाएं जो कि गूगल पर बनाएंगे थे वे अभी भी सक्रिय हैं और कई बंद हो चुके हैं।
हिंदी ब्लॉगर्स की संख्या को बढ़ाने के लिए गूगल में ग्रुप बनाया गया था और ब्लॉग प्रहरी डॉट कॉम के नाम से भी एक समुदाय बना था जो कि अभिषेक लिए नहीं आएगा पेचकस डाक सूची ए नाम से गूगल में समूह भी बनाया गया है और फिकर में हिंदी ब्लॉगर्स का ग्रुप को ही बनाया गया है और यूट्यूब में बनाया गया जो ग्रुप था वहां भी सक्रिय नहीं हैं तो इस प्रकार हिंदी का विकास इंटरनेट पर बहुत ही तीव्र गति से तब हुआ जब 2007 में कैसे सॉफ्टवेयर का विकास हुआ जो कि हिंदी सपोर्ट करते थे और 2008 में सबसे ज्यादा हिंदी ब्लॉग्स के विकास को बल मिला।





भारत में Hindi blogger की संख्या अभी काफी बढ़ चुकी है और लोग अब हिंदी में ज्यादा ब्लॉगिंग करने लगे हैं जो अंग्रेजी ब्लॉगर थे वह भी आप हिंदी में ब्लॉगिंग करने लगे हैं जिससे और लोग को फायदा हो रहा है।
साउथ मिलावट एक अंग्रेजी ब्लागर हैं जिसमें इंग्लिश में पोस्ट को पब्लिश किया जाता है लेकिन Sout me loud ने हिंदी में भी ब्लॉक चालू किया है जिसका नाम उन्होंने sout me hindi रखा है। हर्ष अग्रवाल इनके ओनर हैं।


Conclusion

हिंदी भाषा में सबसे पहला पोस्ट 21 अप्रैल 2003 को किया गया था और यहां पहला पोस्ट था जो हिंदी में था। इस पोस्ट को आलोक कुमार ने लिखा था।इस प्रकार हिंदी भाषा में ब्लॉग्स की शुरुआत काफी लेट से हुआ है तो अभी हिंदी में काफी उम्मीदें हैं।
फिलहाल इस पोस्ट में इतना ही मिलते हैं अगले पोस्ट में।

Read also


Tuesday, August 27, 2019

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Hello and welcome friends आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग rexgin.in पर आज मैं बात करने वाला हूँ Business के बारे में बहुत सारी बातें जिसमें मैं आपसे share करूँगा ढेर सारी Business Ideas hindi me आपके साथ तो दोस्तों इससे पहले भी आपने और भी कई सारे ब्लॉग या बिजनेस से जुड़ी Topics के बारे में पढा होगा।

Business idea


BUSINESS IDEA HINDI ME

इस पोस्ट को में क्या है खास मैं आपको बता देता हूं दोस्तों इस पोस्ट को मैने Besiclly उन लोगॉ के लिए लिखा है जिनके यहां पर ज्यादा Business ideas गांव के लिए है। या ऐसे इलाकों के लिए है जहाँ पर लोग ज्यादा पैसे लगाने की नहीं सोचते हैं या गरीब होते हैं तो उन्हीं लोगों के लिए मैं यहां पर आपके लिए 17 best Business ideas hindi में लेकर आया हूँ इससे पहले मैं आपको Business के बारे में थोड़ा सा Intro दे दूँ जो नए readers हैं वो मेरे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर कर लें क्योकि आज से हर रोज इसमें नये पोस्ट आने वाले हैं।

Business Kya Hai (क्या है बिज़नेस?)

Business को हिंदी में व्यपार भी कहा जाता है दोस्तो आज के इस competion में Business ही एक ऐसा माध्यम है जिससे आप ढेर सारे पैसे कमा सकते हैं।
Business एक प्रकार का व्यापक क्षेत्र है जिसको करने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं होती है, और मैं मानता हूँ जिस Business को करने में ज्यादा पैसे invest करने पडे वह business नहीं है वह एक प्रकार का जुआ है।
Business करने के लिए कोई रोक टोक नहीं है Small Business के लिए लेकिन यदि आप बहुत बड़ा Business करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको इजाजत लेने की जरूरत पड़ सकती है।
तो मेरे हिसाब से Business एक प्रकार से पैसे कमाने का एक ऐसा माध्यम है जिसमें कोई किसी प्रकार से आपके ऊपर डाट-दबाव नहीं कर सकता है और न ही किसी प्रकार के आदेश आपके ऊपर चला सकता है। और इसमें पैसे कमाने की सीमा आपके ऊपर निर्भर करता है। इसलिए मैं इसे नौकरी से बेहतर मानता हूँ।





Types of Business

दोस्तो अगर बात करें Business के Types(प्रकार) की तो यह मेरे हिसाब से दो ही प्रकार का होता है जो की इस प्रकार है-

Small Business
Big Business


Small Business(लघु उद्योग या छोटा व्यपार)

- एक प्रकार का ऐसा Business जो की छोटे से बड़े Business को बनाने में लोगों की मदद करता है। या यूं कहें हर Business की शुरुआत इसी प्रकार के small Business से होती है।
इस पकार के Small Business में ज्यादा पैसे invest करने की आवश्यकत नहीं होती है। आप इस प्रकार के Business को हजार पांच सौ या फ्री में भी Start कर सकते हैं बस आपको धैर्य ज्यादा समय तक रखना होता है।
Business पूर्ण रूप से Costumers के ऊपर Depend करता है इसलिए आप कोई भी Business करते हैं तो उसमें ग्राहक का होना उतना ही जरूरी है जितना की पैसे का है।

Big Business (दीर्घ व्यापार)




- इस प्रकार के Business में बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत होती है और इसके करने के लिए ज्यादा ग्राहक की आवश्य्कता भी होती है investers अगर मिल जाते हैं तब तो यह Big Business चल पड़ता है, नहीं तो सबसे ज्यादा घाटा इसी प्रकार के ज्यादा पैसे वाले Business में होता है।
जैसे मैं यहां उदाहरण लेता हूँ एक बड़े होटल का तो यहां पर मुझे बहुत ज्यादा पैसे लगाने पड़ेंगे।
इसी प्रकार इसके छोटे रूप या Small Business की बात करें तो जैसे Tea-stol की बात करूं तो इसमें आपको ज्यादा पैसे लगाने की जरूरत नहीं है।
तो हर Big Business की शुरुवात छोटे से Business से होती है अब आप देश के बड़ी बड़ी कम्पनियों का उदाहर ही ले ले कैसे HP, Microsoft, Apple इन सभी Company की शुरुआत एक गैरेज से हुई थी।
तो ये तो हुए Business के प्रकार की बात अब बात करते हैं Business Ideas के बारे में।

Small Business Idea for Villagers(ग्रामीणों के लिए छोटे व्यपार)

दोस्तों गांव एक ऐसी जगह है जहां पर न तो बहुत ज्यादा ग्राहक हमें मिलते है और न हीं बहुत ज्यादा investers तो गांव में क्या ऐसा करें की आपको कम पैसे में ही ज्यादा Profite मिल सके। इसी पर चर्चा करते हैं आगे-

1. Blogging Best Business for Villagers(blogging सबसे बढ़िया व्यापार है गांव के लिए)


Blogging मेरे हिसाब से गांव में रहने वाले उन पढ़े लिखे नौजवानों के लिए best Business है जिनके पास Knowledge है, जो अपनी बात लोगों के साथ शेयर करने में बहुत ही Proud Fill करते हैं उनके लिए ये Best है और इसमें आजकल बहुत सारे क्षेत्र भी आ गए हैं जहां पर आप ब्लॉगिंग में जानकारी शेयर कर सकते हैं।
जैसे की अगर आप छत्तीसगढ़ से हैं और आपको छत्तीसगढ़ में घूमना बहुत पसन्द है या आपको छत्तीसगढ़ से जुड़ी बहुत सारी जानकारी मालूम है तो आप इस ब्लॉगिंग के माध्यम से शेयर कर सकते हैं।
Blogging में ज्यादा पैसे invest करने की आवश्य्कता नहीं है आपको यह एक साल के लिए ज्यादा से ज्यादा 2500 रुपये के आस पास खर्च करने होंगे।
यह फ्री में भी चालू किया जा सकता है जो की Google द्वारा संचालित एक Platform Blogger.com के नाम से तो आप वहां Free में Account Creat कर सकते है और जब तक चाहें ब्लॉगिंग कर सकते हैं ये Free of Coast है।
फिर बाद में आप इसमें इनकम होने पर पैसे लगाकर और ज्यादा Facility Provide करके ज्यादा पैसे कमा सकते हैं।

2. Mushroom का Business (मसरूम का व्यपार)-


दोस्तो आज लगभग हर गांव एक ना एक शहर जैसे जुड़ा हूआ है या गांव के पास 10 किलोमीटर तक कोई न 
कोई गांव जरूर होता है जहां पर आप मसरूम की बिक्री कर सकते हैं आप यदि गांव में रहते हैं तो आपको पता ही होगा की गांव में कई तरह के प्राकृतिक मसरूम भी मिलते हैं जिन्हें खाया जाता है तो आप इसे शहर में लेजाकर बेच सकते हैं या किसी के माध्यम से बेचवा सकते हैं इस प्रकार की खेती भी आजकल सरकार के माध्यम से अनुदान के रूप में लोन ले के किया जा सकता है अगर आपके पास अच्छी सी जगह है तो घर में आप इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

3. Mobile Repairing(मोबाईल बनाना)-


अगर आपमें थोड़ी बहुत Mobile से related knowledge है तो आप इसका Repairig Cours करके अपना छोटा सा दुकान खोल सकते हैं आपके लिए यह बहुत ही ज्यादा Profitable हो सकता है क्योकि आजकल हर जगह मोबाइल का चलन बहुत ज्यादा हो गया है तो आप इसमें अपना अच्छा करियर बना सकते हैं। आज हर कोई मोबाइल use करता ही है और यदि आप छत्तीसगढ़ में रहते हैं तो आपको तो पता ही होगा की संचार क्रांति योजना का लाभ अभी बहुत ज्यादा लोगों को मिला है तो इससे जाहिर सी बात है की कुछ न कुछ खराबी तो इन सभी मोबाइल्स में आ ही सकता है तो ये आपको करना चाहिए।
Mobile Repaireng Shop खोलने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं होती है।

4. General Stor Business (किराना दुकान व्यपार)-


इस प्रकार के Business से आपको बहुत ज्यादा फायदा हो सकता है क्योकि ग्रामीण इलाको में ज्यादातर समान आसानी से उपलब्ध नहीं होता है अगर आपको कुछ यूनिक करने की Quality है तो आप इसमें बहुत आगे तक जा सकते हैं।
इस प्रकार के Business माना की अभी गांवों में भी Compitition बढ़ गया है लेकिन अगर आप कुछ Unique कर सकते हैं तो आपको इसमें ज्यादा फायदा होगा।

5. Coching Center (कोचिंग सेंटर)-





पढाई में Compitition के बारे में आपको पता तो होगा ही की कितना ज्यादा अभी है। आपको किसी subject में अच्छी पकड़ है तो आप Coching Center खोल सकते हैं छोटे बच्चों के लिए आज कल बहुत सारे प्राइवेट स्कूल खुल गये हैं जिनमें पढ़ने वाले बच्चों के माँ-बाप Tution Class भेजना चाहते हैं।
इससे आपको अच्छी इनकम हो सकती है अगर आप किसी बच्चे से 200 रुपये हर महीने के ले रहें तो पर भी आपको इससे बहुत ज्यादा फायदा मिल सकता है। मान ले की आपके पास 20 बच्चे पढ़ने आ रहें है और आप उन्हें 1 घण्टे पढा रहें है सुबह और साम को भी आप ऐसे ही 20 बच्चों को पढा रहें है तो आपको एक महीने में 8000 हजार रुपये यू ही मिल जाते हैं। बस आपको दिन के 2 घण्टे ही देने हैं।

6. Freelaucer Business(स्वतन्त्र व्यपार)-


आपको यदि किसी Feild के बारे में अच्छी Knowledge है तो आप internet के माध्यम से freelancer का काम कर सकते है इससे आपको अच्छी इनकम भी हो सकता है और यह आप जब चाहे तब कर सकते हैं।
जैसे आपको लिखना अच्छा लगता है तो आप किसी से Order लेके लिख सकते है या आप इसमें अपना कमीशन एड करके किसी और से लिखाकर पैसे कमा सकते हैं बस आपको दिमाग लगाना है फिर पैसे कमाना आपके लिए आसान हो जाएगा।

7. Social Media Business(सामाजिक जाल स्थल व्यपार)-


आपको पैसे कमाने के लिए जो अच्छा लगे उससे पैसे कमाएंगे ओ वो आपके लिए अच्छा होगा। लेकिन अगर आपको Social Media के बारे में थोड़ी बहुत अच्छी पकड़ है तो आप किसी आदमी के Social Media Manager बनके भी पैसे कमा सकते हैं। इसमें आपको उससे या उस कम्पनी से सम्पर्क करना है जिनका व्यपार social Media पर प्रचार के लिए चलाया जाता है।
उनसे आप पैसे लेकर यह काम कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको मोबाइल की जरूरत पड़ती है। बांकी सब उस कम्पनी के अकाउंट से ही आपको सब कुछ Hendal करना होता है। तो ये भी बिना इन्वेस्टमेंट के किया जा सकता है। इसमें किसी Office जाने की आवश्य्कता नहीं होती है।

8. Canteen या नाश्ते की दुकान -


इस प्रकार के Business में किसी प्रकार के ज्यादा पैसे आपको लगाने नहीं होते हैं और आपको बस मेहनत करने पड़ते हैं। जैसे जैसे आप मेहनत करते जाते है आपको बहुत ज्यादा इनकम इससे हो सकता है। आजकल हर कोई खाने लेकर कहीं नहीं जाता है।
और वह नाश्ते से ही काम चला लेता है। तो आप अगर किसी शहर के पास में रहते है तो आपको इस प्रकार से छोटे से नाश्ते की दुकान खोलने में भी ज्यादा profit हो सकता है।
आजकल ऑफिस वाले भी नाश्ते कर के ही दोपहर का गुजारा कर लेते हैं तो ऐसे में यदि आप शहर के पास से हैं तो आपको इस प्रकार के दुकान खोलने में ज्यादा फायदा हो सकता है।

9. Dry Fruite stor(सूखे सब्जी की दुकान)-

अगर आप गांव में रहते है या शहर में भी रहते हैं तो आपके लिए ये बेस्ट तरीका हो सकता है पैसे कमाने का क्योकि आप तो जानते ही हैं की आजकल हरे सब्जियों के भाव कितने ज्यादा बढ़ गये है और इस कारण लोग खुले या सुखी सब्जियों को खाना बहुत ज्यादा पसन्द करते हैं।
इस प्रकार के Business ने सुखी मछलियां भी आ जाती हैं इसको शहरों में बड़े चाव से खाया जाता है और गांव में सबसे ज्यादा इसका उत्पादन होता है तो ये आपके लिए बेस्ट हो सकता है।

10. Backery Business-


इस प्रकार के व्यपार में आपको ज्यादा पैसे Invest करने की आवश्य्कता नहीं होती है। आप खुद की बेकरी खोल के बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन इतने पैसे अवश्य कमा सकते हैं जितने की आपको जरूरत होती है और आप धीरे धीरे इस आगे बड़ा कर सकते हैं।
इसमें वैसे भी आजकल बहुत ज्यादा स्कोप होता जा रहा है क्योकि हर कोई आजकल अपने बर्थडे और कोई भी एनिवर्सरी में केक को लेते जरूर हैं तो ये आपके छोटे से दुकान से स्टार्ट कर सकते हैं।

11. Youtube Business-


अभी के समय Youtube सबसे ज्यादा देखा जाने वाला वेबसाइट है जहां लोग अपना समय सबसे ज्यादा यहां बिताते हैं। और अगर आपमें कोई Creativity है तो आपको भी Youtube बनाने में कोई खर्च करने की जरूरत नहीं होती है। अगर आप Pasonate है किसी भी प्रकार की ऐसे ज्ञान आपमें हैं जो लोगों के लिए उपयोगी हो सकतें हैं तो आप इस प्रकार के फ्री के youtube channel बना के इससे Earning कर सकते हैं।

12. Vehicle Repairing Center -


आज कल गाड़ी मोटर का चलन बहुत ज्यादा हैं और यदि आपनें कहीं से कोई Repairing का Cors कर लिया है तो आप उसे Repair करने वाले Repairing Shop खोल सकते हैं। यहाँ पर आपके ज्यादा पैसे नहीं फसते हैं इसमें जितना भी पैसा फ़सना है वह Repairing के लिए प्रयोग किये जाने वाले Tools के ऊपर ही पैसे खर्च करने की आवश्य्कता होती है।
तो ये भी एक अच्छा Frofitable Niche हो सकता है आपके लिए।

13. Bike Repairing Center-


अगर आपको Bikes में ज्यादा Interest है तो आप Bike Repairing का कॉर्स करके भी अपने लिए छोटे से workshop खोल सकते हैं इसमें भी आपको बाइक को बनाने के लिए आवश्यक समान को ही लेना होता है। बस फिर क्या है आप जितना ज्यादा Repairing करते जाते है आपको उतना ही ज्यादा Profite होता है। और आप किसी और को part के लिए दुकान खुलवा सकते हैं जिससे आप उससे कमीशन भी ले सकते है नहीं भी लेते हैं तो आस-पास में इस प्रकार के दुकान होने के कारण आपका Repairin Center अच्छे से चलता है।
इसका पैसा आप इस पर Invest करके और अच्छे के कमाई कर सकते हैं।

14. Agarbatti Business(अगरबत्ती लघु उद्योग)-


अगर बत्ती का छोटा सा उद्योग आपके लिए Profitable हो सकता है क्योकि आजकल सरकार भी इसके लिए अनुदान दे रहा है जिसके सहायता से अगर आप Business Start करते हैं तो ये आपको सस्ता पड़ता है और आप इसकी शुरुआत छोटे-छोटे ब्रांच से भी कर सकते हैं इसमें ज्यादा Manpaower की आवश्य्कता होती है।
यह एक ब्रांड़ बन सकता है और बहुत आगे जा सकता है।

15. Gift Corner Business-

Gift आज कल हर कोई इसके बारे में जानता है और यह गांव में भी खूब चल सकता है और शहर में तो सबसे ज्यादा चलता है। कई ऐसे अवसर होते हैं जिनमें Gift की आवश्य्कता होती है। तो ये आपके लिए profitable तरीका हो सकता है।
इसमें किसी बड़े Item की आवश्य्कता नहीं होती है आप कई सारे छोटे-छोटे आइटम रख सकते हैं। जो की ज्यादा खर्च नहीं करने पड़ेंगें इसके लिए।

16. Vehicle Wash(गाड़ी धोना)-


कार धोने का समान ज्यादा महंगा नहीं होता है और यह आपके लिए Profitable हो सकता है क्योकि आज-कल गाड़ी मोटर की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है इस कारण आपको इसे और भी ज्यादा फायदा हो सकता है। इसमें किसी भी प्रकार के ज्यादा जगह की आवश्य्कता भी नहीं होता है।

17. Decorating Business-


आज कल बहुत सारे शहरों में कई सारे funcions Organize किये जाते हैं। इस कारण आपको ये Decorating का Cors कर लेना चाहिए और आपको इसमें किसी भी प्रकार के पैसे Invest करने की आवश्य्कता नहीं होती है। आपको जो भी Decoration का सामान है वह उस घर के मालिक के द्वारा दिया जाता है या आप खुद Arenge करते हैं तो आपको किसी से उधारी भी ये समान मिल जाते हैं। इस प्रकार यह भी एक अच्छा Profitable business हो सकता हैं।

Conclusion-





आपको जो भी Business Ideas आपके मन में है मेरे साथ Hindi में Discus कर सकते हैं। आपको जो Business idea यहां पर बताए गये है वह सब कम पैसे में ही शुरू किये जा सकते हैं और कई ऐसे Business है जिनको फ्री में चालू किया जा सकता है। आपको जो भी काम पसन्द हो आप वहीं Business Idea को अपने आप में Impliment करें क्योकि इससे आप जल्दी बोर नहीं होंगे और इसे लम्बे समय तक कर सकते हैं।
धन्यवाद!
ओके बाय मिलते हैं अगले पोस्ट में

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Wednesday, March 27, 2019

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Hello friends सभी का welcom मेरे blog में आज सेल्फी के क्रेज के बारे में
सेल्फ़ी से जुड़ी रोचक बातें

Selfi  का क्रेज वर्तमान में किस कदर हावी है इसे बताने की जरूरत नहीं है Smartphone कैमरे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आज selfi के लिए होता है , सेल्फी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि आज सेल्फी फोन कैमरा फोन नाम से स्मार्टफोन मौजूद है।  एनडीटीवी के अनुसार बाजार में भी Selfie stick phone की जरूरतों को समझते हुए नए-नए प्रयोग चल रहा है ।




तो चलिए जानते selfie से जुड़ी कुछ Important बातें-


Selfie सिर्फ एक feature नहीं रहा, इससे प्रेरित होकर Gruphee और Bothi जैसे नाम बनाए गए हैं । Companys सेल्फी के साथ साथ Beutification Mode दे रही है, तो Brand bothi Feature वाले Phone बाजार (Market) में उतार चुके हैं, आज सेल्फी के साथ साथ ब्यूटीफिकेशन मोड या आप इसे हिन्दी में सुंदरता अवस्था कह सकते हैं, बुकेह इफेक्ट (Views key) जैसी Facilities कंपनियां smart phone मे दे रहे हैं ।

 लेकिन अक्सर आपके mind में  यह Questions शायद आया होगा कि आखिर क्या बला है ? यह Selfie, कैसे शुरू हुई होगी इसकी कहानी ? कैसे ली होगी पहली selfie ? ,
कैसा रहा है? सेल्फी का सफर ? तब से लेकर अब तक ! इन Questions के जवाब (answer) इसी पोस्ट में आपको देखने को मिलेंगें तो जानें सेल्फ़ी।
पहली सेल्फी लेने में लगे थे 3 मिनट।

पहली सेल्फी


वह साल 1840 में अक्टूबर या नवंबर का महीना था 30 वर्षीय रॉबर्ट कार्नेलियस ने फिलाडेल्फिया में अपने पिता की दुकान के पीछे वाले हिस्से में कैमरा सेटअप (setup) किया लेंस कैप (lance cap) बाहर निकाले फ्रेम (Frame) के सामने 5 मिनट दिए और लेंस कैप दोबारा लगा दिया।  उसके बाद जो तस्वीर निकल कर सामने आई, उसे पहला सेल्फी पोट्रेट (first Selfie portrat) और अब की भाषा में सेल्फी(selfie) कहा गया बाद में Robert एक मशहूर (Famous) फोटोग्राफर (photographar) के तौर पर पहचाने गए, उनके पिता का लैम्प का बिजनेस (Bussiness) था, जिसे उन्होंने 20 साल तक चलाया बाद में यह व्यवसाय America के सबसे बड़े (Biggest) लैंप व्यवसाय (Bussiness) के तौर पर स्थापित हुआ । कुछ जानकार मानतें है कि Robert को पहली सेल्फी लेने में 3 मिनट का समय लगा था।  तस्वीर आने के बाद उन्होंने लिखा था , द फर्स्ट लाइट पिक्चर एवर टेकन (The First Light Picture Ever Taken)

1966 में इस अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने भी ली सेल्फी


अमेरिकी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बज एल्ड्रिन ने साल 1966 में जैमिनी 12 मिशन के दौरान अंतरिक्ष से सेल्फी ली थी । कुछ लोगों का मानना है कि दरअसल, यह पहली सेल्फी थी।
साल 2013 में मिली सेल्फी को पहचान
साल 2013 में प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में सेल्फी शब्द को शामिल किया गया। सेल्फी को कुछ यूं परिभाषित किया गया , एक फोटोग्राफ जिसे किसी ने खुद लिया है या अपने स्मार्टफोन या वेबकैम से ली गई अपनी ही तस्वीर, जिसे किसी सोशल मीडिया वेबसाइट पर पोस्ट किया गया हो, तथ्य यह भी है कि सेल्फी को साल 2013 में Oxford Dictionary ने Word of the year का खिताब भी दिया था।

सेल्फी की लत उम्र छीन रही!


एक research में कहा गया है कि selfie की लत (Addiction) लोगों के उम्र (Age) को कम कर रही है, कुछ डॉक्टर्स ने कहा था इस प्रकार लगातार Continue फोटो लेते रहने की Addiction ' सेल्फी एल्बो ' की वजह बन सकती है। सेल्फ़ी एल्बो एक बीमारी है,  इस बीमारी में कोहनी में दर्द की शिकायत रहने लगती है, अमेरिका के Medicine विशेषज्ञ Jordan Metzal के मुताबिक selfie लेने के लिए जब हम हाथ ऊपर उठाते हैं, तो कोहनी मूड़ी हुई रहती है। लोग इसी सीधी में लगातार 20 से 30 क्लिक कर जाते हैं, ऐसे में muscles पर अधिक दबाव पड़ता है। जिसके कारण pain होता है।
पिछले साल(2017) आए एक शोध में बताया गया था, कि सेल्फी के कारण 18 महीनों के भीतर दुनिया में 27 मौतें हुई हैं।
सेल्फी लेते 60% मौतें भारत में।




मानसिक बीमारी का खतरा भी

इसके अलावा Ohayo State University की अध्ययन(research) रिपोर्ट में सामने आ चुका है, जो पुरुष जरूरत से ज्यादा सेल्फी लेते हैं और पोस्ट करते हैं, उनमें खुद को reach दिखाने का स्तर (Level) और मानसिक बीमारी(mental Deaseage) की आशंका बढ़ जाती है, रिपोर्ट में 19 वर्षीय डैनी बोमैन का उदाहरण दिया गया, जिसने स्कूल छोड़ दिया और अपने घर से 6 महीने तक इसलिए बाहर नहीं निकला क्योंकि उसकी सर्वश्रेष्ठ सेल्फी नहीं आ पा रही थी । उसने हर दिन 200 सेल्फी लेने में 10 घंटे बर्बाद किए।  जब भी उसके माता पिता ने उसे selfie लेने से रोका तो दोस्तों , वह अपने माता पिता से नाराज हो जाता था।
ऐसे ही होता जब selfie कज लत लग जाती है।
तो दोस्तों यह तो थी selfie से जुड़ी कुछ खास बातें, कुछ intresting बातें, आपको यह जानकारी कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताएं।

Thursday, November 8, 2018

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History of Telephone

फीड सिग्नल पर जीत की खबर संचारित करने के लिए Pheidippides मैराथन से एथेन्स तक चले गए थे, फिर वास्तव में खराब था; संदेश देने के बाद वह मौके पर मारे गए, Plutarch ने 490BC में कहा ।
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www.rexgin.in

 1876 पहला सफल टेलीफोन ट्रांसमिशन Graham Bell कहता है "श्रीमान वाटसन, यहां आओ, मैं आपको देखना चाहता हूं" और वॉटसन प्रत्येक शब्द को स्पष्ट रूप से समझता है, एक शताब्दी बाद, लोग "फिर से क्या कहेंगे।"

मार्कोनी ने अभ्यास में टेस्ला वायरलेस संचार खोजी रखी, वाणिज्यिक रेडियो विकसित किया, 1895 में।

reginald औब्रे fessenden पहले वायरलेस रेडियो टेलीफोन प्रदर्शित करता है 1906 में।

 1939

 विश्व युद्ध शुरू हो जाएगा, जर्मन बड़े पैमाने पर रेडियो फोन का उपयोग शुरू करते हैं।

Bell प्रयोगशालाएं मोबाइल फोन के लिए Hexagonal cell का प्रस्ताव करती हैं, जिसमें तीन तरफा एंटीना हम जानते हैं। यह चूसा, क्योंकि यह सभी सैद्धांतिक था।

1954

लिनस लाराबी (हम्फ्री बोगर्ट) अपनी कार से एक असली मोबाइल फोन का उपयोग बिली आश्चर्यजनक Sabrina में करता है (ऑड्री हेप यूआरएम द्वारा खेला जाता है।)
पहला पूर्ण स्वचालित मोबाइल फोन (mobiltelefonisystem A या MTA) Ericsson द्वारा स्वीडन में सिस्टम। चित्रित प्रत्येक हैंडसेट 90 पाउंड (40 किलो) 1956 था।

3 अप्रैल, 1973: Motorola  Dr. Martin cooper ने पहली Motorola DynaTAC prototype का उपयोग करते हुए New York City में चलते समय AT&T's Bell Labs, में अनुसंधान के प्रमुख Joel Engel को फोन किया।

1 जी नेटवर्क 1937 की शुरुआत

 नोकिया ने अपना पहला सेल फोन पेश किया, एनालॉग Mobira Senator FCC ने एनालॉग-आधारित उन्नत Mbile फोन सर्विस (AMPS) को मंजूरी दे दी और 834-894 MHz band में आवृत्तियों को आवंटित किया। 1982


13 अक्टूबर, 1983
पहले से ही व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सेल फोन, मोटोरोला डायना TAC के साथ बनाया गया पहला कॉल।

दुनिया में पहला वाणिज्यिक GSM कॉल। नोकिया हार्डवेयर का उपयोग कर किया। 2G और Digital 1991 से शुरू होता है ।

मोटोरोला Star TAC 1996

3 जी प्रकट ( Appear) होता है. 2000

FCC ने एनालॉग नेटवर्क को बंद करने का फैसला किया।

GPRS और EDGE तेजी से (लेकिन बहुत तेज़ नहीं) डेटा ट्रांसफर, लॉन्च के लिए प्रौद्योगिकियां शुरू किया। यह 2.5 जी है। अभी तक उपलब्ध नहीं मतलब सन 2000 के पहले।

2007 में i phone लॉन्च किया, अभी भी 2.5 जी तकनीक पर चलता है, लेकिन डेटा ट्रांसफर के लिए वाई-फाई जोड़ता है। 3 जी सेल फोन सर्वव्यापी बनने लगते हैं।

फरवरी  19, 2008 सेल फोन एनालॉग नेटवर्क शट डाउन हो गया।  2008
【अन्य जानकारियाँ】



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Friday, November 2, 2018

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साथियों आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर आज मैं आपके लिए compyuter software के सभी version के बारे में बताने वाला हूँ इससे पहले मैंने आपको computer के सामान्य परिचय से सम्बंधित एक पोस्ट लिखा था जिसमें मैंने आपको कम्प्यूटर से सम्बंधित कुछ प्रश्न का उत्तर दिया था। आज मैं आपको कम्प्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी वर्जन के बारे में संक्षिप्त में बताने वाला हूँ इसमें मैंने कम्प्यूटर के सभी वर्जन के रिलीज डेट और उसकी खासियत के बारे में बताया है। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगे तो कमेंट जरूर करीयेगा ।

COMPUTER SOFTWARE INTRODUCTION

आपको ये तो पता ही होगा की कम्प्यूटर के सभी operating system में ज्यादा उपयोग microsoft operating system का use किया जाता है तो मैं आपको इसी के बारे में बताने वाला हूँ -
Microsoft operating system

Microsoft operating system's


microsoft का पहला version window 1.0 


लॉन्च -
 सन 1985,

खास बात -
 Basic interface, Gadgets, Calender व Calculator, ms paint first version लॉन्च किया गया था ।

Windows 1.2 


लॉन्च -

सन 1987,

खास -
MS-Word, MS-Exel, इसके साथ ही Minimize and Maximize का बटन जोड़ा गया इसके अलावा विभिन्न System setting व Configuration Options के लिए Control panel बनाया गया था ।

Windows 2.10 


लॉन्च-
सन 1987 ,

खास बात -
यह एक वर्चुअल मशीन के रूप में था ।

Window 3.0


लॉन्च -
सन 1990,

खास बात-
इस वर्जन में सबसे पहले हार्ड डिस्क का उपयोग किया गया था । Virtuale Memory, Improve Graphics व Multitasking जैसे सुविधा प्रदान किया गया था । और यह 256 colors Support करता था ।इसके साथ ही Solitaire game भी लॉन्च किया गया था।

Window 3.0

*कम्प्यूटर से सम्बंधित 15 प्रश्न उत्तर 

लॉन्च -
सन 1992,


खास बात-
इस वर्जन में मल्टीमीडिया क्षमता , नेटवर्क क्षमता व माइक्रोसॉफ्ट मेल भी लॉन्च किया गया था।

Windows 3.11


लॉन्च -
सन 1993,

खास बात-
32 बिट फाइल सिस्टम , 32 बिट नेटवर्किंग प्रदान किया गया ।

Window 95


लॉन्च -
सन 1995,

खास बात-
इसमें सर्वप्रथम start menu व start button का प्रयोग किया गया था । इसके साथ ही plug & play , taskbar , internet explorer की सुविधा प्रदान की गयी थी। यह 32 bit Enviroment पर कार्य कर सकता था ।

Window 98 

लॉन्च-
सन 1998,

खास बात-
Improve Hardware व Hardware Drivers, Internet Explorer, Internet setting, Outlook Express Address Book, Media players, file Extension की सुविधा, IE4.0, Front-page express, Web server आदि सुविधाये इस वर्जन में दि गयी थी।

Window 2000,ME


लॉन्च-
सन 2000,

खास बात-
इंटरनेट की विशेष सुविधा , नेटवर्क बनाने व नियंत्रण की क्षमता , Auto correct , IP Security auto update , System Recovery जैसे सुविधाएं आपको इस वर्जन में दिया गया था ।

Window XP


लॉन्च-
2001,

खास बात-
Advance GUI , Plug & play, security, Reliability, Compatibility divise manager आदि सुविधा दिया गया।

Window vista 


लॉन्च-
2006,

खास बात-
इसके बाद विंडो का नया वर्जन आया window areo के नाम से , न्यू start menu & Icons, Windows Mail , Advance Security , attracive look & feel , Direct X Technology, Media Player 11, Internet Explorer 7, Windows Defender ( Anti Spyware ), Improve Searching , Speech Recognition ये सारी सुविधाये इस वर्जन में दिया गया।

Window 7


लॉन्च -
सन 22 october 2009,

 खास बात-
 Themes, Gadgets, DirectX, Windows Media Center, Biometrics, Windows search , full 64-bit support

Window 8


लॉन्च-
2012,

खास बात-
टच स्क्रीन की सुविधा, IE 11, new look & Screens, Bundled apps Windows store, fast boot & shut Down.

Window 10


लॉन्च-
2015,

खास बात-
Start menu, universal app, New look table mode आदि।

आपको ये जानकारी कैसे लगी मेरे साथ शेयर करें।
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Friday, October 26, 2018

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दोस्तों आज में आपके सामने वो जानकारी रखने जा रहा हूँ जो की भविष्य में आपके हाई स्पीड ट्रेन के सपने को साकार कर सकता है। आज मैं आपके सामने एक ऐसे ट्रेन का जिक्र करने जा रहा हूँ जो की भविष्य में हाइस्पीड ट्रेनों का अगला चरण होगा।

Hyperloop train

विश्व के विकसित राष्ट्र हाइपरलूप ट्रेन को अपनाने की पहल कर रहें हैं। अमेरिका व सऊदी अरब ने इसमें विशेष रूचि दिखाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भविष्य में परिवहन की रूपरेखा बदलने की ओर अग्रसर है।
        ट्रेन द्वारा तीव्र गति से अधिक दूरी तय करने के लिए विश्व के कई देशों द्वारा समय-समय पर नई-नई तकनीक का प्रयोग हो रहा है। कभी मैग्लेव तो कभी बुलेट ट्रेन। इसी सन्दर्भ में अगला चरण या तकनीक हाइपरलूप ट्रेन है। अनुमान है की हाइपरलूप ट्रेन जमीन पर ही 1200 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से सकेगी।
हाइपरलूप ट्रेन चर्चा में क्यों है ?
अमेरिका के नार्थ लॉस वेगास में मई, 2017 में हाइपरलूप-वन ट्रेन का सफल परीक्षण सम्पन्न हुआ। इस परीक्षण में हाइपरलूप-वन ट्रेन 300 मील प्रति घण्टे की रफ़्तार से चली थी। इसके लिए परीक्षण स्थल '' नॉर्थ लॉस वेगास '' के नेवाडा में बनाया गया था। चुम्बकीय तकनीक से लैस पॉड़ ( ट्रैक ) पर हाइपरलूप का दो मील के ट्रैक पर परीक्षण कराया गया था। इस ट्रेन को बनाने में जुटे शोधकर्ताओं ने दावा किया है। कि आने वाले वर्षों में वैक्यूम ( बिना हवा ) ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली कैप्सूल जैसी हाइपरलूप 750 मील ( 1224 किमी ) प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकेगी ,जो एक ध्वनी की चाल माना जाता है। इससे जुड़े विशेषज्ञों का वर्ष 2018 तक पहली हाइपरलूप ट्रेन पटरियों पर दौड़ाने की तैयारी है और वर्ष 2020 तक दुनिया में परिवहन की रूपरेखा बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है हाइपरलूप-वन ?
हाइपरलूप-वन विमानों की गति से चलने वाली एक ट्रेन है, जिसका विकास अमेरिकी कम्पनी हाइपरलूप-वन द्वारा किया जा रहा है। यह हाई स्पीड ट्रेनों ( मैगलेव, हारमोनी बुलेट आदि ) का अगला चरण या विकल्प है। इसकी रफ्तार ध्वनी की चाल यानी लगभग 1236 किमी/घण्टे होगी।
हाइपरलूप वन में प्रयुक्त तकनीक
हाइपरलूप चुम्बकीय शक्ति पर आधारित एक तकनीक है, जिसके तहत खम्भों के ऊपर ( एलीवेटेड ) पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाती है। इस ट्यूब के भीतर हाइपरलूप को उच्च दाब और ताप सहने की क्षमता वाले मिश्र धातु इंकानेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाता है। इस स्की में बेहद सूक्ष्म छिद्रों के जरिये दबाव डालकर हवा भरी जाती है, जिससे की यह एक एयर ( हवा ) कुशन की तरह काम करने लगता है। स्की में लगे चुम्बक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से हाइपरलूप के पॉड ( ट्रैक ) को गति दि जाती है। ट्यूब के भीतर बुलेट जैसी शक्ल की लम्बी सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है।
     चुकी इसमें घर्षण बिल्कुल नहीं होता, इसलिए इसकी रफ़्तार 1100 से 1200 किमी/घण्टे या इससे भी अधिक हो सकती है। इसमें बिजली का खर्च बहुत कम होगा और प्रदूषण भी बिल्कुल नहीं होता है।
हाइपरलूप की संकल्पना
हाइपरलूप का सम्बन्ध अंतरिक्ष तकनीक से भी जोड़ा जा सकता है। वास्तव में लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराने की तैयारी कर रही प्रसिद्ध ' स्पेस एक्स ' कम्पनी के जनक और टेस्ला मोटर्स के सह-संस्थापक और सीईओ ' एलन मस्क ' ने सर्वप्रथम हाइपरलूप तकनीक ' से ट्रेन चलाने के बारे में सोंचा था। मास्क ने वर्ष 2013 में हाइपरलूप का प्रस्ताव दुनिया के सामने रखते हुए एलान किया था कि दिनिया में कोई भी संगठन चाहे तो संशाधन जुटाकर हाइपरलूप प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है। इसी कारण एलन मस्क के साथ ही संकल्पना की दो अन्य कम्पनियां ' हाइपरलूप-वन और हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजीज ' साकार करने में जुटी हुई है।
कैसे साकार होगी परियोजना
लाइव साइंस के मुताबिक, स्पेस एक्स कम्पनी ने सेंट्रल कैलिफोर्निया इलाके में 8 किमी लम्बे परीक्षण ट्रैक का निर्माण करने के लिए जमीन अधिग्रहित कर ली है। यह संकल्पना अभी शुरुआती दौर में है और स्पेस एक्स इसके लिए इंजीनियरों की टीम गठित कर रही है। इसकी ओर से कहा गया है कि अगले कुछ महीनों में इसके डिजाइन के बारे में टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में विस्तार से चर्चा की जाएगी, साथ ही दुनिया भर की सम्बंधित विशेषज्ञता वाली टीमों की ओर से इसके लिए डिजाइन मंगाए जा रहे हैं। विश्व के विकसित देश इस प्रणाली को अपनाने के लिए आगे आ रहे है। अमेरिका, कनाडा और सऊदी अरब जैसे देशों ने विशेष रूप से रूचि दिखाई है। इन देशों में ' हाइपरलूप-वन ' नामक इस परिकल्पना को वास्तविक बनाने का कार्य चल रहा है।
हाइपरलूप के कार्य सिद्धांत
हाइपरलूप परिवहन मुख्यतः चुम्बकीय शक्ति पर आधारित एक तकनीक है। इस तकनीक में एक तरह के कैप्सूल या पॉन्ड्स का प्रयोग किया जाएगा, जो विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए होंगे। इन कैप्सूल और पॉन्ड्स को एक पारदर्शी ट्यूब पाइप के भीतर उच्च वेग से संचालित किया जाएगा। इस तकनीक में पॉड़स या ट्रैक को जमीन से ऊपर बड़े-बड़े पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुम्बक पर चलाया जाएगा। इस चुम्बकीय प्रभाव से ये पॉड़स ट्रैक से कुछ ऊपर उठ जाएंगे,जिससे घर्षण कम होगा और गति भी तेज हो जाएगी।
हाइपरलूप ट्रेन के परिचालन सम्बन्धी चुनोतियाँ
हाइपरलूप ट्रेन हाईस्पीड परिवहन के क्षेत्र में एक संकल्पना है, जिसे मूर्त रूप देने के लिए कई देश कार्य कर रहे हैं। चूंकि हाइपरलूप-वन विश्व में अब तक की सबसे हाईस्पीड ट्रेन होगी, इसलिए इसके परिचालन में तकनीक, लागत ,सुरक्षा,मानव श्रम, भूमि-अधिग्रहण आदि कई अहम चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है,जिसका विवरण निम्नवत है-
हाइपरलूप के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती या मामला सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सुपरकण्डक्टिंग मैगलेव ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम से जुड़े विशेषज्ञ और अमेरिकी भौतिक विज्ञानी जेम्स पॉवेल ने इसकी सुरक्षा के सम्बन्ध में हाल हि में चिंता जताई है। पॉवेल ने लाइव साइंस को दिए एक साक्षात्कार में कहा की जिस स्पीड से हाइपरलूप पॉड़स को चलाने की बात हो रही है,ऐसे में उसे मोड़ा या ढलान पर नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। इतना ही नहीं, किसी प्रकार के झटके या उछाल की स्थिति से बचाव के लिए इसके ट्रैक को सीधा और समतल बनाना होगा।
* गुरुत्वाकर्षण बल से भी इसकी स्पीड को समायोजित करना होगा एलीवेशन्स में त्वरित बदलाव की स्थिति में यात्री खुद को पूरी तरह से समायोजित हो पाएंगे या नहीं, ये भी अनिश्चित होता है।
* इस ट्रेन में प्रयुक्त ट्यूब में कम दबाव ( लो प्रेशर ) वैक्यूम को निश्चित तौर पर बरकरार रखना कठिन होगा, अन्यथा पॉड सभी यात्री आपस में टकरा सकते हैं।
* यह प्रोजेक्ट इतना संवेदनशील है की किसी भी जगह किसी भी परिस्थिति में हल्की सि भी क्षति होती है या आतंकियों की ओर से कहीं हल्का सा भी नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसका परिणाम बेहद भयानक हो सकता है।
* हाइपरलूप पूरी तरह से तकनीक पर आधारित प्रोजेक्ट है, जिस पर वृहद पैमाने पर धनराशि व्यय  होगी।
* इस परियोजना को साकार रूप देने में भूमि-अधिग्रहण भी एक प्रमुख चुनौती है। चुकी इस ट्रेन की रफ्तार हवाई जहाज के बराबर है, फिर भी इसका परिचालन जमीन पर ही किया जाएगा। अतः इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण करने की आवश्यकता होगी। इस अधिग्रहण में सरकार और भूमि से सम्बंधित व्यक्ति की मंजूरी भी आवश्यक होगी।
* हाइपरलूप-वन में दुर्घटना के दौरान पूरी तरह बन्द ट्यूब के भीतर ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। इसलिए कम्पनियों को विमान की तरह ही पॉड के भीतर ऑक्सीजन मास्क की भरपूर व्यवस्था करनी होगी।
* इस ट्रेन में सफर करने वाला प्रशिक्षित व्यक्ति ही गति ओर हवा का इतना दबाव झेल सकता है।
हाइपरलूप ट्रेन के फायदे या अनुप्रयोग 
हाइपरलूप ट्रेन की संकल्पना मुख्यतः परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाने वाला विचार है। इसे हाइपरलूप नाम इसलिए दिया गया, क्योकि इसमें परिवहन एक लूप के माध्यम से होगा , जिससे इसकी गति अत्यधिक सम्भव हो सकेगी। इस ट्रेन की गति लगभग 1200 किमी/घण्टे होगी, जिससे बड़ी-बड़ी दूरियों को काफी कम समय में तय किया जा सकेगा यह ट्रेन अन्तर्देशीय परिवहन के साथ-साथ अंतरमहाद्वीपीय, परिवहन में सहायक हो सकेगा। इस तकनीक में कम दबाव के स्टील ट्यूब के जरिए पॉडस में सामान और यात्रियों को एक जगह-से दूसरी जगह ले जाना सम्भव हो सकेगा।
वर्तमान समय में प्रचलित हाईस्पीड ट्रेन
वर्तमान समय में विश्व पटल पर कई ऐसी हाईस्पीड ट्रेन प्रचलन में हैं जिसके कारण बड़ी-बड़ी दूरियां   काफी कम समय में तय करने में सहायता मिली है। इन ट्रेनों में प्रमुख हाईस्पीड ट्रेन मैग्लेव, हारमोनी, रेंफी, हायाबूसा,युरोस्टार, बुलेट, सिनकांसेन आदि है।
भारत में हाइपरलूप ट्रेन सम्बन्धी प्रयास और भविष्य
वर्तमान समय में भारत में भले ही भूतल परिवहन की रफ़्तार 100 किमी/घण्टा से ज्यादा नहीं बढ़ पाई है, फिर भी विगत कुछ वर्षों में भारत सरकार ने अपनी रेल के नवीनीकरण और गति में दिलचस्पी दिखाई है और इसी उद्देश्य से सरकार ने कई देशों से इस दिशा में समझौते किए। भारत की सबसे नवीनतम और सेमी हाईस्पीड ट्रेन ' गतिमान एक्सप्रेस है ' जो दिल्ली से आगरा के बीच 160 किमी/घण्टे की स्पीड से चलती है। इस दिशा में और पहल करते हुए भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से समझौता किया।
हाइपरलूप तकनीक से पहले भारत हाईस्पीड ट्रेन के क्षेत्र में बुलेट ट्रेन एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके जल्द परिचालन के लिए भारत सरकार प्रयासरत है। फ़रवरी,2017 में हाइपरलूप-वन कम्पनी ने सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमे लगभग 90 देशों ने भाग लिया।
इन देशों में भारत भी सामिल था। भारत में पांच कम्पनियों ने भारत में हाइपरलूप पर कार्य करने के लिए दिलचस्पी दिखाई। कम्पनियों ने सम्मेलन में दिल्ली-मुम्बई रुट समेत कुल पांच रूटों पर इस ट्रेन को चलाने का प्रस्ताव दिया था। इन रूटों में बेंगलूरु से चेन्नई,बेंगलुरु से तिरुवनन्तपुरम और मुम्बई से चेन्नई शामिल है।
हाइपरलूप कम्पनी को भारत में एक बड़ा बाजार दिख रहा है और खास बात यह है कि यहां की सरकार आधुनिक तकनीक पर ज्यादा जोर दे रही है। 'भारतीय रेलवे ने पिछले वर्ष देश में मैग्लेव ट्रेन जैसी तकनीक लाने के' लिए ग्लोबल टेंडर निकाला था, जिसमें अनेक कम्पनियों ने भाग लिया था , लेकिन इस ग्लोबल टेण्डर में ' मेक इन इंडिया' के लिए हाइपरलूप के अलावा कोई दूसरी बड़ी कम्पनी तैयार नहीं थी।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में हाइपरलूप से सम्बंधित कुछ चुनौतियां
* भारत में हाइपरलूप प्रोजेक्ट के लिए वित्त की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है, क्योकि इसकी लागत अरबों डॉलर में होगी तथा भारतीय परिवहन व्यवस्था में इसे बिना सब्सिडी दिए चला पाना भी सम्भव नही होगा।
* अभी तक इस तकनीक की टेस्टिंग पूरी तरह से सम्पन्न नहीं हो पाई है। अतः इसमें सुरक्षित परिवहन पर अब भी सन्देह है।
* भारत मे यात्रियों की संख्या सर्वाधिक है और हाइपरलूप कुछ ही लोगों को परिवहन की सुविधा दे पाएगा।
* इस प्रोजेक्ट को पूर्ण करने में भूमि अधिग्रहण भी एक प्रमुख समस्या है।
नीति आयोग द्वारा छह अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों को मंजूरी 
नीति आयोग ने भारत में परिवहन व्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए छह अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों को मंजूरी प्रदान की। आयोग से मंजूरी मिलने के बाद परिवहन विभाग ने इस हाइपरलूप, मैट्रीनो और पॉड़ टैक्सी तकनीक से जुड़े सुरक्षा के मानकों के अध्ययन के लिए रेलवे एक पूर्व शीर्ष अधिकारी के नेतृत्व में छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
         दोस्तों इतना पढ़ने के बाद हमें तो यह पता चल ही गया होगा की इस ट्रेन की क्या खास बात है। लेकिन मैं फिर भी आपके सामने इसकी कुछ विशेषताओ को रखने जा रहा हूँ जो की इस प्रकार है-----
हाइपरलूप ट्रेन की विशेषता
** यह ट्रेन ध्वनि की चाल के बराबर चलेगी।
** हाईस्पीड ट्रेन होने के बावजूद यह जमीन पर चलने में सक्षम होगी।
** यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और सौर ऊर्जा से भी संचालित हो सकती है।
** अधिक दुरी को कम समय में तय करने में सक्षम है।
** यह अब तक की सबसे हाईस्पीड ट्रेन होगी।
** मेट्रो ट्रेन की तर्ज पर इस ट्रेन में बड़े-बड़े पिलर ( खम्भे ) पर एक विशेष प्रकार के ट्यूब लगे होते हैं।
           धन्यवाद
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Tuesday, October 23, 2018

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                    परिचय: -

सूक्ष्मदर्शी का मतलब सूक्ष्म वस्तु को देखने के लिए प्रयुक्त उपकरण से है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण का नाम है, जिसका प्रयोग ऐसे सूक्ष्म वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है जिनको सामान्य सूक्ष्मदर्शी से देखना असम्भव होता है तो आओ जाने की ये इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का इतिहास से वर्तमान का सफर -
20 वीं शताब्दी में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का विकास जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप के माद्यम से किसी वस्तु का लाखो गुना आवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है। इसके लिए इलेक्ट्रॉन बिम का उपयोग किया जाता है। इस माइक्रोस्कोप का अविष्कार नॉल एवं रस्का (1931) नामक दो जर्मन वैज्ञानिक द्वारा किया गया। इसका व्यसाय के क्षेत्र में सर्वप्रथम उपयोग सन 1940 में किया गया। 

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत -

इलेक्ट्रॉन बीम में बहुत छोटी तारंगदैधर्य वाले विधुत चुम्बकीय तरंग के गुण होते हैं। इसका तरंगदैधर्य विधुत क्षेत्र उत्पन्न करने वाले वोल्टेज के वर्गमूल का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उदाहरण के रूप में 80 KV विधुत द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉन बीम का तरंगदैधर्य 0.05 A होता है। इलेक्ट्रोन बीम का उत्पादन इलेक्ट्रॉन गन द्वारा होता है। बीम्स को माइक्रोस्कोप के अन्य अंगों की सहायता से संकेंद्रित किया जाता है एवं इसके बाद इन्हें विधुत चुम्बकीय स्तरों के द्वारा फोकस किया जाता है।
                

                  प्रकार -

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप को दो प्रकारों में बांटा गया है -
1. ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( TEM )
2. स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( SEM )

       TEM -

इस माइक्रोस्कोप में इलेक्ट्रॉन का मार्ग , प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश की किरणों के अनुरूप होता है। इलेक्ट्रोन गन से प्रेक्षित इलेक्ट्रॉन बीम विधुत चुम्बकीय लेंसों की श्रेणी से होकर निकलती है।

        SEM -

इस सूक्ष्मदर्शी का विकास बाद में हुआ जिसकी कार्य करने का सिद्धांत TEM से अलग है। इसमें नमूने की सतह को इलेक्ट्रॉन की पतली बीम से विकिरणीकृत किया जाता है। जिससे इलेक्ट्रॉन संकेत उत्पन्न होते हैं। इन विकिरणों के कारण नमूने से कम ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन निकलते हैं,जिन्हें धनावेशित प्लेट या एनोड पर एकत्रित किया जाता है। विधुत संकेतों का उपयोग नमूने के प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

                   क्रिया-विधी

TEM में वस्तु का आवर्धित चित्र देखने के लिए उच्च निर्वात उत्पन्न करना आवश्यक होता है, क्योकि इलेक्ट्रॉन निर्वात में ही गमन करते हैं। इसके लिए लीये गए पदार्थ को पूर्णरूपेण निर्जलीकृता करना आवश्यक होता है। कण्डेन्सर लेंस इलेक्ट्रोन बीम को नमूने पर समानान्तरित करता है और आवर्धन लेंसों द्वारा आवर्धित चित्र प्राप्त होता है। यह प्रतिबिम्ब एक ' फॉस्फोरेसेन्ट स्क्रीन ' के सम्पर्क मे आने पर दृश्य हो जाती है। एक मिलियन KV के त्वरण वोल्टेज वाला अभी-अभी विकसित किया। TEM का इलेक्ट्रॉन बीम 1 माइक्रोमीटर मोटे नमूने का भी प्रतिबिम्ब आसानी से बना सकता है। SEM में विधुत संकेतों का उपयोग नमूने का प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने में किया जाता है। स्कैनिंग जेनरेटर के उपयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन बीम को नमूने में से चित्र रेखा की तरह गमन कराया जाता है। एनोड पर द्वितीयक इलेक्ट्रॉन के टकराने से उत्पन्न संकेतों को टेलीविजन तंत्र की तरह स्कैंन कर कैथोड पर प्रतिबिम्ब उत्पन्न किया जाता है। SEM की फोकस मापने की गहराई कई मिलीमीटर होती है। इसके द्वारा त्रिविमीय चित्र प्राप्त किया जाता है।

             उपयोगिता

1. इसकी अधिक आवर्धन क्षमता के कारण इसका प्रयोग अत्यंत छोटे कोशिकांग के अध्ययन में किया जाता है।
2. सूक्ष्म जीवो , विषाणु ,स्पोर्स आदि के अध्ययन में यह सहायक होता है।
3. इसके सहायता से नमूने की सतह का टोपोग्राफी का अध्ययन भी किया जाता है।
4. कोशिआंगो के अलावा बड़े कोशिकांगो में पाये जाने वाले वृहद जैविक अणुओं की संरचना का अध्ययन भी इसके द्वारा किया जाता है।
    

             सीमाएं

वस्तु के अत्यंत आवर्धित चित्र बनाने की क्षमता के बावजूद इसकी अपनी कुछ कमियां हैं। चूंकि वस्तु का अध्ययन करने के लिए पूर्ण निर्वात की आवश्यकता होती है अतः जीवित वस्तु का अध्ययन करने में कठिनाई होता है।  
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                      सूक्ष्मदर्शी क्या है ?

सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण है जिसका प्रयोग हम सूक्ष्म वस्तुवों को देखने के लिए करते हैं।

                      प्रकार

सूक्ष्मदर्शी को उनके गुणों के आधार पर निम्न प्रकार से बांटा गया है -
1. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी
2. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी।
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा उपकरण है जिसकी संरचना कुछ इस प्रकार होती है की इसे आसानी से पकड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से प्रकाश एवं लेंस का प्रयोग किया जाता फिर भी सूक्ष्मदर्शी निम्न भागों से मिलकर बना होता है -
1. बॉडी ट्यूब
2. नेत्रक
3. नोज पीस
4. अभीदृशयक लेंस
5. मंच ( STAGE )
6. कणड़ेन्सर
7. आइरिस डायफ्राम
8. दर्पण
9. कोर्स एडजस्टमेंट
10. फाइनल एडजस्टमेंट
11. आधार (BASE )
12. भुजा।

                सूक्ष्मदर्शी की संरचना एवं कार्य

1. बॉडी ट्यूब- 

बॉडी ट्यूब सूक्ष्मदर्शी का मेन हिस्सा होता है जो की लम्बा होता और इसके ऊपर अंतर नली तथा नेत्रक एवम् निचले भाग में दो या तीन अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं। यह नली बेलकार होता है। एवम् भुजा के द्वारा जुड़ी होती है, तथा इसके नीचे नोज पीस लगी होती है।

2. नेत्रक(eye piece )

यह बॉडी ट्यूब से लगे अंतर नली के ऊपर होता है। इसी की सहायता से बाएं आँख से किसी वस्तु के आवर्धित रूप को देखा जाता है। यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे ऊपर का भाग होता है।

3. नोज पीस -

यह बॉडी ट्यूब के नीचे का भाग है, जिसमें 2-3 अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं जिसको आसानी से घुमाया जा सकता है। यह गोल तथा प्लेटनुमा होता है जिसकी सहायता से इसे घुमाया जाता है।

4. अभीदृश्यक लेंस -

ये नोज पीस के नीचे स्थित होता है जो 10X , 40X एवं 100 X पावर के होते हैं। इस लेंस को वस्तु के ऊपर फोकस किया जाता है।

5. मंच (stage)-

यह सूक्ष्मदर्शी का मध्य भाग है जो की भुजा से जुड़ा होता है जिसमें एक छिद्र होता है इस छिद्र में स्लाइड को फिट किया जाता है। यह दर्पण के ऊपर होता है जो प्लेट के समान चौड़ा होता है।

6. कण्डेन्सर -

कण्डेन्सर मंच के नीचे का भाग है जो प्रकाश को एकत्रित कर स्लाइड पर फोकस करता है। इसके न होने पर वस्तु का साफ दृश्य नही बनता है।

7. आइरिस डायफ्राम

डायफ्राम कण्डेन्सर के नीचे का भाग है जो की उसके नीचे फिट होता है। इसके द्वारा प्रकाश मार्ग को समायोजित किया जाता है।

8. दर्पण ( mirror )

दर्पण प्रकाश को परावर्तित करने के लिये सूक्ष्मदर्शी में लगाया जाता है जो की आधार से थोड़ा ऊपर होता है और प्रकाश को सीधे स्लाइड की ओर फोकस करता है। इसे रिफ्लेक्टर भी कहा जाता है।

9. कोर्स एडजस्टमेंट -

यह बॉडी ट्यूब को ऊपर नीचे करने के लिए लगाया जाता है , जो भुजा से जुड़ा होता है। इसका प्रयोग लेंस को वस्तु पर समायोजित करने के लिए किया जाता है।

10. फाइनल एडजस्टमेंट -

यदि लेंस को थोड़ा बहुत ऊपर नीचे करना होता है तो इसका प्रयोग किया जाता है। जो की आधार से थोड़ा ऊपर लगा होता है।

11. आधार -

यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे नीचे का भाग होता है जो जमीन के ऊपर होता है सूक्ष्मदर्शी का बेलेंश बनाकर रखता है। यह घोड़े के नाल के आकार का होता है, जो ठोस लोहे का बना होता है।

12. भुजा ( ARM) -

इसके द्वारा सूक्ष्मदर्शी का आधार एवं बॉडी ट्यूब जुड़े होते हैं। यह मुडा हुआ होता है जिकसो पकड़ कर उठाया जा सकता है।
   इस सूक्ष्मदर्शी की सीमाये जिसकी वजह से इसका प्रयोग इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी की भाँति नही किया जा सकता है-
इसके द्वारा अधिकतम 2000-4000 गुना आवर्धन ही सम्भव है। अत्यंत छोटे वस्तु जैसे कोशिकांग का अध्ययन इसकी सहायता से नही किया जा सकता है।
इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी के बारे मे जानने के लिए इसे क्लिक करें।

               उपयोग

इसका प्रयोग विभिन्न लैबों में तथा सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में किया जाता है। इसकी सहायता से ही विभिन्न कार्य सफल हो पाये हैं,और विज्ञान के क्षेत्र में इसका बहुत बड़ा योगदान है। सूक्ष्मदर्शी को एक प्रायोगिक उपकरण के रूप में जीव विज्ञान , रसायन विज्ञान आदि क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है।

Thursday, October 18, 2018

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प्रश्न 1. PH मीटर क्या है ? 
उत्तर = दोस्तों ph मीटर एक प्रकार के उपकरण नाम है।
प्रश्न 2. इसका प्रयोग किस क्षेत्र में किया जाता है ?
उत्तर = इसका प्रयोग विज्ञान के क्षेत्र में किया जाता है।
प्रश्न 3. PH मीटर का प्रयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर = इसका प्रयोग किसी विलयन की अम्लीयता तथा क्षारीयता ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 4. इसकी खोज किसने की और किस सन में की ?
उत्तर = इसकी खोज सोरेन्सन ने की थी। सन 1909 में।
प्रश्न 5. कैसे पता करते हैं की कोई पदार्थ अम्लीय है की क्षारीय ?
उत्तर = जब हम PH मीटर का प्रयोग करते हैं तो उसमे 14 अंक होते हैं। जब PH मान 7 आता है तो वह उदासीन है तथा जब PH मान 7 से अधिक आता है तो उसे क्षारीय और 7 से कम आने पर अम्लीय होते है जैसे जैसे अम्लीयता बढ़ती तथा घटती जाती है PH मान भी बढ़ता घटता रहता है।
pH ( हाइड्रोजन आयन सांद्रण ) पर टिप्पणी इस प्रकार लिखा जा सकता है-
pH किसी विलयन की अम्लीयता क्षारीयता मापने का पैमाना है। इसकी खोज सोरेन्सन नामक वैज्ञानिक ने सन् 1909 में की थी। कोशिकाओं के प्रोतोप्लाजम में H+ एवं OH- आयन्स पाये जाते है। यदि किसी विलयन में H+ आयन अधिक तथा OH- आयन कम हो तो वह विलयन अम्लीय कहलाता है।
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