पर्यावरण प्रदूषण के कारण और उपाय - paryavaran pradushan ke karan

इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं। चाहे वे जमीन पर रहते हों या पानी पर, वे पर्यावरण का हिस्सा हैं। पर्यावरण में हवा, पानी, धूप, पौधे, जानवर आदि भी शामिल हैं। इसके अलावा, पृथ्वी को ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा ग्रह माना जाता है जो जीवन का समर्थन करता है। पर्यावरण को एक कंबल के रूप में समझा जा सकता है जो ऋषि और ध्वनि ग्रह पर जीवन रखता है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण और उपाय

रूपरेखा -

  1. प्रस्तावना 
  2. प्रदूषण का अर्थ 
  3. प्रदूषण के कारण 
  4. वायु प्रदूषण 
  5. जल प्रदूषण 
  6. रासायनिक प्रदूषण 
  7. ध्वनि प्रदूषण 
  8. पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के उपाय
  9. उपसंहार 

प्रस्तावना 

इस प्रदूषण शब्द से कोई अछूता नहीं है इसकी वजह से आज हमें अनेक प्रकार की बीमारियों से और प्राकृतिक आपदाओं से भी जूझना पड़ रहा है। 

पर्यावरण प्रदूषण के कारण और उपाय - paryavaran pradushan ke karan

विश्व में व्याप्त गंभीर समस्या का नाम ही पर्यावरण प्रदूषण है। मानव का जीवन पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। जहाँ जीवन मरण का प्रश्न है, वहाँ इसे रोकने के लिए प्रयत्न करना चाहिए अन्यथा आगे वाले वर्षों में विषाक्त वातावरण में मानव जाति विनाश निश्चित है। 

सुख-सुविधाओं की लालसा से ही मानव आज प्राकृतिक सम्पदाओं का दोहन कर रहा है। बिना सोचे-विचारे उपयोग में लेने से एक समय ऐसा आएगा जब इन वस्तुओं का भण्डार नष्ट हो जावेगा। इसी अविवेकपूर्ण दोहन से ही प्रदूषण की समस्या का जन्म होता है। 

प्रदूषण का अर्थ

जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष  रूप से मानव के स्वास्थ्य और संस्थानों को क्षति पहुँचाने हैं, उन्हें प्रदूषण कहा जाता है। पर्यावरण हमें अनगिनत लाभ देता है जिसे हम जीवन भर चुका नहीं सकते। चूंकि वे जंगल, पेड़, जानवर, पानी और हवा से जुड़े हुए हैं। जंगल और पेड़ हवा को फिल्टर करते हैं और हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं। पौधे पानी को शुद्ध करते हैं, बाढ़ की संभावना को कम करते हैं, प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रदूषण के कारण 

जनसंख्या वृद्धि ही प्रदूषण का मुख्य कारण है। औद्योगीकरण में प्रगति से कारखानों की संख्या में वृद्धि हुई है। इनसे वातावरण सर्वदा धूलयुक्त रहता है। वातावरण में व्याप्त हानिकारक तत्व स्वस्थ्य पर प्रतिकूल असर डालते हैं। चौबीस घंटों में एक भी पल ऐसा नहीं होता है कि हमें शुद्ध वायु साँस लेने के लिए मिल सके। प्रदूषण का मुख्य कारण सरकार की औद्योगीकरण की नीति है। 

प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नांकित हैं -

1. वायु प्रदूषण 

कारखानों की चिमनियों, हलवाइयों की भट्टियों, हर समय एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले वाहनों, घरों में जलने वाली सिगड़ियों आदि से निकलने वाले धुंएँ और अन्य विषाक्त गैसों से वातावरण प्रदूषित होता है। नगरों का वातावरण दमघोंटू हो जाता है। कारखानों से गैस के रिसाव का भी डर रहता है। 

इसका उदाहरण सर्वविदित है कि भोपाल के यूनियन कार्बन के गैस रिसाव से जनहानि के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ा है। परमाणु ऊर्जा और परमाणु विस्फोटों से वायुमंडल में विपुल रेडियोधर्मिता का प्रसारण हो रहा है, जिससे वायुमंडल प्रदूषित होने से अनेक रोग फैलते हैं, पशु-पक्षी मरते हैं और वनस्पतियाँ नष्ट हो जाती हैं। 

2. जल प्रदूषण 

जल प्रदूषण के कारण परम्परागत और आधुनिक दोनों ही है। व्यर्थ और वाहित मल, नगरों का गंदा पानी, कारखानों से निकलने वाली गंदगी, नदियों में बहा दी जाती है और इन नदियों के जल को पीने के लिए उपयोग में लिया जाता है। जिससे हैजा, पेचिश, पीलिया आदि रोग हो जाते हैं। गंगा अब तेरा जल अमृत कहावत विपरीत हो गई है। यह दूषित जल मानव, पशु-पक्षी और कृषि सभी के लिए अनुपयोगी है। 

3. रासायनिक प्रदूषण

जब रसायन हमारे पर्यावरण में छोड़े जाते हैं और हमारे पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बाधित करते हैं, हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसे प्रदूषित करते हैं और हमारे भोजन को दूषित करते हैं।

रासायनिक प्रदूषण के कई स्रोत हैं। हमारे तकनीकी विकास ने हमें एक ऐसी प्रजाति बना दिया है जो काफी हद तक रसायनों पर निर्भर है और ये रसायन जीवन और हमारे पर्यावरण के लिए जहरीले हैं।

हमारी कृषि प्रक्रियाओं में रसायनों और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। अपनी फसलों की रक्षा के लिए हम उन पर कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। अपने पशुओं के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए, वाणिज्यिक किसान कलमों पर रसायनों का छिड़काव करते हैं। 

उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग जल प्रदूषण का एक अन्य स्रोत है। ये सभी जमीन में रिस सकते हैं और हमारी मिट्टी को दूषित कर सकते हैं, और अंततः, ये रसायन इसे हमारे जल आपूर्ति, जल निकायों और हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन में बना देंगे। ये जहरीले तत्व हमारे वातावरण में भी प्रवेश कर जाते हैं, और हमारे पर्यावरण के क्षरण को बढ़ाते हैं।

4. ध्वनि प्रदूषण 

औद्योगीकरण और मशीनीकरण के परिणामस्वरूप जो ध्वनि उत्पन्न होती है। वह शोरगुल स्नायुमण्डल के संतुलन को बिगाड़ देता है। ज्ञानेन्द्रियाँ तनावग्रस्त होने से नींद में खलल पड़ता है। 

पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय - वैसे तो प्रदूषण की समस्या विश्वव्यापी है, किन्तु भारतीय प्रदूषण के अंतर्गत विशेष समस्याएँ हैं। भारत वर्ष में प्रदूषण का दायित्व वैज्ञानिक प्रयोगों पर नहीं, अपितु देश में व्याप्त अशिक्षा, गरीबी और उससे उत्पन्न होने वाली अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों और आदतों पर हैं। एक ही घर में मनुष्य और मवेशी एक साथ रहते हैं।

ध्वनि प्रदूषण एक अदृश्य खतरा है। इसे देखा नहीं जा सकता है, लेकिन फिर भी यह जमीन पर और समुद्र के नीचे मौजूद है। ध्वनि प्रदूषण को किसी भी अवांछित या परेशान करने वाली ध्वनि माना जाता है जो मनुष्यों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करती है।

ध्वनि को डेसिबल में मापा जाता है। पर्यावरण में कई आवाजें होती हैं, सरसराहट के पत्तों 20 से 30 डेसिबल वज्रपात 120 डेसिबल तक होती हैं। 85 डेसिबल या इससे अधिक की ध्वनि किसी व्यक्ति के कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। इस सीमा को पार करने वाले ध्वनि स्रोतों में परिचित चीजें शामिल हैं, जैसे पावर लॉन मोवर 90 डेसिबल, मेट्रो ट्रेन 90 से 115 डेसिबल, और लाउड रॉक कॉन्सर्ट 110 से 120 डेसिबल तक होता हैं।

ध्वनि प्रदूषण प्रतिदिन लाखों लोगों को प्रभावित करता है। इसके कारण होने वाली सबसे आम स्वास्थ्य समस्या शोर प्रेरित श्रवण हानि है। तेज आवाज के संपर्क में आने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, नींद में खलल और तनाव भी हो सकता है। 

ये स्वास्थ्य समस्याएं सभी आयु समूहों, विशेषकर बच्चों को प्रभावित कर सकती हैं। कई बच्चे जो शोरगुल वाले हवाई अड्डों या सड़कों के पास रहते हैं, वे तनाव और अन्य समस्याओं से पीड़ित पाए गए हैं, जैसे कि याददाश्त में कमी, ध्यान का स्तर और पढ़ने का कौशल मे कमी आदि।

पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के उपाय

वायु प्रदूषण को रोकने के लिए चिमनियों में इस तरह के फ़िल्टर लगाने चाहिए कि वे प्रदूषणकारी तत्वों को वायुमण्डल में प्रविष्ट नहीं होने दें। घरों और कारखानों से निकलने वाले गंदे जल को भूमिगत किया जाना चाहिए। रेडियोधर्मी प्रदूषण को रोकने ले लिए अंतर्राष्ट्रीय, ऊर्जा संघ द्वारा निर्मित नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण हेतु वन संरक्षण पर विशेष बल देने चाहिए। वृक्ष पर्यावरण का सर्वश्रेष्ठ साधन है, क्योंकि वे अशुद्ध वायु को अवशोषित कर मानव के लिए शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, अतः हम सभी का यह दायित्व है कि हम अधिक से अधिक वृक्ष लगायें, ताकि पर्यावरण का संतुलन बनाये रख सकें। 

उपसंहार

पर्यावरण में प्रदूषण की समस्या मानव और विज्ञान की स्वार्थलिप्सा की देन है। यह मानव को मरण की ओर धकेलने का प्रयास है, प्राणिमात्र के अमंगल का सूचक है। मानव की दीर्घायु और उसके जीवन को सुरक्षित रखने हेतु इस समस्या को नियंत्रित करना परमावश्यक है। 

मानव के अस्तित्व पर प्रश्न लग सकता है। पर्यावरण की रक्षा और प्रदूषण पर नियंत्रण समाज के निवासियों का सम्मिलित दायित्व है, अतः देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह यह समस्या के निराकरण में अपना सक्रिय योगदान प्रदान करे। 

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