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उद्धव प्रसंग प्रश्न उत्तर : GK IN HINDI

 उद्धव प्रसंग प्रश्न उत्तर

Uddhav prasang prashn uttar.


अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. उद्धव प्रसंग किस खंड काव्य से लिया गया है?

उत्तर - उद्धव-प्रसंग "उद्धव-शतक" खंड काव्य से लिया गया है। 

प्रश्न 2. उद्धव अपने कुर्ते की बाँह से आँसुओं को क्यों पोंछ रहे थे?

उत्तर - उद्धव अपने कुर्ते की बाँह से आँसुओं को इसलिए पोंछ रहे थे, क्योंकि वे बंशी और नवनीत को पृथ्वी पर नहीं रखना चाहते थे। 

प्रश्न 3. उद्धव कौन थे?

प्रसंग - उद्धव श्री कृष्ण के परम मित्र थे। वे निराकार ब्रम्ह के उपासक थे तथा कृष्ण प्रेम में डूबी गोपियों को निर्गुण की उपासना का संदेश देने गोकुल गए थे। 

लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. उद्धव जी के ब्रज आगमन की सूचना पाकर गोपियों की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर - उद्धव जी के ब्रज आगमन की सूचना पाकर गोपियाँ हर्षित हो गई, क्योंकि वे श्री कृष्ण के समाचार को प्राप्त करना चाहती थी। इसी कारण वे जैसी थी उसी स्थिति में समूह में नंद बाबा के घर के आँगन में एकत्रित होने लगीं। सभी उद्धव जी के चारों और खड़ी हो गईं। जिन गोपियों को वे दिखाई नहीं दे रहे थे वे उचक-उचक कर पंजे के बल खड़ी होकर उत्सुकता वश पूछने लगीं कि पत्र में क्या लिखा है? कृष्ण ने हमारे लिए क्या संदेश भेजा है?

प्रश्न 2. "कृष्ण को मनभावन कहना" भाव व्यंजना का सुन्दर उदाहरण है। स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर - मनभावन का शाब्दिक अर्थ है - मन को अच्छा लगने वाला। योगेश्वर कृष्ण ईश्वर के अवतार थे। उनकी लीलाएँ मन को मोह लेती थी। वे उन्हें (गोपियों) को अच्छे लगते थे। इसी कारण वे निष्काम भाव से उनकी आराधना करती थीं। उनका प्रेम छह रहित था। श्रीकृष्ण गोपियों के लिए सब कुछ थे, अतः उनका श्री कृष्ण को मनभावन कहना भाव व्यंजना का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

प्रश्न 3. कृष्ण  कब ब्रम्हज्ञान स्वीकार करेंगे? उध्दव प्रसंग के आधार पर उत्तर लिखिए। 

उत्तर - श्री कृष्ण उद्धव जी से कहते हैं कि आप ब्रज में जाकर गोपियों की विरह व्यथा को अपने निर्गुण ब्रम्ह के उपदेश द्वारा शांत कर देंगे तब मैं यह स्वीकार कर लूँगा कि निर्गुण ब्रम्ह का उपदेश आनंद निधि है। प्रेम के स्थान पर ज्ञान को मान्यता देंगे तब मैं चंद्रमुखी गोपियों के ध्यान को अपने नेत्रों से अविरल प्रवाहित होने वाले आंसुओं से धो दूँगा। ब्रम्ह की ज्योति को जला दूंगा तथा ज्ञान पर भक्ति की विजय को स्वीकार कर लूँगा। 

प्रश्न 4. "प्रेम परयो चपल चुचाइ पुतरीन सौं" इसके लक्षणा सौंदर्य को स्पष्ट कीजिये। 

उत्तर - उद्धव जी ब्रम्ह ज्ञान  उपदेश लेकर गोकुल आए। वहाँ पर श्री कृष्ण का स्मरण होने पर गोपियों की आँखों से अविरल प्रवाहित होने वाले अश्रुओं को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उनके चंचल नेत्रों से प्रेम टपकने लगा हो। यह प्रेम भक्त और भगवान के बीच होता है। जिसमें दोनों पक्षों को समान रूप से विरहानुभूति होती है, यही इस पंक्ति   लक्षणा सौंदर्य है। 

प्रश्न 5. "एक मनमोहन तो बसि कै उजारयो मोहि हिय में अनेक मनमोहन बसावों ना" का भाव स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर - एक मनमोहन ने कृष्ण ने तो हमारे ह्रदय में बस कर हमें उजाड़ दिया है। अब हम अनेक ब्रम्ह रूपी मनमोहन को अपने ह्रदय में बसाना नहीं चाहते अर्थात हम श्री कृष्ण के मनमोहक सौंदर्य को छोड़कर किसी अन्य को अपने हृदय में बसाना नहीं चाहती। 

प्रश्न 6. "उद्धव प्रेम की रीति-नीति नहीं जानते, गोपियों के विचार लिखिए। 

उत्तर - गोपियों के विचार में उद्धव निर्गुण ब्रम्ह का उपदेश देने के लिए ब्रज पधारे। वे उनकी प्रतिज्ञा को तोड़ना चाहते हैं। हम प्रेम के विषय में अकुशल हैं नासमझ हैं। हम अपना भला नहीं जानते हैं। उद्धव ने हमेशा नीरस उपदेश की बातें की हैं वे प्रेम की रीति और नियमों के विषय में नहीं जानते हैं, अतः वे हमारा दिल दुखाने वाली तथा श्रीकृष्ण का स्मरण नहीं करने की बातें करते हैं। 

प्रश्न 7. श्री कृष्ण जी के संदेश व्यक्त करने में उत्पन्न अनुभाव का वर्णन कीजिए। 

उत्तर - श्री कृष्ण; उद्धव जी को, गोपियों को निर्गुण ब्रम्ह का उपदेश देने भेजते हैं। संदेश देते हुए उनका कंठ अवरूद्ध हो जाता है, आँखे भर आती हैं, अपने ह्रदय के उदगार वह कुछ आँखों से तो कुछ संकेतों से और शेष हिचकियों के मध्य कह पातें हैं। 

प्रश्न 8. कृष्ण जी उद्धव से गोकुल जाने का आग्रह क्यों कर रहें हैं। 

उत्तर - श्री कृष्ण जी उद्धव से गोकुल जाने के लिए आग्रह इसलिए कर रहे हैं कि वे गोपियों की सुधि लेना चाहते हैं तथा अपना प्रेम संदेश भी भेजना चाहते हैं। कृष्ण उद्धव के ज्ञान गर्व को दूर करना चाहते हैं, साथ ही प्रेम तथा भक्ति की श्रेष्ठता प्रतिपादित करना चाहते हैं। 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. गोकुल से लौटते उद्धव की दशा का वर्णन करें। 

उत्तर - गोकुल से लौटते हुए उद्धव गोपियों के श्री कृष्ण के प्रति प्रेममद में सराबोर है। उनके कदम शराबी की भाँति लड़खड़ा रहे हैं। अंग शिथिल हो गए हैं। नेत्र थक गए हैं, उद्धव इस प्रकार से थके हुए, चकित से चले आ रहे हैं, मानों वे किसी बात को भूल गए हैं, उसे स्मरण करने का प्रयास कर रहे हैं। वे गोपियों के द्वारा दी गई बाँसुरी और माता यशोदा के द्वारा दिए गए मक्खन को अपने दोनों हाथों में पकड़े हुए हैं। उनके प्रति आदर भाव है, अतः उन वस्तुओं को पृथ्वी पर नहीं रख रहे हैं। अविरल प्रवाहित होने वाले अश्रुओं को अपने कुर्ते की बाहों से पोंछ लेते हैं। यह ईश भक्ति की तल्लीनता एवं आत्मविभोर होने की स्थिति है, जिसका अनुभव उद्धव को हो रहा है। 

प्रश्न 2. गोपियाँ उद्धव के निर्गुण ब्रम्ह की उपासना करने में क्यों असमर्थ हैं?

अथवा 

गोपियाँ उद्धव के निगुण ब्रम्ह की उपासना क्यों अस्वीकार करती हैं?

उत्तर - मथुरा से गोकुल उध्दव श्री कृष्ण का संदेश देने तथा निर्गुण ब्रम्ह का उपदेश देने के लिए आते हैं। उनके ज्ञान के उदेश को गोपियाँ अस्वीकार करते हुए तर्क देती हैं कि आप हमें ज्ञान के उपदेश देने आये हैं फिर आप विरह की बातें क्यों करते हैं। हम तो श्री कृष्ण के अनुराग में आसक्त हैं, अतः आपकी शिक्षा का हमारे लिए कोई महत्व नहीं है। आपक उपदेश प्रेम मार्ग में बाधक हैं। हमारा मन रूपी दर्पण तो पहले ही श्री कृष्ण के बिना टूट कर टुकड़े-टुकड़े हो गया है उसमें अनेक कृष्ण दिखाई दे रहें हैं। अब कठोर वचन रूपी बाण मत चलाइए, क्योंकि हमारी स्थिति तो मनमोहन ही जान सकते हैं। इस प्रकार के वचन कह कर गोपियाँ उद्धव के निर्गुण ब्रम्ह की उपासना को अस्वीकार कर देती हैं। 

प्रश्न 3. रत्नाकर जी की काव्यगत विशेषताएं बताइये?

उत्तर - रत्नाकर जी के काव्य में भक्ति और रीति शैली का सुंदर समन्वय हुआ है। मानवीय विभाव का चित्रण उन्होंने बड़ी कुशलता से किया है। उत्सुकता, प्रेम, करुणा, संचारी भावों के द्वारा सजीव चित्रण किया है। ब्रजभाषा का लालित्य आपके काव्य की विशेषता है। परम्परागत मूल्यों के साथ ही लाक्षणिकता के साथ अलंकारों का प्रयोग और नवीनता आपके काव्य की प्रमुख विशेषता है। 

इस प्रकार से यहाँ पर उद्धव प्रसंग का से जुड़ी हुई जीतने भी प्रश्न उत्तर हैं वो सब पुरे होते हैं इसके अलावा और भी प्रश्न हों यदी आपके मन में तो हमें सम्पर्क करके पूछ सकते हैं हम रिप्लाई करने की कोशिश जरूर करेंगे। 

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