छत्तीसगढ़ का प्रयाग किसे कहते हैं - rajim chhattisgarh

राजिम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इसके दक्षिण-पूर्व में 45 किमी दूर स्थित है। राजिम का प्राचीन नाम कमलक्षेत्र था। यहां मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। यहाँ कई मंदिरों का समूह हैं जिसमे प्रमुख कालेश्वर महादेव, राजीव लोचन और राजेश्वर मंदिर शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ का प्रयाग किसे कहते हैं

राजिम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सुंदर प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। तीन नदियों महानदी, पैरी और सोंदूर का पवित्र संगम हैं। जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। इसलिए राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है।

हर साल देश भर से लोग यहाँ के कुंभ मेले में पहुंचते हैं जो माघ पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है। राजिम रायपुर से 45 किमी दूर है। वहां पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में जाना होगा। वहाँ से एक बाएँ मोड़ से राजिम तक एक सड़क जाती है।

छत्तीसगढ़ का प्रयाग किसे कहते हैं - rajim chhattisgarh

निकटवर्ती शहर महासमुंद है जो राष्ट्रीय राजमार्ग 6 और राष्ट्रीय राजमार्ग 353 से 25 किमी दूर है और जिसका रायपुर-विजयनगरम रेलवे लाइन में एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर हवाई अड्डा है और निकटतम रेलवे स्टेशन नवापारा रेलवे स्टेशन है।

पर्यटन स्थल

राजिम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ के प्रयाग में नदियों के संगम के बीचो बीच राजीव लोचन मंदिर यहाँ की मुख्य बिंदु हैं। राजीव लोचन विष्णु मंदिर राजिम में स्थित एक प्राचीन विष्णु मंदिर है। मंदिर के निर्माण राजा विलासतुंगा के शासन काल में 7 वीं शताब्दी में हुआ था। विलासतुंगा शायद नल वंश की एक शाखा से संबंधित हैं।

मंदिर की संरचना बारह स्तंभों द्वारा किया गया है। जिसमें पत्थर की नक्काशी बहुत ही अद्भुत हैं। जिसमे पौराणिक कथाओं के विभिन्न देवताओं को दर्शाया गया हैं। मंदिर को देखने के लिए दुनिया भर से भक्त आते है और भगवान विष्णु की दर्शन करते हैं।

काले पत्थर से उकेरी गई बोधि वृक्ष के नीचे ध्यानस्थ मुद्रा में भगवान बुद्ध की मूर्ति भी शहर में लोकप्रिय है। भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों जैसे वामन और नरसिंह को समर्पित अन्य मंदिर राजीव लोचन मंदिर के निकट हैं। कुलेश्वर महादेव मंदिर शहर में इटावा में स्थित एक प्रसिद्ध मदिर है। घाटोरिया महाकाली मंदिर महानदी के तट पर स्थित है।

भगवान पार्श्वनाथ मंदिर यह मंदिर 15 साल पहले बनाया गया है जब कुछ लोगों को 2000 साल पुरानी पार्श्वनाथ भगवान की मूर्ति मिली थी। राजिम कुंभ हर साल फरवरी के मध्य से मार्च के दौरान 15 दिनों की अवधि में मनाया जाता है। राजिम कुंभ पूरे भारत और उसके बाहर से हजारों नागा साधुओं, संतों, महात्माओं, ऋषियों, मुनियों और मार्गदर्शक गुरुओं को आकर्षित करता है। राजिम कुंभ तीन नदियों के संगम पर आयोजित किया जाता है, जिसे राजिम में त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है।

इसी उत्सव के अंतर्गत 16 फरवरी से 1 मार्च के बीच एक कार्यक्रम राजिम लोचन महोत्सव का आयोजन किया जाता है। मेले में आयोजित विभिन्न संगीत और नृत्य प्रदर्शन राजिम की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं।

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