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सर्वनाम की परिभाषा - सर्वनाम के भेद

 13.  सर्वनाम : Pronoun


सर्वनाम की परिभाषा  sarvanam ki paribhasha Pronoun in Hindi sarvanam ke bhed
sarvanam ki paribhasha

आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग में आज हम जानने वाले हैं हिंदी व्याकरण के सर्वनाम के बारे में पिछले पोस्ट में हमने आपके साथ शेयर किया था। इसी हिंदी ग्रामर के कारक के बारे में जानकारी यदि आपने वह पोस्ट नही पढा है तो एक बार पढ़ के जरूर देखें और हमेशा अपडेटेड रहने के लिए ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें।चलिए शुरु करते हैं सर्वनाम की परिभाषा से 

सर्वनाम की परिभाषा 

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं उन्हें सर्वनाम कहते हैं। 

आपके लिए कुछ वाक्य लिखें हैं इन्हें ध्यान से पढ़े और समझने का प्रयास करते हैं चलिए 

  1. राधा माता-पिता के साथ स्टेशन पर आई है। 
  2. वह अपनी नानी की गाड़ी के आने की प्रतीक्षा कर रही है। 
  3. वह पास की पुस्तक की दुकान से कुछ खरीदना चाहती है। 
  4. उसने पिता को अपनी इच्छा बताई। 
  5. उन्होंने उसकी रुचि जाननी चाही। 
  6. वे उसे साथ लेकर पुस्तक विक्रेता के पास गए। 

इन वाक्यों में राधा (संज्ञा) शब्द के स्थान पर 'वह', 'उसने', 'उन्होंने', 'वे', शब्दों का प्रयोग किया गया है, इन्हें सर्वनाम शब्द कहते हैं।

सर्वनाम शब्द दो शब्दों के सार्थक मेल से बना है- 

सर्व (सबका)+नाम अर्थात सबका नाम। 

सर्वनाम के भेद

सर्वनाम के छः भेद होते हैं - 

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
  6. निजवाचक सर्वनाम 

1. पुरुषवाचक सर्वनाम - बोलने वाला अपने लिए, सुनने वालों के लिए तथा किसी अन्य व्यक्ति के लिए जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग करता है, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे- मैं, मेरा, हम, हमारा, हमें, मुझे, तुम, तुम्हारा, मुझे, वह, उसका, वे, उनका आदि। 

  1. मुझे भोजन करना है। 
  2. तुम कहाँ हो, मैं भी आती हूँ। 

पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं-

  1. उत्तम पुरुष 
  2. मध्यम पुरुष 
  3. अन्य पुरुष 

1. उत्तम पुरुष - बोलते समय अपने लिए या अपने नाम के स्थान पर जिन शब्दों का प्रयोग होता है, उन्हें उत्तम पुरुष सर्वनाम कहते हैं; जैसे - हम, मैं, हमको, हमारा, मुझको, मेरे लिए आदि। 

2. मध्यम पुरुष - वक्ता के द्वारा श्रोता के लिए या श्रोता के नाम के स्थान पर जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें मध्यम पुरुष सर्वनाम कहते हैं; जैसे - तुम, तू, आपका, आप, आपने, तुझको, तुझे, तुमको आदि। 

3. अन्य पुरुष - वक्ता तथा श्रोता की बातचीत के मध्य जिस अन्य तीसरे व्यक्ति या वस्तु का सन्दर्भ दिया जाता है, उसके लिए जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें अन्य पुरुष सर्वनाम कहते हैं; जैसे - वह, वे, मोहन, रमेश आदि। 

2. निश्चयवाचक सर्वनाम - वे सर्वनाम शब्द जो किसी पास या दूर की वस्तु की ओर संकेत करते हैं और उसका निश्चयपूर्वक बोध कराते हैं, उन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम कहा जाता है। समीप की वस्तु के लिए यह तथा दूरी पर स्थीत वस्तुओं के लिए 'वह' शब्द का प्रयोग किया जाता है;जैसे- 

  1. वह कहां जा रही है?
  2. यह घर किसका है?

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम - जिन सर्वनाम शब्दो से अनिश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध होता है; उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे -

दाल में कुछ गिरा है। 

दरवाजे पर कोई खड़ा है। 

4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम - वाक्य में प्रयुक्त किए गए दूसरे संज्ञा या सर्वनाम के साथ सम्बन्ध प्रकट करने के लिए जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे -

  1. वह लड़का पकड़ा गया, जो यहाँ कल आया था। 
  2. जो झूट बोलता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। 

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम - जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग प्रश्न करने के लिए किया जाता है, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे -

  1. तुम्हारे माता-पिता का नाम क्या है?
  2. यह पुस्तक किसकी है?

6. निजवाचक सर्वनाम - निज का अर्थ होता है - 'अपना।' जिन सर्वनामों का प्रयोग स्वयं के लिए किया जाता है, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे -

  1. मैं अपना कार्य स्वयं करता हूँ। 
  2. वह पुस्तक मेरी है। 

सर्वनामों की रूप रचना- 

मैं (उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचन बहुवचन
कर्ता मैं, मैंने हम, हमने
कर्म मुझ, मुझको हमें, हमको
करण मेरे द्वारा, मुझसे हमारे द्वारा, हमसे
सम्प्रदान मेरे लिए, मुझे, मुझको हमारे लिए, हमें, हमको
अपादान मुझसे (पृथक होना) हमसे (पृथक होना)
सम्बन्ध मेरा, मेरे, मेरी हमारा, हमारे, हमारी
अधिकरण मुझ पर, मुझमें हम पर, हममें

तू (मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारक एकवचन बहुवचन
कर्ता तू, तूने तुम, तुमने
कर्म तुझे, तुझको तुम्हें, तुमको
करण तुझसे, तेरे द्वारा तुमसे, तुम्हारे द्वारा
सम्प्रदान तुझको, तेरे लिए तुमको, तुम्हारे लिए
अपादान तुझसे तुमसे
सम्बन्ध तेरा, तेरी, तेरे तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे
अधिकरण तुझ पर, तुझमें तुम पर, तुममें

वह (अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तावह, उसनेवे, उन्होंने
कर्मउसे, उसकोउन्हें, उनको
करण उससे, उसके द्वाराउनसे, उनके द्वारा
सम्प्रदानउसको, उसके लिएउनको, उनके लिए
अपादानउससेउनसे
सम्बन्धउसका, उसकी, उसकेउनका, उनकी, उनके
अधिकरणउसमें, उस परउनमें, उन पर

यह (निश्चयवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तायह, इसनेये, इन्होंने
कर्मइसे, इसकोइन्हें, इनको
करणइससे, इसके द्वाराइनसे, इनके द्वारा
समप्रदानइसे, इसके लिए, इसकोइन्हें, इनके लिए, इनको
अपादानइससेइनसे
सम्बन्धइसका, इससे, इसकीइनका, इनके, इनकी
अधिकरणइस पर, इसमेंइन पर, इनमें

जो (सम्बन्धवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताजो, जिसनेजो, जिन्होंने
कर्मजिसे, जिसको जिन्हें, जिनको
करणजिससे, जिसके द्वाराजिनसे, जिनके द्वारा
सम्प्रदानजिसको, जिसके लिएजिनको, जिनके लिए
अपादान जिससेजिनसे
सम्बन्ध जिसका, जिसकी, जिसकेजिनका, जिनकी, जिनके
अधिकरणजिसमें, जिस परजिनमे, जिन पर

कौन (प्रश्नवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ता कौन, किसनेकौन,किन्होंने
कर्म किसे, किसकेकिन्हें, किनके
करण किससे, किसके द्वाराकिनसे, किनके द्वारा
सम्प्रदानकिसे, किसके लिए, किसकोकिन्हें, किनके लिए, किनक
अपादानकिससे किनसे
सम्बन्धकिस का, किसकेकिनके, किनका
अधिकरणकिसमें, किस पर किनमें, किन पर

कोई (अनिश्चयवाचक सर्वनाम)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्ता कोई, किसी ने कोई, किन्हीं ने
कर्म किसी को किन्हीं को
करण किसी से, किसी के द्वारा किन्ही से, किन्ही के द्वारा
सम्प्रदान किसी को, िसी के लिए किन्ही को, किहीं के लिए
अपादान किसी से किन्हीं से
सम्बन्ध किसी का, किसी में, किसी को कीन्हीं का, किन्हीं में, किन्हीं को
अधिकरणकिसी में, किसी पर किन्हीं में, किन्हीं पर

महत्वपूर्ण बिंदु 

* संज्ञा के स्थान पर जो शब्द प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।
* सर्वनाम वाले वाक्यों में लिंग का पता उसकी क्रिया से लगता है।
* वचन और सम्बन्ध के कारण सर्वनाम का रूप परिवर्तन होता है|

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