ads

भ्रमर गीत सार पद 28

Bhramargeet sar ramchandra shukla

हम तो दुहूँ भॉँति फल पायो।
को ब्रजनाथ मिलै तो नीको , नातरु जग जस गायो।।
कहँ बै गोकुल की गोपी सब बरनहीन लघुजाती।
कहँ बै कमला के स्वामी संग मिल बैठीं इक पाँती।।
निगमध्यान मुनिञान अगोचर , ते भए घोषनिवासी।
ता ऊपर अब साँच कहो धौ मुक्ति कौन की दासी ?
जोग-कथा, पा लोगों ऊधो , ना कहु बारंबार।
सूर स्याम तजि और भजै जो ताकी जननी छार।।


Related Post

भ्रमरगीत के पात्र उद्धव कौन थे लिखिए

भ्रमरगीत में श्रीकृष्ण को क्या कहा गया है

Subscribe Our Newsletter