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भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 64

bhramargeet_surdas_pad_64_vyakhya भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 64 की व्याख्या

निर्गुन कौन देस को बासी ?
मधुकर ! हँसि समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हाँसी।।
को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि , को दासी ?
कैसो बरन, भेस है कैसो केहि रस कै अभिलासी।।
पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे ! कहैगो गाँसी।
सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबै मति नासी।।


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