ads

भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 62

भ्रमर गीत सार - सूरदास पद क्रमांक 62 की व्याख्या - bhramargeet sar ramchandra shukla

काहे को रोकत मारग सूधो ?
सुनहु मधुप ! निर्गुन-कंटक तें राजपंथ क्यों रुधो ?
कै तुम सिखै पाठए कुब्जा, कै कही स्मामधन जू धौं ?
बेद पुरान सुमृति सब ढूँढ़ौ जुवतिन जोग कहूँ घौं ?
ताको कहा परेखो कीजै जानत छाछ न दूधौ। 
सूर मूर अक्रूर गए लै ब्याज निबेररत ऊधौ।।


Related Post

भ्रमरगीत के पात्र उद्धव कौन थे लिखिए

भ्रमरगीत में श्रीकृष्ण को क्या कहा गया है

Subscribe Our Newsletter