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भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 56

bhramargeet surdas pad 56

याकी सीख सुनै ब्रज को, रे ?
जाकी रहनि कहनि अनमिल, अलि, कहत समुझि अति थोरे।।
आपुन पद-मकरंद सुधारस, हृदय रहत नित बोर। 
हमसों कहत बिरस समझौ, है गगन कूप खनि खोरे।।
घान को गाँव पयार ते जानौ ज्ञान विषयरस भोरे। 
सूर दो बहुत कहे न रहै रस गूलर को फल फोरे।।


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