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भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 55

bhramargeet surdas

जनि चालो, अलि, बात पराई। 
ना कोउ कहै सुनै या ब्रज में नइ कीरति सब जाति हिंराई।।
बूझैं समाचार मुख ऊधो कुल की सब आरति बिसराई। 
भले संग बसि भई भली मति, भले मेल पहिचान कराई।।
सुंदर कथा कटुक सी लागति उपजल उर उपदेश खराई। 
उलटी नाव सूर के प्रभु को बहे जात माँगत उतराई।।


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