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भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 52

bhramargeet-surdas-52

हमारे हरि हारिल की लकरी। 
मन बच क्रम नंदनंदन सो उर यह दृढ़ करि पकरी।।
जागत, सोबत, सपने सौंतुख कान्ह-कान्ह जक री। 
सुनतहि जोग लगत ऐसो अलि! ज्यों करूई ककरी।।
सोई व्याधि हमें लै आए देखी सुनी न करी। 
यह तौ सूर तिन्हैं लै दीजै जिनके मन चकरी।।52।।


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