अभिभावकों को अपने बच्चो की उच्च शिक्षा में भागीदार क्यों होना चाहिए

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है खिलावन और पढ़ रहे हैं educational blog rexgin.in जिस पर हम शिक्षा से ही जुड़े विषयों पर बात करते हैं।

जब मैं एक आर्टिकल पढ़ तो मुझे एक बड़ा ही रोचक प्रश्न मिला जिसका उत्तर मुझे आपको देना ही पड़ेगा क्योंकि आपके जैसे और भी कई लोगों का यही प्रश्न होगा और जिसका जवाब वो ढूंढ रहे होंगे तो चलिए मैं आपको बता देता हूँ कि वो प्रश्न क्या था?

अभिभावकों को अपने बच्चो की उच्च शिक्षा में भागीदार होना चाहिए कि नहीं?

तो जैसे कि हम सभी को पता है कि निम्न शिक्षा के बाद ही उच्च शिक्षा आरम्भ होती है। और निम्न शिक्षा में अभिभावक पूर्ण रूप से अपने बच्चों की शिक्षा में भागीदारी निभाते हैं।

जो कि उनके लिए और उस बच्चे के लिए सही साबित होता है। क्योंकि बच्चा थोड़ा सा नासमझ रहता है और उसकी उम्र भी कम रहती है। अब बात आती है उच्च शिक्षा की तो बच्चा उस समय थोड़ा समझदार या कहें उसमें सही गलत को पहचानने की समझ आ गई होती है।

लेकिन फिर भी उसे पूरी तरह यह नही पता होता है कि वह सही रास्ते पर है या नही तो ऐसे में कभी कभी जब जरूरत पड़े उसकी शिक्षा में कोई भी परेशानी आये तो अभिभावकों को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।

तभी वह बच्चा आगे चलके और अच्छे से पढाई कर सकता है। अभिभावकों को हमारे भारत की बात करें तो हमेशा चिंता लगी रहती है। Abhibhavako ko apne bachchon ki uchch shiksha me bhagidar hona chahiye ki nahi का उत्तर आपको मिल गया होगा।

Conclusion

अभिभावकों को अपने बच्चो की उच्च शिक्षा में भागीदार होना चाहिए कि नहीं यह हमारे बच्चों के ऊपर निर्भर करता है कि हम उन्हें सहयोग करें या नही उन्हें देख कर हम अभिभावकों को समझना चाहिए।
धन्यवाद अन्य जानकारियां

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