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भ्रमर गीत सार : सूरदास पद क्रमांक 7

bhramar geet sar । भ्रमर गीत सार सूरदास के पद


उध्दव ! यह मन निश्चय जानो।
मन क्रम बच मैं तुम्हें पठावत ब्रज को तुरत पलानों।
पूरन ब्रम्ह, सकल अबिनासी ताके तुम हौ ज्ञाता।
रेख न रूप, जाति, कुल नाहीं जाके नहिं पितु माता।।
यह मत दै गोपिन कहँ आवहु बिनह-नदी में भासति।
सूर तुरत यह जसस्य कहौ तुम ब्रम्ह बिना नहिं आसति।।7।।


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