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भ्रमर गीत सार : सूरदास पद क्रमांक 3

भ्रमर गीत सार : सूरदास पद क्रमांक 3 सप्रसंग व्याख्या

तबहिं उपंगसुत आय गए। 
सखा सखा कछु अंतर नाही भरि-भरि अंक लए।। 
अति सुंदर तन स्याम सरीखो देखत हरि पछताने। 
एसे को वैसी बुधि होती ब्रज पठवै तब आने।। 
या आगे रस-काव्य प्रकासे जोग-वचन प्रगटावै। 
सुर ज्ञान दृढ़ याके हिरदय जुवतिन जोग सिखावै।।


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