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भ्रमर गीत सार : सूरदास पद क्रमांक 2

कहियो नंद कठोर भए।
हम दोउ बीरै डारि पर घरै मानो थाती सौंपि गए। 
तनक-तनक तैं पालि बड़े किए बहुतै सुख दिखराए। 
गोचारन को चलत हमारे पीछै कोसक धाए।। 
ये बसुदेव देवकी हमसों कहत आपने जाए। 
बहुरि बिधाता जसुमतिजू के हमहिं न गोद खिलाए।। 
कौन काज यह राज, नगर को सब सुख सों सुख पाए ?
सूरदास ब्रज समाधान करूं आंजू काल्हि हम आए।। 

Bhramar-geet-sar-surdas-pad-2-vyakhya


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