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भ्रमर गीत सार : सूरदास पद 10

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नीके रहियो जसुमति मैया। 
आवैंगे दिन चारि पांच में हम हलधर दोउ भैया।। 
जा दिन तें हम तुमतें बिछुरे काहु न कहयों 'कन्हैया'। 
कबहुँ प्रात न कियो कलेवा, साँझ न पीन्ही धैया।। 
बंसी बेनु संभारि राखियो और अबेर सबेरो। 
मति लै जाय चुराय राधिका कछुक खिलौनों मेरो। 
कहियो जाय नंदबाबा सों निष्ट बिठुर जिय कीन्हों। 
सूर स्याम पहुँचाय मधुपुरी बहुरि सँदेस न लीन्हों।।10।।


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