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भ्रमर-गीत-सार : सूरदास पद क्रमांक 1

पहिले करि परनाम नंद सो समाचार सब दीजो। 
औ वहां वृषभानु गोप सो जाय सकल सुधि लीजो।। 
श्रीदाम आदिक सब ग्वालन मेरे हुतो भेंटियो। 
सुख-सन्देस सुनाय हमारी गोपिन को दुख मेटियो।। 
मंत्री एक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो। 
सावधान है मेरे हुतो ताही माथ नावाइयो।। 
सुंदर परम् किसोर बयक्रम चंचल नयन बिसाल। 
कर मुरली सिर मोरपंख पीताम्बर उर बनमाल।। 
जनि डरियो तुम सघन बनन में ब्रजदेवी रखवार। 
वृंदावन सो बसत निरन्तर कबहूँ न होत नियार।। 
उध्दव प्रति सब कहीं स्यामजू अपने मन की प्रीति। 
सुन्दरदास किरण करि पठए यहै सफल ब्रजरीति।। 

Bhramar-geet-surdas-pad-1-vyakhya

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