अंतरिक्ष का अर्थ क्या है - space in hindi

अंतरिक्ष को जानने की उत्सुकता पहले से रही है इसलिए रात के समय लोग तारो को देख कर सोचते थे की बहार क्या होगा। यही जानने की इच्छा ने मानव को अंतरिक्ष की ओर जाने पर मजबूर किया। आज मनुष्य को पहले के मुकाबले अंतरिक्ष के बारे में बहुत सी जानकारी मालूम है। पृथ्वी के बाहर ग्रह और तारे के बारे में अध्ययन किया जा रहा है। अंतरिक्ष के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन मैं असल में अंतरिक्ष क्या है इसके बारे में बनाते वाला हूँ।

अंतरिक्ष क्या है 

ब्रम्हांड में शून्य है उसे अंतरिक्ष कहा जाता है। या किसी पिंडों से शुरू होकर अंनत है। सामान्य भाषा में कहा जाये तो खाली जगह को अंतरिक्ष कहा जाता है। वायुमंडल भी अंतरिक्ष का भाग होता है। जहा पर कुछ नहीं होता वह अंतरिक्ष का हिस्सा होता है। 

अंतरिक्ष क्या है - Rexgin
अंतरिक्ष 

अंतरिक्ष का रहस्य 

अंतरिक्ष विज्ञान के विकाश के बावजूद आज भी ऐसे रहस्य है जिसे सुलझाया नहीं गया है। जिसे समझने और जानने के लिए वैज्ञानिक लगातार अंतरिक्ष ग्रह तारे का अध्ययन कर रहे है। विश्व के प्रसिद्ध अंतरिक्ष संस्था उपग्रह की सहायता से ग्रहो और तारो का अध्ययन कर रहे है। 

आपने तो बाड़मुड़ा ट्रैंगल के बारे में सुना ही होगा। कहा जा रहा है की अंतरिक्ष में भी एक ऐसी जगह है जहा से गुजरने से अंतरिक्ष यात्रियों को अजीब लाइट दिखयी देती है और मशीन भी काम करना बंद कर देते है। 

इसके अलावा कितने ग्रह तारे है जिसके बारे में हमें मालूम नहीं है। वैज्ञानिक सदियों से जीवन की तलाश कर रहा है। ये भी रहस्य है की ब्रम्हांड में जीवन है या नहीं आज तक हमें जीवन का कही प्रमाण नहीं मिला है। लेकिन वैज्ञानिको का मत है की ब्रम्हांड में जीवन है लेकिन दुरी इतनी है की हम उससे सम्पर्क नहीं कर पा रहे है। 

नासा अंतरिक्ष अनुसन्धान केंद्र 

नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में किया गया था। यह अमेरिका की अंतरिक्ष केंद्र संस्था है जहा पर स्पेस से जुड़े अध्ययन किये जाते है। नासा ने चाँद पर मानव भेजा है हाल ही में दो एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष स्टेशन तक कम समय में पहुंचने का रिकॉड बनाया है। नासा की बात करे तो अभी अंतरिक्ष की दुनिया में पहले स्थान पर है। नासा ने कई सेटेलाइट भेजे है। जिन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी वैज्ञानिको को प्रदान किया है।

नासा ने कहा कि इसके अलावा दो और एस्टेरॉयड के रविवार 24 जुलाई 2020 को पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा। जिनका नाम नासा ने 2016 डीवाई-30 और 2020 एमई-3 नाम दिया है।

अंतरिक्ष में मानव

मानव ने हमेशा से अंतरिक्ष को नज़दीक से देखना चाहता है। इसके लिए वैज्ञानिको ने लोगो को दूसरे ग्रहो पर बसाने के लिए कार्य आरम्भ कर दिया है। जिसमे स्पेक्स एक्स ने 2024 तक लोगो को मंगल ग्रह पर बसाने की बात की है। साथ ही नासा भी इस पर योजना बना रहा है की 2030 तक लोगो को मंगल पर बसा सके।

वही भारत के इसरो ने 2021 तक मानव मिसन भेजेगा। उसके बाद आगे दूसरे ग्रहो पर बस्ती बसने के लिए प्रोग्राम बनाये जायेंगे। मानव दे तो चाँद पर अपना कदम रख लिया है अब वह मंगल ग्रह पर रखना चाहता है। देखने होगा की ये स्पेस एजेंसिया कब तक मंगल में बस्ती बसाने में सफल होगा।

अंतरिक्ष में क्या है 

मानव की हमेश से उत्सुकता रही है की धरती के बहार क्या है। वैज्ञानिको शोध से पता चला है की ब्रम्हांड में लाखो करोडो तारे है और उसके चककर लगते है ग्रह है। इसके अलावा ब्लैक होल पुच्छलतारा और कई एस्ट्रोइड है। इसके अलावा और बहुत कुछ हो सकता है। क्योकि इंसान ने अभी ब्रम्हांड के कुछ ही भाग को जान पाए है यह हमारे कल्पना से भी बड़ा हो सकता है।

अंतरिक्ष उड़ान

मानव ने अंतरिक्ष को पहले दूरबीन से निहारकर ग्रहो तारो का अध्ययन किया। 20 सदी में टेक्नोलॉजी के विकास से रॉकेट और कई उपकरण के विकास के कारण इंसान ने अंतरिक्ष में रॉकेट की सहायता से मानव निर्मित उपग्रह भेजा जिसकी सहायता से पृथ्वी के मौसम और बनावट का अध्ययन किया जा रहा है।

अंतरिक्ष पर पहले जाने वाले मानव यूरी गागरिन थे। जिन्हे 12 अप्रैल 1961 में सोवियत संघ द्वारा वोस्तोक कार्यक्रम की सहायता से स्पेस में बेजा गया था। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने 1968 में पहली बार मानव को चाँद पर भेजा था। जिसके बाद अमेरिका ने 1972 तक  8 और कार्यक्रम बनाने जिसमे इंसान को चाँद पर भेजा गया।

2015 से पहले सभी मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट को एस्ट्रोनॉट द्वारा संचालन किया जाता था लेकिन 2015 में स्वचालित अंतरिक्ष यान बनाये जाने के बाद से एस्ट्रोनॉट को और समय मिलेगा रिसर्च करने के लिए। भारत के अंतरिक्ष संस्थान इसरो ने 2024 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है।

भारतीय अंतरिक्ष संगठन इसरो 

भारत का पहला उपग्रह आर्यभट था जिसको 19 अप्रैल 1975 को रूस की सहायता से अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। भारतीय गणितज्ञ आर्यभट ने नाम पर इस उपग्रह को रखा गया था। दूसरा उपग्रह भास्कर था जिसको 1979 में स्थापित किया गया था।1980 में भारत द्वारा निर्मित यान SLV-3 की सहायता से रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया।

इसके बाद भारत के दो और रॉकेट PSLVऔर GSLV का निर्माण किया। जनवरी 2014 को भारत ने क्रायोजनिक इंजन द्वारा जीएसएलवी-डी 5 रॉकेट का निर्माण किया। भारत आज अपनी अंतरिक्ष यानो को ले जाने में सक्षम है बल्कि वे अन्य देशो के उपग्रहों को स्थापित करने में सहायता कर रहा है। 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 भेजा गया जिसने चाँद की परिक्रमा कर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र किया। उसके बाद मंगल मिशन के माध्यम से पहली ही बार में भारत ने उपग्रह को मंगल के कक्षा में स्थापित करने में सफलता पायी।

अंतरिक्ष पर जाने वाले पहला भारतीय राकेश शर्मा थे। जो वायुसेना में थे। उसे विज्ञानं में बहुत रूचि था और आकाश में उड़ना बहुत पसंद था। 1971 के युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा ने तीन एस्ट्रोनॉट के साथ उड़ान भरी। जो भारत और सोवियत संघ का एक मिशन था।

इसरो का गगन यान

यह भारत का मानव को अंतरिक्ष में भेजने का कार्यक्रम है। यह एक कैप्सूल होगा जिसमे तीन अंतरिक्ष यात्री को भेजा जायेगा। यह 3.4 टन का है। जिसने  2014 में मानव रहित उड़ान भरा था। गगन यान का निर्माण 2006 से शुरु कर दिया था। इसरो ने कहा है की 2022 के पहले इस मिशन को लांच लिया जायेगा। दिसंबर 2020 और 2021 को मानवरहित प्रक्षेपण किया जायेगा।

यह मिशन पूरी तरह से भारत द्वारा तैयार किया जा रहा है। आत्मनिर्भरत भारत की और या एक कदम है जिसमे भारत सभी उपकरण को देश में ही निर्माण कर रहा है। जिससे की दूसरे देशो पर निर्भरता कम किया जा सके।

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र

यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का प्रक्षेपण केंद्र है यही से अंतरिक्ष में उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा जाता है। यह आन्ध्रप्रदेश के श्रीहरि कोटा में स्थित है, 2002 में वैज्ञानिक सतीश धवन के मरणोपरांत सम्मान में इसे सतीश धवन के नाम से पुकारा जाने लगा। 


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