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पर्यावरण का महत्व - paryavaran ka mahatva

पर्यावरण का महत्व - environment in Hindi

पर्यावरण इस धरती पर रहने वाली सभी जीवित चीजें पर्यावरण के अंतर्गत आती हैं। चाहे वे जमीन पर रहें या पानी पर वे पर्यावरण का हिस्सा हैं। पर्यावरण में हवा, पानी, सूरज की रोशनी, पौधे, जानवर आदि शामिल हैं। पर्यावरण हमारे चारो ओर व्याप्त वातावरण को कहा जाता है। जो हमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।

पृथ्वी हमारे सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन पाया जाता है। पर्यावरण जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते है। जो सभी जीवो को सुरक्षा प्रदान करता है। पर्यावरण क्या है इस पर एक ऑलरेडी पोस्ट लिख गया है इस पोस्ट में पर्यावरण का महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। 

मानव ने अपने फायदे के लिए पर्यावरण को बहुत नुकशान पहुंचाया है। जिसके परिणाम स्वरुप आज कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है। जिसमे ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण शामिल है। इसके अलावा कई गंभीर बीमारिया जन्म ले रही है। लेकिन प्रकृति ने हमें कई उपहार दिए है जिसके कारण मानव आज इस धरती पर जीवित रह पाया हैं। 

पर्यावरण का महत्व - Importance of environment

हम वास्तव में पर्यावरण के वास्तविक मूल्य को नहीं समझते हैं। लेकिन हम इसके कुछ महत्व का अनुमान लगा सकते हैं। जो हमें इसके महत्व को समझने में मदद कर सकते हैं। पर्यावरण में जीवित जीवों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखता है। जो पृथ्वी पर जीवन को बचाये रखता हैं। यह भोजन, आवास, हवा प्रदान करता है। मानव की सभी जरूरतों को पूरा करता है चाहे वह बड़ा हो या छोटा।

इसके अलावा, मनुष्य का संपूर्ण जीवन पर्यावरणीय कारकों पर पूरी तरह निर्भर करता है। पृथ्वी पर विभिन्न जीवन चक्रों को बनाए रखने में भी मदद करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात, हमारा पर्यावरण प्राकृतिक सौंदर्य का स्रोत है और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है।

लाखों वर्षों से, प्रकृति हमें एक बेहतर जीवन जीने के लिए कपड़े, भोजन, प्रकाश, हवा, झरने और जंगलों तक सब कुछ प्रदान करती है। पारिस्थितिकी तंत्र हमें कृषि और फसलों को उगाने में मदद करता है। हमारे अपशिष्ट उत्पादों को कृषि के लिए खाद के रूप में अवशोषित और विघटित किया गया था। 

पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पृथ्वी विभिन्न जीवित प्रजातियों का घर है और हम सभी भोजन, हवा, पानी और अन्य जरूरतों के लिए पर्यावरण पर निर्भर हैं। इसलिए हम सभी का यह कर्तव्य है की पर्यावरण की रक्षा करे है।

मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण पर प्रभाव

विभिन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियाँ हैं जो सीधे पर्यावरणीय आपदाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिसके कारण अम्ल वर्षा, महासागरों का अम्लीकरण, जलवायु में परिवर्तन, ओजोन परत का ह्रास, ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण आदि समस्याएं होती है।

आज उच्च जनसंख्या और इतने सारे लोगों का दबाव प्रकृति पर भारी पड़ रहा है और बहुत अधिक तनाव पैदा कर रहा है। दुनिया भर में जीवित प्राणियों की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। हमारे ग्रह का जैव तंत्र, जिसमें रासायनिक और भौतिक वातावरण दोनों शामिल हैं, लगातार बदल रहा है। 

जिससे हमारी दुनिया धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है। पहले मनुष्य पर्यावरण को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे और अगर करते भी थे तो वह जमीन के एक छोटे से क्षेत्र पर होते थे। हालाँकि, आज मानव आबादी विभिन्न तकनीकी प्रगति, ऑटोमोबाइल का विस्तार है। इस प्रकार वे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र  को पूरी तरह से व्यवधान और असंतुलन रहा हैं। 

दीर्घकालिक परिणामों को समझे बिना, लोग लगातार  ऐसे तकनीक का उपयोग कर रहे हैं जो हमारी प्रकृति पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

वर्षों से, लोग विभिन्न बीमारियों, महामारी, अकाल, दुर्घटनाओं और वेक्टर जनित रोगों के बारे में चिंतित थे। पालतू जानवरों ने लोगों के बीच नए संक्रामक विकार पैदा किए, लोगों के बीच बेहतर स्वास्थ्य के लिए नई चुनौतियां पैदा कीं।

प्रौद्योगिकियों की प्रगति और उद्योगों के विकास के साथ, विभिन्न जल जनित और अन्य बीमारियों को रोका गया। हालांकि, यह हानिकारक गैसों, रसायनों और निर्माण कचरे का उपयोग करके पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। 

व्यापार और वाणिज्य, उद्योग और अन्य कारखानों ने मनुष्यों के लिए कृषि क्षेत्र को छोड़कर तकनीकी दुनिया में कदम रखने का मार्ग प्रशस्त किया। वायु, जल और मृदा प्रदूषण पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। हानिकारक ग्रीन हाउस गैसो की अधिकता से पर्यावरण गर्म हो रहा  हैं। सुरक्षात्मक ओजोन परत नष्ट हो रही है, जिससे सूर्य की सीधी अल्ट्रा-वायलेट किरणें पृथ्वी में प्रवेश करती हैं और बर्फ पिघलने लगती हैं और जानवरों और मनुष्यों में गंभीर त्वचा रोग पैदा करती हैं।

पेड़ों की कमी, बढ़ते प्रदूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के कारण विभिन्न जानवर विलुप्त होने के कगार पर हैं। कभी ग्रामीण जिलों से शहरी क्षेत्रों में प्रवास करने वाले पक्षी अब उद्योगों के हानिकारक उत्सर्जन और इलेक्ट्रॉनिक तरंगों के कारण दिखाई नहीं देते है। प्रकृति का यह असंतुलन पृथ्वी पर लंबे समय तक चलने वाले जीवन के लिए गंभीर समस्याएं और खतरा पैदा कर रहा है।

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