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पृथ्वी का इतिहास - prithvi in hindi

जहाँ हम रहते है सौरमंडल का तीसरा और नीला ग्रह जिसे पृथ्वी और earth के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी का इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास करूँगा जो भी हमारे मन में सवाल आते है उन सबको आज इस टॉपिक में डिटेल से चर्चा करने वाला हूँ।

चलिए पहले जानते है की पृथ्वी का इतिहास क्या है और इसका जन्म कैसे हुआ। पृथ्वी मानव के पूर्व से विद्यमान था अर्थात इसकी हम कल्पना और कुछ सबूत के आधार पर पृथ्वी के इतिहास के बारे में जानने की कोशिस करेंगे।

पृथ्वी का इतिहास 

पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ और इसमें जीवन की उत्पत्ति कैसे हुयी। ये तो सत्य है किसी ने पृथ्वी को बनते हुए नहीं देखा है। फिर भी वैज्ञानिको ने इसकी परिकल्पना की है की पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ होगा। तो चलिए प्रमुख परिकल्पना को जनते है।

पृथ्वी का इतिहास

बिग बैंग थ्योरी के अनुसार अंतरिक्ष में एक डॉट में सभी तत्व समाहित थे जिसमे अचानक विस्फोट हुआ और वे फलते गए जिसमे ग्रह तारे और पिंड का निर्माण हुआ। इसका लाखो साल तक विकाश हुआ। अंतरिक्ष पर कई आकाशगंगा है और हम जहा रहते है उसे मिल्कीवे कहा जाता है और उसके अंदर कई सौरमंडल है। जिसमे से एक हमारा सौरमंडल  है। जहा आठ ग्रह और एक सूर्य है। 

विस्फोट के बाद एक धड़कता पिंड में से नौ गोले अलग हो गए जो लाखो साल तक उस पिंड की चककर लगाने लगे समय के सातह ठन्डे होने लगे। और ग्रह का जन्म हुआ। और सभी ग्रह सूर्य के चककर लगाने लगे उसकी ग्रेविटी के कारण। 

उसमे से एक ग्रह हमारी पृथ्वी बानी जिसमे आज हम निवास करते है। पृथ्वी पहले आज है वैषा नहीं था इसमें धीरे धीरे विकाश हुआ। पानी आयी फिर जीवन पनपा पृथ्वी को बनाने में लाखो साल का समय लगा है। सभी वस्तु और जिव का अंत तय होता है उसी प्रकार पृथ्वी की भी आयु आंकी गयी है। लगभग 4.543 billion years . 

पृथ्वी की सूर्य से दूरी कितनी है

सूर्य से पृथ्वी की दुरी 152.05 मिलियन किलोमीटर है।

पृथ्वी क्यों घूमती है

ब्रम्हांड में स्थित सभी वस्तुए घूमती रहती है। इसी प्रकार पृथ्वी भी अपने गुरुत्वाकर्षण के घूमती है। और हमारे सौरमंडल में स्थित सूर्य का चककर लगाती है। सूर्य में सबसे अधिक गुरुत्वाकर्षण है इसलिए सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते है। पृथ्वी ही नहीं सभी ग्रह और तारे अपनी गुरुत्वाकर्षण के कारण अपनी धुरी पर घूमते है। इसी के कारण दिन और रात होता है।

पृथ्वी किस पर टिकी है

पुरानी मान्यता है की पृथ्वी को नाग देवता ने अपने फन पर उठाया हुआ है। लेकिन यह सत्य नहीं है। पृथ्वी किसी वस्तु पर नहीं टिकी हुयी है। ये तो सूर्य के गुरुत्वाकर्षण शक्ति से बंधा हुआ है। सूर्य की गुरुत्वाकर्षण इतना है की हमारे सौरमंडल के सभी ग्रहो को सूर्य के चारो ओर घुमाता है। आसान भाषा में कहु तो सूर्य के गुरुत्वाकर्षण पर पृथ्वी टिकी हुयी है। यदि सूर्य नहीं होता होता तो पृथ्वी सीधे ब्रम्हांड में तैरती रहती।

पृथ्वी का वजन कितना है

पृथ्वी का वजन कितना है। वैसे पृथ्वी इतना बड़ा है की इसको किसी तराजू पर नापना असम्भव है। इसके वजन का अनुमान ही लगाया जा सकता है। तो वैज्ञानिको ने पृथ्वी के वजन 5.972 × 10^24 kg आँका है। 

पृथ्वी की संरचना कैसे हुई

पृथ्वी का आकार ग्लोब के समान है जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर थोड़ी चपटी है। पृथ्वी की बहरी संरचना एक सामान नहीं है कही पर्वत है कही मैदान तो कही विशाल महासागर है। पृथ्वी का अकार लगभग गोलाकार है।

पृथ्वी के आंतरिक संरचना की बात करे तो इसे तीन भोगो में बांटा गया है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना को तीन भगो में बाँटा गया हैं- ऊपरी सतह भूपर्पटी (Crust), मध्य स्तर मैंटल (mantle) और आंतरिक स्तर धात्विक क्रोड (Core)। पृथ्वी का कुल आयतन का 83 प्रतिशत भाग मैटल का है जबकि मात्र 0.5 प्रतिशत भाग ऊपरी सतह भूपर्पटी का है।

पृथ्वी का निर्माण आयरन (32.1 ), ऑक्सीजन (30.1 ), सल्फर (2.9 ), निकिल (1.8 ), कैलसियम (1.5 ), सिलिकॉन (15.1 ), मैग्नीशियम (13.9 ), और अलम्युनियम (1.4 फीसदी) से हुआ है।



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