हिंदी साहित्य के बारे में जानकारी

सभी मित्रों का एक बार फिर से स्वागत है, आज हम बात करने वाले हैं हिंदी साहित्य के इतिहास की पुनर लेखन की समस्या पर और हिंदी साहित्य के आधारभूत सामग्री एवं क्रमिक विकास का वर्णन हम यहां पर करने वाले हैं तो सबसे पहले हिंदी साहित्य के इतिहास को जानने के लिए कौन से आधारभूत सामग्री का होना आवश्यक है उसके बारे में जानते हैं। 

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन के लिए आधारभूत सामग्री हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में, इतिहास लिखने वाले विद्वानों ने जिस आधारभूत सामग्री का प्रयोग किया है। उसको दो वर्गों के अंतर्गत हमें देखने को मिलता है-

(1.) अंतर साक्षी अथवा साहित्य के परिचय ग्रंथों से प्राप्त सामग्री और 
(2.) वह एक साक्ष्य अर्थात साहित्य क्षेत्रों में उपलब्ध सामग्री से 

उपलब्ध सामग्री- रामकुमार वर्मा ने अपने हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास शिवसिंह सेंगर ग्रंथ में अंतर साक्षी के अंतर्गत निम्नलिखित ग्रंथों का उल्लेख किया है-

गोकुलनाथ कृत चौरासी वैष्णव की वार्ता 252 वैष्णव की वार्ता भक्तमाल गुरु अर्जुन देव कृत श्री गुरु ग्रंथ साहब बाबा बेनी राम बेनी माधव दास कृत गोसाई माला ध्रुव दास कृत भक्त नामावली तुलसी मानस कार तुलसी नहीं नामक व्यक्ति कृत कवि माला कालिदास त्रिवेदी कृत कालिदास हजार विकृत काव्य निर्णय बलदेव कृत कवि गिरा गिलास सुकृत कवि नामावली सुभाषित विद्वान महोदय तरंगिणी कृष्णानंद व्यास देव कृत सागर उद्भव राग कल्पद्रुम सरदार का विकृत श्रृंगार ठाकुर प्रसाद त्रिपाठी क्रश चंद्रोदय गोकुल भूख हरिश्चंद्र के सुंदरी तिलक से सिंगर सरोज प्रसाद कलाकृतियों की कविताओं का संग्रह लाल भगवान दीवान कृत शक्ति सरोवर है


भेड़ साक्षी के अंतर्गत साहित्य तर ग्रंथ शिलालेख दान पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित पत्र पंडों द्वारा संग्रहित बनसा वलियों के विवरण तथा धार्मिक तथा ऐतिहासिक महत्व के स्थान माने जाते हैं इस वर्ग में गणेश ग्रंथ निम्नलिखित हैं

ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के स्थानों में महत्वपूर्ण है

कबीर चौरा काशी अस्सी घाट काशी कबीर की समाधि बस्ती जिले में अभी नदी का टच जैसी की समाधि अमेठी तुलसी की मूर्ति राजापुर तुलसी के निवास स्थान अवशेष सोरो नरसी जी का मंदिर सोरो केशवदास का स्थान टीकमगढ़ और सागर।

उपर्युक्त आधारभूत सामग्री का जितना वस्तु का प्रयोग इतिहास लेखन कर सके हैं उतनी ही अधिक प्रमाणिकता और वैज्ञानिकता उनके ग्रंथों में दृष्टिगोचर होती है फिर भी व्यक्ति सेंस परसों रचनात्मक कल्पना एवं प्राण आधारित अनुमानों का प्रयोग साहित्य के इतिहास को स्वस्थ एवं सचिव रूप में प्रस्तुत करता है और साहित्यिक प्रवृत्तियों को सामाजिक परिपेक्ष में उभरकर स्पष्ट करता है सामाजिक अतीत जहां साहित्य को अर्थ की गरिमा और सदस्यता की दिशा प्रदान करता है वहां साहित्य भी जाती अतीत से रचनात्मक प्रेरणा लेकर वर्तमान एवं भविष्य को संवारना चलता है

हिंदी साहित्य के इतिहास प्रस्तुत करने के प्रयास कम नहीं हुए हैं सभी इतिहास ग्रंथों में चर्चित जो वर्णन अथवा गाता अनु गति का की प्रवृत्ति होती तो इतिहास के निम्नलिखित ग्रंथों में घिसे पिटे तथ्यों की पुनरावृत्ति के अतिरिक्त कोई ना कोई बात ना मिलती स्पष्ट है कि वस्तुस्थिति कुछ और है निम्नलिखित ग्रंथों में हिंदी साहित्य इतिहास के अतीत का साक्षात्कार प्रमाणिक किंतु मौलिक परिप्रेक्ष्य में कराने के विरोध प्रयास विविध प्रयास हुए हैं

गार्सा द तासी कृत इतवार ला तेरा टूर एंड वे हिंदुस्तानी हिंदुस्तानी फ्रेंच में 1840 महेश दत्त शुक्ल कृत भाषा काव्य संग्रह जीवन चरित सहित 18 सो 73 ईस्वी शिव सागर कृत शिव सिंह सरोज 18 सो 83 ईस्वी सरचार्ज 1 ग्रेड संस्कृत मॉडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान 889 बाबू श्याम सुंदर दास कृत रत्नमाला 2 भाग 1909 मिश्र बंधु विनोद 1913 मिश्र बंधु कृत हिंदी नवरत्न 1910 पंडित राम नरेश त्रिपाठी कृत कविता कौमुदी 1917 स्केच ऑफ हिंदी लिटरेचर हिस्ट्री ऑफ हिंदी लिटरेचर 1923 पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हिंदी के मुसलमान 2627 हिंदी साहित्य का इतिहास हिंदी भाषा और साहित्य हिंदी साहित्य का विकास हिंदी साहित्य का इतिहास आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास

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