Hello and Welcome My Dear Friends मैं आपका फिर से एक बार स्वागत करता हूँ मेरे ब्लॉग Rexgin.in जिस पर मैं आपसे हर रोज बातें करता हूँ। Educational Topics पर आज मैं आपके लिए खासकर उन लोगों के लिए निबन्ध लेकर आया हूँ।


जिन्हें तलास होती है महात्मा गाँधी निबन्ध की (Mahatma Gandhi Essay in Hindi) इस Post में मैने उनके ऊपर सटीक निबन्ध लिखने की कोशिश की है तो चलिए शुरू करते हैं-

परिचय, महात्मा गाँधी का जीवन, महात्मा गाँधी की विशेषताएं, महात्मा गाँधी का  प्रभाव,उपसंहार)



1. परिचय- 
  • जन्म - 2 अक्टूबर 1869 को हुआ।
  • जन्म स्थान - पोरबन्दर, काठियावाड़, गुजरात (भारत) में।
  • मृत्यु - 30 जनवरी 1848 को हुआ।
  • मृत्यु स्थान - नई दिल्ली (भारत)
  • अन्य नाम - राष्ट्रपिता, महात्मा, बापू, गांधी जी।
  • शिक्षा - यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन। 
जैसे की  आप सभी जानते हैं महात्मा गाँधी का जन्म भारत के गुजरात राज्य के पोरबन्दर नामक स्थान में 2 अक्टूबर सन 1869 को हुआ था। महात्मा गाँधी के माता का नाम पुतलीबाई था और पिता का नाम करमचन्द गांधी था। महात्मा गाँधी की माता वैश्य समुदाय से सम्बन्ध रखती थी और वहीं गाँधी के पिता सनातन धर्म के पनसारी जाती से सम्बन्ध रखते थे। महात्मा गाँधी का नाम पहले मोहन दास था फिर बाद में उनको उनके पिता के नाम के साथ जोड़कर मोहन दास करमचन्द गाँधी के नाम से जाने जाना लगा। 

2. महात्मा गाँधी का जीवन-
my dear friends महात्मागांधी का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है उन्होंने ज्यादा तकलीफ तो नहीं पाई क्योकि उनके पिता अंग्रेजों के जमाने में दीवान हुआ करते थे। तो उनका बचपन भी उतने ज्यादा तकलीफ में नहीं गुजरा था। उनके बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप Wikipedia में देख सकते है फिर हाल मैं उनके बारे में यहां मेन मेन टॉपिक को छूते हुए चला जा रहा हूँ क्योकि आपके पास भी उतना ज्यादा समय नहीं होगा मेरे पास भी नहीं है।

महात्मा गाँधी का विवाह -
महात्मा गाँधी का विवाह 13 साल के आयु पूर्ण करते ही कम उम्र में हो गया था और उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था। जिन्हें "बा" कहके भी पुकारा जाता था। उस जमाने में उनका बाल विवाह हुआ था। क्योकि वह उस राज्य में प्रचलित था। अब महात्मा गाँधी और उनकी पत्नी को एक साथ नहीं रखा जाता था उस समय यह प्रथा होती थी विवाह के बाद के पुत्र और पुत्र वधु अपने अपने घर में रहा करते थे इस कारण उन्हें यानी महात्मा गांधी को पढाई के लिए अलग देश भेजा गया उन्हें विदेश भेजने में उनके बड़े भाई का हाथ था। उन्होंने लन्दन में वकालत की डिग्री हासिल की और फिर वहां से मुम्बई के अदालत में वकालत करने के लिए गए लेकिन उनको यह काम जचा नहीं। इस प्रकार वे पेशे से वह वकील थे।

 3. महात्मा गाँधी की विशेषताएं-
महात्मा गांधी की विशेषताएं की बात की करें तो उनके विशेषता में उनका सांत व्यवहार बहुत ही बड़ी विशेषता थी। मेरे हिसाब से मैने महात्मा गाँधी के जीवन के बारे में पढा तो पाया की वाकई में उन्होंने अपने आप पर पूरा विजय प्राप्त कर लिया था।

सत्य प्रेमी - सत्यता उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है उन्होंने किसी भी प्रकार के अनर्गल बातों की ओर ध्यान नहीं दिया था। हमेशा सत्य की राह में चलने के लिए लोगों को कहते थे और खुद भी पालन करते थे ऐसा नहीं की वह सिर्फ कहते थे।

सहृदय - उनके मन में भी कोई कपट की भावना नहीं थी और वह किसी से भी रूखा व्यवहार किया करते थे। सभी से एक जैसे व्यवहार वे करते थे।

स्वक्षता प्रेमी - महात्मा गांधी के नाम पर आज स्वच्छ भारत का अभियान चलाया जा रहा है क्योकि वह बहुत ही ज्यादा स्वक्षता को ध्यान में रखते थे। और उन्होंने ही हरिजन की सुरुआत की थी। इस प्रकार से महात्मा गाँधी की अनेक विशेषताए थी जिसमें बहुत सारे का वर्णन मैने यहां पर नहीं किया है।

लेखक - महात्मागांधी ने कई सारे पत्र पत्रिकाओं का भी लेखन किया और इसके माध्यम से लोगों को जागरूक करते रहें। उनकी कुछ पुस्तके इस प्रकार हैं -

4. महात्मा गाँधी का प्रभाव
महात्मा गाँधी को पूरे भारत में ही नही बल्कि पूरे विश्व में जाना जाता है। उनके धन संपत्ति के कारण नहीं बल्कि उनके प्रेम व्यवहार के कारण, सत्य निष्ठा के कारण। भारत पर महात्मा गाँधी के व्यवहार के कारण वह बापू के  नाम से संबोधित किये गए और आज उन्हें हर कोई राष्ट्र पिता के नाम से जानता है। जहाँ एक तरफ महात्मागांधी के अच्छे प्रभाव हैं वहीं दूसरी ओर कई आलोचना भी उनके ऊपर देखने को मिलते हैं। ये आलोचनाएं उनके काम और सिद्धांतों को लेकर है।

जैसे - जुलु विद्रोह के सम्बंध में कहा जाता है कि उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था। विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों का साथ देना और उनसे डिल करना कि युद्ध में साथ देने के कारण देश को छोड़ने का फैसला अंग्रेजों द्वारा करना। खिलाफत आंदोलन जैसे सम्प्रदायिक आनफॉलन को राष्ट्रीय आंदोलन बनाना। अंग्रेजों के खिलाफ किये जाने वाले हिंसात्मक कार्य जो कि क्रांतिकारियों द्वारा किये जाते थे उनकी निंदा वह किया करते थे। इस प्रकार बहुत से ऐसे कारण भी हैं जिसके कारण महात्मागांधी की निंदा हुई थी। और भी कारण हैं जिन्हें मैं नहीं लिख रहा हूँ समय के अभाव के कारण आप इसे पढ़ सकते हैं विकिपीडिया से और जान सकते हैं इससे भी और ज्यादा जानकारी पा सकते हैं। महात्मागांधी जाती प्रथा का समर्थन समझते थे।

5. Conclusion (उपसंहार)
महात्मागांधी के द्वारा किये गए कार्य को इतने कम शब्दों में बता पाना बहुत ही कठिन कार्य है इसके लिए एक लाईन में कहा जा सकता है की " महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जो अपनी छाप पर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी छोड़ने में कामयाब रहे। "

Mahatma gandhi essay in hindi kaise likhe

Freinds ये निबन्ध मेरे द्वारा अलग अलग जगह से जानकारी जो मुझे अच्छी लगी उसे लेकर लिखा गया है आप चाहें तो इससे और भी अच्छा निबन्ध लिख सकते हैं। निबन्ध को लिखने के लिए आपको बस एक बात का ध्यान रखना है की यहाँ पर जो भी कुछ शेयर करें वह ऐसे लगना चाहिए की आपने वाकई में कहीं से इसको पढा है। निबन्ध को इस प्रकार लिखें माने जीवन्त हो और आप उसके बारे में उसके सामने बता  रहें हों।

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