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रीढ़ की हड्डी एकांकी का उद्देश्य क्या है

रीढ़ की हड्डी एकांकी के लेखक जगदीश चंद्र माथुर का जन्म सन 16 जुलाई 1917 को उत्तर प्रदेश के खुर्जा, जिला बुलंदशहर में हुआ। उन्होंने ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक लिखें हैं और उनकी प्रमुख रचनाएं भोर का तारा, ओ मेरे सपने जो एकांकी है।  

शारदिया कोणार्क, पहला राजा (नाटक), जिन्होंने जीना सीखा तथा 10 तस्वीरें जो रेखा चित्र है आदि रचनाओं को उन्होंने लिखा। जगदीश चंद्र माथुर का निधन 14 मई 1978 को हुआ।

रीढ़ की हड्डी एकांकी का उद्देश्य का निम्नलिखित उदेश्य हैं - 

  1. औरतों की दशा को सुधारना व उनको उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कराना है। 
  2. स्त्री -शिक्षा के प्रति दोहरी मानसिकता रखने वालों को बेनकाब करना।
  3. स्त्री को भी अपने विचार व्यक्त करने की आज़ादी देना।
  4. लड़कियों के विवाह में आने वाली समस्या को समाज के सामने लाना। 

रीढ़ की हड्डी नाटक

जगदीश चंद्र माथुर ने बहुत ही लोकप्रिय नाटक की रचना की है। यह रीढ़ की हड्डी नाम का नाटक जो की जगदीश चंद्र माथुर के द्वारा लिखा गया है।
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